
कोई हिन्दू विल द्वारा या अन्य वसीयती व्ययन द्वारा भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 ( 1925 का 39 ) या हिन्दुओं को लागू और किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों के अनुसार किसी ऐसी सम्पत्ति को 1[ व्ययनित कर सकेगा या कर सकेगी] जिसका ऐसे व्ययनित किया जाना शक्य हो ।
मिताक्षरा सहदायिकी सम्पत्ति में हिन्दू पुरुष का हित या तरवाड़, तावषि, इल्लम्, कुटुम्ब या कवरु की सम्पत्ति में तरवाड, तावषि, इल्लम्, कुटुम्ब या कवरु के सदस्य का हित इस अधिनियम में या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी बात के होते हुए भी इस धारा के अर्थ के अन्दर ऐसी सम्पत्ति समझी जाएगी जिसका उस द्वारा व्ययनित किया जाना शक्य हो।