धारा 206 से 226 अध्याय 13 भारतीय न्याय संहिता ,2023

धारा 206 से 226 अध्याय 13 भारतीय न्याय संहिता ,2023

अध्याय 13

लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में

206. समनो की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना-

जो कोई, किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील से बचने के लिए फरार हो जाता है, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसे समन, सूचना या आदेश को निकालने के लिए वैध रूप से सक्षम हो, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() समन या सूचना या आदेश किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए, या दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

207. समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना -

जो कोई, किसी लोक सेवक द्वारा, जो लोक सेवक के नाते कोई समन, सूचना या आदेश निकालने के लिए वैध रूप से सक्षम है, निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील, अपने पर या किसी अन्य व्यक्ति पर होना किसी प्रकार साशय निवारित करता है, या किसी ऐसे समन, सूचना या आदेश का किसी ऐसे स्थान में विधिपूर्वक लगाया जाना साशय निवारित करता है, या किसी ऐसे समन, सूचना या आदेश को किसी ऐसे स्थान से, जहां विधिपूर्वक लगाया हुआ है, साशय हटाता है, या किसी ऐसे लोक सेवक के प्राधिकार के अधीन की जाने वाली किसी उ‌द्घोषणा का विधिपूर्वक किया जाना साशय निवारित करता है, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसी उद्घोषणा का किया जाना निर्दिष्ट करने के लिए वैध रूप से सक्षम है, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() जहां समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए या दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

208. लोक सेवक का आदेश मानकर अनुपस्थित रहना-

जो कोई, किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्त्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस स्थान या समय पर उपस्थित होने का साशय लोप करता है, या उस स्थान से, जहाँ उपस्थित होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाता है, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

 () जहां समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

() , उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए उपस्थिति-आदेश के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपस्थित होने में साशय लोप करता है। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

() , जिला न्यायाधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपस्थित होने में साशय लोप करता है। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

209. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 के अधीन किसी उ‌द्घोषणा के जवाब में अनुपस्थित -

जो कोई, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) की धारा 84 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर उपस्थित होने में असफल रहता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से या सामुदायिक सेवा से दण्डित किया जाएगा और जहां उस धारा की उपधारा (4) के अधीन कोई ऐसी घोषणा की गई है जिसमें उसे उ‌द्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है, वहां वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

210. दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को प्रस्तुत करने का लोप -

जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को प्रस्तुत करने या परिदत्त करने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार प्रस्तुत करने या परिदत्त करने का साशय लोप करेगा, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() और जहां वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख किसी न्यायालय में प्रस्तुत या परिदत्त किया जाना हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

, जो एक जिला न्यायालय के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से आबद्ध है, उसको प्रस्तुत करने का साशय लोप करता है। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

211. सूचना या जानकारी देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या जानकारी देने का लोप-

जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर कोई सूचना या जानकारी देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, विधि द्वारा अपेक्षित रीति से और समय पर ऐसी सूचना या जानकारी देने का साशय लोप करता है, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() जहां दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या जानकारी, किसी अपराध के किए जाने के विषय में है, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() जहाँ दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या जानकारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) की धारा 394 के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अपेक्षित है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

212. मिथ्या सूचना देना-

जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर सूचना देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, उस विषय पर सच्ची सूचना के रूप में ऐसी सूचना देता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण उसके पास है, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() वह सूचना, जिसे देने के लिए वह विधिक रूप से आबद्ध है, कोई अपराध किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

() , एक भू-धारक, यह जानते हुए कि उसकी भू-सम्पदा की सीमाओं के अन्दर एक हत्या की गई है, उस जिले के मजिस्ट्रेट को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है। इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।

() , जो ग्राम चौकीदार है, यह जानते हुए कि अनजाने लोगों का एक बड़ा गिरोह के घर में, जो पड़ोस के गांव का निवासी एक धनी व्यापारी है, डकैती करने के लिए उसके गांव से होकर गया है और निकटतम पुलिस थाने के अधिकारी को उपरोक्त घटना की सूचना शीघ्र और ठीक समय पर देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, पुलिस अधिकारी को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि संदिग्ध शील के लोगों का एक गिरोह किसी भिन्न दिशा में स्थित एक दूरस्थ स्थान पर डकैती करने के लिए गांव से होकर गया है। यहां , इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।

स्पष्टीकरण-

धारा 211 में और इस धारा में, "अपराध" शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई ऐसा कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धारा अर्थात् धारा 103, धारा 105, धारा 307, धारा 309 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), धारा 310 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4) और उपधारा (5), धारा 311, धारा 312, धारा 326 के खण्ड () और खण्ड (), धारा 331 की उपधारा (4), उपधारा (6) उपधारा (7) और उपधारा (8), धारा 332 के खण्ड () और खण्ड () में से किसी धारा के अधीन दण्डनीय होता; और "अपराधी" शब्द के अन्तर्गत कोई भी ऐसा व्यक्ति आता है, जो कोई ऐसा कार्य करने का दोषी अभिकथित हो।

213. शपथ या प्रतिज्ञान से इन्कार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए -

जो कोई, सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा अपने आप को आबद्ध करने से इन्कार करता है, जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए विधिक रूप से सक्षम है कि वह व्यक्ति इस प्रकार अपने को आबद्ध करे, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

214. प्रश्न करने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक का उत्तर देने से इन्कार करना-

जो कोई, किसी लोक सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक की विधिक शक्तियों के प्रयोग में उस लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

215. कथन पर हस्ताक्षर करने से इन्कार-

जो कोई, अपने द्वारा किए गए किसी कथन पर हस्ताक्षर करने को ऐसे लोक सेवक द्वारा अपेक्षा किए जाने पर, जो उससे यह अपेक्षा करने के लिए विधिक रूप से सक्षम है कि वह उस कथन पर हस्ताक्षर करे, उस कथन पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

216. शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन-

जो कोई, किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति से, जो ऐसे शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान देने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत है, किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा विधिक रूप से आबद्ध होते हुए ऐसे लोक सेवक या यथापूर्वोक्त अन्य व्यक्ति से उस विषय के सम्बन्ध में कोई ऐसा कथन करता है, जो मिथ्या है, और जिसके मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है, या विश्वास है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।

217. इस आशय से मिथ्या सूचना देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति को क्षति करने के लिए करे-

जो कोई, किसी लोक सेवक को कोई ऐसी सूचना, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देता है कि वह उस लोक सेवक को प्रेरित करे या यह सम्भाव्य जानते हुए देता है कि वह उसको उसके द्वारा प्रेरित करेगा कि वह लोक सेवक:-

() कोई ऐसी बात करे या करने का लोप करे जिसे वह लोक सेवक, यदि उसे उस सम्बन्ध में, जिसके बारे में ऐसी सूचना दी गई है, तथ्यों की सही स्थिति का पता होता तो करता या करने का लोप करता; या

() ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिस उपयोग से किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ हो, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

दृष्टांत

() , एक मजिस्ट्रेट को यह सूचना देता है कि एक पुलिस अधिकारी, जो ऐसे मजिस्ट्रेट का अधीनस्थ है, कर्त्तव्य पालन में उपेक्षा या अवचार का दोषी है, यह जानते देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह सम्भाव्य है कि उस सूचना से वह मजिस्ट्रेट, को पदच्युत कर देगा। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

() , एक लोक सेवक को यह मिथ्या सूचना देता है कि के पास गुप्त स्थान में निषिद्ध नमक है। वह सूचना यह जानते हुए देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह जानते हुए देता है कि यह सम्भाव्य है कि उस सूचना के परिणामस्वरूप के परिसर की तलाशी ली जाएगी, जिससे को क्षोभ होगा। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

() एक पुलिस को, यह मिथ्या सूचना देता है कि एक विशिष्ट ग्राम के पास उस पर हमला किया गया है और उसे लूट लिया गया है। वह अपने पर हमलावर के रूप में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेता। किन्तु वह जानता है कि यह सम्भाव्य है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप पुलिस उस ग्राम में जांच करेगी और तलाशियां लेगी, जिससे ग्रामवासियों या उनमें से कुछ को क्षोभ होगा। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

218. लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा सम्पत्ति लिए जाने का प्रतिरोध -

जो कोई, किसी लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा किसी सम्पत्ति को ले लिए जाने का प्रतिरोध यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करता है कि वह ऐसा लोक सेवक है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

219. लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई सम्पत्ति के विक्रय में बाधा डालना-

जो कोई, ऐसी किसी सम्पत्ति के विक्रय में, जो ऐसे लोक सेवक के नाते किसी लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई है, साशय बाधा डालता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

220. लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई सम्पत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना-

जो कोई, सम्पत्ति के किसी ऐसे विक्रय में, जो लोक सेवक के नाते लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा हो रहा हो, किसी ऐसे व्यक्ति के निमित्त चाहे वह व्यक्ति वह स्वयं हो, या कोई अन्य हो, किसी सम्पत्ति का क्रय करता है या किसी सम्पत्ति के लिए बोली लगाता है, जिसके बारे में वह जानता है कि वह व्यक्ति उस विक्रय में उस सम्पत्ति के क्रय करने के बारे में किसी विधिक असमर्थता के अधीन है या ऐसी सम्पत्ति के लिए यह आशय रखकर बोली लगाता है कि ऐसी बोली लगाने से जिन बाध्यताओं के अधीन वह अपने आप को डालता है उन्हें उसे पूरा नहीं करना है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

221. लोक सेवक के लोक कत्यों के निर्वहन में बाधा डालना-

जो कोई, किसी लोक सेवक के लोक कृत्यों के निर्वहन में स्वेच्छया बाधा डालता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

222. लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो-

जो कोई, किसी लोक सेवक को, उसके लोक कर्त्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या पहुंचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुए, ऐसी सहायता देने का साशय लोप करता है, -

() वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा;

() और जहां ऐसी सहायता की मांग उससे ऐसे लोक सेवक द्वारा, जो ऐसी मांग करने के लिए विधिक रूप से सक्षम हो, न्यायालय द्वारा विधिपूर्वक निकाली गई किसी आदेशिका के निष्पादन के, या अपराध के किए जाने का निवारण करने के, या बलवे या दंगे को दबाने के, या ऐसे व्यक्ति को, जिस पर अपराध का आरोप है या जो अपराध का या विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने का दोषी है, पकड़ने के प्रयोजनों से की जाए, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

223. लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा-

जो कोई, यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिए या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबन्ध के अधीन, किसी सम्पत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए निर्दिष्ट किया गया है, ऐसे निदेश की अवज्ञा करता है,-

() यदि ऐसी अवज्ञा विधिपूर्वक नियोजित किन्हीं व्यक्तियों को बाधा, क्षोभ या क्षति, या बाधा, क्षोभ या क्षति का जोखिम कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

() और जहां ऐसी अवज्ञा मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, या बलवा या दंगा कारित करती है, या कारित करने की प्रवृत्ति रखती है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण-

यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी का आशय अपहानि उत्पन्न करने का हो या उसके ध्यान में यह हो कि उसकी अवज्ञा करने से अपहानि होना सम्भाव्य है। यह पर्याप्त है कि जिस आदेश की वह अवज्ञा करता है, उस आदेश का उसे ज्ञान है, और यह भी ज्ञान है कि उसके अवज्ञा करने से अपहानि उत्पन्न होती या होनी सम्भाव्य है।

दृष्टांत

कोई आदेश, जिसमें यह निदेश है कि अमुक धार्मिक जुलूस अमुक सड़क से होकर निकले, ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किया जाता है, जो ऐसा आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है। यह जानते हुए उस आदेश की अवज्ञा करता है, और उसके द्वारा बलवे का संकट कारित करता है। ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

224. लोक सेवक को क्षति करने की धमकी-

जो कोई, किसी लोक सेवक को या ऐसे किसी व्यक्ति को जिससे उस लोक सेवक के हितबद्ध होने का उसे विश्वास हो, इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देता है कि उस लोक सेवक को उत्प्रेरित किया जाए कि वह ऐसे लोक सेवक के कृत्यों के प्रयोग से संसक्त कोई कार्य करे, या करने से प्रविरत रहे, या करने में विलम्ब करे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

225. लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी-

जो कोई, किसी व्यक्ति को इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देता है कि वह उस व्यक्ति को उत्प्रेरित करे कि वह किसी क्षति से संरक्षा के लिए कोई वैध आवेदन किसी ऐसे लोक सेवक से करने से विरत रहे, या छोड़ दे, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसी संरक्षा करने या कराने के लिए विधिक रूप से सशक्त हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

226. विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने या प्रयोग करने से विरत रहने के लिए आत्महत्या करने का प्रयत्न -

जो कोई, किसी लोक सेवक को अपने शासकीय कर्तव्य को करने के लिए बाध्य करने या शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन करने से विरत रहने के आशय से आत्महत्या का प्रयत्न करता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, या सामुदायिक सेवा से दण्डनीय होगा।

 

 

 

 

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