धारा 94 से 110 अध्याय 7 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 94 से 110 अध्याय 7 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

- पेश करने के लिए समन

94. दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए समन

1. जब कभी कोई न्यायालय या पुलिस थाने का कोई भारसाधक अधिकारी यह समझता है कि किसी ऐसे अन्वेषण, जांच, विचारण, या अन्य कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, जो इस संहिता के अधीन ऐसे न्यायालय या अधिकारी के द्वारा या समक्ष हो रही है, किसी दस्तावेज या अन्य चीज का पेश किया जाना आवश्यक या वांछनीय है तो जिस व्यक्ति के कब्जे या शक्ति में ऐसी दस्तावेज या चीज के होने का विश्वास है उसके नाम ऐसा न्यायालय समन या ऐसा अधिकारी एक लिखित आदेश उससे यह अपेक्षा करते हुए जारी कर सकता है कि उस समन या आदेश में उल्लिखित समय और स्थान पर उसे पेश करे या हाजिर हो और उसे पेश करे

2. यदि कोई व्यक्ति, जिससे इस धारा के अधीन दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने की ही अपेक्षा की गई है, उसे पेश करने के लिए स्वयं हाजिर होने के बजाय उस दस्तावेज या चीज को पेश करवा दे तो यह समझा जाएगा कि उसने उस अपेक्षा का अनुपालन कर दिया है

3. इस धारा की कोई बात

क. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 129 और धारा 130 या बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ; या

ख. डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा में किसी पत्र, पोस्टकार्ड, तार या अन्य दस्तावेज या किसी पार्सल या चीज को लागू होने वाली नहीं समझी जाएगी

95. पत्रों के संबंध में प्रक्रिया

1. यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय की राय में किसी डाक प्राधिकारी की अभिरक्षा की कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज इस संहिता के अधीन किसी अन्वेषण, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजन के लिए चाहिए तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय, यथास्थिति, डाक प्राधिकारी से यह अपेक्षा कर सकता है कि उस दस्तावेज, पार्सल या चीज का परिदान उस व्यक्ति को, जिसका वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय निदेश दे, कर दिया जाए

2. यदि किसी अन्य मजिस्ट्रेट की, चाहे वह कार्यपालक है या न्यायिक, या किसी पुलिस आयुक्त या जिला पुलिस अधीक्षक की राय में ऐसी कोई दस्तावेज, पार्सल या चीज ऐसे किसी प्रयोजन के लिए चाहिए तो वह, यथास्थिति, डाक या तार प्राधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह ऐसी दस्तावेज, पार्सल या चीज के लिए तलाशी कराए और उसे उपधारा (1) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या न्यायालय के आदेशों के मिलने तक निरुद्ध रखे

- तलाशी वारंट

96.तलाशी वारंट कब जारी किया जा सकता है

1. जहां

क. किसी न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण है कि वह व्यक्ति, जिसको धारा 94 के अधीन समन या आदेश या धारा 95 की उपधारा (1) के अधीन अपेक्षा संबोधित की गई है या की जाती है, ऐसे समन या अपेक्षा द्वारा यथा अपेक्षित दस्तावेज या चीज पेश नहीं करेगा या हो सकता है कि पेश करे; या

ख. ऐसी दस्तावेज या चीज के बारे में न्यायालय को यह ज्ञात नहीं है कि वह किसी व्यक्ति के कब्जे में है; या

ग. न्यायालय यह समझता है कि इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के प्रयोजनों की पूर्ति साधारण तलाशी या निरीक्षण से होगी, वहां वह तलाशी वारंट जारी कर सकता है; और वह व्यक्ति, जिसे ऐसा वारंट निदिष्ट है, उसके अनुसार और इसमें इसके पश्चात् अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार तलाशी ले सकता है या निरीक्षण कर सकता है

2. यदि, न्यायालय ठीक समझता है, तो वह वारंट में उस विशिष्ट स्थान या उसके भाग को विनिर्दिष्ट कर सकता है और केवल उसी स्थान या भाग की तलाशी या निरीक्षण होगा; तथा वह व्यक्ति, जिसको ऐसे वारंट के निष्पादन का भार सौंपा जाता है, केवल उसी स्थान या भाग की तलाशी लेगा या निरीक्षण करेगा, जो ऐसे विनिर्दिष्ट है

3. इस धारा की कोई बात जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी मजिस्ट्रेट को डाक प्राधिकारी की अभिरक्षा में किसी दस्तावेज, पार्सल या अन्य चीज की तलाशी के लिए वारंट जारी करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी

97.उस स्थान की तलाशी, जिसमें चुराई हुई संपत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है

1. यदि जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलने पर और ऐसी जांच के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझे, यह विश्वास करने का कारण है कि कोई स्थान चुराई हुई संपत्ति के निक्षेप या विक्रय के लिए या किसी ऐसी आपत्तिजनक वस्तु के, जिसको यह धारा लागू होती है, निक्षेप, विक्रय या उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है, या कोई ऐसी आपत्तिजनक वस्तु किसी स्थान में निक्षिप्त है, तो वह कांस्टेबल की पंक्ति से ऊपर के किसी पुलिस अधिकारी को वारंट द्वारा यह प्राधिकार दे सकता है कि वह

क. उस स्थान में ऐसी सहायता के साथ, जैसी आवश्यक हो, प्रवेश करे ;

ख. वारंट में विनिर्दिष्ट रीति से उसकी तलाशी ले ;

ग. वहां पाई गई किसी भी संपत्ति या वस्तु को, जिसके चुराई हुई संपत्ति या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु, जिसको यह धारा लागू होती है, होने का उसे उचित संदेह है, कब्जे में ले;

घ. ऐसी संपत्ति या वस्तु को मजिस्ट्रेट के पास ले जाए या अपराधी को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाने तक उसको उसी स्थान पर पहरे में रखे या अन्यथा उसे किसी सुरक्षित स्थान में रखे ;

ङ. ऐसे स्थान में पाए गए ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को अभिरक्षा में ले और मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए, जिसके बारे में प्रतीत हो कि वह किसी ऐसी संपत्ति या वस्तु के निक्षेप, विक्रय या उत्पादन में यह जानते हुए या संदेह करने का कारण रखते हुए संसर्गी रहा है कि, यथास्थिति, वह चुराई हुई संपत्ति है या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु है, जिसको यह धारा लागू होती है

2. वे आपत्तिजनक वस्तुएं, जिनको यह धारा लागू होती है, निम्नलिखित हैं :- 

क. कूटकृत सिक्का;

ख. सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 (2011 का 11) के उल्लंघन में बनाए गए या सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन तत्समय प्रवृत्त किसी अधिसूचना के उल्लंघन में भारत में लाए गए धातु-खंड ;

ग. कूटकृत करेंसी नोट; कूटकृत स्टाम्प;

घ. कूटरचित दस्तावेज;

ङ. नकली मुद्राएं;

च. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 294 में निर्दिष्ट अश्लील वस्तुएं ;

छ. खंड () से () तक के खंडों में उल्लिखित वस्तुओं में से किसी के उत्पादन के लिए प्रयुक्त उपकरण या सामग्री

98. कुछ प्रकाशनों के समपहृत होने की घोषणा करने और उनके लिए तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति

1. जहां, राज्य सरकार को प्रतीत होता है कि-

क. किसी समाचारपत्र या पुस्तक में ; या

ख. किसी दस्तावेज मेंचाहे वह कहीं भी मुद्रित हुई हो, कोई ऐसी बात अंतर्विष्ट है जिसका प्रकाशन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 152 या धारा 196 या धारा 197 या धारा 294 या धारा 295 या धारा 299 के अधीन दंडनीय है, वहां राज्य सरकार, ऐसी बात अंतर्विष्ट करने वाले समाचारपत्र के अंक की प्रत्येक प्रति का और ऐसी पुस्तक या अन्य दस्तावेज की प्रत्येक प्रति का सरकार के पक्ष में समपहरण कर लिए जाने की घोषणा, अपनी राय के आधारों का कथन करते हुए, अधिसूचना द्वारा कर सकती है और तब भारत में, जहां भी वह मिले, कोई भी पुलिस अधिकारी उसे अभिगृहीत कर सकता है और कोई मजिस्ट्रेट, उप-निरीक्षक से अनिम्न पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को, किसी ऐसे परिसर में, जहां ऐसे किसी अंक की कोई प्रति या ऐसी कोई पुस्तक या अन्य दस्तावेज है या उसके होने का उचित संदेह है, प्रवेश करने और उसके लिए तलाशी लेने के लिए वारंट द्वारा प्राधिकृत कर सकता है

2. इस धारा में और धारा 99 में-

क. “समाचारपत्रऔरपुस्तक" के वे ही अर्थ होंगे, जो प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1867 (1867 का  25)में हैं,

ख. “दस्तावेजके अंतर्गत रंगचित्र रेखाचित्र या फोटोचित्र या अन्य दृश्यरूपण भी हैं

3. इस धारा के अधीन पारित किसी आदेश या की गई किसी कार्रवाई को किसी न्यायालय में धारा 99 के उपबंधों के अनुसार ही प्रश्नगत किया जाएगा अन्यथा नहीं

99. समपहरण की घोषणा को अपास्त करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन

1. किसी ऐसे समाचारपत्र, पुस्तक या अन्य दस्तावेज में, जिसके बारे में धारा 98 के अधीन समपहरण की घोषणा की गई है, कोई हित रखने वाला कोई व्यक्ति उस घोषणा के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से दो मास के भीतर उस घोषणा को इस आधार पर अपास्त कराने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन कर सकता है कि समाचारपत्र के उस अंक या उस पुस्तक या अन्य दस्तावेज में, जिसके बारे में वह घोषणा की गई थी, कोई ऐसी बात अंतर्विष्ट नहीं जो धारा 98 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट है

2. जहां उच्च न्यायालय में तीन या अधिक न्यायाधीश हैं, वहां ऐसा प्रत्येक आवेदन उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों से बनी विशेष न्यायपीठ द्वारा सुना और अवधारित किया जाएगा और जहां उच्च न्यायालय में तीन से कम न्यायाधीश हैं वहां ऐसी विशेष न्यायपीठ में उस उच्च न्यायालय के सब न्यायाधीश होंगे

3. किसी समाचारपत्र के संबंध में ऐसे किसी आवेदन की सुनवाई में, उस समाचारपत्र में, जिसकी बाबत समपहरण की घोषणा की गई थी, अंतर्विष्ट शब्दों, चिह्नों या दृश्यरूपणों की प्रकृति या प्रवृत्ति के सबूत में सहायता के लिए उस समाचारपत्र की कोई प्रति साक्ष्य में दी जा सकती है

4. यदि उच्च न्यायालय का इस बारे में समाधान नहीं होता है कि समाचारपत्र के उस अंक में या उस पुस्तक या अन्य दस्तावेज में, जिसके बारे में वह आवेदन किया गया है, कोई ऐसी बात अंतर्विष्ट है जो धारा 98 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट है, तो वह समपहरण की घोषणा को अपास्त कर देगा

5. जहां उन न्यायाधीशों में, जिनसे विशेष न्यायपीठ बनी है, मतभेद है वहां विनिश्चय उन न्यायाधीशों की बहुसंख्या की राय के अनुसार होगा

100. सदोष परिरुद्ध व्यक्तियों के लिए तलाशी

यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों में परिरुद्ध है, जिनमें वह परिरोध अपराध की कोटि में आता है, तो वह तलाशी वारंट जारी कर सकता है और वह व्यक्ति, जिसको ऐसा वारंट निदिष्ट किया जाता है, ऐसे परिरुद्ध व्यक्ति के लिए तलाशी ले सकता है, और ऐसी तलाशी तद्रुसार ही ली जाएगी और यदि वह व्यक्ति मिल जाए, तो उसे तुरंत मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाया जाएगा, जो ऐसा आदेश करेगा जैसा उस मामले की परिस्थितियों में उचित प्रतीत हो

101. अपहृत स्त्रियों को वापस करने के लिए विवश करने की शक्ति

किसी महिला या किसी बालिका के किसी विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए अपहृत किए जाने या विधिविरुद्ध निरुद्ध रखे जाने का शपथ पर परिवाद किए जाने की दशा में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट यह आदेश कर सकता है कि उस महिला को तुरंत स्वतंत्र किया जाए या वह बालिका उसके माता-पिता, संरक्षक या अन्य व्यक्ति को, जो उस बालिका का विधिपूर्ण भारसाधक है, तुरंत वापस कर दी जाए और ऐसे आदेश का अनुपालन ऐसे बल के प्रयोग द्वारा, जैसा आवश्यक हो, करा सकता है

. - तलाशी संबंधी साधारण उपबंध

102.  तलाशी वारंटों का निदेशन आदि

धारा 32, धारा 72, धारा 74, धारा 76, धारा 79, धारा 80 और धारा 81 के उपबंध, जहां तक हो सके, उन सब तलाशी वारंटों को लागू होंगे जो धारा 96, धारा 97, धारा 98 या धारा 100 के अधीन जारी किए जाते हैं

103. बंद स्थान के भारसाधक व्यक्ति तलाशी लेने देंगे

1. जब कभी इस अध्याय के अधीन तलाशी लिए जाने या निरीक्षण किए जाने वाला कोई स्थान बंद है तब उस स्थान में निवास करने वाला या उसका भारसाधक व्यक्ति उस अधिकारी या अन्य व्यक्ति की, जो वारंट का निष्पादन कर रहा है, मांग पर और वारंट के पेश किए जाने पर उसे उसमें अबाध प्रवेश करने देगा और वहां तलाशी लेने के लिए सब उचित सुविधाएं देगा

2. यदि उस स्थान में इस प्रकार प्रवेश प्राप्त नहीं हो सकता है तो वह अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जो वारंट का निष्पादन कर रहा है धारा 44 की उपधारा (2) द्वारा उपबंधित रीति से कार्यवाही कर सकेगा

3. जहां किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में, जो ऐसे स्थान में या उसके आसपास है, उचित रूप से यह संदेह किया जाता है कि वह अपने शरीर पर कोई ऐसी वस्तु छिपाए हुए है जिसके लिए तलाशी ली जानी चाहिए तो उस व्यक्ति की तलाशी ली जा सकती है और यदि वह व्यक्ति महिला है, तो तलाशी शिष्टता का पूर्ण ध्यान रखते हुए अन्य महिला द्वारा ली जाएगी

4. इस अध्याय के अधीन तलाशी लेने के पूर्व ऐसा अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जब तलाशी लेने ही वाला हो, तलाशी में हाजिर रहने और उसके साक्षी बनने के लिए उस मुहल्ले के, जिसमें तलाशी लिया जाने वाला स्थान है, दो या अधिक स्वतंत्र और प्रतिष्ठित निवासियों को या यदि उक्त मुहल्ले का ऐसा कोई निवासी नहीं मिलता है या उस तलाशी का साक्षी होने के लिए रजामंद नहीं है तो किसी अन्य मुहल्ले के ऐसे निवासियों को बुलाएगा और उनको या उनमें से किसी को ऐसा करने के लिए लिखित आदेश जारी कर सकेगा

5. तलाशी उनकी उपस्थिति में ली जाएगी और ऐसी तलाशी के अनुक्रम में अभिगृहीत सब चीजों की और जिन-जिन स्थानों में वे पाई गई हैं उनकी सूची ऐसे अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा तैयार की जाएगी और ऐसे साक्षियों द्वारा उस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, किंतु इस धारा के अधीन तलाशी के साक्षी बनने वाले किसी व्यक्ति से, तलाशी के साक्षी के रूप में न्यायालय में हाजिर होने की अपेक्षा उस दशा में ही की जाएगी जब वह न्यायालय द्वारा विशेष रूप से समन किया गया हो

6. तलाशी लिए जाने वाले स्थान के अधिभोगी को या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को तलाशी के दौरान हाजिर रहने की अनुज्ञा प्रत्येक दशा में दी जाएगी और इस धारा के अधीन तैयार की गई उक्त साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित सूची की एक प्रतिलिपि ऐसे अधिभोगी या ऐसे व्यक्ति को परिदत्त की जाएगी

7. जब किसी व्यक्ति की तलाशी उपधारा (3) के अधीन ली जाती है तब कब्जे में ली गई सब चीजों की सूची तैयार की जाएगी और उसकी एक प्रतिलिपि ऐसे व्यक्ति को परिदत्त की जाएगी

8. कोई व्यक्ति जो इस धारा के अधीन तलाशी में हाजिर रहने और साक्षी बनने के लिए ऐसे लिखित आदेश द्वारा, जो उसे परिदत्त या निविदत्त किया गया है, बुलाए जाने पर, ऐसा करने से उचित कारण के बिना इंकार या उसमें उपेक्षा करेगा, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 222 के अधीन अपराध किया है

 104.अधिकारिता के परे तलाशी में पाई गई चीजों का व्ययन

जब तलाशी वारंट को किसी ऐसे स्थान में निष्पादित करने में, जो उस न्यायालय की जिसने उसे जारी किया है, स्थानीय अधिकारिता से परे है, उन चीजों में से, जिनके लिए तलाशी ली गई है, कोई चीजें पाई जाएं तब वे चीजें, इसमें इसके पश्चात् अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन तैयार की गई, उनकी सूची के सहित उस न्यायालय के समक्ष, जिसने वारंट जारी किया था तुरंत ले जाई जाएंगी किंतु यदि वह स्थान ऐसे न्यायालय की अपेक्षा उस मजिस्ट्रेट के अधिक समीप है, जो वहां अधिकारिता रखता है, तो सूची और चीजें उस मजिस्ट्रेट के समक्ष तुंरत ले जाई जाएंगी और जब तक तत्प्रतिकूल अच्छा कारण हो, वह मजिस्ट्रेट उन्हें ऐसे न्यायालय के पास ले जाने के लिए प्राधिकृत करने का आदेश देगा

- प्रकीर्ण

105.श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से तलाशी और अभिग्रहण का अभिलेख करना

इस अध्याय या धारा 185 के अधीन किसी संपत्ति, वस्तु या चीज के स्थान की तलाशी करने या कब्जे में लेने की प्रक्रिया जिसके अंतर्गत ऐसे तलाशी और अभिग्रहण के में सभी अभिगृहीत वस्तुओं की सूची तैयार करना और साक्षियों द्वारा ऐसी अनुक्रम सूची पर हस्ताक्षर करना किसी श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से मोबाइल फोन को वरीयता देते हुए अभिलिखित किया जाएगा और पुलिस अधिकारी देर किए बिना यथास्थिति जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को ऐसे अभिलेखन को भेजेगा |

106. कुछ संपत्ति को अभिगृहीत करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति

1. कोई पुलिस अधिकारी किसी ऐसी संपत्ति को अभिगृहीत कर सकता है जिसके बारे में यह अभिकथन या संदेह है कि वह चुराई हुई है या जो ऐसी परिस्थितियों में पाई जाती है, जिनसे किसी अपराध के किए जाने का संदेह हो

2. यदि ऐसा पुलिस अधिकारी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के अधीनस्थ है तो वह उस अधिग्रहण की रिपोर्ट उस अधिकारी को तत्काल देगा |

3. उपधारा (1) के अधीन कार्य करने वाला प्रत्येक पुलिस अधिकारी अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट को अभिग्रहण की रिपोर्ट तुरंत देगा और जहां अभिगृहीत संपत्ति ऐसी है कि वह सुगमता से न्यायालय में नहीं लाई जा सकती है या जहां ऐसी संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उचित स्थान प्राप्त करने में कठिनाई है, या जहां अन्वेषण के प्रयोजन के लिए संपत्ति को पुलिस अभिरक्षा में निरंतर रखा जाना आवश्यक नहीं समझा जाता है वहां वह उस संपत्ति को किसी ऐसे व्यक्ति की अभिरक्षा में देगा जो यह वचनबंध करते हुए बंधपत्र निष्पादित करे की वह संपत्ति को जब कभी अपेक्षा की जाए तब न्यायलय के समक्ष पेश करेगा और उसके व्ययन की बाबत न्यायालय के अतिरिक्त आदेशों का पालन करेगा :

परंतु जहां उपधारा (1) के अधीन अभिगृहीत की गई संपत्ति शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील हो और यदि ऐसी संपत्ति के कब्जे का हकदार व्यक्ति अज्ञात है या अनुपस्थित है और ऐसी संपत्ति का मूल्य पांच सौ रुपए से कम है, तो उसका पुलिस अधीक्षक के आदेश से तत्काल नीलामी द्वारा विक्रय किया जा सकेगा धारा 503 और धारा 504 के उपबंध, यथासाध्य निकटतम रूप में, ऐसे विक्रय के शुद्ध आगमों को लागू होंगे

107. संपत्ति की कुर्की जब्ती या वापसी

1. जहां कोई पुलिस अधिकारी को अन्वेषण करते समय यह विश्वास करने का कारण है कि कोई संपत्ति प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः किसी अपराधी क्रियाकलाप के परिणामस्वरूप या किसी अपराध के कारित करने से व्युत्पन्न होती है या प्राप्त की जाती है तो वह, यथास्थिति, पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त के अनुमोदन से ऐसी संपत्ति की कुर्की के लिए मामले का विचारण करने के लिए अपराध का संज्ञान करने या सुपुर्द करने के लिए अधिकारिता का प्रयोग करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को आवेदन दे सकेगा।

2. यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट को साक्ष्य लेने के पूर्व या पश्चात् यह विश्वास करने का कारण है कि सभी या ऐसी संपत्तियों में से कोई अपराध के लिए प्रयुक्त की जाती है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को चौदह दिनों के भीतर कारण दर्शित करने के लिए नोटिस जारी कर सकेगा कि क्यों कुर्की का आदेश की जाए

3. जहां उपधारा (2) के अधीन किसी व्यक्ति को जारी किया गया नोटिस किसी ऐसी संपत्ति को विनिर्दिष्ट करता है जो कि किसी ऐसे व्यक्ति के निमित्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारित की जा रही है तो ऐसे नोटिस की एक प्रति ऐसे अन्य व्यक्ति को भी तामील की जा सकेगी

4. न्यायालय या मजिस्ट्रेट, स्पष्टीकरण, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात् उपधारा (2) के अधीन कारण बताओ नोटिस जारी कर सकेगा और ऐसे न्यायालय या मजिस्ट्रेट अपने समक्ष उपलब्ध तात्विक तथ्य को तथा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् ऐसी संपत्तियों के संबंध में, जो अपराध का आगम होना पाई जाती हैं, कुर्की का आदेश पारित कर सकेगा :

परंतु यदि ऐसा व्यक्ति कारण बताओ नोटिस में विनिर्दिष्ट चौदह दिनों की अवधि के भीतर न्यायालय या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित नहीं होता है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट एक पक्षीय आदेश पारित कर सकेगा

5. उपधारा (2) अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट की यह राय है कि उक्त उपधारा के अधीन नोटिस के जारी होने से कुर्की या अधिग्रहण का उद्देश्य विफल हो जाएगा तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसी संपत्ति की सीधे कुर्की या अधिग्रहण का एक पक्षीय अंतरिम आदेश पारित कर सकेगा और ऐसा आदेश उपधारा ( 6 ) के अधीन आदेश पारित करने तक प्रवृत्त रहेगा

6.यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट यह पाता है कि कुर्क या अभिगृहीत संपत्ति अपराध का आगम है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट आदेश द्वारा जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे व्यक्तियों को, जो ऐसे अपराध से प्रभावित हुए हों अपराध के ऐसे आगमों को आनुपातिक रूप में वितरित करने का निदेश दे सकेगा

7. उपधारा (6) के अधीन पारित किसी आदेश की प्राप्ति पर जिला मजिस्ट्रेट साठ दिन की अवधि के भीतर अपराध के आगमों को या तो स्वयं वितरण करेगा या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को ऐसे वितरण को करने के लिए प्राधिकृत करेगा

8. यदि ऐसे आगमों को प्राप्त करने के लिए कोई दावेदार नहीं है या कोई दावेदार अभिनिश्चय योग्य नहीं है या दावेदारों के समाधान के पश्चात् कोई अधिशेष है तो अपराध के ऐसे आगमों को सरकार समपहृत कर लेगी।

108. मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है

कोई मजिस्ट्रेट किसी स्थान की, जिसकी तलाशी के लिए वह तलाशी वारंट जारी करने के लिए सक्षम है, अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है |

109.पेश की गई दस्तावेज आदि,को  परिबद्ध करने की शक्ति

यदि कोई न्यायालय ठीक समझता है, तो वह किसी दस्तावेज या चीज को, जो इस संहिता के अधीन उसके समक्ष पेश की गई है, परिबद्ध कर सकता है

110. आदेशिकाओं के बारे में  व्यतिकारी व्यवस्था

1. जहां उन राज्यक्षेत्रों का कोई न्यायालय, जिन पर इस संहिता का विस्तार है (जिन्हें इसके पश्चात् इस धारा में उक्त राज्यक्षेत्र कहा गया है) यह चाहता है कि

क. किसी अभियुक्त व्यक्ति के नाम किसी समन की ; या

ख. किसी अभियुक्त व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट की ; या

ग. किसी व्यक्ति के नाम यह अपेक्षा करने वाले ऐसे किसी समन की कि वह किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करे, या हाजिर हो और उसे पेश करे; या

घ. किसी तलाशी वारंट की, जो उस न्यायालय द्वारा जारी किया गया है, तामील या निष्पादन किसी ऐसे स्थान में किया जाए जो-

i. उक्त राज्यक्षेत्रों के बाहर भारत में किसी राज्य या क्षेत्र के न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के भीतर है, वहां वह ऐसे समन या वारंट की तामील या निष्पादन के लिए, दो प्रतियों में, उस न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के पास डाक द्वारा या अन्यथा भेज सकता है; और जहां खंड () या खंड () में निर्दिष्ट किसी समन की तामील इस प्रकार कर दी गई है वहां धारा 70 के उपबंध उस समन के संबंध में ऐसे लागू होंगे, मानो जिस न्यायालय को वह भेजा गया है उसका पीठासीन अधिकारी उक्त राज्यक्षेत्रों में मजिस्ट्रेट है;

ii. भारत के बाहर किसी ऐसे देश या स्थान में है, जिसकी बाबत केंद्रीय सरकार द्वारा, दांडिक मामलों के संबंध में समन या वारंट की तामील या निष्पादन के लिए ऐसे देश या स्थान की सरकार के (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् संविदाकारी राज्य कहा गया है) साथ व्यवस्था की गई है, वहां वह ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को निर्दिष्ट ऐसे समन या वारंट को दो प्रतियों में, ऐसे प्ररूप में और पारेषण के लिए ऐसे प्राधिकारी को भेजेगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे

2. जहां उक्त राज्यक्षेत्रों के न्यायालय को

क. किसी अभियुक्त व्यक्ति के नाम कोई समन ; या

ख. किसी अभियुक्त व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए कोई वारंट ; या

ग. किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा करने वाला ऐसा कोई समन कि वह कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करे या हाजिर हो और उसे पेश करे ; या

घ. कोई तलाशी वारंट,

जो निम्नलिखित में से किसी के द्वारा जारी किया गया है :-

I. उक्त राज्यक्षेत्रों के बाहर भारत में किसी राज्य या क्षेत्र के न्यायालय ;

II. किसी संविदाकारी राज्य का कोई न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, तामील या निष्पादन के लिए प्राप्त होता है, वहां वह उसकी तामील या निष्पादन ऐसे कराएगा मानो वह ऐसा समन या वारंट है जो उसे उक्त राज्यक्षेत्रों के किसी अन्य न्यायालय से अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर तामील या निष्पादन के लिए प्राप्त हुआ है; और जहां-

(i) गिरफ्तारी का वारंट निष्पादित कर दिया जाता है, वहां गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के बारे में कार्यवाही यथासंभव धारा 82 और धारा 83 द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी ;

(ii) तलाशी - वारंट निष्पादित कर दिया जाता है वहां तलाशी में पाई गई चीजों के बारे में कार्यवाही यथासंभव धारा 104 में विहित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी :

परंतु उस मामले में, जहां संविदाकारी राज्य से प्राप्त समन या तलाशी वारंट का निष्पादन कर दिया गया है, तलाशी में पेश किए गए दस्तावेज या चीजें या पाई गई चीजें, समन या तलाशी वारंट जारी करने वाले न्यायालय की, ऐसे प्राधिकारी की मार्फत अग्रेषित की जाएंगी जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे

 

 

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