
1. यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति-
क. अपनी पत्नी का, जो अपना भरणपोषण करने में असमर्थ है ; या
ख. अपनी धर्मज या अधर्मज संतान का चाहे विवाहित हो या न हो, जो अपना भरणपोषण करने में असमर्थ है; या
ग. अपनी धर्मज या अधर्मज संतान का ( जो विवाहित पुत्री नहीं है), जिसने वयस्कता प्राप्त कर ली है, जहां ऐसी संतान किसी शारीरिक या मानसिक असामान्यता या क्षति के कारण अपना भरणपोषण करने में असमर्थ है; या
घ. अपने पिता या माता का, जो अपना भरणपोषण करने में असमर्थ है, भरणपोषण करने में उपेक्षा करता है या भरणपोषण करने से इंकार करता है तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, ऐसी उपेक्षा या इंकार के साबित हो जाने पर, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश दे सकता है कि वह अपनी पत्नी या ऐसी संतान, पिता या माता के भरणपोषण के लिए ऐसी मासिक दर पर, जिसे मजिस्ट्रेट ठीक समझे, मासिक भत्ता दे और उस भत्ते का संदाय ऐसे व्यक्ति को करे जिसको संदाय करने का मजिस्ट्रेट समय-समय पर निदेश दे :
परंतु मजिस्ट्रेट खंड (ख) में निर्दिष्ट पुत्री के पिता को निदेश दे सकता है कि वह उस समय तक ऐसा भत्ता दे जब तक वह वयस्क नहीं हो जाती है यदि मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि ऐसी पुत्री के, यदि वह विवाहित हो, पति के पास पर्याप्त साध नहीं है :
परंतु यह और कि मजिस्ट्रेट, इस उपधारा के अधीन भरणपोषण के लिए मासिक भत्ते के संबंध में कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान ऐसे व्यक्ति को यह आदेश दे सकता है कि वह अपनी पत्नी या ऐसी संतान, पिता या माता के अंतरिम भरणपोषण के लिए मासिक भत्ता और ऐसी कार्यवाही का व्यय दे जिसे मजिस्ट्रेट उचित समझे और ऐसे व्यक्ति को उसका संदाय करे, जिसको संदाय करने का मजिस्ट्रेट, समय-समय पर निदेश दे :
परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक के अधीन अंतरिम भरणपोषण के लिए मासिक भत्ते और कार्यवाही के व्ययों का कोई आवेदन, यथासंभव ऐसे व्यक्ति पर आवेदन की सूचना की तामील की तारीख से साठ दिन के भीतर निपटाया जाएगा।
इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए "पत्नी" के अंतर्गत ऐसी महिला भी है, जिसके पति ने उससे विवाह विच्छेद कर लिया है या जिसने अपने पति से विवाह - विच्छेद कर लिया है और जिसने पुनर्विवाह नहीं किया है ।
2. भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए ऐसा कोई भत्ता और कार्यवाही के लिए व्यय, आदेश की तारीख से, या, यदि ऐसा आदेश दिया जाता है तो, यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण और कार्यवाही के व्ययों के लिए आवेदन की तारीख से संदेय होंगे ।
3. यदि कोई व्यक्ति जिसे आदेश दिया गया हो, उस आदेश का अनुपालन करने में पर्याप्त कारण के बिना असफल रहता है तो उस आदेश के प्रत्येक भंग के लिए ऐसा कोई मजिस्ट्रेट देय रकम के ऐसी रीति से उद्गृहीत किए जाने के लिए वारंट जारी कर सकता है जैसी रीति जुर्माने उद्गृहीत करने के लिए उपबंधित है, और उस वारंट के निष्पादन के पश्चात् प्रत्येक मास के न चुकाए गए यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए पूरे भत्ते और कार्यवाही के व्यय या उसके किसी भाग के लिए ऐसे व्यक्ति को एक मास तक की अवधि के लिए, या यदि वह उससे पूर्व चुका दिया जाता है तो चुका देने के समय तक के लिए, कारावास का दंडादेश दे सकता है:
परंतु इस धारा के अधीन देय किसी रकम की वसूली के लिए कोई वारंट तब तक जारी न किया जाएगा जब तक उस रकम को उद्गृहीत करने के लिए, उस तारीख से जिसको वह देय हुई एक वर्ष की अवधि के अंदर न्यायालय से आवेदन नहीं किया गया है :
परंतु यह और कि यदि ऐसा व्यक्ति इस शर्त पर भरणपोषण करने की प्रस्थापना करता है कि उसकी पत्नी उसके साथ रहे और वह पति के साथ रहने से इंकार करती है तो ऐसा मजिस्ट्रेट उसके द्वारा कथित इंकार के किन्हीं आधारों पर विचार कर सकता है और ऐसी प्रस्थापना के किए जाने पर भी वह इस धारा के अधीन आदेश दे सकता है यदि उसका समाधान हो जाता है कि ऐसा आदेश देने के लिए न्यायसंगत आधार है ।
यदि पति जारता की दशा में रह रही है या पर्याप्त कारण के बिना अपने पति के साथ रहने से इंकार करती है या वे पारस्परिक सम्मति से पृथक् रह रहे हैं ।
1. किसी व्यक्ति के विरुद्ध धारा 144 के अधीन कार्यवाही किसी ऐसे जिले में की जा सकती है—
क. जहां वह है ; या
ख. जहां वह या उसकी पत्नी निवास करती है; या
ग. जहां उसने अंतिम बार, यथास्थिति, अपनी पत्नी के साथ या अधर्मज संतान की माता के साथ निवास किया है; या
घ. जहां उसका पिता निवास करता है या उसकी माता निवास करती है ।
2. ऐसी कार्यवाही में सब साक्ष्य ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति में, जिसके विरुद्ध भरणपोषण के लिए संदाय का आदेश देने की प्रस्थापना है, या जब उसकी वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे दी गई है तब उसके अधिवक्ता की उपस्थिति में लिया जाएगा और उस रीति से अभिलिखित किया जाएगा जो समन मामलों के लिए विहित है :
परंतु यदि मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाए कि ऐसा व्यक्ति जिसके विरुद्ध भरणपोषण के लिए संदाय का आदेश देने की प्रस्थापना है, तामील से जानबूझकर बच रहा है या न्यायालय में हाजिर होने में जानबूझकर उपेक्षा कर रहा है तो मजिस्ट्रेट मामले को एकपक्षीय रूप में सुनने और अवधारण करने के लिए अग्रसर हो सकता है और ऐसे दिया गया कोई आदेश उसकी तारीख से तीन मास के अंदर किए गए आवेदन पर दर्शित अच्छे कारण से ऐसे निबंधनों के अधीन जिनके अंतर्गत विरोधी पक्षकार को खर्चे के संदाय के बारे में ऐसे निबंधन भी हैं जो मजिस्ट्रेट न्यायोचित और उचित समझें, अपास्त किया जा सकता है ।
3. धारा 144 के अधीन आवेदनों पर कार्यवाही करने में न्यायालय को शक्ति होगी कि वह खर्चों के बारे में ऐसा आदेश दे जो न्यायसंगत है ।
1. धारा 144 के अधीन भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए मासिक भत्ता पाने वाले या, यथास्थिति, अपनी पत्नी, संतान, पिता या माता को भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए मासिक भत्ता देने के लिए उसी धारा के अधीन आदिष्ट किसी व्यक्ति की परिस्थितियों में तब्दीली साबित हो जाने पर मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए भत्ते में ऐसा परिवर्तन कर सकता है, जो वह ठीक समझे ।
2. जहां मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि धारा 144 के अधीन दिया गया कोई आदेश किसी सक्षम सिविल न्यायालय के किसी विनिश्चय के परिणामस्वरूप रद्द या परिवर्तित किया जाना चाहिए वहां वह यथास्थिति, उस आदेश को तद्रुसार रद्द कर देगा या परिवर्तित कर देगा ।
3. जहां धारा 144 के अधीन कोई आदेश ऐसी महिला के पक्ष में दिया गया है जिसके पति ने उससे विवाह विच्छेद कर लिया है या जिसने अपने पति से विवाह विच्छेद प्राप्त कर लिया है वहां यदि मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि-
क. उस महिला ने ऐसे विवाह विच्छेद की तारीख के पश्चात् पुनः विवाह कर लिया है, तो वह ऐसे आदेश को उसके पुनर्विवाह की तारीख से रद्द कर देगा ;
ख. उस महिला के पति ने उससे विवाह विच्छेद कर लिया है और उस महिला ने उक्त आदेश के पूर्व या पश्चात् वह पूरी धनराशि प्राप्त कर ली है जो पक्षकारों को लागू किसी रूढिजन्य या स्वीय विधि के अधीन ऐसे विवाह विच्छेद पर देय थी तो वह ऐसे आदेश को,-
i. उस दशा में जिसमें ऐसी धनराशि ऐसे आदेश से पूर्व दे दी गई थी उस आदेश के दिए जाने की तारीख से रद्द कर देगा ;
ii. किसी अन्य दशा में उस अवधि की, यदि कोई हो, जिसके लिए पति द्वारा उस महिला को वास्तव में भरणपोषण दिया गया है, समाप्ति की तारीख से रद्द कर देगा
ग. उस महिला ने अपने पति से विवाह विच्छेद प्राप्त कर लिया है और उसने अपने विवाह विच्छेद के पश्चात् अपने यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के आधारों का स्वेच्छा से अभ्यर्पण कर दिया था, तो वह आदेश को उसकी तारीख से रद्द कर देगा ।
4. किसी भरणपोषण या दहेज की, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे धारा 144 के अधीन भरणपोषण और अंतरिम भरणपोषण या उनमें से किसी के लिए कोई मासिक भत्ता संदाय किए जाने का आदेश दिया गया है, वसूली के लिए डिक्री करने के समय सिविल न्यायालय उस राशि की भी गणना करेगा जो ऐसे आदेश के अनुसरण में, यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण या उनमें से किसी के लिए मासिक भत्ते के रूप में उस व्यक्ति को संदाय की जा चुकी है या उस व्यक्ति द्वारा वसूल की जा चुकी है ।
यथास्थिति, भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण और कार्यवाहियों के व्ययों के आदेश की प्रति उस व्यक्ति को, जिसके पक्ष में वह दिया गया है या उसके संरक्षक को, यदि कोई हो, या उस व्यक्ति को, जिसे, यथास्थिति, भरणपोषण के लिए भत्ता या अंतरिम भरणपोषण के लिए भत्ता और कार्यवाही के लिए व्यय दिया जाना है निःशुल्क दी जाएगी और ऐसे आदेश का प्रवर्तन किसी ऐसे स्थान में, जहां वह व्यक्ति है, जिसके विरुद्ध वह आदेश दिया गया था, किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पक्षकारों को पहचान के बारे में और, यथास्थिति, देय भत्ते या व्ययों के न दिए जाने के बारे में ऐसे मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाने पर किया जा सकता है।