धारा 19-क. से 19-ट. अध्याय 3क न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

धारा 19-क. से 19-ट. अध्याय 3क न्यायालय फीस अधिनियम, 1870

अध्याय 3

प्रोबेट, प्रशासनपत्र और प्रशासन-प्रमाणपत्र

19-क. जहां बहुत अधिक न्यायालय फीस संदत्त की गई हो वहां अवमुक्ति-

जहां किसी विल के प्रोबेट के लिए या प्रशासनपत्र के लिये आवेदन करते समय किसी व्यक्ति ने मृतक की संपत्ति का प्राक्कलन उस मूल्य से जो तत्पश्चात् साबित होता है अधिक पर किया है और परिणामस्वरूप उसने उस पर बहुत अधिक न्यायालय फीस संदत्त की है वहां, यदि उस संपत्ति के सही मूल्य के अभिनिश्चयन के छह मास के अन्दर ऐसा व्यक्ति उस स्थानीय क्षेत्र के, जिसमें प्रोबेट या प्रशासनपत्र अनुदत्त किया गया है, मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी के समक्ष वह प्रोबेट या प्रशासनपत्र पेश करता है;

और ऐसे प्राधिकारी को मृतक की संपत्ति की शपथपत्र या प्रतिज्ञान द्वारा सत्यापित एक विशिष्टयुक्त तालिका और मूल्यांकन परिदत करता है, और यदि उस प्राधीकारी का समाधान हो जाता है कि प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर विधि की अपेक्षा से अधिक फीस संदत्त की गई थी,

तो वहां उक्त प्राधिकारी-

(क) प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर के स्टाम्प को, यदि वह पहले ही रद्द न किया जा चुका हो, रद्द कर सकेगा;

(ख) उप पर जो न्यायालय फीस दी जानी चाहिये थी उसे सूचित करने के लिए अन्य स्टाम्प प्रतिस्थापित कर सकेगा; और

(ग) स्वविवेकानुसार, उनके अन्तर का संदाय वैसे ही अनुज्ञात कर सकेगा जैसे खराब हुये स्टाम्पों की दशा में किया जाता है या उसका प्रतिसंदाय धन के रूप में कर सकेगा।

19ख. जहां वे ऋण जो मृत व्यक्ति द्वारा शोध्य थे उसकी सम्पदा में से चुकाये हैं वहां अवमुक्ति.-

जब कभी ऐसे प्राधिकारी को समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि निष्पादक या प्रशासक ने मृतक द्वारा शोध्य ऋणों की इतनी रकम चुकाई है जो सम्पदा की रकम या मूल्य में से काटी जाने पर उसे घटाकर इतनी धनराशि कर देती है कि यदि वह सम्पदा की पूरी सकल रकम या उसका पूरा सकल मूल्य होती तो उस संपदा के बारे में अनुदत्त प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर इस अधिनियम के अधीन उस पर वास्तव में दी गई फीस से कम फीस संदत्त करनी पड़ती,

तब ऐसा प्राधिकारी उस अन्तर को वापस कर सकेगा, परन्तु यह तब जब कि उसका दावा ऐसे प्रोबेट या प्रशासनपत्र की तारीख के पश्चात् तीन वर्ष के भीतर किया जाए।

किन्तु जब किसी विधिक कार्यवाही के कारण मृतक द्वारा शोध्य ऋण अभिनिश्चित या संदत्त नहीं किए गये हैं या उसकी चीजवस्तु प्रत्युद्धृत नहीं हुई है और उपलभ्य नहीं हुई है और उसके परिणामस्वरूप निष्पादक या प्रशासक ऐसे अन्तर की वापसी का दावा उक्त तीन वर्ष की अवधि के अन्दर करने से निवारित हो गया है तब उक्त प्राधिकारी ऐसा दावा करने के लिए ऐसा अतिरिक्त समय अनुज्ञात कर सकेगा जो उन परिस्थितियों में युक्तियुक्त प्रतीत हो।

19ग. अनेक अनुदानों की दशा में अवमुक्ति.-

जब कभी किसी सम्पदा की सम्पूर्ण सम्पत्ति के बारे में प्रोबेट या प्रशासनपत्र का अनुदान किया जा चुका है या किया जाता है और इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य पूरी फीस दी जा चुकी है या दी जाती है तब इस अधिनियम के अधीन कोई फीस प्रभार्य नहीं होगी जब उसी सम्पदा की सम्पूर्ण सम्पत्ति या उसके भाग के बारे में वैसा ही अनुदान किया जाए।

जब कभी ऐसा अनुदान किसी ऐसी सम्पत्ति के बारे में किया जा चुका है या किया जाता है, जो किसी सम्पदा की भागभूत है, तो इस अधिनियम के अधीन उस समय वस्तुतः संदत्त फीस की रकम तब काट ली जायगी जब उसी सम्पदा की उस सम्पत्ति के बारे में, जो या तो वही है जिसके सम्बन्ध में पूर्ववर्ती अनुदान था, या उस सम्पत्ति में सम्मिलित है, वैसा ही अनुदान किया जाता है।

 

19घ. न्यास सम्पत्ति के बारे में प्रोबेटों की विधिमान्यता की घोषणा यद्यपि वह संपत्ति न्यायालय फीस देने में सम्मिलित नहीं की गई है.-

किसी मृत व्यक्ति की विल का प्रोबेट या उसकी चीजवस्तु का प्रशासन पत्र जो इसके पहले या इसके पश्चात् अनुदत्त होता है विधिमान्य समझा जाएगा और ऐसी किसी जंगम या स्थावर सम्पत्ति के, जिस पर मृतक का कब्जा या हक पूर्णतः या भागतः न्यासी के रूप में था, प्रत्युद्धरण, अन्तरण या समनुदेशन के लिए उसके निष्पादकों या प्रशासकों द्वारा काम में लाया जा सकेगा यद्यपि ऐसी रकम या सम्पत्ति का मूल्य उस रकम या सम्पदा के मूल्य में सम्मिलित नहीं किया गया है जिसके बारे में न्यायालय फीस ऐसे प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर दी गई थी।

19ङ उस दशा के लिए उपबन्ध जब प्रोबेट आदि पर बहुत कम न्यायालय फीस संदत्त की गई है.-

जहां किसी व्यक्ति ने प्रोबेट या प्रशासनपत्र के लिए आवेदन करते समय मृतक की सम्पदा का प्राक्कलन उस मूल्य से जो तत्पश्चात् साबित होता है कम पर किया है और परिणामस्वरूप उसने उस पर बहुत कम न्यायालय फीस संदत्त की है वहां उस स्थानीय क्षेत्र का जिसमें प्रोबेट या प्रशासनपत्र अनुदत्त किया गया है, मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी शपथ-पत्र या प्रतिज्ञान द्वारा मृतक की सम्पदा के मूल्य का सत्यापन किये जाने पर और उस सम्पूर्ण न्यायालय फीस का जो उस पर ऐसे मूल्य के बारे में मूलतः संदत्त की जानी चाहिये थी उस अतिरिक्त शास्ति सहित संदाय किये जाने पर जो ऐसी उचित फीस की उस दशा में पांच गुनी होगी जब प्रोबेट या प्रशासनपत्र अनुदान की तारीख से एक वर्ष के भीतर पेश किया जाता है और उस दशा में बीस गुनी होगी जब वह उस तारीख से एक वर्ष के पश्चात् पेश किया जाता है, ऐसे प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर मूलतः संदत्त न्यायालय फीस बिना काट किये जाने पर प्रोबेट या प्रशासनपत्र को सम्यक् रूप से स्टाम्पित कर सकेगा :

परन्तु यदि आवेदन सम्पदा का सही मूल्य अभिनिश्चित किये जाने के और इस तथ्य का कि प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर आरम्भ में बहुत कम न्यायालय फीस संदत्त की गई है, पता लगने के पश्चात् छह मास के भीतर किया जाता है और यदि ऐसे प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि ऐसी फीस भूल के या उस समय यह बात कि सम्पदा का कोई विशिष्ट भाग मृतक का है, ज्ञात न होने के परिणामस्वरूप, और कपट करने के आशय के या उचित न्यायालय फीस के संदाय में विलम्ब करने के आशय के बिना, संदत्त की गई थी तो उक्त प्राधिकारी उस शास्ति का परिहार कर सकेगा, और जो फीस उस पर आरम्भ में संदत्त की जानी चाहिये थी उसे पूरा करने में जितनी कमी है केवल उसी के संदाय पर प्रोबेट या प्रशासन पत्र को सम्यक् रूप से स्टाम्पित कर सकेगा।

19च. धारा 19ङ के अधीन प्रशासनपत्र स्टाम्पित किए जाने के पहले प्रशासक उचित प्रतिभूति देगा.-

उस प्रशासनपत्र की दशा में जिस पर प्रारम्भ में बहुत कम न्यायालय फीस संदत्त की गई है उक्त प्राधिकारी उसे पूर्वोक्त रीति में सम्यक् रूप से स्टाम्पित तब तक नहीं कराएगा जब तक प्रशासक उस न्यायालय को जिसने प्रशासन पत्र अनुदत्त किया है ऐसी प्रतिभूति नहीं दे देता है जैसी यदि मृतक की सम्पदा का सम्पूर्ण मूल्य उस समय अभिनिश्चित हो जाता तो विधि के अनुसार उसके अनुदान के समय दी जानी चाहिए थी।

19छ. न्यून संदाय का पता लगने के छह मास के भीतर निष्पादकों आदि का प्रोबेट आदि पर पूर्ण न्यायालय फीस का संदाय न करना.-

जहाँ किसी भूल के या उस समय यह बात कि सम्पदा का कोई विशिष्ट भाग मृतक का है, ज्ञात न होने के परिणामस्वरूप किसी प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर बहुत कम न्यायालय फीस संदत्त की गई है वहां यदि ऐसे प्रोबेट या प्रशासनपत्र के अधीन है कार्य करने वाला कोई निष्पादक या प्रशासक भूल का या उस चीजवस्तु का जिसका मृतक की सम्पत्ति होना उस समय ज्ञात नहीं था, पता लगने के पश्चात् छह मास के भीतर उक्त प्राधिकारी को आवेदन नहीं करता है और उस फीस की कमी को पूरा करने के लिये जो ऐसे प्रोबेट या प्रशासनपत्र पर आरम्भ में दी जानी चाहिये थी संदाय नहीं करता है तो उसकी एक हजार रुपये की धनराशि और उतनी अतिरिक्त धनराशि जो उचित न्यायालय में फीस की कमी के बीस प्रतिशत के बराबर हो समपहत हो जाएगी।

19ज. प्रोबेट या प्रशासनपत्र के आवेदनों की सूचना का राजस्व प्राधिकारियों को दिया जाना और उस पर प्रक्रिया.-

(1) जहां प्रोवेट या प्रशासनपत्र के लिए आवेदन उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय में किया जाता है वहां न्यायालय आवेदन की सूचना कलक्टर को दिलाएगा।

(2) जहां यथापूर्वोक्त आवेदन उच्च न्यायालय में किया जाता है वहां उच्च न्यायालय उस आवेदन की सूचना उस स्थानीय क्षेत्र के, जिसमें वह उच्च न्यायालय स्थित है, मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी को दिलायेगा।

(3) वह कलक्टर जिसकी राजस्व-अधिकारिता को स्थानीय सीमाओं के भीतर मृतक की सम्पत्ति या उसका कोई भाग है किसी भी समय किसी ऐसे मामले के, जिसमें प्रोबेट या. प्रशासनपत्र के लिए आवेदन किया गया है, अभिलेख का निरीक्षण कर या करा सकेगा और उसकी प्रतिलिपियां ले या लिवा सकेगा, और यदि ऐसे निरीक्षण पर या अन्यथा उसकी यह राय है कि अर्जीदार ने मृतक की सम्पदा का मूल्य अवप्राक्कलित किया है तो यदि कलक्टर यह ठीक समझता है तो वह अर्जीदार से (स्वयं या अभिकर्ता द्वारा) हाजिर होने की अपेक्षा कर सकेगा और साक्ष्य ले सकेगा और मामले की ऐसी रीति से जाँच कर सकेगा जैसी वह ठीक समझता है और यदि फिर भी उसकी राय है कि सम्पत्ति का मूल्य अवप्राक्कलित किया गया है तो वह अर्जीदार से मूल्यांकन को संशोधित करने की अपेक्षा कर सकेगा।

(4) यदि अर्जीदार मूल्यांकन को ऐसे संशोधित नहीं करता है कि कलक्टर का उससे समाधान हो जाये तो जिस न्यायालय के समक्ष प्रोबेट या प्रशासन पत्र के लिए आवेदन किया गया था उससे उस सम्पत्ति के सही मूल्य की जांच करने के लिए कलक्टर आवेदन कर सकेगा:

परन्तु, यथास्थिति, इण्डियन सक्सेशन ऐक्ट, 1865 की धारा 277 या प्रोबेट एण्ड एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट, 1881 की धारा 98 द्वारा अपेक्षित तालिका के प्रदर्शन की तारीख से छह मास का अवसान हो जाने के पश्चात् ऐसा कोई भी अभ्यावेदन नहीं किया जायगा।

(5) यथापूर्वोक्त आवेदन किए जाने पर न्यायालय तदनुसार जांच करेगा या कराएगा और उस निकटतम सही मूल्य का जो मृतक की सम्पत्ति का प्राक्कलित किया जाना चाहिये था, निष्कर्ष अभिलिखित करेगा। कलक्टर जाँच का पक्षकार समझा जायगा।

(6) ऐसी किसी जाँच के प्रयोजनों के लिये न्यायालय या वह व्यक्ति जो जाँच करने के लिये न्यायालय द्वारा प्राधिकृत किया गया है प्रोबेट या प्रशासनपत्र के अर्जीदार की परीक्षा (चाहे स्वयं या कमीशन द्वारा) कर सकेगा और ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा जो सम्पत्ति के सही मूल्य को साबित करने के लिए पेश किया जाय। जाँच करने के लिए यथापूर्वोक्त प्राधिकृत व्यक्ति अपने द्वारा लिया गया साक्ष्य न्यायालय को वापस कर देगा । और जाँच के परिणाम की रिपोर्ट देगा, और ऐसी रिपोर्ट तथा इस प्रकार लिया गया साक्ष्य कार्यवाही में साक्ष्य होंगे, और न्यायालय तब के सिवाय जब कि उसका यह समाधान हो जाता है कि रिपोर्ट गलत है, रिपोर्ट के अनुसार निष्कर्ष अभिलिखित करेगा।

(7) न्यायालय का उपधारा (5) के अधीन अभिलिखित निष्कर्ष अंतिम होगा, किन्तु उसके कारण धारा 19ङ के अधीन किसी आवेदन का मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी द्वारा ग्रहण किया जाना और निपटाया जाना वर्जित न होगा।

(8) राज्य सरकार उपधारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने में कलक्टरों के मार्गदर्शन के लिये नियम बना सकेगी।

19झ. प्रोबेट और प्रशासनपत्र के बारे में न्यायालय फीस का संदाय.-

(1) अर्जीदार को प्रोबेट या प्रशासनपत्र के अनुदान का हकदार बनाने वाला कोई भी आदेश ऐसे अनुदान के लिये किये गये किसी आवेदन पर तब तक नहीं किया जायगा जब तक अर्जीदार सम्पत्ति का मूल्यांकन तृतीय अनुसूची में उपवर्णित रूप में फाइल नहीं कर देता है और न्यायालय का समाधान नहीं हो जाता है कि उस मूल्यांकन पर प्रथम अनुसूची के संख्यांक 11 में वर्णित फीस का संदाय हो गया है।

(2) कलक्टर द्वारा धारा 19ज की उपधारा (4) के अधीन किये गये किसी अभ्यावेदन के कारण प्रोबेट या प्रशासनपत्र के अनुदान में कोई विलम्ब नहीं किया जायगा।

19ञ. शास्तियों आदि की वसूली. -

(1) धारा 19ज की उपधारा (6) के अधीन की गई जाँच पर जितनी अधिक फीस संदेय पाई गई है उसे और धारा 19छ के अधीन शास्ति या समपहरण की मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी के प्रमाणपत्र पर किसी भी कलक्टर द्वारा निष्पादक या प्रशासक से ऐसे वसूल किया जा सकेगा मानो वह राजस्व की बकाया हो।

(2) मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी यथापूर्वोक्त शास्ति या समपहरण का अथवा 19ङ के अधीन शास्ति का या धारा 19ङ के अधीन उस न्यायालय फीस का, जो उस पूरी न्यायालय फीस से, जिनका संदाय किया जाना चाहिये था, अधिक है, पूर्णतः या भागतः परिहार कर सकेगा।

19ट. प्रोबेटों या प्रशासनपत्रों को धारा 6 और 28 का लागू न होना -

धारा 6 या धारा 28 में की कोई भी बात प्रोबेटों या प्रशासनपत्रों को लागू नहीं होगी।

 

 

 

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