माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 MCQs SET-3

माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 MCQs SET-3

माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996

ARBITRATION AND CONCILIATION ACT, 1996

 

1. धारा 22(4) के अनुसार अधिकरण क्या आदेश दे सकता है?

a. दस्तावेज अस्वीकार कर सकता है

b. दस्तावेज का अनुवाद कराने का आदेश दे सकता है

c. केवल मौखिक सुनवाई करेगा

d. केवल अंग्रेजी में कार्यवाही करेगा 

 

2. धारा 23 किससे संबंधित है?

a. दावा और प्रतिरक्षा के कथन

b. प्रक्रिया के नियमों का अवधारण

c. भाषा

d. माध्यस्थम् कार्यवाहियों का प्रारम्भ

 

3. धारा 23(1) के अनुसार दावेदार को क्या प्रस्तुत करना होता है?

a. केवल साक्ष्य

b. दावे के समर्थन में तथ्य, विवाद्यक मुद्दे और मांगा गया अनुतोष

c. केवल गवाह

d. केवल दस्तावेज

 

4. धारा 23(1) के अनुसार प्रत्यर्थी क्या प्रस्तुत करता है?

a. अपनी प्रतिरक्षा का कथन

b. केवल गवाह

c. केवल दस्तावेज

d. केवल अपील

 

5. धारा 23 के अनुसार कथन किस समय के भीतर प्रस्तुत किए जाते हैं?

a. किसी भी समय

b. केवल न्यायालय द्वारा निर्धारित समय में

c. पक्षकारों द्वारा करारित या अधिकरण द्वारा निर्धारित कालावधि में

d. केवल एक वर्ष में

 

6. धारा 23(2) के अनुसार पक्षकार क्या कर सकते हैं?

a. केवल मौखिक कथन दे सकते हैं

b. दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं या उनका संदर्भ दे सकते हैं

c. केवल गवाह प्रस्तुत कर सकते हैं

d. कुछ भी प्रस्तुत नहीं कर सकते

 

7. धारा 23(2क) के अनुसार प्रत्यर्थी क्या कर सकता है?

a. प्रतिदावा प्रस्तुत कर सकता है

b. केवल प्रतिरक्षा देगा

c. केवल अपील करेगा

d. कुछ नहीं कर सकता

 

8. धारा 23(4) के अनुसार दावे और प्रतिरक्षा का विवरण किस अवधि में पूरा किया जाना चाहिए?

a. तीन माह

b. छह माह

c. एक वर्ष

d. दो वर्ष

 

9. धारा 24 किससे संबंधित है?

a. दावा और प्रतिरक्षा के कथन

b. प्रक्रिया के नियमों का अवधारण

c. सुनवाई और लिखित कार्यवाहियां

d. माध्यस्थम् कार्यवाहियों का प्रारम्भ

 

10. धारा 24(1) के अनुसार सुनवाई के प्रकार का निर्णय कौन करता है?

a. न्यायालय

b. सरकार

c. माध्यस्थम् अधिकरण

d. पक्षकार

 

11. धारा 24(1) के अंतर्गत अधिकरण किन विकल्पों में से चयन कर सकता है?

a. केवल मौखिक सुनवाई

b. केवल लिखित कार्यवाही

c. केवल अपील

d. मौखिक सुनवाई या लिखित कार्यवाही

 

12. धारा 24(1) के अंतर्गत अधिकरण क्या निर्णय कर सकता है?

a. साक्ष्य के लिए मौखिक सुनवाई

b. मौखिक बहस

c. दस्तावेजों के आधार पर कार्यवाही

d. उपर्युक्त सभी

 

13. मौखिक सुनवाई से छूट कब संभव है?

a. जब अधिकरण चाहे

b. जब पक्षकार सहमत हों कि सुनवाई नहीं होगी

c. हमेशा

d. कभी नहीं

 

14. धारा 24 के अनुसार साक्ष्य के लिए सुनवाई कैसे होनी चाहिए?

a. मासिक

b. साप्ताहिक

c. दिन-प्रतिदिन के आधार पर

d. वार्षिक

 

15. स्थगन कब दिया जा सकता है?

a. बिना कारण

b. हमेशा

c. पर्याप्त कारण होने पर

d. केवल न्यायालय की अनुमति से

 

16. बिना पर्याप्त कारण के स्थगन मांगने पर क्या होगा?

a. खर्चे अधिरोपित किए जा सकते हैं

b. केवल चेतावनी

c. कोई प्रभाव नहीं

d. कार्यवाही समाप्त होगी

 

17. धारा 25 का संबंध किससे है?

a. भाषा

b. स्थान

c. किसी पक्षकार का व्यतिक्रम

d. अपील

 

18. यदि दावेदार अपना दावा प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही जारी रहेगी

b. कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी

c. दंड दिया जाएगा

d. अपील होगी

 

19. दावेदार की असफलता किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 17

b. धारा 18

c. धारा 23(1)

d. धारा 24

 

20. यदि प्रत्यर्थी अपना प्रतिरक्षा कथन प्रस्तुत नहीं करता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही समाप्त होगी

b. कार्यवाही जारी रहेगी

c. निर्णय तुरंत होगा

d. अपील होगी

 

21. प्रत्यर्थी की असफलता को किस रूप में नहीं माना जाएगा?

a. देरी

b. अनुपस्थिति

c. गलती

d. दावेदार के कथन की स्वीकृति

 

22. धारा 25 के अनुसार अधिकरण को क्या विवेकाधिकार प्राप्त है?

a. दंड देना

b. प्रतिरक्षा का अधिकार समाप्त मानना

c. अपील करना

d. न्यायालय भेजना

 

23. यदि कोई पक्षकार सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही समाप्त होगी

b. कार्यवाही जारी रहेगी

c. मामला खारिज होगा

d. पुनः सुनवाई होगी

 

24. यदि कोई पक्षकार दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता है, तो अधिकरण क्या कर सकता है?

a. कार्यवाही जारी रखेगा

b. कार्यवाही रोक देगा

c. अपील करेगा

d. न्यायालय भेजेगा

 

25. धारा 25(ग) के अनुसार निर्णय किस आधार पर दिया जा सकता है?

a. केवल मौखिक कथन

b. उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर

c. न्यायालय के आदेश पर

d. पुलिस रिपोर्ट पर

 

26. धारा 26 का मुख्य विषय क्या है?

a. भाषा

b. स्थान

c. माध्यस्थम् अधिकरण द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ

d. अपील

 

27. विशेषज्ञ की नियुक्ति कौन करता है?

a. माध्यस्थम् अधिकरण

b. सरकार

c. न्यायालय

d. पक्षकार

 

28. विशेषज्ञ किस विषय पर रिपोर्ट देता है?

a. सामान्य विषय

b. व्यक्तिगत राय

c. केवल कानून

d. विनिर्दिष्ट विवाद्यक प्रश्न

 

29. अधिकरण कितने विशेषज्ञ नियुक्त कर सकता है?

a. केवल एक

b. केवल दो

c. एक या अधिक

d. कोई नहीं

 

30. धारा 26(1)(ख) के अनुसार पक्षकार से क्या अपेक्षा की जा सकती है?

a. केवल मौखिक बयान

b. जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराना

c. केवल अपील करना

d. कुछ भी नहीं

 

31. विशेषज्ञ को क्या प्रदान किया जा सकता है?

a. केवल मौखिक जानकारी

b. केवल दस्तावेज

c. जानकारी, दस्तावेज, माल या संपत्ति

d. केवल गवाह

 

32. धारा 26(2) के अनुसार विशेषज्ञ कब मौखिक सुनवाई में भाग ले सकता है?

a. कभी नहीं

b. रिपोर्ट देने के बाद

c. पहले

d. केवल न्यायालय के आदेश से

 

33. विशेषज्ञ की सुनवाई में भागीदारी कब होती है?

a. केवल अधिकरण के कहने पर

b. केवल पक्षकार के अनुरोध पर

c. पक्षकार के अनुरोध या अधिकरण की आवश्यकता पर

d. कभी नहीं

 

34. पक्षकार क्या प्रस्तुत कर सकते हैं?

a. केवल दस्तावेज

b. केवल गवाह

c. कुछ नहीं

d. विशेषज्ञ साक्षी

 

35. धारा 26(3) के अनुसार विशेषज्ञ क्या उपलब्ध कराएगा?

a. केवल रिपोर्ट

b. केवल मौखिक बयान

c. अपने कब्जे के दस्तावेज और सामग्री

d. कुछ नहीं

 

36. विशेषज्ञ किन वस्तुओं को उपलब्ध कराएगा?

a. केवल दस्तावेज

b. केवल माल

c. दस्तावेज, माल या संपत्ति

d. केवल रिपोर्ट

 

37. विशेषज्ञ सामग्री कब उपलब्ध कराएगा?

a. स्वतः

b. केवल न्यायालय के आदेश से

c. पक्षकार के अनुरोध पर

d. कभी नहीं

 

38. धारा 27 का मुख्य विषय क्या है?

a. साक्ष्य लेने में न्यायालय की सहायता

b. स्थान

c. भाषा

d. अपील

 

39. न्यायालय से सहायता के लिए आवेदन कौन कर सकता है?

a. केवल न्यायालय

b. केवल सरकार

c. माध्यस्थम् अधिकरण या उसकी अनुमति से कोई पक्षकार

d. केवल पुलिस

 

40. आवेदन में किनका नाम और पता देना आवश्यक है?

a. केवल पक्षकारों का

b. केवल मध्यस्थों का

c. पक्षकारों और मध्यस्थों दोनों का

d. किसी का नहीं

 

41. आवेदन में क्या वर्णित होना चाहिए?

a. केवल साक्ष्य

b. केवल गवाह

c. केवल निर्णय

d. दावे की प्रकृति और मांगा गया अनुतोष

 

42. न्यायालय किसके अनुसार अनुरोध का निष्पादन करेगा?

a. अपनी इच्छा से

b. केवल अधिकरण के आदेश से

c. अपने नियमों और सक्षमता के अनुसार

d. केवल पक्षकार की इच्छा से

 

43. न्यायालय साक्ष्य किसे भेज सकता है?

a. केवल पक्षकार को

b. केवल सरकार को

c. पुलिस को

d. सीधे माध्यस्थम् अधिकरण को

 

44. आदेशिकाएं किसके समान होती हैं?

a. पुलिस आदेश

b. न्यायालय के वादों में जारी आदेश

c. सरकारी आदेश

d. निजी आदेश

 

45. यदि कोई व्यक्ति आदेशिका का पालन नहीं करता है, तो क्या होगा?

a. कोई प्रभाव नहीं

b. चेतावनी दी जाएगी

c. दंडित किया जा सकता है

d. कार्यवाही समाप्त होगी

 

46. “आदेशिका” में क्या शामिल है?

a. केवल समन

b. केवल कमीशन

c. समन, कमीशन और दस्तावेज पेश करने के आदेश

d. केवल आदेश

 

47. धारा 28 का मुख्य विषय क्या है?

a. स्थान

b. भाषा

c. विवाद के सार को लागू नियम

d. अपील

 

48. धारा 28 लागू कब होती है?

a. जब माध्यस्थम् भारत के बाहर हो

b. जब माध्यस्थम् का स्थान भारत में हो

c. केवल अंतरराष्ट्रीय मामलों में

d. केवल अपील में

 

49. गैर-अंतरराष्ट्रीय माध्यस्थम् में विवाद का निर्णय किसके अनुसार होगा?

a. पक्षकारों की इच्छा से

b. भारत में प्रवृत्त मूल विधि के अनुसार

c. केवल न्यायालय के अनुसार

d. केवल साक्ष्य के अनुसार

 

50. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् में विधि कौन चुनता है?

a. न्यायालय

b. सरकार

c. पक्षकार

d. पुलिस

 

51. यदि पक्षकारों ने विधि का चयन किया है, तो अधिकरण क्या करेगा?

a. अपनी इच्छा से निर्णय करेगा

b. उस विधि के अनुसार निर्णय करेगा

c. न्यायालय से पूछेगा

d. कार्यवाही समाप्त करेगा

 

52. यदि पक्षकार विधि का चयन नहीं करते हैं, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही समाप्त होगी

b. न्यायालय निर्णय करेगा

c. अधिकरण उपयुक्त विधि लागू करेगा

d. केवल भारतीय विधि लागू होगी

 

53. धारा 28(2) के अनुसार अधिकरण कब न्यायसंगत आधार पर निर्णय कर सकता है?

a. जब पक्षकार स्पष्ट रूप से प्राधिकृत करें

b. जब न्यायालय आदेश दे

c. हमेशा

d. कभी नहीं

 

54. धारा 28(3) के अनुसार अधिकरण को क्या ध्यान में रखना चाहिए?

a. केवल साक्ष्य

b. केवल कानून

c. संविदा के निबंधन और व्यापार प्रथाएं

d. केवल न्यायालय का आदेश

 

55. धारा 29 का मुख्य विषय क्या है?

a. मध्यस्थों के पैनल द्वारा निर्णय

b. स्थान

c. भाषा

d. अपील

 

56. धारा 29(1) कब लागू होती है?

a. जब एक ही मध्यस्थ हो

b. जब एक से अधिक मध्यस्थ हों

c. केवल अपील में

d. केवल न्यायालय में

 

57. जब एक से अधिक मध्यस्थ होते हैं, तो निर्णय कैसे लिया जाता है?

a. न्यायालय द्वारा

b. बहुमत से

c. सर्वसम्मति से

d. सरकार द्वारा

 

58. बहुमत का क्या अर्थ है?

a. आधे से कम

b. आधे से अधिक

c. सभी सदस्य

d. केवल एक सदस्य

 

59. धारा 29(2) किससे संबंधित है?

a. अंतिम निर्णय

b. प्रक्रिया संबंधी प्रश्न

c. अपील

d. दंड

 

60. प्रक्रिया संबंधी प्रश्न कौन तय कर सकता है?

a. न्यायालय

b. सभी मध्यस्थ

c. सरकार

d. पीठासीन मध्यस्थ

 

61. पीठासीन मध्यस्थ को अधिकार कब मिलता है?

a. स्वतः

b. न्यायालय के आदेश से

c. पक्षकारों या सभी मध्यस्थों द्वारा प्राधिकृत होने पर

d. कभी नहीं

 

62. धारा 29(क) का मुख्य विषय क्या है?

a. भाषा

b. स्थान

c. अपील

d. माध्यस्थम् पंचाट की समय-सीमा

 

63. सामान्य (गैर-अंतरराष्ट्रीय) मामलों में पंचाट कितने समय में किया जाना चाहिए?

a. छह माह

b. बारह माह

c. अठारह माह

d. दो वर्ष

 

64. यह बारह माह की अवधि कब से गिनी जाती है?

a. कार्यवाही शुरू होने से

b. मध्यस्थ की नियुक्ति से

c. धारा 23(4) के अंतर्गत अभिवाकों के पूरा होने से

d. निर्णय से

 

65. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् में क्या नियम है?

a. निश्चित समय सीमा है

b. बारह माह अनिवार्य है

c. यथासंभव शीघ्रता से निपटाया जाएगा

d. कोई समय सीमा नहीं है

 

66. धारा 29(क) के अंतर्गत यदि पंचाट छह माह के भीतर कर दिया जाता है, तो क्या लाभ है?

a. कोई लाभ नहीं

b. अधिकरण को अतिरिक्त फीस मिल सकती है

c. कार्यवाही समाप्त हो जाएगी

d. अपील नहीं होगी

 

67. पक्षकार आपसी सहमति से समय सीमा कितनी बढ़ा सकते हैं?

a. तीन माह

b. छह माह तक

c. एक वर्ष

d. कोई सीमा नहीं

 

68. यदि समय सीमा में पंचाट नहीं होता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही जारी रहेगी

b. अपील होगी

c. न्यायालय स्वतः निर्णय देगा

d. मध्यस्थ का समादेश समाप्त हो जाएगा

 

69. न्यायालय समय सीमा कब बढ़ा सकता है?

a. हमेशा

b. बिना कारण

c. पर्याप्त कारण होने पर

d. कभी नहीं

 

70. यदि विलंब अधिकरण के कारण हुआ है, तो क्या हो सकता है?

a. कोई प्रभाव नहीं

b. फीस बढ़ाई जाएगी

c. फीस में कमी की जा सकती है

d. कार्यवाही समाप्त होगी

 

71. फीस में कमी अधिकतम कितनी हो सकती है?

a. 2% प्रति माह

b. 5% प्रति माह

c. 10% प्रति माह

d. 20% प्रति माह

 

72. यदि मध्यस्थ बदल दिया जाता है, तो कार्यवाही क्या होगी?

a. नई शुरू होगी

b. समाप्त हो जाएगी

c. उसी स्तर से जारी रहेगी

d. न्यायालय में जाएगी

 

73. पुनर्गठित अधिकरण की कार्यवाही को क्या माना जाएगा?

a. पूर्व कार्यवाही की निरंतरता

b. अपील

c. नई कार्यवाही

d. समाप्त कार्यवाही

 

74. न्यायालय इस धारा के अंतर्गत क्या कर सकता है?

a. केवल आदेश देगा

b. कुछ नहीं कर सकता

c. केवल अपील करेगा

d. खर्च अधिरोपित कर सकता है

 

75. समय बढ़ाने के लिए आवेदन कौन कर सकता है?

a. केवल न्यायालय

b. केवल सरकार

c. कोई भी पक्षकार

d. केवल मध्यस्थ

 

76. धारा 29(क)(5) के अधीन आवेदन का निपटारा कितने समय में करने का प्रयास किया जाता है?

a. 30 दिन

b. 60 दिन

c. 90 दिन

d. 6 माह

 

77. “निर्देश ग्रहण करना” कब माना जाता है?

a. जब मध्यस्थ को नियुक्ति की सूचना लिखित में प्राप्त होती है

b. जब मध्यस्थ नियुक्त होता है

c. जब कार्यवाही शुरू होती है

d. जब निर्णय होता है

 

78. धारा 29(ख) का मुख्य विषय क्या है?

a. भाषा

b. स्थान

c. त्वरित प्रक्रिया

d. अपील

 

79. त्वरित प्रक्रिया अपनाने का निर्णय कौन कर सकता है?

a. न्यायालय

b. सरकार

c. पक्षकार

d. पुलिस

 

80. त्वरित प्रक्रिया के लिए करार कब किया जा सकता है?

a. केवल कार्यवाही के बाद

b. केवल अपील में

c. केवल निर्णय के बाद

d. नियुक्ति के पूर्व या उसके समय या किसी भी प्रक्रम पर

 

81. त्वरित प्रक्रिया में अधिकरण की संरचना कैसी हो सकती है?

a. तीन सदस्यीय

b. पाँच सदस्यीय

c. एकल मध्यस्थ

d. कोई मध्यस्थ नहीं

 

82. एकल मध्यस्थ का चयन कौन करता है?

a. न्यायालय

b. सरकार

c. पुलिस

d. पक्षकार

 

83. त्वरित प्रक्रिया में विवाद का निर्णय किस आधार पर होता है?

a. केवल मौखिक सुनवाई

b. केवल दस्तावेज और लिखित अभिवाक

c. केवल गवाह

d. केवल न्यायालय के आदेश

 

84. क्या त्वरित प्रक्रिया में मौखिक सुनवाई अनिवार्य है?

a. हाँ, हमेशा

b. नहीं, सामान्यतः नहीं

c. केवल न्यायालय के आदेश से

d. केवल अपील में

 

85. मौखिक सुनवाई कब हो सकती है?

a. जब सभी पक्षकार अनुरोध करें या अधिकरण आवश्यक समझे

b. केवल न्यायालय के आदेश से

c. कभी नहीं

d. हमेशा

 

86. अधिकरण को क्या अधिकार है?

a. केवल निर्णय देना

b. अतिरिक्त सूचना या स्पष्टीकरण मांगना

c. केवल अपील करना

d. केवल साक्ष्य लेना

 

87. यदि मौखिक सुनवाई होती है, तो क्या विशेषता होती है?

a. कठोर प्रक्रिया

b. तकनीकी औपचारिकताओं का पालन अनिवार्य

c. तकनीकी औपचारिकताओं से मुक्त प्रक्रिया

d. केवल न्यायालय में होगी

 

88. त्वरित प्रक्रिया में पंचाट कितने समय में किया जाना चाहिए?

a. तीन माह

b. छह माह

c. एक वर्ष

d. बारह माह

 

89. धारा 30 का मुख्य विषय क्या है?

a. साक्ष्य

b. स्थान

c. समझौता

d. अपील

 

90. क्या माध्यस्थम् अधिकरण विवाद के समझौते को प्रोत्साहित कर सकता है?

a. नहीं

b. केवल न्यायालय की अनुमति से

c. हाँ

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

91. समझौते को प्रोत्साहित करना किससे बेमेल नहीं है?

a. माध्यस्थम् करार

b. न्यायालय

c. साक्ष्य

d. अपील

 

92. अधिकरण समझौते के लिए किन प्रक्रियाओं का प्रयोग कर सकता है?

a. केवल निर्णय

b. मध्यस्थता, सुलह या अन्य प्रक्रियाएं

c. केवल साक्ष्य

d. केवल अपील

 

93. यदि पक्षकार विवाद का समझौता कर लेते हैं, तो अधिकरण क्या करेगा?

a. निर्णय देगा

b. अपील करेगा

c. साक्ष्य लेगा

d. कार्यवाही समाप्त करेगा

 

94. समझौते को पंचाट के रूप में कब अभिलिखित किया जा सकता है?

a. स्वतः

b. केवल न्यायालय के आदेश से

c. पक्षकारों के अनुरोध पर

d. कभी नहीं

 

95. समझौते को पंचाट के रूप में अभिलिखित करने के लिए क्या आवश्यक है?

a. केवल अधिकरण की इच्छा

b. पक्षकारों का अनुरोध और अधिकरण की सहमति

c. न्यायालय का आदेश

d. सरकार की अनुमति

 

96. समझौते का पंचाट किस धारा के अनुसार दिया जाएगा?

a. धारा 31

b. धारा 29

c. धारा 34

d. धारा 9

 

97. समझौते पर आधारित पंचाट की स्थिति क्या होती है?

a. कम प्रभावी

b. कोई प्रभाव नहीं

c. अन्य पंचाट के समान

d. केवल औपचारिक

 

98. समझौता किसकी सहमति से होता है?

a. केवल अधिकरण

b. केवल न्यायालय

c. पक्षकारों की सहमति से

d. सरकार की अनुमति से

 

99. धारा 31 का मुख्य विषय क्या है?

a. माध्यस्थम् पंचाट का प्ररूप और उसकी विषय-वस्तु

b. भाषा

c. साक्ष्य

d. अपील

 

100. माध्यस्थम् पंचाट किस रूप में दिया जाएगा?

a. लिखित

b. मौखिक

c. डिजिटल

d. मौखिक और लिखित दोनों

 

101. पंचाट पर किसके हस्ताक्षर आवश्यक हैं?

a. केवल एक मध्यस्थ

b. सभी पक्षकार

c. न्यायालय

d. माध्यस्थम् अधिकरण के सदस्य

 

102. बहु-मध्यस्थ स्थिति में हस्ताक्षर कैसे होंगे?

a. सभी के

b. केवल एक के

c. न्यायालय के

d. बहुमत के

 

103. यदि किसी सदस्य का हस्ताक्षर नहीं है, तो क्या आवश्यक है?

a. कुछ नहीं

b. अपील

c. न्यायालय की अनुमति

d. कारण बताना

 

104. पंचाट में कारण देना कब आवश्यक नहीं है?

a. जब अधिकरण चाहे

b. जब पक्षकार सहमत हों या धारा 30 के तहत समझौता हो

c. हमेशा

d. कभी नहीं

 

105. पंचाट में क्या अवश्य लिखा होगा?

a. केवल निर्णय

b. धारा 20 के अनुसार तारीख और स्थान

c. केवल साक्ष्य

d. केवल आदेश

 

106. पंचाट की प्रति किसे दी जाएगी?

a. केवल न्यायालय

b. केवल वकील

c. प्रत्येक पक्षकार

d. केवल सरकार

 

107. यदि पंचाट धन के संदाय से संबंधित है, तो क्या जोड़ा जा सकता है?

a. दंड

b. ब्याज

c. अपील

d. साक्ष्य

 

108. ब्याज किस अवधि के लिए दिया जा सकता है?

a. केवल निर्णय के बाद

b. केवल पहले

c. पूरी अवधि या उसके किसी भाग के लिए

d. केवल अपील में

 

109. यदि पंचाट में अन्यथा निर्देश नहीं है, तो ब्याज की दर क्या होगी?

a. सामान्य दर

b. वर्तमान दर

c. वर्तमान दर से 2% अधिक

d. कोई ब्याज नहीं

 

110. “वर्तमान ब्याज दर” का अर्थ कहाँ से लिया गया है?

a. संविधान से

b. साक्ष्य अधिनियम से

c. ब्याज अधिनियम, 1978 की धारा 2(ख) से

d. दंड संहिता से

 

111. धारा 31(क) का मुख्य विषय क्या है?

a. साक्ष्य

b. खर्चों के लिए शासनतंत्र

c. स्थान

d. अपील

 

112. खर्चों के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है?

a. केवल न्यायालय

b. केवल अधिकरण

c. न्यायालय और माध्यस्थम् अधिकरण दोनों

d. सरकार

 

113. खर्चों के निर्धारण में क्या शामिल है?

a. केवल राशि

b. केवल समय

c. केवल दंड

d. राशि, देयता और भुगतान का समय

 

114. “खर्चों” में क्या शामिल है?

a. केवल वकील की फीस

b. केवल न्यायालय शुल्क

c. मध्यस्थ, न्यायालय, वकील आदि के सभी युक्तियुक्त खर्च

d. केवल साक्ष्य

 

115. खर्चों का सामान्य नियम क्या है?

a. दोनों पक्ष बराबर भुगतान करेंगे

b. सफल पक्षकार भुगतान करेगा

c. असफल पक्षकार सफल पक्षकार को भुगतान करेगा

d. कोई भुगतान नहीं होगा

 

116. क्या न्यायालय इस सामान्य नियम से हट सकता है?

a. नहीं

b. हाँ, कारण दर्ज करके

c. केवल सरकार की अनुमति से

d. कभी नहीं

 

117. खर्चों का निर्धारण करते समय क्या ध्यान रखा जाएगा?

a. केवल साक्ष्य

b. केवल कानून

c. केवल समय

d. सभी परिस्थितियाँ

 

118. पक्षकारों के आचरण का महत्व क्या है?

a. कोई महत्व नहीं

b. खर्च निर्धारण में महत्वपूर्ण है

c. केवल साक्ष्य में उपयोगी

d. केवल अपील में

 

119. धारा 32 का मुख्य विषय क्या है?

a. साक्ष्य

b. स्थान

c. अपील

d. कार्यवाहियों का समापन

 

120. माध्यस्थम् कार्यवाहियों का समापन कैसे होता है?

a. केवल न्यायालय के आदेश से

b. केवल पक्षकारों की सहमति से

c. अंतिम माध्यस्थम् पंचाट द्वारा या धारा 32(2) के अधीन अधिकरण के आदेश द्वारा

d. केवल अपील से

 

121. धारा 32(2) के अनुसार अधिकरण कब समापन का आदेश देगा?

a. विशेष परिस्थितियों में

b. केवल न्यायालय के कहने पर

c. हमेशा

d. कभी नहीं

 

122. यदि दावेदार अपना दावा वापस ले लेता है, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही जारी रहेगी

b. समापन होगा

c. अपील होगी

d. दंड लगेगा

 

123. दावे की वापसी पर समापन कब नहीं होगा?

a. हमेशा होगा

b. जब प्रत्यर्थी आक्षेप करे और उसका हित प्रभावित हो

c. जब न्यायालय मना करे

d. कभी नहीं

 

124. यदि दोनों पक्ष समापन के लिए सहमत हों, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही जारी रहेगी

b. समापन होगा

c. दंड लगेगा

d. अपील होगी

 

125. यदि कार्यवाही जारी रखना अनावश्यक या असंभव हो जाए, तो क्या होगा?

a. कार्यवाही जारी रहेगी

b. समापन होगा

c. अपील होगी

d. न्यायालय निर्णय देगा

 

126. धारा 32(2)(ग) किससे संबंधित है?

a. दावे की वापसी

b. पक्षकारों की सहमति

c. कार्यवाही का अनावश्यक या असंभव होना

d. अपील

 

127. धारा 32(3) के अनुसार अधिकरण की शक्तियाँ कब समाप्त होती हैं?

a. कार्यवाही शुरू होने पर

b. कार्यवाही समाप्त होने पर

c. अपील के बाद

d. साक्ष्य के बाद

 

128. अधिकरण की शक्तियाँ किन धाराओं के अधीन जारी रह सकती हैं?

a. धारा 17

b. धारा 30

c. धारा 9

d. धारा 33 और धारा 34(4)

 

129. धारा 33 का मुख्य विषय क्या है?

a. अपील

b. साक्ष्य

c. पंचाट का सुधार, निर्वचन और अतिरिक्त पंचाट

d. स्थान

 

130. पंचाट में गलती सुधारने के लिए आवेदन कब किया जा सकता है?

a. 15 दिन में

b. 30 दिन में

c. 60 दिन में

d. 90 दिन में

 

131. पंचाट में गलती सुधारने के लिए आवेदन की 30 दिन की अवधि कब से गिनी जाती है?

a. पंचाट की प्राप्ति से

b. पंचाट की तारीख से

c. कार्यवाही से

d. अपील से

 

132. किस प्रकार की गलतियों का सुधार किया जा सकता है?

a. कानूनी त्रुटि

b. संगणना, लिपिकीय या टंकण संबंधी गलती

c. साक्ष्य की त्रुटि

d. निर्णय की त्रुटि

 

133. निर्वचन के लिए क्या आवश्यक है?

a. पक्षकारों की सहमति

b. न्यायालय का आदेश

c. केवल अधिकरण की इच्छा

d. स्वतः

 

134. अधिकरण सुधार या निर्वचन कितने समय में करेगा?

a. 15 दिन

b. 30 दिन

c. 60 दिन

d. 90 दिन

 

135. निर्वचन का क्या प्रभाव होता है?

a. अलग निर्णय

b. पंचाट का भाग बन जाता है

c. कोई प्रभाव नहीं

d. अपील बन जाता है

 

136. क्या अधिकरण स्वयं गलती सुधार सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल पक्षकार की अनुमति से

 

137. अधिकरण स्वप्रेरणा से गलती कब तक सुधार सकता है?

a. 30 दिन

b. 90 दिन

c. 60 दिन

d. 15 दिन

 

138. अतिरिक्त पंचाट के लिए आवेदन कब तक किया जा सकता है?

a. 15 दिन

b. 90 दिन

c. 60 दिन

d. 30 दिन

 

139. अतिरिक्त पंचाट कितने समय में दिया जाएगा?

a. 60 दिन

b. 45 दिन

c. 30 दिन

d. 90 दिन

 

140. धारा 33 के अंतर्गत कौन सा तत्व महत्वपूर्ण है?

a. त्रुटि सुधार

b. साक्ष्य

c. अपील

d. दंड

 

141. धारा 34 का मुख्य विषय क्या है?

a. साक्ष्य

b. अपील

c. माध्यस्थम् पंचाट अपास्त करने के लिए आवेदन

d. स्थान

 

142. पंचाट के विरुद्ध न्यायालय का आश्रय कैसे लिया जा सकता है?

a. अपील द्वारा

b. पुनर्विचार द्वारा

c. पुनरीक्षण द्वारा

d. अपास्त करने के आवेदन द्वारा

 

143. क्या पंचाट के विरुद्ध सीधी अपील संभव है?

a. हाँ

b. केवल सुप्रीम कोर्ट में

c. केवल विशेष मामलों में

d. नहीं