धारा 1 से 27 उत्तर प्रदेश सर्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम्

धारा 1 से 27 उत्तर प्रदेश सर्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम्

'भारत का संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक, 2024 जिससे गृह (पुलिस) अनुभाग-9  प्रशासनिक रूप से सम्बन्धित है. पर दिनांक 6 अगस्त, 2024 को अनुमति प्रदान की और वह उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 8 सन 2024 के रूप में सर्वसाधारण की सूचनार्थ इस अभिसूचना द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

उत्तर प्रदेश सर्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण)

अधिनियम् 2024

(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 8 सन 2024)

 [ जैसा उत्तर प्रदेश विधान मण्डल द्वारा पारित हुआ ]

सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनो प्रश्नपत्रों के समय के पूर्व प्रकटन को रोकने  सॉल्वर गिरोह को अमिनिषिद्ध करने और उससे सम्बन्धित तथा सानुषांगिक मामलो का उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के पिचहत्तरवे वर्ष में एतद‌द्वारा निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है।

1- संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ -

(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण अधिनियम 2004 कहा जाएगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में होगा।

(3) यह 15 जुलाई, 2004 से प्रकृत समझा जायेगा।

2- परिभाषाएं -

(1) जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, इस अधिनियम में, -

(क) "सार्वजनिक परीक्षा का संचालन" में प्रश्नपत्र की तैयारी, कोडिंग, डीकोडिंग, मुद्रण, संग्रहण, सुरक्षित अभिरक्षा और वितरण, सार्वजनिक परीक्षा का पर्यवेक्षण, उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन, परिणाम की घोषणा और उससे संबंधित अन्य मामलें सम्मिलित हैं;

(ख) "परीक्षार्थी" का तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसे परीक्षा प्राधिकारी द्वारा किसी सार्वजनिक परीक्षा में उपस्थित होने की अनुज्ञा प्रदान की गयी हो और इसमें ऐसा व्यक्ति भी सम्मिलित है जिसे सार्वजनिक परीक्षा में, उसके निमित्त लेखक के रूप में कार्य करने के लिये प्राधिकृत किया गया हो;

(ग) सार्वजनिक परीक्षा के संबंध में "परीक्षा प्राधिकरण" में निम्नलिखित सम्मिलित हैं,

(एक) उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ;

(दो) उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग;

(तीन) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन बोर्ड, विश्वविद्यालय, प्राधिकरण या निकाय;

(चार) पूर्वोक्त आयोग, बोर्ड, विश्वविद्यालय, प्राधिकरण या निकाय द्वारा नियोजित या गठित कोई अभिकरण या भर्ती समिति; और

(पाँच) सार्वजनिक परीक्षा संचालित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर गठित, घोषित या नियोजित कोई अन्य प्राधिकरण, अभिकरण या भर्ती समिति,

(घ) "परीक्षा केंद्र" का तात्पर्य सार्वजनिक परीक्षा संचालित करने के लिए परीक्षा प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट परिसर से है ;

(ङ) "निरीक्षण दल" का तात्पर्य किसी भी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करने और परीक्षा प्राधिकरण को इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए परीक्षा प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत व्यक्तियों से है;

(च) "परीक्षा प्राधिकरण से संबद्ध व्यक्ति" का तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो परीक्षा प्राधिकरण के लिए या उसकी ओर से सेवाएं करता है, भले ही ऐसा व्यक्ति कर्मचारी या अभिकर्ता हो या किसी भी तरह से उससे संबद्ध हो ;

(छ) "सार्वजनिक परीक्षा" में सम्मिलित हैं,-

(एक) परीक्षा प्राधिकारी द्वारा लोक सेवा में किसी पद पर भर्ती या नियमितीकरण या पदोन्नति के लिए संचालित कोई अर्हकारी या प्रतियोगी परीक्षा;

(दो) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी बोर्ड, विश्वविद्यालय या निकाय द्वारा किसी उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र या किसी अन्य शैक्षणिक विशिष्टता को प्रदान करने या किसी अध्ययन पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अर्हता हेतु संचालित कोई अर्हकारी या प्रतियोगी परीक्षा;

(तीन) कोई अन्य परीक्षा जिसे राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से सार्वजनिक परीक्षा घोषित किया गया हो;

(ज) "लोक सेवा" का तात्पर्य निम्नलिखित के किसी कार्यालय या स्थापनों में सेवाओं से है, -

(क) राज्य सरकार;

(ख) स्थानीय प्राधिकरण;

              (ग) राज्य सरकार के पूर्ण स्वामित्व या नियंत्रण वाला निगम या उपक्रम;

(घ) उत्तर प्रदेश में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन स्थापित निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं, जिसमें विश्वविद्यालय भी सम्मिलित है; और

(ङ) राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोई अन्य निकाय या समितियों के रजिस्ट्रीकरण से सम्बन्धित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत और अपने अनुरक्षण के लिए राज्य सरकार से पूर्णतः या आंशिक रूप से निधि प्राप्त करने वाली कोई समिति, या कोई शैक्षणिक संस्था, चाहे रजिस्ट्रीकृत हो या नहीं, किंतु राज्य सरकार से सहायता प्राप्त करती हो;

(झ) "सॉल्वर गिरोह" का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह से है जो व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से एक या अधिक सार्वजनिक परीक्षाओं में, -

(एक) सार्वजनिक परीक्षा में स्वयं को वास्तविक परीक्षार्थी होने का दिखावा करता हो और ऐसी सार्वजनिक परीक्षा में वास्तविक परीक्षार्थी के रूप में उपस्थित होता हो या उपस्थित होने का प्रयास करता हो; या

(दो) सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित किसी प्रश्नपत्र या उसके किसी भाग या उसकी प्रतिलिपि को ऐसी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से पहले या उसके दौरान भौतिक रूप से या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त करता है, -

(क) ऐसी सार्वजनिक परीक्षा के एक या अधिक परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ या सहायता प्रदान करने के लिए ऐसे प्रश्नपत्र को हल करना या हल करने का प्रयास करना या हल करने में सहायता प्रदान करना; या

(ख) ऐसी सार्वजनिक परीक्षा के एक या अधिक परीक्षार्थियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरीके से अनुचित लाभ या सहायता प्रदान करना, जिसमें संचार के साधन या अन्य आधुनिक तकनीक सम्मिलित हैं; या

(तीन) परीक्षार्थी को अनुचित लाभ प्रदान करने के लिए किसी भी तरह से सम्मिलित होना;

(ञ) "पर्यवेक्षी कर्मचारिवृन्द" में सार्वजनिक परीक्षा संचालित करने के लिए परीक्षा प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति सम्मिलित हैं;

(ट) "अनुचित साधन", -

(एक) सार्वजनिक परीक्षा में प्रश्नों का उत्तर देते समय परीक्षार्थी के संबंध में इसमें सम्मिलित हैं, -

(क) किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, या किसी भी रूप में लिखित, अभिलिखित, प्रतिलिपि की गई, मुद्रित या पुनः उत्पादित किसी भी सामग्री से अनधिकृत सहायता लेना, या किसी भी प्रकार के अनधिकृत टेलीफोनिक, बेतार, इलेक्ट्रॉनिक, यांत्रिक या अन्य उपकरण या गैजेट का उपयोग करना; या

(ख) परीक्षार्थी के शरीर या परिधान के किसी भाग, या परीक्षा हॉल में फर्नीचर, फिक्सचर या फिटमेंट पर साशय कोई चिह्न या छाप अंतलिखित करना, जिसका उपयोग सार्वजनिक परीक्षा के दौरान सहायता के रूप में किया जा सकता है;

(दो) परीक्षार्थी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के संबंध में इसमें सम्मिलित हैं,

(क) अनधिकृत रूप से प्रश्नपत्रों का प्रतिरूपण करना या प्रकट करना या प्रकटन करने का प्रयास करना या प्रकटन करने का षड्यंत्र करना या प्राप्त करना या प्राप्त करने का प्रयास करना या कब्जे में रखना या रखने का प्रयास करना; या

(ख) किसी सार्वजनिक परीक्षा में परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए प्रश्नपत्र हल करना, हल करने का प्रयास करना या हल करने में सहायता प्रदान करना, या किसी भी तरीके से किसी भी परीक्षार्थी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना;

(ग) परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा में कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करना,

स्पष्टीकरण-

उप-खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए, शब्द "कंप्यूटर नेटवर्क", "कंप्यूटर संसाधन" और "कंप्यूटर प्रणाली" के वही अर्थ होंगे, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (अधिनियम संख्या 21, सन् 2000) की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (ञ), (ट) और (ठ) में क्रमशः उनके लिए समनुदेशित हैं;

(तीन) धोखाधड़ी या मौद्रिक लाभ के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना;

(चार) धोखाधड़ी या मौद्रिक लाभ के लिए फर्जी परीक्षा का संचालन, फर्जी प्रवेश पत्र या ऑफर लेटर जारी करना;

(पाँच) अनुचित मौद्रिक अभिलाभ और भौतिक लाभ प्राप्त करने के आशय से परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र के रूप में फर्जी प्रश्नपत्र परिचालित करना।

(2) इसमें प्रयुक्त तथा अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों, किन्तु तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन परिभाषित का वही अर्थ होगा, जो उन विधियों में क्रमशः उनके लिए समनुदेशित है।

3- अपवर्जन -

(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन अनुशास्ति या दंड से संबंधित उपबंध उन परीक्षार्थियों पर लागू नहीं होंगे जो शैक्षणिक, तकनीकी, व्यावसायिक या अन्य योग्यता प्राप्त करने के लिए किसी सार्वजनिक परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं:

परन्तु यह कि यदि ऐसा परीक्षार्थी सार्वजनिक परीक्षा में किसी पेपर का उत्तर देने में अनुचित साधनों का उपयोग करता हुआ या लिप्त पाया जाता है, तो ऐसी परीक्षा के संबंधित प्रश्नपत्र की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा और ऐसे परीक्षार्थी का परीक्षा परिणाम परीक्षा प्राधिकारी द्वारा विहित रीति से घोषित किया जाएगा।

(2) इस अधिनियम के उपबंध "सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकारी" द्वारा आयोजित "सार्वजनिक परीक्षा" पर लागू नहीं होंगे, क्योंकि वे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 (अधिनियम संख्या 1. सन् 2024) की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (ट) और (ठ) में क्रमशः परिभाषित हैं।

4- अनुचित साधनों के प्रयोग या उनमें लिप्तता का प्रतिषेध -

(1) किसी सार्वजनिक परीक्षा या सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में या उसके संबंध में अनुचित साधनों का प्रयोग या उसमें लिप्तता प्रतिषिद्ध होगी

(2) परीक्षार्थी द्वारा उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन की जांच संबंधित परीक्षा प्राधिकारी द्वारा विहित रीति से की जाएगीः

परन्तु यह कि ऐसी जांच में परीक्षार्थी को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।

(3) संबंधित परीक्षा प्राधिकारी धारा 13 की उपधारा (1) में परिकल्पित प्रतिबंधों को लगाने के लिए विहित रीति से अनुशास्ति प्रदान करने वाले प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट करेगा।

5- प्रश्न पत्र का कब्जा और प्रकटीकरण -

सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में अपने कर्तव्यों के आधार पर विधिपूर्वक प्राधिकृत या अनुज्ञात कोई भी व्यक्ति, परीक्षा केन्द्र पर परीक्षार्थी को प्रश्न-पत्र खोलने और वितरित करने के लिए नियत समय से पूर्व,-

(क) प्रश्न-पत्र या उसके किसी भाग या प्रतिलिपि को नहीं खोलेगा, लीक नहीं करेगा, उपाप्त नहीं करेगा या उपाप्त करने का प्रयास नहीं करेगा, अपने पास नहीं रखेगा या हल नहीं करेगा; या

(ख) किसी व्यक्ति या परीक्षार्थी को कोई सूचना नहीं देगा या सूचना देने का वादा नहीं करेगा, जिसके बारे में उसे यह ज्ञान या विश्वास करने का कारण हो कि ऐसी सूचना ऐसे प्रश्न-पत्र से संबंधित है, उससे व्युत्पन्न है या उस पर प्रभाव डालती है।

6- सूचना देने का प्रतिषेध -

कोई भी व्यक्ति, जिसे सार्वजनिक परीक्षा या सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से संबंधित कार्य से न्यस्त किया गया है, सिवाय इसके कि उसे अपने कर्तव्यों के आधार पर ऐसा करने की अनुमति दी गई हो, अनुचित साधनों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करके, किसी भी व्यक्ति को कोई जानकारी या उसका कोई भाग, जो उसे न्यस्त कार्य के आधार पर ज्ञात हुआ हो, परीक्षार्थी को सदोष अभिलाभ पहुंचाने के लिए नहीं देगा या देने का प्रयास नहीं करेगा।

7- परीक्षा केंद्र में प्रवेश पर प्रतिषेध -

कोई भी व्यक्ति, जिसे सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य न्यस्त नहीं किया गया है और जो परीक्षार्थी नहीं है, सार्वजनिक परीक्षा केन्द्र में प्रवेश नहीं करेगा या प्रवेश करने का प्रयास नहीं करेगा या ऐसे केन्द्र में प्रवेश करने के पश्चात् सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने में किसी परीक्षार्थी को कोई सहायता या सहयोग प्रदान करने के लिए वहां नहीं रहेगा।

8- सहायता करने पर प्रतिषेध- 

निम्नलिखित को, व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से, निम्नलिखित में से एक या समस्त के साथ, सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग या उनमें लिप्तता में किसी परीक्षार्थी की सहायता करने या सहायता करने का प्रयास करने से प्रतिषेध किया जाएगाः-

(एक) परीक्षा प्राधिकरण का अधिकारी या कर्मचारी;

(दो) सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए विनिर्दिष्ट या सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कार्यों से न्यस्त संस्थान का प्रबंधन या कर्मचारिवृन्द, और

(तीन) सॉल्वर गिरोह।

9- सार्वजनिक परीक्षा को प्रभावित करने पर प्रतिषेध -

कोई भी व्यक्ति, चाहे व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से या सॉल्वर गिरोह के साथ मिलीभगत करके, निरीक्षण दल के किसी सदस्य, पर्यवेक्षी कर्मचारिवृन्द, अधिकारी या सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए परीक्षा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त, न्यस्त, लगे हुए, सहयोजित किसी व्यक्ति को धमकी, उत्प्रेरणा, प्रलोभन, बाधा या बल प्रयोग द्वारा किसी सार्वजनिक परीक्षा को प्रभावित नहीं करेगा या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा, ताकि वह विधिपूर्ण कर्तव्य का पालन न कर सके या किसी परीक्षा केंद्र में प्रवेश न कर सके।

10- परीक्षा केंद्र से भिन्न किसी अन्य स्थान का उपयोग सार्वजनिक परीक्षा के लिए नहीं किया जाएगा -

कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने के प्रयोजनार्थ परीक्षा केन्द्र से भिन्न किसी अन्य स्थान का उपयोग नहीं करेगा या कराने का कारण नहीं बनेगा।

11- सॉल्वर गिरोह पर प्रतिषेध-

धारा 9 और 10 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सॉल्वर गिरोह को निम्नलिखित कार्य करने से प्रतिषिद्ध किया जाएगाः-

 (एक) सार्वजनिक परीक्षा के दौरान या उससे एक दिन पहले परीक्षा केंद्र में प्रवेश करना;

(दो) संबंधित सार्वजनिक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उसके किसी भाग या प्रति को अपने पास रखना, उपाप्त करना या उपाप्त करने का प्रयास करना, खोलना या प्रकटन करना;

(तीन) परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए संबंधित सार्वजनिक परीक्षा के दौरान या उससे पहले प्रश्नपत्र या उसके किसी भाग को हल करना या हल करने का प्रयास करना;

(चार) सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए परीक्षा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त, न्यस्त, लगे हुए या संबद्ध निरीक्षण दल के किसी सदस्य, पर्यवेक्षी कर्मचारिवृन्द, अधिकारी या व्यक्ति को धमकी, उत्प्रेरणा, प्रलोभन, बाधा या बल प्रयोग द्वारा किसी सार्वजनिक परीक्षा को प्रभावित करना या प्रभावित करने का प्रयास करना, विधिपूर्ण कर्तव्य का पालन करने या किसी परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोकना;

(पाँच) परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा या सार्वजनिक परीक्षा के संचालन से संबंधित कार्य के लिए विधिपूर्वक प्राधिकृत, न्यस्त या किसी व्यक्ति से बल, उत्प्रेरणा या प्रलोभन द्वारा कोई सूचना प्राप्त करना या प्राप्त करने का प्रयास करना;

(छः) परीक्षार्थी को गलत लाभ पहुंचाने के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग करने या उसमें संलिप्त अथवा अंतर्वलित होने का कार्य, प्रयत्न या दुष्प्रेरण करना; और

(सात) परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किसी व्यक्ति या परीक्षार्थी को कोई जानकारी देना या जानकारी देने का वादा करना, जिसके बारे में उसे यह ज्ञान या विश्वास करने का कारण हो कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्नपत्र से संबंधित है या उससे व्युत्पन्न है या उस पर प्रभाव डालती है।

12- मूल्यांकन में हेर-फेर का निवारण -

कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक परीक्षा में किसी परीक्षार्थी के प्रदर्शन के मूल्यांकन या उसके मूल्यांकन के अभिलेख में किसी प्रकार की हेरा-फेरी अथवा हेरा-फेरी करने के प्रयत्न में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त अथवा अंतर्वलित नहीं होगा, जहां ऐसा अभिलेख किसी भी प्रकार से अनुरक्षित किया जाता है।

स्पष्टीकरण-

इस धारा के प्रयोजनों के लिए शब्द, "मूल्यांकन अभिलेख" में उत्तर पुस्तिका, सारणीयन पत्रक, अंक रजिस्टर, व्यक्तिगत अंक पत्रक, परिणाम पत्रक या उसकी प्रतिलिपि या इस निमित्त किसी भी प्रकार से अनुरक्षित कोई अन्य रजिस्टर या अभिलेख सम्मिलित है।

13- शास्ति -

(1) जहां कोई परीक्षार्थी धारा 4 की उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, या उल्लंघन करने का प्रयत्न करता है या उल्लंघन करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, वहां संबंधित सार्वजनिक परीक्षा का उसका परिणाम रोक लिया जाएगा और उसे उस कैलेंडर वर्ष के उत्तरवर्ती एक कैलेंडर वर्ष की अवधि के लिए किसी सार्वजनिक परीक्षा में बैठने से वंचित किया जा सकता है, जिसमें धारा 4 की उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन के लिए उसका परिणाम रोक लिया जाता है:

परन्तु यह कि ऐसा विवर्जित आदेश उसे विवर्जित अवधि के पश्चात किसी सार्वजनिक परीक्षा या लोक सेवा में सम्मिलित होने के लिए निर्हरित नहीं करेगा ।

(2) जहां धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ट) के उपखंड (दो) में उल्लिखित परीक्षार्थी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति धारा 4 की उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, उसे दो वर्ष से अन्यून कारावास से, जो दस वर्ष तक का हो सकता है, और जुर्माने से दंडित किया जाएगा ।

(3) जहां कोई व्यक्ति धारा 5, 6, 7, 10 या 12 के उपबंधों का उल्लंघन करता है, वहां वह दो वर्ष से अन्यून कारावास से, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, तथा दो लाख रुपए के जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, दंडनीय होगा ।

(4) जहां कोई व्यक्ति धारा 8 या 9 के उपबंधों का उल्लंघन करता है, वहां वह तीन वर्ष से अन्यून कारावास से, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, तथा तीन लाख रुपए के जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, दंडनीय होगा ।

(5) जहां कोई सॉल्वर गिरोह धारा 8, 9 या 11 के उपबंधों का उल्लंघन करता है, वहां वह सात वर्ष से अन्यून कारावास से, जिसे चौदह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, तथा दस लाख रुपए के जुर्माने से, जो पच्चीस लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, दंडनीय होगा :

परन्तु यह कि यदि कोई सॉल्वर गिरोह ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति करता है, तो वह आजीवन कारावास के दण्ड तथा न्यूनतम पचास लाख रुपए के जुर्माने से, जो एक करोड़ रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, दंडनीय होगा ।

(6) जहां कोई व्यक्ति, चाहे सॉल्वर गिरोह के साथ मिलीभगत से या अन्यथा, आर्थिक या अनुचित लाभ के लिए, परीक्षा प्राधिकरण से जुड़े किसी व्यक्ति के जीवन को खतरा पहुंचाकर या सदोष अवरोध द्वारा सार्वजनिक परीक्षा के निष्पक्ष संचालन में बाधा डालता है या प्रभावित करता है, तो वह आजीवन कारावास और न्यूनतम पचास लाख रुपये के जुर्माने जो एक करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है, से दंडनीय होगा ।

14- कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड -

जो कोई, किसी सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित किसी कार्य या किसी कर्तव्य के पालन का कार्य सौंपे जाने पर, जानबूझकर किसी कार्य या कर्तव्य की उपेक्षा करेगा, जिसका पालन किया जाना उसके द्वारा अपेक्षित है और जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक परीक्षा से पहले प्रश्न-पत्र का प्रकटन हो सकता है या सार्वजनिक परीक्षा का संचालन प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से दंडनीय होगा।

15- कंपनियों द्वारा अपराध -

(1) जहां इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबंध के विरुद्ध कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध किए जाने के समय कंपनी का भारसाधक था और कंपनी के कारबार के संचालन के लिए कंपनी के प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही कंपनी भी, उस अपराध की दोषी समझी जाएगी और कार्यवाही किये जाने के दायी होंगे और तदनुसार दंडित किये जायेंगेः

परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने को रोकने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां ऐसा कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या कम्पनी के अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से किया गया है या उसकी ओर से किसी उपेक्षा के कारण किया गया है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और कार्यवाही किये जाने का दायी होगा और उसे तदनुसार दंडित किया जायेगा।

इस धारा के प्रयोजन के लिए, -

(क) 'कंपनी' का अर्थ है कोई निगमित निकाय और इसमें फर्म, सोसायटी या व्यक्तियों का अन्य संघ सम्मिलित है; और

(ख) 'निदेशक' के संबंध में,-

(एक) फर्म का अर्थ है फर्म में भागीदार;

(दो) "सोसाइटी या व्यक्तियों का अन्य संघ" का तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसे सोसायटी या अन्य संघ के नियमों के अधीन, यथास्थिति, सोसायटी या अन्य संघ के मामलों के प्रबंधन का कार्य सौंपा गया है।

16- संपत्ति की कुर्की और अधिहरण -

(1) सॉल्वर गिरोह के सदस्य के रूप में अकेले या समूह में कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, ऐसी कोई संपत्ति धारण नहीं करेगा या उस पर कब्जा नहीं करेगा जो पूर्वोक्त धाराओं के अधीन अपराध करके अर्जित की गयी है।

(2) यदि जिला मजिस्ट्रेट के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति के कब्जे में मौजूद चल या अचल संपत्ति, उपधारा (1) में यथो उल्लिखित किसी अपराध करने के परिणामस्वरूप अर्जित की गई है, तो वह ऐसी संपत्ति की कुर्की का आदेश दे सकता है, चाहे न्यायालय द्वारा ऐसे अपराध का संज्ञान लिया गया हो या नहीं।

(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (अधिनियम संख्या 46, सन् 2023) में कुर्की के लिए उपबंधित प्रक्रिया प्रत्येक ऐसी कुर्की पर लागू होगी।

(4) जिला मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन कुर्क की गई किसी भी संपत्ति का प्रशासक नियुक्त कर सकता है और प्रशासक के पास ऐसी संपत्ति के सर्वोत्तम हित में प्रशासन करने की सभी शक्तियां होंगी।

(5) जिला मजिस्ट्रेट ऐसी संपत्ति के उचित एवं प्रभावी प्रशासन के लिए प्रशासक को पुलिस सहायता प्रदान कर सकता है।

(6) जहां कोई संपत्ति उपधारा (2) के अधीन कुर्क की जाती है, वहां उसके आवेदक ऐसी कुर्की की जानकारी होने के दिनांक से तीन माह के भीतर जिला मजिस्ट्रेट को एक अभ्यावेदन दे सकते हैं, जहां वह परिस्थितियों और सम्पत्ति अर्जन के स्रोत प्रदर्शित कर सकेगा, जिनमें ऐसी सम्पत्ति उसके द्वारा अर्जित की गयी है।

(7) यदि जिला मजिस्ट्रेट उपधारा (6) के अधीन किए गए दावे की मौलिकता के बारे में संतुष्ट हो जाता है, तो वह संपत्ति को तुरंत कुर्की से निर्मुक्त कर देगा और तब ऐसी संपत्ति दावेदार को सौंप दी जाएगी।

(8) जहां उपधारा (6) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कोई अभ्यावेदन नहीं दिया जाता है या संपत्ति उपधारा (7) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्मुक्त नहीं की जाती है, वहां जिला मजिस्ट्रेट मामले को अपनी रिपोर्ट के साथ इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय को निर्दिष्ट करेगा।

(9) जहां जिला मजिस्ट्रेट ने उपधारा (2) के अधीन किसी संपत्ति को कुर्क करने से इनकार कर दिया है या उपधारा (7) के अधीन किसी संपत्ति को निर्मुक्त करने का आदेश दिया है, वहां राज्य सरकार या ऐसे इनकार या निर्मुक्ति से व्यथित कोई व्यक्ति, उपधारा (8) के अधीन सक्षम न्यायालय को जांच के लिए आवेदन कर सकता है कि क्या संपत्ति सॉल्वर गिरोह के किसी सदस्य द्वारा अकेले या समूह में अपराध करने के परिणामस्वरूप अर्जित की गई थी, जो इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन अपराध का अभियुक्त है। न्यायालय, यदि न्याय हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझता है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की पुष्टि करने या उसे अपास्त करने के लिए आदेश पारित कर सकता है।

(10) उपधारा (8) के अधीन निर्देश प्राप्त होने पर या उपधारा (9) के अधीन किसी आवेदन पर, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय जांच के लिए दिनांक नियत करेगा और उपधारा (9) के अधीन आवेदन करने वाले व्यक्ति को, यथास्थिति, उपधारा (6) के अधीन अभ्यावेदन करने वाले व्यक्ति को तथा राज्य सरकार को, तथा किसी अन्य व्यक्ति को भी, जिसका हित, मामले में अंतर्वलित प्रतीत होता है इसकी सूचना देगा ।

(11) इस प्रकार नियत दिनांक को या जहाँ जांच स्थगित की गयी हो किसी पश्चातवर्ती दिनांक को, न्यायालय पक्षकारों को सुनेगा, उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य प्राप्त करेगा, ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य लेगा जैसा वह आवश्यक समझे, और विनिश्चिय करेगा कि क्या संपत्ति सॉल्वर गिरोह द्वारा इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन अपराध करने के परिणामस्वरूप अर्जित की गयी थी तथा ऐसा आदेश पारित करेगा जैसा कि मामले की परिस्थितियों में उचित और आवश्यक हो ।

(12) इस धारा के अधीन किसी कार्यवाही में यह साबित करने का भार कि प्रश्नगत संपत्ति या उसका कोई भाग किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन किसी अपराध करने के परिणामस्वरूप अर्जित नहीं की गयी थी, सॉल्वर गिरोह द्वारा अर्जित संपत्ति पर दावा करने वाले व्यक्ति पर होगा।

(13) यदि ऐसी जांच के बाद न्यायालय पाता है कि संपत्ति इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन किसी अपराध करने के परिणामस्वरूप सॉल्वर गिरोह द्वारा अर्जित नहीं की गई थी, न्यायालय उस सम्पत्ति को उस व्यक्ति के पक्ष में निर्मुक्त करने का आदेश देगा जिसके कब्जे से वह सम्पत्ति कुर्क की गयी थी।

(14) जहां अभियुक्त को इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है, वहां न्यायालय, कोई भी दण्ड पारित करने के अतिरिक्त, लिखित आदेश द्वारा यह घोषित करेगा कि ऐसे अभियुक्त की कोई भी संपत्ति सभी भारों से मुक्त होकर राज्य में निहित मानी जाएगी।

स्पष्टीकरणः-

इस धारा के प्रयोजन के लिए "संपत्ति" से तात्पर्य ऐसी समस्त संपत्ति से है, चाहे वह चल हो या अचल, जो किसी सॉल्वर गिरोह द्वारा इस अधिनियम की धारा 8, 9 और 11 के अधीन अपराध करने से व्युत्पन्न या अभिप्राप्त की गयी हो या ऐसी संपत्ति जो अपराध से संबंधित निधियों के माध्यम से अर्जित की गयी हो तथा इसमें नकदी भी सम्मिलित होगी, चाहे वह संपत्ति किसी व्यक्ति के नाम पर हो या किसी के कब्जे में पायी गयी हो।

17- संज्ञान और विचारण -

(1) इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध संज्ञेय, गैर-जमानतीय अशमनीय और सत्र न्यायालय द्वारा अनन्य रूप से विचारणीय होंगे ।

(2) इस अधिनियम के अधीन अपराधों की विवेचना पुलिस उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त के पद से अनिम्न पद के पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी।

18- जमानत से संबंधित उपबंध -

इस अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (5) के अधीन किसी अपराध का आरोपी कोई व्यक्ति तब तक जमानत पर रिहा नहीं किया जाएगा, जब तक कि, -

(एक) लोक अभियोजक को ऐसी रिहाई के लिए जमानत आवेदन का विरोध करने का अवसर न दे दिया गया हो; और

(दो) जहां लोक अभियोजक जमानत आवेदन का विरोध करता है, वहां सत्र न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अपराध किए जाने की संभावना नहीं है:

परन्तु यह कि इस अधिनियम के अधीन यदि सत्र न्यायालय ऐसा निदेश दे, किसी अपराध का आरोपी कोई व्यक्ति, जो महिला, बीमार या दुर्बल है, जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

19- सभी लागतों और व्ययों का भुगतान करने के लिए प्रबंधन आदि का दायित्व -

(1) यदि कोई व्यक्ति, संस्था, मुद्रणालय, सेवा प्रदाता, जिसने -

(एक) परीक्षा के लिए अनुबंध किया हो या आदेश दिया हो; या

(दो) परीक्षा आयोजित करने के लिए प्रबंधन किया हो; या

(तीन) परीक्षा सामग्री रखने या परिवहन के लिए प्राधिकृत किया हो;

इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दोषी पाया जाता है, तो उसे सक्षम न्यायालय द्वारा निर्धारित लागत और व्यय का भुगतान करना होगा और भविष्य में ऐसे समनुदेशन के लिए हमेशा के लिए वर्जित कर दिया जाएगा।

(2) यदि परीक्षा केंद्र में सामूहिक नकल द्वारा प्रश्न पत्र हल किए जाते हैं या किसी भी तरह से सहायता प्रदान की जाती है, तो उक्त केंद्र को किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से विवर्जित कर दिया जाएगा।

20.  लोक सेवक -

सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में लगे प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता, 2023 (अधिनियम संख्या 45. सन् 2023) की धारा 2 के खंड (28) के अर्थ में लोक सेवक माना जाएगा।

21. निदेश या आदेश जारी करने की शक्ति -

राज्य सरकार समय-समय पर इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए लिखित रूप में निदेश या आदेश जारी कर सकेगी।

22. स‌द्भावनापूर्वक की गयी कार्यवाही का संरक्षण  -

इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या आशयित सार्वजनिक परीक्षा में अंतर्ग्रस्त राज्य सरकार या लोक सेवा में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।

23. अपील -

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (अधिनियम संख्या 46, सन् 2023) के अध्याय इकतीस के उपबंध, यथावश्यक परिवर्तन सहित, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी सक्षम न्यायालय द्वारा पारित किसी निर्णय या आदेश के विरुद्ध अपील पर लागू होंगे।

24- नियम बनाने की शक्ति -

(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, गजट में अधिसूचना द्वारा, ऐसे नियम बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों।

(2) विशिष्टतया, तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-

(क) धारा 3 के अधीन अनुचित साधनों का प्रयोग करते या उनमें संलिप्त पाए गए परीक्षार्थी के परिणाम की घोषणा;

(ख) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन परीक्षार्थी की जांच;

(ग) धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन मंजूरी प्राधिकारी विनिर्दिष्ट करने का

तरीका; और

(घ) कोई ऐसा विषय जो विहित किया जाना है या किया जा सकता है या जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है।

25.  अध्यारोही प्रभाव -

इस अधिनियम के उपबन्ध, उत्तर प्रदेश राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी असंगत बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे।

26. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति -

(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के दिनांक से दो वर्ष की अवधि के भीतर, गजट में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न होने वाले ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो उसे ऐसी कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।

(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश यथाशीघ्र राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा और उत्तर प्रदेश साधारण खण्ड अधिनियम, 1904 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 1. सन् 1904) की धारा 23-क की उपधारा (1) के उपबन्ध लागू होंगे।

27. निरसन और व्यावृत्तियां -

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 1998 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 13, सन् 1998) और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश, 2024 (अध्यादेश संख्या 6 सन् 2024) एतद्वारा निरसित किया जाता है:

परन्तु यह कि ऐसा निरसन प्रभावित नहीं करेगा,-

क-  इस प्रकार निरसित अधिनियम का पूर्व प्रवर्तन; या

ख- इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व; या

ग- इस प्रकार निरसित अधिनियम के किसी उपबंध के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के संबंध में उपगत कोई शास्ति, समपहरण या दंड; या

घ- पूर्वोक्त किसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड के संबंध में कोई जांच, कानूनी कार्यवाही या उपाय, और ऐसी कोई जांच, कानूनी कार्यवाही या उपाय प्रारम्भ किया जा सकेगा, जारी रखा जा सकेगा या लागू किया जा सकेगा और ऐसा कोई शास्ति, समपहरण या दंड लगाया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं हुआ थाः

परन्तु यह और कि, पूर्ववर्ती परंतुक के अध्यधीन, इस प्रकार निरसित अधिनियम या अध्यादेश द्वारा या उसके अधीन जो कुछ भी किया गया या की गई कोई भी कार्रवाई (जिसमें बनाए गए प्राधिकरण, प्रदत्त शक्तियां, दिए गए आदेश और स्वीकृत क्षतिपूर्ति सम्मिलित है) जहां तक वह इस अधिनियम के किसी भी उपबंध से असंगत नहीं है. इस अधिनियम के तत्सम्बन्धी उपबंधों के अधीन की गई कार्रवाई मानी जाएगी मानो इस अधिनियम के उपबंध सभी तात्विक / सम्बद्ध समय पर प्रवृत्त थे ।

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