
माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996
ARBITRATION AND CONCILIATION ACT, 1996
1. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है?
a. मध्यस्थता अधिनियम
b. सुलह अधिनियम
c. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996
d. पंचाट अधिनियम
2. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 का अधिनियम संख्यांक क्या है?
a. 26
b. 25
c. 24
d. 23
3. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 में कितने भाग हैं?
a. 1
b. 2
c. 3
d. 4
4. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 में कितनी धाराएं हैं?
a. 85
b. 86
c. 87
d. 88
5. माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 कब लागू हुआ?
a. 22 अगस्त
b. 21 अगस्त
c. 20 अगस्त
d. 19 अगस्त
6. यह अधिनियम किससे संबंधित विधि को समेकित और संशोधित करता है?
a. केवल दीवानी प्रक्रिया
b. देसी माध्यस्थम्, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् और विदेशी पंचाटों का प्रवर्तन
c. केवल आपराधिक कानून
d. केवल संवैधानिक प्रावधान
7. इस अधिनियम में सुलह (Conciliation) का क्या स्थान है?
a. इसका उल्लेख नहीं है
b. केवल सहायक रूप में
c. इसे भी परिभाषित और विनियमित किया गया है
d. केवल न्यायालय द्वारा लागू
8. UNCITRAL द्वारा अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् की आदर्श विधि किस वर्ष अंगीकृत की गई?
a. 1980
b. 1985
c. 1996
d. 2000
9. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने देशों को किस आधार पर आदर्श विधि पर विचार करने की सिफारिश की?
a. केवल राष्ट्रीय हित
b. न्यायालयों के भार को कम करने हेतु
c. विधि की एकरूपता और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए
d. केवल आर्थिक कारणों से
10. UNCITRAL सुलह नियम कब अंगीकृत किए गए?
a. 1970
b. 1980
c. 1985
d. 1996
11. सुलह नियमों का उपयोग कब सुझाया गया है?
a. आपराधिक मामलों में
b. संवैधानिक विवादों में
c. केवल सरकारी मामलों में
d. जब पक्षकार सौहार्द्रपूर्ण निपटारा चाहते हों
12. आदर्श विधि और सुलह नियमों का मुख्य योगदान क्या है?
a. कर सुधार
b. दंड प्रणाली सुधार
c. केवल प्रशासनिक नियंत्रण
d. अंतरराष्ट्रीय विवादों के उचित और दक्ष निपटारे हेतु एकीकृत विधिक संरचना
13. यह अधिनियम भारत गणराज्य के किस वर्ष में पारित हुआ?
a. 45वें
b. 46वें
c. 47वें
d. 48वें
14. धारा 1 का विषय क्या है?
a. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
b. माध्यस्थम्
c. परिधि
d. लिखित संसूचनाओं की प्राप्ति
15. इस अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है?
a. केवल केंद्र शासित प्रदेश
b. संपूर्ण भारत
c. केवल राज्यों तक
d. केवल महानगरों तक
16. धारा 1 के संशोधन (2019) के अनुसार क्या परिवर्तन किया गया?
a. नई धारा जोड़ी गई
b. “परंतु” शब्द जोड़ा गया
c. पूरा अधिनियम निरस्त किया गया
d. परंतु” शब्द का लोप किया गया
17. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक सुलह” का अर्थ किसके समान है?
a. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्
b. आपराधिक प्रक्रिया
c. दीवानी प्रक्रिया
d. प्रशासनिक विधि
18. यह अधिनियम कब प्रभावी होगा?
a. संसद द्वारा पारित होते ही
b. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद
c. न्यायालय के आदेश से
d. केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना की तिथि से
19. अधिनियम के प्रवर्तन की शक्ति किसके पास है?
a. संसद
b. सर्वोच्च न्यायालय
c. केन्द्रीय सरकार
d. राज्य सरकार
20. भाग I का विषय क्या है?
a. माध्यस्थम्
b. माध्यस्थम् करार
c. न्यायालय द्वारा माध्यस्थम् के लिए पक्षकारों को निर्दिष्ट करना
d. मध्यस्थों की संख्या
21. अध्याय 1 का विषय क्या है?
a. साधारण उपबंध
b. माध्यस्थम् करार
c. माध्यस्थम् अधिकरण की संरचना
d. माध्यस्थम् अधिकरणों की अधिकारिता
22. माध्यस्थम् किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(क)
b. धारा 2(ख)
c. धारा 2(ग)
d. धारा 2(गक)
23. “माध्यस्थम्” की परिभाषा के अनुसार कौन-सा कथन सही है?
a. केवल स्थायी संस्था द्वारा किया गया निर्णय ही माध्यस्थम् है
b. केवल न्यायालय द्वारा अनुमोदित निर्णय ही माध्यस्थम् है
c. कोई भी माध्यस्थ प्रक्रिया, चाहे संस्था द्वारा हो या न हो
d. घरेलू विवादों में लागू नहीं
24. माध्यस्थम् करार किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(क)
b. धारा 2(ख)
c. धारा 2(ग)
d. धारा 2(गक)
25. “माध्यस्थम् करार” का अभिप्राय क्या है?
a. केवल मौखिक समझौता
b. धारा 7 में निर्दिष्ट करार
c. केवल न्यायालय द्वारा स्वीकृत करार
d. केवल मध्यस्थ द्वारा बनाया गया करार
26. माध्यस्थम् पंचाट किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(क)
b. धारा 2(ख)
c. धारा 2(ग)
d. धारा 2(गक)
27. “माध्यस्थम् पंचाट” में क्या सम्मिलित है?
a. केवल स्थायी पंचाट
b. केवल एक मध्यस्थ
c. कोई भी अंतरिम पंचाट
d. केवल तीन मध्यस्थ
28. “माध्यस्थम् संस्था” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(क)
b. धारा 2(ख)
c. धारा 2(ग)
d. धारा 2(गक)
29. “माध्यस्थम् संस्था” से क्या अभिप्रेत है?
a. एक मात्र मध्यस्थ
b. केवल न्यायालय
c. उच्चतम/उच्च न्यायालय द्वारा नामित संस्था
d. कोई नहीं
30. धारा 2(1)(गक) किस अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित की गई?
a. 2019 के अधिनियम सं० 33
b. 2016 के अधिनियम सं० 3 (धारा 2)
c. 2016 के अधिनियम सं० 3 (धारा 3)
d. 2016 के अधिनियम सं० 3 (धारा 4)
31. “माध्यस्थम् अधिकरण” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 2(च)
d. धारा 2(छ)
32. “माध्यस्थम् अधिकरण” का अर्थ क्या है?
a. केवल एक न्यायाधीश
b. एक मात्र मध्यस्थ या मध्यस्थों का पैनल
c. सरकारी आयोग
d. सिविल न्यायालय
33. “न्यायालय” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 2(च)
d. धारा 2(छ)
34. धारा 2(1)(ङ) के अनुसार “न्यायालय” से क्या अभिप्रेत है?
a. कोई भी सिविल न्यायालय
b. केवल जिला न्यायालय
c. केवल सर्वोच्च न्यायालय
d. प्रधान सिविल न्यायालय या उपयुक्त उच्च न्यायालय
35. “न्यायालय” में निम्न में से कौन शामिल नहीं है?
a. प्रधान सिविल न्यायालय
b. उच्च न्यायालय
c. अवर श्रेणी का सिविल न्यायालय
d. मामूली आरंभिक अधिकारिता वाला न्यायालय
36. “न्यायालय” की परिभाषा में कौन-सा न्यायालय स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है?
a. उच्च न्यायालय
b. प्रधान सिविल न्यायालय
c. जिला न्यायालय
d. लघुवाद न्यायालय
37. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् के मामलों में “न्यायालय” कौन होगा?
a. कोई भी सिविल न्यायालय
b. प्रधान सिविल न्यायालय
c. उच्च न्यायालय
d. जिला न्यायालय
38. “न्यायालय” की परिभाषा में “मामूली आरंभिक सिविल अधिकारिता” किससे संबंधित है?
a. आपराधिक मामलों से
b. प्रशासनिक मामलों से
c. सिविल मामलों के प्रथम निर्णय की शक्ति से
d. केवल अपील से
39. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् के अतिरिक्त मामलों में “न्यायालय” का आधार क्या है?
a. प्रारंभिक सिविल अधिकारिता
b. केवल सरकारी आदेश
c. केवल अपील अधिकारिता
d. केवल आपराधिक अधिकारिता
40. “न्यायालय” में उच्च न्यायालय कब शामिल होगा?
a. केवल आपराधिक मामलों में
b. जब वह अपनी मूल सिविल अधिकारिता का प्रयोग करता है
c. केवल अपील में
d. केवल संवैधानिक मामलों में
41. निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
a. हर सिविल न्यायालय “न्यायालय” है
b. केवल उच्च न्यायालय “न्यायालय” है
c. कुछ विशेष सिविल न्यायालय ही “न्यायालय” हैं
d. केवल सर्वोच्च न्यायालय “न्यायालय” है
42. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् में “न्यायालय” का निर्धारण किस आधार पर होता है?
a. जिला स्तर
b. राज्य सरकार
c. उच्च न्यायालय की अधिकारिता
d. केंद्र सरकार
43. “न्यायालय” की परिभाषा में किसे शामिल नहीं किया गया है?
a. उच्च न्यायालय
b. प्रधान सिविल न्यायालय
c. लघुवाद न्यायालय
d. मूल अधिकारिता वाला न्यायालय
44. धारा 2(1)(ङ) किस संशोधन द्वारा प्रतिस्थापित की गई?
a. 2019 संशोधन (अधिनियम सं० 3)
b. 2016 संशोधन (अधिनियम सं० 3)
c. 2015 संशोधन (अधिनियम सं० 3
d. 2020 संशोधन (अधिनियम सं० 3)
45. “न्यायालय” शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है?
a. सभी न्यायालयों के लिए
b. केवल आपराधिक न्यायालयों के लिए
c. केवल प्रशासनिक निकायों के लिए
d. विशिष्ट सिविल न्यायालयों के लिए
46. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(च)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 2(घ)
d. धारा 2(छ)
47. धारा 2(1)(च) के अनुसार “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” किससे संबंधित है?
a. वाणिज्यिक विधिक संबंधों से उत्पन्न विवाद
b. केवल सरकारी विवाद
c. केवल आपराधिक विवाद
d. केवल संवैधानिक विवाद
48. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” में किस प्रकार के विधिक संबंध शामिल होते हैं?
a. केवल संविदात्मक
b. संविदात्मक और असंविदात्मक दोनों
c. केवल असंविदात्मक
d. केवल पारिवारिक
49. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” के लिए विवाद किस प्रकार का होना चाहिए?
a. वाणिज्यिक
b. प्रशासनिक
c. आपराधिक
d. संवैधानिक
50. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” के लिए पक्षकारों में क्या आवश्यक शर्त है?
a. सभी भारतीय हों
b. कम से कम एक पक्ष विदेशी तत्व वाला हो
c. केवल सरकारी पक्षकार हों
d. केवल कंपनियाँ हों
51. निम्न में से कौन “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” का उदाहरण है?
a. दो भारतीय व्यक्तियों के बीच विवाद
b. दो भारतीय कंपनियों के बीच विवाद
c. एक भारतीय और एक विदेशी कंपनी के बीच वाणिज्यिक विवाद
d. पारिवारिक विवाद
52. यदि कोई व्यक्ति भारत से भिन्न देश का नागरिक है, तो वह किस श्रेणी में आएगा?
a. घरेलू माध्यस्थम्
b. केवल प्रशासनिक विवाद
c. केवल दीवानी विवाद
d. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्
53. यदि कोई निगमित निकाय भारत के बाहर निगमित है, तो वह किसके अंतर्गत आएगा?
a. घरेलू विवाद
b. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्
c. केवल सिविल प्रक्रिया
d. केवल सरकारी मामला
54. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” में संगम या निकाय कब शामिल होगा?
a. जब उसका केंद्रीय प्रबंधन भारत के बाहर हो
b. जब उसका प्रबंधन भारत में हो
c. जब वह भारत में पंजीकृत हो
d. जब वह सरकारी हो
55. निम्न में से कौन-सा पक्ष “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” में शामिल हो सकता है?
a. विदेश की सरकार
b. केवल कंपनियाँ
c. केवल निजी व्यक्ति
d. केवल भारतीय नागरिक
56. “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्” का निर्धारण किस आधार पर होता है?
a. केवल स्थान
b. केवल कानून
c. केवल न्यायालय
d. विवाद की प्रकृति और पक्षकारों की स्थिति
57. “वाणिज्यिक” शब्द का अर्थ किससे संबंधित है?
a. पारिवारिक संबंध
b. धार्मिक संबंध
c. व्यापारिक या व्यवसायिक संबंध
d. राजनीतिक संबंध
58. धारा 2(1)(च) किस संशोधन द्वारा प्रतिस्थापित की गई?
a. 2015 संशोधन
b. 2016 संशोधन (अधिनियम सं० 3)
c. 2019 संशोधन
d. 2020 संशोधन
59. यदि सभी पक्ष भारतीय हों, तो वह किस श्रेणी में आएगा?
a. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम्
b. विदेशी पंचाट
c. घरेलू माध्यस्थम्
d. सुलह
60. “विधिक प्रतिनिधि” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 2(च)
d. धारा 2(छ)
61. धारा 2(1)(छ) के अनुसार “विधिक प्रतिनिधि” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल वारिस
b. केवल सरकारी अधिकारी
c. केवल न्यायालय
d. वह व्यक्ति जो मृत व्यक्ति की सम्पदा का विधिक प्रतिनिधित्व करता है
62. “विधिक प्रतिनिधि” में कौन शामिल होता है?
a. केवल परिवार के सदस्य
b. केवल नामांकित व्यक्ति
c. जो मृतक की सम्पदा का प्रतिनिधित्व करता है
d. केवल सरकारी अधिकारी
63. क्या “विधिक प्रतिनिधि” में वह व्यक्ति भी शामिल है जो मृतक की सम्पदा में दखल करता है?
a. हाँ
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. नहीं
d. केवल विशेष मामलों में
64. “पक्षकार” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(छ)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 2(झ)
d. धारा 2(ञ)
65. “पक्षकार” (Party) किसे कहा गया है?
a. केवल दावा करने वाले को
b. केवल प्रतिवादी को
c. माध्यस्थम् करार के किसी भी पक्षकार को
d. केवल मध्यस्थ को
66. “पक्षकार” शब्द का सीधा संबंध किससे है?
a. न्यायालय
b. सुलह प्रक्रिया
c. सरकारी आदेश
d. माध्यस्थम् करार
67. धारा 2(1)(ज) के अंतर्गत “पक्षकार” कौन हो सकता है?
a. कोई भी व्यक्ति जो विवाद में रुचि रखता हो
b. केवल न्यायालय
c. जो माध्यस्थम् करार में सम्मिलित हो
d. केवल सरकारी संस्था
68. “विहित” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(ज)
b. धारा 2(छ)
c. धारा 2(ञ)
d. धारा 2(झ)
69. “विहित” से क्या अभिप्रेत है?
a. इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम
b. परिषद् द्वारा बनाए गए विनियम
c. (A) और (B) दोनों
d. उपर्युक्त कोई नहीं
70. “विहित” की परिभाषा किस संशोधन द्वारा जोड़ी गई?
a. 2015 संशोधन
b. 2016 संशोधन
c. 2019 संशोधन (अधिनियम सं० 33)
d. 2020 संशोधन
71. “विनियमों” किस धारा में परिभाषित है?
a. धारा 2(छ)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 2(झ)
d. धारा 2(ञ)
72. “विनियमों” से क्या अभिप्रेत है?
a. अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम
b. परिषद् द्वारा बनाए गए विनियम
c. (A) और (B) दोनों
d. उपर्युक्त कोई नहीं
73. “विनियमों” की परिभाषा किस संशोधन द्वारा जोड़ी गई?
a. 2015 संशोधन
b. 2016 संशोधन
c. 2019 संशोधन (अधिनियम सं० 33)
d. 2020 संशोधन
74. धारा 2(2) किस विषय से संबंधित है?
a. परिधि
b. निर्देशों का अर्थान्वयन
c. विनियमों
d. विहित
75. इस भाग का सामान्य नियम क्या है?
a. यह सभी देशों में लागू होता है
b. यह केवल अंतरराष्ट्रीय मामलों में लागू होता है
c. यह वहाँ लागू होगा जहाँ माध्यस्थम् का स्थान भारत में है
d. यह केवल न्यायालयों पर लागू होता है
76. निम्न में से कौन-सी धाराएँ भारत के बाहर स्थित अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् पर भी लागू होती हैं?
a. धारा 5, 6, 7
b. धारा 9, 27, 37
c. धारा 10, 11, 12
d. धारा 34, 35, 36
77. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् भारत के बाहर होने पर भी इन धाराओं का लागू होना किस पर निर्भर है?
a. न्यायालय की अनुमति
b. पक्षकारों के करार
c. सरकार की स्वीकृति
d. केवल स्थान
78. भाग I किन विवादों पर प्रभाव नहीं डालता?
a. उन विवादों पर जो अन्य विधि द्वारा माध्यस्थम् के लिए अयोग्य हैं
b. सभी विवादों पर
c. केवल अंतरराष्ट्रीय विवादों पर
d. केवल सिविल विवादों पर
79. भाग I अन्य अधिनियमों के अधीन माध्यस्थम् पर कैसे लागू होता है?
a. लागू नहीं होता
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. मानो वह माध्यस्थम् करार के अधीन हो
d. केवल अंतरराष्ट्रीय मामलों में
80. यदि भाग I के उपबंध अन्य अधिनियम से असंगत हों, तो क्या होगा?
a. भाग I के उपबंध लागू नहीं होंगे
b. दोनों लागू होंगे
c. अन्य अधिनियम लागू होगा
d. न्यायालय निर्णय करेगा
81. भाग 1 सामान्यतः किन पर लागू होता है?
a. केवल घरेलू विवाद
b. केवल अंतरराष्ट्रीय विवाद
c. सभी माध्यस्थम् और उनसे संबंधित कार्यवाहियाँ
d. केवल न्यायालयीन कार्यवाही
82. धारा 2(6) किस विषय से संबंधित है?
a. परिधि
b. विहित
c. विनियमों
d. निर्देशों का अर्थान्वयन
83. “निर्देशों का अर्थान्वयन” के अनुसार पक्षकार क्या कर सकते हैं?
a. केवल न्यायालय में जा सकते हैं
b. केवल सरकार को अधिकार दे सकते हैं
c. किसी व्यक्ति या संस्था को विवाद तय करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं
d. केवल स्वयं निर्णय कर सकते हैं
84. भाग 1 के अधीन दिया गया पंचाट क्या माना जाएगा?
a. विदेशी पंचाट
b. अंतरराष्ट्रीय पंचाट
c. अस्थायी पंचाट
d. देशी पंचाट
85. “पक्षकारों के करार” में क्या शामिल होगा?
a. केवल मौखिक समझौता
b. केवल लिखित अनुबंध
c. माध्यस्थम् नियम भी शामिल होंगे
d. केवल न्यायालय आदेश
86. “दावा” शब्द में क्या शामिल होगा?
a. प्रतिदावा भी शामिल होगा
b. केवल प्रतिरक्षा
c. केवल मूल दावा
d. केवल न्यायालयीन दावा
87. “प्रतिरक्षा” शब्द का विस्तार किस तक होता है?
a. केवल मूल दावा
b. केवल न्यायालयीन कार्यवाही
c. प्रतिदावे की प्रतिरक्षा तक
d. केवल सरकारी विवाद
88. भाग I किन धाराओं को छोड़कर अन्य अधिनियमों पर लागू होता है?
a. धारा 40(1), 41, 43
b. धारा 34, 35, 36
c. धारा 10, 11, 12
d. धारा 5, 6, 7
89. भाग I की लागू होने की सीमा किससे प्रभावित हो सकती है?
a. केवल न्यायालय से
b. केवल संसद से
c. अन्य विधि या अंतरराष्ट्रीय करार से
d. केवल प्रशासन से
90. यदि पक्षकारों को स्वतंत्रता दी गई है, तो उसमें क्या शामिल है?
a. केवल न्यायालय में जाना
b. केवल सरकारी अनुमति लेना
c. केवल स्वयं निर्णय करना
d. किसी व्यक्ति या संस्था को विवाद तय करने का अधिकार देना
91. धारा 3 का विषय क्या है?
a. आपत्ति का अधित्यजन
b. न्यायिक हस्तक्षेप
c. लिखित संसूचनाओं की प्राप्ति
d. प्रशासनिक सहायता
92. धारा 3(1)(क) के अनुसार लिखित संसूचना कब “प्राप्त” मानी जाती है?
a. जब अदालत द्वारा सत्यापित हो
b. जब प्रेषिती को व्यक्तिगत या उसके पते पर दी जाए
c. जब ईमेल भेजी जाए
d. जब प्रेषक चाहे
93. लिखित संसूचना किन स्थानों पर दी जा सकती है?
a. व्यवसाय स्थान, निवास या डाक पते पर
b. केवल कार्यालय में
c. केवल न्यायालय में
d. केवल सरकारी पते पर
94. यदि प्रेषिती का पता उपलब्ध न हो, तो संसूचना कैसे दी जाएगी?
a. न्यायालय के माध्यम से
b. मौखिक रूप से
c. अंतिम ज्ञात पते पर रजिस्ट्रीकृत पत्र द्वारा
d. केवल ईमेल द्वारा
95. निम्न में से कौन-सा साधन संसूचना भेजने के लिए मान्य है?
a. मौखिक सूचना
b. केवल फोन कॉल
c. साधन केवल संदेश
d. रजिस्ट्रीकृत पत्र या अभिलेख रखने वाला
96. धारा 3(1)(ख) किस स्थिति पर लागू होती है?
a. जब प्रेषिती मना कर दे
b. जब पते का पता न चल सके
c. जब न्यायालय नोटिस दे
d. जब विदेशी पक्षकार हो
97. धारा 3(1)(ख) के अनुसार संसूचना कब “प्राप्त” मानी जाती है?
a. अंतिम ज्ञात पते पर रजिस्ट्रीकृत पत्र भेजने पर
b. मौखिक सूचना पर
c. पड़ोसी को बताने पर
d. केवल ईमेल पर
98. धारा 3(2) के अनुसार संसूचना कब “प्राप्त” मानी जाती है?
a. एक सप्ताह बाद
b. न्यायालय की पुष्टि पर
c. जिस दिन परिदत्त की जाती है
d. प्रेषक की तारीख पर
99. धारा 3 किन कार्यवाहियों पर लागू नहीं होती?
a. अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता
b. न्यायिक प्राधिकारी की कार्यवाहियों से संबंधित संसूचनाएँ
c. निजी मध्यस्थ नियुक्ति
d. मध्यस्थता करार की व्याख्या
100. “परिदत्त” का अभिप्राय धारा 3 के अनुसार क्या है?
a. केवल हाथ से दिया जाना
b. ईमेल में PDF भेजना
c. नोटिस तैयार करना
d. किसी भी विधि से प्रेषिती तक पहुँचाना
101. यदि पक्षकारों ने अलग से करार किया हो, तो क्या धारा 3 लागू होगी?
a. हाँ, हमेशा
b. नहीं, पक्षकारों का करार प्राथमिक होगा
c. केवल न्यायालय की अनुमति से
d. केवल विदेशी मामलों में
102. धारा 4 का मुख्य विषय क्या है?
a. माध्यस्थम् करार
b. न्यायालय की शक्ति
c. आपत्ति करने के अधिकार का अधित्यजन
d. सुलह प्रक्रिया
103. यदि कोई पक्षकार अननुपालन जानते हुए भी आगे बढ़ता है, तो क्या माना जाएगा?
a. उसने आपत्ति का अधिकार छोड़ दिया
b. उसने अधिकार सुरक्षित रखा
c. उसने न्यायालय को सूचित किया
d. मामला निरस्त होगा
104. “अधित्यजन” का अर्थ क्या है?
a. अधिकार प्राप्त करना
b. अधिकार का प्रयोग करना
c. अधिकार का त्याग करना
d. अधिकार का विस्तार
105. धारा 4 किन उपबंधों पर लागू होती है?
a. केवल अनिवार्य उपबंध
b. केवल न्यायालयीन उपबंध
c. केवल संवैधानिक प्रावधान
d. वे उपबंध जिन्हें पक्षकार अल्पीकृत कर सकते हैं
106. यदि करार की अपेक्षा का पालन नहीं हुआ और आपत्ति नहीं की गई, तो क्या होगा?
a. कार्यवाही रुक जाएगी
b. न्यायालय हस्तक्षेप करेगा
c. आपत्ति का अधिकार समाप्त माना जाएगा
d. करार निरस्त होगा
107. आपत्ति कब करनी चाहिए?
a. असम्यक विलंब के बिना
b. किसी भी समय
c. निर्णय के बाद
d. केवल न्यायालय में
108. यदि आपत्ति के लिए समय सीमा निर्धारित है, तो क्या करना होगा?
a. समय के बाद भी कर सकते हैं
b. न्यायालय से अनुमति लेनी होगी
c. उसी समय सीमा के भीतर आपत्ति करनी होगी
d. कोई आवश्यकता नहीं
109. अधित्यजन के लिए आवश्यक तत्व क्या है?
a. पक्षकार की जानकारी
b. न्यायालय का आदेश
c. सरकारी अनुमति
d. लिखित अनुबंध
110. यदि पक्षकार अननुपालन के बावजूद माध्यस्थम् में भाग लेता है, तो—
a. कार्यवाही अवैध हो जाएगी
b. वह बाद में आपत्ति कर सकता है
c. उसका आपत्ति का अधिकार समाप्त माना जाएगा
d. न्यायालय स्वतः हस्तक्षेप करेगा
111. “असम्यक विलंब” का क्या अर्थ है?
a. उचित समय पर
b. अत्यधिक देर से
c. तुरंत
d. न्यायालय के आदेश से
112. यदि पक्षकार समय पर आपत्ति नहीं करता, तो उसका परिणाम क्या होगा?
a. उसे दंड मिलेगा
b. कार्यवाही रुक जाएगी
c. उसका अधिकार त्याग माना जाएगा
d. करार समाप्त हो जाएगा
113. धारा 5 का मुख्य विषय क्या है?
a. न्यायालय का पूर्ण नियंत्रण
b. न्यायालय का कोई अधिकार नहीं
c. न्यायालय का अनिवार्य हस्तक्षेप
d. न्यायिक हस्तक्षेप का विस्तार
114. भाग 1 द्वारा शासित मामलों में न्यायिक प्राधिकारी कब हस्तक्षेप कर सकता है?
a. जब वह उचित समझे
b. जब पक्षकार अनुमति दें
c. हमेशा
d. केवल तब जब भाग I में उपबंध किया गया हो
115. यदि भाग I में हस्तक्षेप का उपबंध नहीं है, तो—
a. न्यायालय हस्तक्षेप करेगा
b. न्यायालय को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं होगा
c. सरकार निर्णय करेगी
d. मध्यस्थ निर्णय करेगा
116. धारा 5 किस सिद्धांत को बढ़ावा देती है?
a. न्यूनतम न्यायिक हस्तक्षेप
b. प्रशासनिक नियंत्रण
c. न्यायालय सर्वोच्चता
d. सरकारी हस्तक्षेप
117. धारा 4 का मुख्य विषय क्या है?
a. माध्यस्थम् करार
b. न्यायालय की शक्ति
c. आपत्ति करने के अधिकार का अधित्यजन
d. सुलह प्रक्रिया
118. प्रशासनिक सहायता की व्यवस्था कौन कर सकता है?
a. केवल न्यायालय
b. केवल सरकार
c. केवल पक्षकार
d. माध्यस्थम् अधिकरण
119. प्रशासनिक सहायता किसकी सहमति से ली जाती है?
a. केवल न्यायालय की
b. केवल सरकार की
c. पक्षकारों की
d. केवल मध्यस्थ की
120. प्रशासनिक सहायता किससे प्राप्त की जा सकती है?
a. केवल न्यायालय से
b. केवल सरकारी संस्था से
c. केवल उच्च न्यायालय से
d. किसी उपयुक्त संस्था या व्यक्ति से
121. क्या प्रशासनिक सहायता लेना अनिवार्य है?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल अंतरराष्ट्रीय मामलों में
d. केवल न्यायालय के आदेश से
122. भाग I के अध्याय 2 का विषय क्या है?
a. माध्यस्थम्
b. सुलह
c. कतिपय विदेशी पंचाटों का प्रवर्तन
d. माध्यस्थम् करार
123. धारा 7 का विषय क्या है?
a. माध्यस्थम् करार
b. न्यायालय द्वारा माध्यस्थम् के लिए पक्षकारों को निर्दिष्ट करना
c. न्यायालय द्वारा अंतरिम उपाय
d. मध्यस्थों की संख्या
124. “माध्यस्थम् करार” किन विवादों से संबंधित हो सकता है?
a. केवल आपराधिक विवाद
b. केवल संविदात्मक विवाद
c. संविदात्मक और असंविदात्मक दोनों
d. केवल पारिवारिक विवाद
125. “माध्यस्थम् करार” किन विवादों पर लागू होता है?
a. केवल वर्तमान विवाद
b. केवल भविष्य के विवाद
c. वर्तमान और संभावित दोनों विवाद
d. केवल न्यायालयीन विवाद
126. धारा 7(2) के अनुसार माध्यस्थम् करार किस रूप में हो सकता है?
a. संविदा में खंड या पृथक करार
b. केवल न्यायालय आदेश
c. केवल मौखिक
d. केवल सरकारी आदेश
127. धारा 7(3) के अनुसार माध्यस्थम् करार किस रूप में होना चाहिए?
a. मौखिक
b. लिखित
c. केवल इलेक्ट्रॉनिक
d. केवल न्यायालय में दर्ज
128. निम्न में से कौन-सा माध्यस्थम् करार का वैध रूप है?
a. हस्ताक्षरित दस्तावेज
b. मौखिक समझौता
c. केवल फोन कॉल
d. केवल मौखिक सहमति
129. “माध्यस्थम् करार” पत्रों या संचार के माध्यम से कब माना जाएगा?
a. जब कोई अभिलेख न हो
b. जब वह करार का अभिलेख बनाता हो
c. केवल मौखिक रूप में
d. केवल न्यायालय के माध्यम से
130. क्या इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यस्थम् करार का भाग हो सकता है?
a. नहीं
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. हाँ
d. केवल सरकारी मामलों में
131. दावे और प्रतिरक्षा के कथनों के आदान-प्रदान में माध्यस्थम् करार कब माना जाएगा?
a. जब दोनों पक्ष सहमत हों
b. केवल लिखित अनुबंध में
c. केवल न्यायालय के आदेश से
d. जब एक पक्ष दावा करे और दूसरा इंकार न करे
132. धारा 7(5) के अनुसार संदर्भ द्वारा माध्यस्थम् करार कब बनता है?
a. जब मौखिक रूप से कहा जाए
b. जब संविदा लिखित हो और संदर्भ खंड को शामिल करे
c. केवल न्यायालय के आदेश से
d. केवल सरकारी अनुबंध में
133. “माध्यस्थम् करार” के लिए कौन-सा तत्व अनिवार्य है?
a. न्यायालय की अनुमति
b. सरकारी स्वीकृति
c. लिखित रूप
d. मौखिक सहमति
134. “माध्यस्थम् खंड” क्या है?
a. न्यायालय का आदेश
b. संविदा का वह भाग जो विवाद को माध्यस्थम् में भेजता है
c. सरकारी नियम
d. केवल प्रशासनिक आदेश
135. यदि करार लिखित नहीं है, तो—
a. माध्यस्थम् करार नहीं माना जाएगा
b. आंशिक रूप से मान्य होगा
c. वैध रहेगा
d. न्यायालय तय करेगा
136. धारा 8 का विषय क्या है?
a. न्यायालय द्वारा माध्यस्थम् के लिए पक्षकारों को निर्दिष्ट करना
b. माध्यस्थम् करार
c. न्यायालय द्वारा अंतरिम उपाय
d. मध्यस्थों की संख्या
137. न्यायिक प्राधिकारी कब पक्षकारों को माध्यस्थम् के लिए संदर्भित करेगा?
a. जब वह उचित समझे
b. जब कोई आवेदन किया जाए
c. जब करार न हो
d. केवल सरकार के आदेश पर
138. आवेदन कब तक किया जाना चाहिए?
a. विवाद के सार पर प्रथम कथन प्रस्तुत करने से पहले
b. अपील के समय
c. निर्णय के बाद
d. किसी भी समय
139. न्यायिक प्राधिकारी कब पक्षकारों को माध्यस्थम् के लिए संदर्भित नहीं करेगा?
a. जब करार हो
b. जब आवेदन हो
c. जब पक्षकार सहमत हों
d. जब प्रथमदृष्ट्या वैध माध्यस्थम् करार न हो
140. आवेदन के साथ क्या संलग्न होना आवश्यक है?
a. केवल मौखिक कथन
b. केवल हलफनामा
c. मूल माध्यस्थम् करार या उसकी प्रमाणित प्रति
d. केवल ईमेल
141. यदि मूल करार उपलब्ध न हो, तो क्या किया जाएगा?
a. दूसरे पक्षकार से प्रस्तुत करने का अनुरोध किया जाएगा
b. न्यायालय निर्णय करेगा
c. आवेदन अस्वीकार होगा
d. मामला समाप्त होगा
142. क्या न्यायालय में मामला लंबित होने पर भी माध्यस्थम् शुरू किया जा सकता है?
a. हाँ
b. केवल न्यायालय की अनुमति से
c. नहीं
d. केवल सरकार की अनुमति से
143. निम्न में से कौन आवेदन कर सकता है?
a. केवल न्यायालय
b. केवल सरकार
c. माध्यस्थम् करार का पक्षकार या उसके माध्यम से दावा करने वाला व्यक्ति
d. केवल मध्यस्थ