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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (THE INDIAN TRUSTS ACT, 1882) |
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(1882 का अधिनियम संख्यांक 2) (ACT NO. 2 OF 1882) |
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इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? |
भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (The Indian Trusts Act, 1882) |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 का अधिनियम क्रमांक क्या है?
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1882 का अधिनियम संख्यांक 2 (Act No. 2 Of 1882) |
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संक्षिप्त, नाम, प्रारम्भ, स्थानीय विस्तार और व्यावृत्तियां (Short Title Commencement, Local extentand and Savings) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 1 |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 कब से प्रवृत्त हुआ? |
1 मार्च 1882 |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 का सामान्य क्षेत्रीय विस्तार क्या है? |
सम्पूर्ण भारत, अंडमान और निकोबार द्वीपों को छोड़कर |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 उद्देश्य क्या है? |
प्राइवेट न्यासों और न्यासियों से संबंधित विधि को परिभाषित और संशोधित किया जाए, |
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अंडमान और निकोबार द्वीपों पर इस अधिनियम का विस्तार कौन कर सकता है? |
केन्द्रीय सरकार |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 किस धार्मिक विधि के नियमों को प्रभावित नहीं करता? |
मुस्लिम विधि के वक्फ संबंधी नियम |
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किस प्रकार के विन्यासों पर भारतीय न्यास अधिनियम लागू नहीं होता? |
धार्मिक या खैराती विन्यास |
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अविभक्त कुटुम्ब के सदस्यों के पारस्परिक संबंध किसके द्वारा नियंत्रित होते हैं? |
रूडिजन्य या स्वीय विधि |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 किन पर लागू नहीं होता? |
इस अधिनियम की कोई भी बात मुस्लिम विधि के उन नियमों पर जो वक्फ के बारे में हैं, या किसी अविभक्त कुटुम्ब के सदस्यों के ऐसे पारस्परिक संबंधों पर, जो किसी रूडिजन्य या स्वीय विधि द्वारा अवधारित होते हैं, प्रभाव नहीं डालती, और न लोक या प्राइवेट धार्मिक या खैराती विन्यासों को या युद्ध में पकड़े गए प्राइजों का वितरण प्रग्रहीताओं में करने के लिए न्यानों को लागू होती है. और इस अधिनियम के द्वितीय अध्याय की कोई भी बात उक्त दिन से पूर्व सृष्ट न्यासों को लागू नहीं होती है। |
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अधिनियमितियों का निरसन, (Repeal of Enactments) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 2 |
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धारा 2 के अनुसार कौन-से कानून निरस्त हो जाते हैं? |
अनुसूची में वर्णित कानून और अधिनियम |
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धारा 2 के अनुसार कानूनों का निरसन किस सीमा तक होता है? |
अनुसूची में वर्णित विस्तार तक |
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 3 मुख्यतः किससे संबंधित है? |
परिभाषाएँ (निर्वचन खंड) (Definitions (Interpretation Clause)) |
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“न्यास” (Trust) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 1 |
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“न्यास” से अभिप्रेत है? |
न्यास सम्पत्ति के स्वामित्व में उपाबद्ध और दूसरे के या दूसरे और स्वामी के फायदे के लिए स्वामी पर रखे गए और स्वामी द्वारा प्रतिगृहीत या उसके द्वारा घोषित और प्रतिगृहीत विश्वान से उद्भूत वाध्यता हैI |
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“न्यासकर्ता” (Author of the Trust) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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न्यासकर्ता से अभिप्रेत है? |
वह व्यक्ति, जो विश्वास रखता है या उसे घोषित करता है 'न्यासकर्ता" कहलाता है |
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“न्यासी” (Trustee) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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“न्यासी” से अभिप्रेत है? |
वह व्यक्ति, जो विश्वास प्रतिगृहीत करता है "न्यासी" कहलाता है |
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“न्यास” किससे उत्पन्न होने वाली बाध्यता है? |
विश्वास से उत्पन्न बाध्यता |
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“न्यास” किससे संबंधित बाध्यता है? |
संपत्ति के स्वामित्व से |
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“हिताधिकारी” (Beneficiary) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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“हिताधिकारी” कौन होता है? |
वह व्यक्ति जिसके फायदे के लिए विश्वास प्रतिगृहीत किया जाता है "हिताधिकारी" कहलाता है |
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न्यास-सम्पत्ति (Trust-Property) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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न्यास की विषय-वस्तु को क्या कहा जाता है? |
न्यास की विषय-वस्तु, त्यास-सम्पत्ति" या "न्यास-धन" कहलाती है |
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हिताधिकारी का “फायदाप्रद हित” (Beneficial Interest) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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हिताधिकारी का “फायदाप्रद हित” क्या होता है? |
हिताधिकारी का "फायदाप्रद हित" या "हित" उसका न्यास-सम्पत्ति के स्वामी के रूप में न्यासी के विरुद्ध अधिकार है |
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न्यास की लिखत (Instrument of Trust) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 2 |
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वह लिखित दस्तावेज जिसके द्वारा न्यास घोषित किया जाता है, क्या कहलाता है? |
न्यास की लिखत |
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"न्यास-भंग” (Breach of Trust) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 3 |
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“न्यास-भंग” किसे कहा जाता है? |
किसी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा त्यासी पर उसकी उस हैसियत में अधिरोपित किसी कर्तव्य का भंग "न्यास-भंग" कहलाता हैI |
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“रजिस्ट्रीकृत” (Registered) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 4 |
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“रजिस्ट्रीकृत” शब्द से क्या अभिप्राय है? |
इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो, "रजिस्ट्रीकृत" से दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के लिए तत्समव प्रवृत्त विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत अभिप्रेत है। |
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“सूचना” (Notice) किस धारा में परिभाषित है? |
धारा 3 पैरा 5 |
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किसी व्यक्ति को किसी तथ्य की “सूचना” कब मानी जाती है? |
जब वह वास्तव में उस तथ्य को जानता हो |
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“सूचना” का ज्ञान कब माना जाएगा, भले ही व्यक्ति वास्तव में न जानता हो? |
जब वह जांच करने से जानबूझकर बचता है या घोर उपेक्षा करता है |
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किसी तथ्य की “सूचना” कब मानी जाएगी यदि वह अभिकर्ता को प्राप्त हो? |
जब अभिकर्ता को धारा 229 भारतीय संविदा अधिनियम के अंतर्गत उस तथ्य की जानकारी दी गई हो या उसने प्राप्त की हो |
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भारतीय न्यास अधिनियम में प्रयुक्त वे शब्द जो किसी अन्य अधिनियम में परिभाषित हैं, उनका अर्थ कहाँ से लिया जाएगा? |
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अधिनियम 9 में परिभाषित (Expressions defined in Act 9 of 1872) |
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अध्याय -2 (CHAPTER-II) |
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न्यासों के सृजनके विषय में (OF THE CREATION OF TRUSTS) |
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विधिपूर्ण प्रयोजन, (Lawful Purpose) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 4 |
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न्यास किन प्रयोजनों के लिए सृष्ट किया जा सकता है? |
किसी भी विधिपूर्ण प्रयोजन के लिए |
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किस स्थिति में न्यास का प्रयोजन विधिपूर्ण नहीं माना जाएगा? |
जब वह विधि द्वारा निषिद्ध हो |
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यदि न्यास का प्रयोजन ऐसा हो कि उसके अनुज्ञात होने से किसी विधि के उपबंधों को विफल कर दे, तो वह प्रयोजन कैसा माना जाएगा? |
अवैध (विधिविरुद्ध) |
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यदि न्यास का प्रयोजन कपटपूर्ण हो तो उसका क्या प्रभाव होगा? |
न्यास शून्य होगा |
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यदि न्यास के प्रयोजन में किसी अन्य व्यक्ति के शरीर या संपत्ति की क्षति अन्तर्वलित हो, तो ऐसा न्यास कैसा होगा? |
शून्य |
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यदि न्यायालय किसी न्यास के प्रयोजन को अनैतिक या लोकनीति के विरुद्ध समझे, तो उसका परिणाम क्या होगा? |
न्यास शून्य होगा |
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यदि किसी न्यास का प्रयोजन विधिविरुद्ध हो, तो उसका क्या प्रभाव होगा? |
न्यास शून्य होगा |
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यदि न्यास दो प्रयोजनों के लिए बनाया गया हो, जिनमें एक विधिपूर्ण और दूसरा विधिविरुद्ध हो तथा दोनों को पृथक न किया जा सके, तो क्या होगा? |
सम्पूर्ण न्यास शून्य होगा |
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धारा 4 के स्पष्टीकरण के अनुसार “विधि” शब्द में क्या सम्मिलित हो सकता है? |
वह विदेशी विधि जहाँ न्यास-सम्पत्ति स्थित हो, यदि वह स्थावर संपत्ति हो |
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यदि स्थावर न्यास-सम्पत्ति किसी विदेशी देश में स्थित हो, तो धारा 4 के अंतर्गत “विधि” से क्या अभिप्रेत होगा? |
उस विदेशी देश की विधि |
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यदि संपत्ति का न्यास इस उद्देश्य से बनाया जाए कि उसके लाभ उन बालिकाओं के पालन-पोषण में लगाए जाएँ जिन्हें वेश्या बनाने के लिए तैयार किया जाना है, तो ऐसा न्यास कैसा होगा? |
शून्य |
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यदि संपत्ति का न्यास तस्करी का व्यापार चलाने के उद्देश्य से बनाया जाए, तो उसका क्या परिणाम होगा? |
न्यास शून्य होगा |
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यदि कोई व्यक्ति दिवालिया होने की स्थिति में अपनी संपत्ति न्यास पर हस्तांतरित कर देता है और बाद में दिवालिया घोषित हो जाता है, तो उसके लेनदारों के विरुद्ध वह न्यास कैसा होगा? |
लेनदारों के विरुद्ध अविधिमान्य |
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क सम्पत्ति को इस हेतु से को न्यास पर हस्तांतरित करता है कि उसके लाभ उन अपविद्धाओं के पालन-पोषण में उपयोजित किए जाएं जिन्हें वेश्या बनाने के लिए प्रतिक्षित किया जाना है। यह न्यास--
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शून्य है। |
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क सम्पत्ति की न्यास पर वसीयत को इसलिए करता है कि उस सम्पत्ति को तस्करी का कारचार चलाने में लगाया जाए, और उसके लाभों में से क की सन्तान का, पालन किया जाए। वह न्यास-- |
शून्य है। |
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क दिवाले की परिस्थितियों में होते हुए सम्पत्ति व को, क के जीवन पर्यन्त के लिए न्यास पर और क की मृत्यु के उपरान्त के लिए, अन्तरित करता है। क दिवालिया घोषित किया जाता है। क के लिए न्यास उसके लेनदारों के विरुद्ध-- |
अविधिमान्य है। |
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स्थावर सम्पत्ति का न्यास, (Trust of Immoveable Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 5 |
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स्थावर सम्पत्ति से संबंधित न्यास कब विधिमान्य माना जाता है? |
लिखित, हस्ताक्षरित और रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा या वसीयत द्वारा |
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स्थावर सम्पत्ति का न्यास किसके द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए? |
न्यासकर्ता या न्यासी द्वारा |
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स्थावर सम्पत्ति का न्यास किस रूप में बनाया जा सकता है? |
लिखित और रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा |
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स्थावर सम्पत्ति का न्यास किस अन्य माध्यम से भी बनाया जा सकता है? |
न्यासकर्ता या न्यासी की वसीयत से |
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जंगम सम्पत्ति का न्यास (Trust of moveable property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 5 |
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जंगम सम्पत्ति से संबंधित न्यास कब विधिमान्य माना जाएगा? |
जब वह लिखित रूप से घोषित हो या संपत्ति का स्वामित्व न्यासी को हस्तांतरित कर दिया गया हो |
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जंगम सम्पत्ति के न्यास के लिए कौन-सी शर्त आवश्यक हो सकती है? |
संपत्ति का स्वामित्व न्यासी को हस्तांतरित किया जाना |
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यदि जंगम संपत्ति के न्यास की विधिवत घोषणा नहीं की गई है, तो उसे वैध बनाने के लिए क्या आवश्यक है? |
संपत्ति का स्वामित्व न्यासी को हस्तांतरित किया जाना |
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धारा 5 के नियम कब लागू नहीं होते? |
जब उनके प्रवर्तन से कपट प्रभावी होता हो |
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स्थावर सम्पत्ति के न्यास के लिए लिखत का पंजीकरण किसके अधीन होना चाहिए? |
दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए प्रवृत्त विधि के अधीन |
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स्थावर सम्पत्ति के न्यास के लिए कौन-सी शर्त अनिवार्य है? |
लिखित, हस्ताक्षरित और रजिस्ट्रीकृत लिखत या वसीयत |
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जंगम संपत्ति के न्यास की वैधता के लिए क्या आवश्यक नहीं है? |
न्यायालय का आदेश |
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स्थावर संपत्ति के न्यास के लिए आवश्यक लिखत कैसी होनी चाहिए? |
हस्ताक्षरित, लेखबद्ध और रजिस्ट्रीकृत |
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यदि धारा 5 के नियमों का कठोर अनुप्रयोग कपट को प्रभावी बना दे, तो क्या होगा? |
न्यायालय नियमों को लागू नहीं करेगा |
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न्यास का सृजन, (Creation of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 6 |
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धारा 6 के अनुसार न्यास का सृजन कब होता है? |
जब न्यासकर्ता शब्दों या कार्यों से अपना आशय, प्रयोजन, हिताधिकारी और न्यास-सम्पत्ति युक्तियुक्त निश्चितता से प्रदर्शित करे |
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न्यास के सृजन के लिए कौन-सा तत्व आवश्यक है? |
न्यास का आशय, न्यास का प्रयोजन, हिताधिकारी तथा न्यास-सम्पत्ति का युक्तियुक्त निश्चित होना |
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धारा 6 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति कैसी होनी चाहिए? |
युक्तियुक्त निश्चितता के साथ प्रदर्शित |
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यदि न्यास वसीयत द्वारा घोषित न हो और न्यासकर्ता स्वयं न्यासी न हो, तो क्या आवश्यक है? |
न्यास-सम्पत्ति का न्यासी को अंतरण |
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यदि न्यासकर्ता यह पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए संपत्ति की वसीयत करे कि प्राप्तकर्ता उस संपत्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए करेगा, तो क्या होगा? |
न्यास का सृजन होगा |
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क "यह पूर्णतम विश्वास रखते हुए कि उन सम्पत्ति का व्ययन र के फायदे के लिए करेगा" एक सम्पत्ति की वसीयत को करता है। जहां तक क और ण का संबंध है, इससे न्यास का -- |
सृजन हो जाता है। |
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क "यह आशा करते हुए कि उस संपत्ति को कुटुम्ब में बनी रखेगा", किसी सम्पत्ति की वसीयत च को करता है। इससे न्यास का-- |
सृजन नहीं होता, क्योंकि हिताधिकारी युक्तियुक्त निश्चितता के साथ उपविर्शत नहीं किया गया है। |
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क, यह प्रार्थना से करते हुए कि उस सम्पत्ति को च के कुटुम्ब के ऐसे सदस्यों के बीच वितरित कर दे जिन्हें सर्वाधिक पात्र समझे, एक सम्पत्ति की वसीयत उसे करता है। इससे न्यास का-- |
सृजन नहीं होता क्योंकि हिताधिकारी युक्तियुक्त निश्चितता के साथ उपदर्शित नहीं किए गए हैं। |
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क यह वांछा से करते हुए कि वह उस संपत्ति के प्रपुंज को च की सन्तान के बीच बांट दे. च को एक सम्पत्ति की वसीयत करता है। इससे न्यास का-- |
सृजन नहीं होता क्योंकि न्यास-सम्पत्ति पर्याप्त निश्चितता के साथ उपदर्शित नहीं की गई है। |
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न्यास के सृजन के लिए “हिताधिकारी” का क्या होना आवश्यक है? |
युक्तियुक्त निश्चितता के साथ निर्दिष्ट |
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यदि वसीयत में केवल यह शर्त हो कि प्राप्तकर्ता संपत्ति से किसी व्यक्ति के ऋण चुका दे और एक निश्चित राशि दे दे, तो यह क्या होगा? |
केवल एक शर्त, न्यास नहीं |
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धारा 6 के अनुसार न्यास के सृजन के लिए न्यासकर्ता को क्या प्रदर्शित करना आवश्यक है? |
न्यास का आशय, प्रयोजन, हिताधिकारी और न्यास-सम्पत्ति |
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न्यास के सृजन में “युक्तियुक्त निश्चितता” का सिद्धांत किस पर लागू होता है? |
आशय, प्रयोजन, हिताधिकारी और न्यास-सम्पत्ति पर |
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यदि न्यासकर्ता स्वयं न्यासी हो, तो संपत्ति के अंतरण की आवश्यकता क्या होगी? |
आवश्यक नहीं होगी |
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न्यासों का सृजन कौन कर सकेगा, (Who May Create Trusts) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 7 |
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धारा 7 के अनुसार सामान्यतः न्यास का सृजन कौन कर सकता है? |
संविदा करने के लिए सक्षम प्रत्येक व्यक्ति |
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धारा 7 के अनुसार “संविदा करने के लिए सक्षम व्यक्ति” से क्या अभिप्राय है? |
जो विधि के अनुसार संविदा करने की क्षमता रखता हो |
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क्या अप्राप्तवय (Minor) भी न्यास का सृजन कर सकता है? |
हाँ, आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय की अनुमति से |
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अप्राप्तवय की ओर से न्यास का सृजन किसकी अनुमति से किया जा सकता है? |
आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 7 के अनुसार अप्राप्तवय द्वारा न्यास का सृजन किस प्रकार संभव है? |
स्वयं या उसकी ओर से, आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय की अनुमति से |
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न्यास का सृजन किन परिस्थितियों के अधीन होता है? |
उस समय प्रवृत्त विधि के अधीन, जो न्यासकर्ता को संपत्ति के व्ययन की अनुमति देती है |
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न्यासकर्ता की संपत्ति के व्ययन की सीमा किससे निर्धारित होती है? |
तत्समय प्रवृत्त विधि से |
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न्यास का विषय, (Subject of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 8 |
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धारा 8 के अनुसार न्यास की विषय-वस्तु किस प्रकार की संपत्ति होनी चाहिए? |
जो हिताधिकारी को अंतरणीय हो |
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न्यास की विषय-वस्तु के संबंध में धारा 8 का मुख्य सिद्धांत क्या है? |
न्यास केवल अंतरणीय संपत्ति पर ही बनाया जा सकता है |
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धारा 8 के अनुसार “फायदाप्रद हित” किस स्थिति में न्यास का विषय नहीं हो सकता? |
जब वह किसी अस्तित्वशील न्यास के अधीन हो |
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यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे हित को न्यास का विषय बनाना चाहे जो पहले से ही किसी अन्य न्यास के अधीन हो, तो क्या होगा? |
न्यास अवैध होगा |
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धारा 8 के अनुसार न्यास की विषय-वस्तु किसे हस्तांतरित की जा सकने वाली होनी चाहिए? |
हिताधिकारी को |
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यदि कोई संपत्ति हिताधिकारी को अंतरणीय नहीं है, तो क्या वह न्यास का विषय बन सकती है? |
नहीं |
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धारा 8 के अनुसार न्यास की विषय-वस्तु किस प्रकार की संपत्ति हो सकती है? |
कोई भी संपत्ति जो हिताधिकारी को अंतरणीय हो |
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धारा 8 किस सिद्धांत को स्थापित करती है? |
न्यास का विषय अंतरणीय संपत्ति होना चाहिए और वह किसी अन्य न्यास के अधीन फायदाप्रद हित नहीं होना चाहिए |
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हिताधिकारी कौन हो सकेगा, (Who may be beneficiary) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 9 |
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धारा 9 के अनुसार कौन व्यक्ति हिताधिकारी हो सकता है? |
संपत्ति धारण करने के लिए समर्थ हर व्यक्ति |
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कौन न्यासी हो सकेगा, (Who may be trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 10 |
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धारा 10 के अनुसार सामान्यतः कौन व्यक्ति न्यासी हो सकता है? |
संपत्ति धारण करने के लिए समर्थ हर व्यक्ति |
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यदि न्यास में स्वविवेक (discretion) का प्रयोग आवश्यक हो, तो न्यासी के लिए क्या आवश्यक है? |
संविदा करने के लिए सक्षम होना |
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क्या किसी व्यक्ति को न्यास स्वीकार करने के लिए बाध्य किया जा सकता है? |
नहीं, कोई भी व्यक्ति न्यास को प्रतिगृहीत करने के लिए आबद्ध नहीं है |
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न्यास का प्रतिग्रहण (Acceptance) किस प्रकार होता है? |
ऐसे शब्दों या कार्यों से जो प्रतिग्रहण को युक्तियुक्त निश्चितता से प्रदर्शित करें |
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यदि आशयित न्यासी न्यास स्वीकार नहीं करना चाहता, तो वह क्या कर सकता है? |
न्यास से इन्कार कर सकता है |
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आशयित न्यासी न्यास से इन्कार कब तक कर सकता है? |
युक्तियुक्त कालावधि के भीतर |
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यदि आशयित न्यासी न्यास से इन्कार कर देता है, तो उसका क्या प्रभाव होता है? |
न्यास-सम्पत्ति उस न्यासी में निहित नहीं होती |
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यदि दो या अधिक सहन्यासियों में से एक न्यास से इन्कार कर दे, तो न्यास-सम्पत्ति किसमें निहित होगी? |
अन्य न्यासी या न्यासियों में |
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यदि सहन्यासियों में से एक इन्कार कर दे, तो शेष न्यासी कब से एकमात्र न्यासी माने जाएंगे? |
न्यास के सृजन की तारीख से |
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यदि निष्पादक वसीयत को स्वीकार कर लें और संपत्ति को न्यास के रूप में धारण करें, तो इसका क्या प्रभाव होगा? |
यह न्यास का प्रतिग्रहण माना जाएगा |
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यदि कोई व्यक्ति न्यास स्वीकार कर संपत्ति बेच देता है और उससे प्राप्त धन से ऋण चुकाता है, तो इसका क्या अर्थ होगा? |
न्यास का प्रतिग्रहण हो गया |
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यदि निष्पादक साधारण आस्तियों में से धन अलग करके उसे निर्दिष्ट प्रयोजन के लिए विनियोजित कर दे, तो क्या माना जाएगा? |
न्यास का प्रतिग्रहण |
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धारा 10 के अनुसार न्यासी बनने की मूल योग्यता क्या है? |
संपत्ति धारण करने की क्षमता |
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अध्याय-3 (CHAPTER-III) |
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न्यासियों के कर्तव्यों और दायित्वों के विषय में (OF THE DUTIES AND LIABILITIES OF TRUSTEES) |
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न्यासी का न्यास को निष्पादित करना, (Trustee to Execute Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 11 |
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धारा 11 के अनुसार न्यासी किसके पालन के लिए बाध्य होता है? |
न्यासकर्ता द्वारा दिए गए निदेशों का |
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न्यासी को न्यासकर्ता के निर्देशों का पालन कब तक करना होता है? |
जब तक हिताधिकारियों की सहमति से उन्हें बदला न जाए |
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यदि सभी हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हों, तो वे क्या कर सकते हैं? |
न्यासकर्ता के निर्देशों को बदल सकते हैं |
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यदि हिताधिकारी संविदा करने के लिए अक्षम हो, तो उसकी सहमति किसके द्वारा दी जा सकती है? |
आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय |
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क्या न्यासी को ऐसा निर्देश पालन करना आवश्यक है जो असाध्य हो? |
नहीं |
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क्या न्यासी को ऐसा निर्देश पालन करना होगा जो अवैध हो? |
नहीं |
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यदि न्यासकर्ता ने ऋण चुकाने के लिए न्यास बनाया हो, तो सामान्यतः किन ऋणों का भुगतान किया जाएगा? |
केवल वर्तमान वसूलीय ऋण |
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यदि ऋण ब्याज रहित हो, तो न्यासी उसे किस प्रकार चुकाएगा? |
बिना ब्याज |
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यदि न्यासी को भूमि केवल लोक नीलाम द्वारा बेचने का अधिकार दिया गया हो, तो वह क्या नहीं कर सकता? |
भूमि को निजी संविदा द्वारा बेचना |
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यदि सभी हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम होकर सहमत हों, तो क्या न्यासी मूल निर्देश से अलग कार्य कर सकता है? |
हाँ |
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यदि न्यासकर्ता ने न्यासी को संपत्ति किसी व्यक्ति को विशेष राशि पर बेचने का निर्देश दिया हो, लेकिन सभी हिताधिकारी कम राशि पर बेचने के लिए सहमत हों, तो क्या होगा? |
न्यासी कम राशि पर भी बेच सकता है |
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यदि न्यासी को ऐसा ऋण देने का निर्देश दिया गया हो जो हिताधिकारियों को स्पष्ट रूप से हानिकारक हो, तो न्यासी क्या कर सकता है? |
ऋण देने से इन्कार कर सकता है |
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धारा 11 के अनुसार न्यासी का मुख्य कर्तव्य क्या है? |
न्यासकर्ता के निर्देशों के अनुसार न्यास का निष्पादन करना |
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न्यासी का न्यास-सम्पत्ति की स्थिति से स्वयं को परिचित रखना, (Trustee to Inform Himself of State of Trust-Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 12 |
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धारा 12 के अनुसार न्यासी का पहला कर्तव्य क्या है? |
न्यास-सम्पत्ति की प्रकृति और परिस्थितियों से स्वयं को परिचित करना |
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न्यासी को न्यास-सम्पत्ति की प्रकृति और परिस्थितियों से कब तक परिचित होना चाहिए? |
यथासंभव शीघ्र |
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धारा 12 के अनुसार जहां आवश्यक हो, न्यासी को क्या करना चाहिए? |
न्यास-सम्पत्ति का अन्तरण स्वयं के नाम अभिप्राप्त करना चाहिए |
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न्यासी को अपर्याप्त या जोखिमपूर्ण प्रतिभूतियों में निवेशित न्यास-धन के संबंध में क्या करना चाहिए? |
उसे वापस ले लेना चाहिए |
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न्यासी का न्यास-सम्पत्ति के हक का संरक्षण करना, (Trustee to Protect Title to Trust-Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 13 |
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न्यासी इसके लिए आबद्ध है कि वह ऐसे सब वादों को चलाता रहे और उनमें प्रतिरक्षा करे और (न्यास की लिखत के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए) ऐसे अन्य उपाय करे जो- |
न्यास-सम्पत्ति की प्रकृति और रकम या मूल्य को ध्यान में रखते हुए न्यास-सम्पत्ति के परिरक्षण और उस पर हक के प्राख्यान या संरक्षण के लिए युक्तियुक्त रूप से अपेक्षित हों |
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न्यासी का हिताधिकारी के प्रतिकूल हक खड़ा न करना, (Trustee Not to Set up Title Adverse to Beneficiary) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 14 |
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धारा 14 के अनुसार न्यासी को क्या करने की मनाही है? |
हिताधिकारी के प्रतिकूल हक खड़ा करना |
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धारा 14 के अनुसार न्यासी किसके विरुद्ध हक स्थापित नहीं कर सकता? |
हिताधिकारी के विरुद्ध |
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न्यासी न्यास-सम्पत्ति पर किसके लिए प्रतिकूल हक स्थापित नहीं कर सकता? |
अपने या किसी अन्य के लिए |
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यदि कोई अन्य व्यक्ति हिताधिकारी के विरुद्ध हक स्थापित करना चाहता है, तो न्यासी का कर्तव्य क्या है? |
उसकी सहायता न करना |
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न्यासी द्वारा हिताधिकारी के प्रतिकूल हक स्थापित करना किसके विरुद्ध माना जाता है? |
न्यास के सिद्धांतों के विरुद्ध |
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न्यासी से अपेक्षित सावधानी, (Care Required from Trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 15 |
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धारा 15 के अनुसार न्यासी को न्यास-सम्पत्ति के साथ कैसी सावधानी बरतनी चाहिए? |
जैसे एक मामूली प्रज्ञा वाला व्यक्ति अपनी सम्पत्ति के साथ बरतता है। बरतता यदि वह उसकी अपनी सम्पत्ति होतीः और तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में इस प्रकार बरतने वाला न्यासी न्यास-सम्पत्ति की हानि, नाश या क्षय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
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विनश्वर सम्पत्ति का संपरिवर्तन, (Conversion of Perishable Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 16 |
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धारा 16 के अनुसार जब न्यास कई व्यक्तियों के लाभ के लिए बनाया गया हो और सम्पत्ति क्षयशील हो, तो न्यासी का कर्तव्य क्या है? |
सम्पत्ति को स्थायी और लाभदायक सम्पत्ति में परिवर्तित करना |
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धारा 16 के अनुसार न्यासी को सम्पत्ति का संपरिवर्तन कब नहीं करना चाहिए? |
जब न्यास की लिखत से विपरीत आशय स्पष्ट हो |
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यदि वसीयत में यह स्पष्ट न हो कि पट्टाधृत गृहों का उपयोग उसी रूप में किया जाए, तो न्यासी को क्या करना चाहिए? |
गृहों को बेचकर धन का निवेश करना |
|
धारा 16 के दृष्टांत (क) में न्यासी को क्या करना चाहिए? |
गृहों को बेचकर आय को धारा 20 के अनुसार निवेश करना |
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यदि वसीयत से यह स्पष्ट हो कि सम्पत्ति का उपयोग उसी रूप में किया जाना चाहिए, तो न्यासी को क्या करना चाहिए? |
सम्पत्ति को उसी रूप में बनाए रखना |
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दृष्टांत (ख) में न्यासी को गृह और फर्नीचर के साथ क्या करना चाहिए? |
उन्हें उसी रूप में बनाए रखना |
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“विनश्वर सम्पत्ति” का अर्थ क्या है? |
जो समय के साथ क्षय हो सकती है |
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धारा 16 के अनुसार संपरिवर्तन के बाद धन का निवेश किस धारा के अनुसार किया जाता है? |
धारा 20 |
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न्यासी का निष्पक्ष रहना, (Trustee to be Impartial) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 17 |
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जब एक से अधिक हिताधिकारी हों, तब न्यासी का कर्तव्य क्या होता है? |
सभी हिताधिकारियों के प्रति निष्पक्ष रहना |
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धारा 17 के अनुसार न्यासी क्या नहीं कर सकता? |
एक हिताधिकारी को नुकसान पहुंचाकर दूसरे को लाभ देना |
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यदि न्यासी को विवेकाधीन शक्ति (discretionary power) प्राप्त हो, तो न्यायालय कब हस्तक्षेप करेगा? |
केवल तब जब विवेक का प्रयोग सद्भाव और युक्तियुक्त ढंग से न किया गया हो |
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यदि न्यासी अपनी विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग सद्भावपूर्वक करता है, तो न्यायालय क्या करेगा? |
हस्तक्षेप नहीं करेगा |
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दुर्व्यय का न्यासी द्वारा निवारण किया जाना, (Trustee to Prevent Waste) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 18 |
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धारा 18 कब लागू होती है? |
जब न्यास कई व्यक्तियों के लाभ के लिए बनाया गया हो |
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यदि न्यास-सम्पत्ति किसी एक हिताधिकारी के कब्जे में हो और वह सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वाला कार्य करे, तो न्यासी का कर्तव्य क्या है? |
उस कार्य को रोकने के लिए उपाय करना |
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धारा 18 के अनुसार न्यासी को कब हस्तक्षेप करना चाहिए? |
जब हिताधिकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वाला कार्य करे या करने की धमकी दे |
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“दुर्व्यय” (Waste) का अर्थ क्या है? |
सम्पत्ति का नाश या स्थायी क्षति |
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यदि कोई हिताधिकारी सम्पत्ति को नष्ट करने की धमकी देता है, तो न्यासी क्या करेगा? |
उस कार्य को रोकने के लिए उपाय करेगा |
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धारा 18 के अनुसार न्यासी का दायित्व किसके प्रति होता है? |
सभी हिताधिकारियों के प्रति |
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यदि न्यासी दुर्व्यय को रोकने के लिए कदम नहीं उठाता, तो इसका परिणाम क्या हो सकता है? |
न्यासी अपने कर्तव्य का उल्लंघन करेगा |
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धारा 18 के अनुसार न्यासी किस प्रकार की क्षति को रोकने के लिए बाध्य है? |
नाशकारी या स्थायी क्षति |
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लेखा और जानकारी, (Accounts and Information) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 19 |
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धारा 19 के अनुसार न्यासी का पहला कर्तव्य क्या है? |
न्यास-सम्पत्ति का स्पष्ट और सही लेखा रखना |
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धारा 19 के अनुसार न्यासी को हिताधिकारी को किस बारे में जानकारी देनी होती है? |
न्यास-सम्पत्ति के परिमाण और स्थिति के बारे में |
|
न्यासी को हिताधिकारी को जानकारी कब देनी चाहिए? |
हिताधिकारी की प्रार्थना पर युक्तियुक्त समय पर |
|
धारा 19 के अनुसार न्यासी को किस प्रकार का लेखा रखना चाहिए? |
स्पष्ट और सही लेखा |
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“हिताधिकारी” धारा 19 में किसे कहा जाता है? |
वह व्यक्ति जिसे न्यास से लाभ मिलता है |
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यदि हिताधिकारी जानकारी मांगता है तो न्यासी क्या करेगा? |
पूर्ण और सही जानकारी देगा |
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यदि न्यासी सही लेखा नहीं रखता, तो इसका क्या अर्थ है? |
उसने अपने कर्तव्य का उल्लंघन किया |
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न्यास-धन का विनिधान, (Investment of Trust-Money) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 20 |
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यदि न्यास-धन का उपयोग तुरंत या निकट भविष्य में नहीं किया जा सकता, तो न्यासी को क्या करना चाहिए? |
धन का अधिकृत प्रतिभूतियों में निवेश करना |
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धारा 20 के अनुसार न्यासी को निवेश करते समय किसका पालन करना चाहिए? |
न्यास की लिखत में दिए गए निर्देशों का |
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यदि न्यास की लिखत में निवेश के बारे में निर्देश न हों, तो निवेश किसके द्वारा निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में किया जाएगा? |
केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित प्रतिभूतियों में |
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धारा 20 के अनुसार “प्रतिभूति” (Security) शब्द का अर्थ किस अधिनियम के अनुसार लिया जाता है? |
प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 |
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यदि कोई व्यक्ति न्यास-संपत्ति की आय को अपने जीवनपर्यन्त प्राप्त करने का हकदार है, तो निवेश कब किया जा सकता है? |
उसकी लिखित सहमति से |
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यदि न्यासी धारा 20 के अनुसार निवेश नहीं करता, तो इसका क्या अर्थ होगा? |
उसने अपने कर्तव्य का उल्लंघन किया |
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मोचनीय स्टाक को प्रीमियम पर खरीदने की शक्ति, (Power to Purchase Redeemable Stock at a Premium) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 20(क) |
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धारा 20(क) के अनुसार न्यासी मोचनीय स्टाक को कब खरीद सकता है? |
मोचन मूल्य से अधिक कीमत (प्रीमियम) पर भी |
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“मोचनीय स्टाक (Redeemable Stock)” का अर्थ क्या है? |
ऐसा स्टाक जिसे निश्चित समय पर वापस लिया या चुकाया जा सकता है |
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धारा 20(क)(2) के अनुसार न्यासी खरीदे गए मोचनीय स्टाक को कब तक रख सकता है? |
मोचन (Redemption) तक |
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धारा 20(क) किस धारा से संबंधित निवेशों के संदर्भ में लागू होती है? |
धारा 20 |
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यदि न्यासी मोचनीय स्टाक को प्रीमियम पर खरीदता है, तो क्या यह अवैध माना जाएगा? |
नहीं |
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धारा 20(क) के अनुसार खरीदे गए स्टाक को न्यासी क्या कर सकता है? |
मोचन तक प्रतिधारित कर सकता है |
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धारा 20(क) किस वर्ष के अधिनियम द्वारा जोड़ी गई थी? |
1916 |
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सरकार के पास 1871 के अधिनियम 26 के अधीन गिरवी रखी गई भूमि का बन्धक, सरकारी बचत बैंक में निक्षेप, (Mortgage of Land Pledged to Government under Act 26 of 1871 Deposit in Government Savings Bank) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 21 |
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धारा 21 के अनुसार किस अधिनियम के अधीन गिरवी रखी गई भूमि पर बन्धक का उल्लेख किया गया है? |
लैण्ड इम्प्रूवमेंट एक्ट, 1871 |
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धारा 21 के अनुसार न्यास-धन यदि 3000 रुपये से अधिक न हो, तो उसे कहाँ जमा किया जा सकता है? |
सरकारी बचत बैंक में |
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धारा 21 में उल्लिखित “स्थावर सम्पत्ति” का अर्थ क्या है? |
भूमि या उससे संबंधित सम्पत्ति |
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धारा 21 के अनुसार यदि कोई निवेश अधिनियम के प्रवृत्त होने से पहले किया गया हो, तो क्या धारा 20 उस पर लागू होगी? |
नहीं |
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लैण्ड इम्प्रूवमेंट एक्ट, 1871 के स्थान पर अब किस अधिनियम को देखा जाता है? |
भूमि विकास उधार अधिनियम, 1883 |
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जो न्यासी विनिर्दिष्ट समय के भीतर बेचने के लिए निर्दिष्ट है उसके द्वारा विक्रय, (Sale by trustee directed to sell within specified time) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 22 |
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यदि न्यासी को संपत्ति एक निश्चित समय के भीतर बेचने का निर्देश दिया गया हो और वह समय बढ़ा दे, तो क्या होगा? |
न्यासी पर यह साबित करने का भार होगा कि हिताधिकारी को नुकसान नहीं हुआ |
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धारा 22 के अनुसार प्रमाण का भार (Burden of Proof) किस पर होता है? |
न्यासी पर |
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यदि समय का विस्तार प्रधान सिविल न्यायालय द्वारा प्राधिकृत किया गया हो, तो क्या होगा? |
प्रमाण का भार न्यासी पर नहीं होगा |
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दृष्टांत के अनुसार ख को संपत्ति कितने समय के भीतर बेचने का निर्देश दिया गया था? |
5 वर्ष |
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दृष्टांत में ख ने संपत्ति का विक्रय कितने वर्ष के लिए मुल्तवी किया? |
6 वर्ष |
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दृष्टांत के अनुसार विक्रय को छह वर्ष तक टालने का क्या परिणाम हुआ? |
विक्रय अविधिमान्य नहीं हुआ |
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यदि हिताधिकारी यह दावा करे कि समय बढ़ाने से उसे नुकसान हुआ है, तो क्या होगा? |
न्यासी को यह साबित करना होगा कि नुकसान नहीं हुआ |
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न्यास-भंग के लिए दायित्व, (Liability for Breach of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 23 |
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यदि न्यासी न्यास-भंग करता है, तो उसका मुख्य दायित्व क्या है? |
न्यास-सम्पत्ति या हिताधिकारी को हुई हानि की प्रतिपूर्ति करना |
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किस स्थिति में न्यासी न्यास-भंग के लिए उत्तरदायी नहीं होगा? |
जब हिताधिकारी ने कपट द्वारा न्यासी को प्रेरित किया हो |
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यदि हिताधिकारी पूर्ण जानकारी और बिना दबाव के न्यास-भंग के लिए सहमत हो जाए, तो क्या होगा? |
न्यासी उत्तरदायी नहीं रहेगा |
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न्यासी पर ब्याज देने का दायित्व कब होता है? |
जब उसने वास्तव में ब्याज प्राप्त किया हो, जब भुगतान में अनुचित विलम्ब हुआ हो, जब उसे ब्याज प्राप्त करना चाहिए था लेकिन नहीं किया |
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सामान्यतः ब्याज किस दर से देय होता है? |
6% प्रति वर्ष साधारण ब्याज |
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यदि न्यासी न्यास-धन को निवेश करने में असफल रहता है, तो उसे किस प्रकार का ब्याज देना पड़ सकता है? |
चक्रवृद्धि ब्याज |
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यदि न्यासी न्यास-धन को व्यापार में लगा देता है, तो हिताधिकारी के विकल्प क्या हो सकते हैं? |
चक्रवृद्धि ब्याज लेना, व्यापार से हुए शुद्ध लाभ लेना, दोनों में से कोई एक |
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यदि न्यासी संपत्ति को अनुचित रूप से परादेय रहने देता है और वह नष्ट हो जाती है, तो उसका दायित्व क्या होगा? |
संपत्ति की प्रतिपूर्ति करना |
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यदि न्यासी संपत्ति बेचने में अनुचित विलम्ब करता है और उससे मूल्य घट जाता है, तो वह किसके प्रति उत्तरदायी होगा? |
हिताधिकारी के प्रति |
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यदि न्यासी न्यास-धन को अपने पास ही रखता है और निवेश नहीं करता, तो क्या परिणाम होगा? |
न्यासी मूलधन और ब्याज के लिए उत्तरदायी होगा |
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यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को व्यापार में लगाता है, तो हिताधिकारी क्या मांग सकता है? |
व्यापार का शुद्ध लाभ |
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यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को बिना अधिकार बेच देता है, तो क्या करना होगा? |
समान प्रतिभूति देना या विक्रय की रकम का ब्याज सहित लेखा देना |
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यदि न्यासी न्यास-भूमि को ऐसे व्यक्ति को बेच दे जिसे न्यास की जानकारी न हो, तो न्यासी का दायित्व क्या होगा? |
हिताधिकारी के विकल्प अनुसार दोनों में से कोई |
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न्यासी को कोई मुजरा अनुज्ञात नहीं, (No Set-Off Allowed to Trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 24 |
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धारा 24 के अनुसार यदि न्यासी एक न्यास-भंग से हानि करता है, तो वह क्या नहीं कर सकता? |
उस हानि को दूसरे लाभ से समायोजित (Set-off) नहीं कर सकता |
|
“मुजरा” (Set-off) का अर्थ क्या है? |
एक हानि को किसी अन्य लाभ से समायोजित करना |
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यदि न्यासी ने न्यास-सम्पत्ति के एक भाग में हानि की है और दूसरे भाग में लाभ हुआ है, तो क्या वह लाभ को हानि के विरुद्ध समायोजित कर सकता है? |
नहीं |
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पूर्ववर्ती के व्यतिक्रम के लिए अदायित्व, (Non-liability for Predecessor’s Default) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 25 |
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धारा 25 के अनुसार यदि एक न्यासी दूसरे न्यासी का उत्तराधिकारी बनता है, तो वह किसके लिए उत्तरदायी नहीं होता? |
पूर्ववर्ती न्यासी के कार्यों और व्यतिक्रमों के लिए |
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“पूर्ववर्ती न्यासी” का अर्थ क्या है? |
पहले से कार्य कर चुका न्यासी |
|
धारा 25 के अनुसार नया न्यासी किसके लिए जिम्मेदार होता है? |
केवल अपने कार्यों के लिए |
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यदि पूर्ववर्ती न्यासी ने न्यास-भंग किया हो, तो उसका दायित्व किस पर होगा? |
पूर्ववर्ती न्यासी पर |
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सहन्यासी के व्यतिक्रम के लिए अदायित्व, (Non-Liability for Co-trustee’s Default Joining in Receipt for Conformity) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 26 |
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सामान्यतः एक न्यासी अपने सहन्यासी द्वारा किए गए न्यास-भंग के लिए कब उत्तरदायी नहीं होता? |
जब वह सहन्यासी के कार्य में शामिल न हो |
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किस स्थिति में न्यासी अपने सहन्यासी के न्यास-भंग के लिए उत्तरदायी हो सकता है? |
जब उसने न्यास-सम्पत्ति को बिना उचित ध्यान के सहन्यासी को सौंप दिया हो |
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यदि न्यासी अपने सहन्यासी को न्यास-सम्पत्ति प्राप्त करने दे और उसके उपयोग के बारे में जांच न करे, तो क्या होगा? |
वह उत्तरदायी हो सकता है |
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सहन्यासियों का पृथक्-पृथक् दायित्व, सहन्यासियों में परस्पर अभिदाय (Several Liability of Co-trustees. Contribution as Between Co-trustees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 27 |
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यदि सहन्यासी संयुक्त रूप से न्यास-भंग करते हैं, तो कौन जिम्मेदार होगा? |
प्रत्येक सहन्यासी सम्पूर्ण हानि के लिए जिम्मेदार होगा |
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यदि एक न्यासी अपनी लापरवाही से दूसरे को न्यास-भंग करने में सक्षम बनाता है, तो क्या होगा? |
दोनों न्यासी जिम्मेदार होंगे |
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धारा 27 के अनुसार हानि की भरपाई किसके प्रति की जाती है? |
हिताधिकारी के प्रति |
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यदि एक न्यासी दूसरे से कम दोषी हो और उसे हानि का भुगतान करना पड़े, तो वह क्या कर सकता है? |
दूसरे न्यासी से प्रतिपूर्ति की मांग कर सकता है |
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यदि सभी सहन्यासी समान रूप से दोषी हों, तो क्या होगा? |
सभी न्यासी मिलकर हानि की भरपाई करेंगे |
|
हिताधिकारी द्वारा किए गए अन्तरण की सूचना मिले बिना संदाय करने वाले न्यासी का अदायित्व, (Non-liability of Trustee Paying Without Notice of Transfer by Beneficiary) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 28 |
|
यदि किसी हिताधिकारी का हित किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित हो जाए, तो इसे क्या कहा जाता है? |
अंतरण (Transfer) |
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यदि न्यासी को अंतरण की सूचना न हो और वह संपत्ति मूल हिताधिकारी को दे दे, तो क्या होगा? |
न्यासी उत्तरदायी नहीं होगा |
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धारा 28 के अनुसार न्यासी कब दायित्व से मुक्त रहता है? |
जब उसे अंतरण की सूचना न हो |
|
यदि न्यासी को अंतरण की सूचना न हो, तो वह किसे भुगतान कर सकता है? |
उस व्यक्ति को जो अंतरण के अभाव में हकदार होता |
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यदि हिताधिकारी ने अपना हित किसी अन्य को हस्तांतरित किया हो, तो न्यासी को कब जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? |
जब उसे अंतरण की सूचना हो |
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न्यासी का दायित्व, जहां कि हिताधिकारी का हित सरकार को समपहृत हो जाता है, (Liability of Trustee Where Beneficiary’s Interest is Forfeited to the Government) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 29 |
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यदि किसी हिताधिकारी का हित विधि के अनुसार सरकार को समपहृत हो जाए, तो न्यासी क्या करेगा? |
राज्य सरकार के निर्देशानुसार संपत्ति धारण करेगा |
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धारा 29 के अनुसार न्यासी किसके निर्देशों का पालन करेगा? |
राज्य सरकार |
|
जब हिताधिकारी का हित सरकार को समपहृत हो जाता है, तो न्यासी का कर्तव्य क्या होता है? |
उस हित के अनुसार सरकार के निर्देशों का पालन करना |
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यदि हिताधिकारी का हित सरकार को चला जाए, तो न्यासी संपत्ति किसके लाभ के लिए धारण करेगा? |
राज्य सरकार के निर्देशानुसार |
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धारा 29 के अनुसार न्यासी किस सीमा तक संपत्ति धारण करेगा? |
केवल उस हित के विस्तार तक जो सरकार को प्राप्त हुआ है |
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न्यासियों की क्षतिपूर्ति, (Indemnity of Trustees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 30 |
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धारा 30 के अनुसार न्यासी किन संपत्तियों के लिए उत्तरदायी होता है? |
केवल उन संपत्तियों के लिए जो उसे वास्तव में प्राप्त हुई हों |
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क्या एक न्यासी दूसरे न्यासी के कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है? |
नहीं |
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यदि न्यास-सम्पत्ति किसी बैंककार या दलाल के पास रखी जाए और वहां हानि हो जाए, तो क्या न्यासी उत्तरदायी होगा? |
नहीं |
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धारा 30 के अनुसार न्यासी किसके लिए उत्तरदायी नहीं होगा? |
अन्य न्यासी के कार्यों के लिए, बैंककार या दलाल के कार्यों के लिए, अस्वैच्छिक हानियों के लिए |
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यदि स्टाक, निधि या प्रतिभूतियों में कमी हो जाए, तो क्या न्यासी जिम्मेदार होगा? |
नहीं |
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धारा 30 किन धाराओं के अधीन लागू होती है? |
धारा 23 और 26 |
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धारा 30 के अनुसार “अस्वैच्छिक हानि” का अर्थ क्या है? |
अनजाने में या परिस्थितियों के कारण हुई हानि |
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अध्याय-4 (CHAPTER-IV) |
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न्यासियों के अधिकारों और शक्तियों के विषय में (OF THE RIGHTS AND POWERS OF TRUSTEES) |
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हक-विलेख का अधिकार, (Right to Title-Deed) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 31 |
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धारा 31 के अनुसार न्यासी किसका अधिकार रखता है? |
न्यास की लिखत और हक के दस्तावेज अपने कब्जे में रखने का |
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“हक-विलेख” (Title Deeds) का अर्थ क्या है? |
संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज |
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धारा 31 के अनुसार न्यासी किन दस्तावेजों को अपने कब्जे में रख सकता है? |
केवल न्यास-सम्पत्ति से संबंधित दस्तावेज |
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धारा 31 के अनुसार न्यासी किन दस्तावेजों को अपने पास रख सकता है? |
न्यास की लिखत और न्यास-सम्पत्ति से संबंधित हक के दस्तावेज |
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व्ययों की प्रतिपूर्ति कर लेने का अधिकार, भूलवश किए गए अतिसंदाय लेखे हानिपूर्ति का अधिकार (Right to Reimbursement of Expenses, Right to be Recouped for Erroneous Over-Payment) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 32 |
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धारा 32 के अनुसार न्यासी किन व्ययों की प्रतिपूर्ति कर सकता है? |
न्यास के निष्पादन से संबंधित उचित व्यय |
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न्यासी किन कार्यों के लिए किए गए व्ययों की प्रतिपूर्ति कर सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति के परिरक्षण के लिए, न्यास-सम्पत्ति के फायदे के लिए, हिताधिकारी के संरक्षण के लिए |
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यदि न्यासी ने अपने पास से व्यय किया हो, तो उसे क्या अधिकार होगा? |
न्यास-सम्पत्ति पर प्रथम भार (First Charge) का अधिकार |
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यदि न्यास-सम्पत्ति निष्फल हो जाए, तो न्यासी क्या कर सकता है? |
व्ययों की राशि हिताधिकारी से वसूल सकता है |
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यदि न्यासी ने हिताधिकारी को भूलवश अधिक भुगतान (अतिसंदाय) कर दिया हो, तो वह क्या कर सकता है? |
उस राशि की प्रतिपूर्ति हिताधिकारी के हित से कर सकता है |
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यदि हिताधिकारी का हित समाप्त हो जाए और अतिसंदाय हुआ हो, तो न्यासी क्या कर सकता है? |
वह राशि हिताधिकारी से व्यक्तिगत रूप से वसूल सकता है |
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धारा 32 के अनुसार न्यासी को किए गए व्ययों पर क्या मिल सकता है? |
मूलधन और ब्याज |
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धारा 32 के अनुसार न्यासी के व्ययों का प्रथम भार किस पर होता है? |
न्यास-सम्पत्ति पर |
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जिसे न्यास-भंग से अभिलाभ हुआ है उससे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार, (Right to Indemnity from Gainer by Breach of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 33 |
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धारा 33 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को न्यास-भंग से लाभ प्राप्त होता है, तो उसे क्या करना होगा? |
न्यासी को क्षतिपूर्ति करनी होगी |
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धारा 33 के अनुसार क्षतिपूर्ति किस सीमा तक की जाएगी? |
वास्तविक प्राप्त लाभ की राशि तक |
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यदि लाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति स्वयं हिताधिकारी हो, तो क्या होगा? |
न्यासी का दावा उस हिताधिकारी के हित पर भार होगा |
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धारा 33 के अनुसार क्षतिपूर्ति किसे दी जाएगी? |
न्यासी को |
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यदि न्यासी स्वयं कपट (Fraud) का दोषी हो, तो क्या वह क्षतिपूर्ति का दावा कर सकता है? |
नहीं |
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न्यास-सम्पत्ति को प्रबंध में राय लेने के लिए न्यायालय से आवेदन करने का अधिकार, (Right to Apply to Court for Opinion in Management of Trust-Property किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 34 |
|
धारा 34 के अनुसार न्यासी किससे राय या सलाह प्राप्त कर सकता है? |
आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 34 के अनुसार न्यासी न्यायालय से आवेदन किस माध्यम से कर सकता है? |
अर्जी (Petition) द्वारा बिना वाद दायर किए |
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न्यासी न्यायालय से राय किस प्रकार के प्रश्नों पर मांग सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति के प्रबंधन या प्रशासन से संबंधित प्रश्नों पर |
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धारा 34 के अनुसार न्यायालय में आवेदन की प्रति किन्हें दी जाती है? |
आवेदन में हितबद्ध व्यक्तियों को |
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धारा 34 के अनुसार आवेदन की सुनवाई में कौन उपस्थित हो सकता है? |
वे व्यक्ति जिन्हें न्यायालय उचित समझे |
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यदि न्यासी न्यायालय की राय या निर्देश के अनुसार कार्य करता है, तो उसका दायित्व क्या होगा? |
उसे अपने कर्तव्य का निर्वहन माना जाएगा |
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यदि न्यासी आवेदन में तथ्यों का कथन सद्भावपूर्वक करता है और न्यायालय के निर्देशों का पालन करता है, तो क्या होगा? |
वह जिम्मेदार नहीं माना जाएगा |
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धारा 34 के अनुसार आवेदन का खर्च किसके विवेक पर निर्भर करता है? |
न्यायालय के |
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लेखाओं के परिनिर्धारण का अधिकार, (Right to Settlement of Accounts) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 35 |
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धारा 35 के अनुसार न्यासी को लेखाओं के परिनिर्धारण का अधिकार कब मिलता है? |
जब उसके कर्तव्य पूरे हो जाते हैं |
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धारा 35 के अनुसार न्यासी क्या करा सकता है? |
अपने प्रशासन के लेखाओं की परीक्षा और परिनिर्धारण |
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धारा 35 के अनुसार लेखाओं की परीक्षा किसके संबंध में होती है? |
न्यास-सम्पत्ति के प्रशासन के संबंध में |
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यदि न्यास के अधीन हिताधिकारी को कुछ भी देय न हो, तो न्यासी किसका हकदार होगा? |
लिखित अभिस्वीकृति का |
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“लेखाओं का परिनिर्धारण” का अर्थ क्या है? |
न्यासी के प्रशासनिक खातों की जाँच और अंतिम निर्धारण |
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धारा 35 के अनुसार लेखाओं की जाँच का अधिकार किसे है? |
न्यासी को |
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यदि लेखाओं के निर्धारण के बाद हिताधिकारी को कुछ भी देय न हो, तो क्या होगा? |
न्यासी लिखित स्वीकारोक्ति प्राप्त कर सकता है |
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न्यासी का साधारण प्राधिकार, (General Authority of Trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 36 |
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धारा 36 के अनुसार न्यासी किन कार्यों को कर सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति के आपन, संरक्षण या लाभ के लिए उचित कार्य |
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धारा 36 के अनुसार न्यासी किसके संरक्षण के लिए कार्य कर सकता है? |
ऐसे हिताधिकारी के लिए जो संविदा करने में सक्षम नहीं है |
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धारा 36 के अनुसार न्यासी का साधारण प्राधिकार किनके अधीन होता है? |
न्यास की लिखत में दिए गए प्रतिबंध और धारा 17 के उपबंध |
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धारा 36 के अनुसार न्यासी बिना न्यायालय की अनुमति के अधिकतम कितने वर्षों के लिए संपत्ति को पट्टे पर दे सकता है? |
21 वर्ष |
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यदि पट्टा 21 वर्षों से अधिक अवधि के लिए देना हो, तो क्या आवश्यक है? |
प्रधान सिविल न्यायालय की अनुमति |
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धारा 36 के अनुसार पट्टा देते समय क्या सुनिश्चित किया जाना चाहिए? |
सर्वोत्तम वार्षिक भाटक जो युक्तियुक्त रूप से प्राप्त हो सके |
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लाटों में और या तो लोक नीलाम द्वारा या प्राइवेट संविदा द्वारा बेचने की शक्ति, (Power to Sell in Lots, and Either by Public Auction or Private Contract) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 37 |
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धारा 37 के अनुसार न्यासी को संपत्ति बेचने की शक्ति कब होती है? |
जब न्यास की लिखत में उसे ऐसा करने के लिए सशक्त किया गया हो |
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धारा 37 के अनुसार न्यासी संपत्ति किस प्रकार बेच सकता है? |
लोक नीलाम या प्राइवेट संविदा द्वारा |
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धारा 37 के अनुसार न्यासी संपत्ति को कैसे बेच सकता है? |
इकट्ठी या लाटों (lots) में |
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धारा 37 के अनुसार विक्रय कब किया जा सकता है? |
एक ही समय या अनेक समयों पर |
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यदि न्यास की लिखत में अलग निर्देश दिए गए हों, तो क्या होगा? |
लिखत के निर्देशों का पालन किया जाएगा |
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विशेष शर्तों के अधीन बेचने की शक्ति, न्यास-सम्पत्ति को बेचने के लिए अनुज्ञात समय (Power to sell under special conditions. Power to buy-in and re-sell, Time allowed for selling trust-property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 38 |
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धारा 38 के अनुसार न्यासी विक्रय की शर्तों में क्या शामिल कर सकता है? |
युक्तियुक्त अनुबंध और शर्तें |
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धारा 38 के अनुसार न्यासी विक्रय की शर्तों में किन विषयों से संबंधित अनुबंध शामिल कर सकता है? |
हक (Title) के बारे में, हक के साक्ष्य के बारे में, अन्य आवश्यक मामलों के बारे में |
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धारा 38 के अनुसार नीलामी में न्यासी क्या कर सकता है? |
संपत्ति को अन्तःक्रय (buy back) कर सकता है, विक्रय संविदा को विखण्डित कर सकता है, पुनर्विक्रय कर सकता है |
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यदि न्यासी पुनर्विक्रय करता है और उससे हानि होती है, तो क्या वह उत्तरदायी होगा? |
नहीं |
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धारा 38 के अनुसार न्यासी विक्रय संविदा के साथ क्या कर सकता है? |
उसमें फेरफार कर सकता है, उसे विखण्डित कर सकता है, दोनों कर सकता है |
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धारा 38 के अनुसार यदि न्यासी को संपत्ति बेचने का निर्देश दिया गया हो, तो वह क्या कर सकता है? |
युक्तियुक्त स्वविवेक से विक्रय का समय तय करेगा |
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दृष्टांत (क) के अनुसार यदि न्यासी को “सुविधानुसार शीघ्रता से” संपत्ति बेचने का निर्देश दिया गया हो, तो इसका क्या अर्थ है? |
तुरंत विक्रय करना अनिवार्य नहीं है |
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दृष्टांत (ख) के अनुसार यदि न्यासी को विक्रय का समय और तरीका तय करने का अधिकार दिया गया हो, तो क्या वह विक्रय को अनिश्चित समय तक टाल सकता है? |
नहीं |
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हस्तान्तरण की शक्ति, (Power to Convey) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 39 |
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धारा 39 के अनुसार न्यासी को यह शक्ति किस उद्देश्य के लिए दी गई है? |
ऐसे किसी विक्रय को पूरा करने के प्रयोजन के लिए न्यासी को यह शक्ति प्राप्त होगी कि वह बची गई सम्पत्ति का हस्तान्तरण या अन्यथा व्ययन उस रीति से कर दे जो आवश्यक हो । |
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विनिधानों में तब्दीली करने की शक्ति, (Power to Vary Investments) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 40 |
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धारा 40 के अनुसार न्यासी क्या कर सकता है? |
निवेश को वापस निकालकर दूसरे निवेश में लगा सकता है |
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धारा 40 के अनुसार न्यासी निवेश को किन प्रतिभूतियों में बदल सकता है? |
धारा 20 में वर्णित या निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में |
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धारा 40 के अनुसार न्यासी कितनी बार निवेश बदल सकता है? |
समय-समय पर |
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धारा 40 के अनुसार निवेश बदलने का अधिकार किसके विवेक पर निर्भर करता है? |
न्यासी के विवेक पर |
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यदि कोई व्यक्ति न्यास-सम्पत्ति की आय को आजीवन प्राप्त करने का हकदार है, तो निवेश बदलने के लिए क्या आवश्यक है? |
उसकी लिखित सहमति |
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धारा 40 के अनुसार निवेश बदलने से पहले किसकी अनुमति आवश्यक हो सकती है? |
जीवनपर्यन्त आय पाने वाले हिताधिकारी की लिखित सहमति |
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धारा 40 के अनुसार निवेश बदलते समय न्यासी को किसका ध्यान रखना चाहिए? |
न्यास-सम्पत्ति का हित और सुरक्षा |
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धारा 40 के अनुसार न्यासी किस प्रकार के निवेशों में परिवर्तन कर सकता है? |
प्रतिभूतियों में किए गए निवेश |
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अप्राप्तवय आदि की सम्पत्ति उनके भरण-पोषण आदि में लगाने की शक्ति, (Power to Apply Property of Minors, etc., for their Maintenance, etc.) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 41 |
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धारा 41 के अनुसार यदि कोई सम्पत्ति किसी अप्राप्तवय के लिए न्यास में हो, तो न्यासी क्या कर सकता है? |
आय को अप्राप्तवय के भरण-पोषण और शिक्षा के लिए उपयोग कर सकता है |
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धारा 41 के अनुसार न्यासी आय किसे दे सकता है? |
अप्राप्तवय के संरक्षक को |
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न्यासी आय को किन उद्देश्यों के लिए उपयोग कर सकता है? |
भरण-पोषण, शिक्षा, जीवन में उन्नति |
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धारा 41 के अनुसार आय का उपयोग किन धार्मिक या सामाजिक कार्यों के लिए किया जा सकता है? |
धार्मिक उपासना, विवाह, अन्त्येष्टि |
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यदि आय का पूरा उपयोग न हो, तो शेष आय का क्या किया जाएगा? |
धारा 20 में वर्णित प्रतिभूतियों में निवेश किया जाएगा |
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यदि न्यास-सम्पत्ति की आय अप्राप्तवय के भरण-पोषण या शिक्षा के लिए पर्याप्त न हो, तो न्यासी क्या कर सकता है? |
न्यायालय की अनुमति से सम्पत्ति का उपयोग कर सकता है |
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यदि आय अपर्याप्त हो तो सम्पत्ति के उपयोग के लिए किसकी अनुमति आवश्यक है? |
प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 41 के अनुसार संचित आय का लाभ अंततः किसे मिलेगा? |
उस व्यक्ति को जो अंततः सम्पत्ति का हकदार होगा |
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रसीदें देने की शक्ति, (Power to Give Receipts) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 42 |
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धारा 42 के अनुसार रसीद कौन दे सकता है? |
न्यासी |
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धारा 42 के अनुसार न्यासी किसके लिए लिखित रसीद दे सकता है? |
धन के लिए, प्रतिभूतियों के लिए, अन्य जंगम संपत्ति के लिए |
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धारा 42 के अनुसार रसीद किस रूप में दी जाती है? |
लिखित |
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यदि न्यासी लिखित रसीद देता है, तो भुगतान करने वाला व्यक्ति किससे मुक्त हो जाता है? |
संपत्ति के उपयोग की निगरानी से, हानि या दुरुपयोग के लिए जिम्मेदारी से, न्यास के प्रबंधन से |
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धारा 42 के अनुसार भुगतान करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी कब समाप्त होती है? |
जब लिखित रसीद दी जाए |
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धारा 42 में “कपट” का क्या प्रभाव है? |
कपट होने पर रसीद का प्रभाव समाप्त हो सकता है |
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धारा 42 के अनुसार रसीद देने का अधिकार किस प्रकार की संपत्ति के लिए है? |
जंगम संपत्ति और धन |
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धारा 42 के अनुसार रसीद मिलने के बाद भुगतान करने वाला व्यक्ति किससे मुक्त हो जाता है? |
संपत्ति की निगरानी से, संपत्ति के दुरुपयोग के लिए उत्तरदायित्व से, संपत्ति की हानि के लिए उत्तरदायित्व से |
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धारा 42 के अनुसार यदि कपट न हो, तो रसीद का क्या प्रभाव होता है? |
भुगतान करने वाला व्यक्ति मुक्त हो जाता है |
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शमन आदि करने की शक्ति, (Power to Compound, etc.) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 43 |
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धारा 43 के अनुसार यह शक्ति सामान्यतः किनके द्वारा प्रयोग की जाती है? |
दो या अधिक न्यासी मिलकर |
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धारा 43 के अनुसार न्यासी क्या कर सकते हैं? |
ऋण या दावाकृत संपत्ति के लिए प्रशमन या प्रतिभूति स्वीकार कर सकते हैं, ऋण चुकाने के लिए समय दे सकते हैं, ऋण या दावे का समझौता कर सकते हैं |
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धारा 43 के अनुसार न्यासी किसी विवाद को कैसे निपटा सकते हैं? |
माध्यस्थम् (arbitration) द्वारा भी |
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यदि न्यासी सद्भावपूर्वक कार्य करते हैं, तो क्या वे हानि के लिए उत्तरदायी होंगे? |
नहीं |
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धारा 43 के अनुसार न्यासी किस प्रकार के मामलों में समझौता कर सकते हैं? |
ऋण, लेखा, दावा या अन्य विवाद |
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यदि न्यास की लिखत में केवल एक न्यासी को कार्य करने की अनुमति हो, तो क्या वह इन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है? |
हाँ |
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धारा 43 कब लागू होगी? |
केवल इस अधिनियम के लागू होने के बाद सृजित न्यासों पर |
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धारा 43 के अनुसार यह शक्ति कब लागू नहीं होगी? |
जब न्यास की लिखत में इसके विपरीत प्रावधान हो |
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धारा 43 के अनुसार न्यासी किन दस्तावेजों को निष्पादित कर सकते हैं? |
करार (agreement), निर्मुक्ति (release), समझौते के दस्तावेज |
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कई न्यासियों को, जिनमें से एक इन्कार कर दे या मर जाए, दी गई शक्ति, (Power to Several Trustees of Whom One Disclaims or Dies) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 44 |
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यदि कई न्यासियों को न्यास-सम्पत्ति से संबंधित अधिकार दिया गया हो और उनमें से एक मर जाए, तो क्या होगा? |
शेष न्यासी उस शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं |
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यदि एक न्यासी कार्य करने से इंकार कर दे, तो क्या शेष न्यासी उस शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं? |
हाँ |
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धारा 44 के अनुसार शेष न्यासी कब उस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते? |
जब न्यास की लिखत में इसके विपरीत प्रावधान हो |
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यदि न्यास की लिखत में यह लिखा हो कि शक्ति केवल अधिक संख्या के न्यासियों द्वारा प्रयोग की जाएगी, तो क्या होगा? |
शेष न्यासी अकेले शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते |
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धारा 44 के अनुसार “इन्कार” का क्या अर्थ है? |
न्यासी का कार्य करने से मना करना |
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यदि कई न्यासी हों और एक की मृत्यु हो जाए, तो सामान्य स्थिति में शक्ति किसके पास रहेगी? |
शेष न्यासियों के पास |
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धारा 44 के अनुसार न्यास की लिखत का क्या महत्व है? |
वह न्यासियों की शक्तियों को सीमित या निर्धारित कर सकती है |
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न्यासी की शक्तियों का डिक्री द्वारा निलम्बन, (Suspension of Trustee’s Powers by Decree) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 45 |
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धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियाँ कब सीमित हो जाती हैं? |
जब न्यायालय द्वारा डिक्री दी जाए |
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यदि न्यास के निष्पादन के लिए वाद में डिक्री दी जाती है, तो न्यासी क्या करेगा? |
डिक्री के अनुसार ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा |
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धारा 45 के अनुसार न्यासी अपनी शक्तियों का प्रयोग कब कर सकता है? |
जब न्यायालय अनुमति दे, जब डिक्री के अनुरूप हो, जब अपील न्यायालय अनुमति दे |
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यदि डिक्री के विरुद्ध अपील लंबित हो, तो न्यासी किसकी अनुमति से शक्ति का प्रयोग कर सकता है? |
अपील न्यायालय |
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धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियों का प्रयोग किसके अनुरूप होना चाहिए? |
न्यायालय की डिक्री |
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यदि न्यासी डिक्री के विपरीत कार्य करता है, तो क्या होगा? |
उसका कार्य अवैध माना जा सकता है |
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धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियाँ किस स्थिति में निलम्बित मानी जाती हैं? |
जब न्यायालय द्वारा डिक्री दी गई हो |
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अध्याय-5 (CHAPTER-V) |
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न्यासियों की निर्योग्यताओं के विषय में (OF THE DISABILITIES OF TRUSTEES) |
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न्यासी प्रतिग्रहण कर लेने के पश्चात् त्याग नहीं कर सकता, (Trustee Cannot Renounce After Acceptance) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 46 |
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धारा 46 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने न्यास स्वीकार कर लिया हो, तो क्या वह उसे त्याग सकता है? |
नहीं, बिना अनुमति के नहीं |
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धारा 46 के अनुसार न्यासी किन परिस्थितियों में न्यास का त्याग कर सकता है? |
न्यायालय की अनुमति से, हिताधिकारी की सहमति से, न्यास की लिखत में दी गई शक्ति के आधार पर |
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यदि हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हो, तो न्यासी किसकी अनुमति से त्याग कर सकता है? |
हिताधिकारी |
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धारा 46 के अनुसार यदि न्यासी त्याग करना चाहता है, तो उसे किस न्यायालय की अनुमति लेनी होगी? |
आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय |
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यदि न्यास की लिखत में विशेष शक्ति दी गई हो, तो क्या न्यासी त्याग कर सकता है? |
हाँ |
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यदि न्यासी ने न्यास स्वीकार नहीं किया हो, तो क्या वह त्याग सकता है? |
हाँ |
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न्यासी प्रत्यायोजन नहीं कर सकता, (Trustee Cannot Delegate) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 47 |
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धारा 47 के अनुसार सामान्यतः न्यासी क्या नहीं कर सकता? |
अपने कर्तव्यों का प्रत्यायोजन |
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धारा 47 के अनुसार किन परिस्थितियों में प्रत्यायोजन किया जा सकता है? |
जब न्यास की लिखत में प्रावधान हो, जब यह व्यापार के नियमित क्रम में हो, जब यह आवश्यक हो |
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यदि हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हो और वह प्रत्यायोजन से सहमत हो जाए, तो क्या प्रत्यायोजन किया जा सकता है? |
हाँ |
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धारा 47 के अनुसार कौन सा कार्य प्रत्यायोजन नहीं माना जाएगा? |
अटर्नी या एजेंट नियुक्त करना केवल लिपिकीय कार्यों के लिए |
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“लिपिकवर्गीय कार्य” का अर्थ क्या है? |
ऐसा कार्य जिसमें स्वतंत्र विवेक की आवश्यकता न हो |
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दृष्टांत (ख) के अनुसार यदि न्यासी को संपत्ति बेचने की शक्ति हो, तो वह क्या कर सकता है? |
नीलामकर्ता नियुक्त कर सकता है |
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दृष्टांत (ग) के अनुसार न्यासी भाटक (rent) संग्रह करने के लिए क्या कर सकता है? |
किसी उचित व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है |
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दृष्टांत (क) के अनुसार यदि एक न्यासी मर जाए, तो क्या शेष न्यासी न्यास का निष्पादन कर सकता है? |
हाँ |
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धारा 47 के अनुसार न्यासी किसके प्रति उत्तरदायी होता है? |
हिताधिकारी के प्रति |
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सहन्यासी अकेले कार्य नहीं कर सकते, (Co-trustees Cannot Act Singly) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 48 |
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धारा 48 के अनुसार यदि एक से अधिक न्यासी हों, तो न्यास के निष्पादन में क्या आवश्यक है? |
सभी न्यासियों का सम्मिलित होना आवश्यक है |
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धारा 48 के अनुसार सहन्यासी कब अकेले कार्य कर सकते हैं? |
जब न्यास की लिखत में ऐसा प्रावधान हो |
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यदि न्यास की लिखत में विशेष प्रावधान न हो, तो न्यास के कार्य कैसे किए जाएंगे? |
सभी न्यासियों द्वारा संयुक्त रूप से |
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यदि एक सहन्यासी अकेले निर्णय ले ले, जबकि लिखत में अनुमति न हो, तो क्या हो सकता है? |
निर्णय अवैध या अमान्य माना जा सकता है |
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धारा 48 के अनुसार न्यास का निष्पादन किसके द्वारा किया जाता है? |
सभी सहन्यासियों द्वारा संयुक्त रूप से |
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यदि न्यास की लिखत में यह लिखा हो कि एक न्यासी अकेले कार्य कर सकता है, तो क्या होगा? |
वह अकेले कार्य कर सकता है |
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वैवेकिक शक्ति का नियंत्रण, (Control of Discretionary Power) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 49 |
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धारा 49 के अनुसार यदि न्यासी अपनी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग सही ढंग से नहीं करता, तो क्या होगा? |
न्यायालय उस शक्ति को नियंत्रित कर सकता है |
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धारा 49 के अनुसार न्यायालय कब हस्तक्षेप कर सकता है? |
जब न्यासी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग युक्तियुक्त और सद्भावपूर्वक न करे |
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धारा 49 के अनुसार किस न्यायालय को ऐसी शक्ति को नियंत्रित करने का अधिकार है? |
आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 49 के अनुसार न्यायालय का हस्तक्षेप कब उचित है? |
जब न्यासी उचित और सद्भावपूर्ण तरीके से कार्य न करे |
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यदि न्यासी अपनी विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग सद्भावपूर्वक करता है, तो क्या न्यायालय हस्तक्षेप करेगा? |
नहीं |
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न्यासी सेवाओं के लिए प्रभार नहीं ले सकेगा, (Trustee May Not Charge for Services) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 50 |
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धारा 50 के अनुसार सामान्यतः न्यासी को किसका अधिकार नहीं होता? |
न्यास के निष्पादन के लिए पारिश्रमिक लेने का |
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धारा 50 के अनुसार न्यासी को पारिश्रमिक कब मिल सकता है? |
जब न्यास की लिखत में ऐसा प्रावधान हो, जब हिताधिकारी के साथ ऐसा अनुबंध हो, जब न्यायालय अनुमति दे |
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यदि न्यास की लिखत में पारिश्रमिक का प्रावधान न हो, तो न्यासी क्या करेगा? |
पारिश्रमिक नहीं ले सकता |
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धारा 50 के अनुसार न्यासी किन सेवाओं के लिए पारिश्रमिक नहीं ले सकता? |
अपने परिश्रम के लिए, अपने कौशल के लिए, अपने समय के लिए |
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धारा 50 किस पर लागू नहीं होती? |
निजी न्यासी, शासकीय न्यासी, महाप्रशासक |
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धारा 50 के अनुसार कौन इस प्रावधान से मुक्त है? |
लोक-रक्षक (Official Trustee), महाप्रशासक, प्रशासन-प्रमाणपत्र रखने वाला व्यक्ति |
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यदि हिताधिकारी के साथ विशेष संविदा हो, तो क्या न्यासी पारिश्रमिक ले सकता है? |
हाँ |
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यदि न्यासी को पारिश्रमिक लेना हो, तो क्या आवश्यक है? |
न्यास की लिखत में प्रावधान, हिताधिकारी के साथ संविदा, न्यायालय की अनुमति |
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न्यासी न्यास-सम्पत्ति को अपने लाभ के उपयोग में नहीं ला सकेगा, (Trustee May Not use Trust-Property for His Own Profit) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 51 |
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धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति का उपयोग किसके लिए नहीं कर सकता? |
अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए |
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धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को किस प्रकार के प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं कर सकता? |
न्यास से असंबंधित प्रयोजन |
|
यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति का व्यक्तिगत उपयोग करता है, तो यह क्या माना जाएगा? |
न्यास-भंग (Breach of Trust) |
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धारा 51 के अनुसार न्यासी किसके हित में कार्य करता है? |
हिताधिकारी के हित में |
|
धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को किस प्रकार उपयोग कर सकता है? |
केवल न्यास के उद्देश्यों के लिए |
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यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को अपने लाभ के लिए उपयोग करे, तो क्या होगा? |
वह न्यास-भंग का दोषी होगा |
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धारा 51 के अनुसार न्यासी का कर्तव्य क्या है? |
न्यास-सम्पत्ति का संरक्षण करना, न्यास-सम्पत्ति को व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग न करना, हिताधिकारी के हित में कार्य करना |
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विक्रयार्थ न्यासी या उसका अभिकर्ता खरीद नहीं सकेगा, (Trustee for Sale or his Agent May Not Buy) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 52 |
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धारा 52 के अनुसार वह न्यासी जिसका कर्तव्य न्यास-सम्पत्ति को बेचना है, वह— |
प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास-सम्पत्ति या उसमें का कोई हित नहीं खरीद सकता |
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धारा 52 के अनुसार विक्रय के प्रयोजनार्थ नियुक्त अभिकर्ता— |
प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास-सम्पत्ति नहीं खरीद सकता |
|
यदि न्यासी किसी अन्य व्यक्ति के नाम से न्यास-सम्पत्ति खरीदता है, तो यह माना जाएगा— |
परोक्ष क्रय |
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धारा 52 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को खरीद नहीं सकता— |
स्वयं के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के अभिकर्ता के रूप में |
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धारा 52 का नियम मुख्यतः किस सिद्धांत पर आधारित है? |
हितों के टकराव को रोकने का सिद्धांत |
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धारा 52 के अनुसार न्यासी द्वारा नियुक्त अभिकर्ता न्यास-सम्पत्ति— |
प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी रूप में नहीं खरीद सकता |
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न्यासी हिताधिकारी का हित अनुज्ञा के बिना नहीं खरीद सकेगा, क्रयार्थ न्यासी (Trustee May Not Buy Beneficiary’s Interest Without Permission, Trustee for Purchase) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 53 |
|
धारा 53 के अनुसार कोई न्यासी न्यास-सम्पत्ति या उसका कोई भाग किसकी अनुज्ञा के बिना नहीं खरीद सकता? |
आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 53 के अनुसार न्यायालय की अनुज्ञा के बिना न्यासी न्यास-सम्पत्ति का— |
क्रय, बन्धकदार या पट्टेदार नहीं हो सकता |
|
धारा 53 के अनुसार कौन न्यायालय की अनुमति के बिना न्यास-सम्पत्ति नहीं खरीद सकता? |
न्यासी तथा वह व्यक्ति जिसका न्यासी रहना हाल ही में समाप्त हुआ हो |
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धारा 53 के अनुसार न्यायालय अनुज्ञा कब देगा? |
जब प्रस्तावित क्रय, बन्धक या पट्टा हिताधिकारी के स्पष्ट लाभार्थ हो |
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यदि न्यासी का कर्तव्य हिताधिकारी के लिए किसी विशिष्ट सम्पत्ति को खरीदना हो, तो वह— |
स्वयं के लिए बन्धक या पट्टा प्राप्त नहीं कर सकता |
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धारा 53 के अनुसार न्यायालय से अभिप्रेत है— |
आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय |
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सहन्यासी अपने में से किसी को उधार नहीं दे सकेंगे, (Co-Trustees May not Lend to One of Themselves) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 54 |
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धारा 54 के अनुसार यदि किसी न्यासी का कर्तव्य बन्धक पर या वैयक्तिक प्रतिभूति पर न्यास-धन का विनिधान करना हो, तो वह— |
अपने या अपने सहन्यासियों के बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान नहीं कर सकता |
|
धारा 54 के अनुसार न्यासी न्यास-धन का विनिधान किस पर नहीं कर सकता? |
अपने बन्धक पर, अपने सहन्यासी के बन्धक पर, अपनी वैयक्तिक प्रतिभूति पर |
|
धारा 54 के अनुसार न्यासी न्यास-धन का विनिधान अपनी या अपने सहन्यासी की— |
वैयक्तिक प्रतिभूति पर नहीं कर सकता |
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धारा 54 के अनुसार किस स्थिति में न्यासी न्यास-धन का विनिधान नहीं कर सकता? |
जब बन्धक न्यासी द्वारा किया गया हो, जब बन्धक सहन्यासी द्वारा किया गया हो, जब प्रतिभूति न्यासी या सहन्यासी की हो |
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धारा 54 के अनुसार यदि न्यासी अपने सहन्यासी द्वारा किए गए बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान करता है, तो यह— |
धारा 54 के विरुद्ध होगा |
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अध्याय-6 (CHAPTER-VI) |
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हिताधिकारी के अधिकारों और दायित्वों के विषय में (OF THE RIGHTS AND LIABILITIES OF THEBENEFICIARY) |
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भाटकों और लाभों का अधिकार, (Rights to Rents and Profits) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 55 |
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धारा 55 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति के भाटक और लाभ पाने का अधिकार किसे होता है? |
हिताधिकारी |
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विनिर्दिष्ट निष्पादन का अधिकार, कब्जे का अन्तरण का अधिकार (Right to Specific Execution, Right to Transfer of Possession) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 56 |
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धारा 56 के अनुसार हिताधिकारी किस बात का विनिर्दिष्ट निष्पादन कराने का हकदार होता है? |
न्यासकर्ता के आशय का |
|
धारा 56 के अनुसार हिताधिकारी विनिर्दिष्ट निष्पादन किस सीमा तक करा सकता है? |
अपने हित के विस्तार तक |
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धारा 56 के अनुसार यदि केवल एक हिताधिकारी हो और वह संविदा करने के लिए सक्षम हो, तो वह न्यासी से क्या अपेक्षा कर सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति का अन्तरण उसके या उसके द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति के पक्ष में |
|
धारा 56 के अनुसार यदि कई हिताधिकारी हों और सभी संविदा करने के लिए सक्षम तथा एकमत हों, तो वे— |
न्यासी से न्यास-सम्पत्ति का अन्तरण अपने या अपने द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति के पक्ष में कराने की अपेक्षा कर सकते हैं |
|
धारा 56 के अनुसार यदि सम्पत्ति किसी विवाहिता स्त्री के लाभ के लिए इस प्रकार अन्तरित की गई हो कि वह अपने हित से स्वयं को वंचित न कर सके, तो इस धारा का द्वितीय खंड— |
उसकी वैवाहिक स्थिति कायम रहने तक लागू नहीं होगा |
|
धारा 56 के दृष्टांत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति न्यास-सम्पत्ति में अनन्य रूप से हितबद्ध हो और प्राप्तवय हो जाए, तो वह— |
न्यासियों से सम्पूर्ण रकम तुरंत अन्तरित करने की अपेक्षा कर सकता है |
|
धारा 56 के दृष्टांत के अनुसार यदि किसी हिताधिकारी के लिए न्यासियों को एक वार्षिकी खरीदने का निर्देश दिया गया हो, तो वह हिताधिकारी— |
उस राशि का दावा कर सकता है जिससे वार्षिकी खरीदी जानी थी |
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न्यास की लिखत, लेखाओं आदि का निरीक्षण करने और उनकी प्रतियां लेने का अधिकार, (Right to Inspect and take Copies of Instrument of Trust, Accounts, etc.) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 57 |
|
धारा 57 के अनुसार न्यास की लिखत, लेखाओं आदि का निरीक्षण करने का अधिकार किसे होता है? |
हिताधिकारी |
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धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को किसका निरीक्षण करने का अधिकार है? |
न्यास की लिखत, न्यास-सम्पत्ति से सम्बन्धित हक-दस्तावेज, न्यास-सम्पत्ति संबंधी लेखाएं और वाउचर |
|
धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को निरीक्षण के साथ-साथ क्या अधिकार प्राप्त है? |
दस्तावेजों की प्रतियां लेने का |
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धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को निरीक्षण का अधिकार किसके विरुद्ध प्राप्त होता है? |
न्यासी तथा उससे व्युत्पन्न अधिकार का दावा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध जिन्हें न्यास की सूचना हो |
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धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी किन लेखाओं का निरीक्षण कर सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति संबंधी लेखाओं का |
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धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को उन रायों का भी निरीक्षण करने का अधिकार है— |
जो न्यासी ने अपने कर्तव्य के निर्वहन में मार्गदर्शन के लिए प्राप्त की हों |
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फायदाप्रद हित के अन्तरण का अधिकार, (Right to Transfer Beneficial Interest) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 58 |
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धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने फायदाप्रद हित का अन्तरण कब कर सकता है? |
जब वह संविदा करने के लिए सक्षम हो |
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धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने हित का अन्तरण किसके अध्यधीन कर सकता है? |
उस समय प्रवृत्त विधि के |
|
धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने हित का अन्तरण— |
उस विधि के अधीन कर सकता है जो ऐसे हित के व्ययन के संबंध में प्रवृत्त हो |
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धारा 58 के अनुसार यदि सम्पत्ति किसी विवाहित स्त्री के लाभ के लिए इस शर्त के साथ दी गई हो कि वह अपने हित से स्वयं को वंचित नहीं कर सकती, तो वह— |
अपनी वैवाहिक स्थिति कायम रहने तक अन्तरण नहीं कर सकती |
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धारा 58 में विवाहित स्त्री के संबंध में दिया गया प्रतिबंध कब तक लागू रहता है? |
जब तक उसकी वैवाहिक स्थिति कायम रहे |
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धारा 58 के अनुसार फायदाप्रद हित का अन्तरण करने का अधिकार किसे प्राप्त है? |
हिताधिकारी |
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न्यास के निष्पादन के लिए वाद लाने का अधिकार, (Right to Sue for Execution of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 59 |
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धारा 59 के अनुसार न्यास के निष्पादन के लिए वाद कौन संस्थित कर सकता है? |
हिताधिकारी |
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धारा 59 के अनुसार हिताधिकारी न्यास के निष्पादन के लिए वाद कब ला सकता है? |
जब कोई न्यासी नियुक्त न किया गया हो |
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धारा 59 के अनुसार यदि सभी न्यासी मर जाएं या इन्कार कर दें, तो— |
हिताधिकारी न्यास के निष्पादन के लिए वाद ला सकता है |
|
धारा 59 के अनुसार यदि न्यासी उन्मोचित (discharged) कर दिए जाएं और न्यास का निष्पादन असाध्य हो जाए, तो— |
हिताधिकारी वाद संस्थित कर सकता है |
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धारा 59 के अनुसार जब तक नया न्यासी नियुक्त न हो जाए, तब तक न्यास का निष्पादन— |
न्यायालय द्वारा यथासंभव किया जाएगा |
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धारा 59 के अनुसार न्यायालय न्यास का निष्पादन कब तक करेगा? |
जब तक नया न्यासी नियुक्त न हो जाए |
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यह अधिकार कि न्यासी उचित हों, (Right to Proper Trustees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 60 |
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धारा 60 के अनुसार हिताधिकारी का क्या अधिकार है? |
न्यास-सम्पत्ति का प्रशासन उचित व्यक्तियों द्वारा कराया जाए |
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धारा 60 के अनुसार कौन “उचित व्यक्ति” नहीं माना जाएगा? |
हिताधिकारी के हित से असंगत हित रखने वाला व्यक्ति |
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धारा 60 के अनुसार कौन उचित व्यक्ति नहीं माना जाएगा? |
दिवाले की परिस्थितियों वाला व्यक्ति |
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धारा 60 के स्पष्टीकरण के अनुसार निम्न में से कौन उचित व्यक्ति नहीं माना जाता? |
विदेश में अधिवासी व्यक्ति |
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धारा 60 के अनुसार जब न्यास के प्रशासन में धन की प्राप्ति और अभिरक्षा सम्मिलित हो, तब न्यासियों की संख्या कम से कम— |
दो होनी चाहिए |
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धारा 60 के दृष्टांत के अनुसार यदि न्यासी दिवाले की परिस्थितियों में हो और न्यास-सम्पत्ति संकट में हो, तो हिताधिकारी— |
रिसीवर नियुक्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है |
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यदि न्यासियों में से अधिकांश मर जाएँ, तो हिताधिकारी— |
नए न्यासियों की नियुक्ति के लिए वाद संस्थित कर सकता है |
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यदि सभी न्यासी न्यास का कार्य करने से इन्कार कर दें, तो हिताधिकारी— |
नए न्यासियों की नियुक्ति के लिए वाद संस्थित कर सकता है |
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यदि न्यासी भारत के बाहर स्थायी रूप से निवास करने चला जाए या दिवालिया घोषित हो जाए, तो हिताधिकारी— |
उसे हटवाकर नए न्यासी की नियुक्ति के लिए वाद संस्थित कर सकता है |
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कोई कर्तव्य कार्य करने को विवश करने का अधिकार, (Right to Compel to Any Act of Duty) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 61 |
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धारा 61 के अनुसार हिताधिकारी को क्या अधिकार प्राप्त है? |
न्यासी को उसके कर्तव्य का विशिष्ट कार्य करने के लिए विवश कराने का |
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धारा 61 के अनुसार हिताधिकारी न्यासी को किससे अवरुद्ध करा सकता है? |
अनुध्यात या अधिसम्भाव्य न्यास-भंग से |
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न्यासी द्वारा सदोष क्रय, (Wrongful Purchase by Trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 62 |
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धारा 62 के अनुसार यदि न्यासी ने न्यास-सम्पत्ति का सदोष क्रय किया हो, तो हिताधिकारी को क्या अधिकार है? |
सम्पत्ति को न्यास के अधीन घोषित कराने का |
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धारा 62 के अनुसार यदि न्यासी द्वारा खरीदी गई सम्पत्ति उसके पास अविक्रीत हो, तो हिताधिकारी— |
न्यासी से उसे प्रति-अन्तरित कराने का अधिकार रखता है |
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यदि न्यासी से वह सम्पत्ति किसी ऐसे व्यक्ति ने खरीद ली हो जिसे न्यास की सूचना थी, तो हिताधिकारी— |
उस व्यक्ति से सम्पत्ति प्रति-अन्तरित करा सकता है |
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धारा 62 के अनुसार यदि सम्पत्ति प्रति-अन्तरित कराई जाती है, तो हिताधिकारी को न्यासी को क्या देना होगा? |
क्रय-धन ब्याज सहित तथा सम्पत्ति के संरक्षण में किए गए उचित व्यय |
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धारा 62 के अनुसार न्यासी या क्रेता को किसका लेखा देना होगा? |
सम्पत्ति के शुद्ध लाभों का |
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धारा 62 के अनुसार यदि न्यासी या क्रेता के पास सम्पत्ति का वास्तविक कब्जा रहा हो, तो उसे— |
अधिभोग-भाटक से भारित किया जाएगा |
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धारा 62 के अनुसार यदि न्यासी या क्रेता के कार्यों या लोपों से सम्पत्ति का क्षय हुआ हो, तो— |
हिताधिकारी क्रय-धन का आनुपातिक भाग काट सकता है |
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धारा 62 के अनुसार किसके अधिकार प्रभावित नहीं होते? |
सद्भावपूर्वक संविदा करने वाले पट्टेदार या अन्य व्यक्ति |
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धारा 62 के अनुसार यदि हिताधिकारी ने न्यासी के विक्रय का पूर्ण ज्ञान के साथ अनुसमर्थन कर दिया हो, तो— |
वह सम्पत्ति को न्यास के अधीन घोषित कराने का दावा नहीं कर सकता |
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न्यास-सम्पत्ति का पीछा परव्यक्तियों के हाथों तक किया जाना, उसकी संपरिवर्तित अवस्था तक किया जाना- (Following Trust-Property— into the Hands of Third Persons, Into that Into Which it Has Been Converted) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 63 |
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धारा 63 के अनुसार यदि न्यास-सम्पत्ति न्यास से असंगत रूप में किसी परव्यक्ति के हाथ में आ जाए, तो हिताधिकारी— |
उस व्यक्ति से यह स्वीकार कराने की अपेक्षा कर सकता है कि वह सम्पत्ति न्यास में समाविष्ट है |
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धारा 63 के अनुसार यदि न्यास-सम्पत्ति किसी परव्यक्ति के हाथ में चली जाए, तो हिताधिकारी— |
घोषणा के लिए वाद संस्थित कर सकता है |
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धारा 63 के अनुसार यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति का व्ययन कर दे और उसके बदले प्राप्त धन या सम्पत्ति उसके या उसके विधिक प्रतिनिधि के हाथों में हो, तो हिताधिकारी— |
उस पर वही अधिकार रखेगा जो मूल न्यास-सम्पत्ति पर था |
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धारा 63 के अनुसार यदि न्यासी ने न्यास-सम्पत्ति का उपयोग कर भूमि खरीद ली हो, तो हिताधिकारी— |
उस भूमि का हकदार होगा |
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यदि न्यासी ने अपने धन और न्यास-धन दोनों से भूमि खरीदी हो, तो हिताधिकारी— |
दुरुपयोजित न्यास-धन की रकम का भार उस भूमि पर डालने का हकदार होगा |
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कुछ अन्तरितियों के अधिकारों की व्यावृत्ति, (Saving of Rights of Certain Transferees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 64 |
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धारा 64 के अनुसार हिताधिकारी को उस सम्पत्ति पर अधिकार नहीं होगा जो— |
सद्भावपूर्वक सप्रतिफल अन्तरिती के हाथों में हो जिसे न्यास की सूचना न हो |
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धारा 64 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने सम्पत्ति सद्भावपूर्वक और प्रतिफल देकर प्राप्त की हो तथा उसे न्यास की सूचना न हो, तो— |
हिताधिकारी उस सम्पत्ति का दावा नहीं कर सकता |
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धारा 64 के अनुसार यदि सम्पत्ति किसी ऐसे व्यक्ति से सप्रतिफल अन्तरिती को हस्तांतरित हो जाए, तो— |
हिताधिकारी उस पर दावा नहीं कर सकता |
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धारा 64 के अनुसार न्यासी का निर्णीत-लेनदार जिसने न्यास-सम्पत्ति कुर्क कर खरीद ली हो— |
सप्रतिफल अन्तरिती नहीं माना जाएगा |
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धारा 64 के अनुसार किस पर धारा 63 का नियम लागू नहीं होता? |
धन, करेंसी नोट और परक्राम्य लिखतें जो सद्भावपूर्वक धारक के हाथों में हों |
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धारा 64 के अनुसार यदि धन, करेंसी नोट या परक्राम्य लिखतें किसी सद्भावपूर्वक धारक के हाथों में परिचलन में आ जाएँ, तो— |
धारा 63 लागू नहीं होगी |
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धारा 64 के अनुसार यह प्रावधान किस अधिनियम की धारा 108 को प्रभावित नहीं करता? |
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 |
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सदोष संपरिवर्तित न्यास-सम्पत्ति का न्यासी द्वारा अर्जन, (Acquisition by Trustee of Trust-Property Wrongfully Converted) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 65 |
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धारा 65 के अनुसार यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को सदोष बेच देता है और बाद में स्वयं उस सम्पत्ति का स्वामी बन जाता है, तो— |
सम्पत्ति पुनः न्यास के अध्यधीन हो जाती है |
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धारा 65 का प्रावधान कब लागू होता है? |
जब न्यासी ने न्यास-सम्पत्ति को सदोष रूप से बेचा या अन्तरित किया हो और बाद में वही सम्पत्ति स्वयं प्राप्त कर ली हो |
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धारा 65 के अनुसार यदि न्यासी द्वारा बेची गई सम्पत्ति बाद में उसी न्यासी के पास आ जाए, तो— |
वह सम्पत्ति पुनः न्यास-सम्पत्ति मानी जाएगी |
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धारा 65 के अनुसार यदि मध्यवर्ती अन्तरिती सद्भावपूर्वक और प्रतिफल देकर सम्पत्ति प्राप्त करें, तब भी— |
यदि सम्पत्ति पुनः न्यासी के पास आ जाए तो वह पुनः न्यास के अधीन हो जाएगी |
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धारा 65 के अनुसार न्यासी द्वारा पुनः प्राप्त की गई ऐसी सम्पत्ति— |
पुनः न्यास के अधीन मानी जाती है |
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मिला ली गई सम्पत्ति की दशा में अधिकार, (Right in Case of Blended Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 66 |
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धारा 66 के अनुसार यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को अपनी सम्पत्ति के साथ सदोष मिला दे, तो— |
हिताधिकारी शोध्य रकम का भार सम्पूर्ण निधि पर डाल सकता है |
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धारा 66 के अनुसार यदि न्यासी ने न्यास-सम्पत्ति को अपनी सम्पत्ति के साथ मिला दिया हो, तो हिताधिकारी— |
सम्पूर्ण मिश्रित निधि पर दावा कर सकता है |
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धारा 66 के अनुसार “शोध्य रकम का भार” किस पर डाला जा सकता है? |
सम्पूर्ण मिली हुई निधि पर |
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भागीदार-न्यासी द्वारा भागीदारी के प्रयोजनों के लिए न्यास-सम्पत्ति का सदोष नियोजन, (Wrongful Employment by Partner-Trustee of Trust Property for Partnership Purposes) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 67 |
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धारा 67 के अनुसार यदि कोई भागीदार, जो न्यासी भी है, न्यास-सम्पत्ति को भागीदारी के कारबार में सदोष रूप से नियोजित करे, तो अन्य भागीदार— |
दायी नहीं होंगे जब तक उन्हें न्यास-भंग की सूचना न हो |
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धारा 67 के अनुसार यदि अन्य भागीदारों को न्यास-भंग की सूचना हो, तो वे— |
संयुक्ततः और पृथक्तः दायी होंगे |
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धारा 67 के अनुसार अन्य भागीदार की देयता कब उत्पन्न होती है? |
जब उसे न्यास-भंग की सूचना हो |
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धारा 67 के अनुसार यदि भागीदार न्यास-भंग में जानते हुए पक्षकार हो, तो— |
वह न्यासी के साथ संयुक्त रूप से दायी होगा |
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धारा 67 के दृष्टांत के अनुसार यदि न्यासी भागीदारी के कारबार में न्यास-सम्पत्ति का अनुचित उपयोग करे, तो लाभार्थी— |
उससे लाभों का लेखा मांग सकता है |
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न्यास-भंग में सम्मिलित होने वाले हिताधिकारी का दायित्व, (Liability of Beneficiary Joining in Breach of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 68 |
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धारा 68 के अनुसार यदि कई हिताधिकारियों में से कोई एक न्यास-भंग में सम्मिलित हो जाए, तो— |
अन्य हिताधिकारी उसके फायदाप्रद हित को परिबद्ध करा सकते हैं |
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धारा 68 के अनुसार यदि कोई हिताधिकारी अन्य हिताधिकारियों की सम्मति के बिना न्यास-भंग से लाभ प्राप्त कर ले, तो— |
अन्य हिताधिकारी उसके हित को परिबद्ध करा सकते हैं |
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धारा 68 के अनुसार यदि कोई हिताधिकारी न्यास-भंग की जानकारी होने पर भी उसे छिपा ले या अन्य हिताधिकारियों की सुरक्षा के लिए उचित कदम न उठाए, तो— |
उसके फायदाप्रद हित को परिबद्ध किया जा सकता है |
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धारा 68 के अनुसार यदि कोई हिताधिकारी न्यासी को धोखा देकर उसे न्यास-भंग करने के लिए प्रेरित करे, तो— |
अन्य हिताधिकारी उसके फायदाप्रद हित को परिबद्ध करा सकते हैं |
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धारा 68 के अनुसार अन्य हिताधिकारी दोषी हिताधिकारी के फायदाप्रद हित को कब तक परिबद्ध करा सकते हैं? |
जब तक न्यास-भंग से हुई हानि का प्रतिकर न मिल जाए |
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धारा 68 के अनुसार यदि सम्पत्ति विवाहिता स्त्री के लाभ के लिए इस शर्त के साथ दी गई हो कि वह अपने हित से स्वयं को वंचित नहीं कर सकती, तो— |
उसकी वैवाहिक स्थिति कायम रहने तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा |
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हिताधिकारी के अन्तरिती के अधिकार और दायित्व, (Rights and Liabilities of Beneficiary’s Transferee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 69 |
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धारा 69 के अनुसार जब हिताधिकारी अपना हित किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित करता है, तो अन्तरिती— |
अधिकारों से युक्त और दायित्वों के अधीन दोनों होता है |
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धारा 69 के अनुसार अन्तरिती को अधिकार और दायित्व किस समय से प्राप्त होते हैं? |
अन्तरण की तारीख से |
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धारा 69 के अनुसार अन्तरिती किन अधिकारों से युक्त होता है? |
उस हित से संबंधित अधिकार जो हिताधिकारी के पास थे |
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धारा 69 के अनुसार अन्तरिती किन दायित्वों के अधीन होता है? |
उस हित से संबंधित दायित्वों के जो हिताधिकारी पर थे |
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धारा 69 के अनुसार अन्तरिती की स्थिति किसके समान मानी जाती है? |
मूल हिताधिकारी के समान (उस हित के संबंध में) |
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धारा 69 के अंतर्गत यदि हिताधिकारी अपना हित अंतरित करता है, तो अन्तरिती— |
न्यास के नियमों से बंधा रहता है |
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कौन सा कथन धारा 69 के संदर्भ में सही है? |
अन्तरिती मूल हिताधिकारी के अधिकारों और दायित्वों दोनों का उत्तराधिकारी होता है |
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अध्याय-7 (CHAPTER-VII) |
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न्यासी का पद रिक्त हो जाने के विषय में (OF VACATING THE OFFICE OF TRUSTEE) |
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पद किस प्रकार रिक्त होता है, (Office How Vacated) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 70 |
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धारा 70 के अनुसार न्यासी का पद कब रिक्त हो जाता है? |
मृत्यु या पद से उन्मोचन से |
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न्यासी का उन्मोचन, (Discharge of Trustee) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 71 |
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धारा 71 के अनुसार न्यासी का उन्मोचन किस स्थिति में हो सकता है? |
न्यास के निर्वापन से; न्यास के अधीन के उसके कर्तव्यों की पूर्ति हो जाने से; ऐसे साधनों से, जैसे न्यास की लिखत द्वारा विहित किए गए हों: उसके स्थान पर कोई नया न्यासी इस अधिनियम के अधीन नियुक्त हो जाने से; उसकी और हिताधिकारी की, या जहां कि एक से अधिक हिताधिकारी हों वहां उन सब हिताधिकारियों की, सम्मति से, जब कि हिताधिकारी या सब हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हों; अथवा उस न्यायालय |
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न्यास से उन्मोचन के लिए अर्जी, (Petition to be Discharged from Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 72 |
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धारा 72 के अनुसार न्यासी अपने पद से उन्मोचन के लिए किस न्यायालय में आवेदन कर सकता है? |
आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 72 के अनुसार न्यासी उन्मोचन के लिए किस माध्यम से आवेदन कर सकता है? |
अर्जी द्वारा |
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धारा 72 के अनुसार न्यायालय न्यासी को कब उन्मोचित कर सकता है? |
जब न्यायालय को पर्याप्त कारण प्रतीत हो |
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धारा 72 के अनुसार न्यायालय न्यासी के किस व्यय के भुगतान का आदेश दे सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति में से उसके खर्चों का भुगतान |
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धारा 72 के अनुसार यदि उन्मोचन के लिए पर्याप्त कारण न हो तो— |
न्यायालय उन्मोचन नहीं करेगा |
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धारा 72 के अनुसार पर्याप्त कारण न होने पर भी न्यायालय कब न्यासी को उन्मोचित कर सकता है? |
जब उसका स्थान लेने के लिए कोई उचित व्यक्ति उपलब्ध हो |
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धारा 72 के अनुसार न्यासी द्वारा उन्मोचन की अर्जी किस धारा के उपबंधों के होते हुए भी की जा सकती है? |
धारा 11 |
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मृत्यु, आदि होने पर नए न्यासी की नियुक्ति, (Appointment of New Trustees on Death, etc.) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 73 |
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धारा 73 के अनुसार नया न्यासी कब नियुक्त किया जा सकता है? |
जब न्यासी मर जाए, जब न्यासी नियुक्ति स्वीकार करने से इंकार कर दे, जब न्यासी दिवालिया घोषित हो जाए |
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धारा 73 के अनुसार यदि कोई न्यासी लगातार छह माह तक भारत से अनुपस्थित रहे, तो— |
नया न्यासी नियुक्त किया जा सकता है |
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धारा 73 के अनुसार यदि न्यासी दिवालिया घोषित हो जाए, तो— |
उसके स्थान पर नया न्यासी नियुक्त किया जा सकता है |
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धारा 73 के अनुसार नया न्यासी सबसे पहले किसके द्वारा नियुक्त किया जा सकता है? |
न्यास की लिखत द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा |
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धारा 73 के अनुसार यदि न्यास की लिखत में कोई नामनिर्दिष्ट व्यक्ति न हो, तो नया न्यासी कौन नियुक्त कर सकता है? |
न्यासकर्ता (यदि जीवित और संविदा करने में सक्षम हो) |
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धारा 73 के अनुसार यदि न्यासकर्ता जीवित न हो, तो नया न्यासी कौन नियुक्त कर सकता है? |
उत्तरजीवी या बने रहने वाले न्यासी |
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धारा 73 के अनुसार नए न्यासी की नियुक्ति किस प्रकार की जाएगी? |
नियुक्ति करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा |
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धारा 73 के अनुसार नए न्यासी की नियुक्ति के समय— |
न्यासियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है |
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धारा 73 के अनुसार यदि केवल एक ही न्यासी नियुक्त किया जाना हो, तो— |
शासकीय न्यासी न्यायालय के आदेश से नियुक्त किया जा सकता है |
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धारा 73 के अनुसार यदि वसीयत में नामित न्यासी वसीयतकर्ता से पहले मर जाए, तो— |
उस स्थिति को भी नए न्यासी की नियुक्ति के अंतर्गत माना जाएगा |
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धारा 73 के अनुसार कौन सी स्थिति नए न्यासी की नियुक्ति का आधार है? |
न्यासी का दिवालिया होना न्यासी का अयोग्य होना न्यासी का न्यास में कार्य करने से इंकार करना |
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न्यायालय द्वारा नियुक्ति, नए न्यासियों का वरण करने के लिए नियम- (Appointment by Court, Rule for Selecting New Trustees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 74 |
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धारा 74 के अनुसार न्यायालय द्वारा नया न्यासी कब नियुक्त किया जा सकता है? |
जब धारा 73 के अधीन नियुक्ति संभव न हो |
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धारा 74 के अनुसार नया न्यासी नियुक्त करने के लिए कौन आवेदन कर सकता है? |
हिताधिकारी |
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धारा 74 के अनुसार आवेदन किस न्यायालय में किया जाएगा? |
आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय |
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धारा 74 के अनुसार हिताधिकारी द्वारा आवेदन किस माध्यम से किया जाता है? |
अर्जी द्वारा |
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धारा 74 के अनुसार नया न्यासी नियुक्त करने के लिए— |
वाद संस्थित करना आवश्यक नहीं है |
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धारा 74 के अनुसार न्यायालय नए न्यासी की नियुक्ति करते समय किसका ध्यान रखेगा? |
न्यासकर्ता की इच्छाओं का, हिताधिकारियों के हितों का, न्यास के उचित निष्पादन का |
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धारा 74 के अनुसार न्यायालय किसकी इच्छाओं को ध्यान में रखेगा? |
न्यासकर्ता की इच्छाएँ जो न्यास की लिखत में व्यक्त हों |
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धारा 74 के अनुसार यदि नए न्यासी की नियुक्ति के लिए कोई व्यक्ति पहले से सशक्त हो, तो न्यायालय— |
उसकी इच्छाओं का ध्यान रखेगा |
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धारा 74 के अनुसार न्यायालय किस बात का भी विचार करेगा? |
क्या नई नियुक्ति न्यास के निष्पादन को अग्रसर करेगी या बाधित करेगी |
|
धारा 74 के अनुसार यदि एक से अधिक हिताधिकारी हों, तो न्यायालय— |
सभी हिताधिकारियों के हितों का ध्यान रखेगा |
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न्यास-सम्पत्ति का नए न्यासियों में निहित होना, नए न्यासी की शक्तियां (Vesting of Trust-Property in New Trustees, Powers of New Trustees) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 75 |
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धारा 75 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति नए न्यासी में कब निहित होती है? |
जब धारा 73 या 74 के अधीन नया न्यासी नियुक्त किया जाए |
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धारा 75 के अनुसार नियुक्त नए न्यासी में न्यास-सम्पत्ति— |
स्वतः निहित हो जाती है |
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धारा 75 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति किसके साथ संयुक्त रूप से भी निहित हो सकती है? |
उत्तरजीवी या बने रहने वाले न्यासियों के साथ |
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धारा 75 के अनुसार यदि कोई नया न्यासी नियुक्त किया जाता है, तो— |
न्यास-सम्पत्ति नए न्यासी में निहित हो जाती है |
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धारा 75 के अनुसार नए न्यासी को कौन-सी शक्तियां प्राप्त होती हैं? |
वही शक्तियां जो मूल न्यासी को प्राप्त थीं |
|
धारा 75 के अनुसार नए न्यासी को शक्तियां किस प्रकार प्राप्त मानी जाती हैं? |
जैसे उसे न्यासकर्ता ने मूल रूप से न्यासी नामित किया हो |
|
धारा 75 के अनुसार नए न्यासी को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त होते हैं? |
शक्तियां प्राधिकार विवेकाधिकार |
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धारा 75 के अनुसार न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यासी को— |
वही अधिकार प्राप्त होते हैं जो अन्य न्यासियों को होते हैं |
|
धारा 75 के अनुसार नए न्यासी की स्थिति किसके समान मानी जाती है? |
मूल न्यासी के समान |
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न्यास का अस्तित्व बना रहना, (Survival of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 76 |
|
धारा 76 के अनुसार यदि कई सहन्यासियों में से एक न्यासी की मृत्यु हो जाए, तो— |
न्यास का अस्तित्व बना रहता है |
|
धारा 76 के अनुसार सहन्यासियों में से किसी एक के उन्मोचन होने पर— |
न्यास का अस्तित्व बना रहता है |
|
धारा 76 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति किसे संक्रान्त हो जाती है? |
उत्तरजीवी न्यासियों को |
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धारा 76 का नियम कब लागू नहीं होगा? |
जब न्यास की लिखत में अन्यथा घोषित किया गया हो |
|
धारा 76 के अनुसार सहन्यासियों में से किसी एक की मृत्यु का क्या प्रभाव होता है? |
न्यास का अस्तित्व जारी रहता है |
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धारा 76 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति का संक्रान्त होना किसे होता है? |
उत्तरजीवी न्यासियों को |
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धारा 76 का सिद्धांत किस पर आधारित है? |
न्यास का निरंतर अस्तित्व (Continuity of Trust) |
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धारा 76 के अनुसार न्यास का अस्तित्व कब समाप्त हो सकता है? |
जब न्यास की लिखत में अन्यथा प्रावधान हो |
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धारा 76 के अनुसार सहन्यासियों के मामले में संपत्ति किस सिद्धांत के अनुसार स्थानांतरित होती है? |
उत्तरजीविता का सिद्धांत (Doctrine of Survivorship) |
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अध्याय-8 (CHAPTER-VIII) |
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न्यासों के निर्वापन के विषय में (OF THE EXTINCTION OF TRUSTS) |
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न्यास कैसे निर्वापित होता है, (Trust how Extinguished) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 77 |
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धारा 77 के अनुसार न्यास कब निर्वापित हो जाता है? |
जब न्यास का प्रयोजन पूर्ण हो जाए |
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धारा 77 के अनुसार यदि न्यास का प्रयोजन विधिविरुद्ध हो जाए, तो— |
न्यास समाप्त हो जाएगा |
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धारा 77 के अनुसार यदि न्यास-सम्पत्ति नष्ट हो जाए और प्रयोजन की पूर्ति असंभव हो जाए, तो— |
न्यास समाप्त हो जाएगा |
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धारा 77 के अनुसार यदि न्यास प्रतिसंहरणीय (Revocable) हो और उसे अभिव्यक्त रूप से प्रतिसंहृत कर दिया जाए, तो— |
न्यास समाप्त हो जाता है |
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धारा 77 के अनुसार कौन सा न्यास के निर्वापन का आधार है? |
प्रयोजन की पूर्ति, प्रयोजन का विधिविरुद्ध हो जाना, प्रयोजन का असंभव हो जाना |
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धारा 77 के अनुसार यदि न्यास का उद्देश्य ही अवैध हो जाए, तो— |
न्यास निर्वापित हो जाएगा |
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धारा 77 के अनुसार प्रयोजन की पूर्ति असंभव होने का एक कारण क्या हो सकता है? |
न्यास-सम्पत्ति का नाश |
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धारा 77 के अनुसार न्यास के निर्वापन का एक आधार क्या है? |
न्यास का प्रतिसंहरण (Revocation) |
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न्यास का प्रतिसंहरण, (Revocation of Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 78 |
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धारा 78 के अनुसार विल द्वारा सृष्ट न्यास का प्रतिसंहरण किसके प्रसादानुसार किया जा सकता है? |
वसीयतकर्ता |
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धारा 78 के अनुसार यदि सभी हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हों, तो न्यास का प्रतिसंहरण— |
उनकी सम्मति से किया जा सकता है |
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धारा 78 के अनुसार यदि न्यास किसी अवसीयती लिखत या मौखिक शब्दों द्वारा घोषित किया गया हो, तो उसका प्रतिसंहरण कब किया जा सकता है? |
न्यासकर्ता की अभिव्यक्त रूप से आरक्षित प्रतिसंहरण शक्ति के प्रयोग से |
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धारा 78 के अनुसार यदि न्यास ऋणों को चुकाने के लिए बनाया गया हो और लेनदारों को सूचित न किया गया हो, तो— |
न्यासकर्ता अपनी इच्छा से प्रतिसंहरण कर सकता है |
|
धारा 78 के अनुसार यदि लेनदार इस ठहराव के पक्षकार हों, तो— |
लेनदारों की सम्मति के बिना प्रतिसंहरण नहीं किया जा सकता |
|
धारा 78 के अनुसार कौन सा न्यास के प्रतिसंहरण का आधार है? |
सभी सक्षम हिताधिकारियों की सहमति, आरक्षित प्रतिसंहरण शक्ति का प्रयोग, ऋण भुगतान हेतु बनाए गए न्यास में लेनदारों को सूचना न देना |
|
धारा 78 के अनुसार प्रतिसंहरण शक्ति किसके पास हो सकती है? |
न्यासकर्ता |
|
धारा 78 के अनुसार यदि सभी हिताधिकारी संविदा करने में सक्षम न हों, तो— |
प्रतिसंहरण संभव नहीं होगा |
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धारा 78 के दृष्टांत के अनुसार यदि लेनदारों को सूचना नहीं दी गई हो, तो— |
न्यासकर्ता न्यास का प्रतिसंहरण कर सकता है |
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क सम्पत्ति का हस्तान्तरण ख को इस न्यास पर करता है कि ख उसे बेच दे और क के लेनदारों के दावों को, विक्रय के आगमों में से चुका दे। क प्रतिसंहरण की शक्ति आरक्षित नहीं करता। यदि लेनदारों को कोई संसूचना नहीं दी गई है तो-- |
क न्यास का प्रतिसंहरण कर सकेगा। |
|
क सम्पत्ति का हस्तान्तरण ख को इस न्यास पर करता है कि ख उसे बेच दे और क के लेनदारों के दावों को, विक्रय के आगमों में से चुका दे। क प्रतिसंहरण की शक्ति आरक्षित नहीं करता। यदि लेनदारों को कोई संसूचना नहीं दी गई है तो क न्यास का प्रतिसंहरण कर सकेगा। किन्तु यदि लेनदार इस ठहराव के पक्षकार हैं तो-- |
न्यास उनकी सम्मति के बिना प्रतिसंहृत नहीं किया जा सकता। |
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न्यासी जो बात सम्यक् रूप से कर चुके हों उसे प्रतिसंहरण विफल न करेगा, (Revocation not to Defeat What Trustees Have Duly Done) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 79 |
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धारा 79 के अनुसार न्यास के प्रतिसंहरण का क्या प्रभाव होता है? |
न्यासी द्वारा सम्यक् रूप से किए गए कार्य प्रभावित नहीं होते |
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धारा 79 के अनुसार न्यासकर्ता प्रतिसंहरण करके— |
न्यासी द्वारा विधिपूर्वक किए गए कार्यों को विफल नहीं कर सकता |
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धारा 79 के अनुसार यदि न्यासी ने न्यास के निष्पादन में कोई कार्य विधिपूर्वक किया हो, तो— |
प्रतिसंहरण से उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा |
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धारा 79 के अनुसार न्यासी द्वारा किए गए कार्यों की सुरक्षा किस स्थिति में होती है? |
जब वे सम्यक् रूप से किए गए हों |
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धारा 79 के अनुसार प्रतिसंहरण का प्रभाव किस पर नहीं पड़ेगा? |
न्यासी द्वारा पहले किए गए सम्यक् कार्यों पर |
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धारा 79 के अनुसार न्यासकर्ता की प्रतिसंहरण शक्ति— |
न्यासी द्वारा सम्यक् रूप से किए गए कार्यों को प्रभावित नहीं कर सकती |
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धारा 79 का सिद्धांत किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है? |
न्यासी के वैध कार्यों की सुरक्षा |
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अध्याय-9 (CHAPTER-IX) |
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न्यास-प्रकृति की कतिपय बाध्यताओं के विषय में (OF CERTAIN OBLIGATIONS IN THE NATURE OF TRUSTS) |
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न्यास-प्रकृति की बाध्यता कहां सृष्ट होती है, (Where obligation in Nature of Trust is Created) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 80 |
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न्यास-प्रकृति की बाध्यता किन दशाओं में सृष्ट होती है?
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भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अध्याय 9 की धारा 83 से धारा 96 की दशाओं में |
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धारा 81-82 किस अधिनियम द्वारा निरसित की गयी है ? |
बेनामी संव्यवहार (प्रतिषेध) अधिनियम, 1988 (1988 का 45) की धारा 7 द्वारा |
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निष्पादन के अयोग्य न्यास या न्यास-सम्पत्ति को निःशेष किए बिना निष्पादित न्यास, (Trust Incapable of Execution or Executed Without Exhausting Trust-Property) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 83 |
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धारा 83 के अनुसार यदि न्यास निष्पादन के अयोग्य हो जाए, या जहां कि न्यास का निष्पादन न्यास-सम्पत्ति को निःशेष किए बिना पूर्णतः हो जाता है, तो न्यास-सम्पत्ति— |
तत्प्रतिकूल निदेश के अभाव में, न्यासी न्यास-सम्पत्ति का या उसके उतने भाग का, जो अनिःशेषित हो, धारण न्यासकर्ता या उसके विधिक प्रतिनिधि के फायदे के लिए करेगा। |
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क कुछ भूमि का हस्तान्तरण ख को- "न्यास पर" करता है और न्यास घोषित नहीं किया जाता; अथवा “एतत्पश्चात् घोषित किए जाने वाले न्यास पर" करता है और ऐसी कोई घोषणा कभी नहीं की जाती; अथवा उन न्यासों पर करता है जो इतने अस्पष्ट हैं कि उनका निष्पादन नहीं किया जा सकता; अथवा उन न्यासों पर करता है जो क्रियान्वित होने के अयोग्य हो जाते हैं; अथवा "ग के लिए न्यास पर" करता है, और ग न्यास के अधीन का अपना हित त्याग देता है। इनमें से हर एक दशा में-- |
ख भूमि का धारण क के फायदे के लिए करता है। |
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क चार प्रतिशत वाली प्रतिभूतियों में लगे 10,000 रुपयों का अन्तरण ख को इस न्यास पर करता है कि ख उन पर प्रतिवर्ष शोध्य प्रोद्भूत होने वाला ब्याज ग को उसके जीवनपर्यन्त संदत्त करता रहेगा। क मर जाता है। फिर ग मर जाती है। ख उस निधि का धारण-- |
क के विधिक प्रतिनिधि के फायदे के लिए करता है। |
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क 10,000 रुपयों की वसीयत ख को इसलिए करता है कि वे किन्हीं प्रयोजनार्थ हस्तान्तरित की जाने के लिए भूमि खरीदने में लगाए जाएं, जो प्रयोजन पूर्णतः या भागतः क्रियान्वित नहीं हो पाते। ख धन में के, या यदि भूमि खरीदी गई हो तो उस भूमि में के, अव्ययनित हित का धारण-- |
क के विधिक प्रतिनिधि के फायदे के लिए करता है। |
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अवैध प्रयोजन के लिए अन्तरण, (Transfer for Illegal Purpose) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 84 |
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जहां कि सम्पत्ति का स्वामी उसका अन्तरण किसी अन्य को किसी अवैध प्रयोजन के लिए करता है और ऐसे प्रयोजन का निष्पादन नहीं किया जाता या अन्तरक उतना दोषी न हो जितना कि अन्तरिती, या अन्तरिती को सम्पत्ति प्रतिधृत करने की अनुज्ञा देने का प्रभाव किसी विधि के उपबन्धों का विफलीकरण हो सकता हो, तो— |
वहां अन्तरिती सम्पत्ति का धारण अन्तरक के फायदे के लिए करेगा।
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अवैध प्रयोजन के लिए वसीयत, वह वसीयत जिसका प्रतिसंहरण प्रपीड़न द्वारा निवारित किया गया है (Bequest for Illegal Purpose, Bequest of which revocation is prevented by coercion) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 85 |
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यदि कोई वसीयतकर्ता किसी संपत्ति की वसीयत न्यास पर करता है और न्यास का उद्देश्य विधिविरुद्ध हो, तो संपत्ति किसके लाभ के लिए धारण की जाएगी? |
वसीयतकर्ता के विधिक प्रतिनिधि के लाभ के लिए |
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यदि वसीयतकर्ता के जीवनकाल में वसीयतदार उस संपत्ति को अवैध प्रयोजन के लिए उपयोग करने का करार कर ले, तो संपत्ति किसके लिए धारण की जाएगी? |
विधिक प्रतिनिधि |
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यदि किसी वसीयत का प्रतिसंहरण (revocation) प्रपीड़न (coercion) द्वारा रोका जाता है, तो संपत्ति किसके लाभ के लिए धारण की जाएगी? |
वसीयतकर्ता के विधिक प्रतिनिधि के लिए |
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धारा 85 के अनुसार जब न्यास का प्रयोजन अवैध हो तो वसीयतदार की स्थिति क्या होती है? |
न्यासी के रूप में |
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धारा 85 के अंतर्गत किस प्रकार का न्यास उत्पन्न होता है? |
परिणामी न्यास (Resulting Trust) |
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विखंडनीय संविदा के अनुसरण में किया गया अन्तरण, (Transfer Pursuant to Rescindable Contract) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 86 |
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धारा 86 तब लागू होती है जब संपत्ति का अंतरण किस प्रकार की संविदा के आधार पर हुआ हो? |
विखंडनीय संविदा |
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यदि संविदा कपट या भूलवश उत्प्रेरित हुई हो, तो संपत्ति का अंतरण किस धारा के अंतर्गत आता है? |
धारा 86 |
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जब अंतरिती को यह सूचना मिल जाती है कि संविदा विखंडनीय है, तो वह संपत्ति किसके फायदे के लिए धारण करेगा? |
अन्तरक के लिए |
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धारा 86 के अनुसार अन्तरक को संपत्ति वापस पाने के लिए क्या करना होगा? |
प्रतिफल का प्रतिसंदाय करना |
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धारा 86 के अनुसार प्रतिफल का प्रतिसंदाय किसका किया जाएगा? |
वास्तविक रूप से दिए गए प्रतिफल का |
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धारा 86 के अंतर्गत अंतरिती की स्थिति क्या होती है जब उसे सूचना मिल जाती है? |
न्यासी (Trustee) |
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धारा 86 में किस प्रकार का न्यास उत्पन्न होता है? |
रचनात्मक न्यास |
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धारा 86 किस स्थिति में लागू नहीं होगी? |
संविदा पूर्णत: वैध और निष्कपट हो |
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ऋणी का लेनदार का प्रतिनिधि बन जाना, (Debtor Becoming Creditor’s Representative) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 87 |
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धारा 87 तब लागू होती है जब कौन व्यक्ति अपने लेनदार का निष्पादक या विधिक प्रतिनिधि बन जाता है? |
ऋणी |
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यदि ऋणी अपने लेनदार का निष्पादक बन जाता है, तो वह ऋण किसके फायदे के लिए धारण करेगा? |
उसमें हितबद्ध व्यक्तियों के लिए |
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वैश्वासिक द्वारा उठाया गया फायदा, (Advantage Gained by Fiduciary) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 88 |
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धारा 88 के अनुसार यदि कोई न्यासी अपनी स्थिति का लाभ उठाकर धन सम्बन्धी फायदा प्राप्त करता है, तो वह फायदा किसके लिए धारण करेगा? |
उस व्यक्ति के लिए जिसके हितों की वह रक्षा कर रहा है |
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कौन व्यक्ति धारा 88 के अंतर्गत वैश्वासिक (Fiduciary) की श्रेणी में आता है? |
न्यासी, भागीदार, अभिकर्ता |
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यदि कम्पनी का निदेशक अपनी स्थिति का लाभ उठाकर निजी लाभ प्राप्त करता है, तो वह लाभ किसके लिए माना जाएगा? |
कम्पनी के लिए |
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यदि एक न्यासी न्यास-सम्पत्ति का उपयोग अपने व्यापार में करता है और उससे लाभ कमाता है, तो वह लाभ किसका होगा? |
हिताधिकारी का |
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यदि कोई भागीदार भागीदारी की निधि से अपने नाम पर भूमि खरीद ले, तो वह भूमि किसके लिए मानी जाएगी? |
भागीदारी के लिए |
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यदि कोई अभिकर्ता (Agent) अपने प्रिंसिपल के लिए पट्टा लेने के बजाय उसे अपने लिए ले लेता है, तो पट्टा किसके लिए माना जाएगा? |
प्रिंसिपल के लिए |
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यदि कोई निष्पादक वसीयतदार से कम कीमत पर दावा खरीद ले और वास्तविक मूल्य अधिक हो, तो अंतर किसके लिए माना जाएगा? |
वसीयतदार के लिए |
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एक निष्पादक क वसीयतदार से विल के अधीन का ख का दावा न्यून मूल्य पर खरीदता है। ख उस वसीयत के मूल्य से अनभिज्ञ है। क उस अंतर का, जो कीमत और मूल्य में है, धारण-- |
ख के फायदे के लिए करेगा। |
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एक न्यासी क न्यास-सम्पत्ति का उपयोग स्वयं अपने कारबार के प्रयोजन के लिए कर लेता है। ऐसे उपयोग से उद्भूत लाभों का धारण-- |
क अपने हिताधिकारी के फायदे के लिए करता है। |
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एक न्यासी क अपने को धन की किसी राशि का अपने उत्तराधिकारी द्वारा संदाय किए जाने के प्रतिफलस्वरूप अपने न्यासकार्य से निवृत्त हो जाता है। क ऐसे धन का धारण-- |
अपने हिताधिकारी के फायदे के लिए करता है। |
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असम्यक् असर के प्रयोग से उठाया गया फायदा, (Advantage Gained by Exercise of Undue Influence) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 89 |
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जहां कि असम्यक् असर के प्रयोग से किसी अन्य के हितों का अल्पीकरण करते हुए कोई फायदा उठाया जाता है वहां- |
किसी प्रतिफल के बिना अथवा इस सूचना के होते हुए कि ऐसे असर का प्रयोग हुआ है ऐसा फायदा उठाने वाला व्यक्ति उस फायदे का धारण उस व्यक्ति के फायदे के लिए करेगा जिसके हितों पर इस प्रकार प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो। |
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विशेषित स्वामित्व वाले स्वामी द्वारा उठाया गया फायदा, (Advantage Gained by Qualified Owner) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 90 |
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धारा 90 के अनुसार कौन विशेषित स्वामित्व वाला व्यक्ति हो सकता है? |
आजीवन अभिधारी (Life tenant), सहस्वामी (Co-owner), बन्धकदार (Mortgagee) |
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यदि विशेषित स्वामी अपनी स्थिति का लाभ उठाकर संपत्ति से फायदा उठाता है, तो वह फायदा किसके लिए माना जाएगा? |
संपत्ति में हितबद्ध सभी व्यक्तियों के लिए |
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धारा 90 के अनुसार लाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति उस लाभ को किस रूप में धारण करेगा? |
न्यासी के रूप में |
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धारा 90 के अंतर्गत लाभ का वितरण किन व्यक्तियों के बीच होगा? |
संपत्ति में हितबद्ध सभी व्यक्तियों के बीच |
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यदि कोई आजीवन अभिधारी अपने नाम पर पट्टे का नवीकरण करा ले, तो नवीकृत पट्टा किसके लिए माना जाएगा? |
पुराने पट्टे में हितबद्ध सभी व्यक्तियों के लिए |
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यदि बन्धकदार जानबूझकर भूमि का राजस्व बकाया रहने देता है और बाद में भूमि खरीद लेता है, तो वह भूमि किसके लिए मानी जाएगी? |
बन्धककर्ता के लिए |
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धारा 90 के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए जो उचित व्यय किया गया हो, उसका क्या होगा? |
अन्य हितबद्ध व्यक्तियों द्वारा अपने हिस्से का प्रतिसंदाय किया जाएगा |
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विद्यमान संविदा की सूचना होते हुए सम्पत्ति का अर्जन, (Property Acquired with Notice of Existing Contract) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 91 |
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धारा 91 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति संपत्ति अर्जित करता है— |
यह जानते हुए कि उस संपत्ति पर पहले से संविदा मौजूद है |
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धारा 91 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति संपत्ति अर्जित करता है जबकि उसे विद्यमान संविदा की सूचना हो, तो वह संपत्ति किसके लिए धारण करेगा? |
उस व्यक्ति के लिए जिसने पहले संविदा की थी |
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धारा 91 के अनुसार संपत्ति का धारण किस सीमा तक किया जाएगा? |
उस सीमा तक जो संविदा को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक हो |
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धारा 91 के अंतर्गत कौन-सी संविदा होनी चाहिए? |
ऐसी संविदा जिसका विनिर्दिष्ट पालन कराया जा सकता हो |
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धारा 91 के अनुसार संपत्ति प्राप्त करने वाले व्यक्ति की स्थिति क्या मानी जाएगी? |
न्यासी (Trustee) |
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यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि किसी संपत्ति के संबंध में पहले से एक वैध संविदा मौजूद है, फिर भी उसे खरीद लेता है, तो कानून क्या कहता है? |
वह संपत्ति पहले संविदा करने वाले व्यक्ति के लाभ के लिए धारण करेगा |
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उस सम्पत्ति को खरीदने की संविदा करने वाले व्यक्ति द्वारा क्रय जो न्यास पर धारण की जाने वाली है, (Purchase by Person Contracting to Buy Property to be Held on Trust) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 92 |
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जहां कि कोई व्यक्ति कुछ हिताधिकारियों के लिए न्यास पर धारण की जाने के लिए सम्पत्ति खरीदने की संविदा करता है और तदनुसार उस सम्पत्ति को खरीद लेता है वहां - |
वह उस सम्पत्ति का धारण उनके फायदे के लिए उस विस्तार तक करेगा जो उस संविदा को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक है। |
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शमन करने वाले कई लेनदारों में से एक द्वारा गुप्त रूप से उठाया गया फायदा, (Advantage secretly Gained by One of Several Compounding Creditors) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 93 |
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धारा 93 तब लागू होती है जब— |
लेनदार ऋणी के साथ गुप्त समझौता कर लेता है |
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यदि कई लेनदार अपने ऋणों का शमन करते हैं और उनमें से एक लेनदार गुप्त रूप से अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर लेता है, तो वह लाभ किसके लिए माना जाएगा? |
सभी सह-लेनदारों के लिए |
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धारा 93 के अनुसार गुप्त लाभ प्राप्त करने वाले लेनदार की स्थिति क्या मानी जाती है? |
न्यासी |
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यदि एक लेनदार गुप्त समझौते से अतिरिक्त लाभ प्राप्त करता है, तो उसे उस लाभ का क्या करना होगा? |
सह-लेनदारों के साथ साझा करना |
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धारा 93 के अंतर्गत उत्पन्न न्यास किस प्रकार का होता है? |
रचनात्मक न्यास |
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धारा 94 जिन दशाओं के लिए अभिव्यक्त तौर पर उपबंध नहीं किया गया है उनमें आन्वयिक न्यास, (Section 94: Constructive trusts in cases not expressly provided for) किस अधिनियम द्वारा निरसित हैं? |
बेनामी संव्यवहार (प्रतिषेध) अधिनियम, 1988 (1988 का 45) की धारा 17 द्वारा
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बाध्यताधारी के कर्तव्य, दायित्व और निर्योग्यताएं, (Obligor’s Duties, Liabilities and Disabilities) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 95 |
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धारा 95 के अनुसार जो व्यक्ति इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं के अंतर्गत सम्पत्ति धारण करता है, वह किसके समान माना जाएगा? |
उस व्यक्ति का न्यासी जिसके लाभ के लिए वह सम्पत्ति धारण करता है |
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धारा 95 के अनुसार बाध्यताधारी को किनके समान कर्तव्यों और दायित्वों का पालन करना होता है? |
न्यासी के समान |
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यदि बाध्यताधारी सम्पत्ति पर खेती करता है या उसे व्यापार में नियोजित करता है, तो वह किसका हकदार होता है? |
अपने परिश्रम, कौशल और समय के लिए युक्तियुक्त पारिश्रमिक |
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धारा 95 के अनुसार बाध्यताधारी किन परिस्थितियों में सम्पत्ति खरीद सकता है? |
न्यायालय की अनुज्ञा के बिना, यदि वह संविदा के आधार पर सम्पत्ति धारण कर रहा हो |
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धारा 95 के अनुसार बाध्यताधारी किस स्थिति में सम्पत्ति का पट्टेदार या बन्धकदार बन सकता है? |
न्यायालय की अनुमति के बिना भी, यदि वह संविदा के आधार पर सम्पत्ति धारण कर रहा हो |
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धारा 95 के अनुसार बाध्यताधारी पर कौन-सी निर्योग्यताएं लागू होती हैं? |
वही निर्योग्यताएं जो एक न्यासी पर लागू होती हैं |
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सद्भावपूर्ण क्रेताओं के अधिकारों की व्यावृत्ति, (Saving of Rights of Bona Fide Purchasers) किस धारा से सम्बंधित हैं? |
धारा 96 |
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धारा 96 के अनुसार “सद्भावपूर्ण सप्रतिफल अन्तरिती” से क्या अभिप्राय है? |
ऐसा व्यक्ति जिसने मूल्य देकर और सद्भावपूर्वक संपत्ति प्राप्त की हो |
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धारा 96 के अनुसार इस अध्याय की किसी भी धारा से किसके अधिकार प्रभावित नहीं होंगे? |
सद्भावपूर्ण सप्रतिफल अन्तरिती के |
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यदि कोई व्यक्ति संपत्ति को सद्भावपूर्वक और प्रतिफल देकर प्राप्त करता है, तो धारा 96 के अनुसार क्या होगा? |
उसके अधिकार सुरक्षित रहेंगे |
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धारा 96 किस सिद्धांत को दर्शाती है? |
इक्विटी, बिना किसी पूर्व सूचना के मूल्य के लिए वास्तविक खरीदार की रक्षा करती है। |
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धारा 96 के अनुसार कोई भी बाध्यता किसके विरुद्ध उत्पन्न नहीं की जाएगी? |
सद्भावपूर्ण सप्रतिफल अन्तरिती |
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यदि कोई व्यक्ति संपत्ति को सद्भावपूर्वक और प्रतिफल देकर प्राप्त करता है, तो भारतीय न्यास अधिनियम के इस अध्याय की धाराएँ— |
उसके अधिकारों को प्रभावित नहीं करेंगी |