पैरा 223 से 276 अध्याय 20 UP पुलिस रेगुलेशन

पैरा 223 से 276 अध्याय 20 UP पुलिस रेगुलेशन

अध्याय 20

बुरे चरित्र वालों का पंजीकरण और निगरानी

223. ग्राम अपराध नोटबुक हर थाने पर रखा जाने वाला एक गोपनीय अभिलेख है और उस मण्डल के हर अपराध और अपराधी के बारे में उसमें सूचना का समावेश रहता है। थाने का भारसाधक अधिकारी उसकी सुरक्षित अभिरक्षा और विषयवस्तु के लिये उत्तरदायी है। उन नगरों और कस्बों में जो एक नोट बुक के लिये बहुत बड़े हों, हर मोहल्ले या अन्य खण्ड के लिये एक पृथक् नोट बुक रखी जानी चाहिये।

भाग एक, दो और तीन में प्रविष्टियाँ थाने के भारसाधक अधिकारी के पर्यवेक्षण में किसी अधीनस्थ द्वारा की जा सकती हैं। भाग 4 में प्रविष्टियाँ भारसाधक अधिकारी द्वारा ही की जावेंगी। भाग 5 में प्रविष्टियाँ आगे के पैरा 228 में दिये गये अनुदेशों के अनुसार की जावेंगी।

224. भाग एक में जनसंख्या, दूरस्थ गाँव, राजस्व हाट के दिन, मुख्य जातियाँ जन-जातियाँ, मुखिया, मुख्य भू-स्वामी, अन्य प्रमुख व्यक्तियों और गाँवों के चौकीदार के विवरण दर्शाये जावेंगे। केवल गाँव में रहने वाले, "अन्य प्रमुख व्यक्ति" शीर्षक के अधीन दर्शाये जाने चाहिये।

225. भाग 2 में गाँव के क्षेत्र की सीमाओं के अन्दर कारित हुए उन सभी अपराधों के विवरण जो (1) अंज्ञेय और पुलिस को रिपोर्ट किए गए हों, (2) भारतीय दण्ड संहिता की निम्न धाराओं या अन्य विधियों के अधीन आते हों, जाहे मूल रूप से रिपोर्ट किये या पुलिस द्वारा व्यवहुत किए गए हों, या न हों, प्रविष्ट किये जायेंगे-

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 121, 121-क और 124-क राज्य के विरुद्ध अपराध, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 465 से 469-कूट रचना, भारतीय दण्ड संहिता की धारायें 489-ए से 489-बी तक मुद्रा और बैंक नोट की कूटरचना। दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारायें 109 और 110-बुरी जीविका, सार्वजनिक जुआ अधिनियम-1967 का तीसरा सामान्य जुआघर और बनाना और उसमें जुआ खेलना।

1910 के अधिनियम क्रमांक 4 की धारायें 68, 62, 63 और 65 आबकारी अधिनियम के अधीन अपराध।

1878 के अधिनियम क्र०। की धारा 9- अधीन अधिनियम के अधीन अपराध।

1959 के अधिनियम क्रमांक 54 की धारायें 25 और 26-आयुध अधिनियम के अधीन अपराध।

1924 के अधिनियम क्रमांक छः की धारायें 21, 22, 23, 24. और 25-आपराधिक जन-जाति अधिनियम ।

आपराधिक जन-जाति अधिनियम, 1924 का छठां, की अनुसूची में गिनाये गए, अधिनियम की धारा 3 के अधीन आपराधिक जन-जाति होना घोषित, जनजाति के सदस्यों के दोषसिद्ध अपराध।

सभी अपराध प्रविष्टि किए जायेंगे, चाहे वह सही या झूठे रिपोर्ट किए गए हों, यदि मामला हटा दिया जावे तो तथ्य अंतिम शीर्ष में अंकित किए जावेंगे, अन्य शीर्षों को प्रविष्टियाँ स्थिर रहेंगी।

226. भाग 3 में गाँव के सभी निवासी निम्नलिखित अपराधों के दोषसिद्ध व्यक्तियों के विवरण होंगे-

''

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 75 के आशयों के लिए

भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय बारह धारायें 241, 254 और 262 के अधीन दण्डनीय अपराधों के सिवाय सभी अपराध।

भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय सत्रह

धाराएँ 379 से 382-सभी प्रकार की चोरियाँ।

धाराएँ 385 के सिवाय, धाराएँ 384 से 389-सभी प्रकार के उद्दापन।

धाराएँ 395, 316, 399 और 402-सभी प्रकार की डकैती।

धाराएँ 400 और 401-चोरी या डकैती के दल से सम्बन्धित होना।

धाराएँ 406 से 408-आपराधिक न्याय भंग।

धाराएँ 409-लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग।

धाराएँ 411 से 414-चोरी की हुई सम्पत्ति प्राप्त करना।

धाराएँ 418 से 422-छल।

धाराएँ 429 से 433 और 435 से 440- गम्भीर रिष्टि ।

धाराएँ 449 से 452-अपराध करने के लिए गृह अतिचार।

धाराएँ 454 से 457-प्रछन्न गृह अतिचार या साधारण से अन्य गृह भेदन।

धारा 458-गृह भेदन के सभी प्रयास।

धाराएँ 459 और 460-गृह भेदन में कारित घोर अपहति या मृत्यु।

धारा 462-न्यास में प्राप्त बन्द पात्र का कपटपूर्वक खोलना ।

ह्वीपिंग एक्ट, 1909 को चौथे की धारा 3 और 4 के आशयों के लिए

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376-बलात्कार, धारा 377- अप्राकृतिक अपराध।

आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 22 और 33 को, और अधिनियम की धाराएँ 21, 22, 24 और 25 के अधीन या अधिनियम की अनुसूची में सम्मिलित किसी अपराध के लिए, आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 3 के अधीन आपराधिक जन-जाति होना घोषित हुई जन-जाति के सदस्यों की दोषसिद्धि के आशयों के लिए।

''

अन्य अपराध

भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 121, 121-क और 124-क राज्य के विरुद्ध अपराध।

धारा 170-लोक सेवक का प्रतिरूपण करना।

भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 212, 213, 215, 216 और 216--संश्रय देता या लोक न्यास के विरुद्ध अन्य अपराध।

धारा 311-ठग होना।

धाराएँ 363 से 369-व्यपहरण।

धारा 461-बेईमानी से बन्द पत्र को तोड़कर खोलना।

धारा 465 से 469-कूट रचना।

धाराएँ 489-क से 489--बैंक और मुद्रा नोट्स की कूट रचना।

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धाराएँ 109 और 110-बुरी जीविका।

1867 के अधिनियम क्रमांक तीसरे की धाराएँ 3 और 4-सामान्य जुआघर को बनाये रखना और उसमें जुआ खेलना।

1910 के अधिनियम क्रमांक चार की धारा 60, 62, 63 और 65-आबकारी अधिनियम के अधीन अपराध।

1878 के अधिनियम क्रमांक 1 की धारा 9-अफीम अधिनियम के अधीन अपराध।

1959 के अधिनियम क्रमांक 54 की धारा 25 और 26-आयुध अधिनियम के अधीन अपराध।

भारतीय दण्ड संहिता की निम्नलिखित, धाराओं के अधीन दोषसिद्धि व्यक्तियों के पुलिस नाम, अधीक्षक के केवल विशेष आदेश द्वारा भाग 3 में प्रविष्ट किये जावेंगे-

धाराएँ 143 से 153-बलवा, विधि विरुद्ध जमाव ।

धारा 302-हत्या।

धारा 304-आपराधिक मानव वध।

धारा 307-हत्या करने का प्रयत्न।

धाराएँ 324 से 325- अपहति और घोर अपहति

भाग तीन के अभियुक्तियों के स्तम्भ में अपराधों की प्रकृति, यथा- "पशु चोरी", "बहुमूल्य आभूषण रोकने की चाल" दर्शाई जावेगी। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध प्रसिद्ध दल का सदस्य हो तो इस तथ्य को भी अंकित किया जावेगा। सेन्धमारी के लिये सजायाफ्ता व्यक्तियों की कार्यप्रणाली वर्णित की जानी चाहिये। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध स्थायी रूप से अपना निवास बदल ले, तो अन्तिम स्तम्भ में नया निवास अंकित किया जायेगा और उस गाँव के रजिस्टर के, जिसमें वह गया है, भाग तोन में उसका नाम प्रविष्ट किया जावेगा। उस दोषसिद्ध व्यक्ति का नाम, जो केवल एक बार दोषसिद्ध किया गया हो और जिसकी हिस्ट्री शीट कभी भी न खोली गई हो उसकी सजा से बीस वर्ष व्यतीत हो जाने - परः हटा दिया जावेगा। अन्य दोषसिद्ध व्यक्तियों के नाम केवल उनकी मृत्यु के बाद हटाये जायेंगे।

प्रत्येक थाने में ग्राम अपराध नोट बुक के भाग तीन में वर्णक्रमानुसार निम्नलिखित शीषों में विभाजित एक विषय सूची बनाई जावेगी और प्रत्येक के लिये अलग रजिस्टर, या भाग आवंटित किया जावेगा-डकैती, पशु चोरी, जेवनंटी, रेलवे सवारी चोरी, मालगाड़ी से चौर, बाइसिकिल चोरी, विविध चोरियों, विषदान, पशु विषदान, बुरी जीविका, सिक्का कूटकरण, कूट रचना, कोकीन और अफीम की तुस्करी, छल, अनैतिक आशाओं के लिये व्यपहरण, राज्य के विरुद्ध अपराध, टेलीग्राफ के तारों को काटना और भाग तीन में विशिष्ट "अन्य विविध अपराध"

सूची उप-महानिरीक्षक या पुलिस के अधीक्षक के आदेश द्वारा अतिरिक्त उप विभाजित की जा सकेगी। यदि कोई व्यक्ति इन शीर्षों में से एक से अधिक के अधीन जाने वाले अपराधों के लिए दोषसिद्ध हो तो उसका नाम हर एक में प्रविष्ट किया जावेगा।

227. भाग चार में धार्मिक त्योहार और विवाद, सम्पत्ति पर विवाद, दल, रेल्वेज, नहर टेलीग्राफ को प्रभावित करने वाले अपराध, आपराधिक रिश्वत प्रस्तुत करना, संगठित अपराध जैसे पशु चोरी का प्रचलित यह तथ्य कि दल रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत दल का कोई सदस्य गाँव में रहता या प्रवृत्त रहता है. और इसी जैसी अन्य विषयों जो कि पुलिस के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हों, से सम्बन्धित प्रविष्टियाँ सम्मिलित होंगी। अपराध के सभी विशेष महत्वपूर्ण प्रारम्भ भी कुछ विस्तार से प्रविष्ट होंगे। हर एक प्रविष्टि का विषय दशति हुए, एक संक्षिप्त नोट इसके बिरुद्ध हाशिये में किया जावेगा। प्रविष्टियाँ, उनके किये जाने के पूर्व, अनुमोदन के लिये अधीक्षक को प्रस्तुत की आवेगों।

हिस्ट्री शीट (अपराध लेख) और निगरानी

228. भाग पाँच में हिस्ट्री शीट का समावेश होगा। यह निगरानी के अधीन अपराधियों का व्यक्तिगत अभिलेख होता है। हिस्ट्री शीट केवल उन व्यक्तियों की खोली जानी चाहिये, जो अभ्यासिक अपराधी या ऐसे अपराधियों के दुष्प्रेरक हों या उनका ऐसा हो जाना सम्भाब्य हो। शीट के दो वर्ग होंगे:

(1) डकैत, सेन्धमार, पशु चोर, रेलवे डिब्बों से माल के चोर, और उनके दुश्रेरकों के लिये वर्ग '' हिस्ट्री शीट।

(2) उन पुष्ट और पेशेवर अपराधियों, जो डकैती, सेन्धमारी, पशु चोरी और रेलवे डिब्बों से माल को चोरी के सिवाय अन्य अपराध करने वालों, पेशेवर छल और अन्य विशेषज्ञ जिनके लिए अपराध अन्वेषण विभाग द्वारा आपराधिक व्यक्तिगत नत्थियाँ बनाये रखी जाती है, विषदाता, पशु वियदाता, रेलवे यात्री चोर, जेबकतरी विशेषज्ञ, कूट रचक, सिक्के के कूटकरणकर्ता, कोकीन और अफीम के तस्कर, विख्यात बदमाश और गुंडे, टेलीग्राफ के तार काटने वाले, आभ्यासिक निषिद्ध शराब उत्तारने वाले और उनके दुष्प्रेरक के लिए वर्ग ख हिस्ट्री शीट ।

दोनों हिस्ट्री शीट समान प्रारूप रखे जायेंगे। परन्तु '' वर्ग के लिए, पहले पेज के शीर्ष पर लाल उन्डा चिह्नित करते हुये सुभेदित किया जायेगा। वर्ग ख के हिस्ट्री शीट का वर्ग '' का हिस्ट्री शीट में नहीं बदला जा सकेगा। चाहे वर्ग '' हिस्ट्री शीट में होने वाले व्यक्ति डकैतों, सेंधमारी, पशु चोरी या रेलवे माल डिब्बों से चोरों में लिप्त होते पाये जायें। वर्ग क और वर्ग ख दोनों के लिये निगरानी पैरा 238 के अधीन उस पर लागू हो सकेंगी। वर्ग क के हिस्ट्री शोट के व्यक्ति के विविध अपराधों में लिप्त हो जाने की दशा में अधीक्षक की मन्जूरी में उसको वर्ग क हिस्ट्री शीट वर्ग ख हिस्ट्री शीट में बदली जा सकेंगी।

229. हिस्ट्री शीटों के क और ख वर्गों में वर्गीकरण इस सिद्धान्त पर आधारित है, कि जहाँ डकैतो, सेंधमारी या पशुचोरी या रेलवे डिब्बों से माल की चोरी करने वालों के आचरण सुधारे जाने की हमेशा आशा होती है, यहाँ विविध अपराधों के विशेषज्ञ जैसा कि नियम है, सुधार के अयोग्य होते हैं। इसलिए वर्गीकरण, एकमात्र उस अपराध की प्रकृति पर किया गया है, जिसमें संदेहित, लिप्त और केवल निम्न को विनियमित करने के लिए किया गया है-

(1) उसके विरुद्ध किसी शिकायत के न होने पर निगरानी के अधीन समय की वह लम्बाई जिसमें साधारणतया संदेहित व्यक्ति को निगरानी के अधीन रखा जाना चाहिये।

(2) निगरानी के प्रकृति जिसकी उसके कार्यकलाप अपेक्षा करते हों, संदेहाधीन का प्रयोग की जाने वाली निगरानी के प्रकार की कोटि उसके वर्गीकरण पर निर्भर नहीं करेगी, किन्तु उस विस्तार पर निर्भर करेगी जिसमें किसी समय पर उसके सक्रिय होने का विश्वास किया जाता है।

230. यदि क वर्ग हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति इतना खतरनाक या सुधार के अयोग्य समझा जावे कि उसके लिए उस वर्ग की सामान्यता से अधिक सुरक्षित निगरानी अपेक्षित है, वह अधीक्षक के आदेश के द्वारा तारांकित किए जा सकेंगे। यहाँ पुनः यह तथ्य कि हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति तारांकित है, आवश्यक रूप से केवल यह संकेत करेगा कि उसे लम्बे समय के लिये निरन्तर निगरानी के अधीन रखा जाना है। वह आवश्यक रूप से यह संकेत नहीं करेगा कि उसकी निगरानी, जब तक वह चलती रहे प्रबल रूप से ही। उद्देश्य उन अपराधियों के बारे में होता है जो तारांकित हो, जिसके द्वारा उसके अस्थायी रूप से सक्रिय होने का विश्वास किया जाता हो। जिला पुलिस का अधीक्षक रेलवे पुलिस के किसी संदिग्ध हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति को तारांकित करने या निगरानी बन्द करने के लिये आदेश सरकारी रेलवे पुलिस अधीक्षक को सहमति के बिना नहीं दे सकेगा।

231. वर्ग '' के हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति जब तक कि वह तारांकित न किये गये हों, कम से कम से कम दो निरन्तर वर्षों के लिए, जिनमें उनका कोई भाग जेल में व्यतीत न हुआ हो, निगरानी के अधीन रखे जावेंगे। जब वर्ग '' वर्ग हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति जिनके नाम तारांकित न किए गये हों, यदि निरन्तर दो वर्षों तक किसी संज्ञेय अपराध के लिये दोषसिद्ध न ठहराया गया हो, और जेल में न रहे हों या उस पर किसी अपराध के करने का संदेह न हो या संदेहित परिस्थितियों में अपने आपको अनुपस्थित न रखा हो, तो उनकी निगरानी बन्द कर दी जावेगी, जब तक कि थाने की निरीक्षक पुस्तक में, अभिलिखित किए गए विशेष कारणें से अधीक्षक विनिश्चय न करे कि वह जारी रखा जावे।

जब वर्ग क हिस्ट्री शीट का व्यक्ति तारांकित किया गया हो, तो वह कम से कम ऐसे दो निरन्तर वर्षों जिसमें वह जेल में न रहा हो, या संज्ञेय अपराध का संदेहित न हो या उसके विरुद्ध अभिलिखित किसी संदिग्ध रूप से अनुपस्थित न रहा हो, के लिये तारांकित रहेगा। इस अवधि को समाप्ति पर, यदि उसके सुधर जानें का विश्वास हो, तो उसका तारांकित किया जाना बन्द कर दिया जावेगा, परन्तु कम से कम अतिरिक्त दो वर्षों के लिये निगरानी के अध्याधीन रहेगा, जिसकी समाप्ति पर उसकी निगरानी बन्द कर दी जावेगी, यदि इस अवधि के दौरान उसके विरुद्ध कोई शिकायत अभिलिखित न की गई हो।

किसी अतारांकित पूर्व दोषसिद्ध और विशेषतया पूर्व दोषसिद्ध डकैत की हिस्ट्री शीट बन्द करने में बहुत सावधानी का प्रयोग करना चाहिये।

232. '' वर्ग की हिस्ट्री शौट निरन्तर रूप से खुला रहने वाला अभिलेख होगा और इस शीटों के अधीन व्यक्ति, बहुत विशेष कारणों के सिवाय, मृत्यु तक निगरानी के अधीन रहेंगे ऐसा होने के कारण इस वर्ग के संदिग्ध व्यक्तियों को तारांकित करना आवश्यक है।

233. हिस्ट्री शीट के अधीन व्यक्ति की निगरानी या उसको बन्द कर दिये जाने का परिणाम उस हिस्ट्री शीट को बन्द करना नहीं होता है, हिस्ट्री शीट का जो केवल सूचना का अभिलेख होती है, कभी बन्द हो गई नहीं समझी जाना चाहिये। उस व्यक्ति के मामले में जिसकी निगरानी रोक दी गई हो, इस आशय की एक टीप हिस्ट्री शीट में अंकित की जानी चाहिये और उसके बाद नियतकालिक या अन्य प्रविष्टि करना आवश्यक नहीं है, जब तक कि ऐसी कोई सूचना न आई हो, जिसका शीट में प्रविष्टि किया जाना वांछनीय हो। उन व्यक्तियों की शीट जिनकी निगरानी रोक दी गई हो, उस ग्राम की अपराध पुस्तिका में रहने दी जाना चाहिये, परन्तु यदि संख्या इतनी अधिक हो कि जिल्द बहुत मोटी हो जावे तो वह नोट बुक के संलग्न एक पृथक् जिल्द में बनाये रखे जायें। वे केवल शीट के अधीन व्यक्ति की मृत्यु पर या यदि अधीक्षक का यह विचार होने पर कि उनको आगे रोक कर रखा जाना किसी महत्व का नहीं है, नष्ट की जावेगी।

234. क वर्ग का हिस्ट्री शीट पुलिस अधीक्षक की मन्जूरी के बिना रोकी नहीं जा सकती। यदि '' वर्ग के हिस्ट्री शीट में वर्णित व्यक्ति की निगरानी रोकना अस्वीकार किया जाना हो तो उस महानिरीक्षक या रेलवे पुलिस अधीक्षक की मन्जूरी प्राप्त की जानी चाहिए। हिस्ट्री शीट की रुकावट और संदेहित वर्ग के तारांकित या अतारांकित करने के लिये धाना अधिकारी द्वारा मण्डल निरीक्षक के माध्यम से प्रस्ताव किया जाना चाहिये, जब तक कि राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपने निरीक्षण के दौरान सीधे व्यवहार न किया गया हो।

235. निगरानी के अधीन सभी हिस्ट्री शीट वाले व्यक्तियों के नाम उनकी रीतियाँ और साक्षी स्थानीय पुलिस की जानकारी में होना चाहिये, और बीट कान्सटेबिलों और चौकीदारों को उनके व्यक्तिगत रूप से परिचित रहना चाहिये।

236. किसी विधिक कार्यवाही को अभ्यास में लाने, ऐसे शहर में शरण देने, जिससे वे पायें कि वे विशेष स्थानों या विशेष परिस्थितियों में संदिग्ध व्यक्ति से सम्पर्क रख सकते हैं, के पुलिस अधीक्षक के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अधिक व्यवहारिक प्रयोजनों के लिये निम्नलिखित एक या अधिक उपायों को सम्मिलित करते हुये, निगरानी परिभाषित की जा सकेगी-

() संदिग्ध व्यक्तियों के मकानों और मकानों में पहुँचने के मार्गों की गुप्त नाकाबन्दी।

() ख्याति, आदत, साथ, आय, व्यय और व्यवसायों के बारे में, उपनिरीक्षक को श्रेणी से कम न होने वाले अधिकारी द्वारा नियतकालिक जाँच के माध्यम से।

() कान्सटेविल या चौकीदारों द्वारा उनकी गतिविधियों और घर से अनुपस्थिति की रिपोर्ट।

() जाँच पर्चियों के साधन द्वारा गतिविधियाँ और अनुपस्थिति का सत्यापन।

() आचरण पर प्रभाव डालने वाली सभी सूचनाओं का हिस्ट्री शीट में इकट्ठा और अभिलिखित करना।

237. '' वर्ग के तारांकित्त और अतारांकित सभी हिस्ट्री शीट वाले व्यक्ति निगरानी की इस सभी उपायों के अध्याधीन होंगे। अधीक्षक और मण्डल निरीक्षक के नियन्त्रण के अध्याधीन थाना अधिकारी के लिये संदिग्ध व्यक्ति की विश्वास की जा रही अस्थायी सक्रियता के अनुसार हर एक विशेष मामलों में लागू की जाने वाली प्रबलता को विनियमित करना होगा।

इस प्रकार '' वर्ग के सभी व्यक्तियों को गतिविधियों और अनुपस्थिति की थाने में रिपोर्ट की जानी चाहिये, परन्तु उन्हें जाँच पर्चियों के साधन द्वारा सत्यापित करने की आवश्यकता नहीं है. जबकि उनका संदिग्ध होता हो। इसी प्रकार जबकि प्रश्नाधीन व्यक्तियों के चाहे वे तारांकित हो, या अत्तारांकित हों, ख्याति आदतें, संगति, आय-व्यय और व्यवसाय के बारे में थाना अधिकारी या उसके निर्देशन के अधीन अधीनस्थ उपनिरीक्षक द्वारा स्थानीय जाँच के माध्यम वर्ष में एक बार जांच की जाना आवश्यक है या ऐसे व्यक्तियों के मामले में, चाहे वे तारांकित हों या अतारांकित हों जिनका अस्थाई रूप से कार्यरत होना विश्वासित हो, अर्द्ध बार्षिक रूप से और भी अधिक आवृत्ति के साथ ऐसी जाँच की जानी चाहिये।

238. '' वर्ग कॉ हिस्ट्री शीट वाले व्यक्ति (), () और () उपायों के अध्याधीन होंगे, () या () उपायों के अध्याधीन नहीं, जब तक कि उस अपराध की प्रकृति, जिसमें वह लिप्त हो, अपेक्षित न करती हो कि वे उपाय उनकी लागू होना चाहिये। इस प्रकार, जब टेलीपाफ के तार

(1. 1975 क्रि०ला०व० 1101 ए०आई० आर० 1975 सु०को० 1575.

. ५०आई०आर० 1966 मु०को० 1966: 966 क्रि०ता०ज० 1486.

3. 1986 (3) रिपोर्ट्स (दिल्ली) 3-8.

4. 1985 (1) क्राइम 302. )

काटने वालों का शक्ति से परिदर्शन करना या उसके मकान पर रात में नाकाबन्दी करना आवश्यक है, व्यवसायिक छल करने वालों पर निगरानी की इन रीतियों का प्रयोग व्यर्थ होगा।

इसी प्रकार, यद्यपि '' वर्ग वाले सभी हिस्ट्री शीट व्यक्तियों की घर से अनुपस्थिति की रिपोर्ट थाने पर की जानी चाहिये और यद्यपि ऐसे सभी व्यक्ति अपनी गतिविधियों का सत्यापन कराने के लिए दायित्वाधीन रहेंगे, ऐसा सत्यापन तब करने की आवश्यकता नहीं है, जबकि यह स्पष्ट हो कि उसका कोई लाभदायक प्रयोजन नहीं होगा। यह प्रायः सदैव ही उदाहरणार्थ, विष देने वाले या जेब कतरे की गतिविधियों का सत्यापन करना अति आवश्यक होगा, किन्तु होगा, किन्तु स्थानीय गुण्डे के बारे में सत्यापन करना यदा-कदा ही आवश्यक था। ऐसे विषयों में थानेदारों से यह आशा कि जानी चाहिये कि वे बुद्धिमानी से अपराधियों की परिस्थितियों, अनुपस्थिति और उस अपराध की प्रकृति का जिसमें वे लिप्त हों, ध्यान रखते हुये, अपने विवेक का प्रयोग करें।

239. दोनों वर्गों की हिस्ट्री शीट इस पैरा में दिये निर्देशों के अनुसार बनाई रखी जावेंगी और जो पूर्व से ही प्रयोग में, पुराने प्रारूप में, चली आ रही है इन निर्देशों के अनुरूप बना ली जायेंगी।

सम्बन्धियों, साथियों, आश्रितों, सम्पत्तियों, व्यवसाय, आय और दोषसिद्धि के बारे में प्रविष्टियाँ प्रथम पृष्ठ के उपर्युक्त स्तम्भ में की जावेगी और अध्यापन रखो जावेगी तथा मण्डल निरीक्षक और सभी निरीक्षक अधिकारियों द्वारा उनकी जांच की जावे। हिस्ट्री शीट का अवशेष भाग के पैराओं की श्रृंखला के रूप में, दिनांक के क्रम में तथ्यों के वर्णन और हाशियों की टिप्पणियों को अन्तर्विष्ट करते हुये, बनाये रखा जावेगा।

पहला पैरा जब हिस्ट्री शीट खोला जावे लिखा जावेगा और संदिग्ध के पिछले अभिलेखों का संक्षिप्त विवरण और उनके लिये हिस्ट्री शीटं खोले जाने के लिये आवश्यक कारणों को बतायेगा। हिस्ट्री शीट में की जाने वाली प्रारम्भिक प्रविष्टियाँ, उनके किये जाने के पूर्व अधीक्षक के समक्ष उसके अनुमोदनार्थ प्रस्तुत की जायेंगी। पश्चात्वर्ती पैरा, अधीक्षक को विना निर्देश किये, थाने में भरे जावें और उनमें -

() सभी अनुपस्थितियों के सविस्तार विवरण।

() पुलिस को की गई सभी रिपोर्ट और दुराचारी के विरुद्ध संस्थापित सभी मामलों के चाहे वह संज्ञेय हो या असंज्ञेय, के विवरण।

() दुराचारी की आदत्तों और ख्याति के सम्बन्ध में की गई नियतकालिक जाँच का परिणाम।

() उन मामलों के विस्तृत विवरण जिसमें दुराचारी संदेहित हुआ हो अन्तर्विष्ट रहेंगे।

अनुपस्थिति की रिपोर्ट जब तक प्रविष्ट नहीं की जावेगी जब तक कि वह संदिग्ध न हो। नाकाबन्दी या घर में जाकर परिदर्शन की रिपोर्ट तब तक प्रविष्ट नहीं की जावेगी जब तक कि वह उपरोक्त वर्णित सूचना उत्पन्न करने के योग्य न हो। क्योंकि "वे मामले जिनमें दुराचारी संदेहित हुआ है" में वे ही मामले दर्शाये जायेंगे जिनमें, अधीक्षक, सहायक अधीक्षक या उप अधीक्षक ने युक्तियुक्त सन्देह होना पारित किया हो।

प्रत्येक पैरा में दैनिक डायरी या अन्य अभिलेख का जिनके आधार पर वह तैयार किया गया हो क्रमांक और दिनांक उद्धरित किया जावेगा, परन्तु वह इतनी विस्तृत हो कि अपने में पूर्ण हो। हर पैरा में समावेश की गई सूचना का स्वरूप उसके सामने हाशिया में दर्शाया जावे, उदाहरणार्थ "मण्डल निरीक्षक द्वारा स्थानीय जाँच", "संदिग्ध अनुपस्थिति", "मारपीट की शिकायत", 'सेन्धमारी के लिये सन्देहित"

आदतों और सामान्य ख्याति के बारे में प्रविष्टियाँ, संदिग्ध व्यक्ति के ग्राम और पड़ोसी ग्राम के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर की जानी चाहिये और उसमें, क्या संदिग्ध व्यक्ति अपराधरत है या उसके बारे में ईमानदारी के जीविका निर्वाह किये जाने की सूचना है, उसकी आमदनी की राशि, उसके व्यय, क्या यह नियमित काम में है और उसके साथियों के चरित्र और अभिज्ञान, दर्शाए जावें।

अस्पष्ट सामान्यताओं से बचना चाहिये।

थाने में हिस्ट्री शीट को जाने वाली प्रत्येक प्रविष्टि के लिए, व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी है और उसके द्वारा या उसके निर्देशन के अधीन किसी अधीनस्थ उपनिरीक्षक द्वारा को जावे।

जब कोई संदिग्ध व्यक्ति किसी अपराध के लिये दोषसिद्ध ठहराया जावे या दण्ड प्रक्रिया संहिता को धारा 109 या 110 के अधीन आबद्ध किया जावे, और उसे छः मास या उससे अधिक कारावास या दण्ड दिया जावे, उसकी हिस्ट्री शीट में अन्तिम पैरा के नीचे लाल स्याही से एक रेखा खींच दी जावेगी। इस लाल रेखा के नीचे दोषसिद्धि का दिनांक, दण्ड का स्वरूप और उसके उन्मोचित किये जाने का सम्भाव्य दिनांक प्रविष्ट किये जायेंगे। जब निगरानी जारी की जावे तो ऐसी ही काली रेखा *खींच दी जाये जिसके नीचे अधीक्षक के आदेश का क्रमांक और दिनांक प्रविष्ट किया जावे। जब हिस्ट्री शीट किसों दूसरे थाने का हस्तांतरित की जावे तो ऐसी ही काली रेखा एक सिरे से दूसरे सिरे तक खींच दी जावेगी और उसे भेजने वाले अधिकारों द्वारा अन्तरण को एक संक्षिप्त टीप अंकित की जावेगी।

240. दोनों वर्गों की हिस्ट्री शीट (1) सन्देह पर या (2) दोषसिद्ध या मुक्ति पर खोली जा सकेगी। पुलिस अधोचक के आदेशों के बिना कोई हिस्ट्री शीट नहीं खोली जा सकेगी।

(1) संहेह पर-जब कभी डकैती, पशुचोरी, रेलवे मालगाड़ी से चोरी के मामलों में या पेशेवर किस्म के विविध अपराधों के मामलों में अन्वेषण के परिणाम स्वरूप थाने का भारसाधक अधिकारी किसी व्यक्ति के नाम अपराध रजिस्टर में युक्तियुक्त सन्देहित के रूप में प्रविष्ट होने के लिए आवेदन करता है, वह उसी समय रिपोर्ट करेगा कि क्या संदिग्ध व्यक्ति निगरानी के अधीन है, और यदि नहीं तो उसके मत में उसकी हिस्ट्री शीट खोली जानी चाहिए। यदि सब डिवीजन का भारसाधक राजपत्रित अधिकारी, ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर या ऐसी अतिरिक्त जाँच के बाद जैसी वह आवश्यक समझे, समझता है कि हिस्ट्री शीट अपेक्षित है, वह रिपोर्ट की अधीक्षक को अग्रेषित करेगा, जो यदि वह प्रस्ताव स्वीकार करता है, खोले जाने वाले हिस्ट्री शीट का वर्ग निर्धारित करेगा और आदेश पारित करेगा कि क्या संदेहित व्यक्ति को तारांकित किया जावे। इसी प्रकार जब किसी थाने के भारसाधक अधिकारी को अन्वेषण के दौरान के अतिरिक्त, यह विश्वास करने के कारण प्राप्त हों कि उसके मण्डल में रहने वाला कोई व्यक्ति किसी अपराध में लिप्त है या जब कभी राजपत्रित अधिकारी या मण्डल निरीक्षक किसी कारण से विश्वास करते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए हिस्ट्री शीट आवश्यक है, अधीक्षक की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जायेगी, जो उपरोक्त वर्णित रूप से आदेश पारित करेगा।

(2) दोषसिद्धि या दोषमुक्ति पर जब कोई व्यक्ति, डकैती, सेन्धमांरी, पशु चोरी या रेलवे मालगाड़ी से चोरी या पेशेवर किस्म के विविध अपराध के आरोप विचारण के लिये भेजा जाता है | थाने का भारसाधक अधिकारी अपनी डायरी में अभिकथित करेगा कि क्या अभुिक्त की हिस्ट्री शीट है और यदि नहीं, तो वह सिफारिश करता है कि उसके लिए एक हिस्ट्री शीट खोला जाना चाहिए। अभियुक्त के दोष मुक्त हो जाने पर, अधीक्षक को यह सूचित करने का लोक अभियोजक का कर्त्तव्य है कि दोष मुक्ति पर या अन्यथा क्या उसके मत में हिस्ट्री शीट अपेक्षित है। इस पर अधीक्षक थानेदार के लिए आदेश पारित करेगा जो आवश्यक हो। यदि अभियुक्त दोषसिद्धि हो जावे, लोक अभियोजक दोषसिद्धि या दोषमुक्ति की दैनिक रिपोर्ट (प्रारूप क्रमांक 107) की अभियुक्तियों के स्तम्भ में यदि हिस्ट्री-शीट पूर्व में खोली हुई हो तो शब्द "हो०शी० पर" लाल स्याही में, या यदि वह सिफारिश करता है कि हिस्ट्रीशीट को जावे तो अक्षर "ही०शी०" प्रविष्ट करेगा। प्रत्येक मामले में उसे पी०आर० पर्चा (प्रारूप क्रमांक 313) दोषसिद्धि और दोषमुक्ति की दैनिक रिपोर्ट में तैयार कर संलग्न करना चाहिये। यदि हिस्ट्री-शीट पूर्व से खोली हो या यदि अधीक्षक स्वीकार करता है कि हिस्ट्री-शौट खोली जाना चाहिये, वह इस पी०आर० पर्ची पर हस्ताक्षर करेगा जैसा दोषसिद्धि और दोषमुक्ति की दैनिक रिपोर्ट पर शब्द "हि०शी०" या "हि०शी० पर" अद्याक्षरित करेगा। लोक अभियोजक तब अधीक्षक के हिस्ट्री-शीट खोलने के आदेश को सम्बन्धित थाने की ससूचित करेगा और पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची को जेल के अधीक्षक को अग्रेषित कर देगा। यदि हिस्ट्री शीट न खोली गई हो या पुलिस अधीक्षक उसके तैयार किये जाने से सहमत न हो, वह पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची को हस्ताक्षरित न करेगा जो रद्द कर दी जावेगी।

यदि अभियुक्त दूसरे जिले या राज्य का निवासी हो या अभियोजन के लिये रेलवे पुलिस के द्वारा भेजा गया हो, सिवाय इसके कि पुलिस अधीक्षक हिस्ट्री शीट खोले जाने का आदेश नहीं देगा, उसी प्रक्रिया का अनुसरण किया जावेगा। यदि अभियुक्त दोषसिद्ध ठहरा दिया जावे और पुलिस अधीक्षक हिस्ट्री-शीट की वांछनीय समझें, पुलिस रजिस्टर्ड पर्चा हस्ताक्षरित की जाकर जेल के अधीक्षक को भेज दी जावेगी और जेल का अधीक्षक पुलिस के अधीक्षक को पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची की एक रसीद प्रदान करेगा। प्रारूप 148 के स्तम्भ 10 (दोषसिद्धि नामावली) में लोक अभियोजक लाल स्याही से यह टीप-अंकित करेगा कि यह किया जा चुका है और उसी स्तम्भ के प्रारूप क्रमांक 15 में हिस्ट्री-शीट खोली जाना चाहिये, इसकी टिप्पणी अंकित की जावेगी। कोई दोषसिद्धि नामावली, जिप्स पर हिस्ट्री-शीट खोले जाने की सिफारिश की गई हो, दोषसिद्धि व्यक्ति के निवास के जिले में प्राप्त होने पर उस जिले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखी नावे, जो यह निर्णय करेगा कि हिस्ट्री शीट खोली जावे या नहीं और पुलिस रजिस्टर्ड पचीं की रद्द करने के लिये जेल अधीक्षक को सम्बोधित करेगा, यदि वह हिस्ट्री-शीट के वांछनीय होने से सहमत न हो। ऊपर किसी बात के होते हुये भी, उत्तर प्रदेश के किसी जिले का पुलिस अधीक्षक रेंज के उ. जहानिरीक्षक जिसकी किसी असहमति का मामला निर्देशित किया जावे, निर्णय के अधीन रहते हुये सरकारी रेलवे पुलिस के अधीक्षक के निवेदन पर, रेलवे पर अपराध के लिए संदिग्ध या दोषसिद्धि ठहराये गए किसी निवासी व्यक्ति की हिस्ट्री-शीट खोलने के लिए आबद्ध रहेगा। रेलवे पुलिस के अधीक्षक को प्रत्येक मामले में अपेक्षित निगरानी का प्रकार विनिर्द्धिष्ट करना चाहिये।

उन मामलों में जिसमें कोई व्यक्ति रेलवे पुलिस द्वारा अभियोजन के लिए भेजा जाये और पुलिस अधीक्षक उसी हिस्ट्री शीट खोलना वांछनीय समझे, लोक अभियोजक प्रारूप क्र० 143 (दोषसिद्ध नामावली) को उपरोक्त निर्देशित किये गये के अनुसार पृष्ठांकित करके, उस व्यक्ति के जिले के अधीक्षक को रेलवे पुलिस के अधीक्षक के माध्यम से भेजेगा

रेलवे पुलिस अधीक्षक सम्बन्धित जिले के अधीक्षक को प्रारूप क्र० 148 अग्रेषित करते हुये, यह अभिकथित करेगा कि क्या वह हिस्ट्री-शोट आवश्यक समझता है। यदि नहीं, तो वह जेल के अधीक्षक को पुलिस रजिस्टर्ड पर्चा रद्द करने को निवेदन करेगा।

241. पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची जब जेल के अधीक्षक को भेजी जावे, तो यह सम्बन्धित दोषसिद्धि व्यक्ति के वारन्ट के साथ नत्थी रहेगी और वह किसी भी ऐसी जेल को भेजी जा सकती है जिसमें तदन्तर वह स्थानांतरित किया जावे।

पुलिस रजिस्टर्ड दोषसिद्धि व्यक्ति के उन्मोचन के एक मास पूर्व सम्बन्धित जेल का अधीक्षक दोषसिद्धि व्यक्ति के घर के जिले के पुलिस अधीक्षक को इस चेतावनी के रूप में कि दोपसिद्धि व्यक्ति उन्मोचित किया जाने वाला है, पी०आर० पर्ची भेजेगा।

पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची प्राप्ति पर पुलिस अधीक्षक जांच करने और आगामी व्यवस्था करने और वैकल्पिक रूप से सामान्य कार्यवाही करने के, यदि वह लौटने में विफल हो और लापता हो जायें, निर्देशों के साथ भेजेगा। थाने का भारसाधक अधिकारी पी०आर० पर्ची को पुलिस अधीक्षक को इस रिपोर्ट के साथ कि क्या ग्राम अपराध नोट चुक के भाग तीन में दोषसिद्धि सम्यक् रूप से प्रविष्ट कर दो गई है, लौटा देगा (यदि दोषसिद्धि पर कोई हिस्ट्रीशीट न खोली गई हो, वह पता लगाने के लिए पग उठाए जाना चाहिये कि इस लोप के लिए कौन जिम्मेदार था और हिस्ट्री शीट तत्काल खोली जाना चाहिये जब तक कि कोई विशेष कारण न हों, जिससे ऐसा क्यों न किया जावे) पुलिस रजिस्टर्ड पर्चा थाने के द्वारा पृथक् बन्डलों में अभिलेख में फाइल की जावेगी। वे बानों के निरीक्षक अधिकारियों द्वारा हिस्ट्री शीट की जांच करने के उपयोग के लिए ले जाई जा सकती है। वह एक वर्ष के पश्चात् नष्ट कर दी जावेगी।

वह दोषसिद्धि व्यक्ति जिसके लिए पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची तैयार की गई हो, उस जेल से उन्मुक्त किया जावेगा जिसमें यह निरुद्ध रहा हो. और जेल का अधीक्षक दोषसिद्ध व्यक्ति को उसके घर से निकटतम होने वाले स्टेशन के लिए एक रेलवे टिकट देगा। यह उन दोषसिद्धि व्यक्तियों पर जो अपराधी जन-जाति के सदस्य हों या उन दोषसिद्धों पर जिनके बारे में दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 356 के अधीन आदेश पारित कर दिया गया हो और उन बन्दियों पर चाहे वे पुलिस रजिस्टर्ड दीपसिद्ध हों, जिन्हें दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 432 के अधीन सशर्त रूप से उन्मोचित किया गया हो. लागू नहीं होता। बाद वाले के लिये पैरा 375 और 376 देखिए। किसी पुलिस रजिस्टर्ड दोपसिद्ध व्यक्ति की मृत्यु या बचकर भाग निकलने की दशा में जेल का अधीक्षक तत्काल सम्बन्धित पुलिस अधीक्षक को उनकी सूचना देगा।

242 पुलिस अधीक्षक का यह निर्णय करने में कि क्या हिस्ट्री शीट खोली जाना चाहिये और यदि हां, तो उसे किस कोटि में रखा जावे, निम्नलिखित सिद्धान्त मार्ग दर्शन करते हैं- ज्यों ही किसी सन्देह या दोपसिद्ध के द्वारा यह संस्थापित हो जाये की कोई संदिग्ध व्यक्ति डकैतों के गिरोह का सक्रिय और प्रमुख सदस्य है, उसके लिये क वर्ग की हिस्ट्री शीट खोली जाये और उसे तत्काल तारांकित कर दिया जाये। दूसरी ओर पहली बार सन्देह या दोषसिद्धि के द्वारा ध्यान में आने पर सेंधमारों, पशुचोरों और रेलवे मालगाड़ी बोरों के लिये यद्यपि क वर्ग को हिस्ट्री शोट खोली जाती है, ऐसे संदिग्धों को तारांकित न किया जावे, जब तक कि निरन्तर रहने वाले संदेहों या दोषसिद्धि की श्रृंखला द्वारा यह स्पष्ट या संस्थापित न हो जाये कि वह खतरनाक और सन्तुष्ट अपराधी हो गये हैं तथा उनके सुधार की सम्भावना नहीं है।

जब अपराधियों के किसी गिरोह का अस्त्त्वि प्रकाश में लाया जाये तो हिस्ट्री शीट गिरोह के अधिक प्रमुख व्यक्तियों के लिए ही खोली जावै गिरोह के छोटे सदस्यों से सम्पर्क बनाये रखने के लिये गिरोह रजिस्टर (पैरा 253) का प्रयोग किया जावे।

यह तथ्य है कि किसी व्यक्ति को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 के अधीन आबद्ध किया जा चुका है.' अपने आप में इतना पर्याप्त नहीं है कि उससे हिस्ट्र-शीट का खोला जाना आवश्यक हो जावे। ऐसे मामले में उस आदमी का पूर्व इतिहास और उसकी गिरफ्तारी की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाये। दूसरी ओर यदि हिस्ट्री शीट पर न होने बाला कोई व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के अधीन आबद्ध किया जावे, तो उसकी हिस्ट्री शीट तत्क्षण तैयार की जावे।

पुलिस अधीक्षक उन मामलों की जिसमें दुश्चरित्र व्यक्ति, जो हिस्ट्री शीट पर नहीं है. दण्ड प्रकिया संहिता की धारा 110 के अधीन अभियोजित किये गये हों यह जानने की दृष्टि से कि यह पूर्व पुलिस की जानकारी से बचने में कैसे सफल हुये, देख भाल करेगा।

उन व्यक्तियों के लिए हिस्ट्री शीट नहीं खोली जाना चाहिये जिनके पास नियत निवास स्थान न हो। निवासी आपराधिक जन जाति के सदस्यों के लिये हिस्ट्री शीट खोलने पर अधिरोपित निबन्धों के लिए आपराधिक जनजाति पुस्तिका देखें।

संदेह की अपेक्षा दोषसिद्धि पर हिस्ट्री शीट का खोला जाना अधिक आवश्यक है और यह लक्ष्य कि दोषसिद्धि व्यक्ति इतने अधिक कारावास से जो कितनी ही लम्बी अवधि का हो, से दण्डित किया गया है, उसकी हिस्ट्री शीट न खोलने के लिये कारण नहीं है।

243. उपरोक्त तीन पैराओं के आदेश किशोर और वयस्क बन्दियों और संदेहित व्यक्तियों को लागू होते हैं परन्तु किशोरों के मामले में हिस्ट्री शीट की तैयारी के लिये आदेश पारित करने के पहले विशेष सावधानी से विचार करना चाहिये। यदि कभी दोषसिद्धि पर किशोर अपराधी बरेली किशोर जेल को भेजा जाये, तो वह विशिष्ट उपचार प्राप्त करेगा। उसको पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची, यदि तैयार की गई हो, उसके निरोध की अवधि समाप्त होने से एक मान पहले, किशोर जेल के अधीक्षक द्वारा संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को इस अभियुक्त के साथ कि छोड़ दिए जाने पर किशोर अपराधी को पुलिस की निगरानी से मुक्त क्यों करना है, वापस की जावेगी। इस तरह पृष्ठांकित पुलिस रजिस्टर पर्ची प्राप्त होने पर, पुलिस अधीक्षक अपराधी को हिस्ट्री शीट फाइल कर देगा और संम्बन्धित थानेदार को आदेश जारी करेगा कि उसे निगरानी के किसी रूप के अध्याधीन नहीं किया जाना है। नियमों का यह न्यूनीकरण किसी तरह निम्नलिखित वर्गों के पुलिस रजिस्टर किशोर अपराधियों को बरेली किशोर जेल से छूटने पर, समानुगत नहीं होगा।

() वे, जिनका आचरण, निरोध के दौरान किशोर जेल के अधीक्षक, द्वारा, यह दर्शाने के लिये कि वे सुधार प्रशिक्षण कोर्स द्वारा लाभान्वित नहीं हुये हैं, समझा गया है।

पुलिस रजिस्टर्ड किशोर अपराधियों के इन दो वर्गों के सम्बन्ध में सामान्य प्रक्रिया का अनुसरण किया जावेगा। हर मामले में छोड़े जाने के एक माह पूर्व किशोर के अधीक्षक द्वारा निवासी जिले के पुलिस अधीक्षक को, वर्ग ख के किशोर बन्दियों के मामले में, जेल में उसके व्यवहार पर रिपोर्ट के साथ पुलिस रजिस्टर्ड पर्ची भेजेगा और छोड़ जाने पर पूर्व दोषसिद्ध किशोर निगरानी से सम्बन्धित साधारण नियमों के अध्याधीन रहेगा।

आपराधिक जन-जाति के सदस्यों और एक से अधिक बार दोषसिद्धि किशोरों को बरेली जेल में भर्ती नहीं किया जावेगा। प्रथमोक्त आपराधिक जन-जाति पुस्तिका के नियमों के अध्याधीन होंगे।

244. धारा 130 दण्डू प्रक्रिया संहिता के अधीन कार्यवाही करने के पूर्व, थानेदार को चाहिये कि वह प्रारूप क्रमांक 5 में मण्डल निरीक्षक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को आवेदन भेजे। मण्डल निरीक्षक बिना किसी विलम्ब के आवेदन पत्र अधीक्षक को संदिग्ध व्यक्ति के बारे में स्थानीय जाँच कर अपनी जानकारी की रिपोर्ट के साथ अग्रेषित कर देगा। यदि पुलिस निधीक्षक रिपोर्ट का अनुमोदन कर दे तो वह उसे, सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के अधीम 'सूचना' के रूप में भेज देंगा। (टिप्पणी दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अधीन धारा 110 के अन्तर्गत सूचना पर विचार करने की अधिकारिता अब प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को ही है।) यदि मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से दण्ड प्रकिया संहिता की धारा 110 के अधीन कारण बताने की अपेक्षा करना आवश्यक समझे, वह उक्त धारा के द्वारा अपेक्षित विवरणों का वर्णन करते हुए धारा 112 के अधीन आदेश बनायेगा और प्रारूप 5 थानेदार को लौटा देगा, जो उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने और आवश्यक साक्ष्य के साथ मजिस्ट्रेट के पास पेश करने के लिये तत्काल पग उठायेगा। प्रारूप 5 अभियोजक अधिकारी की मामले के संक्षेप के रूप में प्रयोग के लिये भेज दिया जावेगा और यदि मजिस्ट्रेट उचित पाये, तो उसे फाइल के साथ संलग्न कर दिया जावेगा। नियम के तौर पर हिस्ट्री शीट न्यायालयों को नहीं भेजी जावेगी, परन्तु वह तब भेजो जावेगी, जब न्यायालय उन्हें देखने के लिए माँगे। जब दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 या 110 के अधीन कार्यवाही करने के प्रयोजन के लिए जाँच कर रहे हो. पुलिस के द्वारा किसी कथन को अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिये। यदि ऐसे कथन अभिलिखित किये जावें तो अभियुक्त दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 162 के अधीन उनकी प्रतियाँ प्राप्त करने में समर्थ हो सकता है [तथापि, 1973 की दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 देखे।]

245. हिस्ट्री-शीट वाले सभी व्यक्तियों के नाम फेरे वाले सिपाहियों को नोटबुक में और ग्राम चौकीदार की अपराध नोटबुक में प्रविष्ट किये जावें। उन गांवों का, जिनमें दुश्चरित्र निवास करते हों, अधिकारियों और सिपाहियों द्वारा किए गए सभी परिदर्शन ग्राम नोटबुक के छुट्टे कागज [फ्लाई शीट] में दिखाये जायेंगे और इस कागज में यह प्रविष्टि की जावेगी कि ग्राम के सभी '' वर्ग के हिस्ट्री-शीट वाले व्यक्तियों से परिदर्शन किया गया है। इस सभी परिदर्शनों का परिणाम दर्शाने वाली एक पूर्ण टिप्पणी, जनरल डायरी में, जनरल डायरी के क्रमांक निर्देश फ्लाई शीट पर देते हुए, प्रविष्ट की जावेगी और यदि महत्व की कोई वात सुनिश्चित हो तो उसकी टिप्पणी हिस्ट्री शीट में भी अंकित की जावेगी। नगरों में हिस्ट्री शीट के संलग्न एक प्रथक (फ्लाई शीट) संलग्न को जावेगी, जिसमें संदिग्धों के किये जाने वाले सभी परिदर्शन अभिलिखित किये जावेंगे।

246. हिस्ट्री-शीट में, अन्य मण्डलं के निवास करने वाले किसी मुखबिर (सूचना दाता) को प्रभावित करने वाली किसी सूचना को अभिलिखित करने वाला थाने का भारसाधक अधिकारी उस मण्डल की पुलिस को सूचित करेगा।

247. जब हिस्ट्री शीट के अध्याधीन कोई व्यक्ति, जिले के भीतर अपना निवास बदल ले. सम्बन्धित मण्डल निरीक्षक यह निर्णय करेगा कि उस मण्डल को जहाँ वह चला गया है, हिस्ट्री-शीट भेजी जावे या नहीं। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति ब्रिटिश भारत के भीतर किसी अन्य जिले में अपना निवास बदल ले, उसकी हिस्ट्री शीट मूलरूप में पुलिस अधीक्षक द्वारा उस जिले के पुलिस अधीक्षक को, जहाँ यह चला गया है, अग्रेषित कर दी जावेगी। यदि वह अपना निवास किसी देशी राज्य में बदल दे, राज्य की पुलिस अंग्रेजी कार्यालय द्वारा सूचित किया जावेगा और यदि हिस्ट्री शीट माँगी जावे तो उसकी एक प्रति भेज दी जावेगी। जब एक ही जिले के भीतर एक थाने से दूसरे थाने को हिस्ट्री-शीट अन्तरित कर दी जावे, दोनों सम्बन्धित थानेदार इस तथ्य को पुलिस अधीक्षक को इसके द्वारा मुख्यालय की सूची शुद्ध करने में समर्थ होने के लिये सूचित करेंगे (पैरा 249)

248. रेलवे पर अपराधों में अभ्यस्त व्यक्तियों की हिस्ट्री-शीट जिला पुलिस द्वारा रखी जावेगी सिवाय उन विशेष मामलों के जहाँ दोनों अधीक्षकों के अभिमत में निगरानी रेलवे पुलिस द्वारा अधिक दक्षता से हो सकती है।

मतभेद की दशा में रेंज के उप-महानिरीक्षक का आदेश अंतिम होगा। रेलवे पर अपराध करने वाले अभ्यस्त व्यक्तियों की हिस्ट्री शीट रेलवे पुलिस द्वारा दो प्रतिकक्ष में बनाई रखो जावेगी, जिसे जब कभी भी आवश्यक हो जिले के अभिलेख तक पहुँच की अनुमति दी जावेगी। रेलवे पुलिस का थानेदार जिला पुलिस के थोनदार को, हिस्ट्री शीट बनाये रखता हो, ऐसे तथ्यों को, जो उनके अभिमत से हिस्ट्री-शीट में प्रविष्ट किये जाना चाहिये, तत्काल सूचित करेगा, और हर मामले में एक त्रैमासिक ज्ञापन अग्रेषित करेगा जो हिस्ट्री शीट के संलग्न रहेगा। इसी प्रकार जिला पुलिस को हिस्ट्री-शीट के अध्याधीन रेलवे पर अपराध करने के अभ्यस्त व्यक्ति के बारे में ऐसी सूचना जो रेलवे पुलिस के ध्यान में लाये जाने योग्य हो, उसे संसूचित करना चाहिये।

249. हर थाने पर, मण्डल के भीतर हिस्ट्री-शीट पर रहने वाले सभी व्यक्तियों को दो सूचियाँ बनाई रखी जावेंगी। एक सूची '' और '' वर्ग के लिये होगी।

यह सूचियाँ नाम, जाति, निवास, पूर्व दोषसिद्धि, हिस्ट्री शीट खोलने का दिनांक: "तारांकित " और "अतांकित" किये जाने का दिनांक (केवल वर्ग क संदिग्धों के मामलों में) और निगरानी, बन्द करने का दिनांक, दर्शायेगी और अभियुक्तों के लिये उनमें एक स्तम्भ अन्तर्विष्ट रहेगा। जब '' वर्ग का कोई संदिग्ध तारांकित किया जावे तो '' वर्ष की सूची में उसके नाम के सामने लाल स्याही से एक तारा अंकित कर दिया जाये। हर थाने पर हर सूची के नाम अनुक्रमांकित किये जायेंगे (प्रारूप 9), अनुक्रमांक कभी नहीं बदला जावेगा और जब कोई नवीन हिस्ट्री-शीट खोली जावे, उसके लिये उपयुक्त सूची में नया अनुक्रमांक लिया जावेगा और जब किसी संदिग्ध व्यक्ति की निगरानी बन्द कर दी जावे, उसकी हिस्ट्री-शौट का अनुक्रमांक पुनः प्रयोग नहीं किया जावेगा, जब तक कि उसकी निगरानी पुनः प्रारम्भ न की दी जावे। प्रत्येक जिले के मुख्यालय पर थानेदार ठीक ऐसी ही सूची अंग्रेजी में पुलिस अधीक्षक के प्रवाचक द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों के वर्ग के लिए बनाई रखी जावेंगी। मुख्यालय और थाने की सूचियों के अनुक्रमांक एक रूप के होंगे। मुख्यालय की सूची नवीनतम रूप में रखी जावे और थाने निरीक्षण के समय जाँच करने और अपराधों से व्यवहार करने के सभी मामलों में प्रयोग की जावे।

हिस्ट्री-शीट पर साथियों के स्तम्भ में, उन साथियों के अनुक्रमांक, वर्ग और अक्षर जो स्वयं भी हिस्ट्री-शीट पर हों, दिखाये जाये उदाहरणार्थ-, 7, -9

250. दुश्चरित्रों की सूची और हिस्ट्री शीट गोपनीय अभिलेख है। यद्यपि हिस्ट्री-शीट ग्राम अपराध नोट बुक में रखी जाती है, थानेदार को यह देखना चाहिये कि उन तक किसी अनाधिकृत व्यक्ति की पहुँच न हो।

251. निगरानी के मामले में मण्डल निरीक्षक का उत्तरदायित्व कड़ाई से प्रवृत्त किया जावेगा। जब कभी कोई मण्डल निरीक्षक किसी थाने का परिदर्शन करे, वह यह देखने के लिए या दो हिस्ट्री शीट की जांच करेगा कि वह अध्यान्त तक रखी गई है और इस आशय की प्रविष्टि अपनी साप्ताहिक डायरी में करेगा। अपने वार्षिक निरीक्षण, वह दुश्चरित्रों के बारे में, विशेषकर उन पर जिनके बारे में अस्थायी रूप से सक्रिय होना समझा जाता हो या जो ऐसे क्षेत्र में रहते हों जहाँ अपराध प्रचलित हों. विशेष ध्यान देते हुये, स्थानीय जांच करेगा, वह ऐसी जांच के परिणाम हिस्ट्रो-शीट में लिखेगा। मण्डल निरीक्षक अपने मण्डल के भीतर रहने वाले व्यक्तियों की सूची थाने और मुख्यालय की सूचौ के, प्रारूप में रखेगा। वह अपने मण्डल में हिस्ट्री शीट पर रहने वाले व्यक्तियों के बारे में थाने के जैसे प्रारूप में अनुशंसा करने; वर्ग '' के व्यक्तियों को अवसर द्वारा अपेक्षानुसार अतारांकित करने और जब आवश्यक हो, अपने मण्डल के भीतर दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के अधीन मामलों का अभियोजन करने के लिए उत्तरदायी ठहराये जायेंगे। वह अधीक्षक के ध्यान में उन थाने के मामलों को लायेंगे, जहाँ खोली गई हिस्ट्री-शीट की संख्या अत्यधिक हो या जहाँ निगरानी समुचित रूप से न की जा रही हो और सुधार के बारे में, अपने सुझाव देंगे।

252. उन व्यक्तियों की निगरानी के निदेशों के लिये, जिनके लिये व्यक्तिगत अपराध फाइलें अपराध अन्वेषण विभाग द्वारा बनाये रखी जाती हैं, अपराध अन्वेषण विभाग पुस्तिका देखिये।

गिरोह पंजी

253. जब कभी डकैतों, पशु चोरों या रेलवे वैगन से चोरों का संगठित गिरोह प्रकाश में आवे, प्रत्येक उस धाने, और जिले के मुख्यालय में, जिसके भीतर गिरोह का कोई सदस्य निवास करता हो, सम्पूर्ण गिरोह के विवरण गिरोह पंजी (प्रारूप क्र० 45) में रखे जावेंगे। सेंध लगाने के गिरोह के लिए, परिपत्र क्रमांक 1/चार-23-25, दिनांक 14 दिसम्बर, 1929 के द्वारा विहित पत्र, गिरोह पंजी के बजाय प्रयोग किया जावे। यह आवश्यक नहीं है कि गिरोह के सभी सदस्यों की हिस्ट्री शीट हो। रजिस्टर के स्तम्भ में उस सेदस्य व्यक्ति के नाम के सामने, उस व्यक्ति के बारे में जिसकी हिस्ट्री-शीट -न हो, अभिलेख पर लाए जाने के योग्य सभी विवरण प्रविष्ट किये जावें। यदि गिरोह के सदस्य के बारे में अभिलिखित किये जाने के लिये अपेक्षित सभी महत्वपूर्ण तथ्य अन्तर्विष्ट करने के लिये, यदि स्तम्भ 6 का स्थान अपर्याप्त हो, इससे हिस्ट्री-शोट की आवश्यकता प्रतीत होगी। स्तम्भ 7 में रजिस्ट्रीकरण के कारण, गिरोह का पूर्ण इतिहास और उसकी पद्धति और उसके बारे में पश्चात् में सुनिश्चित किये तथ्यों का कथात्मक विवरण प्रविष्ट किये जायेंगे। जब कभी गिरोह के बारे में जांच की जावे, मण्डल निरीक्षक या जांचकर्ता अधिकारियों की टिप्पणियाँ और यदि महत्व की कोई बात न पाई जावे तो उसके हस्ताक्षर, जांच की तारीख इस स्तम्भ में प्रविष्ट की जावे। गिरोह रजिस्टर में गिरोहों की प्रविष्टि अधीक्षक के आदेशों के अधीन ही की जावेगी। गिरोह का रजिस्टर एक स्थायी अभिलेख होगा और गिरोह को उसमें से कभी नहीं मिटाया जावेगा, किन्तु यह संस्थापित हो जाने पर कि गिरोह भंग हो गया है, रजिस्टर में प्रविष्टियां और उनके बारे में पूछ-ताछ अधीक्षक के आदेशों के अधीन बन्द की जा सकेंगी। जिस दशा में इस आशय की प्रविष्टि स्तम्भ 6 में की जावेगी और इसके नीचे पृष्ठ के एक सिरे तक लाल स्याही से एक रेखा खींच दी जावेगी।

254. प्रत्येक डकैती के मामले की समाप्ति पर लोक अभियोजक द्वारा मुख्यालय के गिरोह रजिस्टर में क्या प्रविष्टि की जानी चाहिये जो यह विचार करेगा और अधीक्षक को रिपोर्ट देगा कि रजिस्टर में क्या प्रविष्टि को जानी चाहिये और उसी के साथ ही वह यह रिपोर्ट देगा कि वह मामले मे किन संकेतों (सुरागों) का अनुसरण और आगे किये जाने का विचार करता है। यदि यह पाया जावे कि कोई गिरोह एक से अधिक जिलों में शाखाओं में विभाजित, हो गया है उस जिले का अधीक्षक, जहां वह पहले प्रकाश में आया हो, अन्य सम्बन्धित जिलों के अधीक्षकों से उसके रजिस्ट्रीकरण का प्रस्ताव करने के लिए उत्तरदायी रहेगा। उन सभी जिलों के अधीक्षकों का जहां कोई गिरोह रजिस्ट्रीकृत किया गया हो, किसी भी जिले में उसके बारे में सुनिश्चित की गई किसी महत्वपूर्ण बात से सूचित किया जावे और नामों की वृद्धि या प्रविष्टियों और जांचों को बन्द करने के सभी प्रश्न सम्बन्धित अधीक्षकों के बीच वर्ष में एक बार, यदि सम्भव हो तो, साक्षात चेर्चा द्वारा तय किया जावे। एक से अधिक जिलों में कार्यरत गिरोह के रजिस्ट्रीकरण के लिए या इसमें सम्बन्धित जांचों और प्रविष्टियों को जारी रखने याध्बन्द करने के लिए आवश्यकता के बारे में, कोई मतभेद आदेश के लिए उप-महानिरीक्षक को निर्देशित किया जाना चाहिये।

255. मुख्यालय का गिरोह रजिस्टर अंग्रेजी में आपराधिक जन-जाति के उप-निरीक्षक द्वारा रखा जायेगा, जो छः माह के मध्यान्तर से वर्ष में दो बार उसके जिले में प्रत्येक थानों को जिसमें कोई गिरोह रजिस्ट्रीकृत हुआ हो, परिदर्शन करेगा और उसके रजिस्टर को थाने के रजिस्टर से, थाने के रजिस्टर में की गई किसी महत्त्वपूर्ण प्रविष्टि की अपने रजिस्टर में प्रतिलिपि करते हुये और उनके द्वारा रजिस्ट्रीकृत किये गये गिरोह के बारे में अन्य साधनों से सुनिश्चित की गई जानकारी को थानेदार को संसूचित करते हुये जांच करेगा।

256. गिरोह रजिस्टर पर कोई ऐसा गिरोह जो अपराधी जन जातियां अधिनियम के अधीन उद्द्घोषित और रजिस्ट्रीकृत किये जाने के लिये उपयुक्त होने के लक्षण दर्शाता हो, अपराधी जन-जाति अधिनियम की पुस्तिका के द्वारा विहित प्रारूप के गिरोह रजिस्टर पर लाया जाना चाहिये। जब कभी ऐसा किया जावे, गिरोह रजिस्टर पर उसकी टिप्पणी लायी जानी चाहिये।

बुरे चरित्रवालों की गतिविधियों की रिपोर्ट सत्यापन करने के लिये नियम

257. ग्राम चौकीदार और (कस्बे में) फेरे वाले कान्सटेबिल का यह कत्र्तव्य है कि जैसे ही हिस्ट्री-शीट पर रहने वाला कोई दुश्चरित्र व्यक्ति अपना घर छोड़े, वह उसके प्रस्थान और यदि ज्ञात हो तो गन्तव्य स्थान की सूचना तुरन्त थाने के भारसाधक अधिकारी को दे।

258. किसी वर्ग के, "तारांकित" या "अतारांकित" हिस्ट्रीशीट वाले व्यक्ति के प्रथान की रिपोर्ट मिलने पर थाने के भारसाधक अधिकारी को पैरा 237 और 238 के अन्तर्गत बताये गये सिद्धान्तों के अनुसार यह निर्णय लेना चाहिये कि क्या जांच पर्ची-क भेजा जाना आवश्यक है, क्योंकि थानेदार सभी समयों पर थाने में उपस्थित नहीं रहता, उन दुश्चरित्रों के नाम कार्यालय के अभिलेख में रुखे जावे, जिनके लिये जाँच पर्ची भेजा जाना हो। जब जांच पर्ची-क भेजना आवश्यक समझा जावे, यह तत्क्षण प्रारूप नं० 204 में बनाया जाना चाहिये और तीव्रतम साधनों से हाथ या डाक द्वारा मण्डल के भारसाधक अधिकारियों को, जिसमें बुरे चरित्र वाले व्यक्तियों का जाना बताया या विश्वास किया गया हो, अग्रेषित किया जावे। उस चौकीदार के द्वारा जो प्रस्थान की रिपोर्ट करता है, गन्तव्य स्थान के घाने को जांच पर्ची कभी नहीं भेजी जानी चाहिये।

259. यदि बुरे चरित्र वाले व्यक्ति का गन्तव्य स्थान जहां पर्ची भेजी जाना हो, अज्ञात हो, जांच को कार्बन या अन्य प्रति उस प्रत्येक थाने को भेजी जावेगी, जिसमें युक्तियुक्त रूप से उसका जाना समझा जावे। हिस्ट्री-शीट में सम्बन्धियों और साथियों के स्तम्भ के निर्देश बुरे चरित्र वाले व्यक्ति के सम्भावित गन्तव्य स्थान का संकेत करेंगे।

जब कोई हिस्ट्री-शीट वाला रेलवे चोर अपने आपको संदिग्ध परिस्थतियों के अधीन अनुपस्थित रखे, तो सम्बन्धित सरकारी रेलवे पुलिस अधिकारी को तत्काल सूचित किया जाना चाहिये।

260. जब कभी कोई दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घर को, उस मण्डल के लिये, जिसका वह निवासी हो, असाधारण परिस्थितियों में छोड़ दें, चौकीदार या कान्सटेबिल की रिपोर्ट जनरल डायरी में प्रविष्ट को जावेगी और यथासम्भव शीघ्र किसी कान्सटेबिल के द्वारा या उस गांव के चौकीदार से, जहाँ दुश्चरित्र का जाना आरोपित्त हो, जांच द्वारा उसके परिदर्शन का सत्यापन किया जायेगा।

261. चौकीदारों के द्वारा दुश्चरित्र व्यक्तियों के प्रस्थान को- (1) मण्डल के बाहर गन्तव्य स्थान को, (2) मण्डल के भीतर सामान्य गन्तव्य को, (3) किसी अज्ञात स्थान को और (4) रात्रि में, प्रस्थान करने की रिपोर्ट जनरल डायरी में, अभिलिखित की जौवेगी और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट के क्रमांक और दिनांक का निर्देश चौकीदार को अपराध पुस्तक में संदिग्धं व्यक्ति के नाम के सामने इस प्रयोजन के लिये उपत्बन्धित स्तम्भ में किया जावेगा।

262. जांच पर्ची- (पैरा 258) प्राप्त करने वाला पुलिस अधिकारी, यह सुनिश्चित करने के लिए पग उठायेगा कि क्या दुश्चरित्र व्यक्ति आ पहुँचा है, तब वह तत्क्षण जांच पचों में उसकी पूर्ति करेगा और उसे उस थाने को लौटा देगा जहाँ से वह प्राप्त हुई थी। यदि दुश्चरित्र व्यक्ति उसके मण्डल में बना रहे, वह उसकी उसी प्रकार निगरानी करवायेगा मानों वह उसके हो मण्डल का दुश्चरित्र हो। यदि उसके बारे में महत्व की कोई बात उसके ठहरने के बीच विदित हो तो वह उसकी तत्क्षण सूचना मूल धाने के भारसाधक अधिकारी को भेजेगा। यह जांच पर्ची-क को इस प्रत्याशा में विलम्बित नहीं करेगा कि दुश्चरित्र अपने घर लौट जाये।

263. यदि दुश्चरित्र व्यक्ति पर्ची में दिये गये दिनांक और समय से भिन्न दिनांक और समय पर जाये, जाँच पर्यो प्राप्त करने वाला अधिकारी उस अधिकारी को सूचित करेगा, जिसने वह भेजी हो।

264. यदि दुश्चरित्र व्यक्ति उस पुलिस मण्डल के भीतर जहाँ उसका जाना आरोपित हो, युक्तिसंगत समय के भीतर न पहुँचे, इस आशय की रिपोर्ट के साथ भारसाधक अधिकारी जांच पर्ची को लौटा देगा और सम्बन्धित चौकीदार या कान्सटेविल को संदिग्ध के आगमन को देखते रहने के लिए निर्देशित करेगा। यदि अन्तृतः दुश्चरित्र व्यक्ति आ पहुँचे, उस थाने को जहां से मूलतया जाँच पर्ची आई थी, तत्काल एक रिपोर्ट जांच पर्चा द्वारा अपेक्षित विवरण देते हुये, भेजी जावेगी।

265. यदि दुश्चरित्र व्यक्ति उस थाने की सीमाओं को, जहाँ वह आया है, छोड़कर अपने घर के अतिरिक्त किसी अन्य गन्तव्य स्थान को चला जावे, थाने का भारसाधक अधिकारी उस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जहाँ वह गया है, जाँच पर्ची-क की एक प्रति उस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जहाँ का दुश्चरित्र व्यक्ति निवासी हो, भेजते हुये, इस प्रकार भेजेगा मानो वह उसके हो मण्डल का निवासी हो। उस थाने का भारसाधक अधिकारी, जिसमें दुश्चरित्र गया हो, दुश्चरित्र के निवास के थाने को जांच पर्ची का उत्तर भेजेगा और आगामी गतिविधियों के मामले में उसी प्रकार कार्य करना जारी रखेगा, मानो दुश्चरित्र अपने निवास से आया हो।

266. किसी मामले में जिसमें किसी दुश्चरित्र व्यक्ति की अनुपस्थिति संदिग्ध पाई जावे, पैरा 239 में यथावर्णित, उसकी हिस्ट्री शीट में तथ्यों की एक संक्षिप्त टीप अंकित की जावेगी।

267. यदि कोई ग्राम चौकीदार अपने गाँव में किसी संदिग्ध अपरिचित का आगमन सुने, वह उससे उसके पूर्व वृत्तांत और निवास के बारे में प्रश्न करेगा तथा इस प्रकार प्राप्त जानकारी को यथासम्भव शीघ्रता से थाने को ले जायेगा या भेज देगा।

268. किसी भी स्रोत से सूचना प्राप्त होने पर, थाने का भारसाधक अधिकारी यथासंभव शीघ्र जाँच पर्ची- (प्रारूप क्र० 245) को उस थाने के भारसाधक अधिकारी के पास भेज देगा जहाँ से उस अपरिचित का आगमन आरोपित हो और प्रतिपर्ण पर अपने ऐसा करने के कारणों की टिप्पणी लिखेगा।

269. जाँच पर्ची-व के प्राप्त होने पर, थाने का भारसाधक अधिकारी उसे तत्काल अपरिचित व्यक्ति के सम्बन्ध में सूचना सहित लौटा देगा। यदि अपरिचित उसके मण्डल का निवासी न हो, वह जाँच पचों को इस आशय की टिप्पणी के साथ लौटा देगा। जांच पर्ची को जारी करने वाला अधिकारी, उत्तर प्राप्त हो जाने पर, यह निर्णय करने की स्थिति में हो जायेगा कि क्या उस अपरिचित के विरुद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 के अधीन कार्यवाही की जाना चाहिए या क्या उसकी निगरानी किया जाना जारी रखा जाना चाहिए। यदि न तो अभियोजन और न निगरानी अपेक्षित हो, जाँच पर्ची फाइल कर दी जावेगी और अपरिचित पर आगे और ध्यान नहीं दिया जावेगा।.

270. यदि संदिग्ध अपरिचित की गतिविधियाँ और व्यवहार उसे दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के अधीन गिरफ्तार किये जाने को युक्तियुक्त बना दें, ऐसो कार्यवाही की जांच पर्ची के उत्तर को बिना देखे तत्काल की जानी चाहिये।

271. उस थाने की सीमाओं के जहाँ से जांच पर्ची-ख जारी की गई थी, अपरिचित के बाहर चले जाने पर जांच मर्ची उसके निवास के थाने को लौटा दी जावेंगी, यदि () उसके परिदर्शन के दौरान उसके विरुद्ध कोई संदिग्ध बात अभिलिखित की गई हो या () वह हिस्ट्री-शीट पर हो। अन्य सभी मामलों में, जांच पर्चा उसी थाने में रहगी जहाँ से वह जारी की गई थी।

जब कभी जांच पर्चा-ख निवास के थाने को लौटाई जावे, पर्ची पर संदिग्ध व्यक्ति के प्रस्थान का समय और दिनांक दिया जावेगा और उपरोक्त () की दशा में संदिग्ध व्यवहार के विवरण बढ़ा दिये जावेंगे।

272. यदि संदिग्ध, जिसके बारे में जांच पर्ची-ख भेजी गई हो, हिस्ट्री-शीट पर ही और यदि वह अपने घर के अतिरिक्त अन्य पुलिस मण्डल को चला जावे, जांच पर्ची-क उस पुलिस मण्डल को जहाँ वह चली गया हो, उसके निवास के थाने को एक प्रति अग्रेषित करते हुए, भेजी जायेगी। इस जांच पर्ची का उत्तर निवास के थाने को सीधा भेज दिया जावेगा और उस थाने का भारसाधक अधिकारी, जहाँ संदिग्ध चला गया है, इस प्रकार कार्य करेगा मानो संदिग्ध व्यक्ति अपने निवास में आया हो और जांच पर्ची उसके निवास के थाने के द्वारा उसे भेजी गई है।

273. ग्रामीण क्षेत्र में चौकीदार के द्वारा पालनीय कर्त्तव्य नगरों और कस्बों में पुलिस के द्वारा पालन किए जावेंगे। जब टेलीफोन उपलब्ध हो, साधारणतया जांच पर्ची नहीं भेजी जावेगी, परन्तु तब टेलीफोन का प्रयोग किया जावेगा जब आगमन का प्रस्थान की कोई रिपोर्ट प्राप्त हो ऐसी रिपोर्ट जनरल डायरी में अभिलिखित की जावेगी और जांच पर्चियां केवल अभिलेख के प्रयोजनों के लिए तैयार की जाबेंगी। इसी प्रकार टेलीफोन से प्राप्त किये गये उत्तर जनरल डायरी और जांच पर्चियों में प्रविष्ट किये जायेंगे। नगर निरीक्षण और नगर थानों के भारसाधक अधिकारी यह देखने के उत्तरदायी होंगे कि जांच पर्चियों की फाइल आद्यान्त रखी जाती है और टेलीफोन जांच के उत्तर शीघ्रता से दिये जाते हैं। दुश्चरित्र व्यक्तियों की गतिविधियों को टेलीफोन द्वारा जांच के उत्तर में 24 घण्टे से अधिक के विलम्ब को नगर निरीक्षक को तत्काल रिपोर्ट की जानी चाहिये।

274. थाने के भारसाधक अधिकारियों की जांच पर्चियाँ जारी की जाने का पर्यवेक्षण करना चाहिये। उन्हें उनके सही और नियमित प्रयोग के लिये, उनके परीक्षण करने के लिए और यह देखने के लिए कि सम्बन्धित हिस्ट्री शीट में संदिग्ध और असत्यापित गतिविधियां उचित रूप से प्रविष्ट की जानी है, उत्तरदायी ठहराया जावेगा। प्रत्येक थाने पर, प्रत्येक जारी और प्राप्त की गई जांच पर्चियों की एक निदेशक सूची, तालिका के रूप में उनका नाम, गन्तव्य स्थान, हिस्ट्री-शीट क्रमांक उन सभी के जिनके लिए वह जारी की गई हो, आगमन और प्रस्थान का समय दर्शाते हुये, बनाई रखी जावेगी। जब जांच पर्चियां दूसरे प्रान्तों को भेजी जावें, उसका अंग्रेजी प्रतिपर्ण अवश्य ही भरा जावे।

उन दोषसिद्धों अपराधियों जिनके सम्बन्ध में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 336 के अधीन आदेश पारित किया गया हो और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के अधीन सशर्त छोड़े गये बन्दियों के बारे में नियम :-

275. दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अधीन, उस धारा में विनिर्दिष्ट किसी अपराध के लिस दोषसिद्ध ठहराया गया किसी व्यक्ति को दंडाज्ञा दिये जाते समय वह आदेशित किया जा सकता है कि वह ऐसे नियमों के अधीन जो राज्य सरकार बना सकेगी, अपना निवास और अपने ऐसे निवास स्थान से या उसका परिवर्तन दन्डाज्ञा की समाप्ति से पांच वर्ष से अधिक न होने वाली समय अवधि तक के लिए, अधिसूचित करें। इस धारा के अधीन स्थानीय सरकार द्वारा बनाये गये नियम इस प्रकार हैं:-

(1) जेल मैनुअल के पैरा 124 के अधीन जेल का अधीक्षक दोषींपुद्ध व्यक्ति के उन्मोचन से कम से कम दो दिवस पूर्व पुलिस अधीक्षक को सूचना देगा और पुलिस अधीक्षक गारद और अनुरक्षणों के नियमों के नियम 165 के अनुसार एक गारद की उस दिनांक को उस बंदी को जेल से पुलिस अधीक्षक के या जेल के भारसाधक किसी अन्य अधिकारी के पास लाने के लिए प्रतिनियुक्त करेगा। दोषसिद्ध व्यक्ति उसे उस ग्राम या मोहल्ले से संसूचित करेगा, जिसमें निवास करने का उसका विचार हो। सम्बन्धित अधिकारी तब उसे उस शर्त की सूचना देगा, जिसकी उसके द्वारा पूर्ति की जानी है और (जेल द्वारा अग्रेषित) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अधीन पारित आदेश की प्रतिलिपि पर दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा बताये गये जिले और स्थानीय क्षेत्र को प्रविष्ट कर देगा, और उन्मोचित दोषसिद्धों द्वारा अपने निवास को अधिसूचित करने के लिये स्थानीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की हिन्दी या उर्दू में एक प्रति दोषसिद्ध में व्यक्ति को दे देगा। तदुपरान्त पुलिस अधीक्षक सिद्धदोष व्यक्ति को उन्मोचित कर देगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अधीन पारित आदेश की प्रति में दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा बताए गए जिला और स्थानीय क्षेत्र प्रविष्ट करेगा और उन्मोचित दोषसिद्ध व्यक्तियों द्वारा अपने निवास स्थान को अधिसूचित करने के लिये स्थानीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की हिन्दी या उर्दू में एक प्रति सिद्धदोष व्यक्ति को देगा। पुलिस अधीक्षक तदुपरान्त दोषसिद्ध व्यक्ति को उन्मोचित कर देगा।

(2) तदुपरान्त, दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 396 के अधीन आदेश के द्वारा विहित अवधि की समाप्ति पर सिद्धदोष व्यक्ति अपराधी जन जाति अधिनियम (1924 का छठां) की धारा 20 के अधीन स्थानीय सरकार द्वारा रचित नियमों की जहाँ तक थे रजिस्ट्रीकृत जनजाति के सदस्यों का उसे अधिनियम की धारा 10 () के अधीन दायित्वधीन बनाते हों, पूर्ति करेगा, परन्तु ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षित होगा कि वह अपने निवास, उसमें परिवर्तन या अभिप्रेत परिवर्तन या ऐसे निवास से अपनी अनुमति को पुराने निवास और नये निवास के स्थान की पुलिस को उसकी सूचना देता रहे।

कोई दोषसिद्ध जिसके बारे में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अध्याधीन आदेश पारित किया गया हो, जो इस नियमों की पालना करने से निषेध करे या ऐसा करने में चूक करे, वह भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 के अधीन दण्डनीय होगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के अधीन किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा बिना वारन्ट के गिरफ्तार किया जा सकेगा।

276. दण्ड संहिता की धारा 432 सह पठित उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल (1941) के पैरा 189, 201, 202, 203, 204 और 205 के अधीन, दोषसिद्ध व्यक्ति अपनी दण्डनीय आज्ञा की समाप्ति के पूर्व कुछ शर्तों पर जो प्रारूप '' या '' में हो सकती है और जो दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा उसके उन्मोचन के पूर्व उसके द्वारा स्वीकार की जाना चाहिये, उन्मोचित किया जा सकेगा।

प्रारूप '' की शर्तें यह अपेक्षा करती हैं कि दण्डाज्ञा की अवधि की सशर्त कम किए जाने के दौरान :-

(1) दोषसिद्ध व्यक्ति विटिश भारत में प्रवृत्त किसी विधि के अधीन दण्डनीय कोई अपराध ब्रिटिश भारत या किसी देशी राज्य में नहीं करेगा।

(2) यह किसी ऐसे व्यक्ति की संगति नहीं करेगा, जो दुश्चरित्र के रूप में जाने जाते हों और न कोई बुरा दुराचारी जीवन व्यतीत करेगा।

(3) वह विनिर्दिष्ट जिले में ऐसे स्थान पर निवास करेगा जैसा उस जिले का मजिस्ट्रेट समय-समय पर निर्देशित करे और उस जिले के मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक की, जिसमें उसके द्वारा निवास किये जाने की अपेक्षा की गई है, बिना लिखित स्वीकृति के उस स्थान की सीमाओं से न तो बाहर जायेगा और न अनुपस्थित रहेगा।

(4) जब तक कि उसे जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा करने से छूट न दे दी जावे, यह नियतकालिक रूप से ऐसे स्थान, समय पर और ऐसे अधिकारी के सामने अपने बारे में रिपोर्ट देगा जैसा कि उस जिले के जहाँ उसके निवास किये जाने की अपेक्षा की गई हो, मजिस्ट्रेट या पुलिस के अधीक्षक द्वारा समय-सयम पर विहित किया गया हो।

(5) वह सशर्त रूप से उन्मीचित दोषसिद्ध व्यक्तियों के लिये पुलिस निगरानी के नियतों के प्रति अपने को प्रस्तुत करेगा और उनकी पूर्ति करेगा।

जेल मैनुअल के पैरा 203 और 205 के अधीन जेल के अधीक्षक को दोषसिद्ध व्यक्ति के सर्शत उन्मोचन का पुलिस अधीक्षक को कम से कम दो दिन पूर्व सूचना देना चाहिये और उसके उन्मोचन के लिए ऐसा दिन चुनना चाहिये जो न्यायालय के अवकाश का न हो। जब पुलिस अधीक्षक को सूचना प्राप्त  हो, उसे गारद और अनुरक्षण के नियम 165 में यथा उपबन्धित एक गारद को उन्मोचन के दिन बन्दी को पुलिस अधीक्षक या मुख्यालय के भारसाधक अन्य अधिकारी के पास लाने के लिये प्रतिनियुक्त करना चाहिये। पुलिस अधीक्षक दोषसिद्ध व्यक्ति को वह ग्राम या मोहल्ला स्वीकृत करेगा जहाँ उसे निवास करना है, और उसके पश्चात् दन्डाज्ञा की समाप्ति तक (या यदि दन्डाज्ञा ऐसा निर्देशित करे जो, जीवन पर्यन्त) अपराधी जनजाति अधिनियम (1924 का छठां) की धारा 10 (1) () के उपबन्धों के दायित्वाधीन रहने वाले आपराधिक जाति के सदस्यों को पुलिस द्वारा निगरानी के नियम और जिनकी गतिविधियाँ उस अधिनियम की धारा 11 के अधीन प्रतिबन्धित कर दी गई है. उस पर लागू होंगे। प्रारूप '' के पीछे अंतिम प्रमाण-पत्र के निष्पादन के लिये दोषसिद्ध व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सम्मुख प्रस्तुत करने के बाद पुलिस अधीक्षक दोषसिद्ध व्यक्ति को उन्मोचित कर देगा।

प्रारूप '' में शर्ते केवल इतनी ही अपेक्षा करती हैं कि दोषसिद्ध व्यक्ति केवल विनिर्दिष्ट राज्य को या उस राज्य के राजनैतिक अधिकारी के राज्य को ही जायेगा और विनिर्दिष्ट अधिकारों की लिखित अनुमति के बिना ब्रिटिश भारत के क्षेत्र में पुनः प्रवेश नहीं करेगा।

कोई व्यक्ति जो '' या '' की शर्तों के अधीन उन्मोचित किया गया हो; जिसके बारे में इन शर्तों के उल्लंघन करने का पता चले, किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा बिना वारन्ट के गिरफ्तार किया जा सकेगा। इस प्रकार गिरफ्तार किये गये दोषसिद्ध व्यक्ति के मामले को जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट की जानी चाहिये, जो सरकार के द्वारा उसकी छूट रद्द करने के आदेश के विचाराधीन रहने तक उसे अभिरक्षा के निरुद्ध रखे जाने की आज्ञा दे सकता है। वह दोषसिद्ध व्यक्ति जिसकी छूट रद्द कर दी गई हो, तब दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 43 के अधीन दन्डाज्ञा समाप्त अवधि का दण्ड भुगतने के लिए परावर्तित (रिमान्ड) किया जा सकेगा।

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के अधीन प्रारूप की शर्तों के अधीन उन्मोचित दोषसिद्धि व्यक्तियों पर और उन दोषसिद्ध व्यक्तियों, जिनके बाबत दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अधीन पारित किया गया हो, पर प्रयोग की जाने वाली निगरानी वैसी ही होगी जैसी अपराधी जन-जाति के सदस्यों पर प्रयोग की जाती है, जिन पर वही निर्वस्थ क्रमशः लगाये गए हों, यद्यपि ऐसे दोषसिद्धों का रजिस्टर पत्र नहीं होगा। इन दोनों मामलों में प्रत्येक के लिए पृथक रजिस्टर थाने पर निहित प्रारूप में और मुख्यालय पर अपराधी जनजाति उप-निरीक्षक द्वारा बनाये रखे जावें। उन दोषसिद्धों के विवरण जिनके बारे में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के अधीन आदेश पारित किया गया हो, दोषसिद्धि के समय उपयुक्त रजिस्टर में प्रविष्ट किये जायें। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 356 के महत्व और उपयोगिता की ओर पुलिस अधीक्षक का ध्यान आकर्षित किया जाता है। प्रत्येक मामले में जिसमें यह लागू हो सके, लोक अभियोजक को यह निर्देशित किया जावे के वह इसके अधीन आदेश देने के के लिए आवेदन के साथ न्यायालय के पास जावे।

Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts