धारा 65 से  78 अध्याय 11  सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

धारा 65 से 78 अध्याय 11 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

अध्याय 11

अपराध

65. कंप्यूटर साधन कोड से छेड़छाड़

जो कोई, कम्प्यूटर, कम्प्यूटर कार्यक्रम, कम्प्यूटर प्रणाली या कम्प्यूटर नेटवर्क के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी कम्प्यूटर साधन कोड को, जब कम्प्यूटर साधन कोड का रखा जाना या अनुरक्षित किया जाना तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा अपेक्षित हो, जानबूझकर या साशय छिपाता है, नष्ट करता है या परिवर्तित करता है अथवा साशय या जानबूझकर किसी अन्य से छिपवाता है, नष्ट कराता है या परिवर्तित कराता है तो वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा

स्पष्टीकरण

स्पटीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "कम्प्यूटर साधन कोड" से अभिप्रेत है कार्यक्रमों, कम्प्यूटर समादेशों, अभिकल्पना और विन्यास तथा कम्प्यूटर साधन का किसी भी रूप में कार्यक्रम विश्लेषण सूचीबद्ध करना।

66. कंप्यूटर से संबंधित अपराध -

यदि कोई व्यक्ति, धारा 43 में निर्दिष्ट कोई कार्य बेईमानी या कपटपूर्वक करता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पाँच लाख रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डनीय होगा।

स्पष्टीकरणइस धारा के प्रयोजनों के लिए,

() “बेईमानी सेशब्दों का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 24 में है;

() “कपटपूर्वक" शब्द का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) की धारा 25 में है

66.    [***] 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा विलुप्त

66. चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को बेइमानी से प्राप्त करने के लिए दंड

जो कोई ऐसे किसी चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह चुराया गया कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या प्रतिधारण करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।

66 . पहचान की चोरी के लिए दंड

जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से किसी अन्य व्यक्ति के इलैक्ट्रानिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या किसी अन्य विशिष्ट पहचान चिह्न का प्रयोग करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा

66 . कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा खल करने के लिए दंड

जो कोई, किसी संचार युक्ति या कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा।

66 . एकांतता के अतिक्रमण के लिए दंड

जो कोई, साशय या जानबूझकर किसी व्यक्ति के गुप्तांग के चित्र उसकी सहमति के बिना उस व्यक्ति की एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों में खींचेगा, प्रकाशित या पारेषित करेगा, वह ऐसे कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो लाख रुपए से अधिक का नहीं हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण

इस धारा के प्रयोजनों के लिए--

() “पारेषणसे किसी दृश्यमान चित्र को इस आशय से इलैक्ट्रानिक रूप में भेजना अभिप्रेत है कि उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा देखा जाए;

() किसी चित्र के संबंध में "चित्र खींचना" से वीडियो टेप, फोटोग्राफ, फिल्म तैयार करना या किसी साधन द्वारा अभिलेख बनाना अभिप्रेत है;

() “गुप्तांग से नग्न या अंत:वस्त्र सज्जित जननांग, जघन अंग, नितंब या स्त्री स्तन अभिप्रेत हैं;

() “प्रकाशित करनेसे मुद्रित या इलैक्ट्रानिक रूप में पुनः निर्माण करना और उसे जनसाधारण के लिए उपलब्ध कराना अभिप्रेत है;

() “एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों के अधीन" से ऐसी परिस्थितियां अभिप्रेत हैं, जिनमें किसी व्यक्ति को यह युक्तियुक्त प्रत्याशा हो सकती है कि,

(i) इस बात की चिंता किए बिना एकांतता में अपने वस्त्र उतार सकता या उतार सकती है कि उसके गुप्तांग का प्रग्रहण किया जा रहा है; या

(ii) उसके गुप्तांग का कोई भाग इस बात पर ध्यान दिए बिना जनसाधारण को दृश्यमान नहीं होगा कि वह व्यक्ति किसी सार्वजनिक या निजी स्थान में है।

66. साइबर आतंकवाद के लिए दंड -

(1) जो कोई,

() भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या प्रभुता को खतरे में डालने या जनता या जनता के किसी वर्ग में, निम्नलिखित द्वारा आतंक फैलाने के आशय से, -

(i) कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को पहुंचे से इंकार करके या इंकार कराके; या

(ii) प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक किसी कंप्यूटर संसाधन में प्रवेश या उस तक पहुंच करने का प्रयास करके, या

(iii) किसी कंप्यूटर संदूषक को सन्निविष्ट करके या सन्निविष्ट कराके,और ऐसा करके ऐसा कार्य करता है जिससे व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें क्षति होती है या सम्पत्ति का नाश या विनाश होता है या होने की संभावना है या यह जानते हुए कि इससे समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति या सेवाओं को नुकसान या उसका विनाश होने की संभावना है या धारा 70 के अधीन विनिर्दिष्ट संवेदनशील सूचना असंरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या

() जानबूझकर या साशय किसी कंप्यूटर संसाधन में प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुँच से अधिक प्रवेश या पहुँच करता है और ऐसे कार्य द्वारा ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधार सामग्री तक, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों के कारण निर्बंधित है या कोई निर्बंधन सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधार सामग्री तक यह विश्वास करते हुए पहुँच प्राप्त करता है कि इस प्रकार अभिप्राप्त ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधार सामग्री का उपयोग देश की ख्याति या किसी विदेशी राष्ट्र व्यष्टिसमूह को क्षति पहुँचाने के लिए या अन्यथा किया जा सकता है या किए जाने की संभावना है,

तो वह साइबर आतंकवाद का अपराध करेगा।

(2) जो कोई साइबर आतंकवाद कारित या करने की कूटरचना करेगा, तो वह कारावास से जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा

67. अश्लील सामग्री का इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशन या पारेषण करने के लिए दंड

जो कोई, इलैक्ट्रानिक रूप में, ऐसी सामग्री को प्रकाशित या पारेषित करता है अथवा प्रकाशित या पारेषित कराता है, जो कामोत्तेजक है या जो कामोत्तेजक है या जो कामुकता की अपील करती है या यदि इसका प्रभाव ऐसा है जो व्यक्तियों को कलुषित या भ्रष्ट करने का आशय रखती है जो सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अंतर्विष्ट या उसमें आरूढ़ सामग्री को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना है, पहली दोषसिद्धि पर, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पाँच लाख रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में, किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपये तक को हो सकेगा, दंडित किया जाएगा।

67-. इलैक्ट्रानिक रूप में लैंगिक प्रदर्शन कार्य आदि वाली सामग्री के प्रकाशन के लिए दण्ड -

जो कोई किसी ऐसी सामग्री को इलैक्टानिक रूप में प्रकाशित करता है या पारेषित करता है या प्रकाशित या पारेषित कराता है. जिसमें लैंगिक प्रदर्शन का कार्य या आचरण अंतर्वलित पहली दोषसिद्धि पर किसी भांति के कारावास से जिसको अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने में, जो दस लाख रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और दूसरी या पश्चात्वती दोषसिद्धि की दशा में, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा।

67-. कामवासना भड़काने वाले क्रियाकलाप आदि में बालकों को चित्रित करने वाली सामग्री को इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित या पारेषित करने के लिए दण्ड-

जो कोई-

() किसी इलैक्ट्रानिक रूप में ऐसे कोई सामग्री प्रकाशित या पारेषित करेगा या प्रकाशित या पारेषित कराएगा, जिसमें कामवासना भड़काने वाले क्रियाकलाप या आचरण में लगाए गए बालकों को चित्रित किया जाता है; या

() अश्लील या अभद्र या कामवासना भड़काने वाली रीति में बालकों का चित्रण करने वाली सामग्री का पांठ या अंकीय चित्र किसी इलैक्ट्रानिक रूप में तैयार करेगा, संग्रहीत करेगा, प्राप्त करेगा, पढ़ेगा, डाउनलोड करेगा, उसे बढ़ावा देगा, आदान-प्रदान या वितरित करेगा; या

() कामवासना भड़काने वाले क्रियाकलाप के लिए और उसके संबंध में या ऐसी रीति में बालकों को एक या अधिक बालकों के साथ आन-लाइन संबंध के लिए लगाएगा, प्रेरित करेगा या उत्प्रेरित करेगा, जो कंप्यूटर संसाधन पर किसी युक्तियुक्त वयस्क को बुरी लग सकती है; या

() आन-लाइन बालकों का दुरुपयोग किए जाने को सुकर बनाएगा, या

() बालकों के साथ कामवासना भड़काने वाले क्रियाकलाप के संबंध में अपने दुर्व्यवहार को किसी इलैक्ट्रानिक रूप में अभिलिखित करेगा,

तो यह प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस लाख रुपये तक का हो सकेगा, और दूसरी और पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा :

परन्तु धारा 67, धारा 67 और इस धारा के उपबंधों का विस्तार निम्नलिखित किसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या इलैक्ट्रानिक रूप में आकृति तक नहीं होता है :-

(i) जिसका प्रकाशन इस आधार पर जनकल्याण के रूप में न्यायोचित साबित किया गया हो कि ऐसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या आकृति विज्ञान, साहित्य, कला या शिक्षण या सामान्य महत्व के अन्य उद्देश्यों के हित में है; या

(ii) जो सद्भावपूर्ण परस्पर धार्मिक प्रयोजनों के लिए रखी या प्रयुक्त की गई है।

स्पष्टीकरण-

इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "बालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है।

67. मध्यवर्त्तियों द्वारा सूचना का परिरक्षण और प्रतिधारण

( 1 ) मध्यवर्ती ऐसी सूचना का संरक्षण और प्रतिधारण करेगा जैसा ऐसी अवधि के लिए विनिर्दिष्ट किया जाए और ऐसी रीति तथा प्ररूप में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए।

(2) ऐसा कोई मध्यवर्ती, जो साशय या जान-बूझकर उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन

करता है, ऐसी अवधि के [ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस लाख रुपए तक हो सकेगी।]]

68. निदेश देने की नियंत्रक की शक्ति

- (1) 68. नियंत्रक, आदेश द्वारा, प्रमाणकर्ता प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी के किसे कर्मचारी को आदेश में विनिर्दिष्ट उपाय करने या ऐसे क्रियाकलापों को बन्द कर देने का निदेश दे सकेगा यदि वे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों के किन्हीं उपबन्धों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

 1[(2) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश का अनुपालन करने में साशय या जानबूझकार असफल रहेगा, किसी अपराध के लिए दोषी होगा और दोषसिद्धि पर शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस लाख रुपए तक हो सकेगी।

(2009 के अधिनियम सं० 10 द्वारा प्रतिस्थापित।)

1[69. किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना के अपरोधन या मानिटरिंग करने या विगूढ़न के लिए निदेश जारी करने की शक्ति

(1) जहाँ केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस बाबत विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की संप्रभुता या अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था के हित में अथवा उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन को रोकने या किसी अपराध के अन्वेषण के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है तो वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से आदेश द्वारा सरकार के किसी अधिकरण को किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से पारेषित किसी सूचना का अपरोधन या मानीटर करने अथवा विगूढ़न करने अथवा अपरोधन या मानीटर कराने या विगूढ़न कराने का निर्देश दे सकेगी।

(2) प्रक्रिया और उपाय, जिसके अधीन ऐसा अपरोधन या मानीटरिंग या विगूढ़न किया जा सकेगा, ऐसे होंगे जिन्हें विहित किया जाए।

(3) उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कम्प्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, जब उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी अभिकरण द्वारा मांगे जाने पर, सभी सुविधाएं और तकनीकी सहायता निम्नलिखित को विस्तारित करेगा-

() ऐसी सूचना जनित करने, पारेषित करने, प्राप्त करने या भंडार करने वाले कम्प्यूटर संसाधन तक पहुंच उपलब्ध कराना या पहुंच सुनिश्चित करना, या

() यथास्थिति, सूचना को अंतर्रुद्ध, मानीटर या विगूड़न करना; या

() कम्प्यूटर संसाधन में भंडारित सूचना उपलब्ध कराना

(4) ऐसा उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कोई व्यक्ति जो उपधारा ( 3 ) में विनिर्दिष्ट अभिकरण की सहायता करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

(1. 2009 के अधिनियम सं० 10 द्वारा प्रतिस्थापित।)

69-. किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना की सार्वजनिक पहुँच के लिए अवरोध के लिए निदेश जारी करने की शक्ति -

(1) जहां केन्द्रीय सरकार या इस बाबत उसके द्वारा किसी विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की संप्रभुता या अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था के हित में या उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है तो वह उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए कारण लेखबद्ध करते हुए, आदेश द्वारा सरकार के किसी अभिकरण या मध्यवर्ती को किसी कंप्यूटर संसाधन में निर्मित, पारेषित, प्राप्त, भंडारित या परपोषित किसी सूचना को जनता द्वारा पहुँच के लिए अवरोध का निदेश दे सकेगा या उसका अवरोध कराएगा।

(2 प्रक्रिया और उपाय, जिनके अधीन जनता द्वारा पहुँच के लिए ऐसा अवरोध किया जा सकेगा, वे होंगे, जिन्हें विहित किया जाए।

(3) मध्यवर्ती जो उपधारा (1) के अधीन जारी निर्देश का पालन करने में असफल रहता है, ऐसी अवधि के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

69 . साइबर सुरक्षा के लिए किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना मानीटर करने और एकत्र करने के लिए प्राधिकृत करने की शक्ति -

(1) केन्द्रीय सरकार देश में साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कंप्यूटर संदूषण की पहचान, विश्लेषण और अनाधिकार प्रवेश या फैलाव को रोकने के लिए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी कंप्यूटर संसाधन में निर्मित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना का मानीटर और एकत्र करने के लिए सरकार के किसी अभिकरण को प्राधिकृत कर सकेगी।

(2) मध्यवर्ती या कम्प्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, जब ऐसे अभिकरण द्वारा जिसे उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत किया गया है मांग की जाती है, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा और आन-लाइन पहुँच समर्थ बनाने के लिए ऐसे अभिकरण को सभी सुविधाएं देगा या ऐसे ट्रैफिक आंकड़े या सूचना का निर्माण करने वाले, पारेषित करने वाले, प्राप्त करने वाले या भंडार करने वाले कम्प्यूटर संसाधन को आन-लाइन पहुँच सुरक्षित कराएगा और उपलब्ध कराएगा।

(3 ) ट्रैफिक आंकड़ा या सूचना की मानीटरिंग और एकत्र करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय वे होंगे जिन्हें विहित किया जाए।

(4) ऐसा कोई मध्यवर्ती जो साशय या जान-बूझकर उपधारा (2) के उपबन्धों का उल्लंघन करता है ऐसी 1[कारावास से, जो एक वर्ष तक हो सकेगा या जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए तक हो सकेगा या दोनों से दायी होगा।]

स्पष्टीकरणइस धारा के प्रयोजनों के लिए

i) "कंप्यूटर संदूषण" का वही अर्थ होगा जो धारा 43 में इसका है;

(ii) "ट्रैफिक आंकड़ा" का अर्थ, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क या ऐसे स्थान को या जिससे संसूचना की गई है या पारेषित की जा सकती है किसी व्यक्ति की

(1. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा प्रतिस्थापित।)

70 संरक्षित प्रणाली

1[(1) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे कम्यूटर संसाधन को, जो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः नाजुक सूचना अवसंरचना की सुविधा को प्रभावित करता है, सरंक्षित प्रणाली घोषित कर सकेगी।

(1. 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 35 द्वारा प्रतिस्थापित )

स्पष्टीकरण

इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “नाजुक सूचना अवसंरचना" से ऐसा कंप्यूटर संसाधन अभिप्रेत है, जिसके अक्षमीकरण या नाश से राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, लोक स्वास्थ्य या सुरक्षा कमजोर होगी ]

(2) समुचित सरकार, लिखित आदेश द्वारा ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगी जो उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित संरक्षित प्रणाली तक पहुंचने के लिए प्राधिकृत है।

(3) कोई व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के उल्लंघन में किसी संरक्षित प्रणाली तक पहुंच प्राप्त कर लेता है या पहुंच प्राप्त करने का प्रयत्न करता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा

2[(4) केन्द्रीय सरकार, ऐसी संरक्षित प्रणाली के लिए सूचना सुरक्षा पद्धतियां और प्रक्रियाएं विहित करेगी ]

(2. 2009 के अधिनियम सं० 10 द्वारा अंतःस्थापित )

3[70. राष्ट्रीय नोडल अधिकरण-

(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सरकार के किसी संगठन को नाजुक सूचना अवसंरचना संरक्षण की बाबत राष्ट्रीय नोडल अभिकरण अभिहित कर सकेगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन अभिहित राष्ट्रीय नोडल अभिकरण सभी उपायों के लिए उत्तरदायी होगा जिनके अंतर्गत नाजुक सूचना अवसंरचना के संरक्षण से संबंधित अनुसंधान और विकास भी है।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों के पालन की रीति वह होगी, जो विहित की जाए

(3. 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 36 द्वारा अंतःस्थापित )

70-. भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल का राष्ट्रीय आपात अभिकरण के रूप में सेवा करना -

(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल नामक अभिकरण नियुक्त करेगी।

(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण में एक महानिदेशक और ऐसे अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जो विहित किए जाएं।

(3) महानिदेशक और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं।

(4) भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दर साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में निम्नलिखित कृत्यों का पालन करने वाले राष्ट्रीय अधिकरण के रूप में सेवा करेगा,

() साइबर घटना संबंधी सूचना का संग्रहण, विश्लेषण और प्रसार,

() साइबर सुरक्षा घटनाओं का पूर्वानुमान और चेतावनियां,

() साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटाने के लिए आपात अध्युपाय;

() साइबर घटना मोचन क्रियाकलापों का समन्वयः

() साइबर घटनाओं की सूचना सुरक्षा पद्धतियों, प्रक्रियाओं, निवारण, मोचन और रिपोर्ट करने के संबंध में मार्गदर्शक सिद्धांत, सलाह, अति संवेदनशील टिप्पण और श्वेतपत्र जारी करना;

() साइबर सुरक्षा से संबंधित ऐसे अन्य कृत्य, जो विहित किए जाएं।

(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों का पालन करने की रीति वह होगी, जो विहित की जाए

(6) उपधारा (4) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण सेवा प्रदाताओं, मध्यवर्तियों, डाटा केंद्रों, निगमित निकायों और किसी अन्य व्यक्ति से सूचना मांग सकेगा और उसे निदेश दे सकेगा।

(7) ऐसा कोई सेवा प्रदाता, मध्यवर्ती डाटा केंद्र, निगमित निकाय और अन्य व्यक्ति, जो उपधारा (6) के अधीन मांगी गई सूचना देने में या निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा

( 8 ) कोई न्यायालय, इस धारा के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अभिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा दिए गए किसी परिवाद पर के सिवाय नहीं करेगा ]

71. दुर्व्यपदेशन के लिए शास्ति

यदि कोई व्यक्ति, नियंत्रक या प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के समक्ष, यथास्थिति, कोई अनुज्ञप्ति या 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कोई दुर्व्यपदेशन करता है या किसी तात्विक तथ्य को छिपाता है तो वह ऐसा कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से दण्डित किया जाएगा।

(1. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

72 गोपनीयता और एकांतता का भंग-

इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, यदि किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन प्रदत्त किन्हीं शक्तियों के अनुसरण में किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या किसी अन्य सामग्री से सम्बद्ध व्यक्ति की सहमति के बिना पहुँच प्राप्त कर ली है और वह किसी अन्य व्यक्ति को उस इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या अन्य सामग्री को प्रकट करता है तो वह 2[ऐसी शास्ति को जो ऐसे ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पाँच लाख रुपये तक की हो सकेगी।]

[2. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा प्रतिस्थापित।]

1 [72-. विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए सूचना के प्रकटन के लिए 2[शास्ति ] -

इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में यथा उपबंधित के सिवाय कोई व्यक्ति, जिसके अंतर्गत मध्यवर्ती भी है, जिसने विधिपूर्ण संविदा के निबंधनों के अधीन सेवाएं उपलब्ध कराते समय ऐसी किसी सामग्री तक, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के बारे में व्यक्तिगत सूचना अंतर्विष्ट है, पहुँच प्राप्त कर ली है, सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित करने के आशय से या यह जानते हुये कि उसे सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित होने की संभावना है, संबंधित व्यक्ति की सम्मति के बिना या किसी विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए किस अन्य व्यक्ति को ऐसी सामग्री प्रकट करता है, तो ऐसी 3[शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस लाख रुपए तक हो सकेगी।]]

[1. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा अंतःस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी]

[2-3. 2023 के अधिनियम संख्या 18 द्वारा प्रतिस्थापित।]

73. 1[ इलैक्ट्रानिक चिह्नक| प्रमाणपत्र की कतिपय विशिष्टियों को मिथ्या प्रकाशित करने के लिए शास्ति -

(1) कोई व्यक्ति, 2[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र को तब तक प्रकाशित नहीं करेगा या किसी अन्य व्यक्ति को अन्यथा उपलब्ध नहीं कराएगा, यदि उसे यह जानकारी है कि

() प्रमाणत्र में दर्शित प्रमाणकर्ता ने उसे जारी नहीं किया है; या

() प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध हस्ताक्षरकर्ता ने उसे स्वीकार नहीं किया है; या

() वह प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत या निलम्बित कर दिया गया है,

जब तक कि ऐसा प्रकाशन, ऐसे निलम्बन या प्रतिसंहरण से पूर्व सृजित 3[ इलैक्ट्रानिक चिह्नक] के सत्यापन के प्रयोजनार्थ हो 

(2) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, ऐसे कारावास से जिसकी अवधि वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा

[1-3. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

74. कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए प्रकाशन

जो कोई, किसी कपटपूर्ण या विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए कोई 1[इलैक्ट्रानिक चिह्नक] प्रमाणपत्र जानबूझकर सृजित करता है, प्रकाशित करता है या अन्यथा उपलब्ध कराता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा

[1. 2009 के अधिनियम संख्या 10 द्वारा प्रतिस्थापित (27-10-2009 से प्रभावी)

75. अधिनियम का भारत से बाहर किए गए अपराधों और उल्लंघनों को लागू होना -

(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबंध, किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को भी, उसकी राष्ट्रिकता को विचार में लाए बिना, लागू होंगे।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह अधिनियम किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को लागू होगा, यदि उस कार्य या आचरण में, जिससे यह अपराध या उल्लंघन होता है, भारत में अवस्थित कोई कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क अंतर्वलित हो

76. अधिहरण-

कोई ऐसा कम्प्यूटर, कम्प्यूटर प्रणाली, फ्लापी, काम्पैक्ट डिस्क, टेप चालन या उससे सम्बन्धित कोई ऐसा अन्य उपसाधन, जिनके संबंध में इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है, अधिहरण के दायी होंगे :

परन्तु जहाँ अधिहरण का अधिनिर्णय देने वाले न्यायालय के समाधानप्रद रूप में यह सिद्ध हो जाता कि वह व्यक्ति, जिसके कब्जे शक्ति या नियंत्रण में कोई कम्प्यूटर प्रणाली फ्लापी, काम्पैक्ट डिस्क, टेपचालन या उससे सम्बन्धित कोई अन्य उपसाधन पाया जाता है. इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गये नियमों किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों के लिए उत्तरदायी नहीं है वहाँ न्यायालय ऐसे कम्प्यूटर, कम्प्यूटर प्रणाली, फ्लापी, कम्पैक्ट डिस्क, टेपचालन या उससे संबंधित किसी अन्य उपसाधन के अधिहरण का आदेश करने के बजाय इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत ऐसा अन्य आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे।

1[77. प्रतिकर शास्ति या अधिहरण का अन्य दंड में हस्तक्षेप करना-

इस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर, अधिरोपित शास्ति या किया गया अधिहरण, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर के अधिनिर्णय या किसी अन्य शास्ति या दंड के अधिरोपण को निवारित नहीं करेगा

(1. 2009 के अधिनियम सं० 10 की धारा 38 द्वारा प्रतिस्थापित।)

77-. अपराधों का शमन -

(1) सक्षम अधिकारिता वाला कोई न्यायालय, उन अपराधों से भिन्न अपराधों का शमन कर सकेगा, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन आजीवन या तीन वर्ष से अनधिक के कारावास के दण्ड का उपबंध किया गया है:

परन्तु न्यायालय, ऐसे अपराध का शमन नहीं करेगा। जहाँ अपराधी, उसकी पूर्व दोषसिद्धि के कारण या तो वर्धित दण्ड का या भिन्न प्रकार के किसी दण्ड के लिए दायी है:

परन्तु यह और कि न्यायालय ऐसे किसी अपराध का शमन नहीं करेगा, जहाँ ऐसा अपराध देश की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालता है या अठारह वर्ष की आयु से कम आयु के किसी बालक या किसी स्त्री के संबंध में किया गया है।

(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें अपराध विचारण के लिए लंबित, शमन के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा और दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 265 और 265 के उपबंध लागू होंगे।

77- . तीन वर्ष के कारावास वाले अपराधों का जमानतीय होना

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, तीन वर्ष और उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध संज्ञेय होंगे और तीन वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध जमानतीय होंगे ]

78. अपराधों का अन्वेषण करने की शक्ति-

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते भी, कोई ऐसा पुलिस अधिकारी, जो 2[निरीक्षक ] की पंक्ति से नीचे का हो, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण करेगा

(2. 2009 के अधिनियम सं० 10 द्वारा प्रतिस्थापित )

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