
जब किसी संविदा के या अनुदान के या सम्पत्ति के किसी अन्य व्ययन के निबन्धन किसी दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध कर लिए गए हों, और उन सब दशाओं में, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि कोई बात दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाए, ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के अन्य व्ययन के निबन्धनों के या ऐसी बात के साबित किए जाने के लिए स्वयं उस दस्तावेज के या उन दशाओं में, जिनमें इसके पूर्व अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य है, उसकी अन्तर्वस्तु के द्वितीयक साक्ष्य के सिवाय, कोई भी साक्ष्य नहीं दिया जाएगा।
जब विधि द्वारा किसी लोक अधिकारी की नियुक्ति लिखित रूप में अपेक्षित है और जब यह दर्शित किया जाता है कि किसी विशिष्ट व्यक्ति ने ऐसे अधिकारी के नाते कार्य किया है, तब उस लेख का, जिसके द्वारा वह नियुक्त किया गया था, साबित किया जाना आवश्यक नहीं है।
जिन वसीयतों का संप्रमाण मिला है, वे संप्रमाण द्वारा सावित की जा सकेंगी।
यह धारा उन दशाओं में, जिनमें निर्दिष्ट संविदाएं, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन एक ही दस्तावेज में अन्तर्विष्ट हैं और उन दशाओं में, जिनमें वे एक से अधिक दस्तावेजों में अन्तर्विष्ट हैं, समान रूप से लागू हैं।
जहां एक से अधिक मूल हैं, वहां केवल एक मूल साबित करना आवश्यक है।
इस धारा में निर्दिष्ट तथ्यों से भिन्न किसी तथ्य का किसी भी दस्तावेज में कथन, उसी तथ्य के बारे में मौखिक साक्ष्य की ग्राह्यता का प्रवारण नहीं करेगा।
क. यदि कोई संविदा कई पत्रों में अन्तर्विष्ट है, तो वे सभी पत्र, जिनमें वह अन्तर्विष्ट है, साबित करने होंगे।
ख. यदि कोई संविदा किसी विनिमयपत्र में अन्तर्विष्ट है, तो वह विनिमयपत्र साबित करना होगा।
ग. यदि विनिमयपत्र तीन सेट में लिखित है, तो केवल एक को साबित करना आवश्यक है।
घ. ख से कतिपय निवन्धनों पर क नील के परिदान के लिए लिखित संविदा करता है। संविदा इस तथ्य का वर्णन करती है कि ख ने क को किसी अन्य अवसर पर मौखिक रूप से संविदाकृत अन्य नील का मूल्य चुकाया था। मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है कि अन्य नील के लिए कोई संदाय नहीं किया गया। यह साक्ष्य ग्राहा है।
ङ. ख द्वारा दिए गए धन की रसीद ख को क देता है । संदाय करने का मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया जाता है । यह साक्ष्य ग्राह्य है।
जब किसी ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के अन्य व्ययन के निवन्धनों को, या किसी बात को, जिसके बारे में विधि द्वारा अपेक्षित है कि वह दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाए, धारा 94 के अनुसार साबित किया जा चुका हो, तब किसी ऐसी लिखत के पक्षकारों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच के किसी मौखिक करार या कथन का कोई भी साक्ष्य उसके निवन्धनों का खण्डन करने या उनमें फेरफार करने के या जोड़ने या उनमें से घटाने के प्रयोजन के लिए ग्रहण नहीं किया जाएगा:
परन्तु ऐसा कोई तथ्य साबित किया जा सकेगा, जो किसी दस्तावेज को अविधिमान्य बना दे या जो किसी व्यक्ति को तत्सम्बन्धी किसी डिक्री या आदेश का हकदार बना दे, यथा कपट, अभित्रास, अवैधता, सम्यक् निष्पादन का अभाव, किसी संविदाकारी पक्षकार में सामर्थ्य का अभाव, प्रतिफल का अभाव या निष्फलता या विधि की या तथ्य की भूल:
परन्तु यह और कि किसी विषय के बारे में, जिसके बारे में दस्तावेज मौन है और जो उसके निबन्धनों से असंगत नहीं है, किसी पृथक् मौखिक करार या अस्तित्व साबित किया जा सकेगा । इस पर विचार करते समय कि यह परन्तुक लागू होता है या नहीं न्यायालय दस्तावेज की औपचारिकता की मात्रा को ध्यान में रखेगा:
परन्तु यह भी कि ऐसी किसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन के अधीन कोई बाध्यता संलग्न होने की पुरोभाव्य शर्त गठित करने वाले किसी पृथक् मौखिक करार का अस्तित्व साबित किया जा सकेगा:
परन्तु यह भी कि ऐसी किसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन को विखंडित या उपांतरित करने के लिए किसी सुभिन्न पश्चातवर्ती मौखिक करार का अस्तित्व उन दशाओं के सिवाय सावित किया जा सकेगा, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति का व्ययन लिखित हो या जिनमें दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के बारे में तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार उसका रजिस्ट्रीकरण किया जा चुका है:
परन्तु यह भी कि कोई प्रथा या रूढ़ि, जिसके द्वारा किसी संविदा में अभिव्यक्त रूप से वर्णित न होने वाली घटनाएं उस प्रकार की संविदाओं से प्रायः उपाबद्ध रहती हैं, साबित की जा सकेगीः
परन्तु यह भी कि ऐसी घटना को उपाबद्ध करना संविदा के अभिव्यक्त निबन्धनों के विरुद्ध या उनसे असंगत नहीं होगाः
परन्तु यह भी कि कोई तथ्य, जो यह दर्शित करता है कि किसी दस्तावेज की भाषा विद्यमान तथ्यों से किस रीति में सम्बन्धित है, साबित किया जा सकेगा।
क. बीमा की एक पालिसी उस माल के लिए जो "कोलकाता से विशाखापट्टनम जाने वाले पोतों में" की गई है। माल किसी विशिष्ट पोत से भेजा जाता है, जो पोत नष्ट हो जाता है। यह तथ्य कि वह विशिष्ट पोत उस पालिसी से मौखिक रूप से अपवादित था, साबित नहीं किया जा सकता।
ख. ख को 1 मार्च, 2023 को एक हजार रुपए देने का पक्का लिखित करार क करता है। यह तथ्य कि उसी समय एक मौखिक करार हुआ था कि यह धन 31 मार्च, 2023 तक नहीं दिया जाएगा, साबित नहीं किया जा सकता।
ग. “रामपुर चाय सम्पदा" नामक एक सम्पदा किसी विलेख द्वारा बेची जाती है, जिसमें विक्रीत सम्पत्ति का मानचित्र अन्तर्विष्ट है । यह तथ्य कि मानचित्र में न दिखाई गई भूमि सदैव सम्पदा का भागरूप मानी जाती रही थी और उस विलेख द्वारा उसका अन्तरित होना अभिप्रेत था, साबित नहीं किया जा सकता।
घ. क कतिपय खानों को, जो ख की सम्पत्ति हैं, कतिपय निवन्धनों पर काम में लाने का ख से लिखित करार करता है। उनके मूल्य के बारे में ख के मिथ्या निरूपण द्वारा क ऐसा करने के लिए उत्प्रेरित हुआ था। यह तथ्य साबित किया जा सकेगा।
ङ. ख पर क किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन के लिए वाद संस्थित करता है और यह प्रार्थना भी करता है कि संविदा का सुधार उसके एक उपवन्ध के बारे में किया जाए क्योंकि वह उपबन्ध उसमें भूल से अन्तःस्थापित किया गया था। क साबित कर सकेगा कि ऐसी भूल की गई थी जिससे संविदा के सुधार करने का हक उसे विधि द्वारा मिलता है।
च. क पत्र द्वारा ख का माल आदेशित करता है जिसमें संदाय करने के समय के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है और परिदान पर माल को स्वीकार करता है। ख मूल्य के लिए क पर वाद लाता है। क दर्शित कर सकेगा कि माल ऐसी अवधि के लिए उघार पर दिया गया था जिसका अभी तक अवसान नहीं हुआ है।
छ. ख को क एक घोडा बेचता है और मौखिक वारण्टी देता है कि वह अच्छा है । ख को क इन शब्दों को लिख कर एक कागज देता है । "क से तीस हजार रुपए रुपए में एक घोड़ा खरीदा " । ख मौखिक गारन्टी साबित कर सकेगा।
ज. ख का लॉज क भाड़े पर लेता है और एक कार्ड देता है जिसमें लिखा है, "कमरे, दस हजार रुपए प्रतिमास" । क यह मौखिक करार साबित कर सकेगा कि इन निवन्धनों के अन्तर्गत भागतः भोजन भी था। ख का लॉज क एक वर्ष के लिए भाड़े पर लेता है और उनके बीच अधिवक्ता द्वारा तैयार किया हुआ एक स्टाम्पित करार किया जाता है। वह करार भोजन देने के विषय में मौन है। क साबित नहीं कर सकेगा कि मौखिक तौर पर उस निवन्धन के अन्तर्गत भोजन देना भी था।
झ. ख से देय ऋण के लिए धन की रसीद भेज कर ऋण चुकाने का क आवेदन करता है। ख रसीद रख लेता है और धन नहीं भेजता। उस रकम के लिए वाद में क इसे साबित कर सकेगा।
ञ. क और ख लिखित में संविदा करते हैं जो कतिपय अनिश्चित घटना के घटित होने पर प्रभावशील होनी हैं। यह लेख ख के पास छोड़ दिया जाता है जो उसके आधार पर क पर वाद लाता है। क उन परिस्थितियों को दर्शित कर सकेगा जिनके अधीन वह परिदत्त किया गया था।
जब किसी दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा देखते ही संदिग्ध या त्रुटिपूर्ण है, तब उन तथ्यों का साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा, जो उनका अर्थ दर्शित कर दे या उसकी त्रुटियों की पूर्ति कर दे।
क. ख को क “एक लाख रुपए या एक लाख पचास हजार रुपए में एक घोड़ा बेचने का लिखित करार करता है । यह दर्शित करने के लिए कि कौन सा मूल्य दिया जाना था साक्ष्य नहीं दिया जा सकता।
ख. किसी विलेख में रिक्त स्थान है । उन तथ्यों का साक्ष्य नहीं दिया जा सकता जो यह दर्शित करते हों कि उनकी किस प्रकार पूर्ति अभिप्रेत थी।
जब दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा स्वयं स्पष्ट हो और जब वह विद्यमान तथ्यों को ठीक-ठीक लागू होती हो, तब यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा कि वह ऐसे तथ्यों को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं थी।
ख को क “रामपुर में एक सौ बीघे वाली मेरी सम्पदा" विलेख द्वारा बेचता है। क के पास रामपुर में एक सौ बीघे वाली एक सम्पदा है। इस तथ्य का साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा कि विक्रय किए जाने के लिए अभिप्रेत सम्पदा किसी भिन्न स्थान पर स्थित थी और भिन्न माप की थी।
जब दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा स्वयं स्पष्ट हो, किंतु विद्यमान तथ्यों के सदर्भ में अर्थहीन हो, तो यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि वह एक विशिष्ट भाव में प्रयुक्त की गई थी।
क, विलेख द्वारा ख को "मेरा कोलकाता का घर" बेचता है। क का कोलकाता में कोई घर नहीं था किन्तु यह प्रतीत होता है कि हावड़ा में उसका एक घर था जो विलेख के निष्पादन के समय से ख के कब्जे में था। इन तथ्यों को यह दर्शित करने के लिए साबित किया जा सकेगा कि विलेख का सम्बन्ध हावड़ा के घर से था।
जबकि तथ्य ऐसे हैं कि प्रयुक्त भाषा कई व्यक्तियों या चीजों में से किसी एक को लागू होने के लिए अभिप्रेत हो सकती थी तथा एक से अधिक को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं हो सकती थी, तब उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा, जो यह दर्शित करते हैं कि उन व्यक्तियों या चीजों में से किस को लागू होने के लिए वह आशयित थी।
क. क एक हजार रुपए में “मेरा सफेद घोड़ा" ख को बेचने का करार करता है । क के पास दो सफेद घोड़े हैं । उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हों कि उनमें से कौन सा घोड़ा अभिप्रेत था।
ख. ख के साथ क रामगढ़ जाने के लिए करार करता है । यह दर्शित करने वाले तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा कि राजस्थान का रामगढ़ अभिप्रेत था या उत्तराखंड का रामगढ़|
जब प्रयुक्त भाषा भागतः विद्यमान तथ्यों के एक संवर्ग को और भागतः विद्यमान तथ्यों के अन्य संवर्ग को लागू होती है, किन्तु वह पूरी की पूरी दोनों में से किसी एक को भी ठीक-ठीक लागू नहीं होती, तब यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि यह दोनों में से किस को लागू होने के लिए अभिप्रेत थी।
ख को “भ में स्थित म के अधिभोग में मेरी भूमि" बेचने का क करार करता है। क के पास भ में स्थित भूमि है, किन्तु वह म के कब्जे में नहीं है और उसके पास म के कब्जे वाली भूमि है, किन्तु वह भ में स्थित नहीं है। यह दर्शित करने वाले तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा कि उसका अभिप्राय कौन सी भूमि बेचने का था।
सी लिपि, जो अपठनीय या सामान्यतः बोधगम्य न हो, विदेशी, अप्रचलित, तकनीकी, स्थानिक और क्षेत्रीय शब्द प्रयोगों का, संक्षेपाक्षरों का और विशिष्ट भाव में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा।
एक मूर्तिकार, क "अपनी सभी प्रतिमाएं" ख को बेचने का करार करता है। क के पास मॉडल और प्रतिमान बनाने के औजार भी हैं। यह दर्शित कराने के लिए कि यह किसे बेचने का अभिप्राय रखता था, साक्ष्य दिया जा सकेगा।
वे व्यक्ति, जो किसी दस्तावेज के पक्षकार या उनके हित प्रतिनिधि नहीं हैं, ऐसे किन्हीं भी तथ्यों का साक्ष्य दे सकेंगे, जो दस्तावेज के निबन्धनों में फेर-फार करने वाले किसी समकालीन करार को दर्शित करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
क और ख लिखित संविदा करते हैं कि क को कुछ कपास ख बेचेगा जिसके लिए कपास के परिदान किए जाने पर संदाय किया जाएगा। उसी समय वे एक मौखिक करार करते हैं कि क को तीन मास का प्रत्यय दिया जाएगा। क और ख के बीच यह तथ्य दर्शित नहीं किया जा सकता था किन्तु यदि यह ग के हित पर प्रभाव डालता है, तो यह ग द्वारा दर्शित किया जा सकेगा।
इस अध्याय की कोई भी बात, वसीयत का अर्थ लगाने के बारे में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) के किन्हीं भी उपबन्धों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।