धारा 453 से 477 अध्याय 34 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 453 से 477 अध्याय 34 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

अध्याय 34

दंडादेशों का निष्पादन, निलंबन, परिहार और लघुकरण 

- मृत्यु दंडादेश

453.धारा 409 के अधीन दिए गए आदेश का निष्पादन

जब मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्तुत किसी मामले में, सेशन न्यायालय को उस पर उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि का आदेश या अन्य आदेश प्राप्त होता है, तो वह वारंट जारी करके या अन्य ऐसे कदम उठाकर, जो आवश्यक हों, उस आदेश को क्रियान्वित कराएगा

454. उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्यु दंडादेश का निष्पादन

जब अपील में या पुनरीक्षण में उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया जाता है, तब सेशन न्यायालय, उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने पर वारंट जारी करके दंडादेश को क्रियान्वित कराएगा

455. उच्चतम न्यायालय को अपील की दशा में मृत्यु दंडादेश के निष्पादन का मुल्तवी किया जाना

1. जहां किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है। और उसके निर्णय के विरुद्ध कोई अपील संविधान के अनुच्छेद 134 के खंड (1) के उपखंड () या उपखंड () के अधीन उच्चतम न्यायालय को होती है, वहां उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन तब तक के लिए मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा, जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त नहीं हो जाती है या यदि उस अवधि के भीतर कोई अपील की गई है, तो जब तक उस अपील का निपटारा नहीं हो जाता है

2. जहां उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है या उसकी पुष्टि की गई है, और दंडादिष्ट व्यक्ति, संविधान के अनुच्छेद 132 के अधीन या अनुच्छेद 134 के खंड (1) के उपखंड () के अधीन प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए उच्च न्यायालय से आवेदन करता है, तो उच्च न्यायालय, दंडादेश का निष्पादन तब तक के लिए मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा, जब तक उस आवेदन का उच्च न्यायालय द्वारा निपटारा नहीं हो जाता है या यदि ऐसे आवेदन पर कोई प्रमाणपत्र दिया गया है, तो जब तक उस प्रमाणपत्र पर उच्चतम न्यायालय को अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त नहीं हो जाती है

3. जहां उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है या उसकी पुष्टि की गई है और उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि दंडादिष्ट व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन अपील के लिए विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका पेश करना चाहता है, वहां उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन इतनी अवधि तक के लिए, जितनी वह ऐसी याचिका पेश करने के लिए पर्याप्त समझे, मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा

456. गर्भवती महिला को मृत्यु दंड का किया लघुकरण जाना

यदि कोई स्त्री, जिसे मृत्यु दंडादेश दिया गया है, गर्भवती पाई जाती है तो उच्च न्यायालय दंडादेश को आजीवन कारावास के रूप में लघुकरण कर देगा

- कारावास

457.कारावास का स्थान नियत करने की शक्ति

1. तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, राज्य सरकार यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को, जो इस संहिता के अधीन कारावासित किए जाने या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किए जाने के लिए दायी है, किस स्थान में परिरुद्ध किया जाएगा

2. यदि कोई व्यक्ति, जो इस संहिता के अधीन कारावासित किए जाने या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किए जाने के लिए दायी है, सिविल जेल में परिरुद्ध है तो कारावास या सुपुर्दगी के लिए आदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को दांडिक जेल में भेजे जाने का निदेश दे सकेगा

3. जब कोई व्यक्ति उपधारा (2) के अधीन दांडिक जेल में भेजा जाता है तब, वहां से छोड़ दिए जाने पर उसे सिविल जेल को लौटाया जाएगा जब तक कि उसे या तो-

क. दांडिक जेल में उसके भेजे जाने से तीन वर्ष बीत गए हैं, उस दशा में वह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का  5) की धारा 58 के अधीन सिविल जेल से छोड़ा गया समझा जाएगा; या

ख. सिविल जेल में उसके कारावास का आदेश देने वाले न्यायालय द्वारा दांडिक जेल के भारसाधक अधिकारी को यह प्रमाणित करके भेज दिया गया है कि वह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का  5) की धारा 58 के अधीन छोड़े जाने का हकदार है

458. कारावास के दंडादेश का निष्पादन

1. जहां धारा 453 द्वारा उपबंधित उन मामलों से भिन्न मामलों में अभियुक्त आजीवन कारावास या किसी अवधि के कारावास के लिए दंडादिष्ट किया गया है, वहां दंडादेश देने वाला न्यायालय उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध है या उसे परिरुद्ध किया जाना है तत्काल वारण्ट भेजेगा और यदि अभियुक्त पहले से ही उस जेल या अन्य स्थान में परिरुद्ध नहीं है तो वारंट के साथ उसे ऐसी जेल या अन्य स्थान को भिजवाएगा :

परन्तु जहां अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक के लिए कारावास का दंडादेश दिया गया है, वहां वारण्ट तैयार करना या वारण्ट जेल को भेजना आवश्यक नहीं होगा और अभियुक्त को ऐसे स्थान में, जो न्यायालय निदिष्ट करे, परिरुद्ध किया जा सकेगा|

2. जहां अभियुक्त न्यायालय में उस समय उपस्थित नहीं है, जब उसे ऐसे कारावास का दंडादेश दिया गया है, जैसा उपधारा (1) में उल्लिखित है, वहां न्यायालय उसे जेल या ऐसे अन्य स्थान में, जहां उसे परिरुद्ध किया जाना है, भेजने के प्रयोजन से उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करेगा और ऐसे मामले में दंडादेश उसकी गिरफ्तारी की तारीख से प्रारंभ होगा

459.निष्पादन के लिए वारण्ट का निदेशन

कारावास के दंडादेश के निष्पादन के लिए प्रत्येक वारण्ट उस जेल या अन्य स्थान के भारसाधक अधिकारी को निदिष्ट होगा, जिसमें बंदी परिरुद्ध है या परिरुद्ध किया जाना है

460. वारण्ट किसको सौंपा जाएगा

जब बंदी जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तब वारण्ट जेलर को सौंपा जाएगा

- जुर्माने का उद्ग्रहण

461. जुर्माना उद्गृहीत करने के लिए वारण्ट

1. जब किसी अपराधी को जुर्माने का संदाय करने के लिए दंडादेश दिया गया है, किन्तु ऐसा संदाय नहीं किया गया है, तब दंडादेश देने वाला न्यायालय निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों प्रकार से जुर्माने की वसूली के लिए कार्रवाई कर सकेगा, अर्थात् वह,-

क. अपराधी की किसी जंगम संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा रकम को उद्गृहीत करने के लिए वारण्ट जारी कर सकेगा,

ख. व्यतिक्रमी की जंगम या स्थावर संपत्ति या दोनों से भू-राजस्व की बकाया के रूप में रकम को उद्गृहीत करने के लिए जिले के कलक्टर को प्राधिकृत करते हुए उसे वारंट जारी कर सकेगा :

परन्तु यदि दंडादेश निदिष्ट करता है कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर अपराधी कारावासित किया जाएगा और यदि अपराधी ने व्यतिक्रम के बदले में ऐसा पूरा कारावास भुगत लिया है तो कोई न्यायालय ऐसा वारण्ट तब तक नहीं जारी करेगा जब तक वह विशेष कारण जो अभिलिखित किए जाएं, ऐसा करना आवश्यक समझे या जब तक उसने जुर्माने में से व्यय या प्रतिकर के संदाय के लिए धारा 395 के अधीन आदेश किया हो

2.   राज्य सरकार, उस रीति को विनियमित करने के लिए, जिससे उपधारा (1) के खंड () के अधीन वारंट निष्पादित किए जाने हैं और ऐसे वारण्ट के निष्पादन में कुर्क की गई किसी संपत्ति के बारे में अपराधी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किन्हीं दावों के संक्षिप्त अवधारण के लिए, नियम बना सकेगी

3. जहां न्यायालय, कलक्टर को उपधारा (1) के खंड () के अधीन वारण्ट जारी करता है वहां कलक्टर उस रकम को भू-राजस्व की बकाया की वसूली से संबंधित विधि के अनुसार वसूल करेगा मानो ऐसा वारण्ट ऐसी विधि के अधीन जारी किया गया प्रमाणपत्र हो :

परन्तु ऐसा कोई वारण्ट अपराधी की गिरफ्तारी या कारावास में निरोध द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा

462.ऐसे वारण्ट का प्रभाव

किसी न्यायालय द्वारा धारा 461 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन जारी किया गया कोई वारण्ट उस न्यायालय को स्थानीय अधिकारिता के भीतर निष्पादित किया जा सकेगा और वह ऐसी अधिकारिता के बाहर की किसी ऐसी संपत्ति की कुर्की और विक्रय उस दशा में प्राधिकृत करेगा जब वह उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के अन्दर ऐसी संपत्ति पाई जाए, पृष्ठांकित कर दिया गया है

463. जुर्माने  के उद्ग्रहण के लिए किसी ऐसे राज्यक्षेत्र के न्यायालय द्वारा, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, जारी किया गया वारण्ट

इस संहिता में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जब किसी अपराधी को किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, किसी दंड न्यायालय द्वारा जुर्माना देने का दंडादेश दिया गया है और दंडादेश देने वाला न्यायालय ऐसी रकम को भू-राजस्व की बकाया के तौर पर उद्गृहीत करने के लिए, उन राज्यक्षेत्रों के, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, किसी जिले के कलक्टर को प्राधिकृत करते हुए वारण्ट जारी करता है, तब ऐसा वारण्ट उन राज्यक्षेत्रों के, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, किसी न्यायालय द्वारा धारा 461 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन जारी किया गया वारण्ट समझा जाएगा और तद्रुसार ऐसे वारण्ट के निष्पादन के बारे में उक्त धारा की उपधारा ( 3 ) के उपबंध लागू होंगे

464. कारावास के दंडादेश के निष्पादन का निलंबन

1. जब अपराधी को केवल जुर्माने का और जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश दिया गया है और जुर्माना तत्काल नहीं दिया जाता है, तब न्यायालय

क. आदेश दे सकेगा कि जुर्माना या तो ऐसी तारीख को या उससे पहले, जो उस आदेश की तारीख से तीस दिन के पश्चात् की नहीं होगी, पूर्णतः संदेय होगा, या दो या तीन किस्तों में संदेय होगा जिनमें से पहली किस्त ऐसी तारीख को या उससे पहले संदेय होगी, जो आदेश की तारीख से तीस दिन के पश्चात् की नहीं होगी और, अन्य किस्त या किस्तें, यथास्थिति, तीस दिन से अनधिक के अन्तराल या अन्तरालों पर संदेय होगी या होंगी,

ख. कारावास के दंडादेश का निष्पादन निलम्बित कर सकेगा और अपराधी द्वारा, जैसा न्यायालय ठीक समझे, इस शर्त का बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित किए जाने पर कि, यथास्थिति, जुर्माना या उसकी किस्तें देने की तारीख या तारीखों को वह न्यायालय के समक्ष हाजिर होगा, अपराधी को छोड़ सकेगा, और यदि, यथास्थिति, जुर्माने की या किसी किस्त की रकम उस अंतिम तारीख को या उसके पूर्व जिसको वह आदेश के अधीन संदेय हो, प्राप्त हो तो न्यायालय कारावास के दंडादेश के तुरंत निष्पादित किए जाने का निदेश दे सकेगा

2. उपधारा (1) के उपबंध किसी ऐसे मामले में भी लागू होंगे जिसमें ऐसे धन के संदाय के लिए आदेश किया गया है जिसके वसूल होने पर कारावास अधिनिर्णीत किया जा सकेगा और धन तुरंत नहीं दिया गया है, और यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है उस उपधारा में निर्दिष्ट बंधपत्र लिखने की अपेक्षा किए जाने पर ऐसा करने में असफल रहता है तो न्यायालय कारावास का दंडादेश तुरन्त पारित कर सकेगा।

- निष्पादन के बारे में साधारण उपबंध

465. वारण्ट कौन जारी कर सकेगा

किसी दंडादेश के निष्पादन के लिए प्रत्येक वारण्ट या तो उस न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसने दंडादेश पारित किया है या उसके पद उत्तरवर्ती द्वारा जारी किया जा सकेगा

466. निकल भागे सिद्धदोष पर दंडादेश कब प्रभावशील होगा

1. जब निकल भागे सिद्धदोष को इस संहिता के अधीन मृत्यु, आजीवन कारावास या जुर्माने का दंडादेश दिया जाता है तब ऐसा दंडादेश इसमें इसके पूर्व अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए तुरन्त प्रभावी हो जाएगा

2. जब निकल भागे सिद्धदोष को इस संहिता के अधीन किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब-

क. यदि ऐसा दंडादेश उस दंडादेश से कठोरतर किस्म का हो जिसे ऐसा सिद्धदोष, जब वह निकल भागा था, तब भोग रहा था तो नया दंडादेश तुरन्त प्रभावी हो जाएगा

ख. यदि ऐसा दंडादेश उस दंडादेश से कठोरतर किस्म का हो जिसे ऐसा सिद्धदोष, जब वह निकल भागा था तब, भोग रहा था, तो नया दंडादेश, उसके द्वारा उस अतिरिक्त अवधि के लिए कारावास भोग लिए जाने के पश्चात् प्रभावी होगा, जो उसके निकल भागने के समय उसके पूर्ववर्ती दंडादेश की शेष अवधि के बराबर है

3. उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, कठोर कारावास का दंडादेश सादा कारावास के दंडादेश से कठोरतर किस्म का समझा जाएगा

467. ऐसे अपराधी को दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से दंडादिष्ट है

1. जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोगने वाले व्यक्ति को पश्चात्वर्ती-दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब जब तक न्यायालय यह निदेश दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा, ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर, जिसके लिए वह पहले दंडादेश हुआ था, प्रारंभ होगा :

परन्तु, जहां उस व्यक्ति को, जिसे प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम करने पर धारा 141 के अधीन आदेश द्वारा कारावास का दंडादेश दिया गया है ऐसा दंडादेश भोगने के दौरान ऐसे आदेश के दिए जाने के पूर्व किए गए अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां पश्चात्कथित दंडादेश तुरन्त प्रारंभ हो जाएगा

2. जब किसी व्यक्ति को, जो आजीवन कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहा है, पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब पश्चात्वर्ती दंडादेश पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा

468.अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना

जहां अभियुक्त व्यक्ति दोषसिद्धि पर किसी अवधि के लिए कारावास से दंडादिष्ट किया गया है, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम के लिए कारावास नहीं है वहां उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पहले उसके द्वारा भोगे गए, यदि कोई हो, निरोध की अवधि का, ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा और ऐसी दोषसिद्धि पर उस व्यक्ति का कारावास में जाने का दायित्व उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक, यदि कोई हो, निर्बन्धित किया जाएगा :

परन्तु धारा 475 में निर्दिष्ट मामलों में निरोध की ऐसी अवधि का उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा

469. व्यावृत्ति

1. धारा 466 या धारा 467 की कोई बात किसी व्यक्ति को उस दंड के किसी भाग से क्षम्य करने वाली समझी जाएगी जिसका वह अपनी पूर्व या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर दायी है

2. जब जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय कारावास के मुख्य दंडादेश के साथ उपाबद्ध है और दंडादेश भोगने वाले व्यक्ति को उसके निष्पादन के पश्चात् कारावास के अतिरिक्त मुख्य दंडादेश या अतिरिक्त मुख्य दंडादेशों को भोगना है, तब जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय तब तक क्रियान्वित नहीं किया जाएगा, जब तक वह व्यक्ति अतिरिक्त दंडादेश या दंडादेशों को भुगत नहीं चुका हो

470.दंडादेश के निष्पादन पर वारण्ट का लौटाया जाना

जब दंडादेश पूर्णतया निष्पादित किया जा चुका है तब उसका निष्पादन करने वाला अधिकारी वारण्ट को, स्व-हस्ताक्षर सहित पृष्ठांकन द्वारा उस रीति को प्रमाणित करते हुए, जिससे दंडादेश का निष्पादन किया गया था, उस न्यायालय को, जिसने उसे जारी किया था, लौटा देगा ।   

471. जिस धन का संदाय करने का आदेश दिया गया है उसका जुर्माने के रूप में वसूल किया जा सकना

कोई धन (जो जुर्माने से भिन्न है), जो इस संहिता के अधीन दिए गए किसी आदेश के आधार पर संदेय है और जिसकी वसूली का ढंग अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित नहीं है, ऐसे वसूल किया जाएगा, मानो वह जुर्माना है :

परन्तु इस धारा के आधार पर धारा 400 के अधीन किसी आदेश को लागू होने में धारा 461 का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा, मानो धारा 461 की उपधारा (1) के परन्तुक धारा 395 के अधीन आदेश" शब्दों और अंकों के पश्चात्, "या धारा 400 के अधीन खर्चों के संदाय के लिए आदेश" शब्द और अंक अन्तःस्थापित कर दिए गए हैं

डं- दंडादेश का निलम्बन परिहार और लघुकरण

472. मृत्यु दंडादेश मामलों में दया याचिका

1. मृत्यु दंडादेश के अधीन सिद्धदोष ठहराया गया कोई व्यक्ति या उसका विधिक उत्तराधिकारी या कोई अन्य संबंधी, यदि उसने पहले से दया याचिका प्रस्तुत नहीं की है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 72 के अधीन भारत के राष्ट्रपति या अनुच्छेद 161 के अधीन राज्य के राज्यपाल के समक्ष दया याचिका फाइल कर सकेगा, जो ऐसी तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर जिसको जेल अधीक्षक,-

i. उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील, पुनर्विलोकन या विशेष इजाजत अपील के निरस्त करने के बारे में उसे सूचित करता है; या

ii. उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश की पुष्टि की तारीख के बारे में और उच्चतम न्यायालय में कोई अपील या विशेष इजाजत फाइल करने की अनुज्ञात समाप्त हो गई है, सूचित करता है

2. उपधारा (1) के अधीन याचिका आरंभ में राज्यपाल को की जा सकेगी और राज्यपाल द्वारा उसके निरस्त करने या निपटारा किए जाने पर, ऐसी याचिका के निरस्त या निपटारा किए जाने की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर राष्ट्रपति को की जाएगी

3. जेल अधीक्षक या जेल प्रभारी सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक सिद्धदोष, एक से अधिक सिद्धदोष होने की दशा में साठ दिन की अवधि के भीतर दया याचिका फाइल करे और अन्य सिद्धदोषों से ऐसी याचिका प्राप्त होने की दशा में, जेल अधीक्षक, नाम, पता, मामले के अभिलेख की प्रति और मामले के सभी अन्य ब्यौरे उक्त दया याचिका के साथ विचार के लिए केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार को भेजेगा

4. केंद्रीय सरकार, दया याचिका की प्राप्ति पर राज्य सरकार से टिप्पणियां मांगेगी और मामले के अभिलेख सहित याचिका पर विचार करेगी तथा राज्य सरकार की टिप्पणियों और जेल अधीक्षक से अभिलेखों की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर यथा संभवशीघ्र इस निमित्त राष्ट्रपति को सिफारिश करेगी

5. राष्ट्रपति, दया याचिका पर विचार विनिश्चय और उसका निपटान कर सकेगा तथा किसी मामले में यदि एक से अधिक सिद्धदोष हैं तो, याचिकाएं न्यायहित में एक साथ राष्ट्रपति द्वारा विनिश्चित की जाएंगी

6. केंद्रीय सरकार, दया याचिका पर राष्ट्रपति के आदेश की प्राप्ति पर, राज्य के गृह विभाग और जेल अधीक्षक या जेल के प्रभारी को उसे अड़तालीस घंटे के भीतर संसूचित करेगी

7. संविधान के अनुच्छेद 72 या अनुच्छेद 161 के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल के आदेश के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई अपील नहीं होगी और यह अंतिम होगा तथा राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा विनिश्चय पर पहुंचने के किसी प्रश्न पर किसी न्यायालय में कोई जांच नहीं की जाएगी

473. दंडादेशों का निलम्बन या परिहार करने की शक्ति

1. जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दंडादेश दिया जाता है, तब समुचित सरकार किसी समय, शर्तों के बिना या ऐसी शर्तों पर, जिन्हें दंडादिष्ट व्यक्ति स्वीकार करता है, उसके दंडादेश के निष्पादन का निलंबन कर सकेगी या जो दंडादेश उसे दिया गया है, उस संपूर्ण दंडादेश का या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगी

2. जब कभी समुचित सरकार से दंडादेश के निलम्बन या परिहार के लिए आवेदन किया जाता है, तब समुचित सरकार उस न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से, जिसके समक्ष या जिसके द्वारा दोषसिद्धि हुई थी या जिसके द्वारा उसकी पुष्टि की गई थी, अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस बारे में कि आवेदन मंजूर किया जाए या नामंजूर किया जाए, ऐसी राय के लिए अपने कारणों सहित कथित करे और अपनी राय के कथन के साथ विचारण के अभिलेख की या उसके ऐसे अभिलेख की, जैसा विद्यमान हो, प्रमाणित प्रतिलिपि भी भेजे

3. यदि कोई शर्त, जिस पर दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया गया है, समुचित सरकार की राय में पूरी नहीं हुई है तो समुचित सरकार निलम्बन या परिहार को रद्द कर सकेगी और तब यदि वह व्यक्ति, जिसके पक्ष में दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया गया था, मुक्त है तो वह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जा सकेगा और दंडादेश के असमाप्त भाग को भोगने के लिए प्रतिप्रेषित किया जा सकेगा

4. वह शर्त, जिस पर इस धारा के अधीन दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया जाए, ऐसी हो सकेगी, जो उस व्यक्ति द्वारा, जिसके पक्ष में दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया जाए, पूरी की जाने वाली हो या ऐसी हो सकेगी, जो उसकी इच्छा पर आश्रित हो

5. समुचित सरकार, दंडादेशों के निलम्बन के बारे में, और उन शर्तों के बारे में, जिन पर याचिकाएं उपस्थित की जानी चाहिएं और निपटाई जानी चाहिएं, साधारण नियमों या विशेष आदेशों द्वारा निदेश दे सकेगी :

परन्तु अठारह वर्ष से अधिक की आयु के किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी दंडादेश की दशा में (जो जुर्माने के दंडादेश से भिन्न है), दंडादिष्ट व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई कोई ऐसी याचिका तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी, जब तक दंडादिष्ट व्यक्ति जेल में हो, और

क. जहां ऐसी याचिका दंडादिष्ट व्यक्ति द्वारा दी जाती है, वहां जब तक वह जेल के भारसाधक अधिकारी के माध्यम से उपस्थित की जाए; या

ख. जहां ऐसी याचिका किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी जाती है वहां जब तक उसमें यह घोषणा हो कि दंडादिष्ट व्यक्ति जेल में है

6. ऊपर की उपधाराओं के उपबंध इस संहिता की या किसी अन्य विधि की किसी धारा के अधीन दंड न्यायालय द्वारा पारित ऐसे आदेश को भी लागू होंगे, जो किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को निर्बन्धित करता है या उस पर या उसकी सम्पत्ति पर कोई दायित्व अधिरोपित करता है

7. इस धारा में और धारा 474 में, "समुचित सरकार" पद से, -

क. उन मामलों में, जहां दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध है, या उपधारा ( 6 ) में निर्दिष्ट पारित आदेश किसी विधि के अधीन है, जिससे संबंधित विषय पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार केन्द्रीय सरकार तक है, अभिप्रेत है;

ख. अन्य मामलों में, उस राज्य की सरकार अभिप्रेत है, जिसके भीतर अपराधी दंडादिष्ट किया गया है या उक्त आदेश पारित किया गया है

474. दंडादेश लघुकरण करने की शक्ति

समुचित सरकार, दंडादेश प्राप्त व्यक्ति की सम्मति के बिना, -

क. मृत्यु दंडादेश को आजीवन कारावास के लिए;

ख. आजीवन कारावास के दंडादेश को सात वर्ष से अन्यून की अवधि के कारावास के लिए ;

ग. सात वर्ष या अधिक के लिए कारावास के दंडादेश को, कारावास की ऐसी अवधि के लिए, जो तीन वर्ष से कम हो ;

घ. सात वर्ष से कम के कारावास के दंडादेश के लिए जुर्माने का ;

ङ. कठोर कारावास के दंडादेश को, किसी ऐसी अवधि के साधारण कारावास में, जिसके लिए वह व्यक्ति दंडादिष्ट किया जा सकता है, लघुकरण कर सकेगी


475.कुछ मामलों में छूट या लघुकरण की शक्तियों पर निर्बन्धन

धारा 473 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए, जिसके लिए मृत्यु दंड विधि द्वारा उपबंधित दंडों में से एक है, आजीवन कारावास का दंडादेश दिया गया है या धारा 474 के अधीन किसी व्यक्ति को दिए गए मृत्यु दंडादेश का आजीवन कारावास के रूप में लघुकरण किया गया है, वहां ऐसा व्यक्ति कारावास से तब तक नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक कि उसने चौदह वर्ष का कारावास पूरा कर लिया हो

476. मृत्यु दंडादेशों की दशा में केन्द्रीय सरकार की समवर्ती शक्ति

राज्य सरकार को धारा 473 और धारा 474 द्वारा प्रदत्त शक्तियां, मृत्यु दंडादेशों के मामलों में, केन्द्रीय सरकार द्वारा भी प्रयुक्त की जा सकेंगी

477. कतिपय मामलों में राज्य सरकार का केन्द्रीय सरकार से सहमति के पश्चात् कार्य करना

1. किसी दंडादेश का परिहार करने या उसके लघुकरण करने के बारे में धारा 473 और धारा 474 द्वारा राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उस दशा में, जब दंडादेश किसी ऐसे अपराध के लिए है,-

क. जो इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया था; या

ख. जिसमें केन्द्रीय सरकार की किसी संपत्ति का दुर्विनियोग या नाश या नुकसान अन्तर्ग्रस्त है; या

ग. जो केन्द्रीय सरकार की सेवा में किसी व्यक्ति द्वारा तब किया गया था, जब वह अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में कार्य कर रहा था या उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यत था, केन्द्रीय सरकार की सहमति के सिवाय राज्य सरकार द्वारा प्रयोग नहीं किया जाएगा

2. जिस व्यक्ति को ऐसे अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया गया है, जिनमें से कुछ उन विषयों से संबंधित हैं, जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, और जिसे पृथक्-पृथक् अवधि के कारावास का, जो साथ-साथ भोगी जानी है, दंडादेश दिया गया है, उसके संबंध में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण का राज्य सरकार द्वारा पारित कोई आदेश प्रभावी तभी होगा, जब ऐसे विषयों के बारे में, जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, उस व्यक्ति द्वारा किए गए अपराधों के संबंध में ऐसे दंडादेशों के, यथास्थिति, परिहार, निलंबन या लघुकरण का आदेश, केन्द्रीय सरकार की अनुमति के सिवाय, द्वारा भी कर दिया गया है

 

Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts