धारा 62 से 69 अध्याय 9 छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915

धारा 62 से 69 अध्याय 9 छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915

अध्याय 9

प्रकीर्ण

62. नियम बनाने की शक्ति

(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी।

(2) विशेषतया तथा पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी।

() आबकारी अधिकारियों की शक्तियां तथा कर्तव्य विहित करने के लिए,

() धारा 7 के खण्ड () के अधीन मुख्य आगम प्राधिकारी, आबकारी आयुक्त या कलेक्टरों द्वारा किन्हीं भी शक्तियों या कर्तव्यों के प्रत्यायोजन को विनियमित करने के लिए,

() यह घोषित करने के लिए कि किन-किन मामलों में या मामलों के वर्गों में तथा किन प्राधिकारियों को इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम के अधीन पारित आदेशों चाहे ये मूल हों या अपीली के विरुद्ध अपीलें होंगी, या किन प्राधिकारियों के द्वारा ऐसे आदेशों को पुनरीक्षित किया जा सकेगा तथा अपीली और पुनरीक्षणों के प्रस्तुत करने का समय और रीति को उसके संबंध में कार्यवाही करने के बारे में प्रक्रिया विहित करने के लिए,

() किसी भी मादक द्रव्य के आयात, निर्यात, परिवहन, विनिर्माण, संग्रहण, कब्जे, प्रदाय या भण्डारकरण को या भांग के पौधे की खेती को विनियमित करने के लिए, तथा वह ऐसे नियमों द्वारा, अन्य विषयों के साथ-साथ-

(एक) ताड़ी उत्पन्न करने वाले वृक्षों को छिद्रित करने को, ऐसे वृक्षों से ताड़ी निकालने का, चिन्हित करने का एवं उन चिन्हों के अनुरक्षण का विनियमन कर सकेगी;

(दो) उस प्रक्रिया को घोषित कर सकेगी जिसके द्वारा स्पिरिट को विप्रकृत किया जाएगा और स्पिरिट का विप्रकृतिकरण अभिनिश्चित किया जायेगा; और

(तीन) अभिकरण द्वारा या अपने स्वयं के अधिकारियों के पर्यवेक्षणाधीन स्प्रिंट को विप्रकृत करवा सकेगी,

(-1) महुए के फूलों के आयात, निर्यात, परिवहन, संग्रहण, कब्जे, प्रदाय, भण्डारकरण या विक्रय को विनियमित करने के लिये और उसके लिए सम्पूर्ण राज्य में या किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में या किसी विनिर्दिष्ट कालावधि के लिये अनुज्ञप्तियां तथा अनुज्ञा-पत्र विहित करने के लिए,

() उन कालावधियों तथा स्थानों का जिनके लिए तथा उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग, का, जिनकी किसी भी मादक द्रव्य के थोक या फुटकर विक्रय के लिये अनुज्ञप्तियां मंजूर को जी सकेंगी, विनियमन करने के लिए, तथा ऐसी अनुज्ञप्तियों की, जो कि किसी भी स्थानीय क्षेत्र में मंजूर की जा सकेंगी, संख्या का विनियमन करने के लिए,

() ऐसे विक्रय के लिए कोई भी अनुज्ञिप्त किसी भी स्थान के लिये मंजूर करने के पूर्व अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा अभिनिश्चित किये जाने वाले विषय विहित करने के लिए,

() किसी शुल्क या फीस या कर या शास्ति की रकम, उसके संदाय के समय, स्थान तथा रीति का विनियमन करना,

() वह प्राधिकारी जिसके द्वारा, वह प्ररूप जिसमें, और वे निर्बन्धन तथा शर्तें जिन पर या जिनके अध्यधीन कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास मंजूर किया जाएगा, विहित करने के लिए और वह ऐसे नियमों द्वारा अन्य विषयों के साथ-साथ-

(एक) वह कालावधि नियत कर सकेगी जिसमें कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास प्रवृत्त बना रहेगा,

(दो) किसी भी ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास के संबंध में देय फीसों का मान या उन फीसों को नियत करने की रीति विहित कर सकेगी,

(तीन) किसी भी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास के धारकों द्वारा, उसकी शर्तों के पालन के लिए निक्षेप की जाने वाली प्रतिभूति की रकम विहित कर सकेगी,

(चार) अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा रखे जाने वाले लेखे तथा प्रस्तुत की जाने वाली विवरणियां विहित कर सकेगी, और

(पांच) अनुज्ञप्तियों में भागीदारी का या अनुज्ञप्तियों के अन्तरण का प्रतिषेध या विनियमन कर सकेगी;

() किसी फुटकर मादक द्रव्य की दुकान के खोलने, बंद करने या स्थानांतरण के बारे में सलाह देने के संबंध में स्थानीय जनमत अभिनिश्चित करने के लिये उपाय विहित करना तथा छत्तीसगढ़ जिला योजना समिति अधिनियम, 1995 (क्रमांक 19 सन् 1995) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित जिला योजना समिति को शक्तियां विहित करना;

() उपयोग के अनुपयुक्त समझे गये किसी भी मादक द्रव्य को नष्ट करने या उसका, अन्यथा व्ययन करने के हेतु उपबन्ध करने के लिए,

() अधिहरण की गई वस्तुओं के व्ययन का विनियमन करने के लिए,

() साक्षियों के व्ययों को मंजूर करने का तथा ऐसे व्यक्तियों को, जिन पर कि इस अधिनियम के अधीन अपराध आरोपित किये गये हों, और जो बाद में छोड़ दिये गये हों, प्रतिकर मंजूर करने का विनियमन करने के लिये, और

() दूर से आने वाले साक्षियों को समन करने की आबकारी अधिकारियों की शक्ति का विनियमन करने के लिए,

() इस अधिनियम के अधीन जुर्मानों तथा अधिहरणों के आगम में से अधिकारियों को इत्तिला देने वालों को तथा अन्य व्यक्तियों को इनामों के संदाय का विनियमन करने के लिए।

(3) नियम बनाने की वह शक्ति, जो कि इस धारा द्वारा प्रदान की गई है, इस शर्त के अध्यधीन है कि उपधारा (2) (), (), (), (), (), (), (), () तथा () के अधीन बनाये गये नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाये जायेंगे:

परन्तु कोई भी ऐसे नियम पूर्व प्रकाशन के बिना बनाये जा सकेंगे यदि राज्य सरकार का यह विचार हो कि वे तुरन्त प्रवृत्त कर दिये जाने चाहिएं।

63. नियमों तथा अधिसूचनाओं का प्रकाशन

इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियम तथा जारी की गई अधिसूचनाएं शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की जायेंगी, और ऐसे प्रकाशन की तारीख से या ऐसी अन्य तारीख से, जो कि इस संबंध में विनिर्दिष्ट की जाय, प्रभावी होंगी।

64. शासन को शोध्य धनों की वसूली

(1) निम्नलिखित धन, अर्थात् -

() समस्त आबकारी आगम,

() कोई भी हानि जो उस समय हो जबकि व्यक्तिक्रम के परिणामस्वरूप अनुदान कलेक्टर ने अपने प्रबन्ध में ले लिया हो या उसके द्वारा उसका पुनः विक्रय कर दिया हो, और

() संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का सं० 9) की धारा 74 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, समस्त रकम जो, इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये नियमों के किसी उपबन्ध के अनुसार, आबकारी राजस्व से सम्बन्धित किसी संविदा के कारण किसी व्यक्ति द्वारा राज्य सरकार को शोध्य हों और वह समस्त रकम, जो किसी ऐसे बन्धपत्र या लिखत की शर्तों का भंग होने पर चुकाई जानी हो जिसके द्वारा कोई व्यक्ति कोई कर्तव्य या कार्य करने के लिए स्वयं को आबद्ध करता है या यह वचनबन्ध करता है कि यह और उसके सेवक और अभिकर्ता कोई कार्य करने से प्रविरत रहेंगे, उसके संदाय के लिए मुख्यतः दायी व्यक्ति से या उसके प्रतिभू यदि कोई हो, से उसकी जंगम सम्पत्ति के करस्थम् तथा विक्रय द्वारा, या भू-धारकों द्वारा या भूमि के कृषिकारों या उनके प्रतिभुओं द्वारा शोध भू-राजस्व की वसूली के लिये किसी अन्य प्रक्रिया द्वारा, वसूल की जा सकेगी।

(2) जब कोई भी अनुदान कलेक्टर द्वारा अपने प्रबन्ध के अधीन ले लिया गया हो, या उसके द्वारा उसका पुनः विक्रय कर दिया गया हो, तो कलेक्टर कोई भी ऐसा धन जो कि व्यतिक्रम करने वाले को किसी भी पट्टेदार या समनुदेशिती द्वारा शोध्य हो, उपधारा (1) द्वारा प्राधिकृत की गई किसी भी रीति में, वसूल कर सकेगा।

65. व्यतिक्रम करने वालों की सम्पत्ति पर सरकार का धारणाधिकार-

इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति या पट्टा धारण करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा व्यक्तिक्रम किये जाने की दशा में, उसकी समस्त डिस्टिलरी, ब्रुअरी, भाण्डागार या दुकान के भवनों, फिटिंग या साधित्र को तथा किसी भी डिस्टिलरी, ब्रुअरी, भाण्डागार या दुकान के परिसरों में या उन पर धारित मादक द्रव्यों को या उनके विनिर्माणार्थ सामग्री के समस्त स्टाक को, आबकारी आगम संबंधी किसी भी दावे की तुष्टि में या ऐसे व्यतिक्रम द्वारा सरकार को हुई किन्हीं भी हानियों के संबंध में कुर्क किया जा सकेगा तथा ऐसे दावे की, जो कि विक्रय आगम पर प्रथम प्रभार होगा, तुष्टि के लिये बेचा जा सकेगा।

66. व्यक्तियों या मादक द्रव्यों को इस अधिनियम के उपबन्धों से छूट देने की राज्य सरकार की शक्ति. –

राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा या तो पूर्णतः या ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जैसी कि वह विहित करना उचित समझे, किसी भी व्यक्ति को या व्यक्तियों के वर्ग को या किसी भी मादक द्रव्य को इस अधिनियम के समस्त उपबन्धों से या उनमें से किसी उपबन्ध से या इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियमों के या उनमें से किसी भी नियम के उपबन्धों से, या तो सम्पूर्ण राज्य में या उसमें समाविष्ट किसी भी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में या किसी भी विनिर्दिष्ट कालावधि या अवसर के लिये पूर्णतः या अंशतः छूट दे सकेगी।

67. इस अधिनियम के अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों को संरक्षण

किसी भी ऐसी बात के लिए जो कि इस अधिनियम के अधीन स‌द्भाव से की गई हो या जिसका सद्भाव से किया जाना आशयित रहा हो, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी, वाद अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।

68. वादों को लिए परिसीमा

किसी भी ऐसी बात के संबंध में, जो कि इस अधिनियम के अनुसरण में की गई हो या जिसका किया जा चुकना अभिकथित हो, सरकार के विरुद्ध या किसी भी आबकारी, पुलिस या भू-राजस्व अधिकारी के विरुद्ध कोई भी वाद तब तक प्रस्तुत नहीं होगा जब तक कि परिवादगत कार्य की दिनांक से छह माह के भीतर वाद संस्थित कर दिया गया हो।

69. अधिनियमितियों का निरसन

अनुसूची में वर्णित अधिनियमितियों को, एत‌द्वारा, उस सीमा तक निरसित किया जाता है जो अनुसूची के कालम चार में विनिर्दिष्ट की गई है।

 

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