
यह अधिनियम न्यायालय फीस अधिनियम, 1870 कहा जा सकता है।
इसका विस्तारं उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पहले भाग ख राज्यों में समाविष्ट थे, सम्पूर्ण भारत पर है।
और यह सन् 1870 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रवृत्त होगा।
इस अधिनियम में "समुचित सरकार" से, केन्द्रीय सरकार के अधीन सेवा करने वाले किसी अधिकारी के समक्ष पेश की गई या पेश की जाने वाली दस्तावेजों सम्बन्धी फीसों या स्टाम्पों के सम्बन्ध में, केन्द्रीय सरकार, और अन्य फीसों या स्टाम्पों के सम्बन्ध में राज्य सरकार अभिप्रेत है।
इस अधिनियम में जब तक विषय या सन्दर्भ से कोई प्रतिकूल बात न हो, "अपील का ज्ञापन" के अन्तर्गत "प्रत्याक्षेप का ज्ञापन" आता है और "वाद" के अन्तर्गत डिक्री से अपील आती है।