
वह व्यक्ति किसी बात को किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, जो—
(क) उस बात को करने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाता है; या
(ख) उस बात को करने के लिए किसी षड्यंत्र में एक या अधिक अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के साथ सम्मिलित होता है, यदि उस षड्यंत्र के अनुसरण में, और उस बात को करने के उद्देश्य से, कोई कार्य या अवैध लोप घटित हो जाए ; या
(ग) उस बात को किए जाने में किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा जानबूझकर सहायता करता है ।
कोई व्यक्ति, जो जानबूझकर मिथ्या निरूपण द्वारा, या किसी तात्विक तथ्य, जिसे प्रकट करने के लिए वह आबद्ध है, जानबूझकर छिपाने द्वारा, स्वेच्छया किसी बात का किया जाना कारित या उपाप्त करता है, या कारित या उपाप्त करने का प्रयत्न करता है, यह कहा जाता है कि वह उस कृत्य का किया जाना उकसाता है।
क, एक लोक अधिकारी, न्यायालय के वारण्ट द्वारा य को पकड़ने के लिए प्राधिकृत है। ख उस तथ्य को जानते हुए और यह भी जानते हुए कि ग, य, नहीं है, क को जानबूझकर यह निरूपित करता है कि ग, य है, और उसके द्वारा जानबूझकर क से ग को पकड़वाता है। यहाँ ख, ग के पकड़े जाने का उकसाने द्वारा दुष्प्रेरण करता है।
जो कोई या तो किसी कार्य को किए जाने से पूर्व या किए जाने के समय, उस कार्य के किए जाने को सुकर बनाने के लिए कोई बात करता है और उसके द्वारा उसके किए जाने को सुकर बनाता है, वह उस कार्य को करने में सहायता करता है, यह कहा जाता है।
वह व्यक्ति अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है या ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध होता, यदि वह कार्य अपराध करने के लिए विधि अनुसार समर्थ व्यक्ति द्वारा उसी आशय या ज्ञान से, जो दुष्प्रेरक का है, किया जाता।
किसी कार्य के अवैध लोप का दुष्प्रेरण अपराध की कोटि में आ सकेगा, चाहे दुष्प्रेरक उस कार्य को करने के लिए स्वयं आबद्ध न हो।
दुष्प्रेरण का अपराध गठित होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरित कार्य किया जाए या अपराध गठित करने के लिए अपेक्षित प्रभाव कारित हो।
(क) ग की हत्या करने के लिए ख को क उकसाता है। ख वैसा करने से इन्कार कर देता है। क हत्या करने के लिए ख के दुष्प्रेरण का दोषी है।
(ख) घ की हत्या करने के लिए ख को क उकसाता है। ख ऐसी उकसाहट के अनुसरण में घ को घायल करता है। घ का घाव अच्छा हो जाता है। क हत्या करने के लिए ख को उकसाने का दोषी है।
यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरित व्यक्ति अपराध करने के लिए विधि द्वारा समर्थ हो, या उसका वही दूषित आशय या ज्ञान हो, जो दुष्प्रेरक का है, या कोई भी दूषित आशय या ज्ञान हो।
(क) क दूषित आशय से एक शिशु या विकृतचित्त व्यक्ति को वह कार्य करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, जो अपराध होगा, यदि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाए जो कोई अपराध करने के लिए विधि द्वारा समर्थ है और वही आशय रखता है जो कि क का है। यहां, चाहे वह कार्य किया जाए या न किया जाए, क अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है।
(ख) य की हत्या करने के आशय से ख को, जो सात वर्ष से कम आयु का शिशु है, वह कार्य करने के लिए क उकसाता है जिससे य की मृत्यु कारित हो जाती है। ख दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप वह कार्य क की अनुपस्थिति में करता है और उससे य की मृत्यु कारित करता है। यहाँ यद्यपि ख वह अपराध करने के लिए विधि द्वारा समर्थ नहीं था, तथापि क उसी प्रकार से दण्डनीय है, मानो ख वह अपराध करने के लिए विधि द्वारा समर्थ हो और उसने हत्या की हो, और इसलिए क मृत्यु-दण्ड से दण्डनीय है।
(ग) ख को एक निवासगृह में आग लगाने के लिए क उकसाता है। ख अपनी चित्त-विकृति के परिणामस्वरूप उस कार्य की प्रकृति या यह कि वह जो कुछ कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है जानने में असमर्थ होने के कारण क के उकसाने के परिणामस्वरूप उस घर में आग लगा देता है। ख ने कोई अपराध नहीं किया है, किन्तु क एक निवासगृह में आग लगाने के अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उस अपराध के लिए उपबंधित दण्ड से दण्डनीय है।
(घ) क चोरी कराने के आशय से य के कब्जे में से य की सम्पत्ति लेने के लिए ख को उकसाता है । ख को यह विश्वास करने के लिए क उत्प्रेरित करता है कि वह सम्पति क की है । ख उस सम्पत्ति का इस विश्वास से कि वह क की सम्पत्ति है, य के कब्जे में से सद्भावपूर्वक ले लेता है । ख इस भ्रम के अधीन कार्य करते हुए, उसे बेईमानी से नहीं लेता, और इसलिए चोरी नहीं करता किन्तु क चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उसी दण्ड से दण्डनीय है, मानो ख ने चोरी की हो ।
अपराध का दुष्प्रेरण अपराध होने के कारण ऐसे दुष्प्रेरण का दुष्प्रेरण भी अपराध है।
ग को य की हत्या करने को उकसाने के लिए ख को क उकसाता है। ख तदनुसार य की हत्या करने के लिए ग को उकसाता है और ख के उकसाने के परिणामस्वरूप ग उस अपराध को करता है। ख अपने अपराध के लिए हत्या के दण्ड से दण्डनीय है, और क ने उस अपराध को करने के लिए ख को उकसाया, इसलिए क भी उसी दण्ड से दण्डनीय है।
षड्यंत्र द्वारा दुष्प्रेरण का अपराध करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरक उस अपराध को करने वाले व्यक्ति के साथ मिलकर उस अपराध की योजना बनाए । यह पर्याप्त हैं कि उस षड्यंत्र में सम्मिलित हो जिसके अनुसरण में वह अपराध किया जाता है।
य को विष देने के लिए क एक योजना ख से मिलकर बनाता है। यह सहमति हो जाती है कि क विष देगा। ख तब यह वर्णित करते हुए ग को वह योजना समझा देता है कि कोई तीसरा व्यक्ति विष देगा, किन्तु क का नाम नहीं लेता। ग विष उपाप्त करने के लिए सहमत हो जाता है, और उसे उपाप्त करके समझाए गए प्रकार से प्रयोग में लाने के लिए ख को परिदत्त करता है। क विष देता है, परिणामस्वरूप य की मृत्यु हो जाती है। यहां, यद्यपि क और ग ने मिलकर षड्यंत्र नहीं रचा है, तो भी ग उस षड्यंत्र में सम्मिलित रहा है, जिसके अनुसरण में य की हत्या की गई है। इसलिए ग ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है और हत्या के लिए दण्ड से दण्डनीय है।
कोई व्यक्ति, जो इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो भारत से बाहर और उससे परे रहकर किसी ऐसे कार्य के किए जाने का भारत में दुष्प्रेरण करता है जो अपराध होगा, यदि भारत में किया जाए।
क भारत में ख को, जो भ देश में विदेशीय है, उस देश में हत्या करने के लिए उकसाता है । क हत्या के दुष्प्रेरण का दोषी है।
कोई व्यक्ति, जो इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो भारत से बाहर और उससे परे किसी ऐसे कार्य के किए जाने का भारत में रहकर दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध होगा, यदि भारत में किया जाए।
क, भ देश में ख को भारत में हत्या करने के लिए उकसाता है । क हत्या के दुष्प्रेरण का दोषी है।
जो कोई, किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह उस दण्ड से दण्डित किया जाएगा, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है।
कोई कार्य या अपराध, दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब कहा जाता है, जब वह उस उकसाहट के परिणामस्वरूप या उस षड्यंत्र के अनुसरण में या उस सहायता से किया जाता है, जिससे दुष्प्रेरण गठित होता है।
(क) ख को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए क उकसाता है। ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप, वह अपराध करता है। क उस अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उसी दण्ड से दण्डनीय है, जिससे ख है।
(ख) य को विष देने का षड्यंत्र क और ख रचते हैं। क उस पड्यंत्र के अनुसरण में विष उपाप्त करता है और उसे ख को इसलिए परिदत्त करता है कि वह उसे य को दे। ख उस षड्यंत्र के अनुसरण में वह विष क की अनुपस्थिति में य को देता है और उसके द्वारा य की मृत्यु कारित कर देता है। यहाँ, ख हत्या का दोषी है। क षड्यंत्र द्वारा उस अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और वह हत्या के लिए दण्ड से दण्डनीय है।
जो कोई, किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति ने दुष्प्रेरक के आशय या ज्ञान से भिन्न आशय या ज्ञान से वह कार्य किया हो, तो वह उसी दण्ड से दण्डित किया जाएगा, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, जो किया जाता, यदि वह कार्य दुष्प्रेरक के ही आशय या ज्ञान से, न कि किसी अन्य आशय या ज्ञान से, किया जाता।
जब किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता है, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो :
परन्तु यह तव जबकि किया गया कार्य दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम था और उस उकसाहट के असर के अधीन या उस सहायता से या उस षड्यंत्र के अनुसरण में किया गया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है।
(क) एक शिशु को य के भोजन में विष डालने के लिए क उकसाता है, और उस प्रयोजन से उसे विष परिदत्त करता है। वह शिशु उस उकसाहट के परिणामस्वरूप भूल से म के भोजन में, जो य के भोजन के पास रखा हुआ है, विष डाल देता है। यहाँ, यदि वह शिशु क के उकसाने के असर के अधीन उस कार्य को कर रहा था, और किया गया कार्य उन परिस्थितियों में उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम है, तो क उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस शिशु को म के भोजन में विष डालने के लिए उकसाया हो।
(ख) ख को य का घर जलाने के लिए क उकसाता है। ख उस घर को आग लगा देता है और उसी समय वहाँ सम्पत्ति की चोरी करता है। क यद्यपि घर को जलाने के दुष्प्रेरण का दोषी है, किन्तु चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी नहीं है; क्योंकि वह चोरी एक अलग कार्य थी और उस घर के जलाने का अधिसम्भाव्य परिणाम नहीं थी।
(ग) ख और ग को बसे हुए घर में अर्धरात्रि में लूट के प्रयोजन से भेदन करने के लिए क उकसाता है, और उनको उस प्रयोजन के लिए आयुध देता है। ख और ग वह गृहभेदन करते हैं, और य द्वारा जो निवासियों में से एक है, प्रतिरोध किए जाने पर, य की हत्या कर देते हैं। यहां, यदि वह हत्या उस दुष्प्रेरण का अधिसम्भाव्य परिणाम थी, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है।
यदि वह कार्य, जिसके लिए दुष्प्रेरक धारा 51 के अधीन है, दुष्प्रेरित कार्य के अतिरिक्त किया जाता है और वह कोई सुभिन्न अपराध गठित करता है, तो दुष्प्रेरक उन अपराधों में से प्रत्येक के लिए दण्डनीय है ।
ख को एक लोक सेवक द्वारा किए गए करस्थम् का बलपूर्वक प्रतिरोध करने के लिए क उकसाता है। ख परिणामस्वरूप उस करस्थम् का प्रतिरोध करता है। प्रतिरोध करने मे ख करस्थम् का निष्पादन करने वाले अधिकारी को स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है। ख ने करस्थम् का प्रतिरोध करने और स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के दो अपराध किए हैं। इसलिए ख दोनों अपराधों के लिए दण्डनीय है, और यदि क यह सम्भाव्य जानता था कि उस करस्थम् का प्रतिरोध करने में ख स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, तो क भी उनमें से प्रत्येक एक अपराध के लिए दण्डनीय होगा।
जब किसी कार्य का दुष्प्रेरण, दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप, जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेरक द्वारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित करता है, तब दुष्प्रेरक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया है, परन्तु यह तब जब कि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से यह प्रभाव कारित होना सम्भाव्य है।
य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता है। ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित करता है। परिणामतः य की मृत्यु हो जाती है। यहाँ, यदि क यह जानता था कि दुष्प्रेरित घोर उपहति से मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है।
जब कभी कोई व्यक्ति, जो अनुपस्थित होने पर दुष्प्रेरक के नाते दण्डनीय होता, उस समय उपस्थित हो, जब वह कार्य या अपराध किया जाए जिसके लिए वह दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दण्डनीय होता, तब यह समझा जाएगा कि उसने ऐसा कार्य या अपराध किया है।
जो कोई, मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए कोई अभिव्यवत उपबन्ध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और यदि ऐसा कोई कार्य कर दिया जाए, जिसके लिए दुष्प्रेरक उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दायित्व के अधीन हो और जिससे किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो, तो दुष्प्रेरक दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
ख को य की हत्या करने के लिए क उकसाता है। वह अपराध नहीं किया जाता है। यदि य की हत्या ख कर देता है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास के दण्ड से दण्डनीय होता। इसलिए, क कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय है और जुर्माने से भी दण्डनीय है; और यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप य को कोई उपहति हो जाती है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
जो कोई, कारावास से दण्डनीय किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा. यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए इस संहिता के अधीन कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि के एक चौथाई भाग तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा; और यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है, जिसका कर्तव्य ऐसे अपराध के लिए किए जाने को निवारित करना है, तो वह दुष्प्रेरक उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि के आधे भाग तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(क) मिथ्या साक्ष्य देने के लिए ख को क उकसाता है। यहाँ, यदि ख मिथ्या साक्ष्य नहीं देता है, तो भी क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, और वह तदनुसार दण्डनीय है।
(ख) क, एक पुलिस अधिकारी, जिसका कर्त्तव्य लूट को निवारित करना है, लूट किए जाने का दुष्प्रेरण करता है। यहाँ, यद्यपि वह लूट नहीं की जाती, क उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे से, और जुर्माने से भी, दण्डनीय है।
(ग) क द्वारा, जो एक पुलिस अधिकारी है, जिसका कर्त्तव्य लूट को निवारित करना है, उस अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण ख करता है, यहाँ, यद्यपि वह लूट नहीं की जाती है, ख लूट के अपराध के लिए उपबन्धित कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे से, और जुर्माने से भी, दण्डनीय है।
जो कोई, जनसाधारण द्वारा, या दस से अधिक व्यक्तियों की किसी भी संख्या या वर्ग द्वारा किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा।
क, एक लोक स्थान में एक प्लेकार्ड चिपकाता है, जिसमें किसी पंथ को, जिसमें दस से अधिक सदस्य हैं, किसी विरोधी पंथ के सदस्यों पर, जब वे जुलूस निकालने में लगे हुए हों, आक्रमण करने के प्रयोजन से, किसी निश्चित समय और स्थान पर मिलने के लिए उकसाया गया है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
जो कोई, मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय किसी अपराध का किया जाना सुकर बनाने के आशय से या यह जानते हुए सम्भाव्यतः उसके द्वारा सुकर बनाएगा, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या लोप द्वारा या विगूढ़न या किसी अन्य सूचना प्रच्छन्न साधन के उपयोग द्वारा स्वेच्छ्या छिपाता है या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है,-
(क) यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी; या
(ख) यदि अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
क, यह जानते हुए कि ख स्थान पर डकैती पड़ने वाली है, मजिस्ट्रेट को यह मिथ्या सूचना देता है कि डकैती ग स्थान पर पड़ने वाली है, जो विपरीत दिशा में है और इस आशय से कि उसके द्वारा उस अपराध का किया जाना सुकर बनाए, मजिस्ट्रेट को भुलावा देता है। डकैती परिकल्पना के अनुसरण में ख स्थान पर पड़ती है। क इस धारा के अधीन दण्डनीय है।
जो कोई, लोक सेवक होते हुए किसी अपराध का किया जाना, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है, सुकर बनाने के आशय से या यह जानते हुए सम्भाव्यतः उसके द्वारा सुकर बनाएगा, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या लोप द्वारा या विगूढ़न या किसी अन्य सूचना प्रच्छन्न साधन के उपयोग द्वारा स्वेच्छया छिपाता है या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है,
(क) यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से; या
(ख) यदि वह अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी; या
(ग) यदि वह अपराध नहीं किया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
क, एक पुलिस अधिकारी, लूट किए जाने से सम्बन्धित सभी परिकल्पनाओं की, जो उसको ज्ञात हो जाए, सूचना देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए और यह जानते हुए कि ख लूट करने की परिकल्पना बना रहा है, उस अपराध के किए जाने को इस प्रकार सुकर बनाने के आशय से ऐसी सूचना देने का लोप करता है। यहां क ने ख की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी अवैध लोप द्वारा छिपाया है, और वह इस धारा के उपबन्ध के अनुसार दण्ड के लिए दायी है।
60. कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना -
जो कोई, किसी अपराध का किया जाना, जो कारावास से दण्डनीय है, सुकर बनाने के आशय से या यह जानते हुए सम्भाव्यतः उसके द्वारा सुकर बनाएगा, ऐसे अपराध के किए जाने की किसी परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करेगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है, -
(क) यदि ऐसा अपराध कर दिया जाए, तो वह उस अपराध के लिए उपबंन्धित भांति के कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकेगी; और
(ख) यदि वह अपराध नहीं किया जाए, तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आठवें भाग तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
1. जब दो या अधिक व्यक्ति-
(क) कोई अवैध कार्य; या
(ख) कोई ऐसा कार्य, जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा, करने या करवाने के लिए सामान्य उद्देश्य से सहमत होते हैं, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड्यंत्र कहलाती है:
परन्तु किसी अपराध को करने की सहमति के सिवाय कोई सहमति आपराधिक षड्यंत्र तब तक न होगी, जब तक कि सहमति के अतिरिक्त कोई कार्य उसके अनुसरण में उस सहमति के एक या अधिक पक्षकारों द्वारा नहीं कर दिया जाता।
यह तत्वहीन है कि अवैध कार्य ऐसी सहमति का चरम उद्देश्य है या उस उद्देश्य का आनुषंगिक मात्र है।
2. जो कोई-
(क) मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होगा, यदि ऐसे षड्यंत्र के दण्ड के लिए इस संहिता में कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है, तो वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था;
(ख) पूर्वोक्त रूप से दंडनीय किसी अपराध को करने के आपराधिक षड्यंत्र से भिन्न किसी आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से अधिक की नहीं होगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
जो कोई, इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किए जाने का प्रयत्न करता है, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करता है, जहां कि ऐसे प्रयत्न के दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं किया गया है, वहां वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भाँति के कारावास से उस अवधि के लिए जो, यथास्थिति, आजीवन कारावास के आधे तक की या उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि के आधे तक की हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
(क) क, एक सन्दूक तोड़कर खोलता है और उसमें से कुछ आभूषण चुराने का प्रयत्न करता है। सन्दूक इस प्रकार खोलने के पश्चात्, उसे ज्ञात होता है कि उसमें कोई आभूषण नहीं है। उसने चोरी करने की दिशा में कार्य किया है और इसलिए, वह इस धारा के अधीन दोषी है।
(ख) क, य की जेब में अपना हाथ डालकर य की जेब से चुराने का प्रयत्न करता है । य की जेब में कुछ न होने के परिणामस्वरूप क अपने प्रयत्न में असफल रहता है । क इस धारा के अधीन दोषी है ।