विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 Paper-3 MCQs

विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 Paper-3 MCQs

विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967

UNLAWFUL ACTIVITIES (PREVENTION) ACT, 1967

 

1. धारा 31 के अनुसार अभिहित प्राधिकारी को किस प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?

a. केवल प्रशासनिक शक्तियाँ

b. पुलिस अधिकारी की शक्तियाँ

c. सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ

d. दंड न्यायालय की सीमित शक्तियाँ

 

2. अभिहित प्राधिकारी को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ किस उद्देश्य से दी गई हैं?

a. दंड देने के लिए

b. पूर्व और उचित जाँच करने के लिए

c. अभियोजन चलाने के लिए

d. गिरफ्तारी आदेश देने के लिए

 

3. धारा 31 के अंतर्गत अभिहित प्राधिकारी की शक्तियाँ किसके अधीन होती हैं?

a. दंड प्रक्रिया संहिता

b. उच्च न्यायालय के निर्देश

c. इस अध्याय के उपबंध

d. राज्य सरकार की अधिसूचना

 

4. निम्नलिखित में से कौन-सी शक्ति धारा 31 के अंतर्गत अभिहित प्राधिकारी को प्राप्त मानी जाएगी?

a. गवाहों को तलब करना

b. आरोप तय करना

c.  जा सुनाना

d. प्राथमिकी दर्ज करना

 

5. धारा 31 के अंतर्गत अभिहित प्राधिकारी की भूमिका किस प्रकृति की है?

a. पूर्णतः दंडात्मक

b. अन्वेषणात्मक और न्यायिक

c. केवल सलाहकार

d. केवल प्रशासनिक

 

6. कतिपय अंतरणों का आकृत और शून्य होना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 31

b. धारा 32

c. धारा 33

d. धारा 34

 

7. धारा 32 किस स्थिति में संपत्ति के अंतरण को अमान्य मानती है?

a. जब अंतरण न्यायालय के आदेश से हो

b. जब अंतरण धारा 25 के आदेश या धारा 27 की सूचना के बाद हो

c. जब अंतरण पारिवारिक सदस्य के पक्ष में हो

d. जब अंतरण मूल्य लेकर किया गया हो

 

8. धारा 32 के अनुसार, आदेश या सूचना के पश्चात् किए गए अंतरण के संबंध में क्या किया जाएगा?

a. उसे वैध माना जाएगा

b. उसे स्थगित किया जाएगा

c. उस पर ध्यान नहीं दिया जाएगा

d. उसे पंजीकरण के अधीन रखा जाएगा

 

9. यदि आदेश या सूचना के बाद अंतरित संपत्ति को बाद में समपहृत कर लिया जाता है, तो ऐसा अंतरण किस प्रकृति का होगा?

a. वैध

b. सशर्त

c. अकृत और शून्य

d. अपील योग्य

 

10. धारा 32 के अंतर्गत अंतरण को अकृत और शून्य कब माना जाएगा?

a. जैसे ही आदेश जारी हो

b. जैसे ही सूचना जारी हो

c. जब अंतरित संपत्ति समपहृत कर ली जाती है

d. जब अंतरण रजिस्टर्ड हो

 

11. धारा 32 का प्रभाव किस प्रयोजन के लिए सीमित है?

a. दीवानी वादों के लिए

b. आपराधिक अपीलों के लिए

c. इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों के प्रयोजन के लिए

d. सामान्य संपत्ति कानून के लिए

 

12. धारा 32 का मुख्य विधिक परिणाम क्या है?

a. संपत्ति का स्वतः अधिग्रहण

b. आदेश के बाद किए गए अंतरण को निष्प्रभावी बनाना

c. तीसरे पक्ष को अधिकार देना

d. संपत्ति का अस्थायी अधिरोपण

 

13. कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 31

b. धारा 32

c. धारा 33

d. धारा 34

 

14. धारा 33(1) के अनुसार, न्यायालय संपत्ति की कुर्की कब कर सकता है?

a. दोषसिद्धि के बाद ही

b. अभियोजन समाप्त होने पर

c. विचारण के दौरान

d. अपील के बाद

 

15. धारा 33(1) के अंतर्गत कुर्क की जाने वाली संपत्ति का प्रकार क्या हो सकता है?

a. केवल जंगम

b. केवल स्थावर

c. जंगम या स्थावर या दोनों

d. केवल बैंक खाते

 

16. धारा 33(1) के अनुसार, न्यायालय किस स्थिति में संपत्ति कुर्क कर सकता है?

a. यदि संपत्ति पहले से कुर्क हो

b. यदि संपत्ति विवादित हो

c. यदि संपत्ति विदेश में हो

d. यदि संपत्ति विरासत में मिली हो

 

17. धारा 33(2) के अंतर्गत संपत्ति का समपहरण कब किया जा सकता है?

a. आरोप पत्र दाखिल होने पर

b. अभियुक्त के फरार होने पर

c. अभियुक्त के सिद्धदोष ठहराए जाने पर

d. जांच प्रारंभ होने पर

 

18. धारा 33(2) के अनुसार, समपहृत संपत्ति किसे हस्तांतरित होती है?

a. शिकायतकर्ता को

b. पीड़ित को

c. केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार को

d. न्यायालय को

 

19. धारा 33(3) के अंतर्गत, न्यायालय किस प्रकार की संपत्ति के मूल्य के समतुल्य संपत्ति को कुर्क कर सकता है?

a. विदेशी मुद्रा

b. सामान्य नकली करेंसी

c. उच्च क्वालिटी की कूटकृत भारतीय करेंसी

d. जब्त की गई संपत्ति

 

20. धारा 33(3) में वर्णित समतुल्य मूल्य में क्या सम्मिलित किया जाता है?

a. केवल बाजार मूल्य

b. केवल अंकित मूल्य

c. अंकित मूल्य सहित मूल्य

d. केवल अनुमानित मूल्य

 

21. धारा 33(4) के अनुसार, आतंकवाद के आगमों के संबंध में न्यायालय क्या आदेश दे सकता है?

a. केवल जुर्माना

b. केवल चेतावनी

c. समतुल्य संपत्ति की कुर्की या समपहरण

d. केवल संपत्ति का फ्रीज

 

22. धारा 33(5) के अंतर्गत, अभियुक्त की मृत्यु होने पर न्यायालय क्या कर सकता है?

a. कार्यवाही समाप्त कर देगा

b. केवल कुर्की हटाएगा

c. संपूर्ण संपत्ति अधिहरण का आदेश दे सकता है

d. केवल जुर्माना लगाएगा

 

23. धारा 33(5) के अनुसार, संपत्ति के अधिहरण का निर्णय किस आधार पर लिया जाता है?

a. अभियोजन की मांग पर

b. पुलिस रिपोर्ट पर

c. न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तात्त्विक साक्ष्य के आधार पर

d. अनुमान के आधार पर

 

24. कंपनी द्वारा सरकार को शेयरों का अंतरण करना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 31

b. धारा 32

c. धारा 33

d. धारा 34

 

25. धारा 34 किस स्थिति में लागू होती है?

a. जब कंपनी स्वेच्छा से शेयर हस्तांतरित करे

b. जब कंपनी का परिसमापन हो

c. जब किसी कंपनी के शेयर इस अध्याय के अधीन सरकार को समपहृत हो जाएँ

d. जब शेयरधारक की मृत्यु हो जाए

 

26. धारा 34 के अनुसार, समपहृत शेयर किसके नाम पर रजिस्टर किए जाते हैं?

a. न्यायालय के नाम पर

b. शिकायतकर्ता के नाम पर

c. केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के नाम पर

d. कंपनी के निदेशक के नाम पर

 

27. कंपनी को समपहृत शेयरों का अंतरण कब रजिस्टर करना होता है?

a. अपील की अवधि समाप्त होने के बाद

b. शेयरधारक की सहमति के बाद

c. न्यायालय के आदेश की प्राप्ति पर

d. रजिस्ट्रार की अनुमति के बाद

 

28. धारा 34 के अनुसार, शेयरों का अंतरण रजिस्टर करते समय किस कानून या दस्तावेज की बाधा लागू नहीं होगी?

a. आयकर अधिनियम, 1961

b. कंपनी अधिनियम, 1956 और कंपनी के संगम अनुच्छेद

c. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908

d. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

 

29. धारा 34 के अनुसार, कंपनी द्वारा शेयरों का अंतरण किस प्रकार किया जाना आवश्यक है?

a. निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद

b.  न्यायालय की अनुमति से

c. तुरंत, अंतरिति के रूप में रजिस्टर करके

d. वार्षिक आम बैठक में प्रस्ताव पारित करके

 

30. अनुसूची, आदि का संशोधन, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 35

b. धारा 36

c. धारा 37

d. धारा 38

 

31. धारा 35 के अंतर्गत पहली अनुसूची में संशोधन करने की शक्ति किसे प्राप्त है?

a. संसद

b. उच्च न्यायालय

c. केन्द्रीय सरकार

d. राज्य सरकार

 

32. पहली अनुसूची में किसी संगठन को जोड़ने के लिए केन्द्रीय सरकार को कौन-सा माध्यम अपनाना होता है?

a. अधिनियम पारित करके

b. राजपत्र में अधिसूचना जारी करके

c. न्यायालय से अनुमति लेकर

d. राज्य सरकार की संस्तुति से

 

33. धारा 35(1) के अंतर्गत केन्द्रीय सरकार कौन-सा कार्य नहीं कर सकती?

a. पहली अनुसूची में संगठन जोड़ना

b. पहली अनुसूची से संगठन हटाना

c. पहली अनुसूची में अन्य प्रकार का संशोधन करना

d. बिना अधिसूचना के संगठन को सूचीबद्ध करना

 

34. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अध्याय 7 के अंतर्गत आतंकवादी घोषित संगठन को पहली अनुसूची में क्यों जोड़ा जा सकता है?

a. वह भारत में पंजीकृत है

b. वह विदेशी संगठन है

c. वह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से संबंधित है

d. वह प्रतिबंधित संगठन नहीं है

 

35. धारा 35(2) के अनुसार, केन्द्रीय सरकार किसी संगठन को पहली अनुसूची में कब जोड़ सकती है?

a. जब संगठन लाभ कमाता हो

b. जब संगठन विदेशी फंड प्राप्त करता हो

c. जब सरकार को यह विश्वास हो कि वह आतंकवाद में संलिप्त है

d. जब संगठन के विरुद्ध अभियोजन लंबित हो

 

36. धारा 35(3) के अनुसार, निम्न में से कौन-सा आधार संगठन को आतंकवाद में संलिप्त मानने के लिए पर्याप्त है?

a. आतंकवादी कार्य करना

b. आतंकवाद के लिए तैयारी करना

c. आतंकवाद को बढ़ावा देना

d. उपर्युक्त सभी

 

37. दूसरी और तीसरी अनुसूची में संशोधन करने की शक्ति किस उपधारा के अंतर्गत केन्द्रीय सरकार को प्राप्त है?

a. उपधारा (1)

b. उपधारा (2)

c. उपधारा (3)

d. उपधारा (4)

 

38. धारा 35 के अंतर्गत दूसरी या तीसरी अनुसूची में संशोधन किस प्रकार किया जाता है?

a. संसद की स्वीकृति से

b. उच्च न्यायालय के आदेश से

c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा

d. राज्य सरकार की अधिसूचना से

 

39. धारा 35(5) के अनुसार, जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना का क्या किया जाना आवश्यक है?

a. राज्य सरकारों को भेजा जाना

b. राष्ट्रपति की स्वीकृति लेना

c. यथाशीघ्र संसद के समक्ष रखा जाना

d. न्यायालय में चुनौती के लिए प्रस्तुत करना

 

40. धारा 35 के अनुसार, निम्न में से कौन-सा कार्य केन्द्रीय सरकार कर सकती है?

a. केवल पहली अनुसूची में संशोधन

b. केवल दूसरी अनुसूची में संशोधन

c. केवल तीसरी अनुसूची में संशोधन

d. पहली, दूसरी और तीसरी अनुसूचियों में संशोधन

 

41. किसी आतंकवादी संगठन को अधिसूचना से निकाला जाना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 35

b. धारा 36

c. धारा 37

d. धारा 38

 

42. किसी संगठन को अनुसूची से हटाने के लिए आवेदन किस प्रावधान के अंतर्गत किया जाता है?

a. धारा 34

b. धारा 35(1)()

c. धारा 36(2)

d. धारा 37

 

43. धारा 36(1) के अनुसार संगठन को अनुसूची से हटाने हेतु आवेदन किसे किया जाता है?

a. उच्च न्यायालय

b. पुनर्विलोकन समिति

c. केन्द्रीय सरकार

d. संसद

 

44. धारा 36(2) के अनुसार, आवेदन कौन कर सकता है?

a. केवल राज्य सरकार

b. केवल केन्द्रीय सरकार

c. संगठन या संगठन को आतंकवादी घोषित किए जाने से प्रभावित कोई व्यक्ति

d. केवल न्यायालय

 

45. संगठन को अनुसूची में शामिल किए जाने से प्रभावित व्यक्ति को आवेदन करने का अधिकार किस उपधारा में दिया गया है?

a. उपधारा (1)

b. उपधारा (2)()

c. उपधारा (4)

d. उपधारा (5)

 

46. धारा 36(3) के अनुसार, आवेदन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए नियम कौन बना सकता है?

a. उच्च न्यायालय

b. संसद

c. पुनर्विलोकन समिति

d. केन्द्रीय सरकार

 

47. यदि केन्द्रीय सरकार धारा 36(1) के अंतर्गत किया गया आवेदन नामंजूर कर देती है, तो अगला उपाय क्या है?

a. सर्वोच्च न्यायालय में अपील

b. राज्य सरकार को अभ्यावेदन

c. पुनर्विलोकन समिति में आवेदन

d. राष्ट्रपति को याचिका

 

48. पुनर्विलोकन के लिए आवेदन नामंजूरी आदेश की प्राप्ति से कितने समय के भीतर किया जाना चाहिए?

a. 15 दिन

b. 30 दिन

c. 45 दिन

d. 60 दिन

 

49. पुनर्विलोकन समिति कब पुनर्विलोकन आवेदन मंजूर कर सकती है?

a. जब संगठन सरकार से सहमत हो

b. जब नया साक्ष्य प्रस्तुत किया जाए

c. जब नामंजूरी का निर्णय न्यायिक पुनर्विलोकन के सिद्धांतों के अनुसार दोषपूर्ण हो

d. जब संसद संस्तुति दे

 

50. यदि पुनर्विलोकन समिति पुनर्विलोकन मंजूर करती है, तो वह क्या कर सकती है?

a. सीधे संगठन को अनुसूची से हटा दे

b. दंड समाप्त कर दे

c. आशय का आदेश पारित कर सकती है

d. मामला उच्च न्यायालय भेज दे

 

51. पुनर्विलोकन समिति के आदेश के पश्चात् संगठन को अनुसूची से हटाने का अंतिम आदेश कौन करता है?

a. पुनर्विलोकन समिति

b. उच्च न्यायालय

c. संसद

d. केन्द्रीय सरकार

 

52. पुनर्विलोकन समिति, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 35

b. धारा 36

c. धारा 37

d. धारा 38

 

53. धारा 37 के अनुसार पुनर्विलोकन समिति का गठन कौन करता है?

a. सर्वोच्च न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. केन्द्रीय सरकार

d. संसद

 

54. पुनर्विलोकन समिति का गठन किस धारा के प्रयोजनों के लिए किया जाता है?

a. धारा 35 के प्रयोजनों के लिए

b. धारा 36 के प्रयोजनों के लिए

c. धारा 38 के प्रयोजनों के लिए

d. धारा 40 के प्रयोजनों के लिए

 

55. धारा 37(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार कितनी पुनर्विलोकन समितियां गठित कर सकती है?

a. केवल एक

b. केवल दो

c. एक या अधिक

d. अधिकतम तीन

 

56. धारा 37(2) के अनुसार प्रत्येक पुनर्विलोकन समिति में कितने सदस्य हो सकते हैं?

a. अध्यक्ष और दो सदस्य

b. अध्यक्ष और तीन से अधिक सदस्य

c. अध्यक्ष और तीन से अनधिक सदस्य

d. केवल अध्यक्ष

 

57. पुनर्विलोकन समिति के अन्य सदस्यों के संबंध में क्या आवश्यक है?

a. वे संसद सदस्य हों

b. वे न्यायाधीश हों

c. वे विहित अर्हताएं रखते हों

d. वे सरकारी अधिकारी हों

 

58. पुनर्विलोकन समिति का अध्यक्ष कौन हो सकता है?

a. कोई वरिष्ठ अधिवक्ता

b. कोई सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी

c. कोई व्यक्ति जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है

d. सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश ही

 

59. पुनर्विलोकन समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?

a. मुख्य न्यायमूर्ति भारत

b. संसद

c. केन्द्रीय सरकार

d. राज्य सरकार

 

60. यदि किसी आसीन उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है, तो किसकी सहमति आवश्यक है?

a. राष्ट्रपति

b. प्रधानमंत्री

c. सर्वोच्च न्यायालय

d. संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति

 

61. धारा 37 के अंतर्गत गठित पुनर्विलोकन समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. आतंकवादी मामलों का विचारण

b. अनुसूची में संगठनों को जोड़ना

c. धारा 36 के अंतर्गत नामंजूरी आदेशों का पुनर्विलोकन

d. दंड निर्धारण

 

62. पुनर्विलोकन समिति की संरचना किस उपधारा में निर्धारित है?

a. उपधारा (1)

b. उपधारा (2)

c. उपधारा (3)

d. उपधारा (4)

 

63. किसी आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 35

b. धारा 36

c. धारा 37

d. धारा 38

 

64. धारा 38(1) के अनुसार कौन-सा कृत्य अपराध माना जाएगा?

a. आतंकवादी संगठन की आलोचना करना

b. स्वयं को आतंकवादी संगठन से सहबद्ध करना

c. आतंकवादी संगठन से संपर्क रखना

d. संगठन के बारे में जानकारी रखना

 

65. निम्न में से कौन-सा कार्य भी सदस्यता से संबंधित अपराध के अंतर्गत आता है?

a. संगठन की निंदा करना

b. संगठन के विरुद्ध शिकायत करना

c. संगठन के क्रियाकलापों को अग्रसर करने के आशय से उससे सहबद्ध होने की घोषणा करना

d. संगठन पर लेख लिखना

 

66. धारा 38(1) के अंतर्गत दिया गया अपवाद कब लागू होगा?

a. जब अभियुक्त नाबालिग हो

b. जब संगठन निषिद्ध हो

c. जब अभियुक्त उपबंध (a) और (b) दोनों सिद्ध कर दे

d. जब अभियुक्त सरकारी कर्मचारी हो

 

67. अभियुक्त को यह सिद्ध करना आवश्यक है कि वह संगठन का सदस्य कब बना था?

a. जब संगठन पहली बार अस्तित्व में आया

b. जब संगठन को आतंकवादी घोषित किया गया

c. जब संगठन आतंकवादी घोषित नहीं था

d. कभी भी

 

68. धारा 38(2) के अंतर्गत कौन-सा दंड होगा?

a. पाँच वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों

b. सात वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों

c. दस वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों

d. आजीवन का कारावास या जुर्माना या दोनों

 

69. धारा 38 के अंतर्गत अपराध की प्रकृति क्या है?

a. संगठन द्वारा किया गया अपराध

b. सदस्यता से संबंधित अपराध

c. वित्तपोषण से संबंधित अपराध

d. हथियार रखने से संबंधित अपराध

 

70. किसी आतंकवादी संगठन को दिए गए समर्थन से संबंधित अपराध, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 39

b. धारा 40

c. धारा 41

d. धारा 42

 

71. धारा 39(1) के अनुसार किस कृत्य को आतंकवादी संगठन को समर्थन देना माना जाएगा?

a. संगठन की आलोचना करना

b. संगठन के लिए समर्थन आमंत्रित करना

c. संगठन से दूरी बनाना

d. संगठन के विरुद्ध गवाही देना

 

72. समर्थन आमंत्रित करने का अपराध तभी बनता है जब

a. समर्थन धन के रूप में हो

b. समर्थन गुप्त रूप से दिया गया हो

c. आतंकवादी संगठन के क्रियाकलाप को अग्रसर करने का आशय हो

d. समर्थन सार्वजनिक रूप से हो

 

73. धारा 39(1)()(ii) के अनुसार, समर्थन का कौन-सा स्वरूप इसमें शामिल है?

a. केवल धन या संपत्ति

b. केवल हथियार

c. ऐसा समर्थन जो धारा 40 के अंतर्गत धन तक सीमित हो

d. केवल वैचारिक समर्थन

 

74. निम्न में से कौन-सा कृत्य धारा 39(1)() के अंतर्गत आता है?

a. आतंकवादी संगठन की बैठक की आलोचना करना

b. आतंकवादी संगठन के समर्थन हेतु बैठक की व्यवस्था करना

c. बैठक में भाग लेने से मना करना

d. बैठक की सूचना पुलिस को देना

 

75. बैठक की व्यवस्था का अपराध तब बनेगा जब व्यक्ति यह जानता हो कि बैठक

a. सामाजिक विषय पर है

b. धार्मिक विषय पर है

c. आतंकवादी संगठन के समर्थन या क्रियाकलाप को अग्रसर करने के लिए है

d. शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है

 

76. धारा 39(1)()(iii) के अंतर्गत बैठक अपराध मानी जाएगी यदि

a. बैठक में सरकारी अधिकारी मौजूद हो

b. बैठक को किसी आतंकवादी संगठन से सहबद्ध व्यक्ति द्वारा संबोधित किया जाना हो

c. बैठक में मीडिया मौजूद हो

d. बैठक बंद कक्ष में हो

 

77. धारा 39(1)() के अंतर्गत कौन-सा कृत्य अपराध है?

a. बैठक में मौन रहना

b. बैठक में प्रश्न पूछना

c. आतंकवादी संगठन के समर्थन हेतु बैठक को संबोधित करना

d. बैठक से पहले निकल जाना

 

78. धारा 39 के अंतर्गत अपराध का मुख्य तत्व क्या है?

a. सार्वजनिक स्थान

b. धन का लेन-देन

c. आतंकवादी संगठन के क्रियाकलाप को अग्रसर करने का आशय

d. संगठन की सदस्यता

 

79. धारा 39(2) के अनुसार इस अपराध के लिए दंड क्या है?

a. पाँच वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों

b. सात वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों

c. दस वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों

d. आजीवन कारावास या जुर्माना या दोनों

 

80. किसी आतंकवादी संगठन के लिए निधि जुटाने का अपराध, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 39

b. धारा 40

c. धारा 41

d. धारा 42

 

81. धारा 40(1) के अनुसार, कौन-सा कृत्य आतंकवादी संगठन के लिए निधि जुटाने का अपराध होगा?

a. किसी संगठन की आलोचना करना

b. किसी अन्य व्यक्ति को धन या संपत्ति उपलब्ध कराने का आमंत्रण देना, यह आशय रखते हुए कि उसका उपयोग आतंकवाद के प्रयोजनों के लिए किया जाएगा

c. किसी संगठन से दूरी बनाना

d. संगठन के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट करना

 

82. धारा 40(1)() के अनुसार अपराध कब बनता है?

a. जब कोई व्यक्ति केवल धन का आकलन करता है

b. जब कोई व्यक्ति धन या अन्य संपत्ति प्राप्त करता है और आशय रखता है कि उसका उपयोग आतंकवाद के प्रयोजनों के लिए किया जाएगा

c. जब कोई व्यक्ति केवल बैठक में उपस्थित होता है

d. जब कोई व्यक्ति संगठन के लिए प्रचार करता है

 

83. धारा 40(1)() के अनुसार अपराध तब बनता है जब कोई व्यक्ति

a. धन या संपत्ति उपलब्ध कराता है, यह जानकर कि उसका उपयोग आतंकवाद के लिए होगा

b. किसी संगठन के साथ बैठक में भाग लेता है

c. संगठन को गुप्त सूचना देता है

d. संगठन की आलोचना करता है

 

84. स्पष्टीकरण के अनुसारधन या संपत्ति उपलब्ध करानामें क्या शामिल है?

a. केवल प्रत्यक्ष दान

b. उधार देना या अन्यथा उपलब्ध कराना, चाहे प्रतिफल के लिए हो या नहीं

c. केवल नकद भुगतान

d. केवल बैंक ट्रांजेक्शन

 

85. उच्च क्वालिटी की कूटकृत भारतीय करेंसी के मामले में धारा 40 क्या कहती है?

a. इसमें अपराध नहीं माना जाएगा

b. इसके निर्माण, तस्करी या परिचालन के माध्यम से निधियां जुटाना, संगृहीत करना या उपलब्ध कराना भी अपराध है

c. केवल भौतिक नोटों का उपयोग अपराध है

d. केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा का उपयोग अपराध है

 

86. धारा 40(2) के अनुसार, किसी आतंकवादी संगठन के लिए निधि जुटाने का अधिकतम कारावास कितना है?

a. 7 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

b. 10 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

c. 14 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

d. आजीवन कारावास या जुर्माना या दोनों

 

87. धारा 40(1)() के अंतर्गत अपराध की आवश्यकता क्या है?

a. धन का केवल आकलन

b. किसी अन्य व्यक्ति को आमंत्रित करना और आशय रखना कि धन आतंकवाद के लिए प्रयोग होगा

c. संगठन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखना

d. केवल बैठक में उपस्थिति

 

88. क्या यह आवश्यक है कि जुटाई गई निधि वास्तव में आतंकवादी कार्य में खर्च हो?

a. हाँ, तभी अपराध माना जाएगा

b. नहीं, आशय या संदेह का युक्तियुक्त कारण होना पर्याप्त है

c. केवल अगर धन बैंक में जमा हो

d. केवल अगर धन नकद हो

 

89. धारा 40 के अपराध में शामिल कौन-सा तत्व महत्वपूर्ण है?

a. संगठन का सदस्य होना

b. धन या संपत्ति जुटाने का उद्देश्य और इसका आतंकवाद के प्रयोजनों के लिए संभावित उपयोग

c. संगठन की बैठक में भाग लेना

d. संगठन के लिए प्रचार करना

 

90. संगम का बने रहना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 39

b. धारा 40

c. धारा 41

d. धारा 42

 

91. धारा 41 के अनुसार, किसी संगम के बारे में कब यह कहा जाएगा कि वह विद्यमान है?

a. केवल जब उसका नाम बदल दिया गया हो

b. केवल जब उसका औपचारिक पंजीकरण मौजूद हो

c. जब उसके सदस्यों के बीच उसके प्रयोजनों के लिए वास्तविक मेल बना रहता है

d. जब उसका कोई अध्यक्ष हो

 

92. संगम के विद्यमान होने का निर्धारण किन आधारों पर नहीं किया जाएगा?

a. उसके सदस्यों के बीच मेल

b. उसके औपचारिक विघटन या नाम परिवर्तन

c. उसके प्रयोजनों की पूर्ति

d. उसके संचालन के लिए बैठकें

 

93. यदि किसी संगम का केवल नाम बदल दिया गया है, तो वह संगम

a. स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा

b. विद्यमान बना रहेगा यदि सदस्यों के बीच वास्तविक मेल बना है

c. अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं होगा

d. नया संगठन मान लिया जाएगा

 

94. संगम के बने रहने का मूल आधार क्या है?

a. औपचारिक पंजीकरण

b. सदस्यों के बीच प्रयोजन के लिए वास्तविक मेल

c. संगठन के नाम की वैधता

d. संगठन के अध्यक्ष का पद

 

95. प्रत्यायोजन की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 39

b. धारा 40

c. धारा 41

d. धारा 42

 

96. धारा 42 के अनुसार, केंद्रीय सरकार किसके द्वारा शक्ति का प्रयोग करने का निदेश दे सकती है?

a. केवल न्यायालय द्वारा

b. केवल राज्य सरकार द्वारा

c. राज्य सरकार द्वारा, पूर्व अनुमोदन के साथ

d. कोई भी व्यक्ति

 

97. धारा 42 के अंतर्गत, केंद्रीय सरकार किन धाराओं के अंतर्गत प्रयोग की गई शक्तियों का राज्य सरकार को प्रत्यायोजित कर सकती है?

a. धारा 7 और धारा 8

b. धारा 5 और धारा 6

c. धारा 10 और धारा 11

d. केवल धारा 7

 

98. राज्य सरकार केंद्रीय सरकार द्वारा दी गई शक्ति का प्रयोग किसके अधीन कर सकती है?

a. केंद्रीय सरकार के अधिकारी

b. राज्य सरकार के अधीनस्थ किसी व्यक्ति

c. किसी भी नागरिक

d. केवल न्यायाधीश

 

99. धारा 42 के अनुसार, राज्य सरकार को केंद्रीय सरकार की पूर्व अनुमति क्यों आवश्यक है?

a. शक्ति का प्रयोग करने से पहले अधिसूचना जारी करने के लिए

b. राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है

c. केवल शक्ति का प्रयोग करने वाले अधिकारी का नाम जानने के लिए

d. शक्ति का प्रयोग करने के लिए न्यायालय की मंजूरी के लिए

 

100. धारा 42 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. राज्य सरकार को स्वतंत्र शक्ति प्रदान करना

b. केंद्रीय सरकार की शक्तियों का उचित और नियंत्रित प्रत्यायोजन करना

c. केवल न्यायालय को शक्ति प्रदान करना

d. किसी नागरिक को शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार देना

 

101. अध्याय 4 और अध्याय 6 अधीन अपराधों का अन्वेषण करने के लिए सक्षम प्राधिकारी, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 44

c. धारा 45

d. धारा 46

 

102. मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद के महानगर क्षेत्रों में कौन सा अधिकारी अध्याय 4 और 6 के अपराधों का अन्वेषण नहीं करेगा?

a. पुलिस आयुक्त

b. सहायक पुलिस आयुक्त से नीचे का अधिकारी

c. पुलिस उपायुक्त

d. पुलिस अधीक्षक

 

103. यदि कोई क्षेत्र खंड () या खंड () के अंतर्गत नहीं आता है, तो कौन सा अधिकारी अध्याय 4 और 6 के अपराधों का अन्वेषण नहीं कर सकता?

a. पुलिस उपाधीक्षक से नीचे का अधिकारी

b. पुलिस अधीक्षक

c. पुलिस उपायुक्त

d. पुलिस आयुक्त

 

104. धारा 43 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. सभी पुलिस अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से अपराध का अन्वेषण करने देना

b. केवल उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों को अध्याय 4 और 6 के अपराधों का अन्वेषण करने योग्य बनाना

c. न्यायालय को अपराध का अन्वेषण करने योग्य बनाना

d. किसी भी पुलिस अधिकारी को अपराध का अन्वेषण करने से रोकना

 

105. धारा 43 के अनुसारअन्वेषण योग्य प्राधिकारीकी सीमा किस आधार पर निर्धारित की गई है?

a. पुलिस अधिकारी की योग्यता

b. पुलिस अधिकारी का पद और रैंक

c. पुलिस अधिकारी का अनुभव

d. पुलिस अधिकारी का स्थान

 

106. कौन सा अधिकारी अध्याय 4 और 6 के अपराधों का अन्वेषण कर सकता है यदि वह दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना में है?

a. पुलिस उपायुक्त या उससे ऊपर की पंक्ति का अधिकारी

b. पुलिस अधिकारी, जो पुलिस उपायुक्त से नीचे की पंक्ति का है

c. सहायक पुलिस आयुक्त

d. कोई भी पुलिस अधिकारी

 

107. महानगर क्षेत्रों में सहायक पुलिस आयुक्त से नीचे के अधिकारी अध्याय 4 और 6 के अपराधों का अन्वेषण क्यों नहीं कर सकते?

a. उन्हें इसके लिए प्रशिक्षण नहीं दिया गया

b. उनके पास कानूनी अधिकार नहीं हैं

c. वे उच्च न्यायालय के निर्देश के अधीन नहीं हैं

d. पुलिस अधीक्षक उन्हें अनुमति नहीं देता

 

108. गिरफ्तार करने, तलाशी लेने, आदि की शक्ति, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 44

d. धारा 45

 

109. धारा 43 के अनुसार, अभिहित प्राधिकारी किस प्रकार के अधिकारी को गिरफ्तार करने या तलाशी लेने की शक्ति दे सकता है?

a. कोई भी नागरिक

b. अधीनस्थ कोई अधिकारी जिसे सशक्त किया गया हो

c. केवल पुलिस अधीक्षक

d. केवल न्यायाधीश

 

110. धारा 43 के अंतर्गत अभिहित प्राधिकारी किन आधारों पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है?

a. व्यक्तिगत झगड़े के कारण

b. व्यक्तिगत जानकारी या लिखित सूचना पर विश्वास करने का कारण

c. केवल सार्वजनिक शिकायत के आधार पर

d. किसी भी व्यक्ति पर संदेह होने पर

 

111. धारा 43 के अनुसार तलाशी लेने की शक्ति किन स्थानों पर लागू होती है?

a. केवल घर

b. भवन, वाहन या किसी अन्य स्थान

c. केवल कार्यालय

d. केवल सार्वजनिक स्थल

 

112. इस धारा के अनुसार तलाशी या गिरफ्तारी दिन में ही संभव है या रात में भी?

a. केवल दिन में

b. केवल रात में

c. दिन या रात दोनों में

d. केवल सरकारी छुट्टियों में

 

113. धारा 43 के अंतर्गत तलाशी या गिरफ्तारी करने का उद्देश्य क्या है?

a. किसी व्यक्ति को धमकाना

b. अपराध की योजना, दंडनीय अपराध या अवैध संपत्ति से संबंधित वस्तुओं की जांच करना

c. केवल दस्तावेजों को नष्ट करना

d. किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति को कब्ज़ा करना

 

114. तलाशी या गिरफ्तारी का अधिकार अभिहित प्राधिकारी को किसके आदेश से मिलता है?

a. केवल न्यायालय के आदेश से

b. केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के साधारण या विशेष आदेश से

c. किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मौखिक आदेश से

d. नागरिक की शिकायत से

 

115. धारा 43 के अनुसार अभिहित प्राधिकारी क्या कर सकता है?

a. केवल अपने अधीनस्थ अधिकारी को शक्ति प्रदान करना

b. स्वयं किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना और किसी भवन, वाहन या स्थान की तलाशी लेना

c. केवल दस्तावेज़ को जब्त करना

d. केवल सूचना दर्ज करना

 

116. गिरफ्तारी, अभिग्रहण, आदि की प्रक्रिया, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 43

d. धारा 45

 

117. धारा 43(1) के अनुसार, धारा 43 के अधीन गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को क्या बताया जाना अनिवार्य है?

a.केवल उसका अपराध

b. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों की सूचना दी जानी अनिवार्य है

c. न्यायालय की अगली तिथि

d. दंड की अवधि

 

118. धारा 43 के अनुसार गिरफ्तारी के बाद सूचना देने का समय क्या होना चाहिए?

a. 24 घंटे के भीतर

b. यथासंभव शीघ्र गिरफ्तारी के आधारों की सूचना दी जानी चाहिए

c. मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होने पर

d. पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने पर

 

119. धारा 43 के अधीन गिरफ्तार व्यक्ति को किसके पास भेजा जाना आवश्यक है?

a. विशेष न्यायालय

b. जिला मजिस्ट्रेट

c. निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी

d. राज्य सरकार

 

120. धारा 43(2) के अनुसार अभिगृहीत वस्तु के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?

a. तुरंत नष्ट कर दी जाएगी

b. न्यायालय में सीधे पेश की जाएगी

c. निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को अग्रेषित की जाएगी

d. राज्य सरकार को भेजी जाएगी

 

121. धारा 43(3) के अनुसार, पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी क्या करेगा?

a. केवल रोजनामचा में प्रविष्टि करेगा

b. दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंधों के अनुसार आवश्यक उपाय करेगा

c. व्यक्ति को तुरंत रिहा कर देगा

d. मामला बंद कर देगा

 

122. धारा 43 के अंतर्गतअनावश्यक विलंबका क्या आशय है?

a. प्रशासनिक सुविधा के अनुसार देरी

b. जानबूझकर की गई देरी

c. बिना उचित कारण के देरी

d. न्यायालय के आदेश से देरी

 

123. धारा 43 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. केवल गिरफ्तारी को वैध बनाना

b. गिरफ्तारी और अभिग्रहण के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया सुनिश्चित करना

c. पुलिस को असीमित शक्ति देना

d. न्यायालय की भूमिका समाप्त करना

 

124. दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंधों का लागू होना, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 43

d. धारा 43

 

125. धारा 43 के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंध कब लागू होंगे?

a. प्रत्येक स्थिति में बिना अपवाद

b. केवल न्यायालय की अनुमति से

c. जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों के असंगत हों

d. केवल तलाशी के मामलों में

 

126. धारा 43 के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के उपबंध किन कार्यवाहियों पर लागू होते हैं?

a. केवल गिरफ्तारियों पर

b. केवल तलाशियों पर

c. केवल अभिग्रहणों पर

d. गिरफ्तारियों, तलाशियों और अभिग्रहणों पर

 

127. धारा 43 मेंअसंगतहोने का क्या प्रभाव है?

a. संहिता पूरी तरह निरस्त हो जाती है

b. केवल अधिनियम के उपबंध लागू होते हैं

c. दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के जो उपबंध इस अधिनियम से असंगत हैं, वे लागू नहीं होंगे

d. दोनों कानून एक साथ लागू होंगे

 

128. धारा 43 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. संहिता को पूर्णतः समाप्त करना

b. केवल विशेष प्रक्रिया लागू करना

c. सामान्य आपराधिक प्रक्रिया को पूरक रूप से लागू करना

d. पुलिस शक्तियों को सीमित करना

 

129. यदि इस अधिनियम में किसी विषय पर विशेष प्रावधान है और दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में भिन्न प्रावधान है, तो कौन प्रभावी होगा?

a. संहिता का प्रावधान

b. राज्य सरकार का आदेश

c. इस अधिनियम का प्रावधान प्रभावी होगा

d. न्यायालय का विवेक

 

130. धारा 43 के अनुसार, क्या संहिता स्वतः ही सभी मामलों में लागू हो जाती है?

a. हाँ, बिना किसी शर्त के

b. नहीं, केवल न्यायालय के आदेश से

c. नहीं, केवल वहीं जहां असंगति हो

d. केवल गिरफ्तारी के मामलों में

 

131. धारा 43 के अनुसार, इस अधिनियम के अंतर्गत की गई तलाशी पर कौन-सा कानून लागू होगा?

a. केवल यह अधिनियम

b. केवल दंड प्रक्रिया संहिता

c. यह अधिनियम तथा दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023), जहां तक वे असंगत हों

d. केवल राज्य पुलिस नियम

 

132. दंड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के कतिपय उपबंधों का उपातंरित रूप में लागू होना, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 43

d. धारा 43

 

133. धारा 43(1) के अनुसार इस अधिनियम के अधीन दंडनीय प्रत्येक अपराध किस श्रेणी का माना जाएगा?

a. असंज्ञेय अपराध

b. जमानतीय अपराध

c. संज्ञेय अपराध

d. समन अपराध

 

134. धारा 43(1) के अनुसारसंज्ञेय अपराधकी परिभाषा किस धारा के अनुसार होगी?

a. संहिता की धारा 41(भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 45)

b. संहिता की धारा 154(भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 54)

c. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2 का खंड () (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 20(1) का खंड ()

d. संहिता की धारा 167(भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 66)

 

135. धारा 43(2) के अंतर्गत किस धारा को उपांतरण सहित लागू किया गया है?

a. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 180)

b. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 193)

c. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 187)

d. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 190 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 210)

 

136. धारा 43(2)() के अनुसार संहिता में उल्लिखित15 दिनको किस रूप में पढ़ा जाएगा?

a. 15 दिन

b. 30 दिन

c. 60 दिन

d. 90 दिन

 

137. धारा 43(2)() के अनुसार संहिता में उल्लिखित90 दिनको किस रूप में पढ़ा जाएगा?

a. 15 दिन

b. 30 दिन

c. 60 दिन

d. 90 दिन

 

138. धारा 43(2)() के अनुसार60 दिनका अर्थ क्या होगा?

a. 60 दिन

b. 75 दिन

c. 90 दिन

d. 180 दिन

 

139. धारा 43 के अनुसार अन्वेषण की अवधि अधिकतम कितने दिनों तक बढ़ाई जा सकती है?

a. 90 दिन

b. 120 दिन

c. 150 दिन

d. 180 दिन

 

140. 90 दिनों से अधिक अवधि बढ़ाने के लिए न्यायालय को किस रिपोर्ट से संतुष्ट होना आवश्यक है?

a. अन्वेषण अधिकारी की रिपोर्ट

b. लोक अभियोजक की रिपोर्ट

c. पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट

d. मजिस्ट्रेट की टिप्पणी

 

141. लोक अभियोजक की रिपोर्ट में मुख्य रूप से क्या दर्शाया जाना आवश्यक है?

a. अभियुक्त का आपराधिक इतिहास

b. गवाहों की संख्या

c. अन्वेषण की प्रगति और अतिरिक्त निरुद्धि के कारण

d. अभियोजन की अंतिम राय

 

142. न्यायिक अभिरक्षा से पुलिस अभिरक्षा मांगे जाने पर पुलिस अधिकारी को क्या दाखिल करना अनिवार्य है?

a. प्राथमिकी

b. चार्जशीट

c. शपथपत्र

d. अनुमति पत्र

 

143. धारा 43(3) के अंतर्गत संहिता की कौन-सी धारा उपांतरण सहित लागू होती है?

a. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 268 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 303)

b. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 193)

c. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 187)

d. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 190 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 210)

144. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 268 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 303) मेंराज्य सरकारशब्द का अर्थ धारा 43 के अनुसार क्या होगा?

a. केवल राज्य सरकार

b. केवल केन्द्रीय सरकार

c. केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार

d. गृह मंत्रालय

 

145. धारा 43(4) के अनुसार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 482) किस पर लागू नहीं होगी?

a. साधारण अपराध

b. आर्थिक अपराध

c. इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध

d. जमानतीय अपराध

 

146. धारा 43(5) के अनुसार जमानत देने से पहले किसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है?

a. अभियुक्त

b. अन्वेषण अधिकारी

c. लोक अभियोजक

d. शिकायतकर्ता

 

147. न्यायालय जमानत से इंकार करेगा यदि उसे यह राय बने कि

a. अभियुक्त प्रभावशाली है

b. अपराध गंभीर है

c. अभियोग प्रथमदृष्ट्या सही है

d. अन्वेषण लंबित है

 

148. धारा 43(7) के अनुसार अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले विदेशी अभियुक्त को जमानत कब दी जा सकती है?

a. सामान्य परिस्थितियों में

b. केवल चिकित्सा आधार पर

c. अतिआपवादिक परिस्थितियों में, कारण लेखबद्ध करके

d. मजिस्ट्रेट के विवेक से

 

149. धारा 15 के अधीन अपराधों के बारे में उपधारणा, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 43

d. धारा 43

 

150. धारा 43 के अनुसार उपधारणा किस धारा के अधीन अपराधों के संबंध में की जाती है?

a. धारा 14

b. धारा 15

c. धारा 16

d. धारा 17

 

151. धारा 43 के अनुसार अभियोजन में उपधारणा कब की जाएगी?

a. केवल अभियुक्त के स्वीकार करने पर

b. केवल प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य होने पर

c. जब उपधारा में वर्णित तथ्य सिद्ध हो जाएं

d. केवल पुलिस रिपोर्ट पर

 

152. यदि अभियुक्त के कब्जे से कौन-सी वस्तु बरामद होने पर उपधारणा की जा सकती है?

a. चोरी की संपत्ति

b. आयुध या विस्फोटक या अन्य पदार्थ

c. दस्तावेज

d. नकद धन

 

153. धारा 43() के अनुसार उपधारणा के लिए क्या आवश्यक है?

a. केवल बरामदगी

b. केवल अभियुक्त का बयान

c. यह विश्वास करने का कारण कि पदार्थ अपराध में प्रयुक्त हुए

d. न्यायालय की अनुमति

 

154. धारा 43() के अनुसार निम्न में से कौन-सा साक्ष्य उपधारणा का आधार बन सकता है?

a. सह-अभियुक्त का बयान

b. परिस्थितिजन्य साक्ष्य

c. अंगुली छाप या अन्य निश्चित साक्ष्य

d. गुप्त सूचना

 

155. अभियुक्त की अंगुली छाप कहां पाए जाने पर उपधारणा की जा सकती है?

a. केवल अभियुक्त के घर पर

b. केवल पुलिस थाने में

c. अपराध स्थल या संबंधित वस्तु पर

d. न्यायालय अभिलेख पर

 

156. धारा 43 के अनुसार किस प्रकार का साक्ष्यनिश्चित साक्ष्यमाना जाएगा?

a. अनुमान पर आधारित साक्ष्य

b. विशेषज्ञ द्वारा दिया गया साक्ष्य

c. अफवाह

d. मीडिया रिपोर्ट

 

157. आयुध या यान (वाहन) पर अभियुक्त की अंगुली छाप मिलने पर क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

a. कोई निष्कर्ष नहीं

b. केवल संदेह

c. अपराध में अंतर्वलित होने की उपधारणा

d. स्वतः दोषसिद्धि

 

158. धारा 43 के अंतर्गत की गई उपधारणा किस प्रकृति की होती है?

a. अंतिम और अनिवार्य

b. अपरिवर्तनीय

c. प्रतिकूल सिद्ध होने तक लागू

d. केवल प्रारंभिक

 

159. अभियुक्त धारा 43 के अंतर्गत की गई उपधारणा को कैसे खंडित कर सकता है?

a. मौन रहकर

b. दोष स्वीकार करके

c. प्रतिकूल तथ्य प्रस्तुत करके

d. केवल अपील करके

 

160. सूचना देने की बाध्यत्ता, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 43

b. धारा 43

c. धारा 43

d. धारा 43

 

161. धारा 43 के अंतर्गत सूचना मांगने का अधिकार किसे है?

a. कोई भी पुलिस अधिकारी

b. अन्वेषण अधिकारी

c. मजिस्ट्रेट

d. लोक अभियोजक

 

162. धारा 43 के अनुसार सूचना मांगने से पूर्व किस अधिकारी का लिखित अनुमोदन आवश्यक है?

a. थाना प्रभारी

b. पुलिस उप अधीक्षक

c. पुलिस अधीक्षक से अनिम्न पंक्ति का अधिकारी

d. जिला मजिस्ट्रेट

 

163. अन्वेषण अधिकारी किससे सूचना देने की अपेक्षा कर सकता है?

a. केवल केन्द्रीय सरकार से

b. केवल बैंक से

c. किसी प्राधिकारी, संस्था या व्यक्ति से

d. केवल राज्य सरकार से

 

164. धारा 43(1) के अनुसार सूचना मांगने का आधार क्या होना चाहिए?

a. केवल संदेह

b. लिखित शिकायत

c. यह विश्वास करने का कारण कि सूचना उपयोगी या सुसंगत है

d. न्यायालय का आदेश

 

165. धारा 43 के अंतर्गत किस प्रकार की जानकारी मांगी जा सकती है?

a. केवल व्यक्तिगत जानकारी

b. केवल गोपनीय दस्तावेज

c. अपराध से संबंधित उसके कब्जे की जानकारी

d. केवल वित्तीय विवरण

 

166. धारा 43(2) के अनुसार अधिकतम कारावास की अवधि कितनी हो सकती है?

a. एक वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

b. दो वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

c. तीन वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

d. पाँच वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

 

167. जानबूझकर मिथ्या जानकारी देने पर कौन-सा परिणाम होगा?

a. विभागीय कार्यवाही

b. अवमानना

c. धारा 43(2) के अंतर्गत दंड

d. केवल सूचना रद्द

 

168. धारा 43(2) के अधीन अपराध का विचारण किस प्रकार किया जाएगा?

a. सत्र विचारण

b. समन मामला

c. संक्षिप्त मामला

d. विशेष न्यायालय द्वारा

 

169. धारा 43(3) के अनुसार विचारण में दंड प्रक्रिया संहिता(भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) का कौन-सा अध्याय लागू होगा?

a. दंड प्रक्रिया संहिता का अध्याय 12 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का अध्याय 13)

b. दंड प्रक्रिया संहिता का अध्याय 18 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का अध्याय 19)

c. दंड प्रक्रिया संहिता का अध्याय 21 (धारा 262(2) को छोड़कर) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का अध्याय 22 (धारा 285(2) को छोड़कर)

d. दंड प्रक्रिया संहिता का अध्याय 23 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का अध्याय 24)

 

170. साक्षियों का संरक्षण, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 44

b. धारा 45

c. धारा 46

d. धारा 47

 

171. धारा 44(1) के अनुसार इस अधिनियम के अधीन कार्यवाहियां किस प्रकार की जा सकती हैं?

a. खुले न्यायालय में अनिवार्य रूप से

b. केवल विशेष न्यायालय में

c. न्यायालय की इच्छा से बंद कमरे में

d. केवल दिन के समय

 

172. धारा 44(1) के अंतर्गत बंद कमरे में कार्यवाही करने के लिए क्या आवश्यक है?

a. अभियुक्त की सहमति

b. लोक अभियोजक का अनुरोध

c. लिखित में कारणों का अभिलेखन

d. राज्य सरकार की अनुमति

 

173. धारा 44(2) के अनुसार साक्षी की पहचान गुप्त रखने का आदेश कब दिया जा सकता है?

a. जब अभियुक्त अनुरोध करे

b. जब साक्षी का जीवन खतरे में हो

c. प्रत्येक मामले में अनिवार्य रूप से

d. केवल अपील के समय

 

174. धारा 44(2) के अंतर्गत न्यायालय किसके आवेदन पर कार्यवाही कर सकता है?

a. केवल अभियुक्त के आवेदन पर

b. केवल जांच अधिकारी के आवेदन पर

c. साक्षी, लोक अभियोजक के आवेदन पर या स्वप्रेरणा से

d. केवल राज्य सरकार के आवेदन पर

 

175. धारा 44(3) के अंतर्गत निम्न में से कौन-सा उपाय न्यायालय कर सकता है?

a. साक्षी को माफ कर देना

b. कार्यवाही का स्थान स्वयं निर्धारित करना

c. अभियुक्त को अनुपस्थित रखना

d. मामले को स्थगित करना

 

176. धारा 44(3)() के अनुसार न्यायालय किससे बच सकता है?

a. अभियुक्त का नाम प्रकाशित करने से

b. साक्षियों के नाम और पते के उल्लेख से

c. निर्णय लिखने से

d. अभियोजन साक्ष्य से

 

177. धारा 44(3)() के अनुसार न्यायालय किस स्थिति में प्रकाशन पर रोक लगा सकता है?

a. जब अभियुक्त फरार हो

b. जब साक्ष्य कमजोर हो

c. जब लोक हित में ऐसा करना आवश्यक हो

d. जब मीडिया अनुरोध करे

 

178. धारा 44(4) के अनुसार उपधारा (3) के आदेशों का उल्लंघन करने पर अधिकतम कितनी सजा हो सकती है?

a. एक वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों

b. दो वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों

c. तीन वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों

d. पाँच वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों

 

179. अपराधों का संज्ञान, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 44

b. धारा 45

c. धारा 46

d. धारा 47

 

180. धारा 45(1) के अनुसार न्यायालय किस स्थिति में किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा?

a. आरोप पत्र दायर होने पर

b. बिना पूर्व मंजूरी के

c. अभियुक्त की अनुपस्थिति में

d. साक्ष्य के अभाव में

 

181. अध्याय 3 के अधीन अपराधों के लिए पूर्व मंजूरी किससे आवश्यक है?

a. राज्य सरकार से

b. जिला मजिस्ट्रेट से

c. केन्द्रीय सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी से

d. पुलिस महानिदेशक से

 

182. अध्याय 4 और अध्याय 6 के अधीन अपराधों के लिए सामान्यतः किसकी पूर्व मंजूरी आवश्यक है?

a. केवल राज्य सरकार

b. केवल केन्द्रीय सरकार

c. केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार

d. उच्च न्यायालय

 

183. यदि अध्याय 4 या 6 के अंतर्गत अपराध किसी विदेशी सरकार के विरुद्ध किया गया हो, तो पूर्व मंजूरी किससे आवश्यक होगी?

a. राज्य सरकार से

b. केन्द्रीय सरकार से

c. विदेशी सरकार से

d. विशेष न्यायालय से

 

184. धारा 45(1) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. अभियुक्त को संरक्षण देना

b. मनमाने अभियोजन को रोकना

c. न्यायालय की शक्तियों को बढ़ाना

d. जांच प्रक्रिया को समाप्त करना

 

185. धारा 45(2) के अनुसार अभियोजन की मंजूरी किस आधार पर दी जाएगी?

a. पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर

b. जांच अधिकारी की सिफारिश पर

c. नियुक्त प्राधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात्

d. अभियुक्त के बयान पर

 

186. धारा 45(2) के अंतर्गत नियुक्त प्राधिकारी का मुख्य कार्य क्या है?

a. अभियुक्त को गिरफ्तार करना

b. साक्षियों का परीक्षण करना

c. जांच में एकत्रित साध्य का स्वतंत्र पुनर्विलोकन करना

d. न्यायालय को निर्देश देना

 

187. नियुक्त प्राधिकारी किसे सिफारिश करता है?

a. न्यायालय को

b. लोक अभियोजक को

c. केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को

d. जांच अधिकारी को

 

188. धारा 45(2) के अनुसार अभियोजन की मंजूरी कब दी जाएगी?

a. अनिश्चित समय पर

b. न्यायालय के आदेश से

c. विहित समय-सीमा के भीतर

d. अभियुक्त की सहमति से

 

189. धारा 45 के अंतर्गतपूर्व मंजूरीकी व्यवस्था किस चरण से संबंधित है?

a. जांच से पहले

b. गिरफ्तारी से पहले

c. न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने से पहले

d. सजा सुनाए जाने से पहले

 

190. संसूचनाओं के अंतर्रोधन के माध्यम से संगृहीत साक्ष्य की ग्राह्यता, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 44

b. धारा 45

c. धारा 46

d. धारा 47

 

191. धारा 46 के अनुसार अंतर्रोधित संसूचना से प्राप्त साक्ष्य किसके बावजूद ग्राह्य होगा?

a. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

c. संविधान

d. पुलिस अधिनियम, 1861

 

192. धारा 46 के अंतर्गत किस प्रकार की संसूचना के अंतर्रोधन से संगृहीत साक्ष्य ग्राह्य है?

a. केवल मौखिक

b. केवल तार

c. तार, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक

d. केवल इलेक्ट्रॉनिक

 

193. अंतर्रोधन किन अधिनियमों के उपबंधों के अधीन किया गया होना चाहिए?

a. केवल भारतीय तार अधिनियम, 1885

b. केवल सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

c. दोनों या तत्समय प्रवृत्त कोई अन्य विधि

d. दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

 

194. अंतर्रोधित संसूचना से प्राप्त साक्ष्य किसके विरुद्ध प्रयोग किया जा सकता है?

a. गवाह

b. लोक अभियोजक

c. अभियुक्त

d. जांच अधिकारी

 

195. अंतर्रोधित संसूचना की अंतर्वस्तु को साक्ष्य में लेने से पूर्व अभियुक्त को क्या दिया जाना आवश्यक है?

a. आरोप पत्र

b. पुलिस रिपोर्ट

c. सक्षम प्राधिकारी के आदेश की प्रति

d. न्यायालय का आदेश

 

196. सक्षम प्राधिकारी के आदेश की प्रति अभियुक्त को कितने समय पूर्व दी जानी चाहिए?

a. 7 दिन

b. 15 दिन

c. 10 दिन

d. 30 दिन

 

197. दस दिन की अवधि के अधित्याग के लिए न्यायाधीश को किस बात से संतुष्ट होना आवश्यक है?

a. अभियुक्त दोषी है

b. अभियोजन का अनुरोध है

c. विलंब से अभियुक्त पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

d. जांच पूरी हो चुकी है

 

198. धारा 46 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. जांच को गोपनीय बनाना

b. अभियुक्त को सजा दिलाना

c. अंतर्रोधित संसूचना से प्राप्त साक्ष्य को वैध बनाना

d. पुलिस शक्तियों को सीमित करना

 

199. धारा 46 के अंतर्गत साक्ष्य किस चरण में ग्राह्य होगा?

a. जांच के दौरान

b. अभियोजन स्वीकृति के समय

c. मामले के विचारण के दौरान

d. सजा निर्धारण के समय

 

200. अधिकारिता का वर्जन, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 44

b. धारा 45

c. धारा 46

d. धारा 47

 

201. धारा 47 का मुख्य विषय क्या है?

a. जमानत

b. साक्ष्य की ग्राह्यता

c. सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन

d. गिरफ्तारी की शक्ति

 

202. धारा 47(1) के अनुसार किसके द्वारा की गई कार्यवाही को सिविल न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकता?

a. केवल केन्द्रीय सरकार

b. केवल जिला मजिस्ट्रेट

c. न्द्रीय सरकार, जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

d. किसी भी पुलिस अधिकारी

 

203. धारा 47(1) के अंतर्गत किस रूप में कार्यवाही को चुनौती नहीं दी जा सकती?

a. केवल वाद

b. केवल अपील

c. केवल पुनरीक्षण

d. वाद, आवेदन, अपील अथवा पुनरीक्षण

 

204. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाही के संबंध में सिविल न्यायालय क्या नहीं कर सकता?

a. साक्ष्य ग्रहण

b. आदेश की समीक्षा

c. कोई व्यादेश (Injunction) मंजूर करना

d. अभियुक्त को तलब करना

 

205. धारा 47(1) के अनुसार सिविल न्यायालय द्वारा व्यादेश किस स्थिति में भी नहीं दिया जाएगा?

a. जब कार्यवाही अवैध हो

b. जब कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण हो

c. इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्ति के अनुसरण में की गई कार्यवाही पर

d. जब अभियुक्त आवेदन करे

 

206. धारा 47(2) किस धारा से संबंधित मामलों में सिविल न्यायालय की अधिकारिता को स्पष्ट रूप से वर्जित करती है?

a. धारा 15

b. धारा 36

c. धारा 43

d. धारा 45

 

207. धारा 47(2) के अनुसार धारा 36 के मामलों में कौन अधिकारिता या शक्तियां नहीं रखेगा?

a. केवल सिविल न्यायालय

b. केवल अन्य प्राधिकारी

c. सिविल न्यायालय या अन्य कोई प्राधिकारी

d. केवल उच्च न्यायालय

 

208. धारा 47 का प्रभाव किस प्रकार की कार्यवाही पर लागू होता है?

a. केवल भविष्य की

b. केवल पूर्व की

c. की गई या की जाने वाली दोनों कार्यवाहियों पर

d. केवल न्यायालयीन कार्यवाही पर

 

209. अन्य अधिनियमितियों से असंगत अधिनियम और नियमों आदि का प्रभाव, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 48

b. धारा 49

c. धारा 50

d. धारा 51

 

210. धारा 48 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. जमानत की प्रक्रिया बताना

b. साक्ष्य की ग्राह्यता तय करना

c. इस अधिनियम को अन्य अधिनियमों पर प्रधानता देना

d. अपराधों का वर्गीकरण करना

 

211. धारा 48 के अनुसार किसके उपबंध प्रभावी होंगे?

a. केवल अन्य अधिनियमों के

b. केवल संविधान के

c. इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों/आदेशों के

d. केवल न्यायालय के आदेशों के

 

212. धारा 48 मेंअसंगतशब्द का तात्पर्य क्या है?

a. समान प्रावधान

b. विरोधाभासी प्रावधान

c. सहायक प्रावधान

d. वैकल्पिक प्रावधान

 

213. धारा 48 के अनुसार किसके होते हुए भी इस अधिनियम के उपबंध प्रभावी होंगे?

a. संविधान

b. न्यायिक निर्णय

c. किसी अन्य अधिनियम या लिखत में अंतर्विष्ट बात

d. कार्यपालिका के निर्देश

 

214. “इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के फलस्वरूप प्रभाव रखने वाली लिखतसे क्या अभिप्राय है?

a. केवल सरकारी अधिसूचना

b. केवल न्यायालयीन आदेश

c. किसी अन्य अधिनियम के कारण प्रभावी दस्तावेज

d. निजी अनुबंध

 

215. धारा 48 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. प्राकृतिक न्याय

b. अधिरोहण (Overriding effect)

c. प्रत्यायोजन

d. विवेकाधिकार

 

216. धारा 48 का प्रभाव किस प्रकार के आदेशों पर भी लागू होता है?

a. केवल न्यायिक

b. केवल प्रशासनिक

c. इस अधिनियम के अधीन किए गए आदेशों पर

d. केवल संवैधानिक

 

217. धारा 48 का व्यावहारिक प्रभाव क्या है?

a. अन्य सभी अधिनियम निरस्त हो जाते हैं

b. इस अधिनियम को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलती है

c. न्यायालय की भूमिका समाप्त हो जाती है

d. अभियोजन असंभव हो जाता है

 

218. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 48

b. धारा 49

c. धारा 50

d. धारा 51

 

219. धारा 49 के अनुसार किसके विरुद्ध कोई वाद या अभियोजन नहीं होगा?

a. केवल केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध

b. केवल राज्य सरकार के विरुद्ध

c. अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक कार्य करने वालों के विरुद्ध

d. सभी सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध

 

220. “सद्भावपूर्वकशब्द का अर्थ क्या है?

a. लापरवाही से किया गया कार्य

b. दुर्भावना से किया गया कार्य

c. ईमानदार एवं नेकनीयत से किया गया कार्य

d. दबाव में किया गया कार्य

 

221. धारा 49 के अंतर्गत संरक्षण किस प्रकार की कार्रवाई को प्राप्त है?

a. अवैध कार्रवाई

b. व्यक्तिगत विवाद की कार्रवाई

c. अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियम/आदेश के अनुसरण में की गई कार्रवाई

d. न्यायालय के आदेश के विरुद्ध की गई कार्रवाई

 

222. धारा 49() के अंतर्गत संरक्षण किन व्यक्तियों को प्राप्त है?

a. केवल जिला मजिस्ट्रेट

b. केवल केन्द्रीय सरकार

c. केन्द्रीय/राज्य सरकार तथा उनके अधिकारी या प्राधिकारी

d. केवल निजी व्यक्ति

 

223. धारा 49() के अनुसार किसे संरक्षण प्राप्त है?

a. केवल पुलिस अधिकारियों को

b. आतंकवाद विरोधी संक्रिया में सशस्त्र/अर्द्धसैनिक बलों के सदस्यों को

c. केवल न्यायाधीशों को

d. केवल खुफिया एजेंसियों को

 

224. क्या सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के सदस्यों को भी धारा 49 के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त है?

a. नहीं

b. केवल विशेष अनुमति से

c. हाँ, यदि कार्रवाई सद्भावपूर्वक की गई हो

d. केवल सेवा काल में की गई कार्रवाई के लिए

 

225. “आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए निदेशित संक्रियासे क्या अभिप्राय है?

a. सामान्य पुलिस कार्रवाई

b. न्यायिक कार्यवाही

c. आतंकवाद विरोधी सैन्य या सुरक्षा अभियान

d. प्रशासनिक बैठक

 

226. धारा 49 के अंतर्गत कौन-सी कार्यवाही वर्जित है?

a. अनुशासनात्मक कार्यवाही

b. वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही

c. विभागीय जांच

d. न्यायिक पुनरीक्षण

 

227. यदि कोई अधिकारी दुर्भावना से कार्य करता है, तो क्या धारा 49 का संरक्षण मिलेगा?

a. हाँ, हमेशा

b. नहीं

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

228. व्यावृत्ति, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 48

b. धारा 49

c. धारा 50

d. धारा 51

 

229. धारा 50 के अनुसार इस अधिनियम का प्रभाव किस पर नहीं पड़ेगा?

a. केंद्रीय और राज्य पुलिस अधिकारियों पर

b. नौसेना, सेना, वायु सेना या अन्य सशस्त्र बलों के न्यायालय या अन्य प्राधिकारी और उनकी प्रक्रिया पर

c. नागरिक न्यायालयों पर

d. राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों पर

 

230. अधिनियम के अधीन आरोपित व्यक्ति के पासपोर्ट और आयुध अनुज्ञप्ति का परिबद्ध किया जाना, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 48

b. धारा 49

c. धारा 50

d. धारा 51

 

231. धारा 51 के अनुसार किसी आरोपित व्यक्ति के पासपोर्ट और आयुध अनुज्ञप्ति पर क्या कार्रवाई की जा सकती है?

a. उन्हें हमेशा रद्द कर दिया जाएगा।

b. उन्हें किसी भी अवधि के लिए न्यायालय के अनुसार परिबद्ध किया जा सकता है।

c. केवल राज्य सरकार के आदेश से परिबद्ध किया जा सकता है।

d. केवल केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी से परिबद्ध किया जा सकता है।

 

232. धारा 51 के अंतर्गत परिबंध किसके लिए लागू होता है?

a. किसी भी नागरिक के लिए

b. केवल पुलिस अधिकारियों के लिए

c. जिसे इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किए जाने के लिए आरोपित किया गया है

d. केवल आतंकवाद विरोधी एजेंसियों के कर्मचारियों के लिए

 

233. धारा 51 के अनुसार पासपोर्ट और आयुध अनुज्ञप्ति के परिबंध का अधिकार किसके पास है?

a. राज्य सरकार

b. केंद्रीय गृह मंत्रालय

c. न्यायालय

d. लोक अभियोजक

 

234. धारा 51 मेंपरिबद्धकरने का अर्थ क्या है?

a. पासपोर्ट और आयुध अनुज्ञप्ति का हमेशा रद्द होना

b. पासपोर्ट और आयुध अनुज्ञप्ति का सीमित अवधि के लिए प्रयोग होने देना

c. पासपोर्ट का सिर्फ अवलोकन करना

d. आयुध अनुज्ञप्ति को संशोधित करना

 

235. धारा 51 के अनुसार अन्य विधियों में अंतर्विष्ट प्रावधानों का प्रभाव क्या होगा?

a. इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन कार्यवाही पर असर नहीं पड़ेगा

b. अन्य विधियों का उल्लंघन होगा

c. केवल राज्य विधियों का पालन करना होगा

d. पासपोर्ट रद्द करने का आदेश स्वतः लागू होगा

 

236. केन्द्रीय सरकार की कतिपय शक्तियां, किस धारा में परिभाषित हैं?

a. धारा 48

b. धारा 49

c. धारा 50

d. धारा 51

 

237. धारा 51 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन व्यक्तियों या संस्थाओं के लिए निधियों और अन्य वित्तीय आस्तियों पर रोक, कुर्की या अभिग्रहण कर सकती है?

a. केवल सरकारी अधिकारी

b. केवल न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति

c. आदेश की अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्तियों या आतंकवाद में लगे या संदिग्ध व्यक्ति

d. किसी भी व्यक्ति

 

238. धारा 51 के अनुसार किसी व्यक्ति को वित्तीय संसाधनों के उपयोग से रोकने का तरीका क्या है?

a. केवल बैंक खाता फ्रीज करके

b. निधियों, वित्तीय आस्तियों, आर्थिक संसाधनों और संबद्ध सेवाओं को उपलब्ध कराने से रोककर

c. केवल आयकर रोक लगाकर

d. केवल विदेश यात्रा प्रतिबंध लगाकर

 

239. धारा 51 के अंतर्गत केन्द्रीय सरकार किन व्यक्तियों को भारत में प्रवेश करने या भारत से बाहर जाने से रोक सकती है?

a. किसी भी नागरिक को

b. केवल न्यायालय द्वारा आरोपित व्यक्ति

c. आदेश की अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्तियों या आतंकवाद में लगे या संदिग्ध व्यक्ति

d. केवल विदेशी नागरिक

 

240. धारा 51 के अनुसार केन्द्रीय सरकार की शक्तियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

a. केवल वित्तीय निगरानी करना

b. आतंकवादी क्रियाकलापों का निवारण और उनका मुकाबला करना

c. विदेशी निवेश पर नियंत्रण करना

d. राज्य सरकारों के वित्तीय अधिकारों को नियंत्रित करना

 

241. धारा 51 के अनुसार केन्द्रीय सरकार किन संसाधनों पर कार्रवाई कर सकती है?

a. केवल नकद राशि

b. केवल जमीनी संपत्ति

c. निधियाँ, वित्तीय आस्तियाँ, आर्थिक संसाधन और संबद्ध सेवाएँ

d. केवल बैंक खातों में जमा धन

 

242. धारा 51 के अंतर्गत रोक और कुर्की का आदेश किसके लिए जारी किया जा सकता है?

a. केवल किसी सरकारी संगठन के लिए

b. केवल न्यायालय के आदेश पर

c. आदेश की अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्तियों या आतंकवाद में लगे या संदिग्ध किसी अन्य व्यक्ति के लिए

d. केवल विदेशियों के लिए

 

243. धारा 51 के तहत भारत में किसी व्यक्ति के प्रवेश या उसके बाहर जाने को रोकने का प्रावधान किस उद्देश्य से है?

a. विदेशी निवेश नियंत्रित करने के लिए

b. आतंकवादी गतिविधियों और उनके वित्तीय/संसाधन आधार को रोकने के लिए

c. केवल सीमा सुरक्षा के लिए

d. केवल राज्य सरकारों के निर्देशों के लिए

 

244. नियम बनाने की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 50

b. धारा 51

c. धारा 52

d. धारा 53

 

245. धारा 52 के अनुसार नियम बनाने की शक्ति किसके पास है?

a. राज्य सरकार

b. केन्द्रीय सरकार

c. जिला मजिस्ट्रेट

d. न्यायालय

 

246. धारा 52(1) के तहत नियम किस माध्यम से बनाए जाएंगे?

a. आदेश के माध्यम से

b. प्रेस विज्ञप्ति द्वारा

c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा

d. किसी न्यायालय के निर्देश द्वारा

 

247. धारा 52(2)() के अनुसार नियम किसके लिए अधिनियम की सूचनाओं या आदेशों की तामील तय कर सकते हैं?

a. केवल सरकारी अधिकारी

b. व्यक्ति, निगम, कंपनी, बैंक या अन्य संगम

c. केवल बैंक

d. केवल न्यायालय

 

248. धारा 52(2)() के अंतर्गत नियम किस प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकते हैं?

a. केवल वित्तीय आस्तियों की कुर्की

b. जांच करने या आवेदन निपटाने की प्रक्रिया, जिसे अधिकरण या जिला न्यायाधीश अपनाए

c. केवल गिरफ्तारी की प्रक्रिया

d. केवल संपत्ति की मूल्यांकन प्रक्रिया

 

249. धारा 52(2)() के अनुसार नियम किस विषय पर लागू होंगे?

a. अभियुक्त के पासपोर्ट की अवधि

b. धारा 28(2) के अधीन समपहृत संपत्ति की कीमत का अवधारण

c. अदालत के कार्य समय

d. पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया

 

250. धारा 52(2)() के अंतर्गत नियम किस विषय को विनियमित कर सकते हैं?

a. धारा 36(3) के अधीन आवेदन को ग्रहण करने और निपटाने की प्रक्रिया

b. धारा 43 के अधीन गिरफ्तारी

c. पुलिस जांच की अवधि

d. बैंक के वित्तीय लेनदेन

 

251. धारा 52(2)() के अनुसार नियम किसके संबंध में बनाए जा सकते हैं?

a. जिला न्यायाधीश

b. पुनर्विलोकन समिति के सदस्यों की अर्हताएं

c. अभियुक्त के अधिकार

d. बैंकिंग लेनदेन

 

252. धारा 52(2)(इड) के अनुसार नियम किस समयसीमा को निर्धारित कर सकते हैं?

a. अभियुक्त की जमानत अवधि

b. धारा 45(2) के अधीन अभियोजन के लिए मंजूरी देने और सिफारिश करने का समय

c. पुलिस जांच की अवधि

d. अदालत के सुनवाई का समय

 

253. धारा 52(2)() के अनुसार नियम किस विषय पर बनाए जा सकते हैं?

a. केवल वित्तीय मामलों पर

b. कोई अन्य विषय, जिसे विहित किया जाना है या जो विहित किया जाए

c. केवल अभियोजन प्रक्रिया पर

d. केवल पुलिस जांच पर

 

254. धारा 52 के अंतर्गत बनाए गए नियमों का उद्देश्य क्या है?

a. केवल अभियुक्त की जमानत निर्धारित करना

b. अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन और संचालन को विनियमित करना

c. केवल बैंकिंग लेनदेन पर निगरानी रखना

d. केवल पुलिस की कार्रवाई पर नियंत्रण रखना

 

255. आदेशों और नियमों का संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना किस धारा से सम्बंधित हैं?

a. धारा 50

b. धारा 51

c. धारा 52

d. धारा 53

 

256. धारा 53(1) के अनुसार, अधिनियम के तहत केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए प्रत्येक आदेश को कब संसद के समक्ष रखा जाएगा?

a. जब संसद का सत्र समाप्त हो

b. यथाशीघ्र, सत्र में कुल तीस दिन की अवधि के भीतर

c. केवल अगले सत्र में

d. केवल राष्ट्रपति की अनुमति से

 

257. धारा 53(1) के अनुसार यदि दोनों सदन आदेश या नियम में परिवर्तन के लिए सहमत हो जाएँ, तो आदेश या नियम:

a. बिना किसी परिवर्तन के प्रभावी रहेगा

b. परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा

c. तुरंत रद्द कर दिया जाएगा

d. केवल न्यायालय में चुनौती योग्य होगा

 

258. धारा 53(1) में उल्लेखितसत्र की कुल तीस दिन की अवधिकिस प्रकार पूरी की जा सकती है?

a. केवल एक सत्र में

b. केवल दो सत्रों में

c. एक सत्र या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में

d. केवल राष्ट्रपति के आदेश से

 

259. यदि आदेश या नियम को दोनों सदनों द्वारा निष्प्रभाव घोषित किया जाता है, तो उसके पहले किए गए कार्यवाही का विधिमान्यता पर क्या प्रभाव होगा?

a. विधिमान्यता प्रभावित होगी

b. विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

c. अदालत द्वारा निर्णय लिया जाएगा

d. कानून स्वतः निरस्त हो जाएगा

 

260. धारा 53(2) के अनुसार, अनुसूची की प्रविष्टि 33 में निर्दिष्ट आदेश और उसके संशोधन को कब संसद के समक्ष रखा जाएगा?

a. केवल वर्ष में एक बार

b. यथाशीघ्र, कुल तीस दिन की अवधि के लिए

c. केवल राष्ट्रपति की अनुमति से

d. केवल न्यायालय के निर्देश पर

 

261. धारा 53(1) के अनुसार यदि आदेश या नियम दोनों सदनों द्वारा संशोधित नहीं किए गए और अस्वीकार नहीं किए गए, तो आदेश या नियम:

a. अपने मूल रूप में प्रभावी रहेगा

b. तुरंत रद्द कर दिया जाएगा

c. न्यायालय में चुनौती योग्य होगा

d. केवल अगले सत्र में प्रभावी होगा

 

262. धारा 53(1) मेंअनुक्रमिक सत्रका क्या अर्थ है?

a. केवल वही सत्र जिसमें राष्ट्रपति उपस्थित हो

b. दो या अधिक लगातार सत्र जो आदेश या नियम के लिए मिलकर तीस दिन पूरी करें

c. केवल एक सत्र

d. केवल अधिनियम के लागू होने के पहले सत्र

 

263. धारा 53(2) में निर्दिष्ट आदेश और उसके संशोधन की संसद में रखी जाने की अवधि कितनी है?

a. पन्द्रह दिन

b. तीस दिन

c. नब्बे दिन

d. सौ अस्सी दिन

 

264. धारा 53 के अंतर्गत अगर दोनों सदन यह सहमत हों कि आदेश या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो आदेश या नियम:

a. परिवर्तित रूप में लागू होगा

b. प्रभावहीन हो जाएगा

c. स्वतः कानून बन जाएगा

d. न्यायालय द्वारा लागू किया जाएगा

 

265. धारा 53 के अनुसार, आदेश या नियम के संशोधन या निष्प्रभाव से पहले की गई कोई कार्रवाई:

a. तुरंत रद्द हो जाएगी

b. विधिमान्य रहेगी

c. केवल न्यायालय की मंजूरी से वैध होगी

d. केवल सरकार के पुनः निर्णय से वैध होगी