धारा 248 से 260 अध्याय 19 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा 248 से 260 अध्याय 19 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

अध्याय 19 

सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण

248. विचारण का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाना

सेशन न्यायालय के समक्ष प्रत्येक विचारण में अभियोजन का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाएगा

249. अभियोजन के मामले के कथन का आरंभ

जब अभियुक्त धारा 232 के अधीन मामले की सुपुर्दगी के अनुसरण में न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है तब अभियोजक अपने मामले का कथन, अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप का वर्णन करते हुए और यह बताते हुए आरंभ करेगा कि वह अभियुक्त के दोष को किस साक्ष्य से साबित करने की प्रस्थापना करता है  

250 . उन्मोचन

1. यदि अभियुक्त, धारा 232 के अधीन वाद की सुपुर्दगी की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर उन्मोचन के लिए आवेदन कर सकेगा।

2. यदि मामले के अभिलेख और उसके साथ दी गई दस्तावेजों पर विचार कर लेने पर, और इस निमित्त अभियुक्त और अभियोजन के निवेदन की सुनवाई कर लेने के पश्चात् न्यायाधीश यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है तो वह अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा और ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करेगा

251. आरोप विरचित करना

1. यदि पूर्वोक्त रूप से विचार और सुनवाई के पश्चात्, न्यायाधीश की यह राय है कि ऐसी उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है। जो,

क. अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप विरचित कर सकता है और आदेश द्वारा मामले को विचारण के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को अन्तरित कर सकता है या कोई अन्य प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऐसी तारीख को जो वह ठीक समझे, अभियुक्त को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होने का निदेश दे सकेगा, और तब ऐसा मजिस्ट्रेट उस मामले का विचारण पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित वारंट मामलों के विचारण के लिए प्रक्रिया के अनुसार करेगा

ख. अनन्यतः उस न्यायालय द्वारा विचारणीय है तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पर सुनवाई की पहली तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर आरोप लिखित रूप में विरचित करेगा

2. जहां न्यायाधीश उपधारा (1) के खंड () के अधीन कोई आरोप विरचित करता है, वहां वह आरोप या तो शारीरिक रूप से या श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों से उपस्थित अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाएगा और अभियुक्त से यह पूछा जाएगा कि क्या वह उस अपराध का, जिसका आरोप लगाया गया है, दोषी होने का अभिवचन करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है

252. दोषी होने के अभिवचन

यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है तो न्यायाधीश उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर उसे स्वविवेकानुसार, दोषसिद्ध कर सकता है

253.अभियोजन साक्ष्य के लिए तारीख

यदि अभियुक्त अभिवचन करने से इंकार करता है या अभिवचन नहीं करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है या धारा 252 के अधीन सिद्धदोष नहीं किया जाता है तो न्यायाधीश साक्षियों की परीक्षा करने के लिए तारीख नियत करेगा और अभियोजन के आवेदन पर किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी कर सकता है

254 अभियोजन के लिए साक्ष्य

1. ऐसे नियत तारीख पर न्यायाधीश ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाए :

परंतु इस उपधारा के अधीन साक्षी का साक्ष्य, श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों से अभिलिखित किया जा सकता है

2. किसी लोक सेवक का श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से साक्ष्य का अभिसाक्ष्य लिया जा सकेगा

3. न्यायाधीश, स्वविवेकानुसार, किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा तब तक के लिए, जब तक किसी अन्य साक्षी या साक्षियों की परीक्षा कर ली जाए, आस्थगित करने की अनुज्ञा दे सकता है या किसी साक्षी को अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए पुनः बुला सकता है

255.दोषमुक्ति

यदि सम्बद्ध विषय के बारे में अभियोजन का साक्ष्य लेने, अभियुक्त की परीक्षा करने और अभियोजन और प्रतिरक्षा को सुनने के पश्चात् न्यायाधीश का यह विचार है कि इस बात का साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त ने अपराध किया है तो न्यायाधीश दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा

256. प्रतिरक्षा आरंभ करना

1. जहां अभियुक्त धारा 255 के अधीन दोषमुक्त नहीं किया जाता है वहां उससे अपेक्षा की जाएगी कि अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और कोई भी साक्ष्य जो उसके समर्थन में उसके पास हो पेश करे

2. यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है तो न्यायाधीश उसे अभिलेख में फाइल करेगा

3. यदि अभियुक्त किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या चीज पेश करने को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी करने के लिए आवेदन करता है तो न्यायाधीश ऐसी आदेशिका जारी करेगा जब तक उसका ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह विचार हो कि आवेदन इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाना चाहिए कि वह तंग करने या विलंब करने या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से किया गया है

257. बहस

जब प्रतिरक्षा के साक्षियों की (यदि कोई हों) परीक्षा समाप्त हो जाती है, तो अभियोजक अपने मामले का उपसंहार करेगा और अभियुक्त या उसका अधिवक्ता उत्तर देने का हकदार होगा :

परन्तु जहां अभियुक्त या उसका अधिवक्ता कोई विधि प्रश्न उठाता है, वहां अभियोजन न्यायाधीश की अनुज्ञा से ऐसे विधि - प्रश्नों पर अपना निवेदन कर सकता है  

258.दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय

1. बहस और विधि - प्रश्न ( यदि कोई हों) सुनने के पश्चात् न्यायाधीश यथाशीघ्र बहस पूर्ण होने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर मामले में निर्णय देगा, जिसे उन कारणों को लेखबद्ध करते हुए पैंतालीस दिन की अवधि तक बढ़ाया जा सकेगा

2. यदि अभियुक्त दोषसिद्ध किया जाता है तो न्यायाधीश, उस दशा के सिवाय, जिसमें वह धारा 401 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करता है, दंड के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनेगा और तब विधि के अनुसार उसके बारे में दंडादेश देगा

259.पूर्व दोषसिद्धि

ऐसे मामले में, जिसमें धारा 234 की उपधारा (7) के उपबंधों के अधीन पूर्व दोषसिद्धि का आरोप लगाया गया है और अभियुक्त यह स्वीकार नहीं करता है कि आरोप में किए गए अभिकथन के अनुसार उसे पहले दोषसिद्ध किया गया था, न्यायाधीश उक्त अभियुक्त को धारा 252 या धारा 258 के अधीन दोषसिद्ध करने के पश्चात् अभिकथित पूर्व दोषसिद्धि के बारे में साक्ष्य ले सकेगा और उस पर निष्कर्ष अभिलिखित करेगा :

परन्तु जब तक अभियुक्त धारा 252 या धारा 258 के अधीन दोषसिद्ध नहीं कर दिया जाता है तब तक तो ऐसा आरोप न्यायाधीश द्वारा पढ़कर सुनाया जाएगा, अभियुक्त से उस पर अभिवचन करने को कहा जाएगा और पूर्व दोषसिद्धि का निर्देश अभियोजन द्वारा, या उसके द्वारा दिए गए किसी साक्ष्य में किया जाएगा

260. धारा 222 की उपधारा (2) के अधीन संस्थित मामलों में प्रक्रिया

1. धारा 222 की उपधारा (2) के अधीन अपराध का संज्ञान करने वाला सेशन न्यायालय मामले का विचारण, मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष पुलिस रिपोर्ट से भिन्न आधार पर संस्थित किए गए वारंट मामलों के विचारण की प्रक्रिया के अनुसार, करेगा :

परन्तु जब तक सेशन न्यायालय उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, अन्यथा निदेश नहीं देता है उस व्यक्ति की, जिसके विरुद्ध अपराध का किया जाना अभिकथित है। अभियोजन के साक्षी के रूप में परीक्षा की जाएगी

2. यदि विचारण के दोनों पक्षकारों में से कोई ऐसी वांछा करता है या यदि न्यायालय ऐसा करना ठीक समझता है तो इस धारा के अधीन प्रत्येक विचारण बंद कमरे में किया जाएगा

3. यदि ऐसे किसी मामले में न्यायालय सब अभियुक्तों को या उनमें से किसी को उन्मोचित या दोषमुक्त करता है और उसकी यह राय है कि उनके या उनमें से किसी के विरुद्ध अभियोग लगाने का उचित कारण नहीं था तो वह उन्मोचन या दोषमुक्ति के अपने आदेश द्वारा ( राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक से भिन्न) उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध अपराध का किया जाना अभिकथित किया गया था यह निदेश दे सकेगा कि वह कारण दर्शित करे कि वह उस अभियुक्त को या जब ऐसे अभियुक्त एक से अधिक हैं तब उनमें से प्रत्येक को या किसी को प्रतिकर क्यों दे

4. न्यायालय इस प्रकार निदिष्ट व्यक्ति द्वारा दर्शित किसी कारण को लेखबद्ध करेगा और उस पर विचार करेगा और यदि उसका समाधान हो जाता है कि अभियोग लगाने का कोई उचित कारण नहीं था, तो वह पांच हजार रुपए से अनधिक इतनी रकम का, जितनी वह अवधारित करे, प्रतिकर उस व्यक्ति द्वारा अभियुक्त को या, उनमें से प्रत्येक को या किसी को दिए जाने का आदेश, उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, दे सकेगा

5. उपधारा (4) के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर ऐसे वसूल किया जाएगा मानो वह मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित किया गया जुर्माना हो

6. उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने के लिए जिस व्यक्ति को आदेश दिया जाता है उसे ऐसे आदेश के कारण इस धारा के अधीन किए गए परिवाद के बारे में किसी सिविल या दांडिक दायित्व से छूट नहीं दी जाएगी :

परन्तु अभियुक्त व्यक्ति को इस धारा के अधीन दी गई कोई रकम, उसी मामले से संबंधित किसी पश्चात्वर्ती सिविल वाद में उस व्यक्ति के लिए प्रतिकर अधिनिर्णीत करते समय हिसाब में ली जाएगी

7. उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने के लिए जिस व्यक्ति को आदेश दिया जाता है वह उस आदेश की अपील, जहां तक वह प्रतिकर के संदाय के संबंध में है, उच्च न्यायालय में कर सकता है

8. जब किसी अभियुक्त व्यक्ति को प्रतिकर दिए जाने का आदेश किया जाता है, तब उसे ऐसा प्रतिकर, अपील पेश करने के लिए अनुज्ञात अवधि के बीत जाने के पूर्व, या यदि अपील पेश कर दी गई है तो अपील के विनिश्चित कर दिए जाने के पूर्व, नहीं दिया जाएगा

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