भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 MCQs Set-4

भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 MCQs Set-4

भारतीय न्यास अधिनियम, 1882

THE INDIAN TRUSTS ACT, 1882

 

1. धारा 41 के अनुसार संचित आय का लाभ अंततः किसे मिलेगा?

a. न्यासी को

b. सरकार को

c. उस व्यक्ति को जो अंततः सम्पत्ति का हकदार होगा

d. न्यायालय को

 

2. धारा 41 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की स्वतंत्रता

b. अप्राप्तवय के संरक्षण और कल्याण का सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

3. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 42 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. रसीदें देने की शक्ति

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

4. धारा 42 के अनुसार रसीद कौन दे सकता है?

a. केवल न्यायालय

b. केवल लाभार्थी

c. न्यासी

d. केवल सरकार

 

5. धारा 42 के अनुसार न्यासी किसके लिए लिखित रसीद दे सकता है?

a. धन के लिए

b. प्रतिभूतियों के लिए

c. अन्य जंगम संपत्ति के लिए

d. उपरोक्त सभी

 

6. धारा 42 के अनुसार रसीद किस रूप में दी जाती है?

a. मौखिक

b. लिखित

c. टेलीफोन द्वारा

d. संदेश द्वारा

 

7. यदि न्यासी लिखित रसीद देता है, तो भुगतान करने वाला व्यक्ति किससे मुक्त हो जाता है?

a. संपत्ति के उपयोग की निगरानी से

b. हानि या दुरुपयोग के लिए जिम्मेदारी से

c. न्यास के प्रबंधन से

d. उपरोक्त सभी

 

8. धारा 42 के अनुसार भुगतान करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी कब समाप्त होती है?

a. जब मौखिक रसीद दी जाए

b. जब लिखित रसीद दी जाए

c. जब न्यायालय आदेश दे

d. जब लाभार्थी अनुमति दे

 

9. धारा 42 में “कपट” का क्या प्रभाव है?

a. रसीद हमेशा वैध रहेगी

b. कपट होने पर रसीद का प्रभाव समाप्त हो सकता है

c. रसीद स्वतः निरस्त हो जाएगी

d. कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

 

10. धारा 42 के अनुसार रसीद देने का अधिकार किस प्रकार की संपत्ति के लिए है?

a. केवल अचल संपत्ति

b. केवल नकद धन

c. जंगम संपत्ति और धन

d. केवल भूमि

 

11. धारा 42 के अनुसार रसीद मिलने के बाद भुगतान करने वाला व्यक्ति किससे मुक्त हो जाता है?

a. संपत्ति की निगरानी से

b. संपत्ति के दुरुपयोग के लिए उत्तरदायित्व से

c. संपत्ति की हानि के लिए उत्तरदायित्व से

d. उपरोक्त सभी

 

12. धारा 42 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की सीमित शक्ति

b. भुगतानकर्ता की सुरक्षा का सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

13. धारा 42 के अनुसार यदि कपट न हो, तो रसीद का क्या प्रभाव होता है?

a. भुगतान अमान्य हो जाता है

b. भुगतान करने वाला व्यक्ति मुक्त हो जाता है

c. न्यायालय जांच करेगा

d. संपत्ति वापस ली जाएगी

 

14. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 43 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. शमन, समझौता और ऋण निपटाने की शक्ति

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

15. धारा 43 के अनुसार यह शक्ति सामान्यतः किनके द्वारा प्रयोग की जाती है?

a. केवल एक न्यासी

b. दो या अधिक न्यासी मिलकर

c. केवल न्यायालय

d. केवल सरकार

 

16. धारा 43 के अनुसार न्यासी क्या कर सकते हैं?

a. ऋण या दावाकृत संपत्ति के लिए प्रशमन या प्रतिभूति स्वीकार कर सकते हैं

b. ऋण चुकाने के लिए समय दे सकते हैं

c. ऋण या दावे का समझौता कर सकते हैं

d. उपरोक्त सभी

 

17. धारा 43 के अनुसार न्यासी किसी विवाद को कैसे निपटा सकते हैं?

a. केवल न्यायालय द्वारा

b. केवल पंचायत द्वारा

c. माध्यस्थम् द्वारा भी

d. केवल पुलिस द्वारा

 

18. यदि न्यासी सद्भावपूर्वक कार्य करते हैं, तो क्या वे हानि के लिए उत्तरदायी होंगे?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल न्यायालय के आदेश से

d. केवल लाभार्थी की अनुमति से

 

19. धारा 43 के अनुसार न्यासी किस प्रकार के मामलों में समझौता कर सकते हैं?

a. ऋण

b. लेखा

c. दावा या अन्य विवाद

d. उपरोक्त सभी

 

20. यदि न्यास की लिखत में केवल एक न्यासी को कार्य करने की अनुमति हो, तो क्या वह इन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल लाभार्थी की अनुमति से

 

21. धारा 43 कब लागू होगी?

a. सभी न्यासों पर

b. केवल इस अधिनियम के लागू होने के बाद सृजित न्यासों पर

c. केवल सरकारी न्यासों पर

d. केवल निजी न्यासों पर

 

22. धारा 43 के अनुसार यह शक्ति कब लागू नहीं होगी?

a. जब न्यास की लिखत में इसके विपरीत प्रावधान हो

b. जब न्यायालय आदेश दे

c. जब सरकार आदेश दे

d. जब बैंक अनुमति दे

 

23. धारा 43 के अनुसार न्यासी किन दस्तावेजों को निष्पादित कर सकते हैं?

a. करार

b. निर्मुक्ति

c. समझौते के दस्तावेज

d. उपरोक्त सभी

 

24. धारा 43 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की सीमित शक्ति

b. न्यासी को व्यावहारिक प्रशासनिक शक्तियाँ देना

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

25. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 44 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. कई न्यासियों को, जिनमें से एक इन्कार कर दे या मर जाए, दी गई शक्ति

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

26. यदि कई न्यासियों को न्यास-सम्पत्ति से संबंधित अधिकार दिया गया हो और उनमें से एक मर जाए, तो क्या होगा?

a. न्यास समाप्त हो जाएगा

b. शेष न्यासी उस शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं

c. केवल न्यायालय शक्ति का प्रयोग करेगा

d. सरकार शक्ति का प्रयोग करेगी

 

27. यदि एक न्यासी कार्य करने से इंकार कर दे, तो क्या शेष न्यासी उस शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल लाभार्थी की अनुमति से

 

28. धारा 44 के अनुसार शेष न्यासी कब उस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते?

a. जब न्यास की लिखत में इसके विपरीत प्रावधान हो

b. जब न्यायालय आदेश दे

c. जब लाभार्थी अनुमति न दे

d. जब सरकार अनुमति न दे

 

29. यदि न्यास की लिखत में यह लिखा हो कि शक्ति केवल अधिक संख्या के न्यासियों द्वारा प्रयोग की जाएगी, तो क्या होगा?

a. शेष न्यासी अकेले शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकते

b. शेष न्यासी शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं

c. न्यायालय शक्ति का प्रयोग करेगा

d. न्यास समाप्त हो जाएगा

 

30. धारा 44 के अनुसार “इन्कार” का क्या अर्थ है?

a. न्यासी का अपने कर्तव्य को स्वीकार करना

b. न्यासी का कार्य करने से मना करना

c. न्यासी का संपत्ति बेच देना

d. न्यासी का न्यायालय में जाना

 

31. धारा 44 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की स्वतंत्रता

b. न्यास के प्रशासन की निरंतरता

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

32. यदि कई न्यासी हों और एक की मृत्यु हो जाए, तो सामान्य स्थिति में शक्ति किसके पास रहेगी?

a. केवल न्यायालय के पास

b. सरकार के पास

c. शेष न्यासियों के पास

d. लाभार्थी के पास

 

33. धारा 44 के अनुसार न्यास की लिखत का क्या महत्व है?

a. वह न्यास समाप्त करती है

b. वह न्यासियों की शक्तियों को सीमित या निर्धारित कर सकती है

c. वह संपत्ति बेचने की अनुमति देती है

d. वह न्यायालय को अधिकार देती है

 

34. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 45 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यासी की शक्तियों का डिक्री द्वारा निलम्बन

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

35. धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियाँ कब सीमित हो जाती हैं?

a. जब लाभार्थी आदेश दे

b. जब न्यायालय द्वारा डिक्री दी जाए

c. जब सरकार आदेश दे

d. जब बैंक अनुमति दे

 

36. यदि न्यास के निष्पादन के लिए वाद में डिक्री दी जाती है, तो न्यासी क्या करेगा?

a. अपनी सभी शक्तियाँ स्वतंत्र रूप से प्रयोग करेगा

b. डिक्री के अनुसार ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा

c. न्यास समाप्त कर देगा

d. संपत्ति बेच देगा

 

37. धारा 45 के अनुसार न्यासी अपनी शक्तियों का प्रयोग कब कर सकता है?

a. जब न्यायालय अनुमति दे

b. जब डिक्री के अनुरूप हो

c. जब अपील न्यायालय अनुमति दे

d. उपरोक्त सभी

 

38. यदि डिक्री के विरुद्ध अपील लंबित हो, तो न्यासी किसकी अनुमति से शक्ति का प्रयोग कर सकता है?

a. जिला मजिस्ट्रेट

b. अपील न्यायालय

c. पुलिस अधिकारी

d. बैंक अधिकारी

 

39. धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियों का प्रयोग किसके अनुरूप होना चाहिए?

a. सरकार के आदेश

b. न्यायालय की डिक्री

c. बैंक के नियम

d. पंचायत के आदेश

 

40. यदि न्यासी डिक्री के विपरीत कार्य करता है, तो क्या होगा?

a. उसका कार्य वैध होगा

b. उसका कार्य अवैध माना जा सकता है

c. कोई प्रभाव नहीं होगा

d. संपत्ति स्वतः विक्रय हो जाएगी

 

41. धारा 45 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

b. न्यायालय के नियंत्रण का सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यास समाप्ति का सिद्धांत

 

42. धारा 45 के अनुसार न्यासी की शक्तियाँ किस स्थिति में निलम्बित मानी जाती हैं?

a. जब न्यायालय द्वारा डिक्री दी गई हो

b. जब लाभार्थी शिकायत करे

c. जब सरकार आदेश दे

d. जब बैंक अनुमति दे

 

43. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 46 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यासी प्रतिग्रहण कर लेने के पश्चात् त्याग नहीं कर सकता

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

44. धारा 46 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने न्यास स्वीकार कर लिया हो, तो क्या वह उसे त्याग सकता है?

a. हाँ, कभी भी

b. नहीं, बिना अनुमति के नहीं

c. केवल न्यायालय के आदेश से

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

45. धारा 46 के अनुसार न्यासी किन परिस्थितियों में न्यास का त्याग कर सकता है?

a. न्यायालय की अनुमति से

b. हिताधिकारी की सहमति से

c. न्यास की लिखत में दी गई शक्ति के आधार पर

d. उपरोक्त सभी

 

46. यदि हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हो, तो न्यासी किसकी अनुमति से त्याग कर सकता है?

a. सरकार

b. न्यायालय

c. हिताधिकारी

d. बैंक

 

47. धारा 46 के अनुसार यदि न्यासी त्याग करना चाहता है, तो उसे किस न्यायालय की अनुमति लेनी होगी?

a. सर्वोच्च न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय

d. जिला पंचायत

 

48. यदि न्यास की लिखत में विशेष शक्ति दी गई हो, तो क्या न्यासी त्याग कर सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

49. “प्रतिग्रहण” का अर्थ क्या है?

a. संपत्ति का विक्रय

b. न्यास को स्वीकार करना

c. संपत्ति का दान

d. संपत्ति का किराया

 

50. यदि न्यासी ने न्यास स्वीकार नहीं किया हो, तो क्या वह त्याग सकता है?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल लाभार्थी की अनुमति से

 

51. धारा 46 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

b. न्यासी की जिम्मेदारी और निरंतरता का सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

52. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 47 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यासी द्वारा प्रत्यायोजन

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

53. धारा 47 के अनुसार सामान्यतः न्यासी क्या नहीं कर सकता?

a. संपत्ति का प्रबंधन

b. अपने कर्तव्यों का प्रत्यायोजन

c. संपत्ति का विक्रय

d. आय का संग्रह

 

54. धारा 47 के अनुसार किन परिस्थितियों में प्रत्यायोजन किया जा सकता है?

a. जब न्यास की लिखत में प्रावधान हो

b. जब यह व्यापार के नियमित क्रम में हो

c. जब यह आवश्यक हो

d. उपरोक्त सभी

 

55. यदि हिताधिकारी संविदा करने के लिए सक्षम हो और वह प्रत्यायोजन से सहमत हो जाए, तो क्या प्रत्यायोजन किया जा सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

56. धारा 47 के अनुसार कौन सा कार्य प्रत्यायोजन नहीं माना जाएगा?

a. संपत्ति बेचने का अधिकार देना

b. अटर्नी या एजेंट नियुक्त करना केवल लिपिकीय कार्यों के लिए

c. संपत्ति का प्रबंधन देना

d. न्यास समाप्त करना

 

57. “लिपिकवर्गीय कार्य” का अर्थ क्या है?

a. ऐसा कार्य जिसमें स्वतंत्र विवेक की आवश्यकता न हो

b. ऐसा कार्य जिसमें न्यायिक निर्णय आवश्यक हो

c. ऐसा कार्य जिसमें संपत्ति बेचना हो

d. ऐसा कार्य जिसमें लाभार्थी का निर्णय हो

 

58. धारा 47 के अनुसार न्यासी किस सिद्धांत का पालन करता है?

a. प्रतिनिधि गैर शक्तिशाली प्रतिनिधि

b. पुनः न्याय

c. चेतावनी खाली करनेवाला

d. एक्टस नॉन फैसिट रेम निसी मेन्स सिट री

 

59. धारा 47 के अनुसार न्यासी किसके प्रति उत्तरदायी होता है?

a. केवल सरकार के प्रति

b. न्यायालय के प्रति

c. हिताधिकारी के प्रति

d. बैंक के प्रति

 

60. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 48 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. सहन्यासियों का संयुक्त कार्य

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

61. धारा 48 के अनुसार यदि एक से अधिक न्यासी हों, तो न्यास के निष्पादन में क्या आवश्यक है?

a. केवल एक न्यासी कार्य करेगा

b. सभी न्यासियों का सम्मिलित होना आवश्यक है

c. केवल न्यायालय कार्य करेगा

d. केवल लाभार्थी कार्य करेगा

 

62. धारा 48 के अनुसार सहन्यासी कब अकेले कार्य कर सकते हैं?

a. जब न्यायालय अनुमति दे

b. जब न्यास की लिखत में ऐसा प्रावधान हो

c. जब सरकार अनुमति दे

d. जब बैंक अनुमति दे

 

63. यदि न्यास की लिखत में विशेष प्रावधान न हो, तो न्यास के कार्य कैसे किए जाएंगे?

a. केवल एक न्यासी द्वारा

b. सभी न्यासियों द्वारा संयुक्त रूप से

c. न्यायालय द्वारा

d. लाभार्थी द्वारा

 

64. धारा 48 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत

b. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

c. न्यायालय की सर्वोच्चता

d. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

 

65. यदि एक सहन्यासी अकेले निर्णय ले ले, जबकि लिखत में अनुमति न हो, तो क्या हो सकता है?

a. निर्णय वैध होगा

b. निर्णय अवैध या अमान्य माना जा सकता है

c. कोई प्रभाव नहीं होगा

d. संपत्ति स्वतः विक्रय हो जाएगी

 

66. धारा 48 के अनुसार न्यास का निष्पादन किसके द्वारा किया जाता है?

a. केवल एक न्यासी

b. सभी सहन्यासियों द्वारा संयुक्त रूप से

c. केवल लाभार्थी

d. केवल न्यायालय

 

67. यदि न्यास की लिखत में यह लिखा हो कि एक न्यासी अकेले कार्य कर सकता है, तो क्या होगा?

a. यह अवैध होगा

b. वह अकेले कार्य कर सकता है

c. न्यायालय अनुमति देगा

d. न्यास समाप्त हो जाएगा

 

68. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 49 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. वैवेकिक शक्ति का नियंत्रण

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

69. धारा 49 के अनुसार यदि न्यासी अपनी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग सही ढंग से नहीं करता, तो क्या होगा?

a. कोई प्रभाव नहीं होगा

b. न्यायालय उस शक्ति को नियंत्रित कर सकता है

c. न्यास समाप्त हो जाएगा

d. संपत्ति सरकार को दे दी जाएगी

 

70. धारा 49 के अनुसार न्यायालय कब हस्तक्षेप कर सकता है?

a. जब न्यासी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग युक्तियुक्त और सद्भावपूर्वक न करे

b. जब लाभार्थी आदेश दे

c. जब सरकार आदेश दे

d. जब बैंक अनुमति दे

 

71. धारा 49 के अनुसार किस न्यायालय को ऐसी शक्ति को नियंत्रित करने का अधिकार है?

a. सर्वोच्च न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय

d. जिला पंचायत

 

72. “वैवेकिक शक्ति” का अर्थ क्या है?

a. ऐसी शक्ति जिसका प्रयोग न्यासी अपने विवेक से करता है

b. न्यायालय द्वारा दी गई शक्ति

c. सरकार द्वारा दी गई शक्ति

d. लाभार्थी द्वारा दी गई शक्ति

 

73. धारा 49 के अनुसार न्यायालय का हस्तक्षेप कब उचित है?

a. जब न्यासी सद्भावपूर्वक कार्य करे

b. जब न्यासी उचित और सद्भावपूर्ण तरीके से कार्य न करे

c. जब लाभार्थी अनुमति दे

d. जब सरकार आदेश दे

 

74. धारा 49 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

b. न्यायालय द्वारा नियंत्रण का सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यास समाप्ति का सिद्धांत

 

75. यदि न्यासी अपनी विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग सद्भावपूर्वक करता है, तो क्या न्यायालय हस्तक्षेप करेगा?

a. हाँ

b. नहीं

c. केवल सरकार की अनुमति से

d. केवल लाभार्थी की अनुमति से

 

76. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 50 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यासी सेवाओं के लिए प्रभार नहीं ले सकेगा

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

77. धारा 50 के अनुसार सामान्यतः न्यासी को किसका अधिकार नहीं होता?

a. संपत्ति बेचने का

b. न्यास के निष्पादन के लिए पारिश्रमिक लेने का

c. संपत्ति प्रबंध करने का

d. आय एकत्र करने का

 

78. धारा 50 के अनुसार न्यासी को पारिश्रमिक कब मिल सकता है?

a. जब न्यास की लिखत में ऐसा प्रावधान हो

b. जब हिताधिकारी के साथ ऐसा अनुबंध हो

c. जब न्यायालय अनुमति दे

d. उपरोक्त सभी

 

79. यदि न्यास की लिखत में पारिश्रमिक का प्रावधान न हो, तो न्यासी क्या करेगा?

a. पारिश्रमिक ले सकता है

b. पारिश्रमिक नहीं ले सकता

c. न्यायालय से मांग करेगा

d. सरकार से मांग करेगा

 

80. धारा 50 के अनुसार न्यासी किन सेवाओं के लिए पारिश्रमिक नहीं ले सकता?

a. अपने परिश्रम के लिए

b. अपने कौशल के लिए

c. अपने समय के लिए

d. उपरोक्त सभी

 

81. धारा 50 किस पर लागू नहीं होती?

a. निजी न्यासी

b. शासकीय न्यासी

c. महाप्रशासक

d. उपरोक्त सभी

 

82. धारा 50 के अनुसार निम्न में से कौन इस प्रावधान से मुक्त है?

a. लोक-रक्षक (Official Trustee)

b. महाप्रशासक

c. प्रशासन-प्रमाणपत्र रखने वाला व्यक्ति

d. उपरोक्त सभी

 

83. यदि हिताधिकारी के साथ विशेष संविदा हो, तो क्या न्यासी पारिश्रमिक ले सकता है?

a. नहीं

b. हाँ

c. केवल न्यायालय की अनुमति से

d. केवल सरकार की अनुमति से

 

84. धारा 50 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

b. न्यासी का निःस्वार्थ सेवा सिद्धांत

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

85. धारा 50 के अनुसार न्यासी की सेवा का मूल सिद्धांत क्या है?

a. लाभ कमाना

b. पारिश्रमिक लेना

c. विश्वास और निःस्वार्थ सेवा

d. संपत्ति बेचना

 

86. यदि न्यासी को पारिश्रमिक लेना हो, तो क्या आवश्यक है?

a. न्यास की लिखत में प्रावधान

b. हिताधिकारी के साथ संविदा

c. न्यायालय की अनुमति

d. उपरोक्त में से कोई

 

87. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 51 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यासी न्यास-सम्पत्ति को अपने लाभ के उपयोग में नहीं ला सकेगा

c. न्यास का पंजीकरण

d. न्यास का समाप्त होना

 

88. धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति का उपयोग किसके लिए नहीं कर सकता?

a. हिताधिकारी के लाभ के लिए

b. न्यास के उद्देश्यों के लिए

c. अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए

d. न्यायालय के आदेश के लिए

 

89. धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को किस प्रकार के प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं कर सकता?

a. न्यास से असंबंधित प्रयोजन

b. न्यास के उद्देश्यों के लिए

c. हिताधिकारी के लाभ के लिए

d. न्यायालय के आदेश के लिए

 

90. धारा 51 किस सिद्धांत को दर्शाती है?

a. न्यासी की पूर्ण स्वतंत्रता

b. Fiduciary duty (निष्ठा का सिद्धांत)

c. संपत्ति विक्रय का सिद्धांत

d. न्यायालय की सर्वोच्चता

 

91. यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति का व्यक्तिगत उपयोग करता है, तो यह क्या माना जाएगा?

a. वैध कार्य

b. न्यास-भंग

c. सामान्य प्रशासन

d. न्यायालय का आदेश

 

92. धारा 51 के अनुसार न्यासी किसके हित में कार्य करता है?

a. अपने हित में

b. सरकार के हित में

c. हिताधिकारी के हित में

d. बैंक के हित में

 

93. धारा 51 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को किस प्रकार उपयोग कर सकता है?

a. केवल न्यास के उद्देश्यों के लिए

b. व्यक्तिगत लाभ के लिए

c. किसी भी प्रयोजन के लिए

d. केवल बैंक में जमा करने के लिए

 

94. यदि न्यासी न्यास-सम्पत्ति को अपने लाभ के लिए उपयोग करे, तो क्या होगा?

a. कोई प्रभाव नहीं होगा

b. वह न्यास-भंग का दोषी होगा

c. न्यायालय उसे पुरस्कार देगा

d. न्यास समाप्त हो जाएगा

 

95. धारा 51 के अनुसार न्यासी का कर्तव्य क्या है?

a. न्यास-सम्पत्ति का संरक्षण करना

b. न्यास-सम्पत्ति को व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग न करना

c. हिताधिकारी के हित में कार्य करना

d. उपरोक्त सभी

 

96. विक्रयार्थ न्यासी या उसका अभिकर्ता खरीद नहीं सकेगा, किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 52

b. धारा 53

c. धारा 55

d. धारा 56

 

97. धारा 52 के अनुसार वह न्यासी जिसका कर्तव्य न्यास-सम्पत्ति को बेचना है, वह—

a. न्यास-सम्पत्ति खरीद सकता है

b. केवल लाभार्थी की अनुमति से खरीद सकता है

c. प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास-सम्पत्ति या उसमें का कोई हित नहीं खरीद सकता

d. केवल नीलामी में खरीद सकता है

 

98. धारा 52 के अनुसार विक्रय के प्रयोजनार्थ नियुक्त अभिकर्ता—

a. न्यास-सम्पत्ति खरीद सकता है

b. प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास-सम्पत्ति नहीं खरीद सकता

c. लाभार्थी की अनुमति से खरीद सकता है

d. केवल अपने नाम से खरीद सकता है

 

99. यदि न्यासी किसी अन्य व्यक्ति के नाम से न्यास-सम्पत्ति खरीदता है, तो यह माना जाएगा—

a. वैध क्रय

b. न्यायालय द्वारा स्वीकृत क्रय

c. परोक्ष क्रय

d. लाभार्थी का क्रय

 

100. धारा 52 के अनुसार न्यासी न्यास-सम्पत्ति को खरीद नहीं सकता—

a. केवल स्वयं के लिए

b. केवल प्रत्यक्ष रूप से

c. स्वयं के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के अभिकर्ता के रूप में

d. केवल लाभार्थी के लिए

 

101. धारा 52 का नियम मुख्यतः किस सिद्धांत पर आधारित है?

a. सद्भावना का सिद्धांत

b. हितों के टकराव को रोकने का सिद्धांत

c. संपत्ति हस्तांतरण का सिद्धांत

d. पंजीकरण का सिद्धांत

 

102. धारा 52 के अनुसार न्यासी द्वारा नियुक्त अभिकर्ता न्यास-सम्पत्ति—

a. केवल परोक्ष रूप से खरीद सकता है

b. केवल प्रत्यक्ष रूप से खरीद सकता है

c. प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी रूप में नहीं खरीद सकता

d. न्यायालय की अनुमति से खरीद सकता है

 

103. न्यासी हिताधिकारी का हित अनुज्ञा के बिना नहीं खरीद सकेगा, किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 51

b. धारा 52

c. धारा 53

d. धारा 54

 

104. धारा 53 के अनुसार कोई न्यासी न्यास-सम्पत्ति या उसका कोई भाग किसकी अनुज्ञा के बिना नहीं खरीद सकता?

a. लाभार्थी

b. न्यासकर्ता

c. आरम्भिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय

d. राज्य सरकार

 

105. धारा 53 के अनुसार न्यायालय की अनुज्ञा के बिना न्यासी न्यास-सम्पत्ति का—

a. केवल क्रय नहीं कर सकता

b. केवल पट्टा नहीं ले सकता

c. क्रय, बन्धकदार या पट्टेदार नहीं हो सकता

d. केवल बन्धक नहीं कर सकता

 

106. धारा 53 के अनुसार निम्न में से कौन न्यायालय की अनुमति के बिना न्यास-सम्पत्ति नहीं खरीद सकता?

a. केवल न्यासी

b. केवल वह व्यक्ति जिसका न्यासी रहना समाप्त हो गया हो

c. न्यासी तथा वह व्यक्ति जिसका न्यासी रहना हाल ही में समाप्त हुआ हो

d. केवल लाभार्थी

 

107. धारा 53 के अनुसार न्यायालय अनुज्ञा कब देगा?

a. जब न्यासी स्वयं लाभ कमाना चाहता हो

b. जब प्रस्तावित क्रय, बन्धक या पट्टा हिताधिकारी के स्पष्ट लाभार्थ हो

c. जब न्यासकर्ता अनुमति दे

d. जब सम्पत्ति का मूल्य कम हो

 

108. यदि न्यासी का कर्तव्य हिताधिकारी के लिए किसी विशिष्ट सम्पत्ति को खरीदना हो, तो वह—

a. स्वयं के लिए उसे खरीद सकता है

b. लाभार्थी की अनुमति से खरीद सकता है

c. स्वयं के लिए उसे या उसके किसी भाग को नहीं खरीद सकता

d. न्यायालय की अनुमति से खरीद सकता है

 

109. यदि न्यासी का कर्तव्य हिताधिकारी के लिए किसी सम्पत्ति का बन्धक या पट्टा प्राप्त करना हो, तो वह—

a. स्वयं के लिए उसे प्राप्त कर सकता है

b. लाभार्थी की अनुमति से प्राप्त कर सकता है

c. स्वयं के लिए बन्धक या पट्टा प्राप्त नहीं कर सकता

d. न्यायालय की अनुमति से प्राप्त कर सकता है

 

110. धारा 53 के अनुसार न्यायालय से अभिप्रेत है—

a. उच्च न्यायालय

b. सर्वोच्च न्यायालय

c. आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान सिविल न्यायालय

d. जिला मजिस्ट्रेट

 

111. भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 54 किससे संबंधित है?

a. न्यासी का पारिश्रमिक

b. न्यास-धन का अनुचित विनिधान

c. न्यासी द्वारा अपने हित में निवेश पर प्रतिबंध

d. न्यास का समाप्त होना

 

112. धारा 54 के अनुसार यदि किसी न्यासी का कर्तव्य बन्धक पर या वैयक्तिक प्रतिभूति पर न्यास-धन का विनिधान करना हो, तो वह—

a. अपने बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान कर सकता है

b. अपने सहन्यासी के बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान कर सकता है

c. अपने या अपने सहन्यासियों के बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान नहीं कर सकता

d. न्यायालय की अनुमति से कर सकता है

 

113. धारा 54 के अनुसार न्यासी न्यास-धन का विनिधान निम्न में से किस पर नहीं कर सकता?

a. अपने बन्धक पर

b. अपने सहन्यासी के बन्धक पर

c. अपनी वैयक्तिक प्रतिभूति पर

d. उपर्युक्त सभी

 

114. धारा 54 के अनुसार न्यासी न्यास-धन का विनिधान अपनी या अपने सहन्यासी की—

a. सम्पत्ति पर कर सकता है

b. वैयक्तिक प्रतिभूति पर नहीं कर सकता

c. लाभार्थी की अनुमति से कर सकता है

d. न्यायालय की अनुमति से कर सकता है

 

115. धारा 54 के अनुसार निम्न में से किस स्थिति में न्यासी न्यास-धन का विनिधान नहीं कर सकता?

a. जब बन्धक न्यासी द्वारा किया गया हो

b. जब बन्धक सहन्यासी द्वारा किया गया हो

c. जब प्रतिभूति न्यासी या सहन्यासी की हो

d. उपर्युक्त सभी

 

116. धारा 54 के अनुसार यदि न्यासी अपने सहन्यासी द्वारा किए गए बन्धक पर न्यास-धन का विनिधान करता है, तो यह—

a. वैध होगा

b. न्यायालय द्वारा अनुमन्य होगा

c. धारा 54 के विरुद्ध होगा

d. लाभार्थी की अनुमति से वैध होगा

 

117. भाटकों और लाभों का अधिकार, किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 54

b. धारा 55

c. धारा 56

d. धारा 57

 

118. धारा 55 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति के भाटक और लाभ पाने का अधिकार किसे होता है?

a. न्यासी

b. हिताधिकारी

c. न्यासकर्ता

d. न्यायालय

 

119. धारा 55 के अनुसार हिताधिकारी का भाटक और लाभ प्राप्त करने का अधिकार किसके अध्यधीन होता है?

a. न्यायालय के आदेश के

b. न्यासी की अनुमति के

c. न्यास की लिखत के उपबंधों के

d. राज्य सरकार के आदेश के

 

120. धारा 55 के अनुसार न्यास-सम्पत्ति से उत्पन्न भाटक और लाभ प्राप्त करने का प्राथमिक अधिकार—

a. न्यासी को होता है

b. हिताधिकारी को होता है

c. न्यासकर्ता को होता है

d. सरकार को होता है

 

121. यदि न्यास की लिखत में अन्यथा उपबंध न हो, तो न्यास-सम्पत्ति के लाभ का अधिकार—

a. न्यासी को होगा

b. हिताधिकारी को होगा

c. न्यासकर्ता को होगा

d. न्यायालय को होगा

 

122. धारा 55 के अनुसार हिताधिकारी को निम्न में से किसका अधिकार होता है?

a. न्यास-सम्पत्ति के प्रबंधन का

b. न्यास-सम्पत्ति के भाटक और लाभ का

c. न्यास-सम्पत्ति के विक्रय का

d. न्यास-सम्पत्ति के विनिवेश का

 

123. धारा 56 के अनुसार हिताधिकारी किस बात का विनिर्दिष्ट निष्पादन कराने का हकदार होता है?

a. न्यासी के आदेश का

b. न्यासकर्ता के आशय का

c. न्यायालय के आदेश का

d. सरकार के निर्देश का

 

124. धारा 56 के अनुसार हिताधिकारी विनिर्दिष्ट निष्पादन किस सीमा तक करा सकता है?

a. सम्पूर्ण न्यास के संबंध में

b. अपने हित के विस्तार तक

c. न्यासी के विवेक के अनुसार

d. न्यायालय की इच्छा के अनुसार

 

125. धारा 56 के अनुसार यदि केवल एक हिताधिकारी हो और वह संविदा करने के लिए सक्षम हो, तो वह न्यासी से क्या अपेक्षा कर सकता है?

a. न्यास-सम्पत्ति का विक्रय

b. न्यास-सम्पत्ति का अन्तरण उसके या उसके द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति के पक्ष में

c. न्यास का समापन

d. न्यास-सम्पत्ति का विभाजन

 

126. धारा 56 के अनुसार यदि कई हिताधिकारी हों और सभी संविदा करने के लिए सक्षम तथा एकमत हों, तो वे—

a. न्यासी को पद से हटा सकते हैं

b. न्यासी से न्यास-सम्पत्ति का अन्तरण अपने या अपने द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति के पक्ष में कराने की अपेक्षा कर सकते हैं

c. न्यास को समाप्त कर सकते हैं

d. न्यायालय से अनुमति ले सकते हैं

 

127. धारा 56 के अनुसार यदि सम्पत्ति किसी विवाहिता स्त्री के लाभ के लिए इस प्रकार अन्तरित की गई हो कि वह अपने हित से स्वयं को वंचित न कर सके, तो इस धारा का द्वितीय खंड—

a. सदैव लागू होगा

b. उसकी वैवाहिक स्थिति समाप्त होने तक लागू नहीं होगा

c. केवल न्यायालय की अनुमति से लागू होगा

d. आंशिक रूप से लागू होगा

 

128. धारा 56 के दृष्टांत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति न्यास-सम्पत्ति में अनन्य रूप से हितबद्ध हो और प्राप्तवय हो जाए, तो वह—

a. न्यासियों से सम्पत्ति के प्रबंधन की मांग कर सकता है

b. न्यासियों से सम्पूर्ण रकम तुरंत अन्तरित करने की अपेक्षा कर सकता है

c. न्यासियों को हटाने की मांग कर सकता है

d. केवल लाभ प्राप्त कर सकता है

 

129. धारा 56 के दृष्टांत के अनुसार यदि किसी हिताधिकारी के लिए न्यासियों को एक वार्षिकी खरीदने का निर्देश दिया गया हो, तो वह हिताधिकारी—

a. वार्षिकी ही प्राप्त करने के लिए बाध्य होगा

b. उस राशि का दावा कर सकता है जिससे वार्षिकी खरीदी जानी थी

c. न्यास को समाप्त नहीं कर सकता

d. केवल ब्याज प्राप्त कर सकता है

 

130. न्यास की लिखत, लेखाओं आदि का निरीक्षण करने और उनकी प्रतियां लेने का अधिकार, किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 51

b. धारा 53

c. धारा 55

d. धारा 57

 

131. धारा 57 के अनुसार न्यास की लिखत, लेखाओं आदि का निरीक्षण करने का अधिकार किसे होता है?

a. न्यासी

b. हिताधिकारी

c. न्यासकर्ता

d. न्यायालय

 

132. धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को निम्न में से किसका निरीक्षण करने का अधिकार है?

a. न्यास की लिखत

b. न्यास-सम्पत्ति से सम्बन्धित हक-दस्तावेज

c. न्यास-सम्पत्ति संबंधी लेखाएं और वाउचर

d. उपर्युक्त सभी

 

133. धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को निरीक्षण के साथ-साथ क्या अधिकार प्राप्त है?

a. दस्तावेजों को नष्ट करने का

b. दस्तावेजों को बदलने का

c. दस्तावेजों की प्रतियां लेने का

d. दस्तावेजों को बेचने का

 

134. धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को निरीक्षण का अधिकार किसके विरुद्ध प्राप्त होता है?

a. केवल न्यासी के विरुद्ध

b. केवल लाभार्थियों के विरुद्ध

c. न्यासी तथा उससे व्युत्पन्न अधिकार का दावा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध जिन्हें न्यास की सूचना हो

d. केवल न्यायालय के विरुद्ध

 

135. धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी किन लेखाओं का निरीक्षण कर सकता है?

a. केवल व्यक्तिगत लेखाओं का

b. केवल व्यापारिक लेखाओं का

c. न्यास-सम्पत्ति संबंधी लेखाओं का

d. सरकारी लेखाओं का

 

136. धारा 57 के अनुसार हिताधिकारी को उन रायों का भी निरीक्षण करने का अधिकार है—

a. जो न्यासी ने अपने कर्तव्य के निर्वहन में मार्गदर्शन के लिए प्राप्त की हों

b. जो न्यायालय ने दी हों

c. जो लाभार्थियों ने दी हों

d. जो सरकार ने दी हों

 

137. फायदाप्रद हित के अन्तरण का अधिकार, किस धारा से संबंधित है?

a. धारा 57

b. धारा 58

c. धारा 59

d. धारा 60

 

138. धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने फायदाप्रद हित का अन्तरण कब कर सकता है?

a. जब वह संविदा करने के लिए सक्षम हो

b. केवल न्यायालय की अनुमति से

c. केवल न्यासी की अनुमति से

d. किसी भी समय

 

139. धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने हित का अन्तरण किसके अध्यधीन कर सकता है?

a. न्यासी के आदेश के

b. उस समय प्रवृत्त विधि के

c. लाभार्थियों की अनुमति के

d. न्यायालय के विवेक के

 

140. धारा 58 के अनुसार हिताधिकारी अपने हित का अन्तरण—

a. पूर्ण रूप से स्वतंत्र होकर कर सकता है

b. केवल न्यायालय की अनुमति से कर सकता है

c. उस विधि के अधीन कर सकता है जो ऐसे हित के व्ययन के संबंध में प्रवृत्त हो

d. केवल न्यासी की अनुमति से कर सकता है