
कोई पुरुष,-
(क) किसी महिला की योनि, उसके मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में अपने लिंग का किसी भी सीमा तक प्रवेशन करता है या उससे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है; या
(ख) किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में ऐसी कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग, जो लिंग न हो, किसी भी सीमा तक अनुप्रविष्ट करता है या उससे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है; या
(ग) किसी महिला के शरीर के किसी भाग का इस प्रकार हस्तसाधन करता है जिससे कि उस महिला की योनि, मूत्रमार्ग, गुदा या शरीर के किसी भाग में प्रवेशन कारित किया जा सके या उससे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है; या
(घ) किसी महिला की योनि, गुदा, मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या उससे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है, तो उसके बारे में यह कहा जाएगा कि उसने बलात्संग किया है, जहां ऐसा निम्नलिखित सात भांति की परिस्थितियों में से किसी परिस्थिति में किया जाता है:-
i. उस महिला की इच्छा के विरुद्ध ;
ii. उस महिला की सम्मति के बिना;
iii.उस महिला की सम्मति से, जबकी उसकी सम्मति उसे या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे वह हितबद्ध है, मृत्यु या उपहति के भय में डालकर अभिप्राप्त की गई है;
iv. उस महिला की सम्मति से, जबकि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस महिला का पति नहीं है और उस महिला ने सम्मति इस कारण दी है कि वह यह विश्वास करती है कि वह ऐसा अन्य पुरुष है जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है;
v. उस महिला की सम्मति से जब ऐसी सम्मति देने के समय वह चित- विकृति या मत्तता के कारण या उस पुरुष द्वारा व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से कोई संवेदनशून्य करने वाला या अस्वास्थ्यकर पदार्थ दिए जाने के कारण, उस बात की प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ है, जिसके बारे में वह सम्मति देती है,
vi. उस महिला की सम्मति से या उसके बिना, जब वह अठारह वर्ष से कम आयु की है;
vii. जब वह महिला सम्मति देने में असमर्थ है ।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "योनि" के अंतर्गत वृहत् भर्गोष्ठ भी है।
" सम्मति" से कोई स्पष्ट स्वैच्छिक सहमति अभिप्रेत है, जब महिला शब्दों, संकेतों अथवा मौखिक या अमौखिक किसी प्रकार की संसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट लैंगिक कृत्य में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करती है :
परन्तु ऐसी महिला के बारे में, जो प्रवेशन के कृत्य का भौतिक रूप से विरोध नहीं करती है, मात्र इस तथ्य के कारण यह नहीं समझा जाएगा कि उसने लैंगिक क्रियाकलाप के प्रति सम्मति प्रदान की है।
किसी चिकित्सीय प्रक्रिया या अंतःप्रवेशन से बलात्संग गठित नहीं होगा।
किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ मैथुन या लैंगिक कृत्य बलात्संग नहीं है, यदि पत्नी अठारह वर्ष से कम आयु की नहीं है।
1. (1) जो कोई, उपधारा (2) में उपबंधित मामलों के सिवाय, बलात्संग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
2. जो कोई-
(क) पुलिस अधिकारी होते हुए-
i. उस पुलिस थाने की सीमाओं के भीतर, जिसमें ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त है, बलात्संग करता है; या
ii. किसी थाने के परिसर में बलात्संग करता है; या
iii. ऐसे पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में या ऐसे पुलिस अधिकारी के अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में, किसी महिला से बलात्संग करता है; या
(ख) लोक सेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक की अभिरक्षा में या ऐसे लोक सेवक के अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में की किसी महिला से बलात्संग करता है; या
(ग) केंद्रीय या किसी राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में अभिनियोजित सशस्त्र बलों का सदस्य होते हुए, उस क्षेत्र में बलात्संग करता है; या
(घ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान के या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषण गृह, स्थान या संस्था के किसी अंतःवासी से बलात्संग करता है; या
(ङ) किसी अस्पताल के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, उस अस्पताल में किसी महिला से बलात्संग करता है; या
(च) किसी महिला का नातेदार, संरक्षक या उसका अध्यापक या उसके प्रति विश्वास या प्राधिकार की हैसियत में का कोई व्यक्ति होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है; या
(छ) सांप्रदायिक या पंथीय हिंसा के दौरान बलात्संग करता है; या
(ज) किसी महिला से यह जानते हुए कि वह गर्भवती है, बलात्संग करता है; या
(झ) उस महिला से, जो सम्मति देने में असमर्थ है, बलात्संग करता है; या
(ञ) किसी महिला पर नियंत्रण या प्रभाव रखने की स्थिति में होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है; या
(ट) मानसिक या शारीरिक असमर्थता से ग्रसित किसी महिला से बलात्संग करता है; या
(ठ) बलात्संग करते समय किसी महिला को गंभीर शारीरिक अपहानि कारित करता है या अपंग बनाता है या विद्रूपित करता है या उसके जीवन को संकटापन्न करता है; या
(ड) उसी महिला से बार-बार बलात्संग करेगा,
तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति का शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "सशस्त्र बल" से नौसैना, सेना और वायु सेना अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन गठित सशस्त्र बलों का कोई सदस्य भी है, जिसमें ऐसे अर्धसैनिक बल और कोई सहायक बल भी समिलित हैं, जो केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन हैं,
(ख) "अस्पताल" से अस्पताल का अहाता अभिप्रेत है और इसके अतर्गत किसी ऐसी संस्था का अहाता भी है, जो स्वास्थ्य लाभ कर रहे व्यक्तियों को या चिकित्सीय देखरेख या पुनर्वास की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों के प्रवेश और उपचार करने के लिए है;
(ग) "पुलिस अधिकारी" का वही अर्थ होगा जो पुलिस अधिनियम, 1861 (1861 का 5) के अधीन "पुलिस" पद में उसका है;
(घ) "महिलाओं या शिशुओं की संस्था" से ऐसी संस्था अभिप्रेत है चाहे वह अनाथालय या उपेक्षित महिलाओं या शिशुओं के लिए घर या विधवा आश्रम या किसी अन्य नाम से ज्ञात कोई संस्था हो, जो महिलाओं और शिशुओं को ग्रहण करने और उनकी देखभाल करने के लिए स्थापित और अनुरक्षित है।
1. जो कोई, सोलह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा:
परन्तु ऐसा जुर्माना, पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
2. जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत है, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, या मृत्युदण्ड से, दण्डित किया जाएगा :
परन्तु ऐसा जुर्माना, पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
जो कोई, धारा 64 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन दंडनीय कोई अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति पहुंचाता है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या जिसके कारण उस महिला की दशा सतत् विकृतशील हो जाती है, तो वह ऐसी अवधि के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, या मृत्युदंड से, दण्डित किया जाएगा।
जो कोई, अपनी पत्नी के साथ, उसकी सम्मति के बिना, मैथुन करेगा, जो पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा, उससे पृथक् रह रही है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
इस धारा में, "मैथुन' से धारा 63 के खंड (क) से खंड (घ) में वर्णित कोई कृत्य अभिप्रेत है।
जो कोई,-
(क) प्राधिकार की किसी स्थिति में या किसी वैश्वासिक संबंध में रखते हुए; या
(ख) लोक सेवक होते हुए; या
(ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषणगृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान का या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक होते हुए; या
(घ) अस्पताल के प्रबंधतंत्र या किसी अस्पताल का कर्मचारिवृंद होते हुए, ऐसी किसी महिला को, जो या तो उसकी अभिरक्षा में है या उसके भारसाधन के अधीन है या परिसर में उपस्थित है, अपने साथ मैथुन करने हेतु, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, उत्प्रेरित या विलुब्ध करने के लिए ऐसी स्थिति या वैश्वासिक संबंध का दुरुपयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
इस धारा में, "मैथुन' से धारा 63 के खंड (क) से खंड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत होगा।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा|
किसी कारागार, प्रतिप्रेषणगृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के संबंध में, "अधीक्षक" के अंतर्गत कोई ऐसा व्यक्ति आता है, जो ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषणगृह, स्थान या संस्था में ऐसा कोई पद धारण करता है, जिसके आधार पर वह उसके अंतः वासियों पर किसी प्राधिकार या नियंत्रण का प्रयोग कर सकता है।
" अस्पताल" और "महिलाओं या शिशुओं की संस्था" पदों का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खण्ड (ख) और खंड (घ) में उनका है।
जो कोई, प्रवंचनापूर्ण साधनों द्वारा या किसी महिला को विवाह करने का वचन देकर, उसे पूरा करने के किसी आशय के बिना, उसके साथ मैथुन करता है, ऐसा मैथुन बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, तो वह दोनों में से किसी भाँति के ऐसी अवधि के कारावास से जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
" प्रवंचनापूर्ण साधनों" में, नियोजन या प्रोन्नति, या पहचान छिपाकर विवाह करने के लिए उत्प्रेरणा या उनका मिथ्या वचन सम्मिलित है।
1. जहां किसी महिला से, एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह ऐसी अवधि के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि वीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा:
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा:
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
2. जहां अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए, बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत है, और जुर्माने से, या मृत्युदण्ड से, दण्डनीय होगा:
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा:
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
जो कोई, धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 70 के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पूर्व में दोषसिद्ध किया गया है और तत्पश्चात् उक्त धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है, तो वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, या मृत्युदंड से, दण्डित किया जाएगा।
1. जो कोई, किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 या धारा 69 या धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है मुद्रित या प्रकाशित करता है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से दण्डित किया जायेगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा।
2. उपधारा (1) की किसी भी बात का विस्तार किसी नाम या अन्य बात के मुद्रण या प्रकाशन पर यदि उससे पीड़ित व्यक्ति की पहचान हो सकती है, तब नहीं होता है जब ऐसा मुद्रण या प्रकाशन-
(क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के या ऐसे अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के, जो ऐसे अन्वेषण के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक कार्य करता है, द्वारा या उसके लिखित आदेश के अधीन किया जाता है; या
(ख) पीड़ित व्यक्ति द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है; या
(ग) जहां पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या वह शिशु या विकृत चित है, वहां पीड़ित व्यक्ति के निकट संबंधी द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है:
परन्तु निकट संबंधी द्वारा कोई भी ऐसा प्राधिकार किसी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन के अध्यक्ष या सचिव से, चाहे उसका जो भी नाम हो, से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा।
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन" से केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में मान्यताप्राप्त कोई समाज कल्याण संस्था या संगठन अभिप्रेत है।
जो कोई, धारा 72 में निर्दिष्ट किसी अपराध की बाबत किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के सम्बन्ध में, कोई बात उस न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना मुद्रित या प्रकाशित करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दण्डित किया जाएगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा।
किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन, इस धारा के अर्थ के अंतर्गत अपराध की कोटि में नहीं आता है।
जो कोई, किसी महिला की लज्जा भंग करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि उसके द्वारा वह उसकी लज्जा भंग करेगा, उस महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दण्डित किया जाएगा, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा।
1. कोई पुरुष, निम्नलिखित कृत्यों में से कोई कृत्य, अर्थात् :-
i. शारीरिक स्पर्श और अग्रक्रियाएं करता है, जिनमें अवांछनीय और स्पष्ट लैंगिक संबंध बनाने का प्रस्ताव अंतर्वलित है, या
ii. लैंगिक स्वीकृति के लिए कोई मांग या अनुरोध करता है; या
iii. किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध अश्लील साहित्य दिखाता है; या
iv. लैंगिक आभासी टिप्पणियां करता है, तो वह लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा।
2. कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) में विनिर्दिष्ट अपराध करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
3. कोई पुरुष, जो उपधारा (1) के खंड (iv) में विनिर्दिष्ट अपराध करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा:
जो कोई, किसी महिला को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिए बाध्य करने के आशय से उस पर हमला करता है या उसके प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करता है या ऐसे कृत्य का दुष्प्रेरण करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
जो कोई, किसी निजी कार्य में लगी हुई किसी महिला को, उन परिस्थितियों में, जिनमें वह प्रायः यह प्रत्याशा करती है कि उसे देखा नहीं जा रहा है, एकटक देखता है या उस कृत्य में लिप्त व्यक्ति या उस कृत्य में लिप्त व्यक्ति के कहने पर कोई अन्य व्यक्ति उसका चित्र खींचता है या उस चित्र को प्रसारित करता है, तो प्रथम दोषसिद्धि पर, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती किसी दोषसिद्धि पर, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "निजी कार्य" के अंतर्गत ताकने का कोई ऐसा कृत्य आता है जो ऐसे किसी स्थान में किया जाता है, जिसके संबंध में, परिस्थितियों के अधीन, युक्तियुक्त रूप से यह प्रत्याशा की जाती है कि वहां एकांतता होगी और जहां कि पीड़िता के जननांगों, नितंबों या वक्षस्थलों को अभिदर्शित किया जाता है या केवल अधोवस्त्र से ढंका जाता है या जहां पीड़िता किसी शौचघर का प्रयोग कर रही है; या जहां पीड़िता ऐसा कोई लैंगिक कृत्य कर रही है जो ऐसे प्रकार का नहीं है जो साधारणतया सार्वजनिक तौर पर किया जाता है।
जहां पीड़िता, चित्रों या किसी अभिनय के चित्र को खींचने के लिए सहमति देती है, किन्तु अन्य व्यक्तियों को उन्हें प्रसारित करने की सहमति नहीं देती है और जहां उस चित्र या अभिनय का प्रसारण किया जाता है वहां ऐसे प्रसारण को इस धारा के अधीन अपराध माना जाएगा।
1. ऐसा कोई पुरुष, जो—
i. किसी महिला का उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारंबार पीछा करता है और स्पर्श करता है या स्पर्श करने का प्रयत्न करता है; या
ii. किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलैक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है, पीछा करने का अपराध करता है:
परंतु ऐसा आचरण पीछा करने की कोटि में नहीं आएगा, यदि वह पुरुष, जो ऐसा करता है, यह साबित कर देता है कि-
iii. ऐसा कार्य अपराध के निवारण या पता लगाने के प्रयोजन के लिए किया गया था और पीछा करने वाले अभियुक्त पुरुष को राज्य द्वारा उस अपराध के निवारण और पता लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था; या
iv. ऐसा कार्य किसी विधि के अधीन किया गया था या किसी विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा अधिरोपित किसी शर्त या अपेक्षा का पालन करने के लिए किया गया था; या
v. विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण युक्तियुक्त और न्यायोचित था।
2. जो कोई, पीछा करने का अपराध कारित करता है, तो प्रथम दोषसिद्धि पर, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और द्वितीय या पश्चात्वर्ती किसी दोषसिद्धि पर, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
जो कोई, किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहता है, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करता है, या कोई वस्तु किसी रूप में प्रदर्शित करता है, इस आशय से कि ऐसी महिला द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाए, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाए, या ऐसी महिला की एकान्तता का अतिक्रमण करता है, वह साधारण कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा।
1. जहाँ किसी महिला की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति द्वारा या उसके पति के किसी नातेदार द्वारा, दहेज की किसी मांग के लिए, या उसके सम्बन्ध में, उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था, वहाँ ऐसी मृत्यु को "दहेज मृत्यु" कहा जाएगा, और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जाएगा।
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "दहेज" का वही अर्थ है, जो दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (1961 का 28) की धारा 2 में है।
2. जो कोई दहेज मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।
प्रत्येक पुरुष, किसी ऐसी महिला को, जो विधिपूर्वक उससे विवाहित न हो, प्रवंचना से यह विश्वास कारित कराता है कि वह विधिपूर्वक उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस महिला से, अपने साथ सहवास या मैथुन कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
1. जो कोई, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए ऐसी दशा में विवाह करता है जिसमें ऐसा विवाह इस कारण से शून्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवनकाल में होता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
इस उपधारा का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति पर नहीं है, जिसका ऐसे पति या पत्नी के साथ विवाह सक्षम अधिकारिता के न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है, और न ही किसी ऐसे व्यक्ति पर है, जो पूर्व पति या पत्नी के जीवनकाल में विवाह कर लेता है, यदि ऐसा पति या पत्नी उस पश्चात्वर्ती विवाह के समय ऐसे व्यक्ति से सात वर्ष तक निरन्तर दूर रहा है, और उस समय के भीतर ऐसे व्यक्ति द्वारा यह नहीं सुना गया है कि वह जीवित है, परन्तु यह तब जब कि ऐसा पश्चात्वर्ती विवाह करने वाला व्यक्ति उस विवाह के होने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिसके साथ ऐसा विवाह होता है, तथ्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, जहाँ तक कि उनका ज्ञान उसको हो, से अवगत करा दे।
2. जो कोई, अपने पूर्व विवाह के तथ्य को उस व्यक्ति से छिपाकर, उससे पश्चात्वर्ती विवाह करता है, वह उपधारा (1) के अधीन अपराध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
जो कोई, बेईमानी से या कपटपूर्ण आशय से विवाहित होने का कर्म यह जानते हुए पूरा करता है कि उसके द्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास सें, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
जो कोई, किसी महिला को, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है, इस आशय से ले जाता है, या फुसलाकर ले जाता है कि वह किसी व्यक्ति के साथ अनुचित संभोग करे या इस आशय से ऐसी किसी महिला को छिपाता है या निरुद्ध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
जो कोई, किसी महिला का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी महिला के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
धारा 85 के प्रयोजनों के लिए "क्रूरता" से अभिप्रेत है-
(क) जानबूझकर किया गया कोई आचरण, जो ऐसी प्रकृति का है, जिससे महिला को आत्महत्त्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य की (चाहे मानसिक हो या शारीरिक) गंभीर क्षति या खतरा कारित करने की सम्भावना है; या
(ख) किसी महिला को तंग करना, जहाँ उसे या उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरुद्ध माँग को पूरा करने के लिए प्रमीड़ित करने की दृष्टि से या उसके द्वारा या उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी माँग को पूरा करने में असफल रहने के कारण, इस प्रकार तंग किया जा रहा है।
जो कोई, किसी महिला का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस महिला को विवश करने के आशय से या वह विवश की जाएगी, यह सम्भाव्य जानते हुए या अनुचित संभोग करने के लिए उस महिला को विवश या विलुब्ध करने के लिए या वह महिला अनुचित संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और जो कोई, किसी महिला को किसी अन्य व्यक्ति से अनुचित सम्भोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या वह विवश या विलुब्ध की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए इस संहिता में यथापरिभाषित आपराधिक अभित्रास द्वारा या प्राधिकार के दुरुपयोग या विवश करने के अन्य साधन द्वारा उस महिला को किसी स्थान से जाने को उत्प्रेरित करता है, वह भी पूर्वोक्त प्रकार से दण्डित किया जाएगा।
जो कोई, गर्भवती महिला का स्वेच्छया गर्भपात कारित करता है, यदि ऐसा गर्भपात उस महिला का जीवन बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक कारित न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, और यदि वह महिला स्पन्दनगभां हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
जो महिला स्वयं अपना गर्भपात कारित करती है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आती है।
जो कोई, महिला की सम्मति के बिना, चाहे वह महिला स्पन्दनगर्भा हो या नहीं, धारा 88 के अधीन अपराध कारित करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
1.जो कोई, गर्भवती महिला का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
2. जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्य उस महिला की सम्मति के बिना किया जाता है, वह आजीवन कारावास से, या उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट दण्ड से, दण्डित किया जाएगा।
इस अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी जानता हो कि उस कार्य से मृत्यु कारित करना सम्भाव्य है।
जो कोई, किसी शिशु के जन्म से पूर्व कोई कार्य इस आशय से करता है कि उस शिशु का जीवित पैदा होना उसके द्वारा रोका जाए या जन्म के पश्चात् उसके द्वारा उसकी मृत्यु कारित हो जाए, और ऐसे कार्य से उस शिशु का जीवित पैदा होना रोकता है, या उसके जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित कर देता है, यदि वह कार्य माता के जीवन को बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
जो कोई, ऐसा कोई कार्य ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उसके द्वारा मृत्यु कारित कर देता, तो वह आपराधिक मानव वध का दोषी होता और ऐसे कार्य द्वारा किसी सजीव अजात शिशु की मृत्यु कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
क, यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह गर्भवती महिला की मृत्यु कारित कर दे, ऐसा कार्य करता है, जो यदि उससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती, तो वह आपराधिक मानव वध की कोटि में आता। उस महिला को क्षति होती है, किन्तु उसकी मृत्यु नहीं होती, किन्तु उसके द्वारा उस अजात सजीव शिशु की मृत्यु हो जाती है, जो उसके गर्भ में है। क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।
जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का पिता या माता होते हुए, या ऐसे शिशु की देखरेख का भार रखते हुए, ऐसे शिशु का पूर्णतः परित्याग करने के आशय से उस शिशु को किसी स्थान में अरक्षित डाल देगा या छोड़ देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
यदि शिशु अरक्षित डाल दिए जाने के परिणामस्वरूप मर जाए, तो, यथास्थिति, हत्या या आपराधिक मानव वध के लिए अपराधी का विचारण निवारित करना इस धारा से आशयित नहीं है।
जो कोई, किसी शिशु के मृत शरीर को गुप्त रूप से गाड़कर या अन्यथा उसका व्ययन करके, चाहे ऐसे शिशु की मृत्यु उसके जन्म से पूर्व या पश्चात् या जन्म के दौरान हुई हो, ऐसे शिशु के जन्म को साशय छिपाता है या छिपाने का प्रयास करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
जो कोई, किसी अपराध को कारित करने के लिए किसी शिशु को भाड़े पर लेता है, नियोजित करता है या नियुक्त करता है, तो वह किसी भी भांति के कारावास से, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा; और यदि अपराध कारित किया जाता है तो, वह उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड से भी दण्डित किया जाएगा, मानो ऐसा अपराध ऐसे व्यक्ति ने स्वयं किया हो।
लैंगिक शोषण या अश्लील साहित्य के लिए शिशु को भाड़े पर लेना, नियोजन करना, नियुक्त करना या उपयोग करना, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आता है।
जो कोई, किसी शिशु को अन्य व्यक्ति से अनुचित संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या उसके द्वारा विवश या विलुब्ध किया जाएगा, यह सम्भाव्य जानते हुए ऐसे शिशु को किसी स्थान से जाने को या कोई कार्य करने को किसी भी साधन द्वारा उत्प्रेरित करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।
जो कोई, दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करता है कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई चल सम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।
जो कोई, किसी शिशु को इस आशय से कि ऐसा शिशु किसी भी आयु में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अनुचित संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया जाए या उपयोग किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि ऐसा शिशु किसी भी आयु में ऐसे प्रयोजन के लिए काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, बेचता है, भाड़े पर देता है या अन्यथा व्ययनित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।
जब अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला को, किसी वेश्या या किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को, जो वेश्याघर चलाता है या उसका प्रबन्ध करता है, बेचा जाए, भाड़े पर दिया जाए या अन्यथा व्ययनित किया जाए, तब इस प्रकार ऐसी महिला को व्ययनित करने वाले व्यक्ति के बारे में, जब तक कि प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने उसको इस आशय से व्ययनित किया है कि वह वेश्यावृत्ति के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाई जाएगी।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "अनुचित संभोग" से ऐसे व्यक्तियों के बीच मैथुन अभिप्रेत है, जो विवाह द्वारा संयुक्त नहीं हैं, या ऐसे किसी संयोग या बन्धन से संयुक्त नहीं हैं जो यद्यपि विवाह की कोटि में तो नहीं आता तथापि उस समुदाय की, जिसके वे हैं या यदि वे भिन्न समुदायों के हैं तो ऐसे दोनों समुदायों की, वैयक्तिक विधि या रूढ़ि द्वारा उनके बीच में विवाह-सदृश सम्बन्ध को मान्य किया जाता है।
जो कोई, किसी शिशु को इस आशय से कि ऐसा शिशु किसी भी आयु में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अनुचित संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और अनैतिक प्रयोजन के लिए काम में लाया जाए या उपयोग किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति, किसी भी आयु में ऐसे किसी प्रयोजन के लिए काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, खरीदता है, भाड़े पर लेता है, या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला को खरीदने वाली, भाड़े पर लेने वाली या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करने वाली किसी वेश्या के या वेश्याघर चलाने या उसका प्रबन्ध करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में, जब तक कि प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि ऐसी महिला का कब्जा उसने इस आशय से अभिप्राप्त किया है कि वह वेश्यावृत्ति के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाई जाएगी।
“अयुक्त संभोग" का वही अर्थ है, जो धारा 98 में है।