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परिसीमा काल

[धाराएं 2() और 3 देखिए]

प्रथम खण्ड-वाद

 

                                वाद का वर्णन                 परिसीमा काल              वह समय, जब से

                                                                                                       काल चलना आरंभ होता है

 

भाग - लेखा सम्बन्धी वाद

 

1.

पारस्परिक, खुले तथा चालू खाते में शोध्य बाकी के लिए, जहाँ कि पक्षकारों के बीच व्यतिकारी मागे हुई हो।

तीन वर्ष

उस वर्ष का अन्त, जिसमें स्वीकृत या साबित हुई अन्तिम मद लेखे में प्रविष्ट की गई हैं, ऐसे वर्ष की संगणना वैसे ही की जाएगी जैसे वह खाते में की गई हो।

2.

फैक्टर के विरुद्ध लेखा के लिए।

तीन वर्ष

जब अभिकरण के चालू रहने के दौरान लेखा मागा गया हो, और इकार कर दिया गया हो, या जहाँ कि ऐसी मांग नहीं की गई हो वहां जब अभिकरण का पर्यवसान हो जाए।

3.

मालिक द्वारा अपने अभिकर्ता के विरुद्ध उस जंगम सम्पत्ति के लिए जो अभिकर्ता द्वारा प्राप्त की गई है किन्तु जिसका लेखा जोखा नहीं दिया गया हो।

तीन वर्ष

जब अभिकरण के चालू रहने के दौरान लेखा मांगा गया हो, और देने से इंकार कर दिया गया हो, या जहाँ कि ऐसी मांग नहीं की गई हो वहाँ जब अभिकरण का पर्यवसान हो जाए।

4.

उपेक्षा या अवचार के लिए मालिकों द्वारा अभिकर्ताओं के विरुद्ध अन्य वाद।

तीन वर्ष

जब उपेक्षा या अवचार वादी को ज्ञात हो जाए।

5.

विघटित भागीदारी के लेखा और लाभों में अंश के लिए।

तीन वर्ष

विघटन की तारीख

भाग 2-संविदा सम्बन्धी वाद

6.

नाविक को मजदूरी के लिए

तीन वर्ष

उस जल यात्रा का अन्त जिसके दौरान मजदूरी उपार्जित की गई हो।

7.

किसी अन्य व्यक्ति की दशा में मजदूरी के लिए।

तीन वर्ष

जब मजदूरी प्रोद्भूत शोध्य हो।

8.

होटल, पांथशाला या बासा के चलाने वाले द्वारा बेचे गए खाद्य या पेय की कीमत के लिए।

तीन वर्ष

जब खाद्य या पेय परिदत्त किया गया हो।

9.

वास करने की कीमत के लिए।

तीन वर्ष

जब कीमत संदेय हो जाए।

10.

वाहक के विरुद्ध माल को खो देने या क्षति पहुंचाने के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

जब वह खो जाए या उसे क्षति पहुँचे।

11.

वाहक के विरुद्ध माल के अपरिदान के या परिदान में विलम्ब के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

जब माल परिदत्त किया जाना चाहिए था।

12.

जीव-जन्तुओं, यानों, नावों या घरेलू फर्नीचर के भाड़े के लिए।

तीन वर्ष

जब भाड़ा संदेय हो जाए।

13.

परिदत्त किए जाने वाले माल के लिए संदाय में अग्रिम दिए गए बाकी धन के लिए।

तीन वर्ष

जब माल परिदत्त किया जाना चाहिए था।

14.

बेचे और परिदत्त किए गए माल की कीमत के लिए जहाँ कि उधार की किसी नियत कालावधि का करार हो।

तीन वर्ष

माल के परिदान को तारीख।

15.

बेचे और परिदत्त किए गए उस माल की कीमत के लिए जिसके लिए संदाय उधार की नियत कालावधि के अवसान पर किया जाना है।

तीन वर्ष

जब उधार की कालावधि का अवसान हो जाए।

16.

बंचे और परिदत्त किए गए ऐसे माल की कीमत के लिए जिसका संदाय विनिमय-पत्र द्वारा किया जाना था, किन्तु ऐसा कोई विनिमय-पत्र दिया नहीं गया है।

तीन वर्ष

जब प्रस्थापित विनिमय-पत्र देने की कालावधि बीत जाए।

17.

वादी द्वारा प्रतिवादी को बेचे गए पेड़ों या उगती फसल की कीमत के लिए जहां कि उधार को किसी नियत कालावधि का करार हो।

तीन वर्ष

विक्रय की तारीख।

18.

प्रतिवादी की प्रार्थना पर उसके निमित्त वादी द्वारा किए गए काम की कीमत के लिए जहाँ कि संदाय करने के लिए कोई समय नियत नहीं किया गया है।

तीन वर्ष

जब काम कर दिया जाए।

19.

उस धन के लिए जो उधार दिए गए धन की बाबत संदेय हो।

तीन वर्ष

जब उधार दिया जाए।

20.

 

वैसा ही वाद, जब कि उधार देने वाले ने धन के लिए चेक दिया हो।

तीन वर्ष

जब चेक का संदाय हो जाए।

21.

उस धन के लिए, जो इस करार के अधीन उधार दिया गया हो कि मांग पर वाह संदेय होगा I

तीन वर्ष

जब उधार दिया जाए।

22.

उस धन को लिए, जो इस करार के अधीन निक्षिप्त किया गया हो कि वह मांग पर संदेय होगा, जिसके अंतर्गत ग्राहक का ऐसे सदेय वह धन आता है जो उसके बैंकर के हाथों में हो।

तीन वर्ष

जब मांग की जाती है।

23.

उस धन के लिए जो प्रतिवादी के निमित्त दिए गए धन की बाबत वादी को संदेय हो।

तीन वर्ष

जब धन संदत्त किया जाए।

24.

उस धन के लिए जो वादी को प्रतिवादी द्वारा उस धन की बाबत सदेय है जो प्रतिवादी को वादी के उपयोग के लिए प्राप्त हुआ है।

तीन वर्ष

जब धन प्राप्त हुआ हो।

25.

उस धन के लिए जो प्रतिवादी द्वारा वादी को शोध्य धन पर ब्याज की बाबत सदेय हो।

तीन वर्ष

जब व्याज शोध्य हो जाए।

26.

उस धन के लिए जो वादी और प्रतिवादी के बीच विवरणित लेखा के अनुसार प्रतिवादी द्वारा वादी को शोध्य निकले धन के लिए वादी को संदेय हो।

तीन वर्ष

जब लेखा प्रतिवादी द्वारा या उसके इस निमित्त सम्यक् प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित लेख में विवरणित किया जाता है. किन्तु जहाँ कि ऋण पूर्वोक्त जैसे हस्ताक्षरित लेख में उसी समय समसामयिक करार से किसी भावी समय पर संदेय किया जाता है तब जब वह समय आए।

27.

किसी ऐसे वचन के भंग की बाबत प्रतिकर के लिए जो विनिर्दिष्ट समय पर या किसी विनिर्दिष्ट आकस्मिकता के घटित होने पर कोई बात करने के लिए हो

तीन वर्ष

जब विनिर्दिष्ट समय आता है या आकस्मिकता घटित होती है।

28.

सादे बन्धपत्र पर, जहाँ कि संदाय करने के लिए दिन विनिर्दिष्ट हो।

तीन वर्ष

ऐसा विनिर्दिष्ट दिन।

29.

सादे बन्धपत्र पर जहां कि ऐसा दिन विनिर्दिष्ट हो।

तीन वर्ष

बन्धपत्र निष्पादित करने की तारीख।

30.

ऐसे बन्धपत्र पर जो शर्त के अध्यधीन हो।

तीन वर्ष

जब शर्त को भंग किया जाए।

31.

ऐसे विनिमय-पत्र या वचन-पत्र, जो तारीख के पश्चात् किसी नियत समय पर संदेय हो।

तीन वर्ष

जब विनिमय-पत्र या वचन-पत्र शोध्य हो जाए।

32.

विनिमय-पत्र पर, जो दर्शन पर या दर्शनोपरांत कि किसी नियत समय पर, संदेय हो।

तीन वर्ष

जब विनिमय-पत्र उपस्थित किया जाए।

33.

विनिमय-पत्र पर जिसका किसी विशिष्ट स्थान पर संदेय होना प्रतिगृहीत हो।

तीन वर्ष

जब विनिमय-पत्र उस स्थान पर उपस्थित किया जाए।

34.

विनिमय पत्र या वचन-पत्र पर, जो दर्शन या मांग के उपरांत किसी नियत समय पर संदेय हो।

तीन वर्ष

जब उस नियत समय का अवसान हो।

35.

विनिमय-पत्र या वचन-पत्र पर, जो मांग पर संदेय हो और वाद संस्थित करने के अधिकार को अवरुद्ध या मुल्तवी करने वाली किसी लेख के सहित हो।

तीन वर्ष

विनिमय-पत्र या वचन-पत्र की तारीख।

36.

ऐसे वचन-पत्र या बन्ध पत्र, जो किस्तों में संदेय हो।

तीन वर्ष

संदाय की प्रथम अवधि के अवसान पर संदेय भाग के बारे में उस समय जब उस अवधि का अवसान हो जाए और अन्य भागों के बारे में उस समय जब संदाय करने की क्रमिक अवधियों का अवसान हो जाए।

37.

वचन-पत्र या बन्ध-पत्र पर, जो किस्तों में संदेय हो और जिसमें यह उपबन्धित है कि यदि एक या अधिक किस्तों के संदाय करने में व्यतिक्रम किया गया तो सम्पूर्ण शोध्य हो जाएगा।

तीन वर्ष

जब व्यतिक्रम किया जाए किन्तु जहाँ कि पाने वाला या बाध्यताकारी इस उपबन्ध के फायदे का अधित्यजन कर दे वहाँ उस समय जब ऐसा कोई व्यतिक्रम किया जाए जिसके बारे में ऐसा अधित्यजन नहीं किया गया है।

38.

वचन-पत्र पर, जिसे रचियता ने किसी पर-व्यक्ति को इसलिए दिया हो कि वह पाने वाले को उसे अमुक घटना के घटित होने पर परिदत्त कर दे।

तीन वर्ष

पाने वाले को परिदान की तारीख।

39.

अनादृत्त विदेशी विनिमय-पत्र पर, जहाँ कि प्रसाक्ष्य कर दिया गया हो, और सूचना दे दी गई हो।

तीन वर्ष

जब सूचना दी जाए।

40.

अप्रतिग्रहण द्वारा अनादृत विनिमय-पत्र के लेखीवाल के विरुद्ध पाने वाले द्वारा।

तीन वर्ष

प्रतिग्रहण करने से इंकार करने की तारीख।

41.

सौकर्य-पत्र के प्रतिगृहीत द्वारा लेखीवाल के विरुद्ध।

तीन वर्ष

जब प्रतिगृहीता ने विनिमय-पत्र की रकम का संदाय किया हो।

42.

प्रतिभू द्वारा मूल ऋणी के विरुद्ध।

तीन वर्ष

जब प्रतिभू ने लेनदार को संदाय किया हो।

43.

एक प्रतिभू द्वारा सहप्रतिभू के विरुद्ध।

तीन वर्ष

जब प्रतिभू ने स्वयं अपने अंश से अधिक कोई संदाय किया हो।

44.

() बीमा पालिसी पर, जबकि बीमाकर्ताओं को मृत्यु का सबूत दिए जाने या प्राप्त होने के बाद बीमा राशि संदेय हो।

तीन वर्ष

मृतक की मृत्यु की तारीख या जहाँ कि पालिसी पर के दावे का भागतः या पूर्णतः प्रत्याख्यान किया जाए, वहाँ ऐसे प्रत्याख्यान की तारीख।

 

() बीमा पालिसी पर, जबकि बीमाकर्ताओं को हानि का सबूत दिए जाने या प्राप्त हो जाने के पश्चात् बीमा-राशि संदेय हो।

तीन वर्ष

हानि पहुंचाने वाली घटना की तारीख या जहाँ कि पालिसी पर के दावे का भागतः या पूर्णतः प्रत्याख्यान किया जाए, वहाँ ऐसे प्रत्याख्यान की तारीख।

45.

बीमाकृत द्वारा उन प्रीमियमों की वसूली के लिए जो बीमाकर्ताओं के निर्वाचन पर शून्यकरणीय पालिसी के अधीन दिए गए हैं।

तीन वर्ष

जब बीमाकर्ता पालिसी को शून्य करने का निर्वाचन करे।

46.

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) की धारा 360 या धारा 361 के अधीन ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रतिदाय किया जाना विवश करने के लिए, जिसे किसी निष्पादक या प्रशासक ने वसीयत सम्पदा दे दी हो या आस्तियां वितरित कर दी हों।

तीन वर्ष

संदाय या वितरण की तारीख।

47.

ऐसे विद्यमान प्रतिफल के आधार पर, जो तत्पश्चात् निष्फल हो जाए, संदत्त धन के लिए।

तीन वर्ष

निष्फल होने की तारीख।

48.

अभिदाय के लिए ऐसे पक्षकार द्वारा, जिसने संयुक्त डिक्री के अधीन शोध्य पूरी रकम या अपने अंश से अधिक रकम संदत्त कर दी हो या ऐसी संयुक्त सम्पदा के ऐसे अंशधारी द्वारा जिसने अपने और सह-अंशधारियों से शोध्य राजस्व की पूरी रकम या अंश से अधिक रकम संदत्त कर दी हो।

तीन वर्ष

वादी के अपने अंश से अधिक के संदाय की तारीख।

49.

सहन्यासी द्वारा मृतन्यासी की सम्पदा के विरुद्ध अभिदाय का दावा प्रवर्तित कराने के लिए।

तीन वर्ष

जब अभिदाय का अधिकार प्रोद्भुत हो।

50.

अविभक्त कुटुम्ब की संयुक्त सम्पदा के कर्ता द्वारा उस सम्पदा लेखे उसके द्वारा किए गए संदाय के बारे में अभिदाय के लिए।

तीन वर्ष

संदाय की तारीख।

51.

वादी की स्थावर सम्पत्ति के उन लाभों के लिए, जिन्हें प्रतिवादी ने सदोष प्राप्त किया

तीन वर्ष

जब लाभ प्राप्त किए गए हैं।

52.

भाटक की बकाया के लिए।

तीन वर्ष

जब बकाया शोध्य हो जाए।

53.

स्थावर सम्पत्ति के विक्रेता द्वारा अंसदत्त क्रय धन के वैयक्तिक संदाय के लिए।

तीन वर्ष

विक्रय को पूर्ण करने के लिए नियत समय या (जहाँ कि विक्रय को पूर्ण करने के लिए नियत समय के पश्चात् हक प्रतिगृहीत किया जाए वहाँ) प्रतिगृहण की तारीख।

54.

किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन के लिए।

तीन वर्ष

पालन के लिए नियत की गई तारीख, या यदि ऐसी तारीख नियत नहीं की गई है तो जब वादी को यह सूचना हो जाए कि पालन से इंकार कर दिया गया है।

55.

एतस्मित् विशेषतया उपबन्धित की गई किसी अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा के भंग के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

जब संविदा का भंग किया गया है या (जहाँ कि आनुक्रमिक भंग हो वहाँ) जब वह भंग हुआ है। जिसके बारे में वाद संस्थित किया जाता है या (जहाँ कि भंग निरन्तर हो रहा है वहाँ) उस भंग का होना बन्द हो जाए।

भाग 3-घोषणा सम्बन्धी वाद

56.

निकाली गई या रजिस्टीकृत लिखत की कूटरचना को घोषित करने के लिए।

तीन वर्ष

जब निकाला जाना या रजिस्ट्रीकरण वादी को ज्ञात हो जाए।

57.

यह घोषणा अभिप्राप्त करने के लिए कि अभिकथित दत्तक ग्रहण अविधिमान्य है या वास्तव में कभी हुआ ही नहीं।

तीन वर्ष

जब अभिकथित दत्तक ग्रहण वादी को ज्ञात हो जाए।

58.

कोई अन्य घोषणा अभिप्राप्त करने के लिए।

तीन वर्ष

जब वाद लाने का अधिकार प्रथम बार प्रोद्भूत होता है।

भाग 4-डिक्री और लिखत सम्बन्धी वाद

59.

लिखत या डिक्री को रद्द या अपास्त करने के लिए या संविदा को विखंडित करने के लिए।

तीन वर्ष

जब वे तथ्य वादी को पहली बार ज्ञात होते हैं जिनमें लिखत या डिक्री को रद्द या अपास्त या संविदा को विखंडित कराने का हक उसे प्राप्त होता है।

60.

प्रतिपाल्य के संरक्षक द्वारा किए गए संपत्ति के अन्तरण को अपास्त करने के लिए-

 

() प्रतिपाल्य द्वारा जो प्राप्तवय हो गया है;

 

() प्रतिपाल्य के विधिक प्रतिनिधि द्वारा-

(i) जबकि प्रतिपाल्य प्राप्तवय होने के तीन वर्ष के भीतर मर जाता है;

 

(ii) जबकि प्रतिपाल्य प्राप्तवय होने के पूर्व मर जाता है।

 

 

 

 

 

तीन वर्ष

 

 

 

 

 

 

 

तीन वर्ष

 

 

 

तीन वर्ष

 

 

 

 

 

 

जब प्रतिपाल्य वय प्राप्त करे।

 

 

 

 

 

 

 

जब प्रतिपाल्य प्राप्तवय हो जाए।

 

 

 

जब प्रतिपाल्य मर जाए।

भाग 5-स्थावार सम्पत्ति सम्बन्धी वाद

61.

बन्धकर्ता द्वारा-

() बन्धकित स्थावर सम्पत्ति के मोचन के लिए या कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए;

तीस वर्ष

जब मोचन का या कब्जे के प्रत्युद्धरण का अधिकार प्रोद्भूत हो जाए।

 

() बन्धकित और तत्पश्चात् बन्धकदार द्वारा मूल्यवान, प्रतिफलार्थ अन्तरित स्थावर सम्पत्ति के कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए;

 

बारह वर्ष

जब अन्तरण वादी को ज्ञात हो जाए।

 

() बन्धक की तुष्टि हो जाने के पश्चात् बन्धकदार द्वारा किए गए अधिशेष संग्रहणों की वसूली के लिए।

तीन वर्ष

जब बन्धककर्ता बन्धकित सम्पत्ति पर पुनः प्रवेश करे।

62.

ऐसे धन के संदाय के प्रवर्तन के लिए, जो बन्धक द्वारा प्रतिभूत है या जिसका स्थावर सम्पत्ति पर अन्यथा भार है।

बारह वर्ष

जब वह धन, जिसके लिए बाद लाया गया है, शोध्य हो जाए।

63.

बन्धकदार द्वारा-

() पुरोबन्ध के लिए।

() बन्धकित सम्पत्ति के कब्जे के लिए।

 

तीस वर्ष

बारह वर्ष

जब बन्धक द्वारा प्रतिभूत धन शोध्य हो जाए।

जब बन्धकदार कब्जे का हकदार हो

64.

स्थावर सम्पत्ति के कब्जे के लिए, जो पूर्ववर्ती कब्जे के आधार पर हो और हक के आधार पर हो जबकि वादी सम्पत्ति पर कब्जा रखते हुए बेकब्जा कर दिया गया है।

बारह वर्ष

बेकब्जा किए जाने की तारीख।

65.

हक के आधार पर स्थावर संपत्ति या उसमें के किसी हित के कब्जे के लिए स्पष्टीकरण-इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए-

 

() जहाँ कि वाद शेषभागी, या (भू-स्वामी से भिन्न) उत्तरभोगी, या वसीयतदार द्वारा है वहाँ प्रतिवादी का कब्जा केवल तब प्रतिकूल हो गया समझा जाएगा जबकि, यथास्थिति, शेषभागी, या उत्तरभोगी या वसीयतदार की संपदा के कब्जे का हक उद्भूत होता है,

 

() जहाँ कि दावा हिन्दू या मुस्लिम नारी की मृत्यु पर स्थावर संपत्ति के कब्जे के हकदार हिन्दू या मुस्लिम द्वारा हो वहाँ प्रतिवादी का कब्जा केवल तब प्रतिकूल हो गया समझा जाएगा जब उस नारी की मृत्यु होती है,

 

() जहाँ कि वाद किसी डिक्री के निष्पादन में हुए विक्रय के क्रेता द्वारा हो, वहाँ यदि निर्णीत ऋणी विक्रय की तारीख को बेकब्जा था तो क्रेता उस निर्णीत ऋणी का प्रतिनिधि समझा जाएगा, जो बेकब्जा था।

बारह वर्ष

जब प्रतिवादी का कब्जा वादी के प्रतिकूल हो जाता है।

66.

स्थावर संपत्ति के कब्जे के लिए जबकि वादी किसी समपहरण या शर्त भंग के कारण कब्जे का हकदार हो गया हो

बारह वर्ष

जब समपहरण उपगत हो या शर्त को भंग किया जाए।

67.

भूस्वामी द्वारा अभिधारी से कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए।

बारह वर्ष

जब अभिधारण का अवसान हो जाए।

भाग 6-जंगम संपत्ति संबंधी वाद

68.

खोई हुई चोरी से, या बेईमानी से किए गए दुर्विनियोग या संपरिवर्तन से अर्जित विनिर्दिष्ट जंगम संपत्ति के लिए।

तीन वर्ष

जब संपत्ति के कब्जे के अधिकारी व्यक्ति को पहली बार यह ज्ञात हो कि वह संपत्ति किसके कब्जे में है।

69.

अन्य विर्निष्ट जंगम संपत्ति के लिए।

तीन वर्ष

जब संपत्ति सदोष ले ली जाए।

70.

निक्षेपधारी या पण्यमदार से निक्षिप्त या पण्यम रखी गई जंगम संपत्ति के प्रत्युद्धरण के लिए।

तीन वर्ष

माँग के पश्चात् इंकार की तारीख।

71.

निक्षिप्त या पण्यम रखी गई और तत्पश्चात् निक्षेपधारी या पणयमदार से मूल्यवान प्रतिफल के लिए या की गई जंगम संपत्ति के प्रत्युद्धरण के लिए।

तीन वर्ष

जब वादी को विक्रय ज्ञात हो जाए।

भाग 7-अपकृत्य सम्बन्धी वाद

72.

ऐसा कार्य करने के या ऐसे कार्य का लोप करने के निमित्त प्रतिकर के लिए जो उन राज्यक्षेत्रों में जहाँ इस अधिनियम का विस्तार है किसी तत्समय प्रवृत्त अधिनियमिति के अनुसरण में होना अभिकथित हो।

एक वर्ष

जब वह कार्य या लोप घटित हो।

73.

अप्राधिकृत बंदीकरण के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

जब बंदीकरण का अंत हो जाए।

74.

विद्वेषपूर्ण अभियोजन के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

जब वादी दोषमुक्त हो जाए या अभियोजन का अन्यथा पर्यवसान हो जाए।

75.

अपमान-लेख के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

जब अपमान-लेख प्रकाशित किया

76.

अपमान-वचन के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

जब वे शब्द कहे जाएँ या यदि शब्द स्वयं अनुयोज्य नहीं हो तो जब परिविदित विशेष नुकसान फलीभूत हो जाए।

77.

वादी के सेवक या पुत्री को विलुब्ध करने से पहुँची सेवाहानि के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

जब हानि पहुँचे।

78.

वादी के साथ हुई संविदा का भंग करने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

भंग की तारीख।

79.

अवैध, अधिनियमित या अत्यधिक करस्थम के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

करस्थम् की तारीख।

80.

वैध आदेशिका के अधीन जंगम सम्पत्ति के सदोष अभिग्रहण के निमित्त प्रतिकर के लिए।

एक वर्ष

अभिग्रहण की तारीख।

81.

निष्पादकों, प्रशासकों या प्रतिनिधियों द्वारा विधिक प्रतिनिधि वाद अधिनियम, 1855 (1855 का 12) के अधीन।

एक वर्ष

उस व्यक्ति की मृत्यु की तारीख जिसक प्रति दोष किया गया है।

82.

निष्पादको, प्रशासकों या प्रतिनिधियों द्वारा भारतीय घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855 (1855 का 13) के अधीन।

दो वर्ष

मार डाले गए व्यक्ति की मृत्यु की तारीख।

83.

किसी निष्पादक, प्रशासक या अन्य प्रतिनिधि के विरुद्ध विधिक प्रतिनिधि वाद अधिनियम, 1855 (1855 का 12) के अधीन

दो वर्ष

जब परिवादित दोष किया जाए।

84.

ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जो, किसी सम्पत्ति का विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के उपयोग करने का अधिकार रखते हुए उसे अन्य प्रयोजनों के लिए दुरुपयोजन कर ले।

दो वर्ष

जब एतद्द्वारा क्षत व्यक्ति को दुरुपयोजन पहली बार ज्ञात हो।

85.

किसी मार्ग या जलसरणी में बाधा डालने के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

बाधा की तारीख।

86.

जलसरणी के मोड़ने के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

मोड़ने की तारीख।

87.

स्थावर सम्पत्ति पर अतिचार के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

अतिचार की तारीख।

88.

प्रतिलिपि अधिकार या किसी दूसरे अन्य विशेषाधिकार के अतिलंघन के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

अतिलंघन की तारीख।

89.

दुर्व्यय रोकने के लिए।

तीन वर्ष

जब दुर्व्यय आरंभ हो।

 

 

 

 

90.

सदोष अभिप्राप्त व्यादेश से कारित क्षति के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

जब व्यादेश का परिविराम हो जाए।

91.

प्रतिकर के लिए-

 

() खोई हुए अथवा चोरी से या बेईमानी से किए गए दुर्विनियोग या संपरिवर्तन से अर्जित विनिर्दिष्ट जंगम सम्पत्ति को सदोष लेने या निरुद्ध करने के निमित्त प्रतिकर के लिए।

तीन वर्ष

जब सम्पत्ति के कब्जे का अधिका रखने वाले व्यक्ति को यह पहली ज्ञात हो कि वह सम्पत्ति किस के कब्जे में है।

.

किसी अन्य विनिर्दिष्ट जंगम सम्पत्ति को सदोष लेने या क्षति करने या सदोष निरुद्ध करने लेखे प्रतिकर के लिए,

तीन वर्ष

जब सम्पत्ति सदोष ली जाए या उसे क्षति की जाए अथवा जब निरोध करने वाले का कब्जा विधिविरुद्ध हो जाए।

भाग 8-न्यास और न्यास सम्पत्ति सम्बन्धी वाद

92.

न्यास के रूप में हस्तांतरित या वसीयत की गई और तत्पश्चात् न्यासी द्वारा मूल्यवान प्रतिफलार्थ अन्तरित की गई स्थावर सम्पत्ति सम्पत्ति के कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए।

बारह वर्ष

जब वह अन्तरण वादी को ज्ञात हो जाए।

93.

न्यास के रूप में हस्तांतरित या वसीयत की गई और तत्पश्चात् न्यासी द्वारा मूल्यवान प्रतिफलार्थ अन्तरित की गई जंगम सम्पत्ति के कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए।

तीन वर्ष

जब अन्तरण वादी को ज्ञात हो जाए।

94.

हिन्दू, मुस्लिम या बौद्ध धार्मिक या खैराती विन्यास में सम्माविष्ट स्थावर सम्पत्ति के अन्तरण को जो उसके प्रबन्धक द्वारा मूल्यवान प्रतिफलार्थ किया गया है अपास्त कराने के लिए।

बारह वर्ष

जब वह अन्तरण वादी को ज्ञात हो जाए।

95.

हिन्दू, मुस्लिम या बौद्ध धार्मिक या खैराती विन्यास में समाविष्ट जंगम सम्पत्ति के अन्तरण को, जो उसके प्रवन्धक द्वारा मूल्यवान प्रतिफलार्य किया गया है, अपास्त कराने के लिए।

तीन वर्ष

जब वह अन्तरण वादी को ज्ञात हो जाए।

96.

हिन्दू, मुस्लिम या बौद्ध धार्मिक या खैराती विन्यास के प्रबन्धक द्वारा, विन्यास में समाविष्ट उस जंगम या स्थावर सम्पत्ति के कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए जो पूर्वतन प्रवन्धक द्वारा मूल्यवान प्रतिफलार्थ अंतरित कर दी गई है।

 

अन्तरक की मृत्यु, उसके पद-त्याग या हटाए जाने की तारीख, या विन्यास के प्रबंधक के रूप में वादी की नियुक्ति की तारीख जो भी पश्चात्वतीं हो।

भाग 9- प्रकीर्ण विषय सम्बन्धी वाद

97.

शुफा अधिकार के प्रवर्तन के लिए, चाहे वह अधिकार विधि या साधारण प्रथा पर चाहे विशेष संविदा पर आधारित हो।

एक वर्ष

जब क्रेता उस विक्रय के जिस पर अधिक्षेप करना ईप्सित है, बेची गई सम्पूर्ण सम्पत्ति पर या उसके भाग पर भौतिक कब्जा करे अथवा जहाँ विक्रय की विषय-वस्तु ऐसी है कि सम्पूर्ण सम्पत्ति या उसके भाग पर भौतिक कब्जा नहीं हो सकता वहाँ जब विक्रय की लिखत की रजिस्ट्री की जाए।

98.

उस व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश 21 के 1[नियम 63 में या नियम 103 में निर्दिष्ट आदेश] या प्रेसिडेंसी लघुवाद न्यायालय अधिनियम, 1882 (1882 का 5) की धारा 28 के अधीन आदेश किया गया है, उस अधिकार को स्थापित करने के लिए जिसके अधिकार का वह उस आदेश में समाविष्ट सम्पत्ति में दावा करता है। (1964 के अधिनियम सं. 52 की धारा 3 द्वारा और दूसरी अनुसूची द्वारा "नियम 63 या नियम 103 के अधीन आदेश" के रम पर (29-12-1964 से) प्रतिस्थापित।)

एक वर्ष

अन्तिम आदेश की तारीख।

99.

सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा किए गए विक्रय को या सरकारी राजस्व की बकाया के लिए या ऐसी बकाया के रूप में वसूलीय किसी मांग के लिए किए गए विक्रय को अपास्त करने के लिए।

एक वर्ष

जब विक्रय को पुष्टि हो जाए या. यदि ऐसा कोई वाद लाया गया होता, तो जब वह अन्यथा अन्तिम निश्चायक हो जाता।

100.

वाद से भिन्न किसी के किसी कार्यवाही में सिविल न्यायालय विनिश्चय या आदेश को अथवा किसी सरकारी ऑफिसर के अपनी पदीय हैसियत में किए गए किसी कार्य या आदेश को परिवर्तित या अपास्त करने के लिए।

एक वर्ष

यथास्थिति, न्यायालय के अंतिम विनिश्चय या आदेश की तारीख या ऑफिसर के कार्य या आदेश की तारीख।

101.

निर्णय के आधार पर जिसके अंतर्गत विदेशी निर्णय आता है, या मुचलके के आधार पर।

तीन वर्ष

निर्णय या मुचलके की तारीख।

102.

उस सम्पत्ति के लिए जिसे वादी ने उस समय हस्तांतरित किया है जब वह उन्मत्त था।

तीन वर्ष

जब वादी पुनः स्वस्थचित्त हो जाए और उसे हस्तान्तरण का ज्ञान हो जाय

103.

न्यास-भंग से हुई हानि को मृत न्यासी की साधारण सम्पदा में से पूरा करने के लिए।

तीन वर्ष

न्यासी की मृत्यु की तारीख या, यदि हानि उस समय तक हुई हो तो हानि की तारीख।

104.

कालिकतः आवर्ती अधिकार को स्थापित करने के लिए।

तीन वर्ष

जब वादी के अधिकार के उपभोग को पहली बार नकारा जाए।

105.

किसी हिन्दू द्वारा भरण-पोषण की बकाया के लिए।

तीन वर्ष

जब बकाया संदेय हो।

106.

निष्पादक या प्रशासक के या सम्पदा का वितरण करने के लिए वैध रूप से भारसाधन करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध वसीयत सम्पदा के लिए या वसीयतकर्ता द्वारा वसीयत किए गए किसी अवशिष्ट अंश के लिए या निर्वसीयती की सम्पत्ति के वितरणीय अंश के लिए।

बारह वर्ष

जब वसीयत सम्पदा या अंश संदेय या परिदेय हो जाए।

107.

आनुवंशिक पद पर कब्जे के लिए।

 

स्पष्टीकरण- आनुवंशिक पद पर उस समय कब्जा हो जाता है, जब उसकी सम्पत्तियाँ प्रायः प्राप्त की जाती हैं या (यदि कोई सम्पत्तियाँ नहीं हैं तो) जब उसके कर्तव्यों का प्रायः पालन किया जाता है।

बारह वर्ष

जब प्रतिवादी उस पद पर वादी के प्रतिकूलतः कब्जा कर ले।

108.

किसी हिन्दू या मुस्लिम नारी द्वारा किए गए भूमि के अन्य संक्रामण को उसके जीवन काल तक के सिवाय या उसका पुनर्विवाह होने तक के सिवाय, शून्य घोषित कराने के लिए ऐसी नारी के जीवनकाल में उस हिन्दू या मुस्लिम द्वारा वाद जो भूमि पर कब्जा करने का हकदार होगा यदि वाद संस्थित की तारीख को उस नारी की मृत्यु हो जाए।

बारह वर्ष

उस अन्य संक्रामण की तारीख।

109.

मिताक्षरा विधि से शासित हिन्दू द्वारा उस अन्य संक्रामण को, जो उसके पिता ने पैतृक सम्पत्ति का किया गया है अपास्त कराने के लिए।

बारह वर्ष

जब अन्य संक्रामित सम्पत्ति का कब्जा ले ले।

110.

उस व्यक्ति द्वारा जो अविभक्त कुटुम्ब की सम्पत्ति से अपवर्जित किया गया हो उसमें अंश के किसी अधिकार को प्रवर्तित कराने के लिए।

बारह वर्ष

जब उपवर्जन वादी को ज्ञात हो जाए।

111.

किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या उसकी ओर से किसी लोक मार्ग या सड़क या उसके किसी भाग पर कब्जे के लिए. जिससे कि वह बेकब्जा कर दिया गया हो या जिस पर कब्जा रखना उसने छोड़ दिया हो।

तीस वर्ष

बेकब्जा किए जाने या कब्जा छोड़ देने की तारीख।

112.

केन्द्रीय सरकार के या किसी राज्य सरकार के, जिसके अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य की सरकार आती है. द्वारा वा उसकी ओर से कोई वाद (सिवाय ऐसे वाद के जो उच्चतम न्यायालय के समक्ष उसकी आरंभिक अधिकारिता प्रयोग में हो)

तीस वर्ष

जब किसी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा लाए गए वैसे ही वाद में परिसीमा काल इस अधिनियम के अधीन चलना आरम्भ हो जाता।

भाग 10-वाद जिनके लिए कोई विहित परिसीमा काल नहीं है

113.

कोई भी वाद जिसके लिए कोई परिसीमा काल इस अनुसूची में अन्यत्र उपबन्धित नहीं है।

तीन वर्ष

जब वाद लाने का अधिकार प्रोद्भूत हो।

द्वितीय खण्ड-अपीलें

114.

दोषमुक्ति के आदेश की अपील-

(क) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 417 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन;

(ख) उसी संहिता की धारा 417 की उपधारा (3) के अधीन।

 

 

 

नब्बे दिन

 

 

तीस दिन

उस आदेश की तारीख जिसकी अपील की गई है।

विशेष इजाजत के अनुदान की तारीख।

115.

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) के अधीन-

 

(क)  उस मृत्यु दण्डादेश की जो सेशन न्यायालय द्वारा या अपनी प्रारंभिक दाण्डिक अधिकारिता के प्रयोग में उच्च न्यायालय द्वारा पारित किया गया है।

(ख)    किसी अन्य दण्डादेश की या ऐसे आदेश की जो दोषमुक्ति का आदेश हो-

(i) उच्च न्यायालय में;

(ii) किसी अन्य न्यायालय में;

 

 

                      

तीस दिन

 

 

                          

 

 

 

 

साठ दिन

तीस दिन

                               

 

 

दण्डादेश की तारीख।

 

 

 

 

 

 

 

दण्डादेश या आदेश की तारीख।

दण्डादेश या आदेश की तारीख।

116.

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन-

() किसी उच्च न्यायालय में, किसी डिक्री या आदेश की;

() किसी अन्य न्यायालय में, किसी डिक्री या आदेश की।

 

 

नब्बे दिन

                  तीस दिन

 

 

डिक्री या आदेश की तारीख।

                           डिक्री या आदेश की तारीख।

117.

किसी उच्च न्यायालय में डिक्री या आदेश के विरुद्ध उसी न्यायालय में।

तीस दिन

डिक्री या आदेश की तारीख।

तीसरा खण्ड-आवेदन

भाग विनिर्दिष्ट मामलों में आवेदन

118.

संक्षिप्त प्रक्रिया के अधीन वाद में उपसंजात होने और प्रतिरक्षा करने की इजाजत के लिए।

दस दिन

जब समन की तामील हो।

119.

माध्यस्थम अधिनियम, 1940 (1940 का 10) के अधीन-

 

() न्यायालय में पंचाट फाइल कराने के के लिए;

 

() किसी पंचाट को अपास्त कराने या किसी पंचाट को पुनर्विचारार्थ विप्रेषित कराने के लिए।

 

 

 

 

तीस दिन

  

तीस दिन

                                                                            

 

 

 

पंचाट दिए जाने की सूचना की तामील

पंचाट फाइल किए जाने की सूचना

120.

किसी मृत वादी या अपीलार्थी के या मृत प्रतिवादी या प्रत्यर्थी के विधिक प्रतिनिधि को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908) का 5) के अधीन पक्षकार बनवाने के लिए।

नब्बे दिन

यथास्थिति वादी, अपीलार्थी, प्रतिवादी या प्रत्यर्थी की मृत्यु की तारीख।

121.

उसी संहिता के अधीन उपशमन को अपास्त कराने के लिए।

साठ दिन

उपशमन की तारीख

122.

उपसंजाति में व्यतिक्रम के कारण या अभियोजन के अभाव के कारण या आदेशिका की तामील के खर्च देने में असफलता या खर्चे के लिए प्रतिभूति देने में असफलता के कारण खारिज किए गए वाद या अपील या पुनर्विलोकन या पुनरीक्षण के लिए आवेदन का प्रत्यावर्तन कराने के लिए।

तीस दिन

खारिज होने की तारीख।

123.

एक पक्षीय पारित डिक्री को अपास्त कराने के लिए या एक पक्षीय डिक्री या सुनी गई अपील की फिर से सुनवाई के लिए।

स्पष्टीकरण- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश 5 के नियम 20 के अधीन प्रतिस्थापित तामील इस अनुच्छेद के प्रयोजन के लिए सम्यक् तामील नहीं समझी जाएगी।

तीस दिन

डिक्री की तारीख या जहाँ कि समन या सूचना की सम्यक् रूप से तामील नहीं हुई थी. वहाँ जब डिक्री का ज्ञान आवेदक को हुआ।

124.

उच्चतम न्यायालय से भिन्न न्यायालय द्वारा निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए।

तीस दिन

डिक्री या आदेश की तारीख।

125.

डिक्री का समायोजन या तुष्टि अभिलिखित कराने के लिए।

तीस दिन

जब संदाय या समायोजन किया जाए।

126.

डिक्री की रकम या संदाय किस्तों में करने के लिए।

तीस दिन

डिक्री की तारीख।

127.

डिक्री के निष्पादन में हुए विक्रय को अपास्त कराने के लिए आवेदन जिसके अन्तर्गत निर्णीत ऋणी द्वारा किया गया ऐसा आवेदन आता है।

1[साठ] दिन (1976 के अधिनियम सं. 104 की धारा 98 द्वारा शब्द "तीस" के स्थान पर (1-2-1977 से)प्रतिस्थापित।)

विक्रय की तारीख।

128.

स्थावर सम्पत्ति से बेकब्जा किए गए और डिक्रीदार के या डिक्री के निष्पादन में हुए विक्रय में क्रेता के अधिकार पर विवाद उठाने वाले व्यक्ति द्वारा कब्जे के लिए।

तीस दिन

बेकब्जा किए जाने की तारीख।

129.

डिक्री या डिक्री के निष्पादन में बेची गई स्थावर सम्पत्ति के कब्जे के परिदान में प्रतिरोध या बाधा हटाने के पश्चात् कब्जे के लिए।

तीस दिन

प्रतिरोध या बाधा की तारीख।

130.

अकिंचन के तौर पर अपील करने की इजाजत के लिए-

() उच्च न्यायालय में; 

 

() किसी भी अन्य न्यायालय में।

    

 

साठ दिन

 

तीस दिन

 

 

डिक्री की तारीख, जिसको अपील की गई हो।

डिक्री की तारीख, जिसको अपील की गई हो।

131.

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) या दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898) का 5) के अधीन पुनरीक्षण की उसकी शक्तियों के प्रयोग के लिए किसी न्ययालय में।

नब्बे दिन

जिस डिक्री या आदेश या दण्डादेश का पुनरीक्षण ईप्सित हो उसकी तारीख।

132.

उस प्रमाणपत्र के लिए कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील के योग्य है संविधान के अनुच्छेद 132 के खण्ड (1), अनुच्छेद 133 या अनुच्छेद 134 के खण्ड (1) के उपखण्ड () के अधीन या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन उच्च न्यायालय में।

साठ दिन

डिक्री, आदेश या दण्डादेश की तारीख।

133.

अपील करने की विशेष इजाजत के लिए उच्चतम न्यायालय में

 

(क) उस मामले में जिसमें मृत्यु दण्डादेश अन्तर्वलित होः

(ख)   उस मामले में जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा अपील की इजाजत देने से इंकार किया गया थाः

(ग)  किसी अन्य मामले में।

 

 

 

साठ दिन

 

 

साठ दिन

 

 

नब्बे दिन

 

 

 

 

निर्णय, अन्तिम आदेश या दण्डादेश की तारीख।

 

इन्कार करने के आदेश की तारीख।

 

 

निर्णय वा आदेश की तारीख।

134.

डिक्री के निष्पादन में हुए विक्रय में के स्थावर सम्पत्ति के क्रेता द्वारा कब्जे के परिदान के लिए।

एक वर्ष

 

जब विक्रय आत्यन्तिक हो जाए।

135.

आज्ञापक, व्यादेश अनुदत्त करने वाली डिक्री के प्रवर्तन के लिए।

 

तीन वर्ष

डिक्री की तारीख, या जहाँ कि पालन के लिए तारीख नियत है वहाँ वह तारीख।

136.

सिविल न्यायालय की (आज्ञापक व्यादेश अनुदत्त करने वाली डिक्री से भिन्न) किसी डिक्री या किसी आदेश के निष्पादन के लिए।

बारह वर्ष

1[जब] डिक्की या आदेश प्रवर्तनीय हो जाता है, अथवा जहाँ कि डिक्री या कोई पश्चात्वर्ती आदेश एक निश्चित तारीख को या आवर्ती कालावधियों पर किसी रुपए का संदाय करने या किसी सम्पत्ति का परिदान करने का निदेश देता है वहाँ जब वह संदाय या परिदान करने में व्यतिक्रम होता है जिसका निष्पादन कराने की ईप्सा है:

 

परंतु शाश्वत व्यादेश, अनुदत्त करने वाली डिक्री के प्रवर्तन या निष्पादन के लिए आवेदन किसी परिसीमा काल के अध्यधीन नहीं होगा।

भाग 2-अन्य आवेदन

137.

कोई अन्य आवेदन जिसके लिए इस खण्ड में अन्यत्र कोई परिसीमा काल उपबंधित नहीं है।

तीन वर्ष

जब आवेदन करने का अधिकार प्रोद्भुत होता है।

 

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