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स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (THE NARCOTIC DRUGS AND PSYCHOTROPIC SUBSTANCES ACT, 1985) |
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क्रमांक 61 सन् 1985 (ACT NO. 61 OF 1985) |
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इस अधिनियम का नाम क्या है? |
स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) |
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स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 का क्रमांक क्या है? |
61 सन् 1985 |
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यह अधिनियम कब अधिनियमित हुआ? |
16 सितम्बर, 1985 |
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स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 का उद्देश्य क्या है? |
स्वापक ओषधियों से सम्बन्धित विधि का समेकन और संशोधन करने के लिए, स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों से सम्बन्धित संक्रियाओं के नियन्त्रण और विनियमन के लिए । स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार से प्राप्त या उसमें प्रयुक्त सम्पत्ति के समहरण का उपबन्ध करने के लिए, स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थों पर अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए तथा उससे सम्बन्धित विषयों के लिए कड़े उपबन्ध करने के लिए अधिनियम |
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धारा 1 का विषय क्या है? |
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (Short title, extent and commencement) |
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धारा 1(2) के अनुसार अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है? |
संपूर्ण भारत |
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धारा 1(2)(क) के अनुसार अधिनियम भारत के बाहर किन पर लागू होता है? |
भारत के सभी नागरिकों पर |
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धारा 1(2)(ख) के अनुसार अधिनियम किन व्यक्तियों पर लागू होता है? |
भारत में रजिस्ट्रीकृत पोतों और वायुयानों पर सभी व्यक्तियों पर, वे जहाँ भी हों |
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धारा 1(3) के अनुसार अधिनियम कब प्रवृत्त हुआ? |
14-11-1985 |
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परिभाषा खंड (Definitions) अधिनियम की किस धारा वर्णित किया गया है ? |
धारा 2 |
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"व्यसनी" (Addict) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(i) |
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“व्यसनी” का क्या अर्थ है? |
ऐसा व्यक्ति जो किसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ पर आश्रित है |
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"बोर्ड" (Board) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(ii) |
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“बोर्ड” से क्या अभिप्रेत है? |
केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अधीन गठित केन्द्रीय उत्पादन शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड |
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“कैनेबिस (हैम्प)” (cannabis (hemp)) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(iii) |
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“कैनेबिस (हैम्प)” में क्या शामिल है? |
चरस, गांजा और कैनेबिस के किसी भी प्रकार का मिश्रण या पेय |
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“चरस” (Charas) का क्या अर्थ है? |
कच्चा या शोधित किसी भी रूप में पृथक् किया गया रेजिन कैनेबिस के पौधे से प्राप्त किया गया हो और इसके अंतर्गत हशीश तेल या द्रव हशीश के नाम से ज्ञात सांद्रित निर्मिति और रेजिन है |
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“गांजा” (Ganja) का क्या अर्थ है? |
कैनेबिस के पौधे के फूलने और फलने वाले सिरे (इनके अंतर्गत बीज और पत्तियां जब वे सिरे के साथ न हों नहीं हैं) चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात या अभिहित हों |
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“कैनेबिस का पौधा” (cannabis plant) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(iv) |
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“कैनेबिस का पौधा” से क्या अभिप्रेत है? |
कैनेबिस वंश का कोई पौधा |
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“केन्द्रीय सरकार के कारखाने” (Central Government factories) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(ivक) |
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“केन्द्रीय सरकार के कारखाने” से क्या अभिप्रेत है? |
केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन कारखाने या किसी ऐसी कंपनी के, जिसमें केन्द्रीय सरकार समादत्त शेयर पूंजी का कम से कम इक्यावन प्रतिशत (51%) धारण करती है, स्वामित्वाधीन कारखाने अभिप्रेत हैं |
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“कोका के व्युत्पाद” (Coca derivative) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(v) |
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“कोका के व्युत्पाद” में क्या शामिल है? |
कच्चा कोकेन, अर्थात् कोका की पत्ती का कोई सार जिसका कोकेन के विनिर्माण के लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उपयोग किया जा सकता है; ऐकगोनिन और ऐकगोनिन के सभी व्युत्पाद, जिनसे उसे प्राप्त किया जा सकता है कोकेन, अर्थात् बेंजायल-ऐकगोनिन का मेथिल एस्टर और उसके लवण, सभी निर्मितियां जिनमें 0.1 प्रतिशत से अधिक कोकेन हो |
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“कोका पत्ती” (Coca leaf) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(vi) |
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“कोका पत्ती” से क्या अभिप्रेत है? |
कोका के पौधे की पत्ती, सिवाय उस पत्ती के जिससे सभी ऐकगोनिन, कोकेन और कोई अन्य ऐकगोनिन ऐल्केलाइडनिकाल लिए गए हैं; उनका कोई मिश्रण चाहे वह निष्प्रभावी पदार्थ सहित या उसके बिना हो, किन्तु इसके अंतर्गत कोई ऐसी निर्मिति नहीं है जिसमें 0.1 प्रतिशत से अनधिक कोकेन है |
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“कोका का पौधा” (Coca plant) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(vii) |
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“कोका का पौधा” से क्या अभिप्रेत है? |
ऐरिथ्रोजाइलान वंश का पौधा |
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“वाणिज्यिक मात्रा” (Commercial quantity) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiक) |
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“वाणिज्यिक मात्रा” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ के संबंध में "वाणिज्यिक मात्रा" से केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट मात्रा से उच्चतर कोई मात्रा अभिप्रेत है |
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“नियंत्रित परिदान” (Controlled delivery) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiख) |
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“नियंत्रित परिदान” क्या है? |
स्वापक ओषधियों, मनःप्रभावी पदार्थो, नियंत्रित पदार्थों या उनके लिए प्रतिस्थापित पदार्थों के अवैध या संदिग्ध परेषणों को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के किए जाने में अंतर्वलित व्यक्तियों की पहचान करने की दृष्टि से इस निमित्त सशक्त या धारा 50 के अधीन सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी की जानकारी में या उसके पर्यवेक्षण के अधीन भारत के राज्यक्षेत्र से बाहर ले जाने, उससे होकर निकालने या उसमें लाने के लिए अनुज्ञात करने की तकनीक अभिप्रेत है |
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“तत्स्थानी विधि” (Corresponding law) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiग) |
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“तत्स्थानी विधि” से क्या अभिप्रेत है? |
इस अधिनियम के उपबंधों के समतुल्य कोई विधि |
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"नियंत्रित पदार्थ” (Controlled substance) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiघ) |
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“नियंत्रित पदार्थ” से क्या अभिप्रेत है? |
"नियंत्रित पदार्थ" से ऐसा पदार्थ अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों के उत्पादन या विनिर्माण में उसके संभावित प्रयोग के बारे में या किसी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के किसी उपबंध के बारे में उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखते हुए; राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियंत्रित पदार्थ घोषित करे |
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“प्रवहण” (Conveyance) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viii) |
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“प्रवहण” से क्या अभिप्रेत है? |
किसी भी प्रकार का परिवहन, जिसमें वायुयान, जलयान आदि शामिल हैं |
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"आवश्यक स्वापक ओषधि" (Essential narcotic drug) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiiक) |
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“आवश्यक स्वापक ओषधि” से क्या अभिप्रेत है? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा चिकित्सीय और वैज्ञानिक उपयोग के लिए अधिसूचित कोई स्वापक ओषधि अभिप्रेत है |
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"अवैध व्यापार" (Illicit traffic) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(viiiख) |
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“अवैध व्यापार” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधियों से संबंधित खेती, उत्पादन, विक्रय, परिवहन आदि अवैध क्रियाएँ |
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“अवैध व्यापार” में कौन-कौन सी क्रियाएँ शामिल हैं? |
खेती, उत्पादन, कब्जा, विक्रय, आयात-निर्यात, वित्तपोषण, षड़यंत्र आदि, अफीम पोस्त या किसी कैनेबिस के पौधे की खेती करना; स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों के उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, भांडागारण, छिपाव, उपयोग या उपभोग, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात, भारत में आयात, भारत से निर्यात या यानांतरण का कार्य करना; स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थों के उपखंड (i) से उपखंड (iii) तक में निर्दिष्ट क्रियाकलापों, से भिन्न किन्हीं क्रियाकलापों में व्यवहार करना, उपखंड (i) से उपखंड (iv) तक में निर्दिष्ट किसी क्रियाकलाप के लिए परिसर का प्रबंध करना या उसे किराए पर देना |
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“अवैध व्यापार” के अपवाद क्या हैं? |
वे क्रियाएँ जो अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति की शर्तों के अधीन अनुज्ञात हों |
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किस स्थिति में निर्दिष्ट क्रियाकलाप “अवैध व्यापार” नहीं माने जाएंगे? |
जब वे अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति के अधीन अनुमत हों |
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क्या अवैध क्रियाकलापों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तपोषण “अवैध व्यापार” में शामिल है? |
हाँ |
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क्या अवैध क्रियाकलापों के लिए दुष्प्रेरण या षड़यंत्र “अवैध व्यापार” में शामिल है? |
हाँ |
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क्या अवैध क्रियाकलापों में लगे व्यक्तियों को संश्रय देना “अवैध व्यापार” में शामिल है? |
हाँ |
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“अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन” (International Convention) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(ix) |
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“अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधि एकल कन्वेंशन, 1961, जो संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा मार्च, 1961 में न्यूयार्क में अंगीगार किया गया था ; (ख) उपखंड (क) में वर्णित कन्वेंशन का संशोधन करने वाला प्रोटोकाल, जो संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा मार्च, 1972 में जेनेवा में अंगीगार किया गया था; (ग) मनःप्रभावी पदार्थ कन्वेंशन, 1971, जो संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा फरवरी, 1971 में वियना में अंगीगार किया गया था; और (घ) स्वापक ओषधियों या मनः प्रभावी पदार्थ से संबंधित किसी अंतरराष्ट्रीय कंवेशन का संशोधन करने वाली कोई अन्य अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन या प्रोटोकाल या अन्य लिखत जिसका इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् भारत द्वारा अनुसमर्थन या अंगीकार किया जाए |
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स्वापक ओषधि एकल कन्वेंशन, 1961 कहाँ और कब अंगीकार किया गया था? |
मार्च 1961 में न्यूयार्क में |
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1972 का प्रोटोकॉल कहाँ और कब अंगीकार किया गया था? |
मार्च 1972 में जेनेवा में |
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मनःप्रभावी पदार्थ कन्वेंशन, 1971 कहाँ और कब अंगीकार किया गया था? |
फरवरी 1971 में वियना में |
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1972 का प्रोटोकॉल किस कन्वेंशन से संबंधित है? | |
1961 के स्वापक ओषधि एकल कन्वेंशन के संशोधन से |
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“विनिर्माण” (Manufacture) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(x) |
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“विनिर्माण” में क्या शामिल है? |
उत्पादन को छोड़कर सभी प्रक्रियाएँ, परिष्करण, रूपांतरण और निर्मिति बनाना |
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“विनिर्मित ओषधि” से क्या अभिप्रेत है? |
उत्पादन से भिन्न ऐसी सभी प्रक्रियाएं जिनके द्वारा ऐसी ओषधियां या पदार्थ प्राप्त किए जाएं; (2) ऐसी ओषधियों या पदार्थों का परिष्करण; (3) ऐसी ओषधियों या पदार्थों का रूपांतरण; और (4) ऐसी ओषधियों या पदार्थों के साथ या उनको अंतर्विष्ट करने वाली निर्मितियों का (नुस्खे के आधार पर किसी फार्मेसी में से अन्यत्र) बनाया जाना |
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"विनिर्मित ओषधि” (Manufactured drug) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xi) |
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"विनिर्मित ओषधि” से क्या अभिप्रेत है? |
कोका के सभी व्युत्पाद, ओषधि कैनेबिस, अफीम के व्युत्पाद और पोस्त तृण सांद्र; (ख) ऐसा कोई अन्य स्वापक पदार्थ या निर्मिति, जिसको केन्द्रीय सरकार, उसकी प्रकृति के बारे में उपलब्ध जानकारी को या किसी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के अधीन किसी विनिश्चय को यदि कोई हो, ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्मित ओषधि घोषित करे, किंतु इसके अंतर्गत ऐसा कोई स्वापक पदार्थ या निर्मिति नहीं है जिससे केन्द्रीय सरकार, उसकी प्रकृति के बारे में उपलब्ध जानकारी को या किसी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के अधीन उसकी प्रकृति के या किसी विनिश्चय के बारे में उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्मित ओषधि न घोषित करे |
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“ओषधीय कैनेबिस” (Medicinal cannabis) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xii) |
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“ओषधीय कैनेबिस” से क्या अभिप्रेत है? |
ओषधीय हैम्प से कैनेबिस (हैम्प) का कोई सार या टिंक्चर अभिप्रेत है |
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“स्वापक आयुक्त” (Narcotics Commissioner) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xiii) |
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“स्वापक आयुक्त” से क्या अभिप्रेत है? |
धारा 5 के अधीन नियुक्त स्वापक आयुक्त अभिप्रेत हैI |
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"स्वापक ओषधि" (Narcotic drug) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xiv) |
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"स्वापक ओषधि" से क्या अभिप्रेत है? |
कोका की पत्ती, कैनेबिस (हैम्प), अफीम, पोस्त तृण अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत सभी विनिर्मित ओषधियां हैं; |
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"अफीम" (Opium) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xv) |
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“अफीम” से क्या अभिप्रेत है? |
अफीम पोस्त का स्कंदित रस; और अफीम पोस्त के स्कंदित रस का कोई मिश्रण चाहे वह निष्प्रभावी पदार्थ सहित या उसके बिना हो किंतु इसके अंतर्गत ऐसी निर्मिति नहीं है जिसमें 0.2 प्रतिशत से अनधिक मार्फीन हो |
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“अफीम के व्युत्पाद” (Opium derivative) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xvi) |
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“अफीम के व्युत्पाद” में क्या शामिल है? |
ओषधीय अफीम अर्थात् ऐसी अफीम जिसका भारतीय भेषजकोष या केन्द्रीय सरकार द्वारा इन निमित्त अधिसूचित किसी अन्य भेषजकोष की अपेक्षाओं के अनुसार ओषधीय प्रयोग के लिए अनुकूलित करने के लिए आवश्यक प्रसंस्कार कर दिया गया है, चाहे वह चूर्ण के रूप में या कणिका केरूप में या अन्यथा हो अथवा निष्प्रभावी पदार्थों से मिश्रित हों। निर्मित्त अफीम अर्थात् अफीम को धूम्रपान के उपयुक्त सार में रूपांतरित करने के लिए परिकल्पित किन्हीं क्रमबद्ध संक्रियाओं द्वारा अभिप्राप्त अफीम का कोई उत्पाद और अफीम का धूम्रपान करने के पश्चात् बचा हुआ कोई मंडूर या अन्य अवशेष; फिनेंथ्रन एल्केलाइड, अर्थात् मार्फीन, कोडीन, थिवेन और उनके लवण; डाइऐसीटल मार्फीन अर्थात् ऐल्केलाइड जिसे डाइ-मार्फीन या हिरोइन कहा जाता है और उसका लवण और सभी निर्मितियां, जिनमें 0.2 प्रतिशत से अधिक मार्फीन या डाइऐसीटल मार्फीन हो |
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“अफीम पोस्त” (Opium poppy) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xvii) |
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“अफीम पोस्त” से क्या अभिप्रेत है? |
पैपेवर सोम्नीफेरम एल० जातियों का पौधा ;और पैपेवर की किसी अन्य जाति का पौधा जिससे अफीम या फिनेंथ्रन एल्केलाइड निकाला जा सकता है और जिसे केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अफीम पोस्त घोषित करे |
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"पोस्त तृण" (Poppy straw) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xviii) |
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“पोस्त तृण” से क्या अभिप्रेत है? |
फसल कटाई के पश्चात् अफीम पोस्त के बीजों के सिवाय सभी भाग अभिप्रेत हैं चाहे वे मूल रूप में या कटे हुए, संदलित या चूर्णित हों और चाहे उनमें से रस निकाला गया हो या न निकाला गया हो |
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“पोस्त तृण सांद्र” (Poppy straw concentrate) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xix) |
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“पोस्त तृण सांद्र” से क्या अभिप्रेत है? |
उस समय उत्पन्न पदार्थ जब पोस्त तृण का उसके एल्केलाइड के संद्रिण के लिए प्रसंस्कार प्रारंभ कर दिया गया हो |
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“निर्मिति” (Preparation) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xx) |
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“निर्मिति” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ के संबंध में "निर्मिति" से अभिप्रेत है खुराक के रूप में कोई एक या अधिक ऐसी ओषधियां या पदार्थ या ऐसी एक या अधिक ओषधियां या पदार्थ को अन्तर्विष्ट करने वाला कोई घोल या मिश्रण चाहे वह किसी भी भौतिक स्थिति में हो |
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“विहित” (Prescribed) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxi) |
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“विहित” से क्या अभिप्रेत है? |
इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है |
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"उत्पादन" (Production) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxii) |
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“उत्पादन” से क्या अभिप्रेत है? |
"उत्पादन" से अफीम, पोस्त तृण, कोका की पत्तियों या कैनेबिस का ऐसे पौधों से, जिनसे वे प्राप्त होते हैं, पृथक् किया जाना अभिप्रेत है; |
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“मनःप्रभावी पदार्थ” (Psychotropic substance) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxiii) |
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“मनःप्रभावी पदार्थ” से क्या अभिप्रेत है? |
कोई प्राकृतिक या संश्लिष्ट पदार्थ या कोई प्राकृतिक सामग्री अथवा ऐसे पदार्थ या सामग्री का कोई लवण जो अनुसूची में विनिर्दिष्ट मनः प्रभावी पदार्थों की सूची में सम्मिलित निर्मिति |
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“अल्प मात्रा” (Small quantity) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxiiiक) |
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“अल्प मात्रा” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ के संबंध में "अल्प मात्रा" से केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट मात्रा से न्यूनतर कोई मात्रा अभिप्रेत है |
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“अंतरराज्यिक आयात” (To import inter-State) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxiv) |
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“अंतरराज्यिक आयात” से क्या अभिप्रेत है? |
भारत के किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में भारत के किसी दूसरे राज्य या संघ राज्यक्षेत्र से लाना अभिप्रेत है |
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“भारत में आयात” (to import into India) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxv) |
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“भारत में आयात” से क्या अभिप्रेत है? |
"भारत में आयात" से उसके व्याकरणिक रूप भेदों और सजातीय पदों सहित, भारत के बाहर के किसी स्थान से भारत में लाना अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत भारत में किसी पत्तन या विमान या स्थान में कोई स्वापक ओषधि या मनः प्रभावी पदार्थ लाना है, जिसे ऐसे किसी जलयान, वायुयान, यान या किसी अन्य प्रवहण से, जिसमें उसका वहन किया जा रहा है, हटाए बिना भारत के बाहर ले जाने का आशय है। |
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“भारत से निर्यात” (To export from India) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxvi) |
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“भारत से निर्यात” से क्या अभिप्रेत है? |
उसके व्याकरणिक रूप भेदों और सजातीय पदों सहित, भारत के बाहर किसी स्थान तक भारत से बाहर ले जाना अभिप्रेत है |
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“अंतरराज्यिक निर्यात” (To export inter-State) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxvii) |
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“अंतरराज्यिक निर्यात” से क्या अभिप्रेत है? |
भारत के किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र से भारत के किसी दूसरे राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में ले जाना अभिप्रेत है |
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“परिवहन” (To transport) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxviii) |
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“परिवहन” से क्या अभिप्रेत है? |
उसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अभिप्रेत है |
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"उपयोग" (Use) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 2(xxviiiक) |
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“उपयोग” से क्या अभिप्रेत है? |
स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थों के संबंध में, "उपयोग" से व्यक्तिगत उपयोग को छोड़कर किसी भी प्रकार का उपयोग अभिप्रेत है |
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धारा 2(xxix) किस विषय से सम्बन्धित है? |
उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 में परिभाषित हैं, वहीं अर्थ होंगे जो उस संहिता में हैं। |
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धारा 2 के स्पष्टीकरण के अनुसार-
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खंड (v), खंड (vi), खंड (xv) और खंड (xvi) के प्रयोजनों के लिए द्रव निर्मितियों की दशा में प्रतिशतता का परिकलन इस आधार पर किया जाएगा कि उस निर्मिति से जिसमें पदार्थ का एक प्रतिशत है ऐसी निर्मिति अभिप्रेत है जिसमें उस पदार्थ का, यदि वह ठोस है तो, एक ग्राम या उस पदार्थ का यदि वह द्रव है तो एक मिलीलीटर, उस निर्मिति के प्रत्येक एक सौ मिलीलीटर में अंतर्विष्ट है और यही अनुपात किसी अधिक या कम प्रतिशतता के लिए होगा: |
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धारा 2 का स्पष्टीकरण किन खंडों के लिए लागू है? |
खंड (v), (vi), (xv) और (xvi) |
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धारा 2 के स्पष्टीकरण द्रव निर्मितियों में प्रतिशतता कैसे निर्धारित की जाएगी? |
100 मिलीलीटर निर्मिति में पदार्थ की मात्रा के आधार पर |
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धारा 3 किस विषय से सम्बन्धित है? |
मनः प्रभावी पदार्थों की सूची में जोड़ने या उससे लोप करने की शक्ति (Power to add to or omit from the list of psychotropic substances) |
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केन्द्रीय सरकार को किस स्थिति में सूची में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है? |
जब उसे ऐसा करना आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो |
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धारा 3(क) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन आधारों पर निर्णय लेती है? |
किसी पदार्थ की प्रकृति, प्रभाव तथा उसके दुरुपयोग या दुरुपयोग की संभावना से संबंधित उपलब्ध जानकारी और साक्ष्य के आधार पर |
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धारा 3(क) में किन पदार्थों को शामिल किया गया है? |
प्राकृतिक या संश्लिष्ट पदार्थ, प्राकृतिक सामग्री तथा उनके लवण या निर्मितियाँ |
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धारा 3(ख) के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन अतिरिक्त आधारों पर विचार करती है? |
अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन में किए गए उपांतरणों या उपबंधों के आधार पर |
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केन्द्रीय सरकार किन वस्तुओं को सूची में जोड़ सकती है? |
किसी पदार्थ, प्राकृतिक सामग्री या उनके लवण या निर्मिति को |
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केन्द्रीय सरकार किन वस्तुओं को सूची से हटा सकती है? |
अनुसूची में विनिर्दिष्ट मनःप्रभावी पदार्थों को |
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अध्याय-2 (CHAPTER-II) |
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प्राधिकरण और अधिकारी (AUTHORITIES AND OFFICERS) |
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धारा 4 किससे संबंधित है? |
स्वापक ओषधियों आदि के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के निवारण हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा अध्युपाय (Central Government to take measures for preventing and combating abuse of and illicit traffic in narcotic drugs, etc.) |
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धारा 4(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार का कर्तव्य क्या है? |
स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के निवारण और रोकथाम हेतु आवश्यक अध्युपाय करना |
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धारा 4(2)(क) के अनुसार किनके बीच समन्वय किया जाता है? |
विभिन्न अधिकारियों, राज्य सरकारों और अन्य प्राधिकारियों के बीच |
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धारा 4(2)(क)(ii) के अंतर्गत किसके अधीन समन्वय किया जाता है? |
अन्य प्रवृत्त विधियों के अधीन जो इस अधिनियम के प्रवर्तन से संबंधित हों |
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धारा 4(2)(ख) किससे संबंधित है? |
अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशनों के अधीन बाध्यताएं |
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धारा 4(2)( ग) किससे संबंधित है? |
स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों में अवैध व्यापार के निवारण और दमन के लिए समन्वय और सर्वव्यापी कार्रवाई को सुकर बनाने की दृष्टि से विदेशों में संबंधित प्राधिकरणों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सहायता |
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धारा 4(2)(घ) किन विषयों से संबंधित है? |
व्यसनियों की पहचान, उपचार, शिक्षा, पुनर्वास और समाज में पुनः मिलाना |
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धारा 4(2)(घक) किससे संबंधित है? |
चिकित्सीय और वैज्ञानिक उपयोग के लिए स्वापक ओषधियों की उपलब्धता |
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धारा 4(2)(ङ) में क्या प्रावधान है? |
अन्य आवश्यक विषय जिनसे अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो |
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धारा 4(3) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या कर सकती है? |
आदेश द्वारा प्राधिकरण या प्राधिकरणों का गठन कर सकती है |
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प्राधिकरण किन उद्देश्यों के लिए गठित किया जाता है? |
केन्द्रीय सरकार की शक्तियों के प्रयोग और अध्युपाय करने के लिए |
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प्राधिकरण किसके अधीन कार्य करेगा? |
केन्द्रीय सरकार के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अधीन |
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धारा 5 का विषय क्या है? |
केन्द्रीय सरकार के अधिकारी (Officers of Central Government) |
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धारा 5(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या करेगी? |
एक स्वापक आयुक्त तथा अन्य आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति करेगी |
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क्या धारा 5(1) धारा 4(3) को प्रभावित करती है? |
नहीं, उसके उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना लागू होती है |
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केन्द्रीय सरकार अन्य अधिकारियों को कैसे नियुक्त करेगी? |
ऐसे पदाभिधानों से जिन्हें वह उचित समझे |
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धारा 5(2) के अनुसार कौन कृत्यों का पालन करेगा? |
स्वापक आयुक्त या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से |
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धारा 5(2) के अनुसार स्वापक आयुक्त किन कृत्यों का पालन करेगा? |
अफीम पोस्त की खेती और अफीम के उत्पादन के अधीक्षण से संबंधित तथा केन्द्रीय सरकार द्वारा सौंपे गए कृत्य |
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धारा 5(3) के अनुसार नियुक्त अधिकारी किसके अधीन होंगे? |
केन्द्रीय सरकार के साधारण नियंत्रण और निर्देशन के अधीन |
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धारा 5(3) के अनुसार किन अन्य प्राधिकरणों के अधीन अधिकारी हो सकते हैं? |
बोर्ड या अन्य प्राधिकरण या अधिकारी |
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धारा 6 का विषय क्या है? |
स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ परामर्श समिति (The Narcotic Drugs and Psychotropie Substances Consultative Committee) |
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धारा 6(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या कर सकती है? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा परामर्श समिति का गठन कर सकती है |
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धारा 6(1) के अनुसार समिति का नाम क्या है? |
स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ परामर्श समिति |
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धारा 6(1) के अनुसार समिति का उद्देश्य क्या है? |
केन्द्रीय सरकार को अधिनियम के प्रशासन से संबंधित विषयों पर सलाह देना |
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धारा 6(1) के अनुसार समिति किन विषयों पर सलाह देगी? |
प्रशासन से संबंधित ऐसे विषयों पर |
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धारा 6(2) के अनुसार समिति किन- किन सदस्यों से मिलकर बनेगी? |
एक अध्यक्ष और अधिकतम बीस अन्य सदस्य |
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धारा 6(2) के अनुसार समिति के सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है? |
केन्द्रीय सरकार |
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धारा 6(3) के अनुसार समिति की बैठक कब होगी? |
जब केन्द्रीय सरकार अपेक्षा करे |
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धारा 6(3) के अनुसार क्या समिति अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित कर सकती है? |
हाँ |
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धारा 6(4) के अनुसार समिति क्या गठित कर सकती है? |
एक या अधिक उप-समितियां |
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धारा 6(4) के अनुसार क्या उप-समिति में गैर-सदस्य को शामिल किया जा सकता है? |
हाँ |
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धारा 6(4) के अनुसार गैर-सदस्य को उप-समिति में क्यों शामिल किया जा सकता है? |
सामान्य या विशिष्ट विषयों पर विचार के लिए |
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धारा 6(5) के अनुसार अध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि कैसे निर्धारित होगी? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार |
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धारा 6(5) के अनुसार आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति कैसे निर्धारित होगी? |
नियमों द्वारा |
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धारा 6(5) के अनुसार सदस्यों को भत्ते कैसे निर्धारित होंगे? |
नियमों द्वारा |
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धारा 6(5) के अनुसार उप-समिति में गैर-सदस्य की नियुक्ति की शर्तें कैसे निर्धारित होंगी? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा |
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धारा 7 का विषय क्या है? |
राज्य सरकार के अधिकारी (Officers of State Government) |
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धारा 7(1) के अनुसार राज्य सरकार क्या कर सकती है? |
ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है जो वह उचित समझे |
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धारा 7(2) के अनुसार नियुक्त अधिकारी किसके अधीन होंगे? |
राज्य सरकार के साधारण नियंत्रण और निर्देशन के अधीन |
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अध्याय-2क (CHAPTER-IIA) |
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ओषधि के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय निधि (NATIONAL FUND FOR CONTROL OF DRUG ABUSE) |
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अध्याय 2क कब अंतःस्थापित किया गया? |
अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा, 29-5-1989 से |
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धारा 7-क का विषय क्या है? |
ओषधि के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय निधि (National Fund for Control of Drug Abuse) |
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धारा 7-क के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार क्या स्थापित कर सकती है? |
राष्ट्रीय ओषधि दुरुपयोग नियंत्रण निधि |
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धारा 7-क के अन्तर्गत निधि की स्थापना कैसे की जाएगी? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा |
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धारा 7-क के अन्तर्गत निधि में कौन-कौन सी राशियाँ जमा की जाएंगी? |
विनियोजित सरकारी राशि, समपहृत संपत्ति का विक्रय आगम, अनुदान और निवेश से आय |
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क्या निजी व्यक्तियों या संस्थाओं के अनुदान निधि में जमा होंगे? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार निधि का उपयोग किसके लिए होगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए अध्युपायों के व्यय की पूर्ति के लिए |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग अवैध व्यापार की रोकथाम के लिए किया जाएगा? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए किया जाएगा? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग व्यसनियों की पहचान, उपचार और पुनर्वास के लिए किया जाएगा? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग दुरुपयोग के निवारण के लिए किया जाएगा? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग जनता को शिक्षित करने के लिए किया जाएगा? |
हाँ |
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धारा 7-क(2) के अनुसार क्या निधि का उपयोग व्यसनियों को ओषधि प्रदाय के लिए किया जाएगा? |
हाँ, जहाँ चिकित्सीय आवश्यकता हो |
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केन्द्रीय सरकार शासी निकाय का गठन क्यों करेगी? |
सलाह देने और निधि से धन निकालने की मंजूरी देने के लिए |
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शासी निकाय का गठन कैसे किया जाएगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा |
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शासी निकाय का अध्यक्ष कौन होगा? |
केन्द्रीय सरकार का अपर सचिव या उससे उच्च पदाधिकारी |
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शासी निकाय में कितने सदस्य होंगे? |
अध्यक्ष सहित अधिकतम सात सदस्य (एक अध्यक्ष + छह अन्य सदस्य) |
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शासी निकाय के सदस्यों की नियुक्ति कौन करेगा? |
केन्द्रीय सरकार |
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क्या शासी निकाय अपनी प्रक्रिया स्वयं निर्धारित कर सकता है? |
हाँ |
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धारा 7-ख का विषय क्या है? |
निधि के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट (Annual report of activities financed under the Fund.) |
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धारा 7-ख के अनुसार रिपोर्ट कौन प्रकाशित करेगा? |
केन्द्रीय सरकार |
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धारा 7-ख के अनुसार रिपोर्ट कब प्रकाशित की जाएगी? |
प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र |
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धारा 7-ख के अनुसार रिपोर्ट में क्या शामिल होगा? |
लेखाओं के विवरण सहित, वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 7-क के अधीन वित्तपोषित क्रियाकलापों का लेखा-जोखा |
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धारा 7-ख के अनुसार क्या रिपोर्ट में लेखाओं का विवरण शामिल होगा? |
हाँ |
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अध्याय-3 (CHAPTER-III) |
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प्रतिषेध, नियंत्रण और विनियमन (PROHIBITION, CONTROL AND REGULATION) |
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अध्याय 3 किस विषय से सम्बंधित है? |
प्रतिषेध, नियंत्रण और विनियमन (Prohibition, Control and Regulation) |
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धारा 8 का विषय क्या है? |
कुछ संक्रियाओं का प्रतिषेध (Prohibition of certain operations) |
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धारा 8 के अनुसार किन संक्रियाओं पर प्रतिषेध लगाया गया है? |
स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों से संबंधित निर्दिष्ट क्रियाएँ |
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धारा 8 के अनुसार क्या करना निषिद्ध है? |
किसी कोका के पौधे की खेती या कोका के पौधे के किसी भाग का संग्रह; या अफीम पोस्त या किसी कैनेबिस के पौधे की खेती ; या किसी स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ का उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, भांडागारण, उपयोग, उपभोग, अंतरराज्य आयात, अंतरराज्य निर्यात, भारत में आयात, भारत से बाहर निर्यात या यानांतरण |
|
धारा 8 के अनुसार किन परिस्थितियों में क्रियाएँ अनुमत हैं? |
चिकित्सीय या वैज्ञानिक प्रयोजनों के लिए और अधिनियम/नियम/आदेश के अनुसार |
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धारा 8 के अनुसार अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या प्राधिकार की स्थिति में क्या आवश्यक है? |
उनके निबंधनों और शर्तों का पालन |
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धारा 8 के अनुसार गांजा से संबंधित प्रतिषेध कब प्रभावी होगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित तिथि से |
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धारा 8 के अनुसार गांजा के संबंध में किन क्रियाओं पर प्रतिषेध है? |
उत्पादन, कब्जा, उपयोग, उपभोग, क्रय, विक्रय, परिवहन, भंडारण, अंतरराज्य आयात-निर्यात |
|
क्या पोस्त तृण के निर्यात पर धारा 8 लागू होती है? |
नहीं, जब वह आलंकारिक प्रयोजनों के लिए हो |
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धारा 8-क का विषय क्या है? |
अपराध से व्युत्पन्न संपत्ति से संबंधित क्रियाकलापों का प्रतिषेध (8A. Prohibition of certain activities relating to property derived from offence) |
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धारा 8-क कब अंतःस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 8-क के अनुसार अपराध से व्युत्पन्न संपत्ति का संपरिवर्तन या अंतरण है- |
निषिद्ध |
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धारा 8-क के अनुसार किस स्थिति में संपत्ति का संपरिवर्तन या अंतरण निषिद्ध है? |
जब व्यक्ति को ज्ञात हो कि संपत्ति अपराध से व्युत्पन्न है |
|
धारा 8-क के अनुसार संपत्ति के संपरिवर्तन या अंतरण का उद्देश्य क्या हो सकता है? |
अवैध उद्गम छिपाना, रूपांतरण करना, सहायता देना या विधिक परिणामों से बचना |
|
धारा 8-क (क) में क्या- क्या शामिल हैं? |
किसी संपत्ति का यह जानते हुए कि ऐसी संपत्ति, उस संपत्ति का अवैध उद्गम छिपाने या उसके रूपान्तरण के प्रयोजन के लिए या अपराध के किए जाने में किसी व्यक्ति की सहायता करने के लिए या विधिक परिणामों से बचने के लिए, इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य देश की किसी अन्य तत्स्थानी विधि के अधीन किए गए किसी अपराध से या ऐसे अपराध में भाग लेने के किसी कार्य से व्युत्पन्न की गई है, संपरिवर्तन या अंतरण |
|
धारा 8-क (ख) में क्या प्रतिषेध हैं? |
किसी संपत्ति की सही प्रकृति, स्रोत, अवस्थिति, व्ययन की, यह जानते हुए कि ऐसी सम्पत्ति इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य देश की किसी अन्य तत्स्थानी विधि के अधीन किए गए किसी अपराध से व्युत्पन्न की गई है, नहीं छिपाएगा या उसका रूप नहीं बदलेगा |
|
धारा 8-क (ख) के अनुसार किन परिस्थितियों में यह निषेध लागू होता है? |
जब व्यक्ति को ज्ञात हो कि संपत्ति अपराध से व्युत्पन्न है |
|
धारा 8-क (ग) में क्या प्रतिषेध हैं? |
जानते हुए कि ऐसी संपत्ति का, जो इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य देश की किसी अन्य तत्स्थानी विधि के अधीन किए गए किसी अपराध से व्युत्पन्न की गई थी, अर्जन नहीं करेगा, उसे कब्जे में नहीं रखेगा या उसका उपयोग नहीं करेगा। |
|
धारा 9 का विषय क्या है? |
अनुज्ञा देने, नियंत्रण और विनियमन करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति (Power of Central Government to permit, control and regulate) |
|
धारा 9(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या कर सकती है? |
नियमों द्वारा अनुज्ञा देना और विनियमन करना |
|
धारा 9(1) किन उपबंधों के अधीन है? |
धारा 8 के उपबंधों के अधीन |
|
धारा 9(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या- क्या विनियमित कर सकती है? |
कोका के पौधे की खेती या उसके किसी भाग का संग्रह (जब ऐसी खेती या संग्रह केवल केंद्रीय सरकार के लिए ही हो) या कोका की पत्तियों का उत्पादन, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात, उपयोग या उपभोग, अफीम पोस्त की खेती (जब ऐसी खेती) केन्द्रीय सरकार के लिए ही हो, अफीम का उत्पादन और विनिर्माण तथा पोस्त तृण का उत्पादन, ऐसे पौधों से, जिनसे चीरा लगाकर रस नहीं निकाला गया है, उत्पादित पोस्त तृण का कब्जा रखने, परिवहन, अन्तरराज्यिक आयात, अन्तरराज्यिक निर्यात, भांडागारण, विक्रय, क्रय, उपभोग और उपयोग |
|
धारा 9(क)(iv) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या विनियमित कर सकती है? |
भारत से निर्यात या राज्य सरकारों या विनिर्माण करने वाले रसायनज्ञों को विक्रय के लिए केन्द्रीय सरकार का कारखानों से अफीम और अफीम के व्युत्पादों का विक्रय |
|
धारा 9(क)(v) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या विनियमित कर सकती है? |
विनिर्मित ओषधियों (निर्मित अफीम से भिन्न) का विनिर्माण किंतु इसके अंतर्गत ओषधीय अफीम या ऐसी सामग्री से, जिसका कब्जा रखने के लिए बनाने वाला विधिसम्मत रूप से हकदार है, विनिर्मित ओषधि अंतर्विष्ट करने वाली किसी निर्मिति का विनिर्माण नहीं है |
|
धारा 9(क)(vक) के अनुसार केन्द्रीय सरकार क्या विनियमित कर सकती है? |
आवश्यक स्वापक ओषधियों का विनिर्माण, कब्जा, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात, विक्रय, क्रय, उपभोग और उपयोग |
|
धारा 9 के परन्तुक का विषय क्या है? |
आवश्यक स्वापक ओषधि के संबंध में पूर्व अनुज्ञप्ति/अनुज्ञापत्र की वैधता |
|
धारा 9(1) के अनुसार यह प्रावधान किन अनुज्ञप्तियों/अनुज्ञापत्रों पर लागू होता है? |
जो राज्य सरकार द्वारा धारा 10 के अधीन दिए गए हों |
|
धारा 9(1) के अनुसार अनुज्ञप्तियाँ कब दी गई होनी चाहिए? |
संशोधन अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से पूर्व |
|
धारा 9(1) के अनुसार अनुज्ञप्तियों की वैधता कब तक रहेगी? |
समाप्ति तिथि तक या संशोधन के प्रारंभ से 12 माह तक, जो पहले हो |
|
क्या धारा 9(1) के अनुसार दी गई अनुज्ञप्तियाँ स्वतः अमान्य हो जाती हैं? |
नहीं, निर्दिष्ट अवधि तक विधिमान्य रहती हैं |
|
धारा 9(1)(ख) के अंतर्गत क्या किया जा सकता है? |
अन्य आवश्यक विषयों का विनियमन |
|
धारा 9(2) का उद्देश्य क्या है? |
विस्तृत नियम बनाने की शक्ति प्रदान करना |
|
धारा 9(2) के अन्तर्गतकोका पौधे की खेती की अनुमति कब दी जा सकती है? |
केवल केन्द्रीय सरकार के लिए |
|
धारा 9(2) के अन्तर्गत “आवश्यक स्वापक औषधियों” (Essential Narcotic Drugs) से संबंधित प्रावधान किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया? |
2014 संशोधन |
|
धारा 9(2) के अनुसार, नियम किस विषय को भी कवर कर सकते हैं? |
अपील का प्रावधान |
|
धारा 9-क का विषय क्या है? |
नियंत्रित पदार्थों को नियंत्रित और विनियमित करने की शक्ति (Power to control and regulate controlled substances) |
|
धारा 9-क के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार कब नियंत्रित पदार्थों को विनियमित कर सकती है? |
जब लोकहित में आवश्यक या समीचीन हो |
|
क्या नियंत्रित पदार्थों के उत्पादन और व्यापार को प्रतिबंधित किया जा सकता है? |
हाँ |
|
क्या नियंत्रित पदार्थों के कब्जा, परिवहन, विक्रय आदि को विनियमित किया जा सकता है? |
हाँ |
|
धारा 10 का विषय क्या है? |
अनुज्ञा देने, नियंत्रण और विनियमन करने की राज्य सरकार की शक्ति (Power of State Government to permit, control and regulate) |
|
धारा 10(1) किन उपबंधों के अधीन है? |
धारा 8 के उपबंधों के अधीन |
|
राज्य सरकार किन क्रियाकलापों के लिए अनुज्ञा दे सकती है? |
पोस्त तृण, अफीम, कैनेबिस, विनिर्मित ओषधियों आदि से संबंधित क्रियाकलाप |
|
धारा 10(1)(क)(i) के अंतर्गत पोस्त तृण के संबंध में क्या विनियमित किया जा सकता है? |
कब्जा, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात, भंडारण, विक्रय, क्रय, उपभोग (विशिष्ट अपवाद सहित) |
|
धारा 10(1)(क)(ii) के अंतर्गत अफीम के संबंध में क्या विनियमित किया जा सकता है? |
कब्जा, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात, विक्रय, क्रय, उपभोग और उपयोग |
|
धारा 10(1)(क)(iii) के अंतर्गत कैनेबिस के संबंध में क्या विनियमित किया जा सकता है? |
खेती, उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात, विक्रय, क्रय, उपभोग और उपयोग (चरस को छोड़कर) |
|
धारा 10(1)(क)(iv) के अंतर्गत क्या विनिर्माण अनुमत है? |
विधिसम्मत सामग्री से ओषधीय अफीम या विनिर्मित ओषधि अंतर्विष्ट निर्मिति का विनिर्माण |
|
धारा 10(1)(क)(v) के अंतर्गत किन पदार्थों का विनियमन किया जा सकता है? |
विनिर्मित ओषधियां (विनिर्मित अफीम और आवश्यक स्वापक ओषधियों से भिन्न), कोका पत्ती और संबंधित निर्मितियां |
|
धारा 10(1)(क)(vi) के अंतर्गत किसे विशेष अनुमति दी गई है? |
पंजीकृत व्यसनी को वैयक्तिक उपभोग हेतु अफीम से निर्मित अफीम का विनिर्माण और कब्जा, चिकित्सीय सलाह के आधार पर |
|
धारा 10(1)(क)(vi) का प्रथम परन्तुक का प्रभाव क्या है? |
सरकारी स्वामित्व वाली विनिर्मित ओषधियों पर धारा 8 लागू नहीं होगी, जब तक नियमों में अन्यथा न हो |
|
धारा 10(1)(क)(vi) का द्वितीय परन्तुक का प्रभाव क्या है? |
ऐसी ओषधियों का विक्रय केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही किया जा सकता है |
|
धारा 10(1)(ख) के अंतर्गत राज्य सरकार क्या कर सकती है? |
प्रभावी नियंत्रण हेतु अन्य विषयों का उपबंध |
|
धारा 10(2) का उद्देश्य क्या है? |
विस्तृत नियम निर्माण की शक्ति प्रदान करना |
|
धारा 10(2)(क) के अंतर्गत क्या प्रावधान किया जा सकता है? |
भंडागार घोषित करना, पोस्त तृण का भंडारण, सुरक्षा, निकासी और फीस निर्धारण |
|
धारा 10(2)(ख) के अंतर्गत क्या निर्धारित किया जा सकता है? |
कैनेबिस की खेती की सीमा |
|
धारा 10(2)(ग) के अंतर्गत क्या उपबंध किया जा सकता है? |
केवल अनुज्ञप्त खेतिहरों को कैनेबिस की खेती का अधिकार |
|
धारा 10(2)(घ) के अंतर्गत क्या अपेक्षित है? |
कैनेबिस की उपज का सरकार को परिदान |
|
धारा 10(2)(ङ) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
कैनेबिस के लिए कीमत निर्धारण |
|
धारा 10(2)(च) के अंतर्गत क्या विनियमित किया जा सकता है? |
अनुज्ञप्तियों/अनुज्ञापत्रों के प्ररूप, शर्तें, प्राधिकरण और फीस |
|
धारा 11 का विषय क्या है? |
स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों आदि का करस्थम् या कुर्की के दायित्वाधीन न होना (Narcotic drugs and psychotropic substances, etc., not liable to distress or attachment) |
|
धारा 11 किन परिस्थितियों में प्रभावी होती है? |
किसी विधि या संविदा में प्रतिकूल प्रावधान होने के बावजूद |
|
धारा 11 के अन्तर्गत किन वस्तुओं को करस्थम् या कुर्की से संरक्षित किया गया है? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, कोका का पौधा, अफीम पोस्त और कैनेबिस का पौधा |
|
धारा 11 के अन्तर्गत वस्तुओं को करस्थम् या कुर्की से किस प्रयोजन के लिए अपवर्जित किया गया है? |
धन की वसूली या किसी अन्य प्रयोजन के लिए |
|
धारा 11 के अन्तर्गत न्यायालय या प्राधिकारी के आदेश या डिक्री के संदर्भ में क्या प्रावधान है? |
इन वस्तुओं को ऐसे आदेश या डिक्री के अधीन करस्थम् या कुर्क नहीं किया जा सकता |
|
धारा 12 का विषय क्या है? |
स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों के बाह्य व्यवहार पर निर्बंधन (Restrictions over external dealings in narcotic drugs and psychotropic substances) |
|
धारा 12 के अनुसार बाह्य व्यापार में संलग्न होने की शर्त क्या है? |
केन्द्रीय सरकार का पूर्व प्राधिकार तथा उसके द्वारा अधिरोपित शर्तों का पालन |
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धारा 12 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार की भूमिका क्या है? |
बाह्य व्यवहार के लिए पूर्व प्राधिकार देना और शर्तें निर्धारित करना |
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किन व्यापारों पर धारा 12 लागू होती है? |
ऐसे व्यापार जिनमें स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ भारत के बाहर प्राप्त और बाहर ही प्रदाय किए जाते हैं |
|
धारा 12 के अन्तर्गत प्राधिकार के अभाव में बाह्य व्यापार की स्थिति क्या होगी? |
ऐसा व्यापार इस धारा के अधीन निषिद्ध रहेगा |
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धारा 13 का विषय क्या है? |
सुरुचि कर्मक की निर्मिति में उपयोग हेतु कोका के पौधे और कोका पत्तियों के संबंध में विशेष उपबंध (Special provisions relating to coca plant and coca leaves for use in the preparation of flavouring agent) |
|
क्या धारा 13, धारा 8 के बावजूद लागू होती है? |
हाँ |
|
धारा 13 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार क्या अनुज्ञा दे सकती है? |
कोका के पौधे की खेती, संग्रह और कोका उत्पादन, कब्जे, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात या भारत में आयात |
|
धारा 13 के अन्तर्गत अनुज्ञा किन प्रयोजनों के लिए दी जाती है? |
सुरुचि कर्मक की निर्मिति में उपयोग के लिए |
|
धारा 13 के अन्तर्गत सुरुचि कर्मक की क्या विशेषता होनी चाहिए? |
उसमें कोई ऐल्केलाइड नहीं होना चाहिए |
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धारा 14 का विषय क्या है? |
कैनेबिस के बारे में विशेष उपबन्ध (Special provision relating to cannabis) |
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धारा 14 के अन्तर्गत सरकार किस माध्यम से अनुज्ञा दे सकती है? |
साधारण या विशेष आदेश द्वारा |
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धारा 14 के अन्तर्गत कैनेबिस के पौधे की खेती किन प्रयोजनों के लिए अनुज्ञात की जा सकती है? |
औद्योगिक प्रयोजनों (फाइबर या बीज हेतु) या उद्यान-कृषि के प्रयोजनों के लिए |
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क्या कैनेबिस की खेती सामान्यतः प्रतिबंधित है? |
हाँ, परंतु धारा 14 के अधीन अपवाद संभव है |
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अध्याय 4 (CHAPTER-IV) |
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अपराध और शास्तियां (OFFENCES AND PENALTIES) |
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अध्याय 4 क्या है? |
अपराध और शास्तियां (Offences and Penalties) |
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धारा 15 का विषय क्या है? |
पोस्त तृण के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to poppy straw) |
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धारा 15 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
|
धारा 15 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
पोस्त तृण के उत्पादन, कब्जा, परिवहन, आयात-निर्यात, विक्रय, क्रय, उपयोग, भंडारण में उल्लंघन |
|
धारा 15 के अन्तर्गत भंडारण से संबंधित कौन-सा कार्य दंडनीय है? |
भंडागारण में रखने का लोप या भांडागारित पोस्त तृण को हटाना |
|
धारा 15(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा से संबंधित दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों |
|
धारा 15(क) में कारावास की अवधि कब संशोधित की गई? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा एक वर्ष की गई |
|
धारा 15(ख) के अंतर्गत मध्यम मात्रा (अल्प से अधिक, वाणिज्यिक से कम) के लिए दंड क्या है? |
कठोर कारावास से दस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 15(ग) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
कठोर कारावास से दस से बीस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 15 के अन्तर्गत वाणिज्यिक मात्रा के मामलों में अधिकतम जुर्माना कितना है? |
दो लाख रुपए |
|
धारा 15 के अन्तर्गत क्या न्यायालय दो लाख से अधिक जुर्माना लगा सकता है? |
हाँ, विशेष कारणों को निर्णय में लेखबद्ध करके |
|
धारा 16 का विषय क्या है? |
कोका के पौधे और कोका की पत्तियों के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to coca plant and coca leaves) |
|
धारा 16 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
|
धारा 16 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
कोका के पौधे की खेती, भाग का संग्रह, कोका पत्तियों का उत्पादन, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, आयात-निर्यात और उपयोग |
|
धारा 16 के उल्लंघनों का आधार क्या है? |
अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति की शर्त का उल्लंघन |
|
धारा 16 के अन्तर्गत कोका के पौधे से संबंधित कौन-सा कार्य दंडनीय है? |
खेती करना या उसके किसी भाग का संग्रह करना |
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धारा 16 के अन्तर्गत कोका पत्तियों से संबंधित कौन-कौन से कार्य दंडनीय हैं? |
उत्पादन, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात और उपयोग |
|
धारा 16 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास |
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धारा 16 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 17 का विषय क्या है? |
निर्मित अफीम के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to prepared opium) |
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धारा 17 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 17 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
निर्मित अफीम के विनिर्माण, कब्जा, क्रय, विक्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात और उपयोग से संबंधित उल्लंघन |
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धारा 17 के उल्लंघनों का आधार क्या है? |
अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति की शर्त का उल्लंघन |
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धारा 17(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा से संबंधित दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों |
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धारा 17(क) में कारावास की अवधि कब संशोधित की गई? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा एक वर्ष की गई |
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धारा 17(ख) के अंतर्गत मध्यम मात्रा (अल्प से अधिक, वाणिज्यिक से कम) के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 17(ग) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस से बीस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 17(ग) के अन्तर्गत न्यायालय द्वारा अधिक जुर्माना लगाने की शर्त क्या है? |
विशेष कारणों को निर्णय में लेखबद्ध करना |
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धारा 18 का विषय क्या है? |
अफीम पोस्त और अफीम के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to opium poppy and opium) |
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धारा 18 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 18 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
अफीम पोस्त की खेती तथा अफीम के उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात और उपयोग से संबंधित उल्लंघन |
|
धारा 18(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा से संबंधित दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों |
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धारा 18(क) में कारावास की अवधि कब संशोधित की गई? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा एक वर्ष की गई |
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धारा 18(ख) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस से बीस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 18(ख) के अंतर्गत न्यायालय द्वारा अधिक जुर्माना लगाने की शर्त क्या है? |
विशेष कारणों को निर्णय में लेखबद्ध करना |
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धारा 18(ग) के अंतर्गत अन्य मामलों में दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 19 का विषय क्या है? |
खेतिहर द्वारा अफीम के गबन के लिए दंड (Punishment for embezzlement of opium by cultivator) |
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धारा 19 किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
वे खेतिहर जो केन्द्रीय सरकार के लिए अफीम पोस्त की खेती करने के लिए अनुज्ञप्त हैं |
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धारा 19 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास |
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धारा 19 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
एक लाख रुपए से कम नहीं और दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 19 के अंतर्गत न्यायालय अधिक जुर्माना कब अधिरोपित कर सकता है? |
जब विशेष कारण निर्णय में लेखबद्ध किए जाएं |
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धारा 20 का विषय क्या है? |
कैनेबिस के पौधे और कैनेबिस के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to cannabis plant and cannabis.) |
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धारा 20 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
कैनेबिस के पौधे की खेती तथा कैनेबिस के उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात और उपयोग से संबंधित उल्लंघन |
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धारा 20 के उल्लंघनों का आधार क्या है? |
अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति की शर्त का उल्लंघन |
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धारा 20(क) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
कैनेबिस के पौधे की खेती करना |
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धारा 20(1) के अंतर्गत कैनेबिस के पौधे की खेती के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 20(ख) के अंतर्गत कौन-से कृत्य दंडनीय हैं? |
कैनेबिस का उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात और उपयोग |
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धारा 20(ii)(अ) के अंतर्गत अल्प मात्रा के लिए दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
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धारा 20(ii)(अ) में कारावास की अवधि में क्या संशोधन किया गया? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा कारावास अवधि को एक वर्ष किया गया |
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धारा 20(ii)(आ) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा से कम किंतु अल्प मात्रा से अधिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 20(ii)(इ) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 21 का विषय क्या है? |
विनिर्मित ओषधियों और निर्मितियों के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to manufactured drugs and preparations) |
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धारा 21 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
विनिर्मित ओषधि या उसे अंतर्विष्ट करने वाली निर्मिति के विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात-निर्यात और उपयोग से संबंधित उल्लंघन |
|
धारा 21(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा के लिए दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
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धारा 21(क) में कारावास की अवधि में क्या संशोधन किया गया? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा अवधि को एक वर्ष किया गया |
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धारा 21(ख) के अंतर्गत मध्यम मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 21(ग) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 22 का विषय क्या है? |
मनःप्रभावी पदार्थों के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention in relation to psychotropic substances) |
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धारा 22 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 22 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
मनःप्रभावी पदार्थ के विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, क्रय, परिवहन, अंतरराज्यिक आयात, अंतरराज्यिक निर्यात और उपयोग से संबंधित उल्लंघन |
|
धारा 22 के उल्लंघनों का आधार क्या है? |
अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति की शर्त का उल्लंघन |
|
धारा 22(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा के लिए दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
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धारा 22(क) में कारावास की अवधि में क्या संशोधन किया गया? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा अवधि को एक वर्ष किया गया |
|
धारा 22(ख) के अंतर्गत मध्यम मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 22(ग) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 22(ग) के अंतर्गत न्यायालय को अधिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति किस शर्त पर है? |
निर्णय में विशेष कारणों को लेखबद्ध करने पर |
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धारा 23 का विषय क्या है? |
स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों के अवैध आयात, निर्यात या यानांतरण के लिए दंड (Punishment for illegal import into India, export from India or transhipment of narcotic drugs and psychotropic substances) |
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धारा 23 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 23 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ का भारत में आयात, भारत से निर्यात या यानांतरण से संबंधित उल्लंघन |
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धारा 23 के उल्लंघनों का आधार क्या है? |
अधिनियम, नियम, आदेश, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र, प्रमाणपत्र या प्राधिकार की शर्तों का उल्लंघन |
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धारा 23(क) के अंतर्गत अल्प मात्रा के लिए दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
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धारा 23(क) में कारावास की अवधि में क्या संशोधन किया गया? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा अवधि को एक वर्ष किया गया |
|
धारा 23(ख) के अंतर्गत मध्यम मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 23(ग) के अंतर्गत वाणिज्यिक मात्रा के लिए दंड क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 23(ग) के अंतर्गत न्यायालय को अधिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति किस शर्त पर है? |
निर्णय में विशेष कारणों को लेखबद्ध करने पर |
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धारा 24 का विषय क्या है? |
धारा 12 के उल्लंघन में स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों में बाह्य व्यवहार के लिए दंड (Punishment for external dealings in narcotic drugs and psychotropic substances in contravention of section 12) |
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धारा 24 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
केन्द्रीय सरकार के पूर्व प्राधिकार के बिना या उसकी शर्तों के उल्लंघन में बाह्य व्यापार करना |
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धारा 24 के अंतर्गत किस प्रकार का व्यापार इस धारा के अंतर्गत दंडनीय है? |
ऐसा व्यापार जिसमें स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ भारत के बाहर प्राप्त कर बाहर ही प्रदाय किया जाता है |
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धारा 24 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास |
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धारा 24 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
एक लाख रुपए से कम नहीं और दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
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धारा 24 के अंतर्गत न्यायालय को अधिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति किस शर्त पर है? |
निर्णय में विशेष कारणों को लेखबद्ध करने पर |
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धारा 25 का विषय क्या है? |
किसी अपराध के किए जाने के लिए किसी परिसर, आदि का उपयोग किए जाने की अनुज्ञा देने के लिए दण्ड (Punishment for allowing premises, etc., to be used for commission of an offence) |
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धारा 25 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 25 किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
गृह, कक्ष, अहाते, स्थान, जीव-जन्तु या प्रवहण के स्वामी, अधिभोगी या नियंत्रक |
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किस प्रकार का कृत्य धारा 25 के अंतर्गत दंडनीय है? |
किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने हेतु परिसर या साधन के उपयोग की जानबूझकर अनुमति देना |
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धारा 25 के अंतर्गत किस उद्देश्य के लिए उपयोग की अनुमति दंडनीय है? |
इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध के लिए |
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धारा 25-क का विषय क्या है? |
धारा 9-क के अधीन किए गए आदेशों के उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention of orders made under section 9A) |
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धारा 25-क किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
धारा 9-क के अधीन किए गए आदेश का उल्लंघन |
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धारा 25-क के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
दस वर्ष तक का कठोर कारावास |
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धारा 25-क के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
एक लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 25-क के अन्तर्गत न्यायालय को अधिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति किस शर्त पर है? |
निर्णय में विशेष कारणों को लेखबद्ध करने पर एक लाख रुपए से अधिक जुर्माना अधिरोपित किया जा सकता है |
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धारा 26 का विषय क्या है? |
अनुज्ञप्तिधारी या उसके सेवकों द्वारा किए गए कुछ कार्यों के लिए दंड (Punishment for certain acts by licensee or his servants) |
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धारा 26 किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या प्राधिकार का धारक तथा उसके नियोजन में कार्य करने वाले व्यक्ति |
|
धारा 26(क) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
लेखा रखने या विवरणी प्रस्तुत करने का युक्तियुक्त हेतुक के बिना लोप करना |
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धारा 26(ख) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
प्राधिकृत अधिकारी की मांग पर अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या प्राधिकार प्रस्तुत न करना |
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धारा 26(ग) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
मिथ्या लेखा रखना या मिथ्या कथन करना जिसे वह गलत जानता हो या विश्वास करने का कारण हो |
|
धारा 26(घ) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
ऐसी शर्त का जानबूझकर उल्लंघन करना जिसके लिए अन्यत्र कोई शास्ति विहित नहीं है |
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धारा 26 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
तीन वर्ष तक का कारावास |
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धारा 26 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
जुर्माना या कारावास या दोनों |
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धारा 27 का विषय क्या है? |
स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ के उपभोग के लिए दंड (Punishment for consumption of any narcotic drug or psychotropic substance) |
|
धारा 27 कब प्रतिस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
|
धारा 27 किन कृत्यों पर लागू होती है? |
स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ का उपभोग करना |
|
धारा 27(क) किन पदार्थों पर लागू होती है? |
कोकेन, मार्फिन, डाइऐसीटल मार्फिन या केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पदार्थ |
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धारा 27(क) के अंतर्गत दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कठोर कारावास या बीस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
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धारा 27(ख) किन पदार्थों पर लागू होती है? |
खंड (क) में विनिर्दिष्ट पदार्थों से भिन्न अन्य स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ |
|
धारा 27(ख) के अंतर्गत दंड क्या है? |
छह माह तक का कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों |
|
धारा 27-क का विषय क्या है? |
अवैध व्यापार का वित्तपोषण करने और अपराधियों को संश्रय देने के लिए दंड (Punishment for financing illicit traffic and harbouring offenders) |
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धारा 27-क किन कृत्यों पर लागू होती है? |
धारा 2 के खंड (viii ख) के उपखंड (i) से (v) तक वर्णित क्रियाकलापों का वित्तपोषण या उनमें संलग्न व्यक्तियों को संश्रय देना |
|
धारा 27-क के अंतर्गत वित्तपोषण का स्वरूप क्या हो सकता है? |
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तपोषण |
|
धारा 27-क के अंतर्गत संश्रय देने का आशय क्या है? |
अवैध व्यापार में लगे व्यक्तियों को आश्रय या सहायता प्रदान करना |
|
धारा 27-क के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
दस वर्ष से कम नहीं और बीस वर्ष तक का कठोर कारावास |
|
धारा 27-क के अंतर्गत न्यूनतम कारावास कितना है? |
दस वर्ष |
|
धारा 27-क के अंतर्गत अधिकतम कारावास कितना है? |
बीस वर्ष |
|
धारा 27-क के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
एक लाख रुपए से कम नहीं और दो लाख रुपए तक का जुर्माना |
|
धारा 27-क के अंतर्गत न्यूनतम जुर्माना कितना है? |
एक लाख रुपए |
|
धारा 27-क के अंतर्गत अधिकतम जुर्माना कितना है? |
दो लाख रुपए |
|
न्यायालय को अधिक जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति किस शर्त पर है? |
निर्णय में विशेष कारणों को लेखबद्ध करने पर दो लाख रुपए से अधिक जुर्माना अधिरोपित किया जा सकता है |
|
धारा 27-ख का विषय क्या है? |
धारा 8क के उल्लंघन के लिए दंड (Punishment for contravention of section 8A) |
|
धारा 27-ख कब अंतःस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा, 1-5-2014 से |
|
धारा 27-ख किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
धारा 8क के उपबंधों का उल्लंघन |
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धारा 27-ख के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
तीन वर्ष से कम नहीं और दस वर्ष तक का कठोर कारावास |
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धारा 27-ख के अंतर्गत न्यूनतम कारावास कितना है? |
तीन वर्ष |
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धारा 27-ख के अंतर्गत अधिकतम कारावास कितना है? |
दस वर्ष |
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धारा 27-ख के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
जुर्माने से भी दंडनीय |
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धारा 28 का विषय क्या है? |
अपराध करने के प्रयत्नों के लिए दंड (Punishment for attempts to commit offences) |
|
धारा 28 किन कृत्यों पर लागू होती है? |
अध्याय 4 के अधीन दंडनीय अपराध करने या करवाने के प्रयत्न पर |
|
अध्याय 4 के अधीन दंडनीय अपराध करने या करवाने के प्रयत्न का स्वरूप क्या होना चाहिए? |
अपराध के संबंध में कोई कार्य किया गया हो |
|
किस प्रकार के प्रयत्न धारा 28 के अंतर्गत आते हैं? |
अपराध करने का प्रयत्न या अपराध का किया जाना कारित करने का प्रयत्न |
|
धारा 28 के अंतर्गत दंड का स्वरूप क्या है? |
उस अपराध के लिए उपबंधित दंड के अनुसार दंडनीय |
|
धारा 29 का विषय क्या है? |
दुष्प्रेरण और आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड (Punishment for abetment and criminal conspiracy) |
|
धारा 29(1) किन कृत्यों पर लागू होती है? |
इस अध्याय के अधीन दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण करना या आपराधिक षड्यंत्र का पक्षकार होना |
|
धारा 29(1) के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता/बीएनएस के किस प्रावधान के बावजूद यह दंड लागू होगा? |
धारा 116 आईपीसी / धारा 56 बीएनएसएस के बावजूद |
|
धारा 29(2) का उद्देश्य क्या है? |
भारत के बाहर किए गए दुष्प्रेरण या षड्यंत्र को भी दंडनीय बनाना |
|
धारा 29(2) के अंतर्गत कौन-सा दुष्प्रेरण दंडनीय है? |
भारत में रहते हुए विदेश में अपराध कराने का दुष्प्रेरण |
|
धारा 29(2)(क) के अंतर्गत कौन-सा कार्य दंडनीय है? |
ऐसा कार्य जो भारत में किया जाता तो अपराध होता |
|
धारा 29(2)(ख) के अंतर्गत कौन-सा कार्य दंडनीय है? |
विदेश में किया गया ऐसा कार्य जो वहां की विधि के अधीन स्वापक ओषधि/मनःप्रभावी पदार्थ से संबंधित अपराध है और जिसकी विधिक शर्तें भारत के समान हैं |
|
धारा 30 का विषय क्या है? |
तैयारी (Preparation) |
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धारा 30 किन अपराधों पर लागू होती है? |
धारा 19, धारा 24, धारा 27-क तथा वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित अपराधों पर |
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धारा 30 के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
अपराध करने की तैयारी करना या तैयारी करने का लोप करना |
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धारा 30 के अंतर्गत तैयारी को दंडनीय बनाने के लिए क्या आवश्यक है? |
परिस्थितियों से यह अनुमान कि अभियुक्त अपराध करने के लिए दृढ़ संकल्प था |
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धारा 30 के अंतर्गत बाधा का स्वरूप क्या होना चाहिए? |
अभियुक्त की इच्छा से स्वतंत्र परिस्थितियों द्वारा रोका जाना |
|
धारा 30 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
उस अपराध के न्यूनतम दंड की आधी से कम नहीं और अधिकतम दंड के आधे तक |
|
धारा 30 के अंतर्गत न्यूनतम कारावास का निर्धारण कैसे होगा? |
संबंधित अपराध के न्यूनतम दंड की आधी अवधि के आधार पर |
|
धारा 30 के अंतर्गत अधिकतम कारावास का निर्धारण कैसे होगा? |
संबंधित अपराध के अधिकतम दंड की आधी अवधि तक |
|
धारा 30 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
संबंधित अपराध के न्यूनतम जुर्माने की आधी से कम नहीं और अधिकतम जुर्माने के आधे तक |
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धारा 30 के परन्तुक का विषय क्या है? |
न्यायालय द्वारा उच्चतर जुर्माना अधिरोपित करने की शक्ति |
|
धारा 31 का विषय क्या है? |
पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अपराधों के लिए वर्धित दंड (Enhanced punishment for offences after previous conviction) |
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धारा 31(1) किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
वे व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन पूर्व में दोषसिद्ध हो चुके हैं |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत कौन-से कृत्य शामिल हैं? |
अपराध करना, उसका प्रयत्न करना, दुष्प्रेरण करना या आपराधिक षड्यंत्र करना |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत पुनः अपराध करने पर दंड का स्वरूप क्या है? |
द्वितीय और प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के लिए वर्धित दंड |
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धारा 31(1) के अंतर्गत कारावास की अधिकतम सीमा क्या है? |
अधिकतम अवधि के डेढ़ गुणे तक |
|
धारा 31(1) के अंतर्गत जुर्माने की अधिकतम सीमा क्या है? |
अधिकतम रकम के डेढ़ गुणे तक |
|
धारा 31(2) के अंतर्गत न्यूनतम कारावास क्या होगा? |
न्यूनतम अवधि का डेढ़ गुणा |
|
धारा 31(2) के अंतर्गत न्यूनतम जुर्माना क्या होगा? |
न्यूनतम रकम का डेढ़ गुणा |
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धारा 31 के परन्तुक का प्रभाव क्या है? |
न्यायालय विशेष कारणों को लेखबद्ध कर अधिक जुर्माना अधिरोपित कर सकता है |
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धारा 31(3) का उद्देश्य क्या है? |
विदेश में हुई दोषसिद्धि को भी समान रूप से मान्यता देना |
|
धारा 31(3) के अंतर्गत विदेश में दोषसिद्धि का क्या प्रभाव है? |
उसे भारत में हुई दोषसिद्धि के समान माना जाएगा |
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धारा 31-क का विषय क्या है? |
पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् कुछ अपराधों के लिए मृत्यु दंड (Death penalty for certain offences after previous conviction) |
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धारा 31-क कब अंतःस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा, 29-5-1989 से |
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धारा 31-क में किन अपराधों पर विशेष प्रावधान है? |
धारा 19, धारा 24, धारा 27-क तथा वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित अपराध |
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धारा 31-क(1) किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
वे व्यक्ति जो पूर्व में ऐसे अपराधों के लिए दोषसिद्ध हो चुके हैं |
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पुनः दोषसिद्धि की स्थिति में दंड का स्वरूप क्या है? |
धारा 31 में विनिर्दिष्ट दंड से कम नहीं या मृत्यु दंड |
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धारा 31-क(1)(क) किन अपराधों को सम्मिलित करता है? |
निर्दिष्ट स्वापक ओषधियों/मनःप्रभावी पदार्थों की निर्दिष्ट मात्रा के उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, परिवहन, आयात, निर्यात या यानांतरण |
|
अफीम के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
10 किलोग्राम |
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मार्फीन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1 किलोग्राम |
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हिरोइन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1 किलोग्राम |
|
कोडीन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1 किलोग्राम |
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थिबेन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1 किलोग्राम |
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कोकेन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
500 ग्राम |
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हशीश के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
20 किलोग्राम |
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एलएसडी के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
500 ग्राम |
|
टीएचसी के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
500 ग्राम |
|
मेथेमफेटामिन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1500 ग्राम |
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मेथाक्वेलोन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1500 ग्राम |
|
एम्फटेमिन के लिए निर्धारित मात्रा क्या है? |
1500 ग्राम |
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निर्दिष्ट पदार्थों के लवण/निर्मितियों के लिए मात्रा क्या है? |
1500 ग्राम |
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धारा 31-क(1)(ख) के अंतर्गत कौन-सा कृत्य दंडनीय है? |
निर्दिष्ट क्रियाकलापों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तपोषण |
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धारा 31-क(2) का उद्देश्य क्या है? |
विदेश में दोषसिद्धि को भी इस धारा के प्रयोजनों के लिए मान्यता देना |
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धारा 31-क(2) के अंतर्गत विदेश में दोषसिद्धि का प्रभाव क्या है? |
उसे भारत में हुई दोषसिद्धि के समान माना जाएगा |
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धारा 32 का विषय क्या है? |
ऐसे अपराधों के लिए दंड जिनके लिए पृथक दंड का उपबंध नहीं किया गया है (Punishment for offence for which no punishment is provided1) |
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धारा 32 किन उल्लंघनों पर लागू होती है? |
अधिनियम, नियम, आदेश या अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या प्राधिकार की शर्तों के उल्लंघन पर |
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धारा 32 का लागू होने की शर्त क्या है? |
जब उस उल्लंघन के लिए इस अध्याय में पृथक दंड का प्रावधान नहीं हो |
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धारा 32 के अंतर्गत कारावास का प्रावधान क्या है? |
छह माह तक का कारावास |
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धारा 32 के अंतर्गत जुर्माने का प्रावधान क्या है? |
जुर्माना या कारावास या दोनों |
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धारा 32-क का विषय क्या है? |
इस अधिनियम के अधीन दिए गए दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण का अपवर्जन (No suspension, remission or commutation in any sentence awarded under this Act.) |
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धारा 32-क कब अंतःस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा, 29-5-1989 से |
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धारा 32-क किन विधियों के बावजूद लागू होती है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973, बीएनएसएस, 2023 या अन्य प्रवृत्त विधि के बावजूद |
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धारा 32-क किन दंडादेशों पर लागू होती है? |
इस अधिनियम के अधीन दिए गए दंडादेश (धारा 27 को छोड़कर) |
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धारा 32-क के अंतर्गत दंडादेश के संबंध में क्या निषेध है? |
दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण नहीं किया जाएगा |
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धारा 32-क किस प्रावधान के अधीन अपवाद स्वीकार करती है? |
धारा 33 के उपबंधों के अधीन |
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धारा 32-ख का विषय क्या है? |
न्यूनतम दण्ड से उच्चतर दण्ड अधिरोपित करने के लिए विचारणीय बातें (Factors to be taken into account for imposing higher than the minimum punishment) |
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धारा 32-ख कब अंतःस्थापित की गई? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा, 2-10-2001 से |
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धारा 32-ख कब लागू होती है? |
जब अपराध के लिए न्यूनतम कारावास या जुर्माने की रकम विहित हो |
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न्यायालय को क्या शक्ति प्रदान की गई है? |
न्यूनतम दण्ड से अधिक दण्ड अधिरोपित करने की |
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धारा 32-ख(क) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
अपराधी द्वारा हिंसा या आयुध का उपयोग या उसकी धमकी |
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धारा 32-ख(ख) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
लोक पद का दुरुपयोग कर अपराध करना |
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धारा 32-ख(ग) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
अपराध में अवयस्कों का प्रभावित होना या उनका उपयोग |
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धारा 32-ख(घ) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
शिक्षा संस्था या उसके निकट अपराध का किया जाना |
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धारा 32-ख(ङ) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
संगठित अंतर्राष्ट्रीय या अन्य अपराधी समूह से संबद्धता |
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धारा 32-ख(च) के अंतर्गत कौन-सा कारक विचारणीय है? |
अपराध द्वारा सुकर बनाए गए अन्य अवैध क्रियाकलापों में संलिप्तता |
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धारा 33 का विषय क्या है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 360 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 401) और अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 का लागू होना (Application of section 360 of the Code of Criminal Procedure, (Bhartiya Nagrik Suraksha Sanhita 2023) 1973 and of the Probation of Offenders Act, 1958) |
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धारा 33 किन विधियों से संबंधित है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 360 (बीएनएसएस की धारा 401) और अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 |
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धारा 33 का सामान्य प्रभाव क्या है? |
इन प्रावधानों का लाभ सामान्यतः इस अधिनियम के अपराधों पर लागू नहीं होगा |
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किन परिस्थितियों में धारा 33 के प्रावधान लागू हो सकते हैं? |
जब दोषसिद्ध व्यक्ति अठारह वर्ष से कम आयु का हो |
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धारा 33 के अंतर्गत दूसरा अपवाद क्या है? |
जब अपराध धारा 26 या धारा 27 के अधीन दंडनीय हो |
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धारा 33 के अनुसार किन अपराधों पर परिवीक्षा का लाभ उपलब्ध हो सकता है? |
धारा 26 या धारा 27 के अंतर्गत दंडनीय अपराध |
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धारा 34 का विषय क्या है? |
अपराध के किए जाने से प्रविरत रहने के लिए प्रतिभूति (Security for abstaining from commission of offence) |
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धारा 34(1) किन परिस्थितियों में लागू होती है? |
जब कोई व्यक्ति अध्याय 4 के अधीन दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है |
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धारा 34(1) न्यायालय को क्या अधिकार है? |
दोषसिद्ध व्यक्ति से भविष्य में अपराध से विरत रहने हेतु बंधपत्र निष्पादित कराने का आदेश देना |
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धारा 34(1) बंधपत्र की अवधि कितनी हो सकती है? |
तीन वर्ष से अधिक नहीं |
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धारा 34(1) बंधपत्र किस उद्देश्य से लिया जाता है? |
अध्याय 4 के अधीन अपराध करने से प्रविरत रहने के लिए |
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धारा 34(1) बंधपत्र में प्रतिभूति का स्वरूप क्या हो सकता है? |
प्रतिभुओं सहित या उनके बिना |
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धारा 34(1) बंधपत्र की राशि कैसे निर्धारित होती है? |
व्यक्ति के साधनों के अनुपात में |
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धारा 34(2) के अंतर्गत बंधपत्र का प्रारूप क्या होगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित प्रारूप |
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धारा 34(2) बंधपत्र पर कौन-से विधिक प्रावधान लागू होंगे? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 / बीएनएसएस, 2023 के उपबंध |
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धारा 34(2) बंधपत्र को किस प्रकार माना जाएगा? |
धारा 106 CrPC / धारा 125 बीएनएसएस, 2023 के अधीन परिशांति बनाए रखने हेतु निष्पादित बंधपत्र के समान |
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धारा 34(3) के अंतर्गत बंधपत्र कब शून्य होगा? |
जब दोषसिद्धि अपील या अन्यथा अपास्त कर दी जाए |
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धारा 34(4) के अंतर्गत कौन-कौन आदेश पारित कर सकते हैं? |
अपीलीय न्यायालय, उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश (पुनरीक्षण अधिकार में) |
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धारा 35 का विषय क्या है? |
आपराधिक मानसिक दशा की उपधारणा (Presumption of culpable mental state) |
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धारा 35(1) किन मामलों में लागू होती है? |
ऐसे अभियोजन में जहाँ अपराध के लिए मानसिक दशा अपेक्षित हो |
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धारा 35(1) के अंतर्गत न्यायालय किस प्रकार की उपधारणा करेगा? |
अभियुक्त की आपराधिक मानसिक दशा होने की उपधारणा |
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धारा 35(1) के अंतर्गत अभियुक्त के लिए क्या प्रतिरक्षा उपलब्ध है? |
यह सिद्ध करना कि उसके पास आवश्यक मानसिक दशा नहीं थी |
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धारा 35(1) स्पष्टीकरण के अनुसार "आपराधिक मानसिक दशा" में क्या सम्मिलित है? |
आशय, हेतु, किसी तथ्य का ज्ञान और किसी तथ्य में विश्वास या विश्वास करने का कारण |
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धारा 35(2) के अनुसार किसी तथ्य को कब सिद्ध माना जाएगा? |
जब न्यायालय युक्तियुक्त संदेह से परे उसके अस्तित्व पर विश्वास करे |
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धारा 35(2) के अनुसार क्या केवल प्रबल अधिसंभाव्यता के आधार पर तथ्य सिद्ध माना जाएगा? |
नहीं, युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाण आवश्यक है |
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धारा 36 का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों का गठन (Constitution of Special Court) |
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धारा 36 के अनुसार विशेष न्यायालयों का गठन किसके द्वारा किया जाता है? |
सरकार द्वारा |
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धारा 36 के अनुसार विशेष न्यायालयों का गठन किस माध्यम से किया जाता है? |
राजपत्र में अधिसूचना द्वारा |
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धारा 36 के अनुसार विशेष न्यायालयों की संख्या किस आधार पर निर्धारित होती है? |
क्षेत्र या क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार |
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धारा 36(2) के अनुसार विशेष न्यायालय की संरचना क्या है? |
एकल न्यायाधीश वाला न्यायालय |
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धारा 36 के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है? |
सरकार |
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धारा 36 के अनुसार न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए किसकी सहमति आवश्यक है? |
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति |
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धारा 36 के स्पष्टीकरण के अनुसार "उच्च न्यायालय" का क्या अर्थ है? |
वह राज्य का उच्च न्यायालय जहाँ संबंधित न्यायाधीश सेशन या अपर सेशन न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहा था |
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धारा 36(3) के अनुसार न्यायाधीश बनने की योग्यता क्या है? |
नियुक्ति से ठीक पहले सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश होना |
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धारा 36-क का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालयों द्वारा विचारणीय अपराध (Offences triable by Special Courts) |
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धारा 36-क(1) का प्रभाव किस पर है? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता/बीएनएसएस के प्रावधानों के बावजूद |
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धारा 36-क(1)(क) के अंतर्गत कौन-से अपराध विशेष न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं? |
वे सभी अपराध जो तीन वर्ष से अधिक कारावास से दंडनीय हैं |
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धारा 36-क(1)(क) एक से अधिक विशेष न्यायालय होने पर विचारण किस प्रकार होगा? |
सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट एक विशेष न्यायालय द्वारा |
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धारा 36-क(1)(ख) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट की अभिरक्षा संबंधी शक्ति क्या है? |
न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 15 दिन तक और कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा 7 दिन तक निरोध की अनुमति |
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धारा 36-क(1)(ख) मजिस्ट्रेट को विशेष न्यायालय को प्रेषण कब करना होगा? |
जब निरोध अनावश्यक प्रतीत हो या निरोध अवधि समाप्त हो |
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धारा 36-क(1)(ग) के अंतर्गत विशेष न्यायालय की शक्ति क्या है? |
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187) के अधीन मजिस्ट्रेट की समान शक्ति |
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धारा 36-क(1)(घ) के अंतर्गत विशेष न्यायालय की संज्ञान लेने की शक्ति क्या है? |
पुलिस रिपोर्ट या अधिकृत अधिकारी के परिवाद पर, बिना सुपुर्दगी के भी संज्ञान लेना |
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धारा 36-क(2) के अंतर्गत विशेष न्यायालय की अतिरिक्त शक्ति क्या है? |
इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से भिन्न ऐसे अपराध का भी विचारण कर सकेगा जिसके लिए अभियुक्त को, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)( भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के अधीन उसी विचारण में आरोपित किया जाए। |
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धारा 36-क(3) का प्रभाव क्या है? |
धारा 36-क की कोई बात दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 439 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के अधीन जमानत से सम्बन्धित उच्च न्यायालय की विशेष शक्तियों को प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी और उच्च न्यायालय ऐसी शक्तियों का प्रयोग, जिनके अन्तर्गत उस धारा की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन शक्ति भी है, ऐसे कर सकेगा मानो उस धारा में "मजिस्ट्रेट" के प्रति निर्देश के अन्तर्गत धारा 36 के अधीन गठित "विशेष न्यायालय" के प्रति निर्देश भी है। |
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धारा 36-क(4) के अंतर्गत धारा 19 या धारा 24 या धारा 27 क के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्तियों के संबंध में या वाणिज्यिक मात्रा से सम्बन्धित अपराधों के लिए निरोध अवधि क्या होगी? |
नब्बे दिन के स्थान पर एक सौ अस्सी दिन |
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धारा 36-क(4) यदि अन्वेषण को एक सौ अस्सी दिन की अवधि के भीतर पूरा करना सम्भव नहीं है विशेष न्यायालय निरोध अवधि किस की रिपोर्ट के आधार पर और कितनी बढ़ा सकता है? |
लोक अभियोजक की रिपोर्ट के आधार पर एक वर्ष तक |
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धारा 36-क(5) के अंतर्गत किन अपराधों का संक्षिप्त विचारण किया जा सकता है? |
तीन वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध |
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धारा 36-ख का विषय क्या है? |
अपील और पुनरीक्षण (Appeal and revision) |
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धारा 36-ख के अंतर्गत उच्च न्यायालय को कौन-सी शक्तियाँ प्राप्त हैं? |
दंड प्रक्रिया संहिता/बीएनएसएस के अध्याय 29 और 30 के अधीन प्रदत्त सभी शक्तियाँ |
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धारा 36-ख के अंतर्गत उच्च न्यायालय इन शक्तियों का प्रयोग किस प्रकार करेगा? |
मानो विशेष न्यायालय, सेशन न्यायालय के समान हो |
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धारा 36-ख के अनुसार विशेष न्यायालय की स्थिति क्या मानी जाएगी? |
उच्च न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता में स्थित सेशन न्यायालय के समान |
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धारा 36-ग का विषय क्या है? |
विशेष न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों को संहिता का लागू होना (Application of Code to proceedings before a Special Court) |
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धारा 36-ग के अनुसार किन प्रावधानों का विशेष न्यायालय में प्रयोग होगा? |
दंड प्रक्रिया संहिता / बीएनएसएस के प्रावधान |
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धारा 36-ग के अनुसार क्या जमानत और बंधपत्र से संबंधित प्रावधान भी लागू होंगे? |
हाँ, वे भी लागू होंगे |
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धारा 36-ग के अनुसार विशेष न्यायालय को किसके समान माना जाएगा? |
सेशन न्यायालय के समान |
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धारा 36-ग के अनुसार विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोजन संचालित करने वाला व्यक्ति क्या माना जाएगा? |
लोक अभियोजक माना जाएगा |
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धारा 36-घ का विषय क्या है? |
संक्रमणकालीन उपबन्ध (Transitional provisions) |
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धारा 36-घ के अनुसार विशेष न्यायालय के गठन तक स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1989 का 2) के प्रारम्भ पर या उसके पश्चात् इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध का विचारण कौन करेगा? |
सेशन न्यायालय |
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धारा 36-घ(1) किन अपराधों पर लागू होती है? |
वे अपराध जो विशेष न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं |
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धारा 36-घ(2) के अनुसार लंबित मामलों का विचारण कौन करेगा? |
सेशन न्यायालय |
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धारा 36-घ के प्रावधानों के बावजूद उच्च न्यायालय की कौन-सी शक्ति अप्रभावित रहती है? |
उच्च न्यायालय की मामलों के अंतरण की शक्ति |
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धारा 36-घ के अनुसार उच्च न्यायालय किस प्रावधान के अंतर्गत अंतरण की शक्ति प्रयोग करता है? |
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 407 / बीएनएसएस की धारा 447 |
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धारा 37 का विषय क्या है? |
अपराधों का संज्ञेय और अजमानतीय होना (Offences to be cognizable and non-bailable) |
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धारा 37(1) का प्रभाव किस पर है? |
दंड प्रक्रिया संहिता / बीएनएसएस के प्रावधानों के बावजूद |
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धारा 37(1)(क) के अनुसार इस अधिनियम के अधीन अपराधों की प्रकृति क्या है? |
सभी अपराध संज्ञेय हैं |
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धारा 37(1)(ख) किन अपराधों में जमानत पर प्रतिबंध लगाता है? |
धारा 19, 24, 27क तथा वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित अपराध |
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धारा 37(1)(ख) के अनुसार ऐसे मामलों में जमानत देने की पहली शर्त क्या है? |
लोक अभियोजक को विरोध का अवसर दिया जाना |
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धारा 37(1)(ख) के अनुसार दूसरी शर्त क्या है जब लोक अभियोजक विरोध करता है? |
न्यायालय को यह विश्वास होना कि अभियुक्त दोषी नहीं है और पुनः अपराध नहीं करेगा |
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धारा 37(2) का प्रभाव क्या है? |
जमानत की ये शर्तें अन्य विधियों की शर्तों के अतिरिक्त हैं |
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धारा 38 का विषय क्या है? |
कम्पनियों द्वारा अपराध (Offences by companies) |
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धारा 38(1) के अनुसार कंपनी द्वारा अपराध होने पर कौन दोषी होगा? |
कंपनी तथा वह प्रत्येक व्यक्ति जो उसके कारबार के संचालन के लिए उत्तरदायी था |
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धारा 38(1) में उत्तरदायित्व किन व्यक्तियों पर लागू होता है? |
वे व्यक्ति जो अपराध के समय कंपनी के कार्य संचालन के प्रभारी और उत्तरदायी थे |
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धारा 38(1) के अंतर्गत व्यक्ति को दंड से बचने का आधार क्या है? |
यह सिद्ध करना कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ या उसने निवारण हेतु सम्यक् तत्परता बरती |
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धारा 38(2) के अनुसार किन अधिकारियों को भी दोषी माना जाएगा? |
निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी |
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धारा 38(2) में दोषसिद्धि का आधार क्या है? |
सहमति, मौनानुकूलता या उपेक्षा के कारण अपराध होना |
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धारा 38(2) के स्पष्टीकरण के अनुसार "कंपनी" का क्या अर्थ है? |
कोई निगमित निकाय, जिसमें फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम भी शामिल है |
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धारा 38(2) के अनुसार स्पष्टीकरण के अनुसार फर्म में "निदेशक" किसे माना जाएगा? |
फर्म का भागीदार |
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धारा 39 का विषय क्या है? |
कुछ अपराधियों को परिवीक्षा पर निर्मुक्त करने की न्यायालय की शक्ति (Power of court to release certain offenders on probation) |
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धारा 39(1) के अनुसार किन अपराधियों पर लागू होती है? |
व्यसनी धारा 27 के अधीन या किसी स्वापक ओषधि या मनः प्रभावी पदार्थ की अल्प मात्रा से संबंधित अपराधों में दोषी व्यक्ति |
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धारा 39(1) के अनुसार न्यायालय किन बातों को ध्यान में रखकर परिवीक्षा दे सकता है? |
आयु, चरित्र, पूर्ववृत्त तथा शारीरिक या मानसिक दशा |
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धारा 39(1) के अंतर्गत न्यायालय क्या विकल्प चुन सकता है? |
कारावास के स्थान पर उपचार हेतु निर्मुक्त करना |
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धारा 39(1) के अंतर्गत निर्मुक्ति के लिए क्या शर्त हो सकती है? |
अभियुक्त की सहमति से उसे सरकार द्वारा चलाए जा रहे या मान्यता प्राप्त किसी अस्पताल या संस्था से निराविषीकरण या निराव्यसन के लिए चिकित्सीय उपचार कराने के लिए |
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धारा 39(1) के अंतर्गत उपचार कहाँ कराया जाएगा? |
सरकार द्वारा संचालित या मान्यता प्राप्त अस्पताल या संस्था में |
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धारा 39(1) के अंतर्गत अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष कब उपस्थित होना होगा? |
एक वर्ष से अनधिक अवधि के भीतर |
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धारा 39(2) का विषय क्या है? |
उपचार रिपोर्ट के आधार पर परिवीक्षा पर निर्मुक्ति |
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धारा 39(2) के अंतर्गत न्यायालय किस आधार पर निर्णय लेता है? |
चिकित्सीय उपचार की रिपोर्ट के आधार पर |
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धारा 39(2) के अंतर्गत न्यायालय किस प्रकार की निर्मुक्ति प्रदान कर सकता है? |
सम्यक् भर्त्सना के पश्चात् बंधपत्र पर निर्मुक्ति |
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धारा 39(2) के अंतर्गत बंधपत्र की अवधि कितनी हो सकती है? |
तीन वर्ष से अधिक नहीं |
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धारा 39(2) के अंतर्गत यदि अपराधी शर्तों का पालन न करे तो क्या होगा? |
उसे न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर दंडादेश प्राप्त करना होगा |
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धारा 39(2) के अंतर्गत न्यायालय द्वारा अतिरिक्त क्या निर्देश दिया जा सकता है? |
आवश्यकता पड़ने पर अवधि के दौरान उपस्थित होकर दंडादेश प्राप्त करना |
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धारा 40 का विषय क्या है? |
कुछ अपराधियों के नामों, कारबार के स्थान आदि का प्रकाशन (Power of court to publish names, place of business, etc., of certain offenders) |
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धारा 40(1) किन अपराधों पर लागू होती है? |
धारा 15 से 25, 28, 29 और 30 के अधीन दंडनीय अपराध |
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धारा 40(1) के अंतर्गत न्यायालय को क्या शक्ति प्राप्त है? |
दोषसिद्ध व्यक्ति के नाम, पता और अपराध का विवरण प्रकाशित कराने की शक्ति |
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धारा 40(1) के अंतर्गत प्रकाशन में कौन-कौन सी बातें सम्मिलित हो सकती हैं? |
नाम, कारबार या निवास स्थान, उल्लंघन की प्रकृति, दोषसिद्धि का तथ्य और अन्य विशिष्टियां |
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धारा 40(1) के अंतर्गत प्रकाशन का व्यय कौन वहन करेगा? |
दोषसिद्ध व्यक्ति |
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धारा 40(1) के अंतर्गत प्रकाशन किस माध्यम से किया जाएगा? |
समाचारपत्रों या न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट अन्य रीति से |
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धारा 40(2) के अनुसार प्रकाशन कब किया जाएगा? |
अपील अवधि समाप्त होने या अपील के निपटान के बाद |
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धारा 40(3) के अनुसार प्रकाशन का व्यय कैसे वसूला जाएगा? |
न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने के समान वसूला जाएगा |
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अध्याय-5 (CHAPTER-V) |
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प्रक्रिया (PROCEDURE) |
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अध्याय 5 किससे सम्बंधित है ? |
प्रक्रिया (Procedure) |
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धारा 41 का विषय क्या है? |
वारण्ट जारी करने की शक्ति और प्राधिकार (Power to issue warrant and authorisation) |
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धारा 41(1) के अंतर्गत किन मजिस्ट्रेटों को वारण्ट जारी करने की शक्ति है? |
महानगर मजिस्ट्रेट, प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट और राज्य सरकार द्वारा सशक्त द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट |
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धारा 41(1) के अंतर्गत वारण्ट कब जारी किया जा सकता है? |
जब मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण हो कि अपराध किया गया है या साक्ष्य/संपत्ति छिपाई गई है |
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धारा 41(1) के अंतर्गत वारण्ट किन उद्देश्यों के लिए जारी किया जा सकता है? |
गिरफ्तारी और भवन, प्रवहण या स्थान की तलाशी |
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धारा 41(1) के अंतर्गत वारण्ट किन वस्तुओं के संबंध में जारी किया जा सकता है? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ, दस्तावेज, साक्ष्य या अवैध संपत्ति |
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धारा 41(2) के अंतर्गत किन अधिकारियों को शक्ति दी गई है? |
केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा सशक्त राजपत्रित अधिकारी |
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धारा 41(2) के अंतर्गत अधिकारी कब कार्य कर सकता है? |
व्यक्तिगत जानकारी या लिखित सूचना के आधार पर विश्वास होने पर |
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धारा 41(2) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
स्वयं गिरफ्तारी या तलाशी कर सकता है या अधीनस्थ अधिकारी को प्राधिकृत कर सकता है |
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धारा 41(2) के अंतर्गत अधीनस्थ अधिकारी की न्यूनतम श्रेणी क्या होगी? |
चपरासी, सिपाही या कांस्टेबल से वरिष्ठ अधिकारी |
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धारा 41(3) के अंतर्गत किन अधिकारियों को धारा 42 की शक्तियाँ प्राप्त होंगी? |
वारण्ट प्राप्त अधिकारी, प्राधिकृत अधिकारी और उपधारा (2) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी |
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धारा 42 का विषय क्या है? |
वारण्ट या प्राधिकार के बिना प्रवेश, तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारी की शक्ति (Power of entry, search, seizure and arrest without warrant or authorization) |
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धारा 42(1) के अंतर्गत किन अधिकारियों को शक्ति प्राप्त है? |
केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा सशक्त ऐसे अधिकारी जो चपरासी, सिपाही या कांस्टेबल से वरिष्ठ हों |
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धारा 42(1) के अंतर्गत अधिकारी कब कार्य कर सकता है? |
व्यक्तिगत जानकारी या लिखित सूचना के आधार पर विश्वास होने पर |
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धारा 42(1) के अंतर्गत किन स्थानों पर कार्यवाही की जा सकती है? |
भवन, प्रवहण या परिवेष्टित स्थान |
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धारा 42(1) के अनुसार कार्यवाही का समय क्या है? |
सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच |
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धारा 42(1)(क) के अंतर्गत अधिकारी को क्या शक्ति है? |
भवन, प्रवहण या स्थान में प्रवेश कर तलाशी लेना |
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धारा 42(1)(ख) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
प्रतिरोध होने पर द्वार तोड़ना और बाधाएँ हटाना |
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धारा 42(1)(ग) के अंतर्गत क्या अभिग्रहण किया जा सकता है? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, सामग्री, दस्तावेज, साक्ष्य, अवैध संपत्ति, जीव-जन्तु या प्रवहण |
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धारा 42(1)(घ) के अंतर्गत व्यक्ति के संबंध में क्या शक्ति है? |
संदेहास्पद व्यक्ति को निरुद्ध करना, तलाशी लेना और आवश्यक होने पर गिरफ्तार करना |
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धारा 42 के प्रथम परंतुक का क्या प्रावधान है? |
अनुज्ञप्तिधारी के मामले में कार्यवाही उपनिरीक्षक या उससे उच्च अधिकारी द्वारा ही की जाएगी |
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धारा 42 के द्वितीय परंतुक का क्या प्रावधान है? |
वारण्ट प्राप्त न होने की स्थिति में कारण लेखबद्ध कर तत्काल तलाशी की जा सकती है |
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धारा 42(2) के अंतर्गत अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
लिखित सूचना या विश्वास के आधार की प्रति 72 घंटे के भीतर वरिष्ठ अधिकारी को भेजना |
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धारा 43 का विषय क्या है? |
लोक स्थान में अभिग्रहण और गिरफ्तार करने की शक्ति (Power of seizure and arrest in public place) |
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धारा 43 के अंतर्गत किन अधिकारियों को शक्ति प्राप्त है? |
धारा 42 में उल्लिखित विभागों के अधिकारी |
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धारा 43(क) के अंतर्गत क्या अभिग्रहण किया जा सकता है? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ, जीव-जन्तु, प्रवहण, वस्तु, दस्तावेज या साक्ष्य |
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धारा 43(क) के अंतर्गत अभिग्रहण का आधार क्या है? |
यह विश्वास कि अधिनियम के अधीन अपराध किया गया है |
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धारा 43(क) के अंतर्गत क्या अवैध संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी अभिगृहीत किए जा सकते हैं? |
हाँ, यदि वे अवैध संपत्ति का साक्ष्य हों |
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धारा 43(ख) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
व्यक्ति को निरुद्ध करना, तलाशी लेना और आवश्यकता होने पर गिरफ्तार करना |
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धारा 43(ख) के अंतर्गत गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में की जा सकती है? |
जब कब्जे में अवैध स्वापक ओषधि या मनःप्रभावी पदार्थ पाया जाए |
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धारा 43(ख) के अंतर्गत क्या अन्य व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है? |
हाँ, साथ के अन्य व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है |
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धारा 43(ख) के अंतर्गत स्पष्टीकरण के अनुसार "लोक स्थान" का क्या अर्थ है? |
लोक प्रवहण, होटल, दुकान या अन्य स्थान जहाँ जनता की पहुँच हो |
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धारा 44 का विषय क्या है? |
कोका के पौधे, अफीम पोस्त और कैनेबिस के पौधे से संबंधित अपराधों में शक्ति (Power of entry, search, seizure and arrest in offences relating to coca plant, opium poppy and cannabis plant) |
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धारा 44 के अंतर्गत किन धाराओं के प्रावधान लागू होते हैं? |
धारा 41, धारा 42 और धारा 43 |
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धारा 44 किन अपराधों पर लागू होती है? |
अध्याय 4 के अधीन दंडनीय तथा कोका, अफीम पोस्त और कैनेबिस पौधे से संबंधित अपराध |
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धारा 44 का प्रभाव क्या है? |
प्रवेश, तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारी की शक्तियाँ लागू होती हैं |
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धारा 44 के अनुसार निर्देशों का क्या अर्थ होगा? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ के स्थान पर कोका, अफीम पोस्त और कैनेबिस पौधे भी शामिल होंगे |
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धारा 45 का विषय क्या है? |
जहां अधिहरण के लिए दायी माल का अभिग्रहण साध्य नहीं है वहां प्रक्रिया (Procedure where seizure of goods liable to confiscation not practicable) |
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धारा 45 कब लागू होती है? |
जब अधिहरण के लिए दायी माल का अभिग्रहण संभव न हो |
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धारा 45 के अंतर्गत "माल" में क्या सम्मिलित है? |
खड़ी फसल सहित अन्य माल |
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धारा 45 के अंतर्गत किस अधिकारी को शक्ति प्राप्त है? |
धारा 42 के अधीन सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारी |
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धारा 45 के अंतर्गत अधिकारी क्या आदेश दे सकता है? |
माल को बिना पूर्व अनुज्ञा हटाने, विलग करने या अन्य कार्रवाई करने पर रोक |
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धारा 45 के अंतर्गत यह आदेश किसे दिया जाता है? |
माल के स्वामी या कब्जाधारी व्यक्ति को |
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धारा 46 का विषय क्या है? |
अवैध खेती की इत्तिला देने का भू-धारक का कर्तव्य (Duty of land holder to give information of illegal cultivation) |
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धारा 46 के अंतर्गत भू-धारक का कर्तव्य क्या है? |
अपनी भूमि पर अवैध खेती की सूचना देना |
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धारा 46 के अंतर्गत किन पौधों की अवैध खेती की सूचना देना आवश्यक है? |
अफीम पोस्त, कैनेबिस और कोका के पौधे |
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धारा 46 के अंतर्गत सूचना किसे दी जानी चाहिए? |
पुलिस अधिकारी या धारा 42 में उल्लिखित विभाग के अधिकारी को |
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धारा 46 के अंतर्गत दंड कब लगाया जाएगा? |
जब भू-धारक जानबूझकर सूचना देने में उपेक्षा करे |
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धारा 47 का विषय क्या है? |
अवैध खेती की इत्तिला देने का कुछ अधिकारियों का कर्त्तव्य (Duty of certain officers to give information of illegal cultivation) |
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धारा 47 के अंतर्गत किन व्यक्तियों पर कर्तव्य अधिरोपित है? |
सरकारी अधिकारी, पंच, सरपंच तथा अन्य ग्राम अधिकारी |
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धारा 47 के अंतर्गत किस प्रकार की सूचना देना अनिवार्य है? |
अफीम पोस्त, कैनेबिस या कोका पौधे की अवैध खेती की सूचना |
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धारा 47 के अंतर्गत सूचना कब दी जानी चाहिए? |
जैसे ही जानकारी प्राप्त हो, तुरन्त |
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धारा 47 के अंतर्गत सूचना किसे दी जानी चाहिए? |
पुलिस अधिकारी या धारा 42 में उल्लिखित विभाग के अधिकारी को |
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धारा 47 के अंतर्गत दंड कब लगाया जाएगा? |
जब संबंधित अधिकारी या ग्राम अधिकारी सूचना देने में उपेक्षा करे |
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धारा 48 का विषय क्या है? |
अवैध रूप से की गई खेती की फसल को कुर्क करने की शक्ति (Power of attachment of crop illegally cultivated) |
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धारा 48 के अंतर्गत किन अधिकारियों को शक्ति प्राप्त है? |
महानगर मजिस्ट्रेट, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा सशक्त मजिस्ट्रेट |
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धारा 48 के अंतर्गत आदेश कब पारित किया जा सकता है? |
जब अवैध खेती होने का विश्वास करने का कारण हो |
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किन पौधों की फसल कुर्क की जा सकती है? |
अफीम पोस्त, कैनेबिस और कोका के पौधे |
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धारा 48 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट क्या आदेश दे सकता है? |
फसल को कुर्क करने और आवश्यक आदेश पारित करने का |
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धारा 49 का विषय क्या है? |
प्रवहण को रोकने और उसकी तलाशी लेने की शक्ति (Power to stop and search conveyance) |
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धारा 49 के अंतर्गत किस अधिकारी को शक्ति प्राप्त है? |
धारा 42 के अधीन प्राधिकृत अधिकारी |
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धारा 49 के अंतर्गत कार्रवाई कब की जा सकती है? |
जब संदेह हो कि जीवजंतु या प्रवहण का उपयोग अवैध परिवहन में हो रहा है या होगा |
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धारा 49 के अंतर्गत किन पदार्थों के संबंध में यह शक्ति लागू होती है? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ |
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धारा 49 के अंतर्गत संदेह का आधार क्या है? |
अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन का संदेह |
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धारा 49 के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
जीवजंतु या प्रवहण को रोक सकता है |
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वायुयान के मामले में अधिकारी क्या कर सकता है? |
उसे भूमि पर उतरने के लिए विवश कर सकता है |
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धारा 49(क) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
प्रवहण या उसके किसी भाग की तलाशी और छानबीन करना |
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धारा 49(ख) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
जीवजंतु या प्रवहण में मौजूद माल की परीक्षा और तलाशी लेना |
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धारा 49(ग) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
रोकने हेतु सभी विधिपूर्ण साधनों का प्रयोग करना और आवश्यकता होने पर गोली चलाना |
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धारा 50 का विषय क्या है? |
वे शर्तें जिनके अधीन व्यक्तियों की तलाशी ली जाएगी (Conditions under which search of persons shall be conducted) |
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धारा 50(1) के अंतर्गत अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
व्यक्ति के अनुरोध पर उसे निकटतम राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के पास ले जाना |
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धारा 50(1) कब लागू होती है? |
जब धारा 41, 42 या 43 के अधीन किसी व्यक्ति की तलाशी ली जानी हो |
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धारा 50(2) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
व्यक्ति को तब तक निरुद्ध रख सकता है जब तक उसे अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत न कर दे |
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धारा 50(3) के अंतर्गत राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट क्या निर्णय ले सकता है? |
तलाशी का आधार न होने पर मुक्त करना या अन्यथा तलाशी का निर्देश देना |
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धारा 50(4) के अंतर्गत स्त्री की तलाशी कैसे ली जाएगी? |
केवल स्त्री द्वारा ही ली जाएगी |
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धारा 50(5) के अंतर्गत कब सीधे तलाशी ली जा सकती है? |
जब व्यक्ति को अलग किए बिना राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के पास ले जाना संभव न हो |
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धारा 50(5) के अंतर्गत तलाशी किस प्रावधान के अनुसार होगी? |
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 (बीएनएसएस की धारा 103 के अनुसार) |
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धारा 50(6) के अंतर्गत अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
तलाशी के कारणों को लेखबद्ध कर 72 घंटे के भीतर वरिष्ठ अधिकारी को भेजना |
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धारा 50-क का विषय क्या है? |
नियंत्रित परिदान जिम्मे लेने की शक्ति (Power to undertake controlled delivery) |
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धारा 50-क के अंतर्गत यह शक्ति किसे प्राप्त है? |
स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के महानिदेशक या उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को |
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धारा 50-क के अंतर्गत यह शक्ति किसके अधीन गठित प्राधिकरण से संबंधित है? |
धारा 4(3) के अधीन गठित स्वापक नियंत्रण ब्यूरो |
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धारा 50-क के अंतर्गत क्या किया जा सकता है? |
किसी परेषण का नियंत्रित परिदान अपने जिम्मे लेना |
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धारा 50-क के अंतर्गत नियंत्रित परिदान किन गंतव्यों के लिए किया जा सकता है? |
भारत के भीतर या विदेश के लिए |
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धारा 50-क के अंतर्गत यह विदेश के मामले में क्या अतिरिक्त शर्त है? |
संबंधित विदेशी सक्षम प्राधिकारी से परामर्श |
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धारा 50-क के अंतर्गत यह नियंत्रित परिदान किस प्रकार किया जाएगा? |
विहित रीति के अनुसार |
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धारा 51 का विषय क्या है? |
दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का वारंट, गिरफ्तारी, तलाशी और अभिग्रहण पर लागू होना (Provisions of the code of Criminal Procedure, 1973 to apply to warrants, arrests, searches and seizures) |
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धारा 51 के अंतर्गत किन प्रावधानों को लागू किया गया है? |
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 / बीएनएसएस, 2023 के प्रावधान |
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धारा 51 के अनुसार ये प्रावधान किन कार्यवाहियों पर लागू होते हैं? |
वारंट, गिरफ्तारी, तलाशी और अभिग्रहण |
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धारा 51 के अनुसार प्रावधानों के लागू होने की शर्त क्या है? |
वे अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों |
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धारा 51 का प्रभाव क्या है? |
प्रक्रिया संबंधी प्रावधानों का पूरक रूप से अनुप्रयोग |
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धारा 52 का विषय क्या है? |
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों और अभिगृहीत्त वस्तुओं का निपटारा (Disposal of persons arrested and articles seized) |
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धारा 52(1) के अंतर्गत अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना देना |
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धारा 52(2) के अंतर्गत किन मामलों में व्यक्ति और वस्तु मजिस्ट्रेट को भेजे जाएंगे? |
धारा 41(1) के अधीन वारंट द्वारा गिरफ्तारी के मामलों में |
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धारा 52(2) के अंतर्गत किस मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा? |
वह मजिस्ट्रेट जिसने वारंट जारी किया हो |
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धारा 52(3) किन मामलों पर लागू होती है? |
धारा 41(2), 42, 43 और 44 के अधीन गिरफ्तारी |
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धारा 52(3) के अंतर्गत व्यक्ति और वस्तु कहाँ भेजे जाएंगे? |
निकटतम पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी या धारा 53 के अधीन सशक्त अधिकारी को |
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धारा 52(4) के अंतर्गत संबंधित अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
विधि के अनुसार व्यक्ति और वस्तु के निपटारे के लिए आवश्यक उपाय करना |
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धारा 52-क का विषय क्या है? |
अभिगृहीत स्वापक ओषधियों और मनःप्रभावी पदार्थों का व्ययन (Disposal of seized narcotic drugs and psychotropic substances) |
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धारा 52-क(1) के अंतर्गत केंद्रीय सरकार को क्या शक्ति प्राप्त है? |
अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट पदार्थों के व्ययन का प्रावधान करना |
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धारा 52-क(1) के अंतर्गत किन पदार्थों को निर्दिष्ट किया जा सकता है? |
स्वापक ओषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ या हस्तांतरण |
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धारा 52-क(1) के अंतर्गत निर्देशन किन आधारों पर किया जाता है? |
परिसंकटमय प्रकृति, चोरी की संवेदनशीलता, प्रतिस्थापन, भंडारण की कठिनाई या अन्य कारण |
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धारा 52-क(1) के अंतर्गत व्ययन कब किया जाएगा? |
अभिग्रहण के पश्चात् यथाशीघ्र |
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धारा 52-क(1) के अंतर्गत व्ययन किसके द्वारा और कैसे किया जाएगा? |
निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा और सरकार द्वारा निर्धारित रीति से |
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धारा 52-क(2) के अंतर्गत अधिकारी का कर्तव्य क्या है? |
अभिगृहीत पदार्थों की विस्तृत तालिका तैयार करना |
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तालिका में कौन-कौन से विवरण होंगे? |
वर्णन, गुणवत्ता, मात्रा, पैकिंग, चिन्हांकन, संख्यांक, पहचान संबंधी विशेषताएँ, उद्भव देश आदि |
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धारा 52-क(2) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष क्या आवेदन किया जाता है? |
तालिका प्रमाणित करने, फोटो लेने और नमूने लेने हेतु |
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ऐसी स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों या पैकिंग की, जिनमें वे पैक किए गए हैं, पहचान कराने वाली अन्य विशिष्टियां, उद्भव का देश और अन्य विशिष्टियों से संबंधित ऐसे अन्य ब्यौरे दिए गए हों, जिन्हें उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों में ऐसी स्वापक ओषधियों या मनःप्रभावी पदार्थों या नियंत्रित पदार्थों या हस्तांतरणों को पहचान के लिए सुसंगत समझे और किसी मजिस्ट्रेट को किन प्रयोजन के लिए आवेदन करेगा- |
ऐसे तैयार की गई तालिका का सही होना प्रमाणित करने के लिए; या ऐसे मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में 3[ऐसी ओषधियों, पदार्थों, या हस्तांतरणों] के फोटोचित्र लेने और ऐसे फोटोचित्रों का सही होना प्रमाणित करने के लिए; या ऐसे मजिस्ट्रेटों की उपस्थिति में ऐसी ओषधियों या पदार्थों के प्रतिनिधि नमूने लिए जाने की अनुज्ञा देने के लिए और ऐसे लिए गए नमूनों की किसी सूची का सही होना प्रमाणित करने के लिए। |
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धारा 52-क(3) के अनुसार मजिस्ट्रेट का कर्तव्य क्या है? |
आवेदन को यथाशीघ्र मंजूर करना |
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धारा 52-क(4) के अनुसार क्या साक्ष्य माना जाएगा? |
प्रमाणित तालिका, फोटोचित्र और नमूने की सूची प्राथमिक साक्ष्य होंगे |
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धारा 53 का विषय क्या है? |
पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियों का अन्य अधिकारियों में विनियोजन (Power to invest officers of certain departments with powers of an officer-in-charge of a police station) |
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धारा 53(1) के अंतर्गत किसे शक्ति प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार को |
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धारा 53(1) के अंतर्गत यह शक्ति किस उद्देश्य से है? |
अधिनियम के अधीन अपराधों के अन्वेषण के लिए |
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धारा 53(1) के अंतर्गत केन्द्रीय सरकार किन विभागों के अधिकारियों में शक्तियाँ विनिहित कर सकती है? |
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, स्वापक, सीमाशुल्क, राजस्व आसूचना या अन्य विभागों के अधिकारी |
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धारा 53(1) के अंतर्गत अधिसूचना से पूर्व क्या आवश्यक है? |
राज्य सरकार से परामर्श |
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धारा 53(2) के अंतर्गत किसे शक्ति प्राप्त है? |
राज्य सरकार को |
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राज्य सरकार किन विभागों के अधिकारियों में शक्तियाँ विनिहित कर सकती है? |
ओषधि नियंत्रण, राजस्व, उत्पाद शुल्क या अन्य विभागों के अधिकारी |
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धारा 53-क का विषय क्या है? |
कतिपय परिस्थितियों में कथनों की सुसंगतता (Relevancy of statements under certain circumstances) |
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धारा 53-क(1) के अंतर्गत किस प्रकार के कथन सुसंगत हैं? |
धारा 53 के अधीन सशक्त अधिकारी के समक्ष जांच के दौरान दिए गए हस्ताक्षरित कथन |
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धारा 53-क(1)(क) के अंतर्गत कथन कब सुसंगत होगा? |
जब कथनकर्ता मृत हो, अनुपलब्ध हो, साक्ष्य देने में असमर्थ हो या उसकी उपस्थिति प्राप्त न की जा सके |
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धारा 53-क(1)(ख) के अंतर्गत कथन कब सुसंगत होगा? |
जब कथनकर्ता साक्षी के रूप में उपस्थित हो और न्यायालय न्यायहित में कथन को स्वीकार करे |
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धारा 53-क(2) का प्रभाव क्या है? |
ये प्रावधान न्यायालय के अतिरिक्त अन्य कार्यवाहियों पर भी लागू होते हैं |
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धारा 54 का विषय क्या है? |
अवैध वस्तुओं के कब्जे से उपधारणा (Presumption from possession of illicit articles) |
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धारा 54 का सामान्य सिद्धांत क्या है? |
कब्जे के आधार पर अपराध की उपधारणा की जाएगी जब तक विपरीत सिद्ध न हो |
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धारा 54 के अंतर्गत उपधारणा कब लागू होती है? |
जब व्यक्ति कब्जे के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहता है |
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धारा 54(क) के अंतर्गत किन वस्तुओं पर उपधारणा लागू होती है? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ |
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धारा 54(ख) के अंतर्गत किन परिस्थितियों में उपधारणा होगी? |
व्यक्ति की भूमि पर उगे अफीम पोस्त, कैनेबिस या कोका पौधे के संबंध में |
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धारा 54(ग) के अंतर्गत किन वस्तुओं पर उपधारणा होगी? |
विनिर्माण हेतु विशेष रूप से परिकल्पित साधन या बर्तन |
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धारा 54(घ) के अंतर्गत किन वस्तुओं पर उपधारणा होगी? |
विनिर्माण से संबंधित प्रसंस्कृत सामग्री या अवशेष |
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धारा 54 का प्रभाव क्या है? |
आरोपी पर प्रतिकूल साक्ष्य का भार स्थानांतरित होता है |
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धारा 55 का विषय क्या है? |
अभिगृहीत और परिदत्त वस्तुओं का पुलिस द्वारा अपने भारसाधन में लेना (Police to take charge of articles seized and delivered) |
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धारा 55 के अंतर्गत किस अधिकारी की जिम्मेदारी होती है? |
पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी (SHO) |
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धारा 55 के अनुसार कौन-सी वस्तुएं उसके कब्जे में ली जाती हैं? |
अधिनियम के तहत अभिगृहीत और उसे परिदत्त सभी वस्तुएं |
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वस्तुओं को कब तक अपने कब्जे में रखा जाता है? |
मजिस्ट्रेट के आदेश लंबित रहने तक |
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वस्तुओं के साथ क्या किया जाता है? |
उन्हें सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाता है |
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धारा 55 के तहत किन कार्यों की अनुमति दी जाती है? |
वस्तुओं पर मुहर लगाना और नमूना लेना |
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नमूनों के संबंध में क्या प्रावधान है? |
लिए गए सभी नमूनों पर SHO की मुहर लगाई जाएगी |
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धारा 56 का विषय क्या है? |
अधिकारियों की एक दूसरे की सहायता करने की बाध्यता (Obligation of officers to assist each other) |
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धारा 56 किन अधिकारियों पर लागू होती है? |
धारा 42 में उल्लिखित विभिन्न विभागों के सभी अधिकारियों पर। |
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धारा 56 के अंतर्गत अधिकारियों की क्या बाध्यता है? |
एक दूसरे की सहायता करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होना। |
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धारा 56 के अंतर्गत अधिकारियों को कब सहायता करनी होती है? |
सूचना दिए जाने या अनुरोध किए जाने पर। |
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धारा 56 के अंतर्गत अधिकारियों को किस उद्देश्य से सहायता करनी होती है? |
इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए। |
|
धारा 56 के अनुसार सहायता करने का स्वरूप क्या है? |
वैध रूप से बाध्यकारी दायित्व। |
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धारा 57 का विषय क्या है? |
गिरफ्तारी और अभिग्रहण की रिपोर्ट (Report of arrest and seizure) |
|
धारा 57 के अंतर्गत रिपोर्ट देने का दायित्व किस पर है? |
वह व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है। |
|
धारा 57 के अंतर्गत रिपोर्ट कब दी जानी चाहिए? |
गिरफ्तारी या अभिग्रहण के ठीक पश्चात् 48 घंटों के भीतर। |
|
धारा 57 के अनुसार रिपोर्ट किसे दी जाती है? |
अपने अव्यवहित पदीय वरिष्ठ अधिकारी को। |
|
धारा 57 के अंतर्गत रिपोर्ट में क्या शामिल होना चाहिए? |
गिरफ्तारी या अभिग्रहण की सभी विशिष्टियों की पूरी रिपोर्ट। |
|
धारा 57 के अनुसार रिपोर्ट देने की स्थिति क्या है? |
जब कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है। |
|
धारा 57-क का विषय क्या है? |
अधिसूचित अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की संपत्ति के अभिग्रहण की रिपोर्ट (Report of seizure of property of the person arrested by the notified officer) |
|
धारा 57-क किन अधिकारियों पर लागू होती है? |
धारा 53 के अधीन अधिसूचित अधिकारी पर। |
|
धारा 57-क के अंतर्गत रिपोर्ट देने की स्थिति क्या है? |
जब अधिसूचित अधिकारी इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है। |
|
धारा 57-क में अध्याय 5क के उपबंध कब लागू होते हैं? |
जब वे ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण के मामले में संलिप्त किसी व्यक्ति को लागू होते हैं। |
|
धारा 57-क के अंतर्गत रिपोर्ट किसे दी जाती है? |
अधिकारिता वाले सक्षम प्राधिकारी को। |
|
धारा 57-क के अंतर्गत रिपोर्ट कब दी जानी चाहिए? |
गिरफ्तारी या अभिग्रहण के नब्बे दिन के भीतर। |
|
धारा 57-क के अंतर्गत रिपोर्ट किस विषय में दी जाती है? |
उस व्यक्ति की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के बारे में। |
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धारा 57-क किस अधिनियम द्वारा अंत: स्थापित की गई है? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा। |
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धारा 57-क कब से प्रभावी है? |
दिनांक 1-5-2014 से। |
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धारा 58 का विषय क्या है? |
तंग करने वाले प्रवेश, तलाशी, अभिग्रहण या गिरफ्तारी के लिए दंड (Punishment for vexatious entry, search, seizure or arrest) |
|
धारा 58(1) किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
धारा 42, 43 या 44 के अधीन सशक्त व्यक्ति पर। |
|
धारा 58(1)(क) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
सन्देह के किसी युक्तियुक्त आधार के बिना किसी भवन, प्रवहण या स्थान में प्रवेश करना या तलाशी लेना या करवाना। |
|
धारा 58(1)(ख) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
तंग करने की दृष्टि से और अनावश्यक रूप से संपत्ति का अभिग्रहण करना, स्वापक ओषधि, मन प्रभावी पदार्थ, दस्तावेज या अन्य वस्तु के अभिग्रहण के बहाने। |
|
धारा 58(1)(ग) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
किसी व्यक्ति को तंग करने की दृष्टि से या अनावश्यक रूप से निरुद्ध करना, तलाशी लेना या गिरफ्तार करना। |
|
धारा 58(1) के अंतर्गत दंड क्या है? |
छह मास तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 58(2) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
इस अधिनियम के अधीन जानबूझकर और दुर्भाव से मिथ्या इत्तिला देना और उससे गिरफ्तारी या तलाशी करवाना। |
|
धारा 58(2) के अंतर्गत दंड क्या है? |
दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 59 का विषय क्या है? |
अधिकारी की कर्तव्य में असफलता या इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में उसकी मौनानुकूलता (Failure of officer in duty or his connivance at the contravention of the provisions of this Act) |
|
धारा 59(1) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
अपने पद के कर्तव्यों का अनुपालन करने से प्रविरत रहना, इंकार करना या अपने आपको प्रत्याहृत करना। |
|
धारा 59(1) में दंड से अपवाद क्या है?
|
जब अधिकारी ने अपने पदीय वरिष्ठ की स्पष्ट लिखित अनुज्ञा प्राप्त कर ली हो या अन्य विधिपूर्ण हेतुक हो। |
|
धारा 59(1) के अंतर्गत दंड क्या है? |
एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों। |
|
धारा 59(2) किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
ऐसा अधिकारी या वह व्यक्ति जिसे किसी व्ययनी या किसी अन्य आरोपी व्यक्ति की अभिरक्षा सौंपी गई है। |
|
धारा 59(2) के अंतर्गत दंडनीय कृत्य क्या है? |
इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए आदेश के उपबंधों के उल्लंघन में जानबूझकर सहायता करना या मौनानुकूल रहना। |
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धारा 59(2) के अंतर्गत कारावास की अवधि क्या है? |
कठोर कारावास जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु बीस वर्ष तक हो सकेगी। |
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धारा 59(2) के अंतर्गत जुर्माना कितना है? |
एक लाख रुपए से कम नहीं किन्तु दो लाख रुपए तक हो सकेगा। |
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धारा 59(2) के स्पष्टीकरण में "अधिकारी" का क्या अर्थ है? |
धारा 64क के अधीन सरकार या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाए या मान्यता प्राप्त अस्पताल या संस्था में निराव्यसन उपचार हेतु नियोजित व्यक्ति। |
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धारा 59(3) के अंतर्गत संज्ञान लेने की शर्त क्या है? |
केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की मंजूरी से किए गए लिखित परिवाद पर ही। |
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धारा 60 का विषय क्या है? |
अवैध औषधियों, पदार्थों, पौधों, वस्तुओं और प्रवहणों का अधिहरण किए जाने का दायी होना (Liability of illicit drugs, substances, plants, articles and conveyances to confiscation) |
|
धारा 60(1) के अंतर्गत कौन-कौन सी वस्तुएं अधिहरणीय हैं? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ, अफीम पोस्त, कोका के पौधे, कैनेबिस के पौधे, सामग्री, साधित्र और बर्तन जिनकी बाबत या जिनके माध्यम से ऐसा अपराध किया गया है। |
|
धारा 60(2) के अंतर्गत कौन सी स्वापक औषधि या पदार्थ अधिहरणीय है? |
जिसका अवैध रूप से उत्पादन, अंतरराज्य आयात, अंतरराज्य निर्यात, भारत में आयात, परिवहन, विनिर्माण, कब्ज़ा, उपयोग, क्रय या विक्रय किया जाता है। |
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धारा 60(2) में किन अतिरिक्त वस्तुओं को अधिहरणीय माना गया है? |
ऐसे पात्र, पैकेज और आवेष्टक जिनमें उपधारा (1) के अधीन अधिहरणीय औषधि या पदार्थ पाया जाता है। |
|
धारा 60(2) में अन्य अंतर्वस्तु का क्या प्रावधान है? |
ऐसे पात्र या पैकेज की अन्य अंतर्वस्तु भी अधिहरणीय होगी। |
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धारा 60(3) के अंतर्गत कौन-कौन अधिहरणीय हैं? |
वह जीवजंतु या प्रवहण जो स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ या उपधारा (1) या (2) के अधीन अधिहरणीय वस्तु के वहन में उपयोग में लाया गया हो। |
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धारा 60(3) में स्वामी को कब छूट मिलती है? |
जब वह साबित कर दे कि उपयोग उसके, उसके अभिकर्ता और भारसाधक के ज्ञान या मौनानुकूलता के बिना हुआ। |
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धारा 60(3) में छूट के लिए अन्य शर्त क्या है? |
कि उनमें से प्रत्येक ने ऐसे उपयोग के विरुद्ध सभी समुचित पूर्वावधानियां बरती थीं। |
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धारा 60 में "नियंत्रित पदार्थ" का समावेश किस संशोधन द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
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धारा 60 में संशोधन कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
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धारा 61 का विषय क्या है? |
अवैध औषधियों या पदार्थों को छिपाने के लिए उपयोग में लाए गए माल का अधिहरण (Confiscation of goods used for concealing illicit drugs or substances) |
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धारा 61 के अंतर्गत कौन सा माल अधिहरणीय है? |
वह माल जो स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ को छिपाने के लिए उपयोग में लाया गया हो। |
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धारा 61 में किन पदार्थों के संदर्भ में माल अधिहरणीय होता है? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरणीय हैं। |
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धारा 61 के अंतर्गत अधिहरण का आधार क्या है? |
अवैध औषधि या पदार्थ को छिपाने के लिए उपयोग |
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धारा 62 का विषय क्या है? |
अवैध औषधियों या पदार्थों के विक्रय के आगमों का अधिहरण (Confiscation of sale proceeds of illicit drugs or substances) |
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धारा 62 कब लागू होती है? |
जब स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ या नियंत्रित पदार्थ का विक्रय किया जाता है। |
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धारा 62 में विक्रय करने वाले व्यक्ति की क्या मानसिक अवस्था आवश्यक है? |
उसे यह ज्ञान हो या विश्वास करने का कारण हो कि औषधि या पदार्थ अधिहरणीय है। |
|
धारा 62 में किन पदार्थों का उल्लेख है? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ अथवा नियंत्रित पदार्थ। |
|
धारा 62 में "नियंत्रित पदार्थ" का समावेश किस संशोधन द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
|
धारा 62 में संशोधन कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
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धारा 63 का विषय क्या है? |
अधिहरण करने में प्रक्रिया (Procedure in making confiscations) |
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धारा 63(1) के अंतर्गत न्यायालय का क्या कर्तव्य है? |
यह विनिश्चय करना कि क्या अभिगृहीत वस्तु धारा 60, 61 या 62 के अधीन अधिहरण के लिए दायी है। |
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धारा 63(1) में अभियुक्त की स्थिति का क्या प्रभाव है? |
चाहे अभियुक्त को सिद्धदोष, दोषमुक्त या उन्मोचित किया जाए। |
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धारा 63(1) में अधिहरण का आदेश कब दिया जाता है? |
जब न्यायालय विनिश्चय करता है कि वस्तु अधिहरण के लिए दायी है। |
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धारा 63(2) कब लागू होती है? |
जब अभिगृहीत वस्तु अधिहरणीय प्रतीत होती है परन्तु अपराधी ज्ञात नहीं है या पाया नहीं जा सकता। |
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धारा 63(2) में न्यायालय क्या कर सकता है? |
अधिहरण के दायित्व के बारे में जांच कर सकता है और अधिहरण का आदेश दे सकता है। |
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धारा 63(2) के प्रथम उपबंध के परन्तु अनुसार अधिहरण आदेश कब नहीं किया जाएगा? |
अभिग्रहण की तारीख से एक मास की समाप्ति तक या दावेदार को सुनवाई का अवसर दिए बिना। |
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धारा 63(2) के प्रथम उपबंध में किसे सुनवाई का अधिकार है? |
वह व्यक्ति जो वस्तु के प्रति किसी अधिकार का दावा करता है। |
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धारा 63(2) के द्वितीय उपबंध के परन्तु अनुसार किन वस्तुओं पर विशेष प्रावधान लागू होता है? |
शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील वस्तुएं या जिनका विक्रय स्वामी के फायदे के लिए हो। |
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धारा 63(2) के द्वितीय उपबंध में न्यायालय क्या कर सकता है? |
ऐसी वस्तुओं के विक्रय के लिए किसी समय निदेश दे सकता है। |
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धारा 63(2) के द्वितीय उपबंध में किन वस्तुओं को अपवाद रखा गया है? |
स्वापक औषधि, मनःप्रभावी पदार्थ, नियंत्रित पदार्थ, अफीम पोस्त, कोका के पौधे या कैनेबिस के पौधे। |
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धारा 63(2) के अंतर्गत विक्रय के आगमों पर क्या लागू होता है? |
उपधारा के उपबंध यथाशक्य साध्य रूप में शुद्ध आगमों पर लागू होंगे। |
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धारा 64 का विषय क्या है? |
अभियोजन से उन्मुक्ति देने की शक्ति (Power to tender immunity from prosecution) |
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धारा 64(1) के अंतर्गत उन्मुक्ति देने की शक्ति किसके पास है? |
केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के पास। |
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धारा 64(1) में उन्मुक्ति देने के लिए क्या शर्त है? |
सरकार की यह राय हो कि साक्ष्य प्राप्त करने हेतु ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है। |
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धारा 64(1) में राय के संबंध में क्या प्रावधान है? |
ऐसी राय के कारण लेखबद्ध किए जाएंगे। |
|
धारा 64(1) में किस प्रकार के व्यक्ति को उन्मुक्ति दी जा सकती है? |
जो इस अधिनियम या इसके अधीन नियम/आदेश के उल्लंघन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबद्ध या संसर्गिक प्रतीत होता है। |
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धारा 64(1) में उन्मुक्ति किन अधिनियमों के अंतर्गत अपराधों के लिए दी जा सकती है? |
इस अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (भारतीय न्याय संहिता) या किसी अन्य केन्द्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन। |
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धारा 64(1) में उन्मुक्ति की शर्त क्या है? |
व्यक्ति संपूर्ण परिस्थितियों का पूर्ण और सही प्रकटीकरण करेगा। |
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धारा 64(2) में उन्मुक्ति का प्रभाव क्या है? |
जिस सीमा तक उन्मुक्ति का विस्तार है, उस अपराध के लिए अभियोजन से उन्मुक्ति मिलती है। |
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धारा 64(2) में उन्मुक्ति कब प्रभावी होती है? |
जब वह संबंधित व्यक्ति को दी जाती है और उसके द्वारा स्वीकार की जाती है। |
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धारा 64(3) में उन्मुक्ति कब प्रत्याहृत मानी जाएगी? |
जब सरकार को प्रतीत हो कि व्यक्ति ने शर्तों का पालन नहीं किया या तथ्य छिपाए या मिथ्या साक्ष्य दिया। |
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धारा 64(3) में प्रत्याहरण की प्रक्रिया क्या है? |
सरकार उस प्रभाव का निष्कर्ष लेखबद्ध करेगी। |
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धारा 64(3) में प्रत्याहरण के बाद क्या परिणाम होता है? |
व्यक्ति का उसी अपराध या संबंधित अन्य अपराध के लिए विचारण किया जा सकता है। |
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धारा 64-क का विषय क्या है? |
स्वेच्छया उपचार कराने वाले व्यसनियों को अभियोजन से उन्मुक्ति (Immunity from prosecution to addicts volunteering for treatment) |
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धारा 64-क किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
ऐसे व्यसनी पर जिस पर धारा 27 के अधीन या अल्प मात्रा से संबंधित अपराध का आरोप है। |
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धारा 64-क में किन अपराधों के लिए उन्मुक्ति दी जाती है? |
धारा 27 के अधीन या स्वापक औषधि या मनःप्रभावी पदार्थ की अल्प मात्रा से संबंधित अपराधों के लिए। |
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धारा 64-क में उन्मुक्ति की शर्त क्या है? |
व्यसनी स्वेच्छया निराव्यसन के लिए चिकित्सीय उपचार लेना चाहता है और ऐसा उपचार लेता है। |
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धारा 64-क में उपचार कहाँ लिया जाना चाहिए? |
सरकार या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाए या मान्यता प्राप्त अस्पताल या संस्था में। |
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धारा 64-क के अंतर्गत उन्मुक्ति का प्रभाव क्या है? |
ऐसे अपराधों के अभियोजन के लिए दायी नहीं होगा। |
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धारा 64-क के प्रावधान में उन्मुक्ति कब वापस ली जा सकती है? |
जब व्यसनी निराव्यसन के लिए पूर्ण उपचार नहीं लेता है। |
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धारा 64-क किस संशोधन द्वारा प्रतिस्थापित की गई है? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
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धारा 64-क कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
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धारा 66 का विषय क्या है? |
कुछ मामलों में दस्तावेजों के बारे में उपधारणा (Presumption as to documents in certain cases) |
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धारा 66 कब लागू होती है? |
जब कोई दस्तावेज इस अधिनियम के अधीन अभियोजन में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की जाती है। |
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धारा 66(1) के अंतर्गत कौन सी दस्तावेज सम्मिलित है? |
जो इस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा पेश या दी गई हो या उसकी अभिरक्षा या नियंत्रण से अभिगृहीत की गई हो। |
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धारा 66 (1)(ii) के अंतर्गत कौन सी दस्तावेज सम्मिलित है? |
जो भारत से बाहर किसी स्थान से अन्वेषण के अनुक्रम में सम्यक् अधिप्रमाणित रूप में प्राप्त की गई हो। |
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धारा 66(ii) में दस्तावेज किसके द्वारा और कैसे प्राप्त होनी चाहिए? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित प्राधिकरण या व्यक्ति द्वारा और विहित रीति से अधिप्रमाणित रूप में। |
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धारा 66 के अंतर्गत दस्तावेज किसके विरुद्ध साक्ष्य में प्रयुक्त होती है? |
उस व्यक्ति के विरुद्ध या उसके साथ संयुक्त रूप से विचारण किए जा रहे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध। |
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धारा 66(क) के अंतर्गत क्या उपधारणा की जाती है? |
दस्तावेज के हस्ताक्षर और अन्य भाग उस व्यक्ति के हैं तथा दस्तावेज उसी द्वारा निष्पादित या अनुप्रमाणित है। |
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धारा 66(क) में यह उपधारणा कब तक मान्य है? |
जब तक प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता। |
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धारा 66(ख) के अंतर्गत क्या प्रावधान है? |
दस्तावेज को साक्ष्य में ग्रहण किया जाएगा भले ही वह सम्यक् रूप से स्टांपित न हो। |
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धारा 66(ग) के अंतर्गत क्या उपधारणा की जाती है? |
खंड (i) के मामलों में दस्तावेज की अंतर्वस्तु की सत्यता की उपधारणा की जाती है। |
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धारा 66(ग) में यह उपधारणा कब तक मान्य है? |
जब तक प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता। |
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धारा 67 का विषय क्या है? |
जानकारी आदि मांगने की शक्ति (Power to call for information, etc.) |
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धारा 67 के अंतर्गत यह शक्ति किसके पास है? |
धारा 42 में निर्दिष्ट ऐसा अधिकारी जो केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया हो। |
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धारा 67 के अंतर्गत यह शक्ति कब प्रयोग की जाती है? |
इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के संबंध में जांच के अनुक्रम में। |
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धारा 67(क) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
यह समाधान करने हेतु किसी व्यक्ति से जानकारी मांग सकता है कि क्या अधिनियम या नियम/आदेश का उल्लंघन हुआ है। |
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धारा 67(ख) के अंतर्गत अधिकारी क्या अपेक्षा कर सकता है? |
किसी व्यक्ति से जांच के लिए उपयोगी या सुसंगत दस्तावेज या चीज पेश करने या परिदत्त करने की। |
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धारा 67(ग) के अंतर्गत अधिकारी क्या कर सकता है? |
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति की परीक्षा कर सकता है। |
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धारा 68 का विषय क्या है? |
अपराधों के किए जाने के बारे में इत्तिला (Information as to commission of offences) |
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धारा 68 किन अधिकारियों पर लागू होती है? |
इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियम या आदेश के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले अधिकारी पर। |
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अध्याय-5क (CHAPTER-VA) |
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अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का समपहरण (FORFEITURE OF ILLEGALLY ACQUIRED PROPERTY) |
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अध्याय 5-क किस से सम्बंधित हैं ?? |
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का समपहरण। (Forfeiture of Illegally Acquired Property) |
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अध्याय 5-क किस अधिनियम द्वारा अंत: स्थापित किया गया? |
अधिनियम क्र० 2 सन् 1989 द्वारा। |
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अध्याय 5-क कब से प्रभावी है? |
दिनांक 29-5-1989 से। |
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धारा 68-क का विषय क्या है? |
लागू होना (Application) |
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धारा 68-क(1) क्या उपबंध करता है? |
इस अध्याय के उपबंध केवल उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट व्यक्तियों को लागू होंगे। |
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धारा 68-क(2) में किन व्यक्तियों का उल्लेख है? |
उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट व्यक्ति। |
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धारा 68-क(2)(क) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
जिसे इस अधिनियम के अधीन दस वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है। |
|
धारा 68-क(2)(क) में संशोधन किस अधिनियम द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
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धारा 68-क(2)(क) में संशोधन कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
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धारा 68-क(2)(ख) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
जिसे भारत के बाहर सक्षम न्यायालय द्वारा समरूप अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है। |
|
धारा 68-क(2)(ग) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
जिसकी बाबत स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988 या जम्मू कश्मीर अधिनियम के अधीन निरोध आदेश किया गया है। |
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धारा 68-क(2)(ग) का अपवाद क्या है? |
जब निरोध आदेश सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर वापस ले लिया गया हो या न्यायालय द्वारा अपास्त कर दिया गया हो। |
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धारा 68-क(2)(गग) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
जो इस अधिनियम या अन्य देश की समान विधि के अधीन दस वर्ष या अधिक के अपराध हेतु गिरफ्तार या जिसके विरुद्ध वारंट/प्राधिकार जारी है। |
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धारा 68-क(2)(गग) किस अधिनियम द्वारा जोड़ा गया? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
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धारा 68-क(2)(गग) कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
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धारा 68-क(2)(घ) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
खंड (क), (ख), (ग) या (गग) में निर्दिष्ट व्यक्ति का नातेदार। |
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धारा 68-क(2)(ङ) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
खंड (क), (ख), (ग) या (गग) में निर्दिष्ट व्यक्ति का सहयुक्त व्यक्ति। |
|
धारा 68-क(2)(ङ) में संशोधन किस अधिनियम द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 9 सन् 2001 द्वारा। |
|
धारा 68-क(2)(ङ) कब से प्रभावी है? |
दिनांक 2-10-2001 से। |
|
धारा 68-क(2)(च) के अंतर्गत कौन व्यक्ति आता है? |
ऐसी संपत्ति का वर्तमान धारक जो पहले खंड (क), (ख), (ग) या (गग) के व्यक्ति के पास थी। |
|
धारा 68-क(2)(च) में "वर्तमान धारक" का क्या अर्थ है? |
वह धारक जिसके पास वर्तमान में ऐसी संपत्ति है। |
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धारा 68-क(2)(च) में अपवाद क्या है? |
जब वर्तमान धारक या पूर्व धारक पर्याप्त प्रतिफल के लिए सद्भाविक अंतरिती हो। |
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धारा 68-ख का विषय क्या है? |
परिभाषाएं (Definitions) |
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धारा 68-ख में परिभाषाएं कब लागू होती हैं? |
जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो। |
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धारा 68-ख(क) में "अपील अधिकरण" (Appellate Tribunal”) का क्या अर्थ है? |
धारा 68ढ़ में निर्दिष्ट समपहृत संपत्ति अधिकरण। |
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धारा 68-ख(क) में संशोधन किस अधिनियम द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 28 सन् 2016 द्वारा। |
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धारा 68-ख(क) में संशोधन कब से प्रभावी है? |
दिनांक 1-6-2016 से। |
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धारा 68-ख(ख) में "सहयुक्त" (Associate) का क्या अर्थ है? |
वह व्यक्ति जो निर्दिष्ट प्रकार से संबंधित हो जिसकी संपत्ति समपहृत की जा सकती है। |
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धारा 68-ख(ख)(i) में सहयुक्त कौन है? |
जो उस व्यक्ति के आवासिक परिसर में रहता था या रह रहा है। |
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धारा 68-ख(ख)(ii) में सहयुक्त कौन है? |
जो उसके कामकाज का प्रबंध करता था या करता है या लेखा रखता था या रखता है। |
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धारा 68-ख(ख)(iii) में सहयुक्त कौन है? |
ऐसा संगम, व्यष्टिनिकाय, भागीदारी फर्म या प्राइवेट कंपनी जिसमें वह सदस्य, भागीदार या निदेशक रहा है। |
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धारा 68-ख(ख)(iv) में सहयुक्त कौन है? |
जो उपखंड (iii) के संगम आदि का सदस्य रहा है जब वह व्यक्ति भी सदस्य/भागीदार/निदेशक था। |
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धारा 68-ख(ख)(v) में सहयुक्त कौन है? |
जो उपखंड (iii) के संगम आदि का प्रबंध या लेखा रखता था या रखता है। |
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धारा 68-ख(ख)(vi) में सहयुक्त कौन है? |
न्यास का न्यासी जहां न्यास उस व्यक्ति द्वारा सृष्ट या उसमें उसकी आस्तियों का योगदान 20% से कम नहीं है। |
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धारा 68-ख(ख)(vii) में सहयुक्त कौन है? |
ऐसा व्यक्ति जिसके पास संपत्ति उस व्यक्ति की ओर से धारित मानी जाती है। |
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धारा 68-ख(ग) में "सक्षम प्राधिकारी" (Competent authority) का क्या अर्थ है? |
केन्द्रीय सरकार का प्राधिकृत अधिकारी। |
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धारा 68-ख(घ) में "छिपाया जाना" (Concealment) का क्या अर्थ है? |
संपत्ति की प्रकृति, स्रोत, व्ययन, संचलन या स्वामित्व का छिपाया या प्रच्छन्न किया जाना। |
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धारा 68-ख(घ) में क्या शामिल है? |
इलेक्ट्रॉनिक या अन्य साधनों से संपत्ति का संचलन या संपरिवर्तन। |
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धारा 68-ख(ङ) में "रोक लगाना" (Freezing) का क्या अर्थ है? |
धारा 68च के आदेश द्वारा संपत्ति के अंतरण, संपरिवर्तन, व्ययन या संचलन का अस्थायी प्रतिषेध। |
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धारा 68-ख(च) में "पहचान करना" (Identifying) का क्या अर्थ है? |
यह सिद्ध करना कि संपत्ति अवैध व्यापार से प्राप्त हुई या उसमें उपयोग हुई। |
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धारा 68-ख(छ) में "अवैध रूप से अर्जित संपत्ति" (Illegally acquired property) का क्या अर्थ है? |
निर्दिष्ट प्रकार से अर्जित संपत्ति। |
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धारा 68-ख(छ)(i) में अवैध संपत्ति क्या है? |
जो इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन से प्राप्त आय/आस्तियों से अर्जित हुई है या उसका समतुल्य मूल्य। |
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धारा 68-ख(छ)(ii) में अवैध संपत्ति क्या है? |
जो उपखंड (i) की संपत्ति या उसकी आय से अर्जित हुई है या उसका समतुल्य मूल्य। |
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धारा 68-ख(छ)(iii) में अवैध संपत्ति क्या है? |
जिसका स्रोत नहीं बताया जा सकता और जो उससे अर्जित हुई है या उसका समतुल्य मूल्य। |
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धारा 68-ख(छ)(अ) में क्या सम्मिलित है? |
पूर्व धारक से प्राप्त संपत्ति जब तक सद्भाविक अंतरिती न हो। |
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धारा 68-ख(छ)(आ) में क्या सम्मिलित है? |
उपखंड (अ) की संपत्ति से अर्जित संपत्ति। |
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धारा 68-ख(ज) में "संपत्ति" (Property) का क्या अर्थ है? |
प्रत्येक प्रकार की संपत्ति या आस्तियां, जंगम/स्थावर, मूर्त/अमूर्त सहित और उनसे संबंधित विलेख। |
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धारा 68-ख(ज) में संशोधन किस अधिनियम द्वारा किया गया? |
अधिनियम क्र० 16 सन् 2014 द्वारा। |
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धारा 68-ख(ज) में संशोधन कब से प्रभावी है? |
दिनांक 1-5-2014 से। |
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धारा 68-ख(झ) में "नातेदार" (Relative) का क्या अर्थ है? |
निर्दिष्ट पारिवारिक संबंधों वाले व्यक्ति। |
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धारा 68-ख(झ)(1) में नातेदार कौन है? |
व्यक्ति का पति या पत्नी। |
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धारा 68-ख(झ)(2) में नातेदार कौन है? |
व्यक्ति का भाई या बहन। |
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धारा 68-ख(झ)(3) में नातेदार कौन है? |
व्यक्ति के पति या पत्नी का भाई या बहन। |
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धारा 68-ख(झ)(4) में नातेदार कौन है? |
व्यक्ति का पारंपरिक पूर्व पुरुष या वंशज। |
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धारा 68-ख(झ)(5) में नातेदार कौन है? |
व्यक्ति के पति या पत्नी का पारंपरिक पूर्व या वंशज। |
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धारा 68-ख(झ)(6) में नातेदार कौन है? |
उपखंड (2), (3), (4), (5) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के पति या पत्नी। |
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धारा 68-ख(झ)(7) में नातेदार कौन है? |
उपखंड (2) या (3) में निर्दिष्ट व्यक्ति का पारंपरिक वंशज। |
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धारा 68-ख(ञ) में "पता लगाना" (Tracing) का क्या अर्थ है? |
संपत्ति की प्रकृति, स्रोत, व्ययन, संचलन, हक या स्वामित्व का निर्धारण। |
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धारा 68-ख(ट) "न्यास" (Trust) के अंतर्गत कौन सम्मिलित है। |
न्यास के अंतर्गत अन्य विधिक बाध्यता भी सम्मिलित है। |
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धारा 68-ग का विषय क्या है? |
अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति धारण करने का प्रतिषेध (Prohibition of holding illegally acquired property) |
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धारा 68-ग(1) के अनुसार किसे अवैध संपत्ति धारण करने से रोका गया है? |
उस व्यक्ति को जिस पर यह अध्याय लागू होता है |
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धारा 68-ग(1) के अनुसार कौन-सी संपत्ति धारण करना अवैध है? |
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति |
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धारा 68-ग(1) के अनुसार संपत्ति धारण करने के कौन-कौन से तरीके निषिद्ध हैं? |
स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से |
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धारा 68-ग(2) किस से सम्बंधित है? |
अवैध रूप से धारण की गई संपत्ति केन्द्रीय सरकार को समपहृत होगी |
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धारा 68-ग(2) के तहत समपहृत कब होगा? |
जब संपत्ति उपधारा (1) के उल्लंघन में धारण की गई हो |
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धारा 68-ग के अपवाद है? |
कुछ संपत्तियाँ समपहृत नहीं की जाएंगी, ऐसी संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसको यह अधिनियम लागू होता है, यथास्थिति, उस तारीख से जिसको वह अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया था या उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट या प्राधिकार जारी किया गया है अथवा उस तारीख से जिसको निरोध आदेश जारी किया गया था, छह वर्ष की अवधि के पूर्व अर्जित की गई थी। |
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धारा 68-ग के अन्तर्गत किस स्थिति में संपत्ति समपहृत नहीं की जाएगी? |
यदि वह 6 वर्ष की अवधि से पूर्व अर्जित की गई हो |
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धारा 68-ग के अन्तर्गत 6 वर्ष की अवधि किस तिथि से गिनी जाएगी? |
गिरफ्तारी, वारंट/प्राधिकार जारी होने या निरोध आदेश की तिथि से |
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धारा 68-घ का विषय क्या है? |
सक्षम प्राधिकारी (Competent authority) |
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धारा 68-घ(1) के अंतर्गत किसे सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया जा सकता है? |
सीमाशुल्क आयुक्त, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त, आय-कर आयुक्त या समतुल्य अधिकारी |
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धारा 68-घ(1) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति कौन करता है? |
केन्द्रीय सरकार |
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धारा 68-घ(2) के अनुसार सक्षम प्राधिकारी किन मामलों में कार्य करेगा? |
उन व्यक्तियों या वर्गों के संबंध में जिन्हें केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे |
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धारा 68-ङ का विषय क्या है? |
अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति की पहचान करना (Identifying illegally acquired property) |
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धारा 68-ङ(1) के अंतर्गत किन अधिकारियों को शक्ति प्राप्त है? |
धारा 53 के अधीन सशक्त अधिकारी और पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी |
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धारा 68-ङ(1) के अंतर्गत कार्रवाई कब की जाती है? |
जब अधिकारी को सूचना/प्राप्ति से संतोष हो कि व्यक्ति अवैध संपत्ति धारित करता है |
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धारा 68-ङ(1) के अंतर्गत अधिकारी को क्या कार्रवाई करनी होती है? |
संपत्ति का पता लगाना और उसकी पहचान करना |
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धारा 68-ङ(2) के अंतर्गत कार्रवाई में क्या शामिल है? |
जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण |
|
धारा 68-ङ(2) के अंतर्गत किन-किन विषयों की जांच की जा सकती है? |
व्यक्ति, स्थान, संपत्ति, आस्ति, दस्तावेज, बैंक या वित्तीय संस्था की लेखा बहियां |
|
धारा 68-ङ(3) के अनुसार जांच कैसे की जाएगी? |
सक्षम प्राधिकारी के निर्देश या मार्गदर्शन के अनुसार |
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धारा 68-च का विषय क्या है? |
अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति का अभिग्रहण या रोक लगाया जाना (Seizure or freezing of illegally acquired property) |
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धारा 68-च(1) के अंतर्गत अधिकारी कब कार्रवाई कर सकता है? |
जब उसे विश्वास हो कि संपत्ति अवैध रूप से अर्जित है |
|
धारा 68-च(1) के अंतर्गत अधिकारी कब अभिग्रहण का आदेश देगा? |
जब संपत्ति के छिपाए/अंतरित/संव्यवहार से समपहरण कार्यवाही विफल होने की संभावना हो |
|
धारा 68-च(1) के अंतर्गत यदि अभिग्रहण संभव न हो तो क्या आदेश दिया जाएगा? |
संपत्ति के अंतरण या अन्य संव्यवहार पर रोक |
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धारा 68-च(1) के अंतर्गत ऐसी रोक किसकी अनुमति के बिना नहीं होगी? |
आदेश देने वाले अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना |
|
धारा 68-च(1) के अंतर्गत इस आदेश की सूचना किसे देना आवश्यक है? |
सक्षम प्राधिकारी को |
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धारा 68-च(1) के अंतर्गत आदेश की प्रति कितने समय में भेजी जाएगी? |
48 घंटे के भीतर |
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धारा 68-च(2) के अनुसार- |
आदेश 30 दिनों में पुष्टि न होने पर अप्रभावी होगा |
|
धारा 68-च के स्पष्टीकरण के अनुसार "संपत्ति का अंतरण" क्या है? |
संपत्ति का व्ययन, हस्तांतरण, समनुदेशन, व्यवस्थापन, परिदान, संदाय या अन्य संक्रामण |
|
धारा 68-च के अनुसार स्पष्टीकरण इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "संपत्ति का अंतरण" से अभिप्रेत है संपत्ति का व्ययन, हस्तांतरण, समनुदेशन, व्यवस्थापन, परिदान, संदाय या कोई अन्यसंक्रामण और पूर्वगामी की व्यापकता को परिसीमित किए बिना, इसके अंतर्गत है- |
संपत्ति में किसी न्यास का सृजन ; संपत्ति में किसी पट्टा, बंधक, भार, सुखाचार, अनुज्ञप्ति, शक्ति, भागीदारी या हित की मंजूरी या सृजन; किसी ऐसे व्यक्ति में, जो संपत्ति का स्वामी नहीं है, निहित संपत्ति के नियतन की शक्ति का, शक्ति के आदाता से भिन्न किसी व्यक्ति के पक्ष में उसके व्ययन के अवधारण के लिए प्रयोग; और किसी व्यक्ति द्वारा इस आशय से किया गया कोई संव्यवहार जिससे उसकी अपनी संपत्ति के मूल्य को प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः कम किया जा सके और किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति के मूल्य को बढ़ाया जा सके। |
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धारा 68-छ का विषय क्या है? |
इस अध्याय के अधीन अभिगृहीत या समपहृत सम्पत्तियों का प्रबन्ध (Management of properties seized or forfeited under this Chapter) |
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धारा 68-छ(1) के अंतर्गत किसे नियुक्त करने की शक्ति है? |
केन्द्रीय सरकार को |
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प्रशासक किस पंक्ति से नीचे का नहीं होगा? |
संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का नहीं होगा |
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धारा 68-छ(2) के अंतर्गत प्रशासक किन संपत्तियों का प्रबंधन करेगा? |
जिन पर धारा 68-च(1) या धारा 68-झ के अधीन आदेश हुआ है |
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धारा 68-छ(3) के अंतर्गत प्रशासक का क्या कर्तव्य है? |
समपहृत संपत्ति के व्ययन के लिए उपाय करना |
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धारा 68-ज का विषय क्या है? |
सम्पत्ति के समपहरण की सूचना (Notice of forfeiture of property) |
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धारा 68-ज(1) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी कब सूचना जारी कर सकता है? |
जब उसे विश्वास हो कि संपत्ति अवैध रूप से अर्जित है |
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धारा 68-ज(1) के अंतर्गत विश्वास किन आधारों पर बनता है? |
संपत्ति के मूल्य, आय/उपार्जन/आस्तियों के स्रोत, धारा 68-ङ की रिपोर्ट या अन्य जानकारी के आधार पर |
|
धारा 68-ज(1) के अंतर्गत क्या सक्षम प्राधिकारी को कारण दर्ज करने होते हैं? |
हाँ, विश्वास के कारण लेखबद्ध किए जाएंगे |
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धारा 68-ज(1) के अंतर्गत सूचना में क्या अपेक्षा की जाती है? |
30 दिन के भीतर आय/स्रोत/साधन/अन्य जानकारी प्रस्तुत करना |
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धारा 68-ज(2) के अनुसार सूचना की प्रति किसे दी जाएगी? |
उस अन्य व्यक्ति को जो संपत्ति धारित कर रहा है |
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धारा 68-ज(2) के अनुसार प्रोवाइजो के अनुसार किन व्यक्तियों को सूचना नहीं दी जाएगी? |
धारा 68क(2)(गग) में निर्दिष्ट व्यक्ति, उसके नातेदार/सहयुक्त या पूर्व धारक |
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धारा 68-ज के स्पष्टीकरण के अनुसार सूचना कब अविधिमान्य नहीं होगी? |
जब वह साक्ष्य का उल्लेख न करे या सीधा संबंध सिद्ध न करे |
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धारा 68-झ का विषय क्या है? |
कुछ दशाओं में सम्पत्ति का समपहरण (Forfeiture of property in certain cases) |
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धारा 68-झ(1) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी क्या करता है? |
धारा 68ज के 47 अधीन हेतुक दर्शित करने के लिए जारी की गई सूचना के संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण व सामग्री पर विचार कर निष्कर्ष अभिलिखित करता है |
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धारा 68-झ(1) के अंतर्गत परन्तु के अनुसार कब एकपक्षीय निष्कर्ष दिया जा सकता है? |
जब व्यक्ति 30 दिन में उपस्थित न हो या मामला प्रस्तुत न करे |
|
धारा 68-झ(1) के अंतर्गत एकपक्षीय निष्कर्ष किस आधार पर होगा? |
उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर |
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धारा 68-झ(2) के अंतर्गत क्या स्थिति है? |
जब संपत्ति की सटीक पहचान संभव न हो |
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धारा 68-झ(3) के अंतर्गत क्या घोषणा की जाती है? |
संपत्ति केन्द्रीय सरकार को समपहृत होगी |
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समपहृत संपत्ति किससे मुक्त होगी? |
सभी विल्लंगमों से मुक्त |
|
धारा 68-झ(3) के अंतर्गत परन्तु के अनुसार किनकी संपत्ति समपहृत नहीं होगी? |
धारा 68क(2)(गग) के व्यक्ति, उसके नातेदार/सहयुक्त या पूर्व धारक की संपत्ति |
|
धारा 68-झ(4) के अनुसार शेयरों के समपहरण का क्या प्रभाव है? |
जहां किसी कंपनी के शेयर, इस अध्याय के अधीन केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाते हैं, वहां कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में या कम्पनी के संगम अनुच्छेदों में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार को ऐसे शेयरों के अंतरिती के रूप में तत्काल रजिस्टर करेगी। |
|
धारा 68-झ(4) के अनुसार यह रजिस्ट्रेशन किनके बावजूद होगा? |
कंपनी अधिनियम या संगम अनुच्छेदों के बावजूद |
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धारा 68-ञ का विषय क्या है? |
सबूत का भार (Burden of proof) |
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धारा 68-ञ के अनुसार सबूत का भार किस पर है? |
प्रभावित व्यक्ति पर |
|
धारा 68-ञ के अनुसार सबूत किस तथ्य के संबंध में देना होता है? |
कि संपत्ति अवैध रूप से अर्जित नहीं है |
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धारा 68-ञ के अनुसार किस सूचना के संदर्भ में सबूत देना होता है? |
धारा 68-ज के अधीन तामील की गई सूचना में विनिर्दिष्ट संपत्ति के संबंध में |
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धारा 68-ट का विषय क्या है? |
समपहरण के बदले में जुर्माना (Fine in lieu of forfeiture) |
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धारा 68-ट(1) के अंतर्गत जुर्माना कब लगाया जाता है? |
जब संपत्ति धारा 68-झ के अधीन समपहृत घोषित हो |
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धारा 68-ट(1) के अंतर्गत जुर्माना किस स्थिति में लगाया जाता है? |
जब संपत्ति के किसी भाग का स्रोत सिद्ध नहीं हो |
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धारा 68-ट(1) के अंतर्गत जुर्माने की राशि कितनी होगी? |
उस भाग के बाजार मूल्य के बराबर |
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धारा 68-ट(1) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी क्या विकल्प देता है? |
समपहरण के बदले जुर्माना देने का विकल्प |
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धारा 68-ट(2) के अनुसार क्या आवश्यक है? |
जुर्माना लगाने से पहले सुनवाई का अवसर देना |
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धारा 68-ट(3) के अनुसार क्या होगा यदि जुर्माना चुका दिया जाए? |
समपहरण की घोषणा प्रतिसंहृत की जा सकती है |
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जु धारा 68-ट(2) के अनुसार र्माना देने पर संपत्ति का क्या होगा? |
संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी |
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धारा 68-ठ का विषय क्या है? |
कुछ न्यास संपत्तियों के संबंध में प्रक्रिया (Procedure in relation to certain trust properties) |
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धारा 68-ठ किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
धारा 68ख के खंड (ख)(vi) में निर्दिष्ट व्यक्ति पर |
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धारा 68-ठ के अनुसार सक्षम प्राधिकारी कब कार्रवाई करता है? |
जब उसे विश्वास हो कि न्यास संपत्ति अवैध है |
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धारा 68-ठ के अनुसार सूचना किसे दी जाती है? |
न्यासकर्ता या अभिदाता को |
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धारा 68-ठ के अनुसार सूचना में क्या अपेक्षा की जाती है? |
30 दिन में स्रोतों का स्पष्टीकरण देना |
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धारा 68-ठ के अनुसार स्पष्टीकरण किन स्रोतों के बारे में देना होता है? |
धन/आस्तियों के स्रोत जिनसे संपत्ति अर्जित हुई |
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धारा 68-ठ के अनुसार अभिदान के संदर्भ में क्या बताना होता है? |
जिन स्रोतों से न्यास को अभिदाय किया गया |
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धारा 68-ठ के अनुसार ऐसी सूचना किसके समान मानी जाएगी? |
धारा 68-ज के अधीन सूचना |
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धारा 68-ठ के स्पष्टीकरण (i) के अनुसार अवैध संपत्ति क्या है? |
जो न्यासकर्ता/अभिदाता के लिए अवैध होती |
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धारा 68-ठ के अनुसार स्पष्टीकरण (ii) के अनुसार अवैध संपत्ति क्या है? |
अभिदान से अर्जित संपत्ति जो अभिदाता के लिए अवैध होती |
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धारा 68-ङ (अंतरण का अकृत एवं शून्य होना) का विषय क्या है? |
कुछ अन्तरणों का अकृत और शून्य होना (Certain transfers to be null and void) |
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धारा 68-ङ कब लागू होती है? |
जब धारा 68-च(1) के आदेश या धारा 68-ज/68-ठ की सूचना के बाद अंतरण हो |
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धारा 68-ङ के अंतर्गत यदि संपत्ति बाद में समपहृत हो जाए तो क्या होगा? |
अंतरण अकृत और शून्य होगा |
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धारा 68-ङ के अंतर्गत समपहरण किस धारा के अधीन होना चाहिए? |
धारा 68-झ के अधीन |
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धारा 68-ढ़ का विषय क्या है? |
अपील अधिकरण (Constitution of Appellate Tribunal) |
|
धारा 68-ढ़ के अंतर्गत कौन सा अधिकरण अपील अधिकरण होगा? |
तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम, 1976 की धारा 12(1) के अधीन गठित अपील अधिकरण |
|
यह अपील अधिकरण किन आदेशों के विरुद्ध अपील सुनता है? |
धारा 68-च, धारा 68-झ, धारा 68-ट(1) या धारा 68-ठ के अधीन आदेशों के विरुद्ध |
|
अपील अधिकरण का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत है? |
तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम, 1976 |
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धारा 68-ण का विषय क्या है? |
अपील (Appeals) |
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धारा 68-ण(1) के अंतर्गत कौन अपील कर सकता है? |
धारा 68-ङ(1) का अधिकारी या आदेश से व्यथित व्यक्ति |
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किन आदेशों के विरुद्ध अपील की जा सकती है? |
धारा 68-च, 68-झ, 68-ट(1) या 68-ठ के आदेशों के विरुद्ध |
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धारा 68-ण(1) के अंतर्गत अपील कितने समय में की जा सकती है? |
आदेश की तामील से 45 दिन के भीतर |
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धारा 68-ण(1) के अंतर्गत क्या विलंबित अपील स्वीकार की जा सकती है? |
हाँ, 60 दिन तक यदि पर्याप्त कारण हो |
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धारा 68-ण(1) के अंतर्गत अपील अधिकरण विलंबित अपील कब स्वीकार करेगा? |
जब संतुष्ट हो कि पर्याप्त हेतुक था |
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धारा 68-ण(2) के अंतर्गत अधिकरण क्या कर सकता है? |
आदेश को पुष्ट, उपांतरित या अपास्त कर सकता है |
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धारा 68-ण(3) के अनुसार अधिकरण कैसे कार्य करेगा? |
अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय न्यायपीठ द्वारा |
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धारा 68-ण(4) के अनुसार कब दो सदस्यीय पीठ बनेगी? |
शीघ्र निपटान हेतु अध्यक्ष आवश्यक समझे |
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निर्णय कैसे होगा? |
तीसरे सदस्य की राय के अनुसार |
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धारा 68-ण(4) के अनुसार अध्यक्ष के पद रिक्त होने पर क्या होगा? |
केंद्र सरकार सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त करेगी |
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धारा 68-ण(5) के अनुसार अधिकरण क्या कर सकता है? |
अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित कर सकता है |
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धारा 68-ण(6) के अनुसार अभिलेखों का निरीक्षण कब संभव है? |
आवेदन और फीस देने पर |
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धारा 68-ण(6) के अनुसार किसे निरीक्षण की अनुमति दी जाएगी? |
अपील के पक्षकार या उसके अधिकृत व्यक्ति को |
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धारा 68-त का विषय क्या है? |
वर्णन में गलती के कारण सूचना या आदेश का अविधिमान्य न होना (Notice or order not to be invalid for error in description) |
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धारा 68-त किन दस्तावेजों पर लागू होती है? |
सूचना, घोषणा और आदेश पर |
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धारा 68-त के अनुसार किस स्थिति में दस्तावेज वैध रहेगा? |
जब संपत्ति या व्यक्ति पहचान योग्य हो |
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धारा 68-थ का विषय क्या है? |
अधिकारिता का वर्जन (Bar of jurisdiction) |
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धारा 68-थ के अनुसार आदेश या घोषणा कब अपीलीय होगी? |
केवल जहां अध्याय 5-क में उपबंधित है |
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धारा 68-थ के अनुसार क्या सिविल न्यायालय को अधिकारिता है? |
नहीं, ऐसे मामलों में अधिकारिता नहीं होगी |
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किन मामलों में सिविल न्यायालय की अधिकारिता वर्जित है? |
जिन्हें अपील अधिकरण या सक्षम प्राधिकारी निर्णय कर सकते हैं |
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धारा 68-द का विषय क्या है?
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सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण के पास सिविल न्यायालय की शक्तियां होना (Competent authority and Appellate Tribunal to have powers of civil court) |
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सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण को किस प्रकार की शक्तियां प्राप्त हैं? |
सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां |
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ये शक्तियां किस अधिनियम के अधीन हैं? |
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन |
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धारा 68-द(क) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
व्यक्ति को समन करना और शपथ पर परीक्षा करना |
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धारा 68-द(ख) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश करने की अपेक्षा करना |
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धारा 68-द(ग) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
शपथ-पत्र पर साक्ष्य लेना |
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धारा 68-द(घ) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
लोक अभिलेख या प्रतिलिपि मंगाना |
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धारा 68-द(ङ) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
साक्षियों/दस्तावेजों के लिए कमीशन निकालना |
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धारा 68-द(च) के अंतर्गत क्या शक्ति है? |
अन्य विहित विषयों पर शक्ति |
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धारा 68-ध का विषय क्या है? |
सक्षम प्राधिकारी को जानकारी देना (Information to competent authority) |
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धारा 68-ध(1) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी को क्या शक्ति है? |
किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, सक्षम प्राधिकारी को केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी अधिकारी या प्राधिकारी से ऐसे व्यक्तियों, मुद्दों या विषयों के बारे में जो सक्षम प्राधिकारी की राय में इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए उपयोगी या सुसंगत होंगे, जानकारी मांगने की शक्ति |
|
धारा 68-ध(2) के अंतर्गत कौन जानकारी दे सकता है? |
धारा 68-न में निर्दिष्ट व्यक्ति |
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धारा 68-न का विषय क्या है? |
कतिपय अधिकारियों द्वारा सहायता (Certain officers to assist Administrator, competent authority and Appellate Tribunal) |
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धारा 68-न के अंतर्गत सहायता किसे प्रदान की जाती है? |
प्रशासक, सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण को |
|
धारा 68-न(क) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारी |
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धारा 68-न(ख) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
सीमाशुल्क विभाग के अधिकारी |
|
धारा 68-न(ग) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारी |
|
धारा 68-न(घ) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
आय-कर विभाग के अधिकारी |
|
धारा 68-न(ङ) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
प्रवर्तन अधिकारी (FERA, 1973) |
|
धारा 68-न(च) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
पुलिस के अधिकारी |
|
धारा 68-न(छ) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
स्वापक विभाग के अधिकारी |
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धारा 68-न(ज) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
केन्द्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो के अधिकारी |
|
धारा 68-न(झ) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
राजस्व आसूचना निदेशालय के अधिकारी |
|
धारा 68-न(ञ) के अंतर्गत कौन अधिकारी आते हैं? |
केंद्र/राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य अधिकारी |
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धारा 68-प का विषय क्या है? |
कब्जे में लेने की शक्ति (Power to take possession) |
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धारा 68-प(1) के अंतर्गत आदेश कब दिया जाता है? |
जब संपत्ति समपहृत घोषित हो या जुर्माना न चुकाया जाए |
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धारा 68-प(1) के अंतर्गत जुर्माना किस धारा के अधीन देय होता है? |
धारा 68-ट(1) के अधीन |
|
धारा 68-प(1) के अंतर्गत जुर्माना न चुकाने की समय-सीमा किस धारा में है? |
धारा 68-ट(3) के अधीन |
|
धारा 68-प के अंतर्गत आदेश किसके विरुद्ध दिया जाता है? |
प्रभावित व्यक्ति या संपत्ति धारक के विरुद्ध |
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धारा 68-प के अंतर्गत आदेश में क्या निर्देश होता है? |
30 दिन में संपत्ति का अभ्यर्पण या कब्जा देना |
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धारा 68-प के अंतर्गत संपत्ति किसे सौंपी जाती है? |
प्रशासक या उसके अधिकृत व्यक्ति को |
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धारा 68-प के अंतर्गत यदि आदेश का पालन न हो तो क्या होगा? |
प्रशासक कब्जा ले सकता है |
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धारा 68-प(3) के अनुसार प्रशासक क्या कर सकता है? |
पुलिस सहायता मांग सकता है |
|
धारा 68-फ का विषय क्या है? |
भूलों की परिशुद्धि (Rectification of mistakes) |
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धारा 68-फ के अंतर्गत किसे संशोधन की शक्ति है? |
सक्षम प्राधिकारी या अपील अधिकरण को |
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धारा 68-फ के अंतर्गत संशोधन किस उद्देश्य से किया जाता है? |
अभिलेख से प्रकट भूलों की परिशुद्धि के लिए |
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धारा 68-फ के अंतर्गत किस आदेश को संशोधित किया जा सकता है? |
उसी प्राधिकारी द्वारा किया गया आदेश |
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धारा 68-फ के अंतर्गत संशोधन की समय-सीमा क्या है? |
आदेश की तारीख से 1 वर्ष के भीतर |
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धारा 68-फ के प्रोवाइजो के अनुसार संशोधन कब नहीं किया जाएगा? |
बिना सुनवाई का अवसर दिए यदि प्रतिकूल प्रभाव पड़े |
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धारा 68-फ के अंतर्गत किसे सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है? |
प्रभावित व्यक्ति को |
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धारा 68-ब का विषय क्या है? |
अन्य विधियों के अधीन निकाले गए निष्कर्षों का इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों के लिए निश्चायक न होना (Findings under other laws not conclusive for proceedings under this Chapter) |
|
धारा 68-भ का विषय क्या है? |
सूचनाओं और आदेशों की तामील (Service of notices and orders) |
|
धारा 68-भ के अंतर्गत तामील किसकी होती है? |
सूचना या आदेश की |
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धारा 68-भ(क) के अनुसार तामील कैसे की जाती है? |
व्यक्ति या उसके अभिकर्ता को देकर या रजिस्ट्रीकृत डाक से |
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धारा 68-भ(ख) के अनुसार वैकल्पिक तामील कब होती है? |
जब खंड (क) के अनुसार तामील संभव न हो |
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धारा 68-भ(क) के अनुसार वैकल्पिक तामील कैसे की जाती है? |
संपत्ति या परिसर के सहजदृश्य स्थान पर चिपकाकर |
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धारा 68-म का विषय क्या है? |
उस सम्पत्ति का, जिसके बारे में इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियां की गई हैं, अर्जन करने के लिए दण्ड (Punishment for acquiring property in relation to which proceedings have been taken, under this Chapter) |
|
धारा 68-म के अंतर्गत अपराध क्या है? |
कार्यवाही लंबित संपत्ति का जानबूझकर अर्जन |
|
धारा 68-म के अंतर्गत दण्ड क्या है? |
कारावास और जुर्माना |
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धारा 68-म के अंतर्गत कारावास की अधिकतम अवधि क्या है? |
5 वर्ष तक |
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धारा 68-म के अंतर्गत जुर्माने की अधिकतम राशि क्या है? |
50,000 रुपये तक |
|
धारा 68-य का विषय क्या है? |
कतिपय मामलों में संपत्ति निर्मुक्त करना (Release of property in certain cases) |
|
धारा 68-य(1) के अंतर्गत संपत्ति कब निर्मुक्त होगी? |
जब निरोध आदेश अपास्त या वापस लिया जाए |
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धारा 68-य(1) के अंतर्गत कौन सी संपत्ति निर्मुक्त होगी? |
अभिगृहीत या स्थिर की गई संपत्ति |
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धारा 68-य(2) किन व्यक्तियों पर लागू होती है? |
धारा 68क(2)(क), (ख) या (गग) में निर्दिष्ट व्यक्ति |
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धारा 68-य(2) के अंतर्गत संपत्ति कब निर्मुक्त होगी? |
जब व्यक्ति दोषमुक्त या आरोपमुक्त हो जाए |
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धारा 68-य(2) के अंतर्गत समपहरण न होने की स्थिति में संपत्ति कब निर्मुक्त होगी? |
जब दोषमुक्ति के कारण समपहरण न हो सके |
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यदि गिरफ्तारी वारंट या प्राधिकार वापस लिया जाए तो क्या होगा? |
संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी |
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अध्याय-6 (CHAPTER VI) |
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प्रकीर्ण (MISCELLANEOUS) |
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धारा 69 का विषय क्या है? |
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण (Protection of action taken in good faith) |
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धारा 69 के अंतर्गत संरक्षण किसे प्राप्त है? |
केन्द्रीय/राज्य सरकार और उनके अधिकारी या अन्य व्यक्ति |
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धारा 69 के अंतर्गत संरक्षण किन कार्यों के लिए है? |
इस अधिनियम/नियम/आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक किए गए कार्यों के लिए |
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धारा 69 के अंतर्गत किन कार्यवाहियों से संरक्षण है? |
वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही से |
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संरक्षण किन व्यक्तियों को मिलता है? |
शक्तियों का प्रयोग करने या कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्तियों को |
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धारा 70 का विषय क्या है? |
नियम बनाते समय अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंशनों का ध्यान रखना (Central Government and State Government to have regard to international conventions while making rules) |
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धारा 70 के अंतर्गत किसे नियम बनाने की शक्ति है? |
केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों द्वारा नियम बनाते समय अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंशनों का ध्यान रखा जाना |
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धारा 70 के अंतर्गत किन कन्वेंशनों का ध्यान रखा जाएगा? |
स्वापक औषधि एकल कन्वेंशन, 1961, मनःप्रभावी पदार्थ कन्वेंशन, 1971 |
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1972 का प्रोटोकॉल किससे संबंधित है? |
1961 के कन्वेंशन के संशोधन से |
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क्या भारत का पक्षकार होना आवश्यक है? |
हाँ, जिन कन्वेंशनों का उल्लेख है उनमें भारत पक्षकार है |
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धारा 71 का विषय क्या है? |
व्यसनियों की पहचान, उपचार आदि हेतु केन्द्र स्थापित करने की शक्ति (Power of Government to establish centres for identification, treatment, etc., of addicts and for supply of narcotic drug and psychotropic substances) |
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धारा 71(1) के अंतर्गत किसे शक्ति प्राप्त है? |
सरकार को |
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धारा 71(1) के अंतर्गत सरकार किन प्रयोजनों के लिए केन्द्र स्थापित कर सकती है? |
पहचान, उपचार, प्रबंधन, शिक्षा, पश्चात्वर्ती देखरेख, पुनर्वास, सामाजिक पुनः एकीकरण |
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धारा 71(1) के अंतर्गत केन्द्रों की संख्या कौन निर्धारित करेगा? |
सरकार, जैसा वह उचित समझे |
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धारा 71(1) के अंतर्गत सरकार किन प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगी? |
केन्द्रों की स्थापना, नियुक्ति, अनुरक्षण, रक्षण, प्रबंध और अधीक्षण तथा वहां से स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों के प्रदाय के लिए और ऐसे केन्द्रों में नियोजित व्यक्तियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, शक्तियों, कर्तव्यों का उपबंध करने के लिए इस अधिनियम से संगत नियम बना सकेगी |
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धारा 72 का विषय क्या है? |
सरकार को शोध्य राशियों की वसूली (Recovery of sums due to Government) |
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धारा 72(1) के अंतर्गत कौन सी राशियां वसूलीय हैं? |
अनुज्ञप्ति फीस या अन्य धनराशि |
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धारा 72(1) के अंतर्गत ये राशियां किसके प्रति संदेय होती हैं? |
केन्द्रीय या राज्य सरकार के प्रति |
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धारा 72(1) के अंतर्गत राशि वसूल करने का अधिकार किसे है? |
सक्षम अधिकारी को |
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धारा 72(1) के अंतर्गत वसूली किस प्रकार वसूल की जाएगी? |
देय धन से कटौती, माल की कुर्की और विक्रय |
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धारा 72(1) के अंतर्गत यदि वसूली नहीं हो सके तो क्या होगा? |
भू-राजस्व की बकाया की तरह वसूली होगी |
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धारा 72(1) के अंतर्गत राशि किससे वसूली जा सकती है? |
व्यक्ति या उसके प्रतिभू से |
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धारा 72(2) किससे संबंधित है? |
बंधपत्र से |
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किस प्रकार के बंधपत्र धारा 72(2) में आते हैं? |
धारा 34 व 39 से भिन्न बंधपत्र |
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धारा 72(2) के अंतर्गत पालन को किस रूप में माना जाएगा? |
लोक कर्तव्य |
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धारा 72(2) किस अधिनियम की धारा 74 से संबंधित है? |
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 |
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धारा 72(2) के अंतर्गत बंधपत्र के उल्लंघन पर क्या होगा? |
संपूर्ण धनराशि वसूली जाएगी या उसके प्रतिभू से (यदि कोई हो) इस प्रकार वसूल की जा सकेगी मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो। |
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धारा 72(2) के अंतर्गत वसूली किस प्रकार होगी? |
भू-राजस्व की बकाया की तरह |
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धारा 73 का विषय क्या है? |
अधिकारिता का वर्जन (Bar of jurisdiction) |
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धारा 73 के अनुसार किस न्यायालय की अधिकारिता वर्जित है? |
सिविल न्यायालय की |
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धारा 73 के अनुसार सिविल न्यायालय किन मामलों में वाद या कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा? |
अधिनियम/नियम के अधीन निर्णय या आदेश के विरुद्ध |
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धारा 73(क) के अंतर्गत कौन सा विषय शामिल है? |
अफीम पोस्त की खेती हेतु अनुज्ञप्ति का देना, इंकार या रद्दकरण |
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धारा 73(ख) के अंतर्गत कौन सा विषय शामिल है? |
अफीम की क्वालिटी और उसके गाढ़ेपन के अनुसार तौल, परीक्षा और वर्गीकरण तथा ऐसी परीक्षा के अनुसार मानक कीमत से की गई कोई कटौती या उसमें परिवर्धन |
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धारा 73(ग) के अंतर्गत कौन सा विषय शामिल है? |
अपमिश्रित अफीम का अधिहरण |
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धारा 74 का विषय क्या है? |
संक्रमणकालीन उपबंध (Transitional provisions) |
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धारा 74 कब लागू होती है? |
अधिनियम के प्रारंभ के समय |
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धारा 74 किन व्यक्तियों पर यह लागू होती है? |
सरकार के अधिकारी या अन्य कर्मचारी |
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ऐसे अधिकारी क्या कर रहे होते हैं? |
शक्तियों का प्रयोग या कर्तव्यों का पालन |
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धारा 74-क. का विषय क्या है? |
केन्द्रीय सरकार की निर्देश देने की शक्ति (Power of Central Government to give directions) |
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केन्द्रीय सरकार अधिनियम के उपबंधों का निष्पादन करने के सम्बन्ध में किसको निर्देश दे सकेगी? |
राज्य सरकार को |
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धारा 75 का विषय क्या है? |
प्रत्यायोजन की शक्ति (Power to delegate) |
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धारा 75(1) के अंतर्गत किसे प्रत्यायोजन की शक्ति है? |
केन्द्रीय सरकार को |
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प्रत्यायोजन किन शर्तों के अधीन होगा? |
अधिसूचना में विनिर्दिष्ट शर्तों और परिसीमाओं के अधीन |
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कौन सी शक्ति प्रत्यायोजित नहीं की जा सकती? |
नियम बनाने की शक्ति |
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प्रत्यायोजन किनको किया जा सकता है? |
बोर्ड, अन्य प्राधिकारी या स्वापक आयुक्त को |
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धारा 75(2) के अंतर्गत किसे प्रत्यायोजन की शक्ति है? |
राज्य सरकार को |
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राज्य सरकार किन शक्तियों का प्रत्यायोजन कर सकती है? |
अपनी शक्तियां और कृत्य |
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राज्य सरकार प्रत्यायोजन किनको कर सकती है? |
किसी प्राधिकारी या अधिकारी को |
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धारा 76 का विषय क्या है? |
नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति (Power of Central Government to make rules) |
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धारा 76(1) के अंतर्गत किसे नियम बनाने की शक्ति है? |
केन्द्रीय सरकार को |
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धारा 76(2) क्या प्रदान करती है? |
नियमों के विषयों की सूची |
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धारा 76(2)(क) किससे संबंधित है? |
वह पद्धति, जिसके द्वारा धारा 2 के खंड (v), खंड (vi), खंड (xiv) और खंड (xv) के प्रयोजनों के लिए द्रव निर्मितियों की दशा में प्रतिशतताओं का परिकलन किया जाएगा |
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धारा 76(2)(ख) किससे संबंधित है? |
धारा 34 के बंधपत्र का प्ररूप, जो परिशान्ति बनाए रखने के लिए धारा 34 के अधीन निष्पादित किया जाएगा |
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धारा 76(2)(ग) किससे संबंधित है? |
धारा 39 के बंधपत्रों का प्ररूप, जो धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन चिकित्सीय उपचार के लिए सिद्धदोष किसी व्यसनी व्यक्ति की निर्मुक्ति के लिए निष्पादित किया जाएगा और वह बंधपत्र, जो उस धारा की उपधारा (2) के अधीन सम्यक् भर्त्सना के पश्चात् ऐसे सिद्धदोष व्यक्ति द्वारा अपनी निर्मुक्ति के पूर्व निष्पादित किया जाएगा |
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धारा 76(2)(गक) किससे संबंधित है? |
धारा 50क के नियंत्रित परिदान की रीति |
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धारा 76(2)(घ) किससे संबंधित है? |
विदेशी दस्तावेजों का अधिप्रमाणन |
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धारा 76(2)(घक) किससे संबंधित है? |
धारा 68छ की उपधारा (2) के अधीन प्रशासक द्वारा संपत्ति प्रबंधन की रीति |
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धारा 76(2)(घग) किससे संबंधित है? |
वे फीसें जिनका संदाय धारा 68ण की उपधारा (6) के अधीन अपील अधिकरण के अभिलेखों और रजिस्ट्ररों के निरीक्षण के लिए या उनके किसी भाग की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए किया जाएगा |
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धारा 76(2)(घघ) किससे संबंधित है? |
सिविल न्यायालय की शक्तियां जिनका प्रयोग धारा 68द के खंड (च) के अधीन सक्षम प्राधिकारी और अपील अधिकरण द्वारा किया जा सकेगा |
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धारा 76(2)(घङ) किससे संबंधित है? |
अधिहत वस्तुओं का निपटारा |
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धारा 76(2)(घच) किससे संबंधित है? |
नमूनों का परीक्षण और विश्लेषण |
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धारा 76(2)(घछ) किससे संबंधित है? |
अधिकारियों, भेदियों और अन्य व्यक्तियों को संदत्त किए जाने वाले पुरस्कार |
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धारा 76(2)(ङ) किससे संबंधित है? |
वे शर्तें जिनमें और वह रीति जिससे धारा 73 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार के पास रजिस्ट्रीकृत व्यसनियों और अन्य व्यक्तियों को चिकित्सीय आवश्यकता के लिए स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों का प्रदाय किया जा सकेगा। |
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धारा 76(2)(च) किससे संबंधित है? |
धारा 71 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित केन्द्रों की स्थापना, नियुक्ति, अनुरक्षण, प्रबंध और अधीक्षण तथा ऐसे केन्द्रों में नियोजित व्यक्तियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, शक्तियां और कर्तव्य |
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धारा 76(2)(छ) किससे संबंधित है? |
धारा 6 की उपधारा (5) के अधीन स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ सलाहकार समिति के अध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि, आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति और उनको संदेय भत्ते तथा वे शर्ते और निर्बंधन, जिनके अधीन रहते हुए कोई गैर सदस्य किसी उपसमिति में नियुक्त किया जा सकेगा |
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धारा 76(2)(ज) क्या है? |
अन्य विहित विषय |
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धारा 77 का विषय क्या है? |
नियमों और अधिसूचनाओं को संसद् के समक्ष रखा जाना (Rules and notifications to be laid before Parliament) |
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धारा 77 के अंतर्गत किनको संसद के समक्ष रखा जाएगा? |
नियम, अधिसूचनाएं और आदेश |
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धारा 77 के अंतर्गत नियम कौन बनाता है? |
केन्द्रीय सरकार |
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धारा 77 के अंतर्गत कौन सी अधिसूचनाएं/आदेश शामिल हैं? |
धारा 2(viiक), (xi), (xxiiiक), धारा 3, 7क, 9क और 27(क) के अधीन अधिसूचनाएं |
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धारा 77 के अंतर्गत नियम/अधिसूचना कब रखी जाएगी? |
बनाए/निकाले जाने के पश्चात् यथाशीघ्र |
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धारा 77 के अंतर्गत कितनी अवधि के लिए संसद के समक्ष रखी जाएगी? |
30 दिन |
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धारा 78 का विषय क्या है? |
नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति (Power of State Government to make rules) |
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धारा 78(1) के अंतर्गत किसे नियम बनाने की शक्ति है? |
राज्य सरकार को |
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धारा 78(2) क्या प्रदान करती है? |
नियमों के विषयों की सूची |
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धारा 78(2)(क) किससे संबंधित है? |
धारा 71 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार के पास रजिस्ट्रीकृत व्यसनियों और अन्य व्यक्तियों को चिकित्सीय आवश्यकता के लिए स्वापक ओषधियों और मनः प्रभावी पदार्थों का प्रदाय किया जा सकेगा |
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धारा 78(2)(ख) किससे संबंधित है? |
धारा 71 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा स्थापित केन्द्रों की स्थापना, नियुक्ति, अनुरक्षण, प्रबंध और अधीक्षण तथा ऐसे केन्द्रों में नियोजित व्यक्तियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, शक्तियां और कर्तव्य |
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धारा 78(3) के अनुसार नियम कहाँ रखे जाएंगे? |
राज्य के विधान-मंडल के समक्ष |
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धारा 79 का विषय क्या है? |
सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 का लागू होना (Application of the Customs Act, 1962) |
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धारा 79 किन क्रियाओं पर लागू होती है? |
आयात, निर्यात और यानांतरण पर |
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इस अधिनियम के प्रतिषेध किसके समान माने जाएंगे? |
सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 के प्रतिषेध |
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धारा 79 के परन्तुक के अनुसार यदि अपराध दोनों अधिनियमों में दंडनीय हो तो क्या होगा? |
जहां किसी बात का किया जाना उस अधिनियम के अधीन और इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध है वहाँ उस अधिनियम में या इस धारा में की कोई बात अपराधी को इस अधिनियम के अधीन दंडित किए जाने से निवारित नहीं करेगी। |
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धारा 80 का विषय क्या है? |
औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 का लागू होना (Application of the Drugs and Cosmetics Act, 1940 not barred) |
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धारा 80 के अनुसार स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 किसके साथ लागू होता है? |
औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के साथ |
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धारा 81 का विषय क्या है? |
राज्य और विशेष विधियों की व्यावृति (Saving of State and special laws) |
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धारा 81 के अनुसार स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 का प्रभाव किन विधियों पर नहीं पड़ेगा? |
प्रांतीय/राज्य अधिनियमों पर |
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किन विषयों पर राज्य विधि लागू रह सकती है? |
कैनेबिस की खेती, उपयोग या व्यापार पर |
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धारा 82 का विषय क्या है? |
निरसन और व्यावृत्ति (Repeal and savings) |
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धारा 82(1) के अंतर्गत कौन-कौन से अधिनियम निरसित किए गए हैं? |
अफीम अधिनियम, 1857; अफीम अधिनियम, 1878; अनिष्टकर मादक द्रव्य अधिनियम, 1930 |
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धारा 82(2) का क्या प्रभाव है? |
पूर्व की गई कार्यवाहियां मान्य रहेंगी |
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किन कार्यवाहियों को मान्यता मिलेगी? |
जो निरसित अधिनियमों के अधीन की गई थीं |
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धारा 83 का विषय क्या है? |
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति (Power to remove difficulties) |
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धारा 83(1) के अंतर्गत किसे शक्ति प्राप्त है? |
केन्द्रीय सरकार को |
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धारा 83(2) के अनुसार आदेश का क्या किया जाएगा? |
संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा |