धारा 189 से 197 अध्याय 11 (लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों के विषय में) भारतीय न्याय संहिता , 2023

धारा 189 से 197 अध्याय 11 (लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों के विषय में) भारतीय न्याय संहिता , 2023

अध्याय 11

लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों के विषय में

189. विधिविरुद्ध जमाव-

1. पांच या अधिक व्यक्तियों का जमाव "विधिविरुद्ध जमाव" कहा जाता है, यदि उन व्यक्तियों का, जिनसे वह जमाव गठित हुआ है, सामान्य उद्देश्य है, -

() केन्द्रीय सरकार को, या किसी राज्य सरकार को, या संसद को, या किसी राज्य के विधान-मण्डल को, या किसी लोक सेवक को, जब वह ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शवित का प्रयोग कर रहा है, आपराधिक बल द्वारा, या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, आतंकित करना; या

() किसी विधि के, या किसी वैध आदेशिका के, निष्पादन का प्रतिरोध करना; या

() किसी रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध का करना; या

() किसी व्यक्ति पर आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, किसी सम्पत्ति का कब्जा लेना या अभिप्राप्त करना या किसी व्यक्ति को किसी मार्ग के अधिकार के उपभोग से, या जल का उपयोग करने के अधिकार या अन्य अमूर्त अधिकार से, जिसका वह कब्जा रखता है, या उपभोग करता है, वंचित करना या किसी अधिकार या अनुमानित अधिकार को प्रवर्तित कराना; या

() आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, किसी व्यक्ति को वह करने के लिए, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध नहीं है या उसका लोप करने के लिए, जिसे करने का वह वैध रूप से हकदार है, विवश करना।

स्पष्टीकरण-

कोई जमाव, जो इकट्ठा होते समय विधिविरुद्ध नहीं था, तत्पश्चात् विधिविरुद्ध जमाव हो सकेगा।

2. जो कोई, उन तथ्यों से परिचित होते हुए, जो किसी जमाव को विधिविरुद्ध जमाव बनाते हैं, उस जमाव में साशय सम्मिलित होता है या उसमें बना रहता है, यह कहा जाता है कि वह विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य है, और ऐसा सदस्य, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, किसी विधिविरुद्ध जमाव में, यह जानते हुए कि ऐसे विधिविरुद्ध जमाव को बिखर जाने का समादेश विधि द्वारा विहित रीति से दिया गया है, सम्मिलित होता है, या बना रहता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

4. जो कोई, किसी घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, सज्जित होते हुए किसी विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

5. जो कोई, पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी जमाव में, जिससे लोक शांति में विघ्न कारित होना सम्भाव्य है, ऐसे जमाव को बिखर जाने का समादेश विधिपूर्वक दे दिए जाने पर जानते हुए सम्मिलित होता है या बना रहता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण-

यदि वह जमाव उपधारा (1) के अर्थ के अन्तर्गत विधिविरुद्ध जमाव है, तो अपराधी उपधारा (3) के अधीन दण्डनीय होगा।

6. जो कोई, किसी व्यक्ति को किसी विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होने या उसका सदस्य बनाने के लिए भाड़े पर लेता है या वचनबद्ध या नियोजित करता है या भाड़े पर लिए जाने का, वचनबद्ध या नियोजित करने का संप्रवर्तन करता है या उसके प्रति मौनानुकूल बना रहता है, वह ऐसे विधिविरुद्ध जमाव के सदस्य के रूप में, और किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे विधिविरुद्ध जमाव के सदस्य के नाते ऐसे भाड़े पर लेने, वचनबद्ध या नियोजन के अनुसरण में किए गए किसी भी अपराध के लिए उसी प्रकार दण्डनीय होगा, मानो वह ऐसे विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य रहा था या ऐसा अपराध उसने स्वयं किया था।

7. जो कोई, अपने अधिभोग या भारसाधन, या नियंत्रण के अधीन किसी घर या परिसर में किन्हीं व्यक्तियों को, यह जानते हुए कि वे व्यक्ति विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होने या सदस्य बनने के लिए भाड़े पर लाए गए, वचनबद्ध या नियोजित किए गए हैं या भाड़े पर लाए जाने, वचनबद्ध या नियोजित किए जाने वाले हैं, संश्रय देता है, आने देता है या सम्मिलित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

8. जो कोई, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कार्यों में से किसी को करने के लिए या करने में सहायता देने के लिए वचनबद्ध किया जाता है या भाड़े पर लिया जाता है या भाड़े पर लिए जाने या वचनबद्ध किए जाने के लिए अपनी प्रस्थापना करता है या प्रयत्न करता है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

9. जो कोई, उपधारा (8) में निर्दिष्ट प्रकार से वचनबद्ध होने या भाड़े पर लिए जाने पर, किसी घातक आयुध से या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी संभाव्य है, सज्जित होकर चलेगा, या सज्जित होकर चलने के लिए वचनबद्ध होगा या अपनी प्रस्थापना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

190. विधिविरुद्ध जमाव का प्रत्येक सदस्य, सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए किए गए अपराध का दोषी -

यदि विधिविरुद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा उस जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में अपराध किया जाता है, या कोई ऐसा अपराध किया जाता है, जिसका किया जाना उस जमाव के सदस्य उस उद्देश्य को अग्रसर करने में सम्भाव्य जानते थे, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस जमाव का सदस्य है, उस अपराध का दोषी होगा।

191. बलवा करना -

1. जब कभी विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है, तब ऐसे जमाव का प्रत्येक सदस्य बलवा करने के अपराध का दोषी होगा।

2. जो कोई, बलवा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

3. जो कोई, घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य है, सज्जित होते हुए बलवा करने का दोषी है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

192. बलवा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना- यदि बलवा किया जाए; यदि बलवा किया जाए-

जो कोई, अवैध बात करने द्वारा, किसी व्यक्ति को परिद्वेष से या स्वैरिता से प्रकोपिन, इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बलवे का अपराध किया जाएगा; यदि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बलवे का अपराध किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, और यदि बलवे का अपराध किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

193. उस भूमि के स्वामी, अधिभोगी, आदि, का दायित्व जिस पर विधिविरुद्ध जमाव या बलवा किया गया है-

1. जब कभी, कोई विधिविरुद्ध जमाव या बलवा किया गया है, तब भूमि, जिस पर ऐसा विधिविरुद्ध जमाव हुआ है या ऐसा बलवा किया जाए, उसका स्वामी या अधिभोगी और ऐसी भूमि में हित रखने वाला या हित रखने का दावा करने वाला व्यक्ति, एक हजार रुपए से अनधिक के जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक यह जानते हुए कि ऐसा अपराध किया जा रहा है या किया जा चुका है या इस बात का विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे अपराध का किया जाना सम्भाव्य है, उस बात की अपनी शक्ति-भर शीघ्रतम सूचना निकटतम पुलिस थाने के प्रधान अधिकारी को नहीं देता है और उस दशा में, जिसमें उसे या उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि यह लगभग किया ही जाने वाला है, अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का उपयोग उसका निवारण करने के लिए नहीं करता है या करते हैं और उसके हो जाने पर अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का उस विधिविरुद्ध जमाव को बिखरने या बलवे को दबाने के लिए उपयोग नहीं करता है या करते हैं।

2. जब कभी, किसी ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या उसकी ओर से बलवा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बलवा हो, स्वामी या अधिभोगी है या जो ऐसी भूमि में या बलवे को पैदा फरने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता है या जो उससे कोई फायदा प्रतिगृहीत कर लिया है या पा चुका है, तब ऐसा व्यक्ति जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि वह या उसका अभिकर्ता या प्रबन्धक इस बात का विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसा बलवा किया जाना सम्भाव्य था या जिस विधिविरुद्ध जमाव द्वारा ऐसा बलवा किया गया था, वह जमाव किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्ति-भर सन विधिपूर्ण साधनों का ऐसे जमाव या बलवे का किया जाना रोकने के लिए और उसे दबाने और बिखरने के लिए उपयोग नहीं करेगा या करेंगे।

3. जब कभी, ऐसे व्यक्ति के फायदे के लिए या ऐसे व्यक्ति की ओर से बलवा किया जाए, जो किसी भूमि का, जिसके विषय में ऐसा बलवा हो, स्वामी हो या अधिभोगी है या जो ऐसी भूमि में या बलवे के पैदा करने वाले किसी विवादग्रस्त विषय में कोई हित रखने का दावा करता है या जो उससे कोई फायदा प्रतिगृहीत कर लिया है या पा चुका है, तब उस व्यक्ति का अभिकर्ता या प्रबन्धक जुर्माने से दण्डनीय होगा, यदि ऐसा अभिकर्ता या प्रबन्धक यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे बलवे का किया जाना सम्भाव्य था या जिस विधिविरुद्ध जमाव द्वारा ऐसा बलवा किया गया था, उसका किया जाना सम्भाव्य था, अपनी शक्ति-भर सब विधिपूर्ण साधनों का ऐसे बलवे या जमाव का किया जाना रोकने के लिए और उसको दबाने और बिखरने के लिए उपयोग नहीं करेगा या करेंगे।

194. दंगा-

1. जब दो या अधिक व्यक्ति, लोकस्थान में लड़कर लोक शांति में विघ्न डालते हैं, तब यह कहा जाता है कि वे दंगा करते हैं।

2. जो कोई, दंगा करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

195. लोक सेवक जब बलवे, आदि को दबा रहा हो, तब उस पर हमला करना या उसे बाधित करना -

1. जो कोई, किसी लोक सेवक पर, जो किसी विधिविरुद्ध जमाव के बिखरने का, या बलवे या दंगे को दबाने का प्रयास ऐसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य के निर्वहन में कर रहा है, हमला करता है या उसके काम में बाधा डालता है या किसी लोक सेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

2. जो कोई, ऐसे किसी लोक सेवक पर, जो विधिविरुद्ध जमाव के बिखरने का, या बलवे या दंगे को दबाने का प्रयास, ऐसे लोक सेवक के नाते अपने कर्त्तव्य के निर्वहन में कर रहा है, हमले की धमकी देता है या उसके काम में बाधा डालने का प्रयत्न करता है या किसी लोक सेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग करने की धमकी देता है, या उसका प्रयोग करने का प्रयत्न करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

196. धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भापा, आदि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना -

1. जो कोई-

() बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या इलैक्ट्रानिक संसूचना के माध्यम से या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र या शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएं, धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करता है या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करता है; या

() कोई ऐसा कार्य करता है, जो विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोक-प्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य है; या

() कोई ऐसा अभ्यास, आन्दोलन, कवायद या अन्य वैसा ही क्रियाकलाप इस आशय से संचालित करता है कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे या यह सम्भाव्य जानते हुए संचालित करता है कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे या ऐसे क्रियाकलाप में इस आशय से भाग लेता है कि आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए भाग लेता है कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे और ऐसे क्रियाकलाप से ऐसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच, चाहे किसी भी कारण से, भय या संत्रास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है या उत्पन्न होनी सम्भाव्य है; वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

2. जो कोई, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध, किसी पूजा के स्थान में या किसी जमात में, जो धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ हो, कारित करता है, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

197. राष्ट्रीय अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, दृढ़कथन-

1. जो कोई, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या इलैक्ट्रानिक संसूचना के माध्यम से या अन्यथा, -

() ऐसा कोई लांछन लगाता है या प्रकाशित करता है कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और अखण्डता की मर्यादा नहीं बनाए रख सकते; या

() यह दृढ़कथन करता है, परामर्श देता है, सलाह देता है, प्रचार करता है या प्रकाशित करता है कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार न दिए जाएं या उन्हें उनसे वंचित किया जाए; या

() किसी वर्ग के व्यक्तियों की बाध्यता के सम्बन्ध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, कोई दृढ़कथन करता है, परामर्श देता है, अभिवाक् करता है या अपील करता है या प्रकाशित करता है, और ऐसे दृढ़कथन, परामर्श, अभिवाक् या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असौहार्द्र, या शत्रुता या घृणा या वैमनस्य की भावनाएं उत्पन्न होती हैं या उत्पन्न होनी सम्भाव्य हैं; या

() भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली मिथ्या या भ्रामक जानकारी देता है या प्रकाशित करता है, वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

2. जो कोई, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध, किसी उपासना स्थल में या धार्मिक उपासना या धार्मिक कर्म करने में लगे हुए किसी जमाव में करता है, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

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