
केन्द्रीय सरकार किसी व्यक्ति में विनिर्दिष्ट दिव्यांगता की सीमा का निर्धारण करने के प्रयोजन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों को अधिसूचित करेगी ।
(1) समुचित सरकार अपेक्षित अर्हताएं और अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को प्रमाणकर्ता प्राधिकारियों के रूप में पदाभिहित करेगी, जो दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए समक्ष होंगे।
(2) समुचित सरकार उस अधिकारिता को और उन निबंधनों और शर्तों को भी अधिसूचित करेगी जिनके अधीन रहते हुए प्रमाणकर्ता प्राधिकारी अपने प्रमाणकारी कृत्यों का पालन करेगा।
(1) कोई विनिर्दिष्ट दिव्यांगजन अधिकारिता रखने वाले प्रमाणकर्ता प्राधिकारी को ऐसी रीति में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन कर सकेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर प्रमाणकर्ता प्राधिकारी, धारा 56 के अधीन अधिसूचित सुसंगत मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार संबंधित व्यक्ति की दिव्यांगता का निर्धारण करेगा और ऐसे निर्धारण के पश्चात्, यथास्थति,—
(क) ऐसे व्यक्ति को ऐसे प्ररूप में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए, दिव्यांगता का एक प्रमाणपत्र जारी करेगा;
(ख) उसे लिखित में सूचित करेगा कि उसको कोई विनिर्दिष्ट दिव्यांगता नहीं है।
(3) इस धारा के अधीन जारी दिव्यांगता का प्रमाणपत्र संपूर्ण देश में मान्य होगा।
(1) प्रमाणकर्ता प्राधिकारी के विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे विनिश्चय के विरुद्ध ऐसे समय और ऐसी रीति में जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा यथा पदाभिहित अपील प्राधिकारी को अपील कर सकेगा।
(2) किसी अपील की प्राप्ति पर अपील प्राधिकारी अपील का ऐसी रीति में, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, विनिश्चय करेगा।