
साक्ष्य की अनुचित स्वीकृति या अस्वीकृति स्वयंमेव किसी भी मामले में नया विचारण के लिए या किसी विनिश्चय के उलटे जाने के लिए आधार नहीं होगा, यदि उस न्यायालय को, जिसके समक्ष ऐसा आक्षेप उठाया गया है, यह प्रतीत हो कि आक्षेपित और स्वीकृति उस साक्ष्य के बिना भी विनिश्चय के न्यायोचित ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य था या यह कि यदि अस्वीकृत साक्ष्य लिया भी गया होता तो उससे विनिश्चय में फेरफार नहीं होना चाहिए था।