
दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के सिवाय, सभी तथ्य मौखिक साक्ष्य द्वारा साबित किए जा सकेंगे।
55. मौखिक साक्ष्य का प्रत्यक्ष होना-
मौखिक साक्ष्य, सभी मामलों में चाहे वह कैसा भी हों, प्रत्यक्ष ही होगा, यदि वह-
i. किसी देखे जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे देखा;
ii. किसी सुने जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे सुना;
iii. किसी ऐसे तथ्य के बारे में है जिसका किसी अन्य इंद्रिय द्वारा या किसी अन्य रीति से बोध हो सकता था, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसका बोध उस इंद्रिय द्वारा या उस रीति से किया;
iv. किसी राय के, या उन आधारों के, बारे में है, जिन पर वह राय धारित है, तो वह उस व्यक्ति का ही साक्ष्य होगा जो वह उन आधारों पर राय धारण करता है:
परन्तु विशेषज्ञों की रायें, जो सामान्यतः विक्रय के लिए प्रस्थापित की जाने वाली किसी पुस्तक में अभिव्यक्त हैं, और वे आधार, जिन पर ऐसी रायें धारित हैं, यदि लेखक मर गया है, या वह मिल नहीं सकता है या वह साक्ष्य देने के लिए असमर्थ हो गया है, या उसे इतने विलम्ब या व्यय के विना जितना न्यायालय अयुक्तियुक्त समझता है, साक्षी के रूप में बुलाया नहीं जा सकता है, ऐसी पुस्तकों को प्रस्तुत करके साबित किए जा सकेंगेः
परन्तु यह और कि यदि मौखिक साक्ष्य, दस्तावेज से भिन्न किसी भौतिक चीज के अस्तित्व या दशा के बारे में है, तो न्यायालय, यदि वह ठीक समझे तो ऐसी भौतिक चीज का अपने निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा।