
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 है ।
2. यह किसी न्यायालय में या उसके समक्ष सभी न्यायिक कार्यवाहियों को लागू होता है, जिसके अंतर्गत सेना न्यायालय सम्मिलित है, किंतु न तो किसी न्यायालय या अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए गए शपथ पत्रों को, न ही किसी मध्यस्थ के समक्ष की कार्यवाहियों को लागू होता है ।
3. यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
1. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
"न्यायालय" के अन्तर्गत सभी न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट तथा मध्यस्थों के सिवाय साक्ष्य लेने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत सभी व्यक्ति आते हैं;
"निश्चायक सबूत” से अभिप्रेत है कि जब इस अधिनियम द्वारा एक तथ्य को किसी अन्य तथ्य का निश्चायक सबूत घोषित किया जाता है, वहां न्यायालय उस एक तथ्य के साबित हो जाने पर उस अन्य को साबित हुआ मानेगा और उसे नासाबित करने के प्रयोजन के लिए साक्ष्य दिए जाने की अनुज्ञा नहीं देगा:
तथ्य के संबंध में, "नासाबित" से अभिप्रेत है कि जब न्यायालय अपने समक्ष विषयों पर विचार करने के पश्चात् या तो यह विश्वास करता है कि उसका अस्तित्व नहीं है, या उसके अनस्तित्व को इतना अघिसम्भाव्य समझे कि उस विशिष्ट मामले की परिस्थितियों में किसी प्रज्ञावान व्यक्ति को इस अनुमान पर कार्य करना चाहिए कि उस तथ्य का अस्तित्व नहीं है;
"दस्तावेज" से ऐसा कोई विषय अभिप्रेत है जिसको किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों के साधन द्वारा या उनमें से एक से अधिक साधनों द्वारा अभिव्यक्त या वर्णित या अन्यथा अभिलेखबद्ध किया गया है जो उस विषय के अभिलेखन के प्रयोजन से उपयोग किए जाने को आशयित हो या जिसका उपयोग किया जा सके और इसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक और डिजिटल अभिलेख भी सम्मलित हैं;
i. लेख दस्तावेज है ।
ii. मुद्रित, शिलामुद्रित या फोटोचित्रत शब्द दस्तावेज हैं ।
iii. मानचित्र या रेखांक दस्तावेज है ।
iv. धातुपट्ट या शिला पर उत्कीर्ण लेख दस्तावेज है।
v. व्यंगचित्र दस्तावेज है।
vi. ई-मेल, सर्वर लॉग, इलैक्ट्रानिक अभिलेख कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्ट फोन में दस्तावेज मैसेज, वेबसाइट, स्थानीय साक्ष्य और डिवाइस में संग्रहित वॉयस मेल मैसेज दस्तावेज हैं;
"साक्ष्य” से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते हैं—
i. सभी कथन, जिसके अंतर्गत इलैक्ट्रानिकी रूप से दिए गए कथन सम्मिलित हैं, जिसे न्यायालय जांच के अधीन तथ्य के विषयों के सम्बन्ध में अपने समक्ष साक्षियों द्वारा किए जाने की अनुमति देता है या अपेक्षा करता है और ऐसे कथन मौखिक साक्ष्य कहलाते हैं;
ii. न्यायालय के निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज, जिनके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक या डिजिटल अभिलेख भी हैं और ऐसे दस्तावेज दस्तावेजी साक्ष्य कहलाते हैं:
"तथ्य" से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते हैं-
i. ऐसी कोई वस्तु, वस्तुओं की अवस्था या वस्तुओं का सम्बन्ध, जो इन्द्रियों द्वारा बोधगम्य हो ;
ii. कोई मानसिक दशा, जिसका भान किसी व्यक्ति को हो।
i. यह कि अमुक स्थान में अमुक क्रम से अमुक पदार्थ व्यवस्थित हैं, एक तथ्य है ।
ii. यह कि किसी व्यक्ति ने कुछ सुना या देखा, एक तथ्य है ।
iii. यह कि किसी व्यक्ति ने अमुक शब्द कहा, एक तथ्य है।
iv. यह कि कोई मनुष्य अमुक राय रखता है, अमुक आशय रखता है, सद्भावपूर्वक या कपटपूर्वक कार्य करता है, या किसी विशिष्ट शब्द को विशिष्ट भाव में प्रयोग करता है, या उसे किसी विशिष्ट संवेदना का बोध है या किसी विनिर्दिष्ट समय में है या था, एक तथ्य है :
"विवाद्यक तथ्य" से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत ऐसा कोई भी तथ्य, जो स्वयं से, या अन्य तथ्यों के संबंध में किसी ऐसे अधिकार, दायित्व या निर्योग्यता के, जिसका किसी वाद या कार्यवाही दृढ़कथन किया गया है, या उससे इंकार किया गया है, अस्तित्व, अनस्तित्व, प्रकृति या विस्तार की उत्पत्ति अवश्यमेव होती है।
जब कभी, कोई न्यायालय विवादयक तथ्य को सिविल प्रक्रिया से सम्बन्धित किसी तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों के अधीन अभिलिखित करता हैं, तब ऐसे विवाद्यक के उत्तर में जिस तथ्य का दृढ़कथन किया जाना है, या उससे इंकार किया जाना है वह विवादयक तथ्य है।
ख की हत्या का क अभियुक्त है। उसके विचारण में निम्नलिखित तथ्य विवादय हो सकते हैं-
i. यह कि क ने ख की मृत्यु कारित की ।
ii. यह कि क का आशय ख की मृत्यु कारित करने का था ।
iii. यह कि क को ख से गम्भीर और अचानक प्रकोपन मिला था।
iv. यह कि ख की मृत्यु कारित करते समय क चित्त-विकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति जानने में असमर्थ था;
जहां कहीं इस अधिनियम द्वारा यह उपबन्धित है कि न्यायालय किसी तथ्य की उपधारणा कर सकेगा, वहां न्यायालय या तो ऐसे तथ्य को साबित हुआ मान सकेगा, जब तक की वह नासाबित नहीं किया जाता है, या उनके सबूत की मांग कर सकेगा:
कोई तथ्य साबित नहीं हुआ कहा जाता है, जब वह न तो साबित किया गया हो और न नासाबित;
कोई तथ्य साबित हुआ कहा जाता है, जब न्यायालय अपने समक्ष के विषयों पर विचार करने के पश्चात् या तो यह विश्वास करे कि उस तथ्य का अस्तित्व है या उसके अस्तित्व को इतना अधिसम्भाव्य समझे कि उस विशिष्ट मामले की परिस्थितियों में किसी प्रज्ञावान व्यक्ति को इस अनुमान पर कार्य करना चाहिए कि उस तथ्य का अस्तित्व है;
"सुसंगत” एक तथ्य दूसरे तथ्य से सुसंगत कहा जाता है जब कि तथ्यों की सुसंगति से सम्बन्धित इस अधिनियम के उपबन्धों में निर्दिष्ट प्रकारों में से किसी भी प्रकार से वह तथ्य उस दूसरे तथ्य से संबद्ध हो;
"उपधारणा” करेगा जहां कहीं इस अधिनियम द्वारा यह निर्दिष्ट है कि न्यायालय किसी तथ्य की उपधारण करेगा, वहां न्यायालय ऐसे तथ्य को साबित मानेगा यदि और जब तक वह नासाबित नहीं किया जाता है।
2. उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किंतु सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होगें, जो उनका उक्त अधिनियम और संहिता में है।