धारा 49 से 55 अध्याय 9

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 9

दिव्यांगजनों के लिए संस्थाओं का रजिस्ट्रीकरण और ऐसी संस्थाओं को अनुदान

49. सक्षम प्राधिकारी -

राज्य सरकार ऐसे प्राधिकारी को नियुक्त करेगी जो वह इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी होने के लिए ठीक समझे ।

50. रजिस्ट्रीकरण –

इस अधिनियम के अधीन जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय कोई भी व्यक्ति दिव्यांगजनों के लिए किसी संस्था की स्थापना या उसका अनुरक्षण इस निमित्त सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अनुसार ही करेगा अन्यथा नहीं:

परंतु मानसिक रूप से रुग्ण व्यक्तियों की देख-रेख के लिए कोई संस्था जो मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का 14) की धारा 8 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम के अधीन विधिमान्य अनुज्ञप्ति धारित करती है, उसे इस अधिनियम के अधी रजिस्ट्रीकृत किए जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

51. आवेदन और रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की मंजूरी -

(1) रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र के लिए प्रत्येक आवेदन सक्षम प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में किया जाएगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए।

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर सक्षम प्राधिकारी ऐसी जांच करेगा जो वह ठीक समझे और यह समाधान हो जाने पर कि आवेदक ने इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों की अपेक्षाओं का अनुपालन किया है, वह आवेदन की प्राप्ति के नब्बे दिन की अवधि के भीतर आवेदक को रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र मंजूर करेगा और यदि उसका समाधान नहीं होता है तो सक्षम प्राधिकारी, आदेश द्वारा आवेदन किए गए प्रमाणपत्र को मंजूर करने से इंकार कर देगा:

परंतु सक्षम प्राधिकारी प्रमाणपत्र मंजूर करने से इंकार करने वाला कोई आदेश करने से पूर्व आवेदक को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर देगा और प्रमाणपत्र मंजूर करने से इंकारी का प्रत्येक आदेश आवेदक को लिखित में संसूचित करेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र तब तक मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक संस्था जिसके बारे में आवेदन किया गया है, ऐसी सुविधाएं प्रदान करने और ऐसे मानक जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, को पूरा करने की स्थिति में न हो ।

(4) उपधारा (2) के अधीन मंजूर किया गया रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र—

(क) जब तक धारा 52 के अधीन प्रतिसंहृत नहीं होता ऐसी अवधि के लिए जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, प्रवृत्त बना रहेगा;

(ख) वैसी ही अवधि के लिए समय-समय पर नवीकृत किया जा सकेगा; और

(ग) ऐसे प्ररूप में होगा और ऐसी शर्तों के अध्यधीन होगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए।

(5) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए कोई आवेदन विधिमान्यता की अवधि की समाप्ति के कम से साठ दिन पूर्व किया जाएगा।

(6) रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की एक प्रति, संस्था द्वारा सहजदृश्य स्थान पर प्रदर्शित की जाएगी।

(7) उपधारा (1) या उपधारा (5) के अधीन किए गए प्रत्येक आवेदन का निपटारा, सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी अवधि के भीतर किया जाएगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए।

52. रजिस्ट्रीकरण का प्रतिसंहरण -

(1) सक्षम प्राधिकारी, यदि उसका विश्वास करने का यह कारण है कि धारा 51 की उपधारा (2) के अधीन मंजूर किए गए रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र के धारक ने,—

(क) प्रमाणपत्र के जारी करने वा नवीकरण के लिए किसी आवेदन के संबंध में ऐसा कथन किया है जो गलत है या तात्त्विक विशिष्टियों में मिथ्या है; और

(ख) नियमों या किन्हीं ऐसी शर्तों को भंग किया है या भंग करवाया है जिसके अधीन प्रमाणपत्र मंजूर किया गया था.

वह ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, आदेश द्वारा प्रमाणपत्र को प्रतिसंहृत कर सकेगाः

परन्तु ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रमाणपत्र के धारक को इस बात का कारण बताने का अवसर न प्रदान कर दिया हो कि रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत क्यों न कर दिया जाए।

(2) जहां किसी संस्था के संबंध में उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का प्रतिसंहरण किया गया है वहां ऐसी संस्था, ऐसे प्रतिसंहरण की तारीख से कार्य करना बन्द कर देगी:

परन्तु जहां प्रतिसंहरण आदेश के विरुद्ध धारा 53 के अधीन कोई अपील होती है, वहां ऐसी संस्था निम्नलिखित दशाओं में कार्य करना बन्द कर देगी,

(क) जहां ऐसी अपील फाइल करने के लिए विहित अवधि के अवसान पर तुरंत अपील नहीं की गई है; या

(ख) जहां ऐसी कोई अपील की गई है, किन्तु अपील के आदेश की तारीख से प्रतिसंहरण आदेश को मान्य ठहराया गया है।

(3) किसी संस्था की बाबत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के प्रतिसंहरण पर, सक्षम प्राधिकारी निदेश दे सकेगा कि कोई दिव्यांगजन जो ऐसे प्रतिसंहरण की तारीख को ऐसी संस्था में अन्त: वासी है—

(क) यथास्थिति, उसे उसके माता-पिता, पति या पत्नी या विधिक संरक्षक की अभिरक्षा में प्रत्यावर्तित कर दिया जाएगा, या

(ख) सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य संस्था को स्थानांतरित कर दिया जाएगा ।

(4) प्रत्येक संस्था, जो रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र धारण करता है जिसका इस धारा के अधीन प्रतिसंहरण कर लिया गया है, ऐसे प्रतिसंहरण के तुरंत पश्चात् ऐसे प्रमाणपत्र को सक्षम प्राधिकारी को अभ्यर्पित कर देगी ।

53. अपील -

(1) प्रमाणपत्र प्रदान करने से इंकार करने या प्रमाणपत्र का प्रतिसंहरण करने के सक्षम प्राधिकारी के आदेश से व्यथित व्यक्ति, राज्य सरकार द्वारा यथाविहित अवधि के भीतर ऐसे आदेश के विरुद्ध, ऐसे अपील प्राधिकारी को जो राज्य सरकार द्वारा अपील प्राधिकारी के रूप में अधिसूचित किया जाए, अपील कर सकेगा ।

(2) ऐसी अपील पर अपील प्राधिकारी का आदेश अंतिम होगा ।

54. अधिनियम का केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा स्थापित या अनुरक्षित संस्थाओं को लागू होगा-

इस अध्याय में अंतर्विष्ट कोई बात केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए स्थापित या अनुरक्षित किसी संस्था को लागू नहीं होगी।

55. रजिस्ट्रीकृत संस्थानों को सहायता -

समुचित सरकार उसकी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर रजिस्ट्रीकृत संस्थाओं को, सेवा प्रदान करने के लिए और इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में स्कीमों और कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए, वित्तीय सहायता प्रदान कर सकेगी।

 

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